Author Topic: Satire on various Social Issues - सामाजिक एवं विकास के मुद्दे और हास्य व्यंग्य  (Read 142453 times)

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1

                   The Greatness of Great Indian Satirical Poet Harish Juyal is Experimenting too (Satire in Garhwali Poetry, Satire in Kumauni Verses, Satire in Uttarakhandi Literature, Satire in Himalayan poems)
                                Bhishm Kukreti
       
                  The critics call Harish Juyal one of the great satirical poets of global contemporary satirical poetry world.   There are many reasons behind calling Harish Juyal as great satirical poet. Harish follows the pattern of another great poet Kanhaiya Lal Dandriyal in simplicity and depicting realism. However, Harish Juyal did evolution in the pattern set by Kanhaiya Lal dandriyal. His way of creating satirical verses and choosing simple words compelled many migrated Garhwalis to learn Garhwali.
  Harish Juyal did many experiments for revolutionizing the Garhwali satirical poetry formats.  One of the patterns, Harish Juyal created is creating Garhwali satirical verses basing classic Sanskrit Srotra (wherein formulas were compiled   pattern and invented his own formula as famous American satirical poet Paul Violi. Paul Violi reworked arcane historical verse forms and invented his own forms. Harish also created such poems which make him exclusive Indian satirical poet in contemporary poetic field.
  As in their own time, Pope and Dryden provided the high point to English satire Harish Juyal has been positioning satirical verses as respectable way of expression in India.
   As Hungarian are proud of satirical contribution in literature by  Frigyes Karinthy and Sandor Szarthmari; Portuguese applaud  satirical works of Nicolau Tolentino; Armenians feel high about satire of Hagop Baronian and Harutium Svadjian; Turkish admire Nefi, Orhan Veli  Kanik, Neyzen Tevfik; Egyptians respect Ahmed Ragab; Ecuadorians distinguish   Eugenio  Espejo; Dutch  value works of Bernard Mandeville, Youp van t’Hek; Azerbaijanis  offer high regards to Jalil  Mammadguluzadeh and Mirza Alakbar Sabir;  Croatians identify the satirical works of  Mirko Bogovik; Czech appreciate ironic  works   of Karel Havlisek Borovsky and Peregrin Obdrzalek ; Danish applaud the satirical works of Johan Herman Wessel ; Austrians are pompous of satirists as George Kreisler, August Silberstein  ; Indians higly appreciate the satirical works of Harish Juyal.
The following poem is the proof:
                 हरीश जुयालोवाच
Xx    xx  xxx
                 दारु स्त्रोत्रम

विश्वेश्वराय 'सुरा' पिये , प्याज की दाणी म घुट्टी लगे
भेळउन्द प्वडाय मुंड कच्याय , कुकरोन तैकू थ्व्बड़ो चटाय

              भ्रात्री स्नेह उपदेसिका

ख़ास भायुं मा खुंकर्यूळ हवायो एका कारिज मा हैंकु नि आयो
इका उन्नति मा हैंकु जळन्ति म मनुष्य रुपेण ढयबराश्चरंती

                  हरिओम् तत्सत् जुमळी दिदा ब्वाद हरिओम तत्सत , सम्सूत रातिम ब्वादा सरांद
भैर कनु रौंद नमो शिवाय: ,भितरम जैक भुटुवा खुज्यांद

            तीर्थ जातरा समापन पूजा
काकी बदरीनाथ जातरा बटे आई , कुडै मुंडळी मुंग झट्ट गाई
यकचुट गाळयों परसाद द्याई, घरम्याळी काकी नमो नमस्ते

                    ख्व्बळया

ख्व्बळया गिची से कबि छंच्या कबि चुनमुंडू कबि बडी पकाणम
च्यूड़ा बुखाणम त कनक्वे चपाणम , बिभूक्षितम किम ण करोति पापम

                    विद्यार्थी
मैच चेष्टा ब्व्गठया ध्यानम , सुंगर निद्रा तथैव च
डिग्ची हारी किताबी त्यागी , विद्यार्थी पाँच लक्षणम

The above poems are totally social satire and are very sharp but with common symbols found in Garhwali village
------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Satire in Garhwali Poetry, Satire in Kumauni Verses, Satire in Uttarakhandi Literature, Satire in Himalayan poems to be continued ….

Copyright@ Bhishm Kukreti

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
चबोड़ इ चबोड़ मा

                        सैम पेत्रोडा : कौंग्रेसौ खुणि  भीक मांगणो कोढ़ी 
       
         (Satire in Garhwali Prose, Satire in Uttarakhandi Literature, Satire in Kumauni Prose, Himalyan Satire)                       

                                                  भीष्म कुकरेती
                       
                या ब्याळी (1/2/2012)   सिद्ध ह्व़े गे बल  राजनीती या राजकरण्या ब्युंत, कथगा निर्दयी, कथगा कंडारा   (कंटीला ), बेशरम , बिलंच होंद .   ब्याळी कौंग्रेसन  उत्तरप्रदेशौ चुनाव मा भारत को एक महान विचारक सैम पेत्रोदा  तैं बाल्मीकि समाज (बढई ) क नुमाइंदा घोषित करी दे . वाह रे राजनीति का फान्देबाज ! कुज्याण कथगा कुरागी ढोल बजान्दा तुम?  वाह रे ! एक सौ पचास बर्स्कुल्या कौंग्रेस पार्टी देख्याई  तेरी खज्यात अर देखी आली तेरी सेक्की की तीमा डेढ़ सौ साल को अनुभव च ! उत्तर प्रदेशौ चुनावी सुस्मि (झगड़ा ) मा राहुल गाँधी जब बोल्दो बल सैम पेत्रोदा  बढ़ाई समाज को च त कौंग्रेसै    सुसमत /अकड तैं माटो  मा मिल्दो बि देखी आल. 

                जब कोंग्रेसौ घोषित/अघोसित युवराज खुले आम बुल्दो बल सैम पैत्रोदा बढ़इ समाज को प्रतिनिधि च त साफ़ पता चलदो बल कौंग्रेसौ युवा राजकुमार बढ़इ समाज  को सेल्फ इस्टीम नि बढ़ाणो च बल्कण मा थाकौत , हार का सुस्कारा भरणो च. कोंग्रेसौ  लोक जब लखनौ   मा सैम पैत्रोदा बाल्मीकि समाज का पाळीदार बताण मा सिक्की जमाणा छया त साफ़ पता चलणो छौ बल इ लोक सठयारु   ह्व़े गेन जौंमा अब जनता लुभौणो  बान एक महान विचारक तैं जातीय जळम्व्ट/ जाळ मा डाळी दे.

