Author Topic: Articles & Poem by Sunita Sharma Lakhera -सुनीता शर्मा लखेरा जी के कविताये  (Read 33555 times)

Sunita Sharma Lakhera

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दुखियों से खिलवाड़ करने वाले जीवन भर दुख ढोते है ,
आँसुओं को तोलने वाले जीवन भर फिर खुद रोते हैं ,
पीड़ितों को सहारा देने वाले मृदुभाषी करुणामयी होते है,
पथरीली धरती पर चलने वाले ही पर पीड़ा समझते हैं !

Sunita Sharma Lakhera

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कुरीतियाँ

इस धरा को यदि ध्यान से समझें तो यह की वस्तुत: सारी सृष्टी की आधारभूत शक्ति नारी है किन्तु उसने सदियों से जन्मदात्री होने के साथ - साथ यमराज का किरदार भी बखूबी निभाया है व् आज भी इस ओर प्रेरित है !यदि हम नारी के अन्य शब्द का विश्लेषण करें "औरत " तो पाएंगे उससे जुड़े तो भावपूर्ण शब्द -और ,रत ,अर्थात "अधिक इच्छा ",इसके विपरीत पुरुष का भाव पुरुषार्थ ,सृष्टी की रचना का उद्देश्य इच्छा से अधिक पुरुषार्थ हमारे जीवन का उद्देश्य होना चाहिए ! किन्तु नारी इस मार्ग में सर्वाधिक अवरोधक बन कर खडी है !
यह वह जीव है जिसकी तृष्णा से समस्त जगत विशुब्ध है !समाज में व्याप्त जितनी भी कुरीतियाँ हैं उनमें औरत की भूमिका अग्रणीय है !दया की सागर व् देवितुल्य स्थान पाने वाली इस जीव की भूमिका आज के सन्दर्भ में घर ,परिवार व् समाज कल्याण में न होकर विघटन की ओर है !भ्रूण हत्या ,कन्या -बहु प्रतार्ण ,दहेज़ हत्या ,लिंग भेद व् अन्य कुरीतियों को बढ़ावा देने में एक औरत ही दूसरी औरत की दुश्मन बनी बैठी है ,विरले अलग विचारों वाली औरतों के मार्ग अवरोधक और कोई नहीं स्वयं औरत ही तो है !
जब तक नारी एक दुसरे को समभाव नहीं देखेगी तब तक उसके अस्तित्व का पुरुष प्रधान समाज में कोई वर्चस्व रही रहेगा !तब तक उसका मानसिक ,शारीरिक व् सामाजिक शोषण होता रहेगा !सर्वप्रथम अपनी कमजोरियों से लड़ना होगा !क्या समाज सुधारना कोई मुश्किल कार्य है ,नहीं , बस नारी जन चेतना की आवश्यकता है ! सर्वप्रथम अपने घर ,परिवार में नारी को सशक्त बनाएं तत्पश्चात समाज स्वयं सुधर जायेगा !
पुरुष की भी भूमिका नकारी नहीं जा सकती ,यदि वह कलुषित मानसिकता को बढ़ावा न दें अपितु सदाचार से अपने पिता ,पति व् पुत्र की भूमिका निभाए तो बढती कुरीतियों पर लगाम लगाया जा सकता है !
कुरीतियों रहित संसार स्वर्ग के समान !

Sunita Sharma Lakhera

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क्रोध --जीवन पर अभिशाप !

