Author Topic: Gairsain: Uttarakhand Capital - गैरसैण मुद्दा : अब यह चुप्पी तोड़नी ही होगी  (Read 175488 times)


Sunder Singh Negi/कुमाऊंनी

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श्री मान देव भूमी

आपके तकॅ और दृष्टि बिलकुल सही है.

कि गैरसैण कुमाउ और गढवाल के मध्य मे है.

ये जगह दोनो ही सीमाओ को टच करती है।

और बात रही आपके तकॅ की तो आपने जौसे कहा है कि?

देहरादून मे राजधानी होने की वजह से उसके आस पास के इलाको का भी विकास हुआ है
और लोग अपने ग्रामीण इलाको की जमीन बेचकर देहरादून मे जगह खरीद रहे है हालाकी यह दुखद है।


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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गैरसैण राजधानी होनी चाहिए या नहीं, इस पर काफी चर्चा देखने को मिल रही रही है. कोइ इसका समर्थन कर रहा है तो, कोई इसका विरोध. मैं भी गैरसैण का समर्थन करता हूँ.

Post from :

Subhash kandpal <sck_kandpal@yahoo.co.in

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गैरसैण राजधानी होनी चाहिए या नहीं, इस पर काफी चर्चा देखने को मिल रही रही है. कोइ इसका समर्थन कर रहा है तो, कोई इसका विरोध. मैं भी गैरसैण का समर्थन करता हूँ.  जो लोग गैरसैण को राजधानी बनाने का विरोध कर रहे है मैं ब्याक्तिगत रूप  से उन लोगों से पोछना चाहता हूँ कि आखिर क्या बारी है इसमे.   जो मेरे भाई बन्धु कह रहे है कि इसके अलावा भी हमारे पास बहुत सारे महत्वपुर्ण मुद्दे है चर्चा के लिए, जैसे शिक्षा, गरीबी, बिजली पानी, सड़क, चिकित्सा. निश्चित रोप से ये बहुत ही गंभीर विषय है उत्तराखंड के विकास के लिए लेकिन मैं आप सभी लोगों से पूछना चाहता हूँ कि यदि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से गैरसैण स्थानांतरित की जाती है तो क्या ये सभी विकास रुक जायेगे?,  देहरादून को राजधानी के रूप में 10 साल का समय हो गया है. आप उत्तराखंड का विकास किस रोप में देखते है? क्या केवल शहरी इलाकों का विकास ही उत्तराखंड का विकास माना जायेगा? देहरादून आज विकसित हो रहा तो, इसका मतलब ये है कि पूरा उत्तराखंड विकास कर रहा है. उत्तराखंड निर्माण से १० वर्ष पहले के देहरादून और आज वर्तमान के देहरादून में तुलना कीजिये. राजधानी बनने से पहले उसका रोप क्या था और आज क्या है.
जो लोग ये कह रहे है कि ये मूर्खता वाला विषय है, सोच है, तो मैं सर्वप्रथम उन लोगों से कहना चाहता हूँ कि उत्तराखंड राज्य निर्माण करने का आन्दोलन जिस मुद्दे पर लड़ा गया था उसमे गैरसैण का मुद्दा सबसे ऊपर था, तो आप लोगों के अनुसार उन आन्दोलनकारियों कि सोच गलत थी, या उनका सोचना गलत था, या उनकी मानसिकता गलत थी? जिन्होंने अपने जीवन का बलिदान दिया हमने उनकी सोच को ही गलत नकार दिया. मैं आप लोगों से पूछना चाहता हूँ कि हम में से कितने लोगों ने उत्तराखंड राज्य आन्दोलन में भाग लिया? कितने लोगों ने मुजफरनगर- खटीमा में कांड में पुलिस की गोलिया खाई ? कितने लोगों ने पुलिस के डंडे खाए? कितने लोग भूख हरताल पर बैठे? मुझे नहीं लगता है कि हम से कोई भी लोग इस आन्दोलन का हिस्सा बना हो और जो इसका भुक्तभोगी होगा शायद वो कभी भी मन नहीं करेगा.
गैरसैण को राजधानी बनाने का उधेध्य विकास से ही है. सर्वप्रथम तो गैरसैण उत्तराखंड के केंद्र में बसा हुआ है. राजधानी शब्द का मूल ही केद्र है. गैरसैण की सीमा उत्तराखंड के दोनों क्षेत्रों को टच करती है गढ़वाल क्षेत्र को भी और कुमाओं. कहने का मतलब ये है कि दोनों क्षेत्र के लिए ये सबसे नजदीकी बिंदु है.
दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा है विकास का. आज अगर देहरादून का कुछ विकास हुआ है तो उसमे राजधानी का भी अपना एक अमूल्य योगदान है. राजधानी बनने के बाद देहरादून का चहुमुखी विकास हुआ है. ये  आप सभी लोग जानते है. अगर राजधानी को गैरसैण बनाया जाता है तो उत्तराखंड के शहरी क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कि भी सम्भावना भी बढ़ सकती है.  जिस गति से राजधानी बनने के बाद देहरादून और उसके आस पास के इलाकों का विकास हुआ, शायद उसी गति से उत्तराखंड के अन्य पहाडी क्षेत्रों का विकास हो सकता है.
मैं ज्यादा विस्तार में ना जाकर ये कहना चाहता हूँ कि यदि राजधानी के नाम पर देहरादून का विकास हो सकता है तो राजधानी के नाम पर गैरसैण का विकास भी हो सकता है और अगर गैरसैण का विकास होता है तो इसका मतलब ग्रामीण क्षेत्रों का भी विकास हो सकता है. आज बहुत सारे लोगों ने अपने खेत खलिहान बेचकर देहरादून या उसके आस पास के क्षेत्रों में जमीन जायदाद लेकर बस गए है, क्यों?, क्यों पहाड़ के गाँव खली हो रहे है और पहाड़ के शहरी क्षेत्रों में भीड़ बढ़ रही है? इसका उत्तर शायद आप लोग मुझसे ज्यादा अछि तरह बता सकते है.
 
