Author Topic: Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं  (Read 515466 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
म्यार गांव मुल्कु मा
यन रिवाज अंयु च
सासू पुंगडि धाण्यूं दीदों
ब्वारि चैटिंग लगीं च
सासू ह्वेगे काणी बैरी
ब्वारि फैंसी बणी च
जींस पैरी हथ मोबेल
कंदुडी लीड कुचीं च

सासू बेली कटणी बिचरी
तिबासी चुन की रुट्यूं मा
मौडर्न फैंसी ब्वारी
मिस्यां चौमिन टिक्युं मा
सासू खांदी रुखु सुखु
चौकल ठील्कों मा
म्यार मुल्क फैंसी ब्वारी
दीदों डेनिंग टेबुल मा
खुट हथ धरी की सेवा
हरची ग्या पहाड से
हाई हैलो नयी रिवाज
यैग्या जर्मन फ्रांस से
म्यार गांव मुल्क दीदों
यन रिवाज अयुं च..
लुरका तुरकों मा सासू
ब्वारी राणी बणीं च
सासू खै द्या जुं लिखलु न
ब्वारि पार्लर जयीं च
म्यार गांव मुल्क दीदों
यन रिवाज अयुं च...
सर्वाधिकार सुरक्षित@लेखक सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
नीति माणा कि भोटिया या रोंग्पा भाषा कि कविता

हिन्नी नीति घाटी

कविता - रोमी राणा , केदारनाथ
इन्न हिन्नी नीती घाटी च रम्पा
स्वर्ग समान इन्त नीती घाटी
रोफू किस्म जड़ी-बूटियाँ
स्वास्थ्य तै लाभदायक याँ
इन्न हिन्नी नीती घाटी च रम्पा
कटुकी इन्त नीती घाटी हुन्न
धौरू त्वींज-खौच दर्द ओर हुन
इन्न हिन्नी ..
चौरू इन्त नीती घाटी हुन्न
धुरु इन्न दाल छंवाम पर चरासिन
इन्न हिन्नी ...
जड़ी शरीर स्वस्थ गुस्कन
इन्न नीती घाटी स्वर्ग समान
इन्न हिन्नी ...
--------------
शब्द रूपांतर
हिन्नी=- हमारि
रौग्पा = भोटिया
इन्त = यह
रोफू = बहुत
हुन्न - होता है
त्वींज खौच = पेट दर्द
छंवाम/छावामा = दाल या साग
चरासिन = तड़का /छौंका
गुसकन = ठीक होंना

साभार: दीपक बेंजवाल सम्पादक, दस्तक, २०११ अंक ३ अगस्त्यमुनि , रुद्रप्रयाग

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
The following song is sung in their love memory in Garhwal in Ghadela to satisfy the unsatisfied souls of Tiloga and Amardev Sajwan


बांकी तड़याली तिलोगा बांकी
सेर कि भिडाल्यूं बांकी
सडक तिरवाली बांकी
राति जुनख्याळी सिरवाणी कि कूल
कु होली घसेर बांकी
छोटी च मिंडाळी , ठुल्ली च घसेर
छुणक्याळी चुड़ीयूँ की क्वा होली घसेर बांकी
तू बेटी छे कि ब्वारी
तू बेटूलि होली कैकी, मांगणा कै जौलो
तू ब्वारी होली कैकी , छुड़ेणो कै जौलो
Reference Dr Shiva Nand Nautiyal, Garhwal ke Nrity-Geet
Copyright @ Bhishma Kukreti, bckukreti@gmail.com

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
एक गाँव का आत्म कथन
____________________

आहा !भोर होगयी
और रवि की किरणों के चूमने से
होने लगा हूँ ऊष्मासित मैं
और मेरे जागते ही जागने लगे हैं -

बाँज बुराँस के बण /गाँव पार का गदेरा
गों की कोदयाड़ि /स्ट्याड़ि सार
गों मूडी का धारा /गों ऐंच का बाटा
पनघट और ऊखल भी

सब तो है मेरे पास
तुम्हारी विरासत संरक्षित
नहीं है तो बस -
पनघट की गोरी
दिलवरि हळ्या
अट्ठारह घण्टे अपनी कीली पर घूमती गुस्याण

पर मैं उतना दुखी भी नहीं हूँ जितना तुम यहाँ से भागते ही
पलायन पलायन चिल्लल्लाने लगते हो *
नगरों महानगरों कस्बों बाजारों में बैठ कर
क्यों पलायन चिल्लाते ही ???
क्या कर लोगे यहां आकर
न तुम अब खेत जोत पाओगे और न तुम्हारे बेटे हल पहचान पाएंगे
फिर खाओगे क्या ?हाँ चाय और दारु की दूकान जरूर चलाओगे
अरे छोड़ो ये पलायन पर भाषण देने का फैशन और
कभी कभी अपनी यादें ताजा करने आया करो
और आया करो ं अपने बच्चों के लिए नए अनुभव बटोरने पुराने सम्बन्ध सहेजने
गाँव जानने पहचानने समझने बूझने के लिए
ताकि मैं भी सुन सकूं उन्हें बतियातेहुए
उन्हें बात करते हुए ups की /माउस की /विंडोज की
एप्पल 6 s /ई बुक /गीगा /मेगा/नैनो /कार नहीं नैनो टेक्नालॉजी की हा हा हा क्यों ?