जीवन में प्रत्येक व्यक्ति समय सारणी से बंधा हुआ है ! सुख व् दुःख भी जीवन के दो अटूट छाया है ! इस बदलते परिवेश में व्यक्ति प्रतिक्षण प्रतिस्पर्धा की दौड़ में अपने भीतर विभिन्न प्रकार के कलुषित विचारों को पनाह देता है जैसे अहंकार ,इर्ष्या, भय कुंठा इत्यादि ! जिसके परिणामस्वरूप क्रोध की उत्पत्ति होती है !
क्रोध साकार व् निराकार दोनों ही रूप में समय -२ पर हमारे कर्मो द्वारा दिखते हैं ! इसका कुप्रभाव हमारे बुद्धि व् विवेक पर पड़ता है ! क्रोधी व्यक्ति न केवल अपना अहित करता है अपितु समाजघाती भी होता है ! क्रोध में लिए गए निर्णय जीवन में आत्मघाती सिद्ध होते हैं !क्रोधी व्यक्ति अपने अहं के आगे समाज से मुह मोड़ लेता है व् समस्त रिश्ते नाते उसकी अपनी दुनिया में कोई मान्य नहीं रखती !
ऐसी परिस्तिथि में ईश्वरीय भक्ति व् भजन ,इसे वशीभूत करने में सक्षम होती है !इसके अलावा उसे छोटे -२ उपायों को अपनाना चाहिए ताकि उसके द्वारा किसी का अहित न हो सके !
आये इन उपायों को अपनाएं व् अपने जीवन को क्रोध युक्त नहीं क्रोध्मुक्त बनाएं -----
१ . क्रोध को सयमित करने की चेष्ठा करें !
२ . गहरी सांसे भरें ,प्रतिदिन ,प्रतिपल !
३ . अपनी मुट्ठी को कस कर तब तक बंद करें जब तक स्थिति न संभल जाये !
४ .दूसरों के विचारों को सुने और अपनी भी नम्रतापूर्वक कहे !
५ . सबसे उत्तम उस स्थान से हट कर अपना ध्यान केन्द्रित करने की चेष्टा करें !
अपना क्रोध को सही जगह व् सही दिशा में यदि इस्तेमाल किया जाये तो प्रत्येक व्यक्ति पहाड़ों से नदी खोदकर अपने घर तक ला सकता है !

Mahi Mehta

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Sunita ji...

Welcome to Merapahadforum.com.

बहुत अच्छा लेख आपने लिखा है! खासतौर से आपकी कविता मी छियो पहाड़ी की नारी.. बहुत अच्छी लगी !

Sunita Sharma Lakhera

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उत्तराखंड औषधि दर्पण

औषधीय डाला-बूटों कु हमर जीवन दगडी सीधू सम्बन्ध च जैक वास्ता हम सभीयुं त जागरूक हूँ चेंद ! उत्तराखंड त अमूल्य संजीवनी वाटिका च जैकी जानकारी हम सभयूं ते हूण बहुत जरूरी च, निथर हमर प्राकृतिक संपदा केवल कुछ हथो मा सिमट जैली ! अगर हम सैह ढंग से जीण चाणा छंवा त अपर आसपास क वनस्पति ते न केवल समझन प्वाडल बल्कि वेक सुरक्षा वास्ता काम भी कन प्वाड़ल ! आधुनिक [एलोपथिक] दवै आराम त दीन्दी च पर वेकि दगड न जाने कथsकू आफत भी दगड़ मा लन्दिन ! हमर पुरण जमsने कू वैध हकीमो कु इलाज मा जू चमत्कार हून्दी छयाई व् यु नै दवाईयों मा कख छ ! सबसे पैली त समस्त वनस्पति जगत और मनखि जीवन मा परस्पर मेल हूण चेणू च ! हमर देस कु रिसी मुनियों न वेद , पुराणों , उपनिषदों अर अनेक धार्मिक ग्रंथों मा हमर यूँ संसाधनों की जानकारी मिलदी ! यु लेख अपुर राज्य मा ही न बल्कि हर घेर अर दरोज तक 'हर्बलिज्म' फैलाण क वास्ता उठायु गयु कोसिस/कदम च ! 'हर्बलिज्म' मतलब जड़ी बूटीयूं कु संसार क आधुनिक धारा दगडी विकास व् प्रचार /प्रसार करन च ! १५ -१७ शताब्दी ,जड़ी बूटी कुण स्वर्ण युग छयाई ! जड़ी बूटी कु सिधांत हमर आयुर्वेद ,चीनी अर यूनानी पारम्परिक हकीमों कु माध्यम च ! विश्व स्वास्थ्य सगठन कु अनुमानुसार आज क दुनिया कु ८०% आबादी कै हद तक अपर इलाज घरेलू चिकित्षा अपने की कर लिंदीन !प्राकृतिक चिकित्सक दुनिया भर मा २/३ % से अधिक जातिया जे मा अनुमानित रूप मा ३५००० औषधि गुंणों से भरपूर छन !हर्बल दवे बीज / कलम पद्धति से उगै जै सक्दन ,आर थोडा बहुत खर्च कं अपर पुंगडीयूं ,घर ,बगीचों मा उगै जै सकदन ! दुनिया भर मा भी लोग ईं दिशा मा जागरूक छन्न!

