Author Topic: Bal Krishana Dhyani's Poem on Uttarakhand-कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी  (Read 35047 times)

devbhumi

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ऊ फ्योंलडी का  फूल

ऊ फ्योंलडी का  फूल
गोदड़ीयूँ  का लगुंला
घड़ेक बैठि  कि पास
देखि जा  यूँ थे रे मेर छूछा

इखुलि ना देख अफि
ऊ सुपन्या दूर अगास
कबि त खोजी ले जरा
क्या च धरयुं तेर पास

ना भितर ना भैर कर 
ना कैर यन चकच्याट
ऐंठ ना यन अपडों मां
जिबन मा रखि ऐकू खैल

पूरना लोकों कि  छुई
कबि  ना बिसरि जेई 
खुद आलि  त्वे थे बोई कि
छक्वै कि आँसू बोगैई

फ्योंलडी  का  फूल  ......

बालकृष्ण डी ध्यानी
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devbhumi

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लमडेर ज्यू

पहाड़ो मा हर्चि जिंदगी हमारी
कब आलि हमारी बी यख बारी

लमडेर ज्यू क्खी को  नि  राई
बैठ्यु जख वखि को व्हैग्याई

टिपडि जोड़ि छत्तीस गुण मिलेई 
स्वांग धैरी ऊ  सबि बेकार ग्याई

कुटमदरि न खूब नचै  गवई
फटयूं  झौळ  छ्या मेरु खतेई

यख भतेक वख लपाक लगैई
नींद ऐई मि बल झपाक लगैई

क्याला खै कि सोची ऐ बात
बिकास आलू बैठ्युं दिन रात

देंणा कन व्हाला देबता मेरा
लमडेर ज्यू छ्या लमेडग्याई

बालकृष्ण डी ध्यानी
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devbhumi

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अब फेसबुक मा बैठी

सुणा सुणी ले
बिकासा को गीत
पहाड़ बुन्नू च
कख हरच्यु म्यारु मीत

प्रगति बल
आधार मा सिमटिगे
डाली काटी कि
सर्या श्रृंगार बदलिगे

बंजा पुगंडा
रीता कुडा डंडा नंगा
धुरपलि मा दुबलू
सैर मां बाबा

जननी न  बोल
अनवार बदलि गे
आंखा घुधलणी
सौंसार बदलि गे

स्वाणी छ्या गाथा
गाड़ गदनियां बाटा
डाम  दामि कि
सारू साज बीसी गे

बिराण  छोड़ी कि
भागि गे तुम सब
अब फेसबुक मा बैठी
मंडाण लगणा छौ

बालकृष्ण डी ध्यानी
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devbhumi

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अपणि दुधबोली

अपणि दुधबोली थे बिसरि तू ना जैई 
कोसिस करदा रै विं बान बिरदी तू ना जैई
वे बाटों मा जब त्वे ठोकर लगेली लाटा
मुख भतेक बस बल तू बोई बोल देई

बन बनि का रंगों मा कनि वा रंगी छा
धारा पुंगड़ों वे माटूं मा वा देख बोति छा
बुराँस फ़्यूँलि जनि विंकी बि ग्लोडि हॅसे देई
अपड़ा बच्चों थे बि विं थे तू सीखे पढ़े दे

हमारि मातृभाषा हमारि पच्छ्याण छा
रीती रिवाज बार तियोहार कि धोरांयण छा
ब्वन्न-बच्याण अर पढ़ण-लिखणा मा
त्वे थे अपड़ी ही शरम किले ऐजाँदी जाँदी 

बगत अपड़ो काम करलो तू अपड़ो कैदेई
द्वि डंडा आखार का तू बि वै मां जोड़ जैई
इतगा पुराणी संस्कर्ति  तू जोड़े कि राखि
त्वे जानू नि हुलु रे यख  यन बड़ भागी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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devbhumi

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इतगा छितगा

इतगा छितगा कैन छितैई
छितरा ह्वैकि  क्या तिळ पाई 

त्येरि पीड़ा तेमा  ही राई
बोई तिल खैरी खैकि क्या पाई

अफु नि खै  मि ते  खिलैई
अध् पोटि रै कन  बुक मितेई

रातबियांणामा उठिदि तू रैई
आंख्युं सैलि पौडी कैते जग्वाई

कबि ख्वोली गिच्ची मि नि देकि
अप्डी पिडां ते अफि मा लुकेई

डाळयूं कि टुक्येंड्यू मा घास कु गैई
छर भूँया लमडी अप्डू ह्टगु टूटैई   

त्वै छोड़ि त्यारा परदेसुमा बसिगैनि
रूण झुण बरखा सि किलै तू रुणि   

हेरदा बाटा आज कैते खोज्याण
हेरदा हेरदा बोई त्यारा खुत्युँ सेवा लाण 

बालकृष्ण डी ध्यानी
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devbhumi

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दुनिया तू मिते भुलिगे रै

दुनिया तू मिते भुलिगे रै
मि बि त्विते भुलिगियूं ... २
दुनिया तू मिते भुलिगे रै

लमडी फूटी कपाल मेरु
छूति खुति जूति तैलू स्यारू
दौड़ी नि ऐई कुई ऐ जन ऐ सैलु
घाम जनि खड़ाखडी मि रैगियूं

