Author Topic: उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!  (Read 200669 times)

Bhishma Kukreti

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धर्मेन्द्र नेगी की गढवाली कविता


बुस्याणान हमुतैं हमारा हि अपणा
झुराणान हमुतैं हमारा हि अपणा
किलै दोष धरणा छां हम गंगा जी पर
डुबाणान हमुतैं हमारा हि अपणा
हमुन सच क खातिर यु जीवन लुटैदे
झुठ्याणान हमुतैं हमारा हि अपणा
हमारि अपणि धौण टकटकि करीं छै
नवाणान हमुतैं हमारा हि अपणा
भरोसो बि अब कै पर कन त कनुकै
ठगाणान हमुतैं हमारा हि अपणा
जिकुड़ि मा छ सेळी प्वड़ीं जळदरौं की
जळाणान हमुतैं हमारा हि अपणा
तमाशो हमारू बणाणा बजारम
नचाणान हमतैं हमारा हि अपणा
जु जणदा नि छन न्युतु हमतैं वु देणा
तिराणान हमतैं हमारा हि अपणा
जत्वड़ौ सि बागी हुयीं गत 'धरम' अब
कच्याणान हमुतैं हमारा हि अपणा
@धर्मेन्द्र नेगी
चुराणी,रिखणीखाळ
पौड़ी गढ़वाळ


Bhishma Kukreti

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धर्मेन्द्र नेगी की गढवाली कविता

बगत का दगड़ि अब लड़णु छोड़्यालि मिन
मौत देखी बि अब डरणु छोड़्यालि मिन
बाटु अपणूं बणाणु मि अब सीखिग्यो
दुन्य का दगड़ि अब हिटणु छोड़्यालि मिन
रैनिगै कैका दगड़ि व अपण्यांस अब
हिंगर अपणोंम अब गडणु छोड़्यालि मिन
गालि- टोकण मा सौ- स्वाद कख अब रयूं
छेड़ि जै कै दगड़ि लेणु छोड़्यालि मिन
भेद अपणा - पर्या मा नि जणदु कतैऽ
गैळु बैर्यूं से अब गढ़णु छोड़ियाल मिन
ल्यो न परहेज को नौ बि मेरा समणि
ज्यूंदु रैणा कु ज्यू मरणु छोड़्यालि मिन
रूड़्युं का उरड़ु सी ऐ छै ज्वानि 'धरम'
हौंस की आस अब पलणु छोड़्यालि मिन
@धर्मेन्द्र नेगी
चुराणी ,रिखणीखाळ
पौड़ी गढ़वाळ

Bhishma Kukreti

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इखारी किले याद आणा छवा
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कविता - मधुर वदनी तिवारी

(वियोग श्रृंगार/प्रेम रस की गढवाली कविता )


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इखारी किले याद आणा छवा
मीतें भण्डी सताणा छवा।
जुबड्याट कै लग्युं धाण अपणी
तुम मीते किले बिलमाणा छवा।
चुळा भबराणी भबराट करिक आग
खुट्यों पराज लगाणा छवा।
इतगा मयाळु न बणा दों लठ्यालों
तुमत अफु बि खुदांणा छवा।
खुद बिना भलु बि कुछ नि हौन्दु
पण तुम किले छक्या रौंणा छवा।
जिकुडी मा रन्दी 'मधुर' तुमारा
तुम किले घमतांणा छवा।
मधुरवादिनी तिवारी
6-03-2021

 

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