वैध डाली बूटयूं कु विभिन्न हिस्सों -जेड़, टेनी ,पत्ता ,फूल अर फलों कु रसायन / सुखू पौडर बने कन अपर रोगियों कु उपचार करदन !जातिगत वनस्पति कु अध्यन बहुत जरुरी च ! हमर उत्तराखंड मा त यु जड़ी बूटियों कु अपार संपदा च ! हमर उद्देश्य हरेक घोर मा एकी जागरूकता फैलाण कु अभियान च ! जै से धन व् समय कु बर्बाद नि करी कण हम अपर आस पास की वनस्पति कु सेह इस्तमाल कर सकवां !

देवभूमि उत्तराखंड दुर्लभ जड़ी बूटियों कुण संसार मा प्रसिद्ध च पण आधुनिक धारा मा ईंते पिछने धकेलनायी छन यु एलोपथिक सत्ताधारी ! उत्तराखंड सासन द्वारा स्वास्थ्य पर्यटन व् जड़ी बुटीयु का विकास पर ध्यान नि दीणा छन जै की वजह से लोगों ते एक यांका बारा ज्ञान नी च ! बाबा रामदेव ,गुरुकुल ,बैधनाथ अर डाबर जन और भी यीन पद्धति पर आज भी अडिग छन ! कतका यन भी वैध छन जोंते अपर ज्ञान औरों त बटण मा डैर लगदी, न वा कखी वु मै से आग्ने चली जाव !
आज इन्टरनेट कु युग छ ! अर ये माध्यम से न जाने कथका समाजसेवी यीं दिसा मा अग्रसर छन ! यूँ सब मा आजकल डॉ अरुण बडोनी जी कु नाम शिरोमणि [सर्वोपरि] चलणु च च जौन अपर फील्ड रिसर्च कु अध्यन जनता तक अपर गैर सरकारी संस्था -शेर -( सोसाईटी आफ हिमालयन एन्वैर्नमेंट रिसर्च कू माध्यम से पौंछाणा छन !
उत्तराखंड कु ज्यादातर क्षेत्र पहाड़ी हूण से ज्यादातर इखा क लोग गुरबत अर अभावग्रस्त जीवन यापन करणा छन ! इन परिस्तिथि मा छुट- मुट रोगों क वास्ता ये लोग अपर इलाज करी सकदन ,साथ ही बड से बड रोगों से अफु ते सुरक्षित रख सक्दन ! यदि हर गौं कु हर सदस्य अपर आसपास कु वन संपदा अर घास -पात कु जानकार व्हेह जाली त हर घर मा वैध ह्वाला अर यूँ अंग्रेजी दवे ते बस आपातकाल मा ही इस्तेमाल कारला ! पण उत्तराखंड की प्राकृतिक स्वास्थ्य केन्द्रों कु स्तिथि ठीक नि च ! दुर्लभ व् संजीवनी वर्ग कु औषधि कु महत्व दीं कु दगडी वैधों कु शिक्षा ,व् ये ज्ञान कु प्रयोग व् प्रचार वास्ता सरकारी - गैर सरकारी स्वयं सेवियों ते यीं दिशा मा कार्य करनी चेंद ! आवा हम सब एक सजग उत्तराखंडी बणिक अपर औषधि ज्ञान बढ़ौला ! सरकार ते भी शोधकर्ता अर किसानो त यीं दिशा मा बढ़ावा दीण चेन्दु ! जै उत्तराखंड !


Sunita Sharma Lakhera

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सोचो त जरा

पहाड़ की पीड़ा ,
का उठायुं बीड़ा ,
जंगल  की आग ,
पहाड़  कु भाग ,
शर्पियों  कु रोग
बेटी बुआरी कु जोग
पहाड़ मा सूखा 
सिख्नैयी  छन सब धोखा
पेड़ों ते बचावो
अप्रि सोच सुधारो
नौनी ते पढाओ
जीवन वींक सुधारो
नौनो  कु मेहनत
घर कु बरकत
पुन्ग्रियुं की हरयाली
लगदी बड़ी बिगरियाली
दहेज़ कु कलंक
देवभूमि भैर पटक
अप्रि रोजी कु खातिर
बाँझ न करो अपरी भितर
देवी - देवता नि मंगदा बलि
हुन्द हर जीव ते प्राण  प्रिय
साक्षरता  कु अभियान
उन्नति कु साधन
आव सोचो त जरा
देवभूमि मंगने च क्रांति धारा !