  जै सैम पैत्रोदा  मा आम भारतीय  टेकनौलोजी अर एज्युकेसन मा क्रांति दिखदा छ्या अर कखी बि जातीय भेद भाव का क्वी छेंका (चिन्ह) सैम पैत्रोदा मा नि दिखेंदा छया अब हम तैं जबरन कॉंग्रेस बताणि च बल ह्यां ! सैम पैत्रोदा  क्वी अन्तराष्ट्रीय स्टार को नामी भारतीय नि च बस एक बढई  इ त च . या च भारत की पुराणि से पुराणि राजकरण्या पार्टी क लोबी, हूंच सोच!


   कौन्ग्रेसौ एक महान क्रान्तिकारी विचारक तैं एकदम जातीय लारा पैराण इनी च  जन कै आदिम पर ल्वीणि (असह्य दर्द ) ह्वाओ अर हौर लोक वै ल्वीणि वल़ू को  नाम पर चन्दा मांगणौ किराणा ह्वावन्। कोंग्रेसन सैम पैत्रोदा  जां अन्तराष्ट्रीय मनिख तैं बाल्मीकि समाज तक सीमित कौरिक   भोट मांगणो रुंड ब्यूँत  ख्वाज. कोंग्रेसी चुनौ मा या चाल कुछ नि च बस एक हीण गरण्या/रांगड्या  चाल च.  मी त बोल्दो बल कोंग्रेसौ न रमदौण (थाली में रखे सभी पदार्थों को अरुचिकर तरीके से मिलाना ) करी दे भै ! अर जब आप चुनाव या राजनीती मा रमदौण करिल्या त फिर अग्वाड़ी रमकणो जगा पर लुंज ह्वेका इ हिटल्या . राज- सत्ता की रणमणि (विरह वेदना और प्रियजन कि मिलन स्मृति ) मा  कौंग्रेसी बिसरी गेन कि सैम पैत्रोदा तैं अन्वाश्यक रूप मा ऊन अफुक़ुण इ ना सबी भर्त्युं खुणि रपटण्या (फिसलन वाली ) जमीन तैयार कौरी दे . ग्लोब्लाईजेसन को स्यूंसाट थ्वड़ा भौत जातीय/धार्मिक अवाज कम बि होणि छे छे अब कौंग्रेस का जातीय बमबारी से ग्लोबलिजेसनौ स्यूंसाटऔ  अब क्वी पुन्यात इ नि च बल जातीय बिगुल बजण बन्द ह्वावन धौं. जां डेढ़ बरसूं कि पार्टीक यि हाल छन  त फिर बी.एस.पी, या एस पी.,  वलूं पर क्यानको दोष भै?

गढ़वाळ म एक पौधा होन्द् ल्यचकुरु  जै पर झीस होन्दन अर वो विकिरणऔ  (pollination ) काम आन्दन. अच्काल एक महान विचारक सैम पैत्रोदा   तैं केवल बढ़यूँ प्रतिनिधि घोषित कौरिक कौंगेस्यूंन सैम पैत्रोदा तैं ल्यचकुरु का झीस बणे याल जां से बाल्मीकि समाज कोंग्रेस पर चिपकी जाओ. वाह ! डेढ़ सौ  बरसूं  से अळगै  कौंग्रेस तैं जख शेर जन दहाड़ण  छौ ,  हाथी जन  चिंघाडा मारण छौ वै कोंग्रेस ल्यराट (बकरी की मिमियाट) करणि च .

            सैम पैत्रोदा   एक अन्वेषक च पर जातीय बल पर सैम पैत्रोदा   अन्वेषक नि बौण.  सैम पैत्रोदा   एक व्यवसायी च पर   सैम पैत्रोदा जातीय कंधों पर  सैम पैत्रोदा व्यवसायी नि बौण. सैम पैत्रोदा विकास को महान जणगरो च पण सैम पैत्रोदा जाती की सीढ़ी कारण विकासु महान चिन्तक नि बौण. पण    कोंग्रेस का आज इन हाल छन जन बुल्यां  सैम पैत्रोदा   क्वी कोढ़ी ह्वाओ अर वै कोढ़ी तैं रेडी मा बैठैक कौंग्रेस भीक मंगणि ह्वाऊ , " दे  बाल्मीकि समाज का नाम से , जाती का नाम से से भोट  दे द्याओ बाबा !" 


Satire in Garhwali Prose, Satire in Uttarakhandi Literature, Satire in Kumauni Prose, Himalyan Satire to be continued ......

Copyright@ Bhishm Kukreti

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
'नेताजी आराधना कर रहे हैं' आज की राजनैतिक व सामाजिक स्तिथि पर कुल्हाड़ी

                   भीष्म कुकरेती

यद्यपि कोई विरोध भी कर सकता है की यह गद्यात्मक कविता है
कविता में सम संदर्भता है, सम उर्वरता है , और सम विलोमता के दर्शन हो ही जाते हैं
व्याकरणीय तत्वों के हिसाब से भी कविता में सार्थकता है जो आज के सन्दर्भों को उजाकर करने में सफल हैआकांक्षा भी है तो शब्दों में योग्यता भी है की मन्तव्य स्पष्ट हो पाते हैं. यद्यपि विषय ऐतिहासिक है और ऐतिहासिक भूतकाल को नये काल से जोड़ता है पर इससे कविता के भाव पर फर्क नही पड़ता है
कविता का विरोधाभास राजनीति में ह्रास को ही नहीं समाज में व्याप्त उहो:पोह , घंघतोळ , जनता में आकांक्षाओं की विभिन्नताओं के कारण जन्मा मनैक्य व मतैक्य सामने लाने में कविता सफल है
नेताजी आराधना कर रहेहैं
अपनी जीतके लिए साधनाकर रहे हैं
यूपी मेंत्रिषंकु विधानसभा की कामनाकर रहे हैं
आपकी इस कविता में अलंकार चमत्कार , अर्थोत्कर्ष , भावोत्कर्ष , आश्चर्य , जिज्ञासा की पूर्ति करने में सफल हैं .अलंकारों ने कविता विस्तार को सम्बल प्रदान भी किया है
पुरातन व अति नव प्रतीकों ने कविता को पठनीय व सुग्राह्य बाना दिया है . बधाई !
नए व पुराने प्रतीक वही बिम्ब उत्पन्न कर पा रहे हैं जो आप चाहते थे. आपकी कविता में प्रतीक आवश्यकतानुसार स्थान सम्बन्धी मिथ ( एम्स केवीआईपी वार्ड में शयन कर रहे हैं।) , अवतार सम्बन्धी मिथ ( अपनी आत्मा को मारनेवाला हीं शूर -वीर है। --यद्यपि विरोधाभासी है ) , इतिहास धर्मी मिथ ( हसीन सपनोंमें कभी कभीगमन कर रहेहैं। तिहाड़ की वादियोंमें भ्रमण कररहे हैं।)
धारणात्मक मिथ निर्माण कर पाने में भी सफल हैं ( फिर दूसरा दृष्य सामनेआता है, जो नेताजीमें आत्मविष्वास जगाताहै, फिर देखरहे हैं कि; वे नोटोंकी गड्डियों परसो रहे हैं। पांच सिताराहोटलों में रहरहे हैं I दूर लखनऊसे रह रहेहैं।)
लय की दृष्टि से आपने पदांत में शब्दों की पुनाराबृति से लय पैदा की है और आप उसमे भी सफल हुए हैं
प्रतन परिभाषा की चंद गठन व नई शैली की अर्थ धारकलय से अपने पाठकों को आकर्षित किया है
बिरोधाभास आज हमारी प्रवृति बान चुकी है जो कविता में भी दर्शित होती है
आपके वाक्य प्रसिद्ध व्यंग्यकार द्वारा परिभाषित 'शरारत पूर्ण सह-संयोजन' का उमदा उदहारण है जातिक विषय को सरल बनाने में आपने जिस विडंबनाताम्क विन्यास का सहारा लिया है वह प्रशंशनीय है