अपड़ी मां इतगा गिजी रै तू
अपड़ों दगड इतगा बिजि रै तू
तू मिते बिसरि गे रै
मि त्विते बिसरिगियूं

आँखा अब बोलण लग्यां रै
हर्ष कि दुःख त्वेते जोड़ण लग्यां रै
जान कैन कन पौद जमैई हमन
लगै बढ़े वैते सबि बिसरण लग्यां रै

रति अब सिण लगि रै
गैणा छुई जून दग्डी लगि रै
कैते रैबार पाठ्यांण हमन
यखुला छ यखुली रैगे जिबन

दुनिया तू मिते भुलिगे रै

बालकृष्ण डी ध्यानी
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rbrbist

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नमस्कार
अति सुंदर


वन्देमातरम ll
ओम हर हर महादेव ll जय माँ ll

devbhumi

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ठण्डे ठण्डे शरबत

ठण्डे ठण्डे शरबत
म्यारू पहाड़ा म्यारू पर्बत 
बैठ भूली दुई घड़ेक
छुई बाता लगूँला

नूडल  यु गडलु
जरा  खैकि देखलु
कन लग दू
सिकसैर जरा मि करलु

नै जमानु चकमक
लग्युं च कन रंगमत
व्हैग्या भंडि खतपत
धीर गैवै ना खै सत सत

अपड़ी उमरी खैरी
दुई गफ सुख नि खेई
हम्ररी ऐ कथा ऐ पीड़ा
हमरा दगड ऐई  गेई

ठण्डे ठण्डे शरबत

बालकृष्ण डी ध्यानी
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devbhumi

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दाणि हिंसोला कि

दाणि हिंसोला कि
रौलों मा ऐकि
खैजा खैजा खैजा तू खैजा
नांगी पिं गी  दाणि
खैणा कु तू ऐजा 

दाणि हिंसोला कि खैजा
खैजा तू खैजा .... २

रौलों मा हेर दा 
खोलों  मा तिप दा
खति-मिति दाणि
म्यारा हता न खैणा  कुन तू  ऐजा 
खैजा तू खैजा

दाणि हिंसोला कि
खैजा तू खैजा .... २


स्वास ते  स्वासा मा
जोड़ी की  खैजा
छुईयों  ते अप्डी
मेरी ओर्री मोडि की तू  खैजा

दाणि हिंसोला कि
खैजा तू खैजा .... २

उल्यरा कु दिन  ऐई
तू सौरास नि जैई
जाडू लग्णु  जी
तू म्यारा रजैई  मा ऐई
सै  जेई
खैकि  हिंसोला
खैजा तू खैजा

दाणि हिंसोला कि
खैजा तू खैजा .... २

मुलमुल हैंसणि वा
मिठ्ठी बूंद जनि  तरकणि वा
जीभि मा बकळि सि
मळमळि खिजे जाणि वा
खैजा तू खैजा

दाणि हिंसोला कि
खैजा तू खैजा .... २

रितु चौमासा
ऐगे मम्यारू  पास
छुई लाग्नु दुई  घडी
यन तू बि ऐजा  म्यार पास
खैजा तू खैजा

दाणि हिंसोला कि
खैजा तू खैजा .... २

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मेर माया

गढ़ भूमि गढ़ देश मेर माया
मि रेग्यूं, रेग्यूं ,रेग्यूं रेग्यूं
रेग्यूं अपड़ा  मां
मि रेग्यूं मि रेग्यूं मि रेग्यूं
अपड़ा  मां

फूल पाखों की माया
नि  गे  भैर  ....२ नि  गे  भैर  भैर. भैर भैर
बल  रेग्यूं मि  रेग्यूं अपड़ा भित्र  भित्र
अपड़ा  मां
मि रेग्यूं,मि रेग्यूं  रेग्यूं ,रेग्यूं रेग्यूं
रेग्यूं अपड़ा  मां मि रेग्यूं,

कुलौ दगडी मेर माया
मेर माया कुलौ दगडी
जोड़  जोड़ जोड़ी  रेग्यूं
अप्डी  माया  मेर   माया
भित्र  भित्र  अपड़ा भित्र  रेगे
मेर माया.....   माया  .....   माया .... मेर माया.
मि रेग्यूं,मि रेग्यूं  रेग्यूं ,रेग्यूं रेग्यूं
रेग्यूं अपड़ा  मां मि रेग्यूं,

अपड़ो की माया
जख तख मिसे, वख तख मिसे
लांद लांद अ  जांदा जांदा अ
अग्ने पिछने  आंदा लांद जांदा अ
 माया.....  मेर माया  .....   माया .... माया
रेग्यूं  रेग्यूं ,रेग्यूं रेग्यूं
अपड़ा  मां मि रेग्यूं,

झुटि स्याणी छे , देखी जाणी  छे
आँखु देखि  सुणी जाणी छे मेर   माया
मेर   माया  ...... अ
किले रोयेंदी  मिथे  बोथेदी मेर   माया
मेर   माया  ...... अ
सऊँ खयेंदी पाणी  जाणी  बोगी  जाणी  छे ऐ ऐ
बोगी  जाणी  छे ऐ ऐ
बोगी  जाणी  छे ऐ ऐ  मेर माया
मेर माया , मेर माया ........ अ

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