Sunita Sharma Lakhera

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उत्तराखंड इको टूरिज्म

उत्तराखंड  कु  नौ सदनी बीटेक  अपर ऐतिहासिक ,अध्यात्मिक  आर नैसर्गिक  सुन्दरता कुन पहचानू  जान्द ! दूर देशों से लोग यख  पर्यटन वास्ता आन्द छन !
उत्तराखंड  मा  हिमालय कु अखंड सुन्दरता न जाने कतका लोगों ते अपर तरफ खिचदू  रांदी ! हमर देवतावों अर संतो कु तपोभूमि पौराणिक काल बीटेक केदारखंड अर मानसखंड कु नौ से जानियु  जान्द ! साहसिक  पर्यटन लोगो ते अपर तरफ  खिचदू च जैक भितर पर्वतारोहण  ,जलखेल ,अर हिम खेल छन ! राज्य सरकार  ते अपर यू क्षत्रों कु विकास करन चएंद किल्य्की विदेशियों  कु सबसे अधिक हमर उत्तराखंड ही भल्लू  लगद !हमर गढ़ राज्य  धार्मिक अर रोमांचिक देवभूमि च जैकी मुकुट मा न जाने कटका देवी -देवतावों का मंदिर छन ! सरकार ते न केवल करोड़ो  श्रद्धालुवो कु ध्यान रखनी चएंद च दगडी मा वख तक पहुचन कुन मोटर मार्ग कु सुरक्षित ,सुगम्य अर मनोहारी बनान वास्ता कार्य करन व्हाल !जैबर तक सरकार सैलानियों वास्ता नि सोचिली तैबर तक ऊँ लोगो का क्या व्हाल जौंक मन झुर्दा च यखकू सुप्न्ये हिम शैल शिखरों का दर्शन करन कुन ! हिमल्य कु बिग्रेली छवि त अपर आंखियु मा अर कैमरा मा कैद कनके ली जाल !सरकार ते भी अपर राजस्व   भी  बढान वास्ता यूँ बातो पर ध्यान दीनी चएंद ताकि विदेशों मा हमर ख्याति व्हाह ! पण कुजेनी  वू कु लोग /सरकार व्हेली जू एं दिशा मा सोचली !हरेक सरकार ते अपर पुटुकी भरन कु चिंता सतौन्दी च अर आम आदमी त  युंक मकसद पूर करन वास्ता ढेबर छन ! पर्यटन  व् पर्यटक  कु  प्रति हमते भी जागरूक  हूनी पड़ल ! उत्तराखंड कु हर क्षेत्र कु अपर अद्भुत सुन्दरता च ! हम सभियुं ते अपर -अपर क्षेत्रों की जानकारी  सभियुं तक पहुंचान  वास्ता कार्य करन पड़ल !अपर लेखो ,वार्ताओ अर गीतों मा अपर देवभूमि कु हरेक प्रदेशों कु महिमा गै कन अर उनक विकास कु खातिर हरेक उत्तराखंडी कु जुवान पर हरेक प्रदेश कु सरा ज्ञान हूनी चेयंदी !दुनिया भर की जानकारी त हम खूब रखदो ,पण यदि कैते पूछ लिए जावा  की सत्य्कुंड / पाताल भैरव गुफा कख च ..त  १० मा कुई दयुई - तीन सही बता पाल ! अब एकी  वास्ता हमर शिक्षा नीती
त दोषी च  दागद मा हम सभी भी जू केवल अपर दायरा मा ही कुछ सोचदा -करदो छा !
धन्य व्हाह  इस इन्टरनेट युग कु जै मा कम से कम लोगो ते अपर उत्तराखंड कु नौ कु चार चाँद लगान्याई छन !कतका लोग अपर समूह मा अपर देवभूमि बोली मा ही लिखदा छन !कतका पन्ना उत्तराखंड कु समृद्धि त दर्शाना अर पूर विश्व मा पहचाना छन !ईन धारा मा मेरा पहाड़ , मी उत्तराखंडी छौ, रन्त रैबार,शेर ,हिमालय लोग ,लोकरंग ,उत्तराखंड पीपल इत्यादि अग्रणीय  छन ! बहुत ख़ुशी हुन्द की चलो नै  युवा पीढ़ी हैंक राज्यों  से  नजर हटाय कं अपर देवभूमि वास्ता काम करना छन अर वेंक संस्कृति ते समझिक्न अपनौनी  छन !इको टास्क फोर्स भी अपर कर्तव्य बखूबी निभौनिया छन !हम सभियुं कु मकसद तभी सफल व्हेह सकदी जब हमते यन सरकार मीलली जैक पूर ध्यान इको टूरिज्म  मा रूचिलेली अर अपर धार्मिक देवभूमि कु विकास कें एक गौ पण ध्यान न डेकन पूर उत्तराखंड कु विकास करन खातिर पहली मोटर मार्ग ते व्यवस्तित वनी करली जन की हिमांचल मा देख्येंदी च ! पर्यटक कु सुरक्षा कु यदि पूर इंतजाम व्हाल त हमर राज्य मा पर्यटन कु विकास व्हाल !कुछ क्षेत्रों पर ही अभी लोगो का ध्यान च अर उत्तराखंड मा टूरिज्म रूचि अभी भी पिछिड्यु   छ ! आव़ा इको टूरिज्म मा अप्रि रूचि दिखावा !

