Author Topic: Bal Krishana Dhyani's Poem on Uttarakhand-कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी  (Read 324364 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
हिन्दी गीता कु ये च गढ़वाली बोळ संस्करण तुम थै कंण लग जी
March 30, 2013
कबै कबै

कबै कबै मेरू जीयु माँ ,खैल आणू छा
की जनी तै कू बणई गै हौलू मेरु बाण
तू अबै से पैल सितार मा बसै छ कख
तै थै भूमी मा बुलेगे मेरू बाण
कबै कबै मेरू जीयु माँ ,खैल आणू छा

कबै कबै मेरू जीयु माँ ,खैल आणू छा
कै ऐ सरीर ऐ नजरी मेरू ठेही छे
ऐ लटलूँ की घानी शालो छा मेरु बाण
ऐ ऊंठा और्री ऐ बयाँ मेरू ठेही छे
कबै कबै मेरू जीयु माँ ,खैल आणू छा

कबै कबै मेरू जीयु माँ ,खैल आणू छा
की जणी तू मीथै चैहली उमरी भरी ई णी ही
उठेला मेरु ओर्रॆ प्रीत की नजरी ई णी ही
मी जंणदूँ तो परै छे मगरी ई णी ही
कबै कबै मेरू जीयु माँ ,खैल आणू छा

कबै कबै मेरू जीयु माँ ,खैल आणू छा
की जणी बजणा छा तुर्तरी सा बाटों मा
सुहग रात छा पलू उठाणू छो मी..२
सिमटणी छे तू शरमे के मेरु बयाँ मा
कबै कबै मेरू जीयु माँ ,खैल आणू छा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

हिंदी गाणा बोल छंण ... कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है
चित्रपट : कभी कभी
गढ़वाली मा ये बोल जी कंन लाग्यां जी आप थै बतवा जरुर जी
हिन्दी गाने का ये का गढ़वाली बोळ संस्करण

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
हिन्दी गीता कु ये च गढ़वाली बोळ संस्करण तुम थै कंण लग जी
March 22, 2013
तै बिगैर

तै बिगैर कया छ जग्णु कया छ जग्णु
तै बिगैर कया छ जग्णु

तै बिगैर जग्णु कंण कै
कंण कै जग्णु तै बिगैर
जुग जुग भ्तेक बड़ा छन राता
जुग जुग भ्तेक बड़ा छन दिण
ऐ जवा परती की तुम दगडी जीकोड़ बचाणु छा

फिर ऐगै ब्योखोंण एक्लोप्न जगै फिर खुद तुम्हरी आणी छ
फिर जीयु भैर ऐणु लगै फिर मी थै तरपाणु लगै
यों जीयु मा खुद का कौतीग छन तै बिगैर भुत हम यकला छों
ऐ जवा परती की ........

कया कया णी सोची छा मील कया कया णी सुप्निया जगै
कया कया णी इछा छे जीयु णी कया कया णी आस जगैणी
यों जीयु मा बादल फटणा छन तै बिगैर णा त जीण छों णा मरणा
ऐ जवा परती की ........

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

हिंदी गाणा बोल छंण ... तुम बिन जिया जाए कैसे
चित्रपट : तुम बिन
गढ़वाली मा ये बोल जी कंन लाग्यां जी आप थै बतवा जरुर जी
हिन्दी गाने का ये का गढ़वाली बोळ संस्करण

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
हिन्दी गीता कु ये च गढ़वाली बोळ संस्करण तुम थै कंण लग जी
March 17, 2013
बोल्यों दगडी ना पुछा

बोल्यों दगडी ना पुछा
बोल्यों पर कया बिती छ

हाँ वोंका जिकोदी दगड़ा ये पूछ
इछा ओं पर कया बिती छ

और्री थै पिलांदा रैंदा छन
और्री खुदै तिस्ला रै जांदा
ये पीण वाल कया जणदा
वों गिलासों पर कया बिती छ

देब्तों नी बणाई मनु थै
मनु प्रीत कै बैठी
वो उपरी बैठी के कया जणदू
मनु पर कया बिती छ

बोल्यों दगडी ना पुछा.....