जो भाई बहिन ये कह रहे है कि राजधानी को बदलने से विकास रुक जायेगा, मेरी दृष्टि में बिलकुल ऐसा नहीं है, फर्क है केवल सोच की.  सच तो ये है कि आज ग्रामीण क्षेत्रों की ओर कोई नहीं जाना चाहता है. लोग कह रहे है कि उत्तराखंड से पलायन हो रहा है, मैं तो ये कहता हूँ कि उत्तराखंड का उत्तराखंड से उत्तराखंड में पलायन हो रहा है, कही और नहीं, फर्क सिर्फ इतना है कि उत्तराखंड का ग्रामीण क्षेत्रों से उत्तराखंड के शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन हो रहा है और इस बात को कोई नहीं समझ रहा है और या समझने की कोशिश ही नहीं कर रहे है. 
 
ये मेरी अपनी सोच है.
 
आपका अपना बन्धु
सुभाष काण्डपाल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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From: Darshan Singh <negids45@gmail.com>

दोस्तों,
काफी समय से चर्चा का विषय रहा है कि उत्तराखंड राज्य की राजधानी कहाँ हो.
बहुत सी चर्चाओ को एक तरफ रखते हुए मेरी व्यक्तिगत सोच है कि यदि इतने संघर्ष के बाद हमारे जुझारू लोग हमें
उत्तराखंड राज्य का दर्जा दिला पाये है और यदि हमें उन लोगों कि सोच को सम्मान करना है और राज्य को विकास की ओर अग्रसित करना है तो गैरिसैन को ही राजधानी के रूप में विक्सित होना ही चाहिए. तुंरत यदि सरकारी तंत्र इस संबध में कार्य कर पायें और हमारे बिधायक भी इस सोच में जनता और जनता के प्रतिनिधियौं का साथ दे और राज्य के चहुमुखी विकास में इस सोच का साथ दे .
जय उत्तराखंड
दर्शन सिंह नेगी
अबुधाबी (यु ए इ )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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From: Anil Pandey <oneelpandey@ yahoo.com>
 