Sunita Sharma Lakhera

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मजदूर की पीड

इस बढती महंगाई में ,
न ठण्ड की बयार सताती है ,
न जेठ की तीक्ष्ण धूप जलाती है ,
न वसंत का मधुर कलरव बुलाती है ,
न पतझड़ का रेगिस्तान रुलाता है !

संसार के समुन्द्र में ,
चट्टान सा मेरा जीवन ,
वीरान घरोंदों की चौखट पर ,
महंगाई की मार सहता मेरा बचपन ,
रोटी को मोहताज मेरी झोपड़ी ,
सडको पर पलता यौवन !

महलों के सुकुमारों की ख़ुशी ,
झोपड़ी के कुमारों की पीड़ा ,
जिन हथेलियों से जीवन सींचता ,
उन्ही का दामन छिन्न =भिन्न होता ,
तुम्हारे सुख व् हमारे दुःख न बढ़ते ,
बस तुम तो यादो का झरोखा चाहते !

काश ! तुम हमारी बैशाखी बनते ,
हमारे जीवन में भी बहार लाते,
दो घडी हम भी हँस -जी लेते ,
यूँ खून के घूंट पी चुप न रहते ,
अरमानो के कफ़न यूँ ही न दफनाते !!

Sunita Sharma Lakhera

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पर्यावरण

प्रदूषण  का फैलता  विकराल साम्राज्य ,
क्या नही पर्यावरण को डस रहा ?
हवा ,जल ,खाद्य पदार्थ ,जिसकी भेंट चढ़  रहा !

पालीथीन  का फैलता  विकराल साम्राज्य ,
क्या नही पर्यावरण को डस रहा ?
बढ़ते इसके दुरपयोग से ,किसका स्वास्थ्य  भेंट चढ़ रहा !

वन्नोमूलन  का फैलता विकराल साम्राज्य
क्या नही पर्यावरण को डस रहा ?
प्राकृतिक  असंतुलन  का जिम्मेदार , धरा  विनाश  का कारण बन  रहा !

खनन  का  फैलता  विकराल साम्राज्य ,
क्या नही पर्यावरण को डस रहा ?
प्राकृतिक आपदाएं  व् विनाश का कारण बन रहा !

मिलावट का फैलता साम्राज्य ,
क्या नही पर्यावरण को डस रहा ?
जीवन रूपी अनमोल संपत्ति  जिसके भेंट चढ़ रहा  !

आयें  मनन करें व् शपथ  लें ,
क्या नही पर्यावरण हमसे संभल रहा ?
प्रदूषण ,पालीथीन ,वन्नोमूलन ,खनन ,मिलावट को
अब हम सब मिलकर त्यागें !!

Sunita Sharma Lakhera

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HUMANITY

In this world of vivid souls,
Everyone is after reaching ones goal
Oh ! My soul in the search of humanity ,tries to find God ,
Where ever I go for the exclusive identity ,
In search of Heart with prints of compassion ,
To understand love and brotherhood,
To bring salvation with kindness and gratitude ,
To bring peace in every distress soul ,
To wipe tears of all destitute ,
To bless an orphan ,handicapped,and lovers of humanity,
To bring laughter in resentful souls,
Oh! My Almighty ,give me courage ,strength and wisdom,
To serve humanity not by words but in action ,
So that this world of vivid souls feels your touch .27/7/2012

 

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