Author Topic: Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं  (Read 515427 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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मायादार अपणा सुवा देखी देवी दर्शन भि कर सक्दन यनु प्रयोग मेरी कलम बिटि ऐसु का नौराता मा यी रचना मेरी सब्भी मायादारो तै समर्पित चा
देवीकु रूप साकछात भगबती स्वरुप
मनखीयों मा त नि देखी इन्न नौनी
द्यब्तो का मुल्क बिटि ऐ होली स्या छोरी
दरशन विका रूप देखी होदन
सब्भी नौ देवियों का
कभि दिख्दी विका रूप मा शैलपुत्री
कभि दिख्दी विका रूप मा बरमचारणी
कभि दिख्दी विका रूप मा कुस्कमंडका
कभि दिख्दी विका रूप मा स्कंदमाता
कभि दिख्दी विका रूप मा कत्यानी
कभि दिख्दी विका रूप मा कालरात्रि
कभि दिख्दी विका रूप मा महागौरी
कभि दिख्दी विका रूप मा सिद्धधातरी
इन्ना रूपवान गौरा तै
कु शिब होलू दुनि मा
भग्यान छन जौका घौर जल्मी
देबी कु यनु रूप ...................................... शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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कल से देशभर मे रामलीलाये होगी रामलीलाओ पर्व को देखते हुए एक हास्य विनोद से जुड़ा प्रेम गीत अपनी लोकभाषा मे

मेरा गौ होणी रामलीला
तू भि छोरि ऐ जयी
मि बनलू राम तू बणी जयी सीता
आहा मेरा राम तेरु निचा कुछ काम धाम
मुखडी देख ऐना मा बांदर सी च तेरी अनवार
कुस्वाणा बैखो की फौज च तेरा गौ
मै जनि सीता तै फिट नि बैठलू क्वी राम
पूरा गौ की त क्या देण गरंटी
अपणी दे सक दा
मि छो तेरा लैक राम
तू ही च मेरी सीता
खोज ले छोरा अपना गौ का आस पास
मै जनि सीता त्वे जनों नि दे दी घास
मेरा गौ होणा नौरता पाठ
होली खुटी तेरी दैणी देवी सी
रैलू सीता की जग्वाल मा तेरू राम
मेरा गौ मा होणी रामलीला
तू भी छोरि ऐ जयी
मि बनलू राम तू बणी जै सीता
मेरा गोंउ होणी रामलीला...................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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मेरा गोंउ होणी रामलीला
तू भी छोरि ऐ जई
मि बनलू राम तू बणी जै सीता
आहा मेरा राम तेरु निचा कुछ काम धाम
मुखडी देख ऐना माँ बांदर सी च तेरी अनवार
कुस्वना बैखो की फौज च तेरा गोंउ
मै जनि सीता तय फिट नि बैथ्लू कुई राम
पूरा गोंउ की ता क्या देन गरंटी
अपनी दे सक दा
मि छो तेरा लैक राम
तू ही च मेरी सीता
खोज ले छोरा अपना गोंउ का आस पास
मै जनि सीता तुवे जनों नि दे दी घास
मेरा गोउ होणा नौरता पाठ
होली खुटी तेरी दैनी देवी सी
रेलू सीता की जग्वाल मा तेरू राम
मेरा गोंउ होणी रामलीला
तू भी छोरि ऐ जई
मि बनलू राम तू बणी जै सीता
मेरा गोंउ होणी रामलीला
.
कविता: शैलेन्द्र जोशी Shailendra Joshi
श्रीनगर।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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कथगा खैल्या (How Much Will You Eat (Take Bribe) ?
कवि :नरेन्द्र सिंह नेगी (पौड़ी गाँव, पौड़ी )
1- Stanza
कमीशन कि मीट भात, रिश्वत को रेलों
कमीशन कि शिकार भात, रिश्वत को रेलों
रिश्वत को रैलो रे ...
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ ..
कथगा जि खैलो रे ...
यनि घुळणु रैल्यो , कनकै पचैल्यो
दुख्यारो ह्व़े जैल्यो रे
कमीशन कि मीट भात, रिश्वत को रेलों
रिश्वत को रैलो रे
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ
Stanza -2
घुण्ड -घुन्ड़ो शिकार -सुरवा कमर-कमर भात रे
भात रे भात बासमती भात
घुण्ड -घुन्ड़ो शिकार -सुरवा कमर-कमर भात रे
इथगा खाण -पचाण तेरे बसै बात रे ..
मैगे की मरीं जनता ..हे जनता ..
कनक्वे बुथैल्यो रे...
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ
Stanza -3
नयो नयो राज उत्तराखंड आसमा छन लोग
लोग जी लोग आसमा लोग
नयो नयो राज उत्तराखंड आसमा छन लोग
बियाणा छन डाम यख लैन्दो को छ जोग
कुम्भ न्हेगे भूलू ..हे भूलू ...
अब आपदा नहेल्यो रे
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ

Stanza -4

नियुक्त्युं की रस मलाई , ट्रांसफ़रों को हलवा
हलवा रे हलवा सोहन हलवा
नियुक्त्युं की रस मलाई , ट्रांसफ़रों को हलवा
माना कि भागमा तेरा , चेलों को जलवा
चेलों को जलवा , चेलों को जलवा
बिंडी मिट्ठो नि खलौवु त्यूँ सूगर बढी जालो रे
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ
Stanza - ५
छप्पन डामों की डड्वार कै कैन बांटी
बांटी रे बांटी कै कैन बांटी
छप्पन डामों की डड्वार कै कैन बांटी
स्टरडिया की रबडी कथगौन्न चाटी
कथगौन्न चाटी कथगौन्न चाटी
बारम चुनौ छ भूलू हे भूलू ..
हंसल्यो कि रोल्यो रे
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ
Stanza- 6
कमीशन को डेंगू रोग . सर्यीं दिल्ली मा फैल्युं
फैल्युं रे फैल्युं रे दिल्ली मा फैल्युं रे
कमीशन को डेंगू रोग . सर्यीं दिल्ली मा फैल्युं
नेता अफसर लीगेनी भोरी भोरी थैल्युं रे
भोरी भोरी थैल्युं, भोरी भोरी थैल्युं
भोरे गेन बिदेसी बैंक ..हे बैंक
भोरे गेन बिदेसी बैंक .अब कख कुचोल्यो रे
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ
Stanza -7
रास्ट्रमंडल खेल टू जी घोटाला
घोटाला रे घोटाला टू जी घोटाला
रास्ट्रमंडल खेल टू जी घोटाला
अरबों .खरबों को माल लगेयाली छाला
लगेयाली छाला , लगेयाली छाला
ये देस की लाज प्रभो कनक्वे बच्योले रे ....
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ
(The poem is symbolic and humorous. In Hindi or Indian language, taking bribe is called bribe eating (Ghoos Khana ) and Narendra Singh Negi used the meaning of bribe taking in that sense to make poem humorous and satirical
the literal meaning of poem is
You are eating the commission as goat meat
You are eating the commission as Basmati rice
How much will you eat bribe?
How will you digest the commission?
You only can digest this much huge commission!
The people are dying because of inflation
There was hope from new province Uttarakhand
The government is building 56 dams but there is scarcity of milk
there is corruption in appointment, transfer.
Officers, politicians all are busy in taking bribe
Bribe takers depositing money in foreign banks
there was huge corruption in commonwealth game too)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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गुमनाम पिथौरागढ़ी
September 29 at 7:29pm

सोरयाली में एक मतला व शेर ---------------

हुक्का तमाक पानी बहुते याद ऊछी
नानि रात ठुली कहानी बहुते याद ऊछी

राते छाकाला ब्याल जतारा में पीसी रूथी
हमरी भूख इजा की परानी बहुते याद ऊछी

गुमनाम पिथौरागढ़ी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Mahendra Thakurathi
September 18 at 4:21pm

heart emoticon
मातृशक्ति
smile emoticon

"ओ इज" कूण में जो भाव ऊनी,
"माई मदर" में ऊ भाव काँ छ।
अंग्रेजी बोलौ, उर्दू बोलौ,
दुदबोलि में जो रूंछौ मिठास,
अमृत में ले मिठास काँ छौ?
लखनऊ बसौ, बम्बई बसौ,
ये बात कैं तुम कभै नि भूलौ,
परदेश को स्वर्ग ले छौ कुलाड़ो।
आपण देइ को कुकुर लाड़ो॥
("पहरू" अप्रैल 2015 अंक में प्रकाशित नरेन्द्र नाथ पंत ज्यू कि कविता)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Mahendra Thakurathi
September 4