            नेताजी आराधना कर रहे हैं
              कवि : दीपक कुकरेती

नेताजी आराधना कर रहे हैं
 अपनी जीत के लिए साधना कर रहे हैं
 यूपी में त्रिषंकु विधानसभा की कामना कर रहे हैं
 हसीन सपनों में कभी कभी गमन कर रहे हैं।
 तिहाड़ की वादियों में भ्रमण कर रहे हैं।
 एम्स के वीआईपी वार्ड में षयन कर रहे हैं।
 किसी आदर्ष स्कैम का चयन कर रहे हैं।
 मन हीं मन  फिर कुछ मनन कर रहे हैं
 बस सफलता एक कदम दूर है
 नैतिकता-वैतिकता की बात सोचना भूल है।
 अपनी आत्मा को मारनेवाला हीं षूर-वीर है।
 किसी को कुचल कर आगे बढ़ना हीं सफलता की मूल है।
 और सब उलूल जुलूल है।
  फिर दूसरा दृष्य सामने आता है
 जो नेताजी में आत्मविष्वास जगाता है
  फिर देख रहे हैं कि
 वे नोटों की गड्डियों पर सो रहे हैं।
 पांच सितारा होटलों में रह रहे हैं
 दूर लखनऊ से रह रहे हैं।
 कभी दूसरे सपने भी आते हैं
 जो उनके मन को भाते हैं।
 जैसे कि एकाएक उनका भाव सांतवे आसमान को छू रहा है।
 विरोधी पार्टी का नेता उनका चरण छू रहा है
 फिर नोटों की गड्डियों से उन्हें तौल रहा है।
 लोकत्रंत्र का निरादर करने का अन्ना पर आरोप मढा जा रहा है।
 फिर सदन के नेता द्वारा सदन में बताया जा रहा है।
  लोकतंत्र का मान माननीय सदस्यों द्वारा बढ़ाया जा रहा है
 अन्ना को भ्रष्ट बताया जा रहा है।
 लोकपाल का पलीता लगाया जा रहा है।
 स्वामी अग्निवेष को नेपथ्य से सामने लाया जा रहा है।
 सदस्यों को नोटों की गड्डियों से तौला जा रहा है।
 सदस्यों को लोकपाल कि प्रतियां फाड़ने का बोला जा रहा है।
 अपने पक्ष में लाने के लिए उन्हें पकवान खिलाया जा रहा है।
 उनका गुण गाया जा रहा है
 उन्हें पटाया जा रहा है।
 बात नहीं मानने पर
 इस दुनिया को छोडकर चले जाने को बोला जा रहा है।
 फिर दूसरा दृष्य सामने आता है
  कि बहुमत के पक्ष में वोट करने के लिए
 करोड़ो का पैकेज उन्हें दिया जा रहा है।
 विपक्ष की नजर न लग जाए
 इसलिए दूर कहीं हसीन वादियों में रखा जा रहा है।
  डायरेक्टर के इच्छाअनुसार पार्ट बजाने को कहा जा रहा है।
 महामहीम के सामने परेड करने के लिए बोला जा रहा है।

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
Satire Only

चबोड़ इ चबोड़ मा 

                                            'जेल मा इ सरकारी अस्पतालौ   सांड बणनै कौंळ '


                  (Satire in Garhwali , Satire in Kumauni, Satire in Uttarakhandi and Satire in Himalayn  Languges )

                                                   चबोड्या :   भीष्म कुकरेती

                            अच्काल  जैदिन राजकरण्या स्टेडियम मा राजकरण्या नेतौं बेशरमी , गलादारी का छक्का -पंजौं  खबरूं  मा उछला नि ह्वाओ, या फिल्मुं मा,  कै खान न कै हैंको खान तैं गाळी नि दे ह्वाऊ या कवी खान विदेश नि गे ह्वाऊ   त  टी,वी न्यूज चैनल , अखबार वाळ समळदन  बल अरे ये  चौथो इस्टेट (प्रजातंत्र को चौथो खाम)  तैं त गाँ-गौळ /समाज मा क्या क्या हूणु च  की खबर बि जनता समणि बरा नामौ इ सै डाळण चएंद .

                 अर जब बिटेन यू टु जी स्कैम आई तब बिटेन त गां -गौळऔ खबरूं त अकाळ इ ना जड़ नाश इ  ह्व़े गे .इख तलक कि हेल्थ गाइड पत्रिकौं  मा अच्काल टू जी स्कैंडल, कौमन गेम्स , साँसदुं  कि खरीद फरोक्त मा  जु नेता जेल भितर एंगजाइटी का बीमार छन वां पर गाईडेंस जादा हुंद जनताS  बीमार्युं  बारा मा कुछ बि सौ सल्ला नि होंद.

