Tota Ram Dhaundiyal
हरि ॐ ! सबि सुणदरूँ तै' शिर्नो ! आज आपतै' नैं कविता सुणाणू':-
कुकर संस्कृति
गौडूं इब्जिम कुकर सैंतणा, तीनूं बेळि सदाणा !
पिपळपाणि मा कुकर लगलै ? यो ता कैंन् बिङ्गाणा ?
कुकरा का बण्यां मम्मी, पापा, हम्कु बुलाणा- 'अंकल ! अंटी !'
लाण,खाण, पीणु हमुम नी, ठाठ से कारम घुम्दा बंटी !
स्वतंत्र देश, सर्करि सड़क, हमरि मर्जि जखमा हगौं !
तुमर् मोर अग्नै' हगा ता, उर्गौ वैको; हम क्य करौं ?
गौडूं सैंती; गौंत, गोबर, दूद, दै, छाँच्, नौंण, घ्यू खान्दा ?
मुक्दान, प्रेतदान, पिपळा गौड़ी, बैतरणी भी पार करांदा !
मौ बारा, कुकर अठारा, अहर्निश भुक्दा, मुंडरु कना' !
भुक्णयां कतणा, रैबिज हूंणू, देशमेश एकवेष; जां कनाँ ?
आँखर मिसैं:- शिवरात्रि, वि0 सम्बत्- 2071
सोमवार, 16 फरवरी 2015
मिसाक-मङ्गळेर:- तोताराम ढौंडियाल 'जिज्ञासु'