Author Topic: History of Haridwar , Uttrakhnad ; हरिद्वार उत्तराखंड का इतिहास  (Read 64438 times)

Bhishma Kukreti

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                  History of Alexander & Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur -2

                     सिकंदर का भारत पर आक्रमण और हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास

                 Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur  Part  -95     

                         
                     हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -95                     


                                               इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती

                                       आयुधजीवियों की आहुति
 
  पोरस नरेश की सहायता से सिकंदर ने चिनावपूर्वी प्रदेशो को  जीता।
जब सिकंदर पूर्व की और बढ़ने लगा तो अरट्ट अथवा अराष्ट्रगण ने आधीनता स्वीकार कर ली।  किन्तु कठगण ने  अपने दुर्ग संगल (जंडियाला ) में शरण ले सिकंदर से लोहा लिया और सत्रह हजार कठ सैनिकों को शहीद होना पड़ा और इतने ही को कैद होना पड़ा।  पोरसंरेश ने सिकदंर को सहायता दी। 
  इसके बाद पड़ोसी   देस सोफ़ेतेस (सौभूति ) व फेगेलस (भगला ) नरेशों को भी अधीनता स्वीकार करनी पड़ी।
      इसके बाद सिकंदर ने अपने सैनिकों को व्यास नदी को पर कर नन्द नरेश पर आक्रमण की आज्ञा दी किन्तु सैनिकों ने डर कर आक्रमण से सर्वथा विद्रोह कर ही दिया था तो सिकंदर को 326 BC को वापस लौटने का आदेश देना पड़ा।
       वापस जाते हुए उसने कई नए क्षेत्रों को दबाने की चेष्टा की जिसमे हजारों ब्राह्मणो , क्षत्रियों व हरिजनों को युद्ध में आहुति देनी पड़ी
                                               सिकंदर गंगाघाटी तक ?
यूनानी लेखकों के लेखों पर आधरित कुछ इतिहासकार मानते हैं की सिकंदर गंगाघाटी या हिमाचल तक पंहुचा।  किन्तु अधिकतर इतिहासकार मानते हैं कि    वर्तमान गुरदासपुर से आगे सिकंदर नही बढ़ सका।
 सिकंदर की मृत्यु 323 BC में हुयी। भारत से लौटते वक्त सिकंदर  यूनानी प्रतिनिधि रख छोड़े थे।

                                                   यूनानी शासन का अंत

                 सिकंदर के समय  पंजाब के ब्राह्मणो ने यूनानी  विरोध किया था।  यूनानी सेना के जाने  के बाद ब्राह्मणो  को यूनानी शासन के प्रतिनिधियों को भगाने हेतु   हथियार उठाने को प्रेरित किया।  321 BC सिकंदर के प्रान्त प्रतिनिधि फिलिप्स की हत्या की सूचना से पुरे क्षेत्र से यूनानी सेना भागने लगी।  चन्द्रगुप्त  चाणक्य ने स्थिति से लाभ उठाया और इस संघर्ष के नायक बन बैठे।  317   BC में पोरसंरेश की  दी गयी।  दो तीन वर्षों में ही चन्द्रगुप्त और चाणक्य यूनानी सत्ता को उखाड़ने में सफल हो गए थे।         
                                 
                       

 ** संदर्भ - ---
वैदिक इंडेक्स
डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२
राहुल -ऋग्वेदिक आर्य
मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज
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   History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  to be continued Part  --

 हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास  to be continued -भाग -
      History of Alexander & Ancient History of Kankhal, Haridwar, Uttarakhand ;   Ancient History of Har ki Paidi Haridwar, Uttarakhand ;  History of Alexander & Ancient History of Jwalapur Haridwar, Uttarakhand ;  History of Alexander &Ancient  History of Telpura Haridwar, Uttarakhand ;  History of Alexander &Ancient  History of Sakrauda Haridwar, Uttarakhand ;  History of Alexander &Ancient  History of Bhagwanpur Haridwar, Uttarakhand ; History of Alexander & Ancient   History of Roorkee, Haridwar, Uttarakhand ; History of Alexander &   Ancient  History of Jhabarera Haridwar, Uttarakhand ;  History of Alexander &   Ancient History of Manglaur Haridwar, Uttarakhand ;  History of Alexander &  Ancient History of Laksar; Haridwar, Uttarakhand ;  Ancient History of Sultanpur,  Haridwar, Uttarakhand ;  History of Alexander &  Ancient  History of Pathri Haridwar, Uttarakhand ; History of Alexander &    Ancient History of Landhaur Haridwar, Uttarakhand ;   Ancient History of Bahdarabad, Uttarakhand ; Haridwar;    History of Alexander &  History of Narsan Haridwar, Uttarakhand ;   History of Alexander &  Ancient History of Bijnor;  Ancient  History of Nazibabad Bijnor ;  History of Alexander &   Ancient History of Saharanpur;  Ancient  History of Nakur , Saharanpur; History of Alexander &   Ancient   History of Deoband, Saharanpur; History of Alexander &   Ancient History of Badhsharbaugh , Saharanpur;  History of Alexander &  Ancient Saharanpur History, Ancient Bijnor History;
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                    Chandragupta and Chanakya Consolidating Armed Forces