                   एक नामी प्रकाशक की हेल्थ गाइड पत्रिका न त एक  अतिरिक्त विशेषांक छपाई अर वै  विशेषांकौ नाम छौ ' जेल से सरकारी हौस्पिटलूं म औणौ सौ फ़ीसदी कामयाब  बीस बीमारियाँ' .
ये विशेषांक मा दुनिया का बड़ा से बड़ा डाक्टरूं  लेख छया जां मा बतये गे बल कैदी तैं कौं कौं बीमारी जेल अधिकारी-डाक्टरूं अर सरकारी अस्पतालूं  डाक्टरूं  तैं बताण चयेंद  कि यि डाक्टर  त क्या भेमाता/ब्रह्मा; आयुर्वेदौ  धन्वन्तरी, ; यूनानी इलाज का  जन्मदाता  हिप्पोक्रेट्स या पुराणा हिमायती हकीम एविसेना, हकीम अजमल खान;   होमिओपैथी क बुबा सैमुअल हाहनेमान;  ऐल्लोपैथी क धड्वे जेम्स व्होर्टन  बि दुबर जनम ल्यावन त वूं तैं बि रिपोर्ट बणाण  इ पोडल बल कैदी तैं तुरंत आई. सी. यू. मा भरती करे जाओ.  हरेक लेख का नामी डाक्टर कलमदार न  बीमारी क बारा मा कम इ  बताई पर सांख्यकी का पूरो बस्ता /कुठार/  भण्डार ख्वाल बल दुन्या का कु कु भ्रष्टाचारी यूँ बीमार्युं तैं बताण  से जेल से सरकारी अस्पतालूं आई.सी.यू. मा ट्रांसफर करे गेन अर अबि तलक आई.सी.यू मा मौज मस्ती करणा छन, सरकारि खर्च  पर डंड  पिलणा छन. ये विशेषांक  'जेल से सरकारी हौस्पिटलूं म औणौ सौ फ़ीसदी कामयाब बीस बीमारियाँ' मा दुन्या का टौप दस लीगल अडवाईजरूं लेख बि छया जौन बताई की यूँ बीस बिमार्युं  मा कै कै  देस मा संबिधान का तहत कैं  धारा क तहत  खतरनाक से  खतरनाक  कैदी तैं बि कनकैक अर किलै जेल से आई. सी यू. मा  ट्रान्सफर करण जरुरी  होंद.

          यीं पत्रिकौ विशेषांक न  राजनैतिक , अपराधिक जगत मा धूम मचे दे. भ्रष्टाचार से दुन्या का जथगा बि देश ग्रसित छन वूं देसूं खासकर  कम विकसित देसूं   मा त ये विशेषांक  'जेल से  सरकारी हौस्पिटलूं म औणौ सौ फ़ीसदी कामयाब बीस बीमारियाँ' की मांग आशा से बिंडी ह्वाई . यीं पत्रिका तैं  कथगा इ संस्थों न 'निर्यात सम्राट' की मानद उपाधि दे . गिनिज बुक न  यीं हेल्थ गाइड पत्रिका तैं गिनीज बुक रिकोर्ड मा शामिल कार.  ' गैर सरकारी अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन ' संस्थान न पत्रिका क मालिक तैं आम जनता मा स्वास्थ्य जागरण का एवज मा पुरुष्कार दे .  पत्रिका का सम्पादक न नौकरी छोडि  याल  अर  ' जेल मा इ  सरकारी अस्पतालौ सांड बणनै कौंळ  ' की कंस्लटेंसी कम्पनी खोली याल अर अच्काल अफ्रिका अर  भूतपूर्व  कम्युनिष्ट यूरोपी  देशुंमा   'जेल मा इ  सरकारी अस्पतालौ   सांड बणनै कौंळ   '    नाम की नई कंसल्टेंसी फर्म खूब पैसा कमाणि च. 

       जन चेचक, हज्या, प्लेग,  खुर्या, डेंगू, जन बीमारी सर से सौरदन तनि पत्रकारिता अर प्रकासन   व्यौपार मा बि देखादेखी 'विशेषांक', किताब  छपणो रिवाज सरद. अच्काल जख जाओ तख़ 'जेल मा मजा कारो'. 'जेल तैं सोराग मानो', जेल माने ऐशगाह ' 'हंड्रेड परसेंट सक्सेसफुल  हेल्थ बेस्ड टेक्नीक्स   ऑफ़ गेटिंग  फेवर फ्रॉम  जेलर एंड डौकटर '    जन किताब अच्काल बुक स्टेंडु  मा  अग्वाड़ी छन अर 'जीवन में सफलता की कुंजी', ' हौ टू  विन फ्रेंड्स' जन किताब गोडाउनुं मा सड़णा छन.

   देखा देखी तन्त्र  अर योगासन सिखाण वाळ  पत्रिकौंन बि अपण व्यापारिक हितों रक्षा बान विशेषांक अर किताब धडले से छपण शुरू कौरी आलीन . 'जेल से  अस्पताल जाने की शर्तिया तांत्रिक विधियां', जेल में लाल किताब से सरकारी आई . सी.यू का फायदा सीखिए', जन किताब अच्काल भैर देसूं मा  पैसा कमा णा छन. 

      योग विद्या बि अब अपराधिक जगत मा भगवान् अर वकीलूं से बड़ो भगवान्  ह्व़े  गे . ' योगिक क्रियाओं  द्वारा जेल से आई.सी.यू जाने के  नुस्खे', 'योगिक आसनों से जेल में बेहतरीन सरकारी सुविधाएं पाईये '  जन सैकड़ो किताब भैर देशुं  भाषाओं  छपेण बिसे गेन.  अर इख तलक की जु देश योग, तन्त्र विद्या तैं हिन्दुओं धार्मिक कर्मकांड माणदा अर गैर-धर्मी क्रिया माणदा छया ऊँ देसूं मा यूँ किताबुं पर आयात शुक्ल  (इम्पोर्ट ड्यूटी) सफाचट  मुआफ कर्याणु च. आखिर यूँ देसूं मा बि त उखाक भ्रष्ट नेताओं, भ्रष्ट अधिकारी, भ्रष्ट व्यापार्युं   तैं भारत का भ्रष्ट नेताओं-अधिकार्युं-व्यापार्युं  तरां   जेल मा आराम की जरोरात छ की ना? भ्रष्ट क्रिया धार्मिक निष्ठा से बडी होंद त सबी भ्रष्ट ग्रसित देसूं तैं  'योगिक आसनों से जेल में बेहतरीन सरकारी सुविधाएं पाईये' जन साहित्यौ आवश्यकता  होण आवश्यक इ च .

        सैकड़ों साल पैलि  कबि भारत शिक्षा मा बड़ो अग्वाड़ी देश छौ . अब समौ ऐ गे कि भारत  दुन्या तैं भ्रष्टाचार करणो  नया- नया अर नव निर्मित ब्यूंत / कौंळ/काला/तरीका;   भ्रष्टाचार मा पकडेक बि बेशर्मी से समाज मा ,राजनीति मा  या ब्यापारिक थौळ मा धवल छवि बणेक  कनकैक शिरमौर बणन चयेंद जन अनोखी, बुनियादी शिक्षा सिखाऊ .अर लालू  यादव, यदुरप्पा, मुलायम सिंग यादव, विनोद गोयनीका,  चंदोलिया, राडिया , सिद्धार्थ बेहुरा,  बी.पी. आचार्य,कोनेरू प्रसाद, सुनील रेड्डी, जय ललिता आदि जन विशेषज्ञों तैं नय़ी  युनिवर्सिटी  का  आचार्य बणैक  नयी भारतीय मीमांसा   अर नव भारतीय दर्शन सिखाणो बान   सरा दुनिया मा उनी  घुमाये जाव जन सम्राट अशोक न महेंद्र अर संघमित्रा तैं  बुद्ध धरमौ प्रचारौ बान  घुमाई छौ जां  से  भारत को नाम नव शिक्षा मा फिर से पुनर्स्थापित   हवे जाव. अर इन न्यू  युनीवरसिटी का लीगल ऐडवाईजर अर प्रोफेसर ह्वाल़ा अपणा कपिल सिब्बल, जेठमलानी, मनीष तिवारी ,  अरुण जेटली, डा. अभिषेक  संघवी, रवी शंकर प्रसाद जु दुनिया तै सिखाला कि संविधान की पवित्र  धाराओं  तैं  तोडी-मरोडिक   टी.वी. चैनेलूं   मा इंटरव्यू  देकी  कनकैक जनता तैं बेवकूफ बणये जै सक्यांद. 

