श्री भरत सिंह नेगी पहाड़ी मित्र.....
कांधी मा काखड़ि,
मुंड मा अमेर्थ,
कख होलु जाणु भुला,
प्यारा पहाड़ मा.......
मन मा ऊलार छ,
पहाड़ सी प्यार छ,
खाणु वख की सब्बि धाणि,
पेणु छोया ढुंग्यौं कू पाणी,
किलैकि पहाड़ सी प्यार छ......
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
दिनांक 29.9.2015