                         हरिद्वार  ,  बिजनौर   , सहारनपुर   इतिहास  संदर्भ में चन्द्रगुप्त -चाणक्य का सैन्यसंग्रह व मगध विजय

                 Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur  Part  -  96   
                         
                     हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग - 96                   


                                               इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती
                                 गुरु शिष्य की ख्याति में फैलाव
         यूनानी सेना को भगाने से पंजाब आदि क्षेत्र में चाणक्य व चन्द्रगुप्त की गुर शिष्य में ख्याति फ़ैल गयी। युवक उनके संकेत पर कार्य करने को तत्पर थे।  नन्द वंश से घृणा का लाभ उठाकर दोनों ने नन्द राज्य को जितनी की योजना बनाई।                                 
                                  चन्द्रगुप्त -चाणक्य द्वारा सैन्य संग्रह

 नन्द सेना से जीतना टेढ़ी खीर थी अतः चाणक्य ने एक सुरक्षित व शिक्षित सेना तैयार करने की योजना बनाई।
                      पर्वताश्रयी आयुधजीवी सैनिक
 मुद्राराक्षस नाटक से पता चलता है कि चाणक्य -चन्द्रगुप्त ने पर्वताश्रयी सैनिकों को अपनी सेना में भर्ती किया और पश्चिम हिमालय के म्लेच्छ , किरात , दस्युदल , आटविक पुरुषों से सेना को सुसज्जित किया और फिर खश , शक , हूण , कौलूत , चेदि व मगध के सैनिक भी इनकी सेना में लिए गए।
                     मगध विजय
 सेना संग्रह के बाद चन्द्रगुप्त -चाणक्य ने  छै लाख सैनिकों को लेकर विभिन्न क्षेत्रों को मिलते हुए पाटलिपुत्र पर  आक्रमण किया और फिर मगध को जीतकर नन्द वंश का खात्मा किया जिसमे मगध के राजद्रोहियों ने भी चाणक्य का साथ दिया।
                 साम्राज्य विस्तार
  चन्द्रगुप्त मौर्य का साम्राज्य उत्तराखंड , पांचाल   [रुहेलखण्ड ], कौशल , मगध, शूरसेन , रुहेलखण्ड आदि से लेकर पूर्वी सागर से लेकर पश्चमी सागर , सिंधुस्तान , कंधार तक फैला था।
इसका अर्थ है कि उत्तराखंड , हरिद्वार, बिजनौर , सहारनपुर के स्थानीय क्षत्रपों ने चन्द्रगुप्त मौर्य की आधीनता  स्वीकार कर ली थी।  उस समय क्षत्रप आधीनता स्वीकार    थे और वास्तविक राज्याधिकार क्षत्रपों के पास  रहता था । 
मौर्य साम्राज्य का व्यापारिक मार्गों पर भी अधिकार हो गया था।  याने गोविषाण (काशीपुर ) बिजनौर , हरिद्वार -कालसी  , मथुरा व्यापारिक मार्ग पर मौर्य साम्राज्य का अधिकार था।   

 ** संदर्भ - ---वैदिक इंडेक्स डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२ राहुल -ऋग्वेदिक आर्य मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज
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   History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  to be continued Part  --
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                      Chandragupta  Maurya  Administration in context History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur

                          हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास संदर्भ में चन्द्रगुप्त प्रशासन
                              Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur  Part  -  97   
                         
                                   हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  97                   


                                                                     इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती
                                                            चाणक्य व कौटिल्य
                           
