Author Topic: Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं  (Read 129927 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Shailendra Joshi
July 22 at 11:51am

क्या खूब लिखा है नेगी दा ने
बसग्याली घास सी
बड़ दी गे उमर
कुछ सुक्ख नि
कुछ कटनी रयि
कब ग्यायी बचपन
कब जवनि आयी
लोग बतौ दन
मिल नि चितई

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Shailendra Joshi
July 15 at 5:31pm 

जैमा बन्यु रौ रस
बारामासी
विकु हि बुल्दन बनारसी
इन्ना बनारसी सुभौ कि वा
जब पैण दी
बनारसी साड़ी त
इन्न लग दी
यथो नौ तथौ गुणो
वल्ली बात विमा
फिट बैठ नि
जैन बी बने
यी बनारसी साड़ी
यी छोरी का
बाना बने होली
अहा कतगा भलु
खिलनी गात
पैरी साड़ी बनारसी .......शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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दिवाकर बुडाकोटी 

करगिले लडे मा छोउँ पलटनु आदेश चा.
तू उदास न ह्वे मा.
मि ओलु इत दगडया आला लाम जीति जैदिन.
हर्ष मन गर्व करि माजी रोई न वे दिन.

दुशमन अयूच भितर हमारी सीमा लांघी कि.
अब वो ज्युन्दू जै नि सक्दु प्राण भीक माँगी की.
रायल गढवाल रैफल हमारि जितणु हमारु पेशा चा.
तू उदास ना ह्वे मा.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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सतपुळी मोटर बौगिन खास

(इंटरनेट प्रस्तुति एवं व्याखा : भीष्म कुकरेती )
(सन्दर्भ:डा शिव प्रसाद नैथाणी लोक संस्कृति , उद्गाता , 2011, पृष्ट 87 -118 )

सतपुळी मोटर बौगिन खास

द्वि हजार आठ भादों का मास,
सतपुळी मोटर बौगिन खास ।
औडर आये कि जाँच होली,
पुर्जा दिखण कु जांच होली।
अपणी मोटर साथ लावो,
भोळ जांच होलि अब सोई जावो।
सेइ जौंला भै बंधो बरखा ऐगे,
गिड़ गिड़ थड़ थड़ सुणेण लैगे।
गाड़ी छत मा अब पाणी ऐगे,
जिकुड़ि डमडम कमण लैगे।
या पाणी नयार कन आये मैकु,
जिया ब्वे बोलणु नी रोणु मैकु।
जिया ब्वे बोलणु नी रोणु मैकु।।
द्वि हजार आठ भादों का मास,
सतपुळी मोटर बौगिन खास ।
It was August - September 1951.
The Motors washed away by flood.
There was order that the officer would check the motors.
There was order that the officer would check the components of motors
There was to bring all motors.
The officers informed that there would be checking next day.
He advised to sleep.
While we were sleeping, there was a heavy rain.
The rain water reached up to roof of motors.
We were afraid.
The Nayar River flood washed away all motors.
O mother! Don’t weep for me.

The said folk song is still popular in Garhwal.

Copyright (Interpretation) @ Bhishma Kukreti, 25/06/2013

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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हे उत्तराखंड सदा तेर जयकार

जब बी सुणदो मि तेरु नौव्
जीकोडी मेरी नचण लगद जी
भैर भीतर चौदिस छोर और्री
तेरु नौव् थे रटन लगद जी

हे मनखी मा अभिमान ऐ जांदू
छाती मा मेरु कण तान ऐ जांदू
रचक रचक देक कण हिटदी मेरी चाल
सिंह जनि ये अब फोडणी डरकाल

पूरब देकि मिल पश्चिम देकि
उत्तर की च तेर अलग ही न्यारी
सबी देबतों को च ये तेरु घार
बोई गंगा भी बोगनि ये तेरा पहाड़

मयाल्दु च म्यारु ये देस सारु
भिन भिन च यख सबकु भेष सारु
एक छतर च बस तेरु एक झंकार
हे उत्तराखंड सदा तेर जयकार

बालकृष्ण डी ध्यानी
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डोबरा चांठी चांठी पुल चांठी गैंन सब

