Author Topic: नाटककार दिनेश बिजल्वाण का उत्तराखण्ड की पॄष्टभूमि पर आधारित नाटक "पंडेरा"  (Read 24790 times)

Dinesh Bijalwan

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कमल जी ,  हमारी तो कोसिस रह्ती थी कि नाट्क लिखते वक्त भी ध्यान रखे कि उसमे क्म से क्म  महिला पात्र हो / हा डान्स शो मे यह सम्स्या नही थी/   पर्वतीय कलाकेन्द्र और हिमालय क्ला सन्गम के  पास  महिला कलाकारो के क्मी न्ही होती थी / क्योन्कि वहा   नाट्क कि तरह रोज रिह्र्स्ल का झन्झ्ट नही होता था आ

खीमसिंह रावत

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diesh ji aapaka dhanyabad aapane THE HIGH HILLERS GROUP se punh mila diya /

ghar jakar mene shri Raghuvir Singh Bhandari ji se bat ki ve bhi agali miteeting me aayege/

ok 

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Sir kahan vyast ho gaye aap?

diesh ji aapaka dhanyabad aapane THE HIGH HILLERS GROUP se punh mila diya /

ghar jakar mene shri Raghuvir Singh Bhandari ji se bat ki ve bhi agali miteeting me aayege/

ok 

Dinesh Bijalwan

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कही नही अनुभव जी, थोडा व्यस्त था / मुझे टाइपिन्ग का पूरा अभ्यास नही है इस लिए योगदान नही कर पाता /  सन अस्सी के दशक मे पहाडी मे कुछ याद गार प्रस्तुतिया हुइ थी / देहरादून से जीत सिन्ह नेगी मलेथा की कूल लेकर आये थे / पर्वतीय कलाकेनद्र  ने रामी बौराणी और रसीक रमोल  जैसी प्रस्तुतिया दी / हिमाशु जोशी के उपन्यास कगारे आग का कुमाउनी मे मचन  भी एक न भूलने वाला अनुभव है / उसमे हाइहिलर्स की सन्योगिता पन्त ने  गोमू कि केन्द्रीय भुमिका निभायी थी /  हाइहिलर्स के नाट्क  अर्धग्रामेश्वर  और बाजी गौडी भी अत्यन्त सफल रहे/ हिमालय कला सन्गम से चन्द्र किशोर नैथानी का लिखा दिल्ली मे किराये के मकानो की सम्स्या पर आधारित क्यु एम जी  भी बहुत सफल था / उससे पहले जागर सन्स्था  जन्क्जोड ,  कन्शानुक्रम , अर्धग्रामेश्वर , स्व्यमबर  आदि नाट्को का मन्चन  किया /

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Sir main Rawat ji ke liye kah raha tha :)

कही नही अनुभव जी, थोडा व्यस्त था / मुझे टाइपिन्ग का पूरा अभ्यास नही है इस लिए योगदान नही कर पाता /  सन अस्सी के दशक मे पहाडी मे कुछ याद गार प्रस्तुतिया हुइ थी / देहरादून से जीत सिन्ह नेगी मलेथा की कूल लेकर आये थे / पर्वतीय कलाकेनद्र  ने रामी बौराणी और रसीक रमोल  जैसी प्रस्तुतिया दी / हिमाशु जोशी के उपन्यास कगारे आग का कुमाउनी मे मचन  भी एक न भूलने वाला अनुभव है / उसमे हाइहिलर्स की सन्योगिता पन्त ने  गोमू कि केन्द्रीय भुमिका निभायी थी /  हाइहिलर्स के नाट्क  अर्धग्रामेश्वर  और बाजी गौडी भी अत्यन्त सफल रहे/ हिमालय कला सन्गम से चन्द्र किशोर नैथानी का लिखा दिल्ली मे किराये के मकानो की सम्स्या पर आधारित क्यु एम जी  भी बहुत सफल था / उससे पहले जागर सन्स्था  जन्क्जोड ,  कन्शानुक्रम , अर्धग्रामेश्वर , स्व्यमबर  आदि नाट्को का मन्चन  किया /

Dinesh Bijalwan

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मै अपने लिए समझ बैठा /  रावत्जी आप अनुभव जी से सम्वाद किजिए /



Dinesh Bijalwan

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Sir I wanted to load some photographs of plays  but I could not  make it.  Please help me.

chattansingh

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 गड़वाली नाटक
 बिज्ल्वान जी के इस नाटक पर काफी चर्चा होचुकी है |  अच्हा है  लकिन अगर नाटको के बारे में जानना ही है तो नाटको के आधार अस्थंम लेखक नाटकर और अपने ज़माने के बहु चर्चित कलकार पराशर जी से बड़कर सायद हे कोई हो.. इसलयी कहा रहा हूँ की उनके पास प्रेस कटिंग से लाकर फोटो व एक एक का नाम पत्ता है की कौन सा नाटक कब कहा खेला गया | वे अपने आप में एक संघरालाये है.  गदवाली नाटको में उनका योगदान भूल्या नही जायेगा | एज  ऐ ऐक्टर एज ऐ writter एज ऐ दिरेक्टोर | 
 अगली बार मै विस्तार से लिखूंगा

 

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