          ऐसा कहा जाता है कि चाणक्य ने मौर्य प्रशासन सुव्यवस्थित करने हेतु चन्द्रगुप्त का आमात्य बनना स्वीकार किया था।  चाणक्य ने चन्द्रगुप्त व अन्य शाशकों की शिक्षा हेतु 'अर्थशास्त्र ' की रचना की। कौटिल्य रचित 'अर्थशास्त्र ' चाणक्य की रचना है या नही इस पर इतिहासकारों म ेमतभेद है।  किन्तु अधिकतर माना गया है कि 'अर्थशास्त्र ' का रचनाकाल चन्द्रगुप्त के शासनकाल का है।
                                                      मौर्य शासन प्रबंध
यूनानी राजदूत मेगस्थनीज के लेखों व  'अर्थशास्त्र' से मौर्य शासन प्रणाली का वर्णन है।
             चन्द्रगुप्त मौर्य का शाशन संभवतया चार या पांच प्रांतों में विभाजित था और उनका केंद्र थे -
तक्षशिला
उज्जैन
सुवर्णगिरि
तोसली
पाटलिपुत्र
           यमुना  का पूर्वी प्रदेश का शासन पाटलिपुत्र से होता रहा होगा।
        उपराजा या महामात्र स्थानीय राजा होते थे।
स्वायता का बोलबाला था।  विभिन्न जनपदों में स्थानीय परम्पराओं , धार्मिक व सामाजिक जीवन बिताने की स्वतंत्रता थी।

                        कुलिंद जनपद के विभागीय  महामात्र

अंदाज लगाया जा सकता है कि कुलिंद जनपद में निम्न उपराजा या महामात्र थे -
तामस
कालकूट
तंगण
भारद्वाज
रंकु
आत्रेय
बिजनौर संभवतया पांचाल या कुलिंद के भारद्वाज का भाग रहा होगा।

          पाखंड पर प्रतिबंध

 चननकय ने पाखंड पर प्रतिबंध लगवाया था।

           पर्वतवासी आयुधजीवी
पर्वतवासी आयुधजीवियों की विश्सनीयता पर कोई शंका नही होती थी इससे अंदाज लगाया जा सकता कि चन्द्रगुप्त के राज में उत्तराखंड , हरिद्वार, बिजनौर , सहारनपुर के सैनिकों का महत्व था।


 ** संदर्भ - ---वैदिक इंडेक्स डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२ राहुल -ऋग्वेदिक आर्य मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज
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   History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  to be continued Part  --
 हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास  to be continued -भाग -      Chandragupta  Maurya  Administration Ancient History of Kankhal, Haridwar, Uttarakhand ; Chandragupta  Maurya  Administration  Ancient History of Har ki Paidi Haridwar, Uttarakhand ; Chandragupta  Maurya  Administration Ancient History of Jwalapur Haridwar, Uttarakhand ;  Chandragupta  Maurya  Administration Ancient  History of Telpura Haridwar, Uttarakhand ;Chandragupta  Maurya  Administration  Ancient  History of Sakrauda Haridwar, Uttarakhand ;Chandragupta  Maurya  Administration  Ancient  History of Bhagwanpur Haridwar, Uttarakhand ; Ancient   History of Roorkee, Haridwar, Uttarakhand ;  Ancient  History of Jhabarera Haridwar, Uttarakhand ;   Ancient History of Manglaur Haridwar, Uttarakhand ;   AncientHistory of Laksar; Haridwar, Uttarakhand ;Chandragupta  Maurya  Administration  Ancient History of Sultanpur,  Haridwar, Uttarakhand ;  Ancient  History of Pathri Haridwar, Uttarakhand ;    Ancient History of Landhaur Haridwar, Uttarakhand ;   Chandragupta  Maurya  AdministrationAncient History of Bahdarabad, Uttarakhand ; Haridwar;    History of Narsan Haridwar, Uttarakhand ;  Chandragupta  Maurya  Administration Ancient History of Bijnor;  Ancient  History of Nazibabad Bijnor ; Chandragupta  Maurya  Administration   Ancient History of Saharanpur; Chandragupta  Maurya  Administration Ancient  History of Nakur , Saharanpur; Chandragupta  Maurya  Administration Ancient   History of Deoband, Saharanpur; Ancient  Ancient History of Badhsharbaugh , Saharanpur;Ancient Saharanpur History, Ancient Bijnor History;
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                      Forest Produces of Haridwar,  Bijnor,   Saharanpur in Chandragupta Maurya Period
                       मौर्यकालीन हरिद्वार  ,  बिजनौर   , सहारनपुर   इतिहास संदर्भ में वन्य  उत्पादन


               Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur  Part  - 98     
                         
                     हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -98                     


                                               इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती

        कौटिल्य ने निम्न वन उत्पादनों का विवरण दिया है जो अवश्य  ही हरिद्वार, बिजनौर व सहारनपुर के वनों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थे।
दारु /फर्नीचर काष्ठ - शाल , शीशम , भवन निर्माण हेतु
वेणु - बांस व अन्य बांस की प्रजातियां
बल्ली - बेंट आदि से टोकरियाँ आदि बनतीं थीं
छाल - विभिन वनस्पतियों की छालें कई प्रकार के उपकरण निर्माण हेतु व दवाइयों में भी। जैसे सेमल , भांग आदि
रेशे - बाबड़ , मालू आदि
पत्तियां - ढाक  , मालू , बेडू , तिम्लु के पत्तों से बर्तन व मकान बनाने हेतु
फूल - कई प्रकार के फूल जो औषधि व रंग निर्माण हेतु
कंद मूल - भोजन व औषधि हेतु
विष - कई वनस्पति विष बनाने हेतु प्रयोग होते थे
विविध - अन्य कार्य हेतुं
        भाभर में मंडी
पहाड़ों से वनस्पति उत्पाद को मैदानों में बेचने व मैदानी उत्पाद को पहाड़ों में बेचने के लिए हरिद्वार , बिना , सहरनपुर में मदनियाँ थीं या व्यपारी थे। 


 ** संदर्भ - ---वैदिक इंडेक्स डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२ राहुल -ऋग्वेदिक आर्य मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज
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मुखर्जी  चन्द्रगुप्त ऐंड हिज टाइम्स Copyright@ Bhishma Kukreti  Mumbai, India 11/4/2015

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                    Emperor Bindusara and History of Haridwar, Bijnor and Saharanpur
   
                हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  संदर्भ में सम्राट बिन्दुसार मौर्य


                 Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur  Part  - 99     
                         
                     हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -99                     


                                               इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती
बिन्दुसार मौर्य (320 -272 BC ) चन्द्रगुप्त मौर्य का पुत्र था। जब या तो चन्द्रगुप्त ने शरीर त्याग दिया था या जैन धर्म अपना लिया ठान तो 297 /298 BC में बिन्दुसार मौर्य सिंघासन पर बैठा।  बिन्दुसार ने दक्षिण के कुछ राज्य जीते थे [मुखर्जी , चन्द्रगुप्त मौर्य ऐंड हिज टाइम्स ] । बिन्दुसार के दक्षिण में रुच देख या आमोद प्रमोद में होने से दूरस्थ राजाओं ने मौर्य साम्राज्य विरुद्ध विरोध किया।  ऐसा लगता है कि उत्तराखंड , हरिद्वार , बिजनौर व सहारनपुर के क्षत्रपों ने भी विरोध बिगुल बजाया था।  यही कारण है कि अशोक को तकक्षिला विरोध दमन के बाद मंदाकिनी के श्वस् या खस राजा  विद्रोह शांत करने आना पड़ा था [अग्रवाल , मार्कण्डेय पुराण का सांस्कृतिक अध्ययन ]  ।
       


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 हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास  to be continued -भाग -      Emperor Bindusara &   Ancient History of Kankhal, Haridwar, Uttarakhand ; Emperor Bindusara &  Ancient History of Har ki Paidi Haridwar, Uttarakhand ;Emperor Bindusara & Ancient History of Jwalapur Haridwar, Uttarakhand ; Emperor Bindusara & Ancient  History of Telpura Haridwar, Uttarakhand ;Emperor Bindusara &  Ancient  History of Sakrauda Haridwar, Uttarakhand ;  Emperor Bindusara & Ancient  History of Bhagwanpur Haridwar, Uttarakhand ; Emperor Bindusara &  Ancient   History of Roorkee, Haridwar, Uttarakhand ;Emperor Bindusara &   Ancient  History of Jhabarera Haridwar, Uttarakhand ;   Ancient History of Manglaur Haridwar, Uttarakhand ; Emperor Bindusara &   Ancient History of Laksar; Haridwar, Uttarakhand ;  Ancient History of Sultanpur,  Haridwar, Uttarakhand ;Emperor Bindusara &  Ancient  History of Pathri Haridwar, Uttarakhand ;    Ancient History of Landhaur Haridwar, Uttarakhand ;   Ancient History of Bahdarabad, Uttarakhand ; Haridwar;   Emperor Bindusara & History of Narsan Haridwar, Uttarakhand ; Emperor Bindusara &  Ancient History of Bijnor;  Ancient  History of Nazibabad Bijnor ; Emperor Bindusara &   Ancient History of Saharanpur;Emperor Bindusara & Ancient  History of Nakur , Saharanpur; Emperor Bindusara & Ancient   History of Deoband, Saharanpur; Ancient  Ancient History of Badhsharbaugh , Saharanpur;Emperor Bindusara &   Ancient Saharanpur History, Emperor Bindusara & Ancient Bijnor History;
कनखल , हरिद्वार का इतिहास ; तेलपुरा , हरिद्वार का इतिहास ; सकरौदा ,  हरिद्वार का इतिहास ; भगवानपुर , हरिद्वार का इतिहास ;रुड़की ,हरिद्वार का इतिहास ; झाब्रेरा हरिद्वार का इतिहास ; मंगलौर हरिद्वार का इतिहास ;लक्सर हरिद्वार का इतिहास ;सुल्तानपुर ,हरिद्वार का इतिहास ;पाथरी , हरिद्वार का इतिहास ; बहदराबाद , हरिद्वार का इतिहास ; लंढौर , हरिद्वार का इतिहास ;बिजनौर इतिहास; नगीना ,  बिजनौर इतिहास; नजीबाबाद , नूरपुर , बिजनौर इतिहास;सहारनपुर इतिहास                      :=============  स्वच्छ भारत !  स्वच्छ भारत ! बुद्धिमान भारत =============:


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                     Emperor Ashoka and History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur
                         सम्राट अशोक व हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास

                  Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur  Part  -   100   
                         
                     हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग - 100                     


                                               इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती
 सम्राट अशोक [273- 232 BC ] बिन्दुसार की मृत्यु [272 BC ] के कुछ समय बाद राजगद्दी पर बैठा।  अभिषेक के आठ  वर्ष बाद अशोक को कलिंग राज्य से भयंकर युद्ध करना पड़ा और इस महायुद्ध में एक लाख से अधिक मनुष्य मारे गए और इतने ही बंदी बनाये गए , युद्ध ने अशोक पर गहरा प्रभाव डाला और अशोक बुद्धगामी हो गया। यद्यपि अशोक बुद्धमत को मानने वाला था किन्तु उसने सनातन [हिन्दू ] और बौद्ध धर्म के उदार सिद्धांतों  प्रचार किया।
                हरिद्वार ,  बिजनौर व सहारनपुर पर अशोक का शासन
       
 कालसी [चकरौता , देहरादून ] व मेरठ के शिलालेखों व बाद समय के मयूरध्वज [बिजनौर ] प्रागैतिहासिक खुदाई  से सिद्ध है कि हरिद्वार , बिजनौर , सहारनपुर पर अशोक का अधिकार  tha va क्षेत्रीय क्षत्रप अलग अलग रहे होंगे।
  अशोक ने अपने समस्त राज्य में जहां जहां घनी वस्ती थीं वहां धर्मोपदेश हेतु वहां उसने   या तो लाटें स्थापित कीं या शिलालेख खुदवाये।
मेरठ के शिलालेख को मुस्लिम राजा दिल्ली ले गया था।
कालसी व मेरठ के अभिलेख  मगधी भाषा में ब्राह्मी लिपि में हैं।

 ** संदर्भ - ---वैदिक इंडेक्स डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२ राहुल -ऋग्वेदिक आर्य मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज
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   History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  to be continued Part  --
 हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास  to be continued -भाग -    Emperor Ashoka &  Ancient History of Kankhal, Haridwar, Uttarakhand ; Emperor Ashoka &   Ancient History of Har ki Paidi Haridwar, Uttarakhand ; Emperor Ashoka &  Ancient History of Jwalapur Haridwar, Uttarakhand ; Emperor Ashoka &  Ancient  History of Telpura Haridwar, Uttarakhand ;Emperor Ashoka &   Ancient  History of Sakrauda Haridwar, Uttarakhand ; Emperor Ashoka &  Ancient  History of Bhagwanpur Haridwar, Uttarakhand ;Emperor Ashoka &  Ancient   History of Roorkee, Haridwar, Uttarakhand ;  Ancient  History of Jhabarera Haridwar, Uttarakhand ;   Emperor Ashoka & Ancient History of Manglaur Haridwar, Uttarakhand ; Emperor Ashoka &   Ancient History of Laksar; Haridwar, Uttarakhand ; Emperor Asoka &   Ancient History of Sultanpur,  Haridwar, Uttarakhand ; Emperor Asoka &   Ancient  History of Pathri Haridwar, Uttarakhand ;    Emperor Asoka &  Ancient History of Landhaur Haridwar, Uttarakhand ;   Ancient History of Bahdarabad, Uttarakhand ; Haridwar;    History of Narsan Haridwar, Uttarakhand ;   Emperor Asoka &  Ancient History of Bijnor;  Emperor Ashoka &  Ancient  History of Nazibabad Bijnor ;  Emperor Asoka &   Ancient History of Saharanpur; Emperor Asoka &   Ancient  History of Nakur , Saharanpur;  Ancient   History of Deoband, Saharanpur; Emperor Asoka &  Ancient  Ancient History of Badhsharbaugh , Saharanpur;Emperor Asoka &   Ancient Saharanpur History, Emperor Asoka &  Ancient Bijnor History;
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                       Successors of Ashoka and Downfall of Maurya Empire
                                हरिद्वार ,  बिजनौर व  सहारनपुर   इतिहास संदर्भ में  अशोक के उत्तराकधिकारी और मौर्य साम्राज्य का अवसान

