अरे भुला तुमने तो इस बुड़्याकाव मुझे भी जोश चढ़ा दिया ठहरा।
चलो मैं भी एक सुनाता हूँ फिर...
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तुमने क्या सोचा था कि नाम हम कमायेंगे
केवल व्हाई व्हाई कह कह कर इतिहास में जाने जायेंगे
मत राह हमारी तुम रोको, हम तूफान भी झेला करते हैं
तुम बातें करते काटों की, हम आग से खेला करते हैं
राजधानी गैरसैण ही, अब जनमानस की पुकार है
इस आन्दोलन के आगे अब, सरकार भी लाचार है
उत्तराखंड तो ले ही लिया, अब गैरसैण की बारी है
मत टकराना हमसे तुम, अपनी पूरी तैयारी है
तुम लाख करो व्हाई व्हाई, या चिल्ला लो जी भरकर भी
राजधानी तो गैरसैण ही, अब बनेगी मरकर भी
कई शहीद हुए पहले भी , कुछ और शहीद हो जायेंगे
लेकिन हम यह प्रण करते हैं, राजधानी वहीं बनायेंगे
तुम केवल उत्तराखंड के नाम को बेचा करते हो
उत्तराखंड प्रेमी होनी का, ढोंग ही केवल करते हो
तुम हवा-हवाई बातें करते, हम जमीन पर लड़ते हैं
हे सूट-बूट धारी सज्जन, हम तुमसे नहीं झगड़ते हैं
अब तो केवल ये ही रट है, राजधानी वहीं बनायेंगे
चाहे कोई कुछ भी कह ले, हम जंग जीत के आयेंगे।
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