Advantange of making  as Capital city :
 
 Roads upto Gairsain from Gharwal and Kumaoun region will become better.
This will increase more tourism and will add more economic activities and business activities in the hilly region(uttarakhand) .
Hence awareness will increase among local people and they will be exposed to better standars of livlihood.
There will come up another big city /town in uttarakhand which will generate more employment, opportuinities, educational infrastructure, health care centers.
Consumption of commodities in that zone will increase which will help the locals to enter into enterpreneurship, Hoticulture and agriculture upgradation.
A zone which is at almost zero level of development will shine up as developing area and many of our brothers and sisters will get benefitted in term of employment , economic upliftment.
 
Regards
 
 

Devbhoomi,Uttarakhand

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राजधानी के नाम पर लोगो का ध्यान मुख्य समस्याओ से हटाकर उन्हें भावनात्मक और क्षेत्रीय  वाद मैं उलझाकर अपना उल्लू सीधा करना ही इन राजनेताओ का काम हैं!
 और ये लोग जनता की भावनाओ को भड़काकर उन्हें इस्तेमाल कर रहे हैं , ताकि लोगो का ध्यान मुख्य समस्याओ से हटा  कर सिर्फ राजधानी के प्रस्ताव और आपस मैं लड़ते रहे , जनता अभी भी इनका मतलब नहीं समझ पाई हैं की ये लोग जनता का शोषण कर रहे हैं राजधानी के गैरशेन  और देहरादून के नाम पर ब्लैक मेल कर रहे हैं , लोगो की भावनाओ के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं .
 अगर अभी भी उत्तरखंड की जनता इन राजनेताओ की चाल को नहीं समझ पाई तो फिर उत्तराखंड का विकास और २० साल तक संभव नहीं हैं ,लोगो को जागरूक होना होगा और इन सब राजधानी के चक्करों मैं न पड़ कर विकास के कार्यो को करने के लिए अपने क्षेत्रीय नेताओ पर दवाव डालना होगा ,राजधानी कही भी बने किसी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता हैं

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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There are several members on E-mail groups, who must not be knowing about this Hero, who sacrified his life for sake of Uttarakhand State Struggle.

Nirmal Pandit



कमल

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Re: Gairsain: Uttarakhand Capital -UPDATES FROM GAIRSAIN
« Reply #187 on: August 30, 2009, 07:42:48 AM »
जैसा कि आपको मालूम है कि गैरसैण मुद्दे पर कई लोग दिल्ली से गैरसैण यात्रा पर गये हैं। कल 29 अगस्त 2009 को उन्होनें क्या क्या किया उसी का लेखा जोखा प्रस्तुत है।

कल टीम पहले चौखुटिया पहुँची वहाँ पर उन्होंने एक कैरियर गाइडेंस कैम्प में हिस्सा लिया और छात्रों को रोजगार संबंधी कई जानाकारियाँ दीं। कल उत्तराखंड क्रांति दल की एक चौखुटिया में एक बैठक भी थी। हमारे साथी वहाँ पहुँचे और उन्होंने उक्रांद के नेताओं से गैरसैण मुद्दे पर अपनी नीति स्पष्ट करने को कहा। उक्रंद नेता श्री काशी सिंह ऐरी ने उन्हें शाम को बैठक में आमंत्रित किया। उसके बाद टीम गैरसैँण पहुँची और वहाँ स्थानीय लोगों से बातचीत की। स्थानीय लोग पूरी तरह राजधानी के पक्ष में हैं। वहीं कई ऐसे लोग भी थे जिन्होंने उत्तराखंड राज्य प्राप्ति आन्दोलने में भी बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था। उनका कहना था सरकार नें पूर्व-प्रस्तावित राजधानी गैरसैण को ना बनाकर लोगों के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है। उसके बाद गैरसैण में एक जुलूस निकाल गया जिसमें कई लोगों ने भाग लिया। कई लोगो ने अपने विचार भी रखे।