                   Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur  Part  - 102     
                         
                     हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -102                     


                                               इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती

                               अशोक के उत्तराधिकारी
अशोक के एक पुत्र जलौक  जो कश्मीर का प्रशासक था उसने पिता की मृत्यु के बाद कश्मीर पर अपना स्वतंत्र राज्य घोषित कर लिया था। जलौक ने कान्यकुब्ज तक अपना राज्य विस्तृत किया।
पाटलिपुत्र पर अशोक का नेत्रहीन पुत्र कुणाल का शाशन रहा और कुणाल का पुत्र सम्प्रति शासन चलाया करता था।
सम्प्रति का भाई दशरथ था।
इनके बाद पाटलिपुत्र का शासक शालिशूक हुया जिस पर यवन सम्राट दमिति /देमितीयम् ने आक्रमण किया और शालिशूक भाग गया था।  देमिति के जाने के बाद शालिशूक वापस आया।
शालीशूक  के बाद देववर्मन , शतध्वन्वन।  वृहद्रथ ,मगध के शासक बने।
  धीरे धीरे इनके राज्य में सीमाएं घटती गयीं।  अंतिम मौर्य नरेश वृहद्रथ की हत्या कर उसके सेनापति पुष्पमित्र ने 184 BC में  मगध राज हथिया लिया।

             मौर्य राज्य बिघटन

अशोक के अंतकाल में ही बहुत से सामंत मनमानी करने लगे थे।
अशोक के अंतिम समय या मृत्यु के बाद वैक्त्रिया /वाह्लीक नरेश दियदत स्वतंत्र हो बैठा था।

                   हरिद्वार , बिजनौर व सहारनपुर नरेशों की स्वतंत्रता
कनिंघम की खोज में जिन बारह कुणिंद नरेशों की मुद्राएं मिलीं उनसे सिद्ध होता है कि उत्तर पांचाल के सामंतों  ने याने उत्तराखंड , बिजनौर /रुहेलखण्ड , हरिद्वार , सहारनपुर के सामंतों ने अशोक मृत्यु बाद अपने को स्वतंत्र घोषित कर दिया था। [कनिंघम , क्वाइंस ऑफ एन्सिएंट इण्डिया ]
[सभी संदर्भ हेतु डा डबराल को पढ़े ]

 ** संदर्भ - ---वैदिक इंडेक्स डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२ राहुल -ऋग्वेदिक आर्य मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज
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   History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  to be continued Part  --
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         Haridwar , Bijnor , Saharanpur in Maurya Period a History Discussion
           
                   अशोक द्वारा पाली भाषा द्वारा स्थानीय भाषाओं  पर  अतिक्रमण
                                 मौर्य काल में हरिद्वार , बिजनौर और  सहारनपुर

                   Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur  Part  -103       
                         
                     हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -103                     


                                               इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती

                          मौर्य काल में हरिद्वार , बिजनौर और  सहारनपुर  का प्रशासन
         यद्यपि हरिद्वार , बिजनौर और  सहारनपुर पर मौर्य शासन था किन्तु वास्तव में स्थानीय प्रशासन स्थानीय सामंतों के हाथों में था।  ये सामंत शायद खस याने कुणिंद थे।

                     अशोक द्वारा पाली भाषा द्वारा स्थानीय भाषा पर  अतिक्रमण

   सदा से ही केंद्रीय शासन व्यवस्था ने स्थानीय भाषा पर अतिक्रमण किया और करती रहेगी।  जब अशोक ने पाली बहसः में शिलालेख लिखवाये तो अवश्य ही स्थानीय कलविदों को पाली सीखनी पड़ी होगी और अपनी भाषा के कतिपय शब्दों को छोड़ा होगा और पाली शब्दों को अपनाया होगा जो बाद में स्थनीय लोगों ने भी अपनाया होगा।
 गढ़वाली  कुमाउनी भाषा में आये पाली शब्दावली सिद्ध करती है कि बुद्ध के स्थावर शिष्यों , चाणक्य के राजदूतों , अशोक के धर्म धर्म प्रसार से बिजनौर , हरिद्वार व सहारनपुर की स्थानीय बोलियों पर पाली का प्रभाव पड़ा होगा।
 निम्न शब्द आज भी उत्तराखंड में बोले जाते हैं जो कि सिद्ध करता है कि मौर्य काल में मगधी /पाली ने स्थानीय भाषाओं को र्प्भावित किया -
वेद त ( विदत्थि )
तथमयी (तंतुका )
पाथो (पत्थ  )
नाळी (नलि )
दूण (द्रोण )
 न के स्थान पर ण ; स् के स्थान पर श् ; र् के स्थान पर ळ पर मगधी का प्रभाव है।
(डा कटोच , गढ़वाली भाषा की प्रकृति , गढ़वाल की जीवित विभूतियाँ, पृष्ठ 281  )


