Author Topic: भरत नाट्य शास्त्र का गढवाली अनुवाद , Garhwali Translation of Bharata Natya Shast  (Read 3912 times)

Bhishma Kukreti

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व्याधि भाव अभिनय: व्याधि भावौ पाठ खिलण

 गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण
Performing Disorder  Sentiment  in Garhwali Dramas
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
 भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा -  55
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती

व्याधयस्तैsपि  खलु मुखविकूणनगात्रस्तम्भस्रस्ताक्षिनि: श्वसनस्तनितोत्क्रुष्टवेपनादिभिरनुभावैरभिनेया:। 
(७,८२ कु परवर्ती गद्य )   
गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या  - -
अनुवाद - व्याधि पाठ खिलणो कुण मुख मुंजमुंज (सिकोड़ना ) करण,  सरैल का अंग जड़वत करण , आंख्युं म भारीपन दिखाण, लम्बी लम्बी सांस लीण , कम्मण  अदि करतब  करे  जान्दन। 
व्याख्या -  वैद्य शास्त्र म सरैल म वात , पित्त अर  कफ कु  असंतुलन से व्याडि उतपन्न हूंद।  यूं  तिन्युं म विकार से चित्त वृति बिगड़दी च।  यीं  चित्तवृत्ति तैं  व्याधि बुल्दन।  व्याधि भौं भौं प्रकारै हूंद अर  वे अनुसार इ  अभिनय करे जांद। 
गढ़वाली  लोक नाटकों  म   व्याधि भाव  उदाहरण -
गढवाली लोक नाटक में व्याधि   भाव
 यह नाटक हम बच्चों /युवाओं ने जसपुर, मल्ला ढांगू , पौडी गढ़वाल के भटिंडा डांडा में  1968-69 खेला था।
रोगी (पीड़ा से बिलखते हुए, कभी  इधर कभी उधर  ) - ए ब्वे मोरि ग्यों।  शूल पीड़ा हूणी च। ब्वे असह्य पीड़ा ! मोरि ग्यों
रोगीक ब्वे -फिकर नि कौर।  हम कुछ ना कुछ करला।
रोगी (रुंद ) -अबि कुछ कौर
ब्वे -त्यार  काका तैं पुछेरम भेज्युं च
काका - मि पुछेर बिटेन पुछि ऐ ग्यों।  बकीन बोल बल नागराजा द्वाष च।  नागराजा को घड्यळ धरण पोड़ल।
ब्वे- ठीक च आजि रात नागराजा को घड्यळ धौरि दींदा।  जा जागरी जी तैं सुचना दे दे।
रोगी  (किरांद -किरांद ) - अरे वैद जी तैं बी बुलावो
अंत में हमने नागराजा का जागर गाया था और नाचे थे।

 गढ़रत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म  व्याधि  भाव ; गढ़वाली नाटकों म  व्याधि भाव ;गढ़वाली गद्य म   व्याधि भाव ; गढवाली लोक कथाओं म   व्याधि भाव
Raptures in Garhwali Poetries, Disorder  Sentiments  in Garhwali Dramas and Poetries and in miscellaneous  Garhwali  Literature, Disorder Sentiments   in Garhwali Poetries,  Disorder Sentiments in Garhwali Proses


Bhishma Kukreti

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उन्माद भाव अभिनय: उन्माद  भावौ पाठ खिलण

 गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण
Performing  Insanity   Sentiment  in Garhwali Dramas
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
 भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 56
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती

ततनिमित्तहसितरुदितोत्क्रुष्टासंबद्धप्रलापशयितोपविष्टोत्थितश्चेष्टानुकरणादिभिरनुभावैरभिनयेत्। 
( ७ , ८३ कु  परवर्ती गद्य )
गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या  - -

