Author Topic: गिरीश चन्द्र तिवारी "गिर्दा" और उनकी कविताये: GIRDA & HIS POEMS  (Read 70255 times)

हेम पन्त

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Poet Girda not keeping well Tribune News Service Dehradun, May 6, 2010...

Girish Tiwari ‘Girda’ is not keeping well. The famous poet, whose writing was an inspiration for Uttarakhand agitators, has developed multiple disorders. The poet of the masses, who is equally acclaimed by Kumaoni and Hindi-knowing people, has lost weight drastically.
Girda a few months ago had a severe heart attack and since then has not been keeping well. The man who shook the erstwhile UP government through his songs during the Uttarakhand movement can be seen going to the doctor on limping legs.
“The poet in his late 60s was taking a breather by a pillar on the roadside at Kailakhan, hardly 1.5 km from Nainital,” said senior journalist Prakash Thapliyal, who happened to come across Girda during his recent visit to Nainital. The meagre amount of pension is hardly sufficient to meet Girda’s medical needs, particularly when his only son is still studying.
Having taken voluntary retirement from instructorship in the Song and Drama Division of the Ministry of Information and Broadcasting, Girda has dedicated himself for the cause of Uttarakhand. During the Uttarakhand movement, his work was to write poems and recite those at Talli Tal or Malli Tal before a large gathering.

richa.pant

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गिर्दा की कवितायेँ पड़ी.......बहुत ही आसान शब्दों में उन्होंने बहुत बड़ी बड़ी बातें कह दी है
आप सबको बहुत बहुत बधाई इस फोरम के माध्यम से उत्तराखंड का इतिहास तथा वर्तमान हमारे साथ बाटने के लिए
जय भारत ,,,जय उत्तराखंड


 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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गिर्दा की यह कविता उनकी किताब - रंग डारि दियो हो अलबेलिन में (होली संग्रह)
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हाउ पानिक पिन
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सोचि ल्यूछा त सोच पड़नी, कौ भे मी, का बटी ऐ
रूडीनिक जसी बरख सुदे, अरख, बरख, काँ हु गे !
और उसिक सोचि ल्यूछा त, मई लिहबहर दुनी भे,!
सूरज में उजियाव भे म्यर, जौडनी में रौशनी भे, !
और उसिक औकात कूछा, तीन में न तेर में,
द्वि सोरा मुरलिक सर, भ्यार में न भीटर में!
जानी कभत फ्यासस करी दियो, हाउ की त जात भे!
यो जौलिया मुरुलिक और चलण तककी बात भे !
पर जतुक भे, जे ले भे, यो सब तेरी करामात भे!
वो रे हाउ पानिक पिना. तेरो ले बात भे!
सोचि ल्यूछा त सोच पड़नी !
 

हेम पन्त

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भास्कर उप्रेती जी के फेसबुक एलबम से गिर्दा की एक फोटो


dramanainital

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girdaa ke achche swaasthya kee kaamnaa kartaa hu.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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  इस व्योपारी को प्यास बहुत है..........       

 
एक तरफ बर्बाद बस्तियाँ – एक तरफ हो तुम।
एक तरफ डूबती कश्तियाँ – एक तरफ हो तुम।
एक तरफ हैं सूखी नदियाँ – एक तरफ हो तुम।
एक तरफ है प्यासी दुनियाँ – एक तरफ हो तुम।

अजी वाह ! क्या बात तुम्हारी,
तुम तो पानी के व्योपारी,
खेल तुम्हारा, तुम्हीं खिलाड़ी,
बिछी हुई ये बिसात तुम्हारी,

सारा पानी चूस रहे हो,
नदी-समन्दर लूट रहे हो,
गंगा-यमुना की छाती पर
कंकड़-पत्थर कूट रहे हो,

उफ!! तुम्हारी ये खुदगर्जी,
चलेगी कब तक ये मनमर्जी,
जिस दिन डोलगी ये धरती,
सर से निकलेगी सब मस्ती,

महल-चौबारे बह जायेंगे
खाली रौखड़ रह जायेंगे
बूँद-बूँद को तरसोगे जब -
बोल व्योपारी – तब क्या होगा ?
नगद – उधारी – तब क्या होगा ??

आज भले ही मौज उड़ा लो,
नदियों को प्यासा तड़पा लो,
गंगा को कीचड़ कर डालो,

लेकिन डोलेगी जब धरती – बोल व्योपारी – तब क्या होगा ?
वर्ल्ड बैंक के टोकनधारी – तब क्या होगा ?
योजनकारी – तब क्या होगा ?
नगद-उधारी तब क्या होगा ?
एक तरफ हैं सूखी नदियाँ – एक तरफ हो तुम।
एक तरफ है प्यासी दुनियाँ – एक तरफ हो तुम।

                      गिरीश चंद्र तिबाडी (गिर्दा )          Posted by  arvind malguri

Courtesy : http://arvind-malguri.blogspot.com/2010/08/blog-post.html
         

पंकज सिंह महर

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फोटो साभार - राजीव रावत

हलिया

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  •     “गिर्दा” का ये अन्दाज अब कहां  देखने को मिलेगा हो महाराज??


    Girda

Rajen

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आपने सच कहा है “संजू पहाडी” जी, “गिर्दा” हमारे दिलों में सदैव राज करते रहेंगे।
 
Girish Tiwari Girda WE WILL MISS YOU
 
 

Hisalu

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Sahi khaa aapne Rajen daa....

Great Girda will always live in out heart through his words/poems

  •     “गिर्दा” का ये अन्दाज अब कहां  देखने को मिलेगा हो महाराज??


    Girda

 

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