उसके बाद टीम दो भागों में बँट गयी एक दल द्वराहाट में दूसरा कैरियर गाइडेंस कैम्प आयोजित करने के लिये निकला और दूसरा चौखुटिया में उक्रांद के नेताओं से बात करने के लिये निकला।

आज टीम द्वराहाट में रहेगी और एक कार्यक्रम में ऋषि बल्लभ सुंदरियाल जी के पोस्टर का विमोचन किया जायेगा और उत्तराखंड में चकबंदी व्यवस्था पर आधारित 62 पृष्ठों की एक पुस्तिका का विमोचन भी होगा।उसके बाद टीम दिल्ली व अन्य स्थानों के लिये रवाना होगी।

कमल

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प्रात: 9.50 बजे

पूरा दल अभी दूनागिरी मंदिर के दर्शन के लिये गया है। श्री विपिन त्रिपाठी जी को श्रद्धांजली वाला कार्यक्रम 11 बजे से प्रारम्भ होगा।

Morning : 9.50 AM

Whole Team is in Dunagiri Temple. Program "A Tribute to Shri Vipin Tripathi ji" will start at 11.00 AM.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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I had just  had a word with Charu Da who told me that the programme was quite successful and they got huge response from the people there.

This is a indication to Govt that they will have to meet this long outstanding demands of people of Uttarkahand. There should not be more politics on this.

 


जैसा कि आपको मालूम है कि गैरसैण मुद्दे पर कई लोग दिल्ली से गैरसैण यात्रा पर गये हैं। कल 29 अगस्त 2009 को उन्होनें क्या क्या किया उसी का लेखा जोखा प्रस्तुत है।

कल टीम पहले चौखुटिया पहुँची वहाँ पर उन्होंने एक कैरियर गाइडेंस कैम्प में हिस्सा लिया और छात्रों को रोजगार संबंधी कई जानाकारियाँ दीं। कल उत्तराखंड क्रांति दल की एक चौखुटिया में एक बैठक भी थी। हमारे साथी वहाँ पहुँचे और उन्होंने उक्रांद के नेताओं से गैरसैण मुद्दे पर अपनी नीति स्पष्ट करने को कहा। उक्रंद नेता श्री काशी सिंह ऐरी ने उन्हें शाम को बैठक में आमंत्रित किया। उसके बाद टीम गैरसैँण पहुँची और वहाँ स्थानीय लोगों से बातचीत की। स्थानीय लोग पूरी तरह राजधानी के पक्ष में हैं। वहीं कई ऐसे लोग भी थे जिन्होंने उत्तराखंड राज्य प्राप्ति आन्दोलने में भी बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था। उनका कहना था सरकार नें पूर्व-प्रस्तावित राजधानी गैरसैण को ना बनाकर लोगों के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है। उसके बाद गैरसैण में एक जुलूस निकाल गया जिसमें कई लोगों ने भाग लिया। कई लोगो ने अपने विचार भी रखे।

उसके बाद टीम दो भागों में बँट गयी एक दल द्वराहाट में दूसरा कैरियर गाइडेंस कैम्प आयोजित करने के लिये निकला और दूसरा चौखुटिया में उक्रांद के नेताओं से बात करने के लिये निकला।

आज टीम द्वराहाट में रहेगी और एक कार्यक्रम में ऋषि बल्लभ सुंदरियाल जी के पोस्टर का विमोचन किया जायेगा और उत्तराखंड में चकबंदी व्यवस्था पर आधारित 62 पृष्ठों की एक पुस्तिका का विमोचन भी होगा।उसके बाद टीम दिल्ली व अन्य स्थानों के लिये रवाना होगी।

 

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