(This is work of fiction only, so, names are imagery )

    Satire in Garhwali , Satire in Kumauni, Satire in Uttarakhandi and Satire in Himalayn Languges  to be continued ........

Copyright@ Bhishm Kukreti

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
Satirical tablet for irritation                      
                     
                                                   Are Private Hospitals Depriving Poor?  


(Satire from Garhwali, Satire from Kumauni, Satire from Uttarakhandi, Satire from Himalayan)
                               
                                                              Bhishm Kukreti                
 
                 These days, media is after posh private hospitals that they got facilities from government that these hospitals would also offer medical facilities to poor too but most of such hospitals don’t provide medical facilities to poor ones. 
 I visited a posh private hospital to know the reality.
The cabin of chief administrative officer was more spacious than average Indian industrialists. The big cabin walls were artfully decorated by small but well-designed or chic stickers of insurance companies from all countries. Even the cabin roof was decorated in classy manners by stickers of globally famous insurance companies.
    I asked the chief administrative officer, ‘Sir, there are news that posh hospitals who got cheap land from governments and many tax benefits as yours depriving medical facilities to poor as recommended by laws.”
 Offering me anti halitosis tablet (mouth- freshener) to chew, he said,” No, it is absolutely false and villainy news that hospitals as our status are depriving poor for medical facilities.”
I countered slightly irritatingly,” But the news are authentic in periodicals and television inform that hospitals those got licenses and facilities from central and state governments are not offering any services to poor which, they are supposed to do obligatory.”
Offering me an anti anger gel answered, “The news might be sponsored by mid standard hospitals against their rival hospitals. We take care that the poor get their dues and proper consultancy.”
I asked anxiously, “How do you say that your hospital is not depriving   poor?”
Presenting me a Xanax an anti anxiety tablet, he responded,” You should first know the procedure of our hospital.”
   Curiously, I said,” Definitely I would study your procedure.”
            Putting anti-probing drop into my nose, he showed me procedural file on his laptop and explain verbally, “Whenever any patient of any economical class visits our hospital, we fill the form and be noted our staff fill the form (on computer) and we ask the income of the patients.”
 I asked confusingly, “What is there to know about income of a patient?”
Putting a very small drop of Benzodiazepine in my mouth (a short term medicine for soothing anger or agitation), he said, ‘Please listen carefully.”
 He explained, “If a patient is having lower income that our medical fees, we advice the patients by many ways.”
I interpreted, “Such as..?”
He put slightly bigger drop of Trazodon  (anti anxiety medicine) on my mouth and explained, “  If patients are really poor we advice them to visit government run hospitals, we also provide the patients window numbers of each government hospitals of Mumbai where the patient should ‘ cut parchi’  and we don’t charge any consultancy fess for visiting our hospital and patient taking rest in our air conditioned reception room. This is very much proof that we are offering facilities to poor.”
 Before I could ask further, he put another sand sized ‘goli’ in my mouth and continued explaining, “If we find the patients are average in income, our well trained and efficient staff recommend the patients to visit doctors as who charge fifty bucks with medicines, fifty bucks without medicines, hundred bucks with our without medicines and advice doctors taking fees up to five hundred bucks with or without medicines. We recommend doctors as per the paying capacity of patients. We provide a fine recommendation letter to doctors on a costly letter head with good luck to patient. We provide full map of recommended doctor’s clinic to such patients.  Immediately our mail also reaches to doctor about patient’s contact details. Mind! We don’t charge a single penny to our esteemed poor patients.  This is our humble service to poor patients.  On an average, we provide free consultancy to hundred patients per day. For such matter, we have huge high salaried administrative staff. We cut bills for hundred bucks for such patients and then deduct hundred rupees as concession to poor patients”
  Even after taking seductive , I could asked, ‘” A very kind  move! , it means that you are charging  fees to rich patients and paying salaried to staff recommending poorer for specific doctors.”
He answered, “Since, your question is sensible, I am not offering you any ‘goli’. Ours is a private hospital and our shareholders established hospital for income not for donation. The doctors whom we recommend patients are honest enough to pay back our ten percent commission on monthly basis.”
 I asked, “What are the criteria about rich patients?”
He tickled on my stomach and answered, “We take patients only they have medical insurances. We don’t take patients who are not having insurances. “
Laughingly, I said, “It means your hospital is running on the insurance policies only”
Dropping   tear generating pint of drop into my right eye, he answered, “Yes! We believe in insurance policies of patients and not on their income certificates.’
 I again asked,” Since, yours is nursing home. You have to show that you are offering medical treatments to poor too.”
 He put another tear generating drop in my left eye, ‘See! We have medically insured regular customers from business houses. In case, any of their uninsured mangers or staff has to get medical treatment, we offer free medical treatments to such clients as poor Indian citizen.”
          Knowing, that I am a tiny community -web site journalist, genre officer offered me a 25 percent discount coupon of an Indian insurance company. Had I been journalist of a national paper I would have got hundred percent discount coupon of foreign insurance firm as gift.
(Its work of fiction)
***Satire from Garhwali, Satire from Kumauni, Satire from Uttarakhandi, Satire from Himalayan to be continued …….

Copyright@ Bhishm Kukreti

 
 
 






   

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
Satire and Fatkar
चबोड़ इ चबोड़ मा
 
                                जड्डू/ ठञड से बचणौ 12 कामयाब  उपाय

            (Garhwali Satire, Kumauni Irony, Uttarakhandi Humour, Himalayn Wits )                                   

                                                                          भीष्म कुकरेती
               

         जन कि हर साल होंद अर हर मौसम मा हून्द् उनि ये बरस बि ह्व़े. सब्युंन ब्वाल बल ये साल से बिंडी जड्डू त

म्यार पड़-ददा न बि नि द्याख. म्यार  पड़ -ददा न बि हरेक ह्यूंद मा ब्वाल छौ, " इन जड्डू कबि नि प्वाड़. जन ये बरस पोड़ .."