जब यो मतलबी मनखी.....
धर्तिकि छाति फाड़ि खानौ,
त कैकै दिल नै पसिजनय...!
जब प्रकृति बरपूनी कहर,
त सारि दुनींक दिलम,
पीड़ै पीड़ देखीण फैजाँ...!
एक न एक दिन त आलै,
जब हमूकें.......
आपणि करतूतनक हिसाब,
योई धर्तिक काखिम भैटिबेर,
जरूर चुकूण पड़ल.....!!!

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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गुमनाम पिथौरागढ़ी
September 5

कुमाउनी (सोरयाली )भाषा में दोहे ------

पाखो टपक्यो टप टप लागि रयोछ चोमास
साल भरि आँखा बग्या त्येरा उने कि आस

रोजगार ले ज्वानि को छुड्वायो घर बार
एक बार घर छोड्यो चिट्ठी आई न तार

डिस्को फेसन यो कसो बदली गया सब दीन
पेंट पैनला जीन्स का खान्या छन चोमीन

गुमनाम पिथौरागढ़ी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Madan Mohan Bisht
September 3 · Edited

चिंता..
मुलकाक यास बर्बादीक आसार नजर ऊणई,
चोरों दगाड याँ चोकीदार नजर ऊणई।

अन्यार आब कसी मिटोल त्वी बता भगवान,
याँ उज्यावक दुश्मन चोकीदार नजर ऊणई।

हर गौं गाड़, हर सड़क पर, मौन छू ज़िंदगी ,
हर जाग मरघटाक जास हालात नजर ऊणई।

को सुणनों याँ आज द्रोपतीक चीख़ पुकार,
हर जाग दुस्साशन थाणदार नजर ऊणई।

सत्ता दगड समझौता करबे बिकगे लेखनी लै ,
ख़बरों कें सिर्फ अब बाज़ार नज़र ऊणई।

सच्चाईक दगड द्यूण बण जां जुर्म आब,
सच और बेक़सूर आज गुनहगार नज़र ऊणई।

मुल्कक हिफाज़त सौंपि छू जनार हाथों मे ,
उन हुकुमशाहों में लै आज गद्दार नज़र ऊणई।

खंड खंड मे खंडित हैगो अखंड भारत आज,
हर जात, हर धर्म में ठेकेदार नज़र ऊणई....
~मदन मोहन बिष्ट, रुद्रपुर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Mahendra Thakurathi
August 30

द्वि हात बिणाई छाजि रैछ त्यरा,
ओ माता सरस्वती तेरि जैजैकारा।
एक हात पुस्तक एक हात जपमाला,
हंसै कि सवारी तेरि जैजैकारा......।।
क्वै कूनी वाग्देवी क्वै कूनी शतरूपा,
कतुक नौं छन हे जननी त्यरा.....।
भारती, वाणी, वीणावादिनी छै,
हंसवाहिनी, वागेश्वरी, शारदा.....।।
काणों कें साण बणूनै कि शक्ति छै,
साहित्य, संगीत, कला कि देवि छै।
करँछै सबूँक दिलों में उज्याव,
अज्ञानैक अन्यार बै मुक्ति दिछै।।
सदबुद्धि, सन्मति दिबे मनखि कणी,
खोलँछै कपाई गुरु रूप बणी......।
पशु जास मनखी कणि ज्ञान दिबे,
धरँछै वीक नौं सारी दुनीं मणी.....।।
कालिदास, वरदज्यूक आँखी खोली,
उनूकें बणाई महाज्ञानी त्वीले........।
बोपदेवज्यू कि मंदबुद्धि हरी,
खोली ज्ञानैक द्वार हे माता त्वीले....।।
आपणा बिणाई तार झनझनै बे,
भारत भूमि बै अज्ञान भजै दे.....।
मनखीक भितेर शक्ति कें जगैदे,
मुलुकम अमन-चैन तु फैलैदे

 

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