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

हिंदी गाणा बोल छंण ...दिवानो से मत पूछो
चित्रपट :उपकार (१९६७ )
गढ़वाली मा ये बोल जी कंन लाग्यां जी आप थै बतवा जरुर जी
हिन्दी गाने का ये का गढ़वाली बोळ संस्करण

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
1 hr ·

आँखों कु पाणी बगदा रे ई

आँखों कु पाणी बगदा रे ई
बगदा रे बग्ने से कदी तिन हार नि मानी
आँखों कु पाणी बगदा रे ई
लाटी ई जवानि दौडी दी रे ई
जिकडो रे ते न दौड़ दौडी की कदी हार नि मानी
आँखों कु पाणी बगदा रे ई

बिंगणु नि यख क्वी अपरा गै ई
अपरा गै ई क्ख्क हर्ची रे हर्ची गे ये सारी
सुनदा नि पाणि बिसी गै ई
बिस्दा बिस्दा अपरू की खुद नि बिसी गै ई
आँखों कु पाणी बगदा रे ई

क्द्गा बी तू बोगी पाणी
क्द्गा बी बोगी पाणी कैल नि सुणु नि सुणु तेरु पाणी
संसार ते थे जपै माया जपै माया संसार ते थे
हात तेरी नि ऐई कुच जपै तिल कया पाई माया संसार से
आँखों कु पाणी बगदा रे ई

आँखों कु पाणी बगदा रे ई
बगदा रे बग्ने से कदी तिन हार नि मानी
आँखों कु पाणी बगदा रे ई
लाटी ई जवानि दौडी दी रे ई
जिकडो रे ते न दौड़ दौडी की कदी हार नि मानी
आँखों कु पाणी बगदा रे ई

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
बालकृष्ण डी ध्यानी
7 hrs · Edited ·

स्कुल जिंदगी का

स्कुल जिंदगी का
यंहा किसने बनया होगा
गम और खुशी का मेला
यंहा किसने लगाया होगा
स्कुल जिंदगी का..........................

आँखों को किसने
यंहा देखना सिखाया होगा
पैरों को जीवन पथ पर
किसने चलना सिखाया होगा
स्कुल जिंदगी का..........................

साँसों की लय पर
जंहा धड़कन नाचती हो जी
उस सीने की बढ़ती घटती रफ़्तार को
किसने धड़काया होगा
स्कुल जिंदगी का..........................

हाथों को कैसे पता चला जी
किसको गले लगाना है
चेहरे को कैसे मालुम हुआ
किस से शरमाना,लजाना है
स्कुल जिंदगी का..........................

जीवन मरण के इस खेल को
किसने यंहा बिछाया होगा
पाप पुण्य के इस भेद को
कौन यंहा समझ पाया होगा
स्कुल जिंदगी का..........................

स्कुल जिंदगी का
यंहा किसने बनया होगा
गम और खुशी का मेला
यंहा किसने लगाया होगा
स्कुल जिंदगी का..........................

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
December 13 · Edited
अपरा पाड़ों मा ह्युंद पोड़ी गे होलू

अपरा पाड़ों मा ह्युंद पोड़ी गे होलू
कै कोयेडु कै कुल्हण वो घाम लुकियूं होलू

डंडा धारा घार दार सब गरठियुं होलू
जदु दगडी सबी कु कामकाज थमी होलू

टैम टेबल हर्ची हर्ची सुबेर ब्योखोन होलू
आग तपदा तपदा छूईं मा बेल हर्ची गै होलू

नींदि नि सबी थे अपरू अंग्वाल लेलीं होलू
मेरु पाड़ा सन्कुली निरजक सै गै होलू

अपरा पाड़ों मा ह्युंद पोड़ी गे होलू
कै कोयेडु कै कुल्हण वो घाम लुकियूं होलू

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
December 9 · Edited
जब से देखी तेरी मुखडी

जब से देखी तेरी मुखडी
मा वा जून की जुन्याली
अंधारू उजाळु व्है जांदी
जब वा आपरी नजरि मिलांदी
जब से देखी तेरी मुखडी

माया इनि लगोंदी छुची
आँखों दगडी वा इनि ब्चांदी
दन्त पंक्ति हैंसी देख्दा देख्दा
विं ग्लोडी ये दिल लुची जांदी
जब से देखी तेरी मुखडी

बांदों मा की बांद छे या
सरगा बाटू ऐ क्वी तू अछेरी
मी बना दे अपरू जीतू बग्वाल
मेर बांसुरी व्हैगे अब से तेरी
जब से देखी तेरी मुखडी

क्या क्या जतन करू मी
कण कणके ते थे मी मनेऊ
कब तेरी मया व्हाली मेरी
दिन राती तेरा सुप्निया सजेऊँ
जब से देखी तेरी मुखडी

जब से देखी तेरी मुखडी
मा वा जून की जुन्याली
अंधारू उजाळु व्है जांदी
जब वा आपरी नजरि मिलांदी
जब से देखी तेरी मुखडी