अनुवाद -उन्माद (बौळ्याण )  भावौ पाठ खिलणो  कुण  कबि  हंसण , कबि  रूण , कबि  बैठण , कबि उठण  या पौड़  जाण  या अंसगत चेष्टा करणो  करतब दिखाए जांदन। 
व्याख्या -  प्रिय जन क वियोग हूण , आकस्मिक कारणों से या द्रिव्य नष्ट हूण  पर , चोर या शत्रु आक्रमण हूण पर , कफ , पित्त कुपित हूण पर मनिख कबि कबि बौळ्याण  मिसे जांद।  या चित्त वृति उन्माद  च।  इखम  मनिख कुछ बि  करण लग जांद जन हंसण , चिरड़ेण , कुछ बि  निरर्थक बुलण  आदि
गढ़वाली म  उन्माद भाव  उदाहरण -
एक  दैं  मीन  मित्रग्राम (ढांगू , पौड़ी गढ़वाल , उत्तराखंड ) म बादयूं  लोक नाटक देखि छौ जखम   हीरा  बादीन एक मनिखाक  पथ खेली छौ जैक चोरी ह्वे  अर  वै  मनिख पर अचाणचक बौळ  चढ़ गे।  बौळम उ  कबि  हॅंसो , कबि  र् वावो , कबि  डाळ म चढ़णो  स्वांग कारो तो कबि  भागणो  स्वांग कारो।  उन्माद भावो सुंदर प्रदर्शन छौ। 
  स्वरूप ढौंडियाल कृत 'मंगतू बौळ्या ' नाटक म तो मुख्य चरित्र मंगतू बौळ्या  च अर  नाटक म भौत दैं  मंगतू व्यवहार म उन्माद भाव दिखाए गेन।   
 रत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म   उन्माद भाव ; गढ़वाली नाटकों म  उन्माद भाव ;गढ़वाली गद्य म  उन्माद  भाव ; गढवाली लोक कथाओं म   उन्माद भाव
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Bhishma Kukreti

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मरण भाव अभिनय: मरण   भावौ पाठ खिलण

 गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण
Performing  Death  Sentiment  in Garhwali Dramas
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
 भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 57
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती
विषण्ण्गात्रव्यायतांगविचेष्टितनिमीलितनयनहिक्काश्वासोपेतानवेक्षितपरिजनाव्यक्ताक्षरकथनादिभिरनुभावैरभिनयेत्। 
(७,  ८५  का परवर्ती गद्य )

गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या  - -
अनुवाद -मरण भावो पाठ खिलणो  कुण संज्ञाहीन सरैल दिखाण , संज्ञाहीन चेष्टा, विकृत मुख , कतड्यां  आँख , भटुळी लगण (हिचकी ), सांस चलण , अपर लोगुं  तै नि पछ्यण  , गदबद  शब्द  जन करतब दिखाए जांदन। 
व्याख्या -  मरण  द्वी प्रकारै हूंद एक रोग से अर  दुसर  अपघात से . तो दुई मृत्युं  तै बिगळ्यूं बिगळ्यूं  प्रकार से दिखाएं जांद।   
गढ़वाली म  मरण भाव  उदाहरण -
गढ़वाली लोक गीतों म रणभूत लोक गीत , गाथा , हंत्या  जागर आदि मरण अभिनय का उदारण  छन। 
 भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म   मरण भाव ; गढ़वाली नाटकों म  मरण भाव ;गढ़वाली गद्य म  मरण  भाव ; गढवाली लोक कथाओं म   मरण भाव
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Bhishma Kukreti

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    त्रास भाव अभिनय:  त्रास भावौ पाठ खिलण

 गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण
Performing  Terror  Sentiment  in Garhwali Dramas
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जना  प्रयत्न )
 
 भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - ५८
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती
तमभिनयेत्संक्षिप्तंगोत्कम्पनवेपथुस्तम्भरोमांचगद्गदप्रलापादिभिरनुभावै:। 

गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या  - -
अनुवाद -
त्रास भावो पाठ खिलणो  कुण अंग बटण /अंग संकुचित करण , कमण , खड़ा -खड़ी -बैठ्या बैठी (जख्म च तखमी) /स्तम्भित हूण , रोमांचित हूण , कंठ  अवरुद्ध  हूण  अर लम्बो रूणो करतब दिखाए जांदन।
व्याख्या -
भंयकर बादल गिरजणि , बाघौ गिरजणि , बिजली चमकण , आदि सूणि , गैणा भ्यूं पड़न देखि जु  डौर -भौ  पैदा हूंद वो त्रास च।  डौरन मनिख अपण अंग बौटि /संकुचित लीन्दो , मुट्ठी बौटि  लींद , जगा जगा रै जांद , अर जीब लड़खड़ाइ  जांद .
गढ़वाली म त्रास  भाव  उदाहरण -
रणभूतों ,  भादों मास म जब बरखा , बिजली कड़कणी  हो तब कृष्ण जन्म जन लोक  नाटकों म  त्रास भाव दिखाएं जांद।  या जब कबि  गाँव म बाग़ आतंक का लोक नाटक खिले जावन जन कि  गोठम बाग़  आण अर  बागौ गिरजणि  लोक नाटक खिले जावो तो त्रास भाव को अभिनय करे जांद  .

 भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म  त्रास  भाव ; गढ़वाली नाटकों म  त्रास भाव ;गढ़वाली गद्य म   त्रास भाव ; गढवाली लोक कथाओं म   त्रास भाव
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वितर्क भाव अभिनय:  वितर्क  भावौ पाठ खिलण

 गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण
Performing Deliberation Sentiment in Garhwali Dramas
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
 भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - ५९
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती

तमभिनयेद्विविधविधविचारितप्रश्नसम्प्रधारणमंत्रसंगूहनादिभिरनुभावै: ।   
(७, ९१  का परवर्ती गद्य )
गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या  - -
अनुवाद - वितर्क भाव पाठ खिलणो कुण द्वार बिचार करणो उपक्रम , प्रश्नों से मत निर्धारित करण , मंत्रणाओं तै गोपनीय रखनों उपक्रम , जन क्रियाओं प्रदर्शन करे जांदन।
व्याख्या - कै  बात पर संशय हूण पर विचार करण या कै  विशेष अनुभव आधार पर अनुमान लगैक हम जु  कल्पना करदवां , वै समय की वृति तेन वितर्क बुले जांद। अभिनय म मुंड हलाण  अर  भौं तौळ -अळग करण   पड़दन। 
गढ़वाली म  वितर्क भाव उदाहरण -
एक लोक नाटकौ  उदारण  द्याखो -
बुड्या (मूँद हलांद हलांद )  -   मीन गैणा  टुटद  द्याख अवश्य ही कुछ  बुरु हूण  वळ  च पर क्या ? क्या हूण  वल होलु ?


 भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म वितर्क भाव ; गढ़वाली नाटकों म  वितर्क भाव ;गढ़वाली गद्य म वितर्क भाव ; गढवाली लोक कथाओं म  वितर्क भाव
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सात्त्विक  भाव  का भाव

 गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण
Emotional   Sentiment  in Garhwali Dramas
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
 भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा -  60
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती
   सत्वं  नाम मन प्रभवम् I
 मनस: समाधौ  सत्त्वनिष्पत्तिभर्वति।। 
७. ९३ कु  परवर्ती गद्य )
स्तम्भ:  स्वेदोsथ  रोमांच: स्वरभेदोsथ  वेपथुः I
वैवर्ण्यमश्च  प्रलय इत्यष्टो  सात्त्विका मता: ।  । 
०७। ९४ )
गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या  - -
अनुवाद - सत्त्व कु  संबंध मन से च , जन कर्ता  की समाधि मन से जुड़ जान्दि , तब सात्विक भावों उतपत्ति  हूंद (७, ९३ )
स्तम्भ , स्वेद, रोमांच , स्वर भंग, वेपथु, वैवर्ण्य , अश्व, अर  प्रलय नामौ आठ स्वात्तिक भाव हूंदन।  (7, 94)


 भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
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भाव  स्तम्भ /जड़  हूणो  अभिनय:  स्तम्भ /जड़ हूणो  भावौ पाठ खिलण

 गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण
Performing Stunning   Sentiment  in Garhwali Dramas
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
 भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 61
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती
नि:संज्ञो  निष्प्रकम्पश्च  स्थित:: शून्यजडाकृति:। 
स्कन्नगात्रतया चैव स्तम्भं  त्वाभिनयेद्बुधैः।  । 
(७, १०१)
गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या  - -
अनुवाद - स्तम्भों पाठ खिलणो कुण  संज्ञाहीन  ह्वेका , निश्चेष्ट ह्वैक , सरैल तै जड़वत्त करिक , सरैल स्थिर करिक  आदि सरैलो चेष्ठाओं प्रयोग करे जांद। 
 
गढ़वाली म स्तम्भ  भाव  उदाहरण - रामलीला म दशरथ मृत्यु समाचार मिलण पर राम चरित्र स्तम्भ भाव क अभिनय करदो। 
इनि  भानु भूपाल रण बहुत गीतम बि  स्तम्भ भाव दिखाए गे -
भानु भोपालो   स्वर्गवास होये
xxx
मलासदी सेईं मुखड़ी वींकी माता
हे बेटा मेरा कसूर नी
 भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती , मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
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Bhishma Kukreti

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स्वेद भाव अभिनय: स्वेद /पसीना  भावौ पाठ खिलण

 गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण
Performing Sweat  Sentiment  in Garhwali Dramas
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
 भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 62
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती
व्यंजनग्रहणाच्चापि  स्वेदापनयेनेन च। 
स्वेदस्याभिनयो योज्यस्त्था वातभिलाषत:।  ।    .
(७, १०२ )
स्वेद भाव कु  गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या  - -
अनुवाद - स्वेद पाठ खिलणो  कुण  हथम पंखा लेकि हवा करण, पसीना पुंछण , हवालगणै  इच्छा बताण  जन आदि क्रियाओं प्रयोग हूंद। 
 भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म  स्वेद भाव ; गढ़वाली नाटकों म स्वेद भाव ;गढ़वाली गद्य म  स्वेद भाव ; गढवाली लोक कथाओं म  स्वेद भाव
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रोमांच सात्विक भाव अभिनय: रोमांच सात्विक भावौ पाठ खिलण

 गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण
Performing Thrill Emotional   Sentiment  in Garhwali Dramas
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
 भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 63
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती
मुहु: कंटकितत्वेन तथोल्लुकसनेन च। 
पुलकेन  च रोमांच गात्रस्पर्शेन  दर्शयेत।  । 
( ७ , १०३ )

गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या  - -
अनुवाद - रोमांच क पाठ खिलणौ  कुण  बार बार कंटकित हूण , बाळुं  खड़  हूण , पुळेण  अर सरैल पर भिंटेण  जन क्रिया करण  पड़द .

 भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म  रोमांच सात्विक भाव ; गढ़वाली नाटकों म रोमांच सात्विक भाव ;गढ़वाली गद्य म  रोमांच सात्विकभाव ; गढवाली लोक कथाओं म  रोमांच सात्विकभाव
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स्वर  भंग भेद भाव अभिनय:   स्वर भंग भेद भावौ पाठ खिलण

 गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण
Performing  Choking of Voice  Sentiment  in Garhwali Dramas
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
 भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा -  64
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती
स्वरभेदोsभिनेतव्यो  भिन्नगद्गदनिस्वनै: ।  । 
(७, १०४ )
गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या  - -
अनुवाद -
स्वर -भेद  अथवा स्वर भंगौ  पाठखिलणो बाच म भिन्नता अर गौळ  रुंधण  आदि क्रियाओं प्रदर्शन करे जयान्द। 

 भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म  स्वर  भंग भेदभाव ; गढ़वाली नाटकों म स्वर  भंग भेद  भाव ;गढ़वाली गद्य म  स्वर  भंग भेदभाव ; गढवाली लोक कथाओं म स्वर  भंग भेद  भाव
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