मुझे इस बात से भी ख़ुशी मिलती है कि -
दिल्ली मुम्बई दुबई की सड़कों पर दौड़ते हुए भी तुम
गीत तो नरेंद्र सिंह नेगी के ही सुनते हो

और मैं खुश होता हूँ ये देख कर भी
कि - फाँस खाने वाली ,गाड पड़ने वाली
मेरी कई बहू बेटियाँ
कि - फर्राटे भरने लगी हैं अपनी अपनी कारों में
दिलबरी हल्या का बेटा आज डी एम् बन कर
बाप की उन कही अनकही पीड़ाओं को
मिटाने की कोशिस कर रहा है
कि - रो - रो कर बेसुरे बेसुध गू - मूत में लिपटे मेरे बच्चे
भी आज देसियों के बच्चों की बराबरी कर की बोर्ड से लगे हैं खेलने
और तो और अरे !जिस बाप को अपने अपने बचपन में ही
पहाड़ से आयात किया जाता था होटल में भांडे बर्तन माँजने के लिए
सुना है आज उसने उन्हीं को नौकर रख लिया है अपने यहाँ

हा हा हा हा हा हा हा मैं खुश हूँ

B positive yaar

तुम्हारे इन्तजार में
पर्वतों की गोद में बसा मैं हूँ

@ तुम्हारा गाँव @
(उमा भट्ट)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
Khyali Ram Joshi
 

बहादुर छा तो यदुग याद जरूर धरिया, उठै जगै बेर दुश्मन पर वॉर करिया
चिड़कैल घाम में हिटण हौल मुस्किल, स्योव दगाड़ ना यदुग प्यार करिया

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
Semwal Bhagat Ram
October 9 at 1:00pm · Edited

अलग हुँया हम थैंई, ह्वेगीं साल पन्दरेक /
क्या पाया हमल ए बीच, गैणै द्या उपलब्धि एक //
कांग्रेस-बीजेपी अदला बदली कै, सरकार बणाणा छीन /
जनता बिचरी तणि-तणि मोरणि, यो ऐश उडाणा छीन //
अलग राज्य लीणू खुणि, कतिग्यूँ ल खून पसीना बोगाया /
नौणा की गुन्दकि कोपणि खाणू, वूँ बिचरूँ ल क्य पाया //
यो कुछ करलो मुछ्याळ ब्वाडा फर, सब्यूँ की नजर टिकी छै /
पर राजनीति का ये खेल म, वे की जड़ काटिगीं वे कै भै //
अरे नेतौ, राजनीतिज्ञों तुम खुणि ता, शरम भी हरचा /
जै कोष लुटणा छवा, जनता को च वो, वे थैं अँक्वेकी खरचा //
बदरी केदार की पावन धरती थैं, किलै बदनाम करणा छवा /
गंगा-जमुना की पावन धरती थैं, डामुल किलै डमणा छवा //
सरकार-जनता मिलि कैकि, कुछ उद्योग धंदा लगान्दा /
त पुटिग्यूँ की खातिर लोग, परदेशूँ किलै जान्दा //
घ्वीड़ थैं त चाँतो प्यारु, वे थैं बगड़ नि सुहान्दा /
ह्वेली क्वी मजबूरी वे कि, जो वो बगड़ूँ छोड़ आन्दा //
अबी भी बिगडु क्या च, अब ता सँभिळि जावा /
बड़ा न सै, छोटा-मोटै कल कारखाना लगावा //
पलायन इनी हूणू रालो त पाड़ ल खाली ह्वे जाणा /
तुमुल तब क्य रिख-बाग-स्याळ अर बन्दुरू की सरकार चलाणा ?

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
 इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या - भीष्म कुकरेती

-
ब्यटा दयाल , कृपाल
जब से तुम परदेश गयां,
तुमन इख को बाटो नी सुंत्याळो
कथगा निर्दै हुयाँ तुम !
जैं ब्वेका तुमन संसधरा पेछा,
जैं ब्वेना तुम नांग भूख सैकी
अपणी छाती पर चिपकैकी रखी छा ,
जैं ब्वेना ज्यू मारी की ,
लाड प्यार से पाळीपोशी की
अपणो मन बुथ्याई छयो -
कि म्यरा गुरबर -गरबर
बच्यां राला , गोरु चरैकी भी -
गुजर बसर कारला।
पर तुम गोरु चरौण्या न रैकी -
मनखी चरौण्या ह्वैग्याँ
याँ की मी तैं भारी ख़ुशी छै:
अपणी कोख मिन धन्य समझी छैः
पर ब्यटा आज मेरा होणा छन कुहाल
टक्क लगैक सूण्ल्या
ब्यटा दयाल -कृपाल

-
( साभार --शैलवाणी , अंग्वाळ )

Copyright @ Bhishma Kukreti interpretation if any

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
Tota Ram Dhaundiyal
September 3 ·

हरि ॐ ! सबि सुणदरूँ तै' शिर्नो ! आज आपतै' नैं कविता सुणाणू':-
कुकर संस्कृति

गौडूं इब्जिम कुकर सैंतणा, तीनूं बेळि सदाणा !
पिपळपाणि मा कुकर लगलै ? यो ता कैंन् बिङ्गाणा ?