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित
Photo: जब से देखी तेरी मुखडी जब से देखी तेरी मुखडी मा वा जून की जुन्याली अंधारू उजाळु व्है जांदी जब वा आपरी नजरि मिलांदी जब से देखी तेरी मुखडी माया इनि लगोंदी छुची आँखों दगडी वा इनि ब्चांदी दन्त पंक्ति हैंसी देख्दा देख्दा विं ग्लोडी ये दिल लुची जांदी जब से देखी तेरी मुखडी बांदों मा की बांद छे या सरगा बाटू ऐ क्वी तू अछेरी मी बना दे अपरू जीतू बग्वाल मेर बांसुरी व्हैगे अब से तेरी जब से देखी तेरी मुखडी क्या क्या जतन करू मी कण कणके ते थे मी मनेऊ कब तेरी मया व्हाली मेरी दिन राती तेरा सुप्निया सजेऊँ जब से देखी तेरी मुखडी जब से देखी तेरी मुखडी मा वा जून की जुन्याली अंधारू उजाळु व्है जांदी जब वा आपरी नजरि मिलांदी जब से देखी तेरी मुखडी एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
बालकृष्ण डी ध्यानी
3 hrs ·

कुछ तो लिखूं

कुछ तो लिखूं ......२
जो ये मेरा दिल कहे
इस फलक पर सब वो उभरे
जो मै सोचों ये मन मेरे
कुछ तो लिखूं ......२
जो ये मेरा दिल कहे

इस हरेभरे रंग को लेकर
सब के जीवन में मै उतार लूँ
नीले गगन के संग उड़कर
बहती नदी का बहाव बनू
कुछ तो लिखूं ......२
जो ये मेरा दिल कहे

चिड़ियों की तरह चहकूं मै
भौरों की मै गुनगान बनू
फूलों की मुस्कान हो मुझमें
चाहे फिर एक पल का मै मेहमान बनू
कुछ तो लिखूं ......२
जो ये मेरा दिल कहे

वो लिखता चले मुझमें उसे
मै उस पर यूँ ही लिखता चलूँ
गर मै कंही रोक भी गया
मेरे अधूरे पथ पर और कोई चले
कुछ तो लिखूं ......२
जो ये मेरा दिल कहे

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
बालकृष्ण डी ध्यानी
December 18 at 12:34am · Edited ·

स्कुल जिंदगी का

स्कुल जिंदगी का
यंहा किसने बनया होगा
गम और खुशी का मेला
यंहा किसने लगाया होगा
स्कुल जिंदगी का..........................

आँखों को किसने
यंहा देखना सिखाया होगा
पैरों को जीवन पथ पर
किसने चलना सिखाया होगा
स्कुल जिंदगी का..........................

साँसों की लय पर
जंहा धड़कन नाचती हो जी
उस सीने की बढ़ती घटती रफ़्तार को
किसने धड़काया होगा
स्कुल जिंदगी का..........................

हाथों को कैसे पता चला जी
किसको गले लगाना है
चेहरे को कैसे मालुम हुआ
किस से शरमाना,लजाना है
स्कुल जिंदगी का..........................

जीवन मरण के इस खेल को
किसने यंहा बिछाया होगा
पाप पुण्य के इस भेद को
कौन यंहा समझ पाया होगा
स्कुल जिंदगी का..........................

स्कुल जिंदगी का
यंहा किसने बनया होगा
गम और खुशी का मेला
यंहा किसने लगाया होगा
स्कुल जिंदगी का..........................

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
बालकृष्ण डी ध्यानी
December 16 · Edited ·
·

मेरे शब्द

मेरे शब्द
मेरी आवाज बन जा
मन के घेरे से उड़
और आकश बन जा

मेरे शब्द
मेरी कलम पर सवार हो जा
ले अश्व का वेग
इस पन्ने पर निसार हो जा

मेरे शब्द
करूँ साक्षात्कार तेरा
विचार विमर्श हो
और बड़े आदान प्रदान तेरा

मेरे शब्द
क्यों छटपट रहा है
अकेले में बैठा बैठा
क्यों तू बड़बड़ा रहा है

मेरे शब्द
मेरी पहचान बन जा
ना कर बेगाना मुझको
ना मुझे यूँ बेजुबान कर जा

मेरे शब्द
तू मुझ में यूँ ना खोजा
एक कोने में रहकर
तू यूँ अकेला ना सो जा

मेरे शब्द !!!

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

 

Sitemap 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22