 ** संदर्भ - ---वैदिक इंडेक्स Major References- डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२ राहुल -ऋग्वेदिक आर्य य मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज
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         History of Culture and Civilization in Haridwar, Bijnor and Saharanpur during Maurya Period
 
                 हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास     संदर्भ में मौर्य काल की सभ्यता व संस्कृति   
                   Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur  Part  - 104     
                         
                     हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  104                   


                                               इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती

        कौटिल्य के अर्थशास्त्र से व यूनानी साहित्य से पता चलता है कि भारत में या कहें कि मौर्य काल में हरिद्वार , बिजनौर व सहारनपुर की सभ्यता व संस्कृति निम्न प्रकार थी -
                            विभिन्न वर्ण /जातियां
 
                          यूनानी लेखक ने मौर्य कालीन भारत में निम्न जातियों का उल्लेख किया है -
दार्शनिक
कृषक
सैनिक
पशुपालक
कलाविद
न्यायिक विद्वान
सलाहकार व मंत्री
                           कौटिल्य ने निम्न पारम्परिक चार वर्णों का वर्णन किया है -
ब्राह्मण
क्षत्रिय
वैश्य
शूद्र -इनके पास व्रता [धन उत्पादन ]  करुकर्मा [कला ] , कुशीलवकर्मा [शिल्प ] आदि होने बाद भी इनकी गिनती निम्न जाती में था।
                                      स्त्रियां
उच्च जातीय स्त्रियां पढ़ी लिखीं होती थीं . स्त्रियां राजकाज व धार्मिक अनुष्ठानो में भाग लेतीं थीं।  वे सेना व जासूसी का कर्म भी करती थीं। वहु पत्नीवाद प्रचलित था।  सती प्रथा बिलकुल कम थी।  गणिकाओं का स्थान गिरा नही था अपितु सभ्यता शिक्षण -प्रशिक्षण में गणिकाओं की सहायता ली जाती थी।
                 कपड़े
कपड़ा उद्यम अच्छी हालत में था।  धनी वर्ग रेशमी कपड़ा पहनते थे।  कपास के कपड़े प्रमुख थे व चमड़े , वृक्ष खाल के कपड़े भी प्रचुर मात्रा  पयोग होते थे।
            भोज्य पदार्थ
रोटी , चावल , दाल , सब्जी व मांश , दूध मुख्य भोजन था।  वन पर निर्भरता अधिक थी।


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                   History  Slavery , Economic Condition ,  in Haridwar , Bijnor and Saharanpur in Maurya Period

        हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास     संदर्भ में मौर्य काल में दास प्रथा और आर्थिक स्थिति
                   Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur  Part  - 105     
                         
                     हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  105                   


                                               इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती
                    हरिद्वार , बिजनौर , सहारनपुर इतिहास संदर्भ में मौर्य काल में दास प्रथा
   मौर्य काल में दास प्रथा पर इतिहासकारों के मध्य घोर मतैक्य है। यूनानी लेखक मेगस्थनिनस लिखता है कि दास प्रथा नही थी।  कौटिल्य का अर्थशास्त्र दास [अहिताकास ] संबंधी नियमों की पूरी तरह से व्याख्या करते हैं। कौटिल्य ने दासों के प्रति किस तरह व्यवहार करना चाहिए पर विस्तार से लिखा है।
         दो प्रकार के दास
१- आजीवन या पारिवारिक दास - जो पीढ़ी दर पीढ़ी दासता में रहते थे।
२- सामयिक दासता
अधिकतर निम्न वर्ग के ही दास होते थे पर समय आने पर उच्च वर्ग के भी दास बनते थे।
दासों से तरह तरह के श्रमसाध्य कार्य लिया जाता था जैसे कृषि , परिवहन संबंधी।  मठ -मंदिर संबंधी कार्य।
                   हरिद्वार , बिजनौर , सहारनपुर इतिहास संदर्भ में मौर्य काल में आर्थिक स्थिति
  इस काल में लौह संस्कृति ने अधिक विकास किया और नई आर्थिक क्रान्ति। आई   राजनीतिक स्थिरता से कृषि , ,  कुटीर उद्यमों , आयुर्वेद , व्यापार आदि में विकास हुआ जिसने भारत को नई आर्थिक दिशा ही नही दी अपितु भारत को जोड़ने का भी कार्य किया।  कौटिल्य ने निम्न कार्यों को मुख्य विज्ञान  बतलाया -
कृषि शिक्षा
पशुपालन शिक्षा
व्यापार
अर्थ शास्त्र की शिक्षा       



