Author Topic: Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं  (Read 515337 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
Shailendra Joshi
September 11 at 4:12am ·

दाल मैंगी चौल सस्तु
इन्नी बक्की बात
हूँण राली
वू दिन दूर नि अब
दाल भात से दूर हवे जाली................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
एक मैना दूर रयौं,
सोचणु रयौं,
कै कैकु लगणि,
होलि मेरी खुद.......कवि जिज्ञासु

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
...मेरा पहाड़ ! ...........

खड़ा है सामने मेरे पहाड़ जटाऐं फैलाऐ ... ऊंचाई को रौंदकर जिसकी सरपट भागे जाता हूं फुर्र से ,
गहरी पाताल घाटियां और आकाशीय ऊंचाईयां ...
भयाक्रांत नहीं करते मुझे !

हां जरूर ! जा पाता नहीं मै
इसके नुकीले ढलवां कंकरीले खेतों मे
सफेद धवल पानी को सनसनाहट करके बहाती धाराओं के पास ,
उन एकांकी वृक्षों के पास जिन पर मेरे पूर्वजों का है दैवीय स्पर्श ,
उन वीरान रस्तों पर जिन पर चिर निद्रा मे सोई है पुरखों की थकानें ,आहें और पथराई ख्वाईशें ,
नहीं जाता मै जीर्ण शीर्ण मकान रूपी उन अवशेषों के पास जिन की दीवारों ने लोहा लिया था परबत की हस्ती से ,

मै पहाड़ी हूं , दादा जी ने पढाया था मुझे !
पिता पोषित करते रहे इस तथ्य को अपनी पहाड़ न जा पाने की मजबूरियों के चलते ...
तोड़ ली हैं मैने वे विषाक्त मजबूरियां ,और निकल आया हूं पहियों पर पहाड़ चढने ...
काली कोलतारी सड़क ही मेरा पहाड़ है अब
यही है मेरी लक्ष्मण रेखा जिसे लांघना मेरे बूते मे नहीं शायद !
.
.
सुनील थपल्याल घंजीर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
सुनील थपल्याल घंजीर
September 12 at 5:34pm

... सिनक्वली ...

उमर त् अबि छैं रंई खाजों बुखाणां कु , हैलीं फौंकी सि दंतुड़ी मीथै झुरांणा कु
लार ब्वगदी ग्या ताल ह्वाई गिच्ची बंद
सिनक्वली !

गौंमा रंयां मनिख चार ...
द्वी छीं नामा का द्वी धुत बिना जामा का
बाकी दुधी दांतु का बंण गीं प्रधान सयांणा
सिनक्वली !

बचांणा हिमाल कु लग्यूं प्रदेशी नौं
स्वर्ग बंणलो पाड़ गौं मनिखीयूंल खांण सौं
पोड़ी रूमुक पाख सर् र मनिख ढूंढा धौं हे भंयूं
सिनक्वली !

भात ह्वे कच कुचु ह्वेन दाल लुंणकटु
फरड़ा बरात पौंछी धार गौंमा न आदिम चार ह्वाई ऐड़ू हलुवा टटगार भट्टों कु साग सिनक्वली !
.
.
सुनील थपल्याल घंजीर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
September 11 at 8:38pm ·

बाल उड़िगी जब बटे शैम्पू लगाई।
आँखा फुट्टिगी जब बटे नेट चलाई।।

फेशा कु भि भलिके बिणांस ह्वाई।
बन-बनिकि क्रीम-पौडर जु लगाई।।

व्यसनों कि लत कलेजु फूकी ग्याई।
यु जिकुडु भि अब कामा कु नि राई।।

फ़ास्ट फ़ूड खै-खैकि अंदड़ा सड़ाई।
हड़गों मा बगतल हि कीर्तन कराई।।

रुपय्या-पैंसा त तिल खूब कमाई।
पर सब डॉक्टरों जुगता हि ह्वाई।।

शुद्ध पांणि पेकि बड़ु गालू उबाई।
पेप्सी-कोक ला खूब तीस बुझाई।।

घारा कु खाँणा मा स्वाद हि नि पाई।
भैरा कु बासि-तिबासि खूब पचाई।।

घरर्या नुस्खों कि क्वी कदर नि काई।
इलैई रे आज त्यारू यु कुहाल ह्वाई।।

सिकासैरियों मा तिल कन मौ गंवाई।
तन मन अर् धन कु सत्यानाश काई।।

©® सर्वाधिकार: धर्मपाल रावत,
ग्राम- सुन्दरखाल,
ब्लॉक- बीरोंखाल,
जिला- पौड़ी गढ़वाल-246169.
09.09.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
September 10 at 5:10pm ·

अडिग पहाडै नारी
रचना -- राकेश खन्तवाल बबीना
घास लखुडू
कटदा कटदा
डाँड गाड़
आंदा जादा
पल्युन्थुरौ मां
दाथी पल्यांन्दा
वा ढुग्गी घुसेगे
दाथी ख्वीडेगे
पर वीका
हथ खुटा नि घुसे
वा रमकट
बेटी ब्वारी
मेरा पहाड़ की
पहाड़ जन रैगे
सर्वाधिकार - राकेश खन्तवाल बबीना