कुकरा का बण्यां मम्मी, पापा, हम्कु बुलाणा- 'अंकल ! अंटी !'
लाण,खाण, पीणु हमुम नी, ठाठ से कारम घुम्दा बंटी !

स्वतंत्र देश, सर्करि सड़क, हमरि मर्जि जखमा हगौं !
तुमर् मोर अग्नै' हगा ता, उर्गौ वैको; हम क्य करौं ?

गौडूं सैंती; गौंत, गोबर, दूद, दै, छाँच्, नौंण, घ्यू खान्दा ?
मुक्दान, प्रेतदान, पिपळा गौड़ी, बैतरणी भी पार करांदा !

मौ बारा, कुकर अठारा, अहर्निश भुक्दा, मुंडरु कना' !
भुक्णयां कतणा, रैबिज हूंणू, देशमेश एकवेष; जां कनाँ ?
आँखर मिसैं:- शिवरात्रि, वि0 सम्बत्- 2071
सोमवार, 16 फरवरी 2015
मिसाक-मङ्गळेर:- तोताराम ढौंडियाल 'जिज्ञासु'

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
तब द्यूंला वोट हे नेता जी
पैलि हमू जन बोला लावा
पैलि हमू जन पैरा जी, तब...
बोली हमारी नि बींगि तुमून
बात हमारी नि सूणी तुमून
बसग्यळि लिंगुड़ा सि ठाडा ह्वे गैनी
खैरि हमारी नि गूणी तुमून
भौत देख्यालि दिखौणा छ केकू
पोस्टर रंगीन फोट जी, तब...
बेरोजगार नौन्याळु ठगैक
बेटि कख जालि अैथर पढ़ैक
मैंगाई द्याखा असमान कु जाणी
गिचि चिफळी हे ठेका खुलैक
बागि बणैकि घुमाणि छै जन्ता
मरणू चकरचोट जी, तब...
चुल्लौं थैं ढोळि जात्यूं थैं लड़ैकी
मारि मनख्याळि गौं ख ब करैकी
बणि सरपंच अैग्याई हो घळबट
पिन्ना दाँतु कि बुढळि बणी की
कमिशन ठेकदारि लूट खज्यानै
खाँदि त देब्तौं का रोंट जी, तब...
बोल ना कुछ सब सम्झणा छां हम
वादा तेरि घोषणा सम्झणा छां हम
चोर लुटेरौं कि टोल चटोर्या
पौणा चुनावौं का सम्झणा छां हम
चैंद जु वोट त खोलि औ नेता
कलफ लग्युं तै कोट जी, तब...

यु गीत क्या संघ का चुनावों पर फिट नि बैठदो?
(C) डॉ. प्रीतम अपछ्यांण

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
सादर प्रणाम ।आपकी स्यवा मां एक गज़ल ÷

सर्रा विश्वास तुम मा देकि ; पछताणा छौं ।
मारि नि दियां तुम घपगताळ ; घबराणा छौं।।1।।

भिन्ड्या कैरि तुमरि जग्वाळ; नि आया तुम ।
रयां छन द्वी आँसू ; नैऽ आस जमाणा छौं।।2।।

पत्ति-पत्ति मौळिक कुजाण ; कब होलि डाळी ?
जेटा मैना घाम मां ; अफि अमाणा छौ ।।3।।

रिंगण बैठिगीं हज्जि ; अगास मां चिळाँग ।
हम कुखड़ी कि सि बच्चा टपराणा छौं ।।4।।

ये घोर कळजुग मां अर तुमारो अवतार ?
तुमरि सूरत हम ; वूँ दगड़ी मिलाणा छौं ।।5।।

सच्चि बोला !सौं खै ! कब तक रैण ?तुमुल वख ?
हम अंतुरिल पुछणा ; तुम दंतुणी दिखाणा छौं।।6।।

करदा त तुम सदनि बटि ; अपड़ै हि मना कि छौं ।
हम त् जमनौं बटि ;सुदि-सुदि रगर्याणा छौं ।।7।।

ध्वक्का खाइ हमुल सारा कैकि ; सदनि शैलज'।
हमरि मयळी आँख्यूँ ! सेड़्वा बथाणा छौं ।।8
।।

काॅपी राइट@ शिव दयाल शैलज ।

 

Sitemap 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22