  त मी ये साल जणगरों/स्पेसिलिस्ट तैं पुछणु   रौं  बल  जड्डू मौसम /ह्युन्दो मौसम मा जड्डू से कनै बचे जाव.ए साल ना सै हैंक

साल त इ नुस्का भोळो साल त काम आइ जाला ।

१-  गढवाळ से भागो अर दूर ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड , मौरिसिस क तर्फां घुमणो जाओ .

२- जु तुमन इन कामयाब नौना पैदा नि कौरिन जु ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड , मौरिसिस मा

ह्वावन त मुंबई, गुजरात, हैदराबाद, बेंगलोर का तरफ भागो . मी तैं सोळ आना उम्मेद  च इख त क्वी ना क्वी नौनु ह्वालू .

अब जब साग-भुज्जी  नि ह्वाओ त  लूण से काम चलाण पोड़द . नौनु ना सै त रिश्तेदार होला त जड्डू मा दक्खिण का

रिश्तेदारूं इख  अड्डा जमाओ. पगाळ बौडाणो बान रुड्युञ/गर्मी मा रिश्तेदारूं आवभगत गढवाळ मा कारो.

३- उत्तरी भारत  वाळु  कुण सला च जडडू /ह्यूंद मा काम पर कबि नि जाण. अपण ना सै  दसरौ ड्यारम आग तापो.

४- हाँ ! जु तुमर औफ़िस मा हीटिंग रेडिएटर लग्याँ  छन त ऐत्वारो बि मय बालबच्चों/यार दगड्यो सैत  औफ़िस जावो.

५- हीटिंग रेडिएटर खरीदो. हैं! पैसा नीन ! ये भै यूँ विदेशी बैंकु भट्टा किलै बैठाणा छंवां ?  विदेसी /परदेसी बैंकु से  उधार मा, पगाळ मा,

इंस्टालमेंट मा  हीटिंग रेडिएटर खरीदो. आप जड्डू से बची जैल्या, विदेसी बैंक मुनाफ़ा कमाला अर भारत की इकोनोमी ग्राफ

ऐंच जाण बिसे जालो.  अपण खातिर ना सै , देसौ  खातिर  उधार मा हीटिंग रेडिएटर खरीदो अर देस की इकोनोमी सुदारो.

इनी नयाणो बान इम्पोर्टेड गीजर इ इस्तेमाल कारो. 

६- जड्डों मा इम्पोर्टेड जिंजर, इम्पोर्टेड ब्लैक पेप्पर, इम्पोर्टेड क्लोवऔ पेस्ट/इम्पोर्टेड मस्टर्ड ऑइल   ड्यारम रखो . मीन  रिसर्च  से पता लगाई बल अब 

हम भारतियुं बौडी   निखालिस भारतीय चीजुं से हंड्रेड  परसेंट इम्युन्ड ह्व़े गे याने की हमर सरैल पर अब भारतीय नुस्कों से

क्वी फ़रक नि पोड़द. जन अब हम अपणि बोली -भाषा नि बींग/समज  सकणा छंवां उनि हमारो पवित्र भारतीय शरीर का क्वी बि अंग

निखालिस भारतीय आदु/अदरक/काळी मिर्च/मुलेठी आदि से प्रभावित नि होंद. हमर सरैल पर केवल  इम्पोर्टेड ब्रांड को इ असर होंद.

अर मनमोहनी  इकोनोमिक्स का हिसाब से इम्पोर्ट करण  से भारतीयता को हरण ह्व़े जाओ त हूण द्याओ  पण इन्डियन इकोनोमी अळग भगण

लगी जाली. त अपण शरीर की केमिस्ट्री अर इन्डियन इकोनोमी का खातिर विंटर सीजन मा कम्पलसरी इम्पोर्टेड जिंजर,

इम्पोर्टेड ब्लैक पेप्पर, इम्पोर्टेड क्लोवऔ पेस्ट, इम्पोर्टेड मस्टर्ड ऑयल  यूज कारो. 

७- केवल इम्पोर्टेड गरम कपड़ा अर इम्पोर्टेड डिसाणो कपड़ा  ही खरीदो.  जब तलक हम देशभक्त भारतीय  मीलिक हरेक  ग्रामीण  उद्यम  पर 

ताल़ो नि लगौला तब तलक हमारि ठंड कम नि ह्व़े सकदी. जड्डू बचाणो खातिर, भारत मा क्वी बि गरीब जड्डू से नि मोर का वास्ता केवल 

इम्पोर्टेड गरम कपड़ा अर इम्पोर्टेड डिसाणो कपड़ा  ही खरीदो.अमेरिकी राष्ट्रपति  की सौं छन जैदिन भारतीयूँन बच्यां -खुच्यां  सबि ग्रामीण उद्यम खतम

कौरी द्याई त समज  ल्याओ वैदिन  भारत मा क्वी बि ठंड से नि मोर सकद .उन हम गढवाळी ये मामला मा हौर इन्डियनूं से जादा प्रगतिशील /प्रोग्रेसिव छंवां 

अब कै बि गढवाळी तैं पता बि नी च बल ग्रामीण उद्योग हुंद क्या छन.

 ८-  नाक पुंजणो  इम्पोर्टेड हैण्ड कर्चीफ/ रुमाल, टिस्स्यु पेपर, इम्पोर्टेड चाइनीज बाम  आदि गाड़ी मा या खिसाउन्द धर्युं रौण चयेंद.खादी क रुमाल भूल से बि यूज  नी होण

चयेंद . अच्काल खादिक रुमालऔ प्रयोग  से हमर नाक लाल ह्व़े जांद. 

९- ह्युन्दुं मा गाजर आदि को रस सौब दकियानूसी बात इ ना अवैज्ञानिक बात ह्व़े गेन .  ह्युन्दुं मा दिन मा चार पंच दें रम या व्हिस्की पीण जरूरि च . अमेरिका मा एक नामी गिरामी मेडिकल रिसर्च कम्पनी न सिद्ध कौर याल बल अब हम भारतीयूँ

ल्वे/खून मा भौत बड़ो बदलाव ऐ गे. अब हमारो हिन्दुस्तानी ल्वे/खून बदलिक  वेस्टर्नाइज्ड अफेक्टेड क्रुओर( ब्लड)  ह्व़े गे . त अब हमारू  ब्लड मा हर समौ

अल्कोहल का कुछ डोज जरूरी हूण चयेंदन  . अब इन मा हरेक भारतीय तैं खासकर जडडू  मा  टक्क लगैक ध्यान दीण पोड़ल बल हर समौ ल्वे/खून मा दारु/अल्कोहल 

क मात्रा कतै   बि कम नि ह्वाऊ . जनि इंडियन ब्लड मा  अल्कोहल की मात्रा कम  ह्व़े ना तनी इन्डियन ब्लड   हिन्दुस्तानी खून मा बदली जालो अर आज हिन्दुस्तानी खून

ह्यूंद तैं बरदास्त नि कौर सकद. यो इ कारण च अच्काल प्युअर  इंडियन टी.वी चैनेल प्रकृति दत्त ह्यूंद, हेमंत अर शिशिर मौसम /जलवायु  तैं  ठञडासुर,  मौत का सौदागर, मानव विरोधी

बरफ का कहर, जन नाम दीन्दन.  हाँ त ! ह्युन्दुं  मा,  दिन मा हरेक इंडियन तैं चार से पांच दें दारु  पीण चयेंद.सरैल बि गरम रौंद अर   इन्डियन इकोनोमी मा बि उच्छाला रौंद.