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
मैं हिमालय बोलणु छऊँ (लम्बी कवितांश )
-
रचना -- भगवती प्रसाद नौटियाल ( जन्म - 1931, गौरी कोट , इडवाल स्यूं, पौड़ी गढ़वाल )
-
इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या - भीष्म कुकरेती

-

मैं हिमालय बोलणु छऊँ
क्य तुम तक म्यरि आवाज
पौंछणी च ?
क्य बोले - बिंगेणू नी च ?
चुचों क्य ह्वे , तुमारि कन्दूड्यों तैं
म्यरि तरौं तुम अज्युं बुड्या नि होयें …
ल्या त हौर जोर करी बोल्दौं (लरै -लरै कि बोल्द )
अरे भै ! मैं हिमालय, हिमालय बोलणु छऊँ
नि बींगि अज्युं बि , तब त
तुम न त उच -कंदुड्या छ्यें न बैरा
औड़ी कीटी तैं बण्या छैं -बैरा
अर वांको कारण ?
कारण मैं बतांदु /गुस्सा नि ह्वेन
म्यरा भूलों , म्यरि भूल्यों /यु कसूर तुम्हारो नी च
कसूर च वीं रीत भौंणो /ज्व तुमन अपणै याले
मि तैं -तुमन भुलै याले
'चल खुट्टि कौथिगै '/तुमतैं आदत पड़गि
मंडा , झंगोरो बाड़ी /अब क्यापि ह्वेगि
म्यरा छा जु /वूं मन्ख्योंन , ऋषि - मुन्योन
म्यरु मान करे , सम्मान करे
वेद अर पुराणों मा /म्यरि स्तुति करे
देव द्यब्तौं न /म्यरि खुगलि खुजाये
शूरबीर , धीर अर पराक्रमी नर नार्यों न
म्यारा अज्वल भाल पर /तिलक लगाये

..........
……

पर ह्वेकि एक रा
अपणि भाषा अर संस्कृति को
मान करा , सम्मान करा
यीं धर्ती को
जैंका माटन
तुम तैं
अ , आ सिखाये
मनिखि बणाये
वीं तैं नमन करा
-
( साभार --शैलवाणी , अंग्वाळ )
Copyright @ Bhishma Kukreti interpretation if any

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
जाने कया सोच्नु छे

जाने कया सोच्नु छे
यकुली यकुली कैथे खोज्नु छे
जिकोड़ो मेरो बोलदे तू
भेद अपरू सारो खोलदे तू

बल एक एक दिस ग्याई
परती कि यख क्वी ना ऐई
छों घंगतोल मा दीदा
सब कख लुकी ग्याई

नि रैगे क्वी संगती साथी
नि रैगे क्वी दियू बाती
आज छन सब यखरा यखरा
भौल क्या कं तिल रे बाछी

समा सुम छ्या यख पसरयूं
ईं देबों पितरों की घाटी
नि रैगे क्वी पूजणा वाल
कण कै बची रैली ये पाटी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
 

नथुली नथुली नाक की नथुली

नथुली नथुली नाक की नथुली, नाक की नथुली ये नाक की नथुली ये
सोना की नथुली नाक की नथुली, नाक की नथुली ये नाक की नथुली ये

चम चमकी नथुली नाक की नथुली, नाक की नथुली ये नाक की नथुली ये
गोल गोल नथुली नाक की नथुली, नाक की नथुली ये नाक की नथुली ये

कण बेगरेली नथुली नाक की नथुली, नाक की नथुली ये नाक की नथुली ये
मेर भूली नथुली नाक की नथुली, नाक की नथुली ये नाक की नथुली ये

सब कामधनि कैदी नथुली नाक की नथुली, नाक की नथुली ये नाक की नथुली ये
अल्मोड़ा बजार घूमदी नथुली नाक की नथुली, नाक की नथुली ये नाक की नथुली ये

मेरु पितृ की नथुली नाक की नथुली, नाक की नथुली ये नाक की नथुली ये
कैन बने भगयान नथुली नाक की नथुली, नाक की नथुली ये नाक की नथुली ये

मेरु गढ़ देशा की नथुली नाक की नथुली, नाक की नथुली ये नाक की नथुली ये
कण रिंगा लगानि नथुली नाक की नथुली, नाक की नथुली ये नाक की नथुली ये

सासु ब्वारी नाक की नथुली नाक की नथुली, नाक की नथुली ये नाक की नथुली ये
ढोल दामू नचदी नथुली नाक की नथुली, नाक की नथुली ये नाक की नथुली ये

कवि यकुलांस की नथुली नाक की नथुली, नाक की नथुली ये नाक की नथुली ये
मेरु मान अभिमान की नथुली नाक की नथुली, नाक की नथुली ये नाक की नथुली ये

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
विता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
September 13 at 2:29pm ·

गिनती दारू की

पैली दारू म्यार नौउ कि
दूजी दारू सऱ्या गौंउ कि

तिजी दारू पल्य मौ कि
चौथी दारू डंडियों धौर कि

पाँचि दारु पचम शोर कि
छथी दारू हर्ची वे सोर कि

सति दारू सत्म जोर कि
आठि दारू अठम छोर कि

नवि दारू नशम भोर कि
दसम दारू अंतिम घौर कि

पैली गिनती शरू व्हाई
दशम गिनती म संपे ग्याई

ले पिळो जमैकि और्री दारू
मेरो बाप दादों की कया ग्याई

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

 

Sitemap 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22