डोबरा चांठी चांठी पुल चांठी गैंन सब
अब त दोई खुथा यख और्री दोई खुथा छन वख

टिहरी डैम टिहरी कथा सब लग्ना छन अब
प्रताप नगर यखुली रैगे कब बनलु तेरु डगर

अयं बड़ा बड़ा इंजनियर सब योजना व्हैगे रद्द
दोई लगुला ना टंग पाई सरकार की इनि खत

टक्कों टक्कों टक्कों दगडी खेलण छन सब
देरहादून गैरसैंण कबी त तू हमरी बी सुण

दिल्ली उत्तराखंड पहाड़ों मा ध्ये लग्ना छन सब
ऐ जवा टंगी जवा तुमरो लगुला थे पौड़ीगे जंग

डोबरा चांठी चांठी पुल चांठी गैंन सब
अब त दोई खुथा यख और्री दोई खुथा छन वख

बालकृष्ण डी ध्यानी
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वै बाटा मांजी ईईईई

वै बाटा मांजी ईईईई
क्ख्क ऊ जणा छन
मि थै बाथे दे मेर बोई जी
जैकी ऊ कया लणा छन
वै बाटा मांजी

दूर देश ऊ जांद लाटा
वै बाटु ने हम थे बांटा
हिट वैमा क्वी नि आंदु
अहम ये जियु भरी जांदू

वै बाटा मांजी ईईईई
मेरा बाबाजी बी ग्या छन
क्दग दिन रति बिती
मि अब तक ऊँ थे ना देकि छे

ये मेरा दूध को छरो
पोट्गी छे जब तब ऊ गैं छन
भैर देश मा ऊ जैकी
टक्कों का थैल भोरणा छन

ऐ मेर मांजी ईईईई
क्या कण हमुल ऊँ टक्कों कू
बचपन मेरु इन सुधि जाणा
बाबा कैरी मिल कैथे ध्ये लगाण न

वै बाटा मांजी ईईईई

बालकृष्ण डी ध्यानी
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ये रे छोरा

जब बी हिटदु मि हिटदु किलै
ये रे छोरा मी इत्गा सोच्दु किले

छँवि सदनी तू किलै रै जांदी अपुरी
ये रे छोरा मिल जब बी बचे

माया तिल किलै बस आंसूं बोगै
ये रे छोरा मिल जब बी माया लगे

अपरा किलै की ऊ बिरणा व्है जांद
ये रे छोरा मिल जब बी धैये लगे

समासुम आच यख पसर्युं च किलै
ये रे छोरा तिल जब बी वै बाटा हीटे

जब बी हिटदु मि हिटदु किलै
ये रे छोरा मी इत्गा सोच्दु किले

बालकृष्ण डी ध्यानी
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कख मिलालू सरग इनि मि थे तू बतै दे

कख मिलालू सरग इनि मि थे तू बतै दे
वै बाटा वै उकाल बोई मि थे तू अब हिटै दे

मि थे बी बचण दे त्यूं ह्युं की चलूँ चांठी
कण आंदी हुली रस्यांण बोई ते चलूँ गाठी

हर्षण लगे अब मेरु जियूं तर्स्नू अब मेरु हियू
कैन छबी बणई हुली राति मा ऐकि रंगाई हुली

एकदूजा रंग मा सबु का सब यख रंग्या छन
एकदूजा मा मिस्ली की सब रंग पसरया छन

अब इत्गा ही लिक स्कदु मि देणु च विराम अ
कैल बाची ये मेर रचना वैल बी मेर दगड आन

कख मिलालू सरग इनि मि थे तू बतै दे
वै बाटा वै उकाल बोई मि थे तू अब हिटै दे

बालकृष्ण डी ध्यानी
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द्वि भैनी

द्वि भैनी बैठिक छँवि च लगनी
पहाड़े कु ठंडो पानी बगदि जनू

बगत अब अपरू कथा च लगानू
द्वि आंसूं तेर द्वि मेरा भैनी चुलानू

दिस इनि अला सुधि बित ही जला
सोची रेगे हम द्वि थे कन चार बणला

सौंण- भादों की कन बरखा लगींच
पुरू गढ़वाल मेरु वैमा झिर-झिर भीज्युं च

खुद आंदा जांदा रैंदा बिता सड़की ऊ मोड़
हुम्लु कैथे ध्ये लगान अब जणा कै ओर अ

द्वि भैनी बैठिक छँवि च लगनी
पहाड़े कु ठंडो पानी बगदि जनू

बालकृष्ण डी ध्यानी
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