१०- जब बि क्वी पौण/मेंमान  तुमर ड़्यार आण चांदो त वै खुण कडक शब्दुं मा हिदैत दीण  चएंद बल दगड मा   दारु-सारु क बोतळ अर मुर्गा-सुरगा बि जरुर लाओ.

हम तैं अपण इकोनोमिकल डेवलपमेंट का खातिर  अपणि संस्कृति मा कल्चरल इवोल्युसन ल़ाण जरूरी च.त यांक बान जरूरी च कि जडडू मा चा या गरम पाणि से ना

 बल्कि मेहमानों स्वागत मुर्गा-सुरगा अर दारु-सारु से ही ह्वाओ.

११- जब कबि आप जडडू मा कैक पौण/ मैमान बणनो  जावन  त घर्वाती/घराती/मेजवान मा साफ़ बोली दीण चयेंद, " जड्डों मा पौणों स्वागत मा वेलकम  ड्रिंक मा जिन का एक या द्वी पैग ह्वावन.

सुस्ताणों ड्रिंक मा  द्वी रम का पैग ह्वावन अर लेजर (मौज) ड्रिंक मा व्हिस्की ही होण चयेंद. मंचिंग त मुर्गा से तौळ हूण इ नि चयेंद.अर सी औफ़ ड्रिंक  वाइन या .."

१२- ह्यूंन्दुं , मा अपणी सोच सकारात्मक बणाओ अर गरम जोशी से राओ जां से गर्मी चौड़  /जल्दी ऐ जाओ.


Satire from Garhwal, Satire from Kumaun, Satire from uttarakhand, Satire from Himalayas  to be continued..........

Copyright@ Bhishm Kukreti

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
Satire only
चबोड़ इ चबोड़
मा

                                         अपण पूठो गू दुसरौ  पूठ पर   


               ( Satire in Garhwali, Satire in Kumauni , Satire in Uttarakhandi and Satire in Himalayan Languges )
                                                     
                                                                                               भीष्म कुकरेती

 

                     इख मुंबई मा हमर बिल्डिंग गढवाल दर्शन मा गणपति अर इसाइयूँ  नै साल पर बच्चा अपर बणयाँ प्रोग्राम करदन. बिल्डिंग औ हौल मा बच्चा लोक रिहर्सल करदन. एक दिन सबि अपण  अपण रोल अलग अलग ह्वेका हौल मा रटणा छ्या जां से कि वो अपण डाएलौग ठीक से बोली साकन . अब द्याखो कन अदाकारी होंद धौं !

  कपिल सिब्बल कु  रोल वळ - हाँ! ए.राजा से टू जी स्कैंडल मा चुंगटि बरोबर गलती ह्व़े च पण यू सौब बी.जे.पी. सरकारै गलती च . बी.जे.पी. गबर्मेंट टू जी इ नि लांद त किलै   देशौ  बरखबान इन ढंग से हुंद. बी.जे.पी. वळु तैं  देश मुंगन मोबाइल लाणो बान माफ़ी मंगण चयेंद . ना मोबाइल आन्द अर ना ही बिचारो ए.राजा जी छ्वटि-म्वटि   भुलमार मा  गल्ति करदा

बी.जे.पी. क रवि शंकर प्रसाद -  पत्रकारों ! महाराष्ट्रऔ भूतपूर्व  मुख्यमंत्री अशोक चौहाण  को भ्रष्टाचार अक्षम्य च  किलैकि अशोक चौहाण पर धारा अड़गम -बड़गम   सड़म से   लागू होन्दन. पत्रकार जी ! क्या पुछणा छ्न्वां ..? यदुरप्पा जी !  .. बिलकुल नै ..यदुरप्पा जी पाक साफ़ छन, वून क्या वूंका कै बी रिश्तेदार न  क्वी भ्रस्टाचारी काम नि कार . बी.जे.पी. क मतिमारी, बेवकूफ बणाओ, गल्ति ह्वाओ त जोर से  हल्ला कारो नियमों हिसाब  से यदुरप्पा जी अर वूंका रिश्तेदारूं  पर भ्रष्टाचार को क्वी केस इ नि बणदु

डा. अभिषेक संघवी - पत्रकार लोगो! यो ठीक च महाराष्ट्रऔ भूतपूर्व मुख्यमंत्री अशोक चौहाण  पर धारा अड़गम -बड़गम   क हिसाब से थ्वडा भौत केस बणदो च पण मी रवि शंकर प्रसाद जी तैं याद दिलाण चांदो बल  कोंग्रेस की उलजलूल, तिकड़मि-सिकड़मि, अणभर्वसि नियमों क हिसाब  से अशोक चौहाण से बड़ो इमानदार मुख्यमंत्री  भारत मा पैदा ह्वाई इ नी च.   

भारत कु शिक्षा मंत्री - आज अग्यारा नवम्बर (राष्ट्रीय  शिक्षा दिवस) सन २०१२  को  दिन इन्डियन एज्युकेसन का बान ग्रेट डे  च.  आज यीं बैठक मा भारत का जण्या-मण्या शिक्षा शास्त्री कट्ठा हुयाँ छन. त ख़ुशी क मौक़ा पर  मी महान भारत का   एज्युकेसन मिनिस्टर अनाउंस करदो बल हमारो  शिक्षा विभाग न सन अठारा सौ अट्ठावन (१८५८) का शिक्षा नियम कोड यक्स, यक्स, वाई --वाई, जेड -जेड  मा एक क्रांतिकारी, इंकलाबी तब्दीली कौरी आल. पैल  सन अठारा सौ अट्ठावन (१८५८  शिक्षा नियम कोड यक्स, यक्स, वाई --वाई, जेड -जेड को नाम छौ " क्लर्क बणाणो अणसाळ'. अब हमारि सरकार न ये नियम को नाम  धौरी आल," सीनियर (ठुलो )  क्लर्क बणाणौ निर्माण शाला" ।  हमन सन अठारा सौ अट्ठावन (१८५८) का शिक्षा नियम  " क्लर्क बणाणो अणसाळ'  क भितर एक बि शब्द नि बदलिन जां से कि राज्य अर केन्द्रीय सरकारूं प्रशासनिक  स्टाफ तैं क्वी परेशानी नि ह्वाऊ.  मी तैं पूरो भर्वस बल हमारी सरकारों ये क्रांतिकारी, रिवोल्युसनरी कदम से शिक्षा मा आमूल-चूल  परिवर्तन ह्वालू अर  इंडिया क नाम फोरेन कंट्रीज मा उज्ज्वल होलू. 