 ** संदर्भ - ---वैदिक इंडेक्स डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२ राहुल -ऋग्वेदिक आर्य मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज
घोषाल , स्टडीज इन इंडियन हिस्ट्री ऐंड कल्चर
आर के पुर्थि , द एपिक सिवलीजिसन
अग्रवाल , पाणिनि कालीन भारत
अग्निहोत्री , पंतजलि कालीन भारत
अष्टाध्यायी
दत्त व बाजपेइ  , उत्तर प्रदेश में बौद्ध धर्म का विकास
महाभारत
विभिन्न बौद्ध साहित्य
जोशी , खस फेमिली लौ
भरत सिंह उपाध्याय , बुद्धकालीन भारतीय भूगोल
रेज डेविड्स , बुद्धिष्ट इंडिया

Copyright@ Bhishma Kukreti  Mumbai, India 21/4/2015

   History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  to be continued Part  --
 हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास  to be continued -भाग -      Culture, Civilization in Mauryan Period & Ancient History of Kankhal, Haridwar, Uttarakhand ;  Culture, Civilization in Mauryan Period &   Ancient History of Har ki Paidi Haridwar, Uttarakhand ;  Culture, Civilization in Mauryan Period &   Ancient History of Jwalapur Haridwar, Uttarakhand ; Culture, Civilization in Mauryan Period &    Ancient  History of Telpura Haridwar, Uttarakhand ;  Culture, Civilization in Mauryan Period &   Ancient  History of Sakrauda Haridwar, Uttarakhand ;   Ancient  History of Bhagwanpur Haridwar, Uttarakhand ;   Culture, Civilization in Mauryan Period & Ancient   History of Roorkee, Haridwar, Uttarakhand ; Culture, Civilization in Mauryan Period &   Ancient  History of Jhabarera Haridwar, Uttarakhand ;   Ancient History of Manglaur Haridwar, Uttarakhand ;   Culture, Civilization in Mauryan Period & Ancient History of Laksar; Haridwar, Uttarakhand ;   Culture, Civilization in Mauryan Period &    Ancient History of Sultanpur,  Haridwar, Uttarakhand ;  Culture, Civilization in Mauryan Period &     Ancient  History of Pathri Haridwar, Uttarakhand ;    Ancient History of Landhaur Haridwar, Uttarakhand ; Culture, Civilization in Mauryan Period &   Ancient History of Bahdarabad, Uttarakhand ; Haridwar;  Culture, Civilization in Mauryan Period &     History of Narsan Haridwar, Uttarakhand ;   Culture, Civilization in Mauryan Period &   Ancient History of Bijnor; Culture, Civilization in Mauryan Period &    Ancient  History of Nazibabad Bijnor ;  Culture, Civilization in Mauryan Period &    Ancient History of Saharanpur;  Culture, Civilization in Mauryan Period &   Ancient  History of Nakur , Saharanpur;  Culture, Civilization in Mauryan Period &    Ancient   History of Deoband, Saharanpur;  Culture, Civilization in Mauryan Period &     Ancient  History of Badhsharbaugh , Saharanpur;  Culture, Civilization in Mauryan Period &    Ancient Saharanpur History,  Culture, Civilization in Mauryan Period & Ancient Bijnor History; कनखल , हरिद्वार का इतिहास ; तेलपुरा , हरिद्वार का इतिहास ; सकरौदा ,  हरिद्वार का इतिहास ; भगवानपुर , हरिद्वार का इतिहास ;रुड़की ,हरिद्वार का इतिहास ; झाब्रेरा हरिद्वार का इतिहास ; मंगलौर हरिद्वार का इतिहास ;लक्सर हरिद्वार का इतिहास ;सुल्तानपुर ,हरिद्वार का इतिहास ;पाथरी , हरिद्वार का इतिहास ; बहदराबाद , हरिद्वार का इतिहास ; लंढौर , हरिद्वार का इतिहास ;बिजनौर इतिहास; नगीना ,  बिजनौर इतिहास; नजीबाबाद , नूरपुर , बिजनौर इतिहास;सहारनपुर इतिहास                      :=============  स्वच्छ भारत !  स्वच्छ भारत ! बुद्धिमान भारत =============:


 

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