भारत कु वित्त मंत्री - पत्रकार  लोगो! आज मी सिरफ़ यू बुलण चांदो बल भारत मा    ये साल ज्वा बि प्रगति ह्वाई वो श्रीमती सोनिया गाँधी जी क दूर दृष्टि अर श्री राहुल गांधी जी क उत्तर प्रदेश मा अथक भ्रमण का बदौलत ह्वाई. अर जो भी मंहगाई बढ़णि च या भारत मा गरीबी बढणि च  वा सौब हमारि विरोधी पार्टीयूँ असहयोग को कारण होणु च .

पर्यावरण मंत्री - भाइयो अर बहिनों ! कु -गाँ - कखौ -गाँ मा विकास इलै नि होणु च किलैकि कु -गाँ - कखौ -गाँ  की जनता हमेशा से ही औद्योगिक विकास क बारा मा इ सुचणि रौंदि   अर एक रति भर बि पर्यावरण बचाणो बारा मा   नि सुचदी .

विकास मंत्री -  भाइयो अर बहिनों ! कु -गाँ - कखौ -गाँ मा विकास इलै नि होणु च किलैकि कु -गाँ - कखौ -गाँ  की जनता हमेशा ही पर्यावरण बचाणो बारा मा इ सुचणि रौंदि   अर एक रति भर बि औद्योगिक विकास क बारा नि सुचदी   

कृषि मंत्री -   उस्मानाबाद  का दगड्यों  (वोटर्स)  ! उस्मानाबाद महाराष्ट्र मा सबसे पिछड़ा क्षेत्र च. जब तलक उस्मानाबाद मा कृषि विकास नि होलू इखाक विकास असम्भव च. पण उस्मानाबाद मा  कृषि विकास इलै नि होणु च किलैकि खेल मंत्रालय न अबि तलक मोडर्न क्रिकेट ग्राउंड की अनुमति नि दे . जैदिन खेल मंत्रालय उस्मानाबाद मा मोडर्न क्रिकेट ग्राउंड की अनुमति दे द्यालों उस्मानाबाद जिलौ  भाग खुलि जाला .

विज्ञान अर तकनीक मंत्री - हम अब जून (चाँद) मा जाणै तैयारी करणा छंवां . मी प्रधान मंत्री को अहसान मंद छौं बल जौन शिक्षा मंत्रालयौ  अद्धा बजट काटिक ' मिसन  टु मून '  योजना तैं दे

एक राज्यौ मुख्य मंत्री - चीफ सेक्रेटरी जी !   क्या बुलणा छंवां ? बल  मिनिस्टरूं अर विधायकुं बंगला, गाड़ी-घ्वाड़ा , बिजली-पाणी, यात्रा भत्ता आदि क बजट छैइ मैना मा खतम ह्व़े गे? त इन कारो कि  ' अति गरीबी हटाओ योजना' क बजट कम कौरिक विधायकुं अर मन्त्र्युं मेंटेनेन्स बजट बढ़े द्याओ.

बुड्या गूणी  छ्वटा  छ्वटा गूणयूँ तैं सिखाणो छौ- हम गूणि यूँ तैं  मनिखों बिटेन सीख लीण चयेंद कि कन अपण पूठो गू दसरौ  पूठ  पर घुसण चयेंद जां से अपण पूठ लोगूँ समणि साफ़ दिखयाउ !   


 Satire in Garhwali, Satire in Kumauni , Satire in Uttarakhandi and Satire in Himalayan Languges to be continued...

Copyright@ Bhishm Kukreti 


 

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
Satire only
चबोड़ इ चबोड़ मा


                                घन्ना भाई क अकळाकंठि 

(Satire in Garhwali Langauge, Satire in Kumauni Language, Satire in Uttakakhandi Language, Satire in Himalayan Language)
                           

                                                      भीष्म कुकरेती
                 

                        चुनौ ह्वेगेन घन्ना भाई त   चुनौ परिणाम की जग्वाळ मा छन पण छै मार्च अबि दूर च त अपण काम पर छन. पण उ बुल्दा छन ना बल  घन्ना भाई चुनौ परांत  चुप्प राउ बि त गौं का लोग थुका चुप राला.  , भयात, मुंडीत, थोकवाळ ; गाँव वाळ, पार्टी वाळ, यार दगडया, पौन-पंछी, गोर बछर,  सबि जंगड़ ठोकिक, पतड़ देखिक, घन्ना भाईक कपाळो  लकीर देखिक, पूछेरूं उदारण देक, सगुन अपसगुन की व्याख्या कौरिक,  घन्ना भाई क सौं घौटिक बुलणा छन बल घन्ना भाई त जीति इ ग्याई बस डिक्लेयर हूण बाकी च  .

                                अर जब घौरक  मूसू, उप्पन  से लेकी डिल्ली का छप्पन नेता तक बवालन बल घन्ना  भाई त जीति गेन त   घनना भाइन समजण इ च बल वो जीति गेन विधायक बौणि गेन. अर  जनि घन्ना भाई तैं लग बल अब घन्ना भाई अछेकी विधायक बौणि गेन त    घन्ना भाईक अकळाकंठी बि शुरू ह्व़े ग्याई. घन्ना भाई सुचण बिसेन बल एम्.एल.ए बणणो बाद जु .... जु विधायक बणनो बाद ....

 जु घन्ना भाई नरेंद्र सिंह नेगी जी तैं अपण ड़्यार चा दगड नमकीन, मिठाई, केक खिलान्दन त नरेंद्र सिंग नेगी जीन न बुलण बल द्याखो घन्ना भाई जनतौ   पैसों की खौतफ़ोळ करणु च.

जु घन्ना भाई नरेंद्र सिंह नेगी जी तैं खाली चा पिलांदन त नेगी जी न बुलण  बल घन्ना भाई अब त बड़ो आदिम ह्व़े ग्याई खाली चा मा टरकाणु च 

जु घन्ना भाई ड्याराडूण  बिटेन कार मा पौड़ी आन्दन त पौड़ी वाळुन बुलण बल द ल्या !  घन्ना भाई घूस खाण मा माहिर ह्व़े ग्याई तबी त कार ...

जु घन्ना भाई  ड्याराडूण बिटेन पौड़ी रोडवेज क बस मा आन्दन त पौड़ी वाळुन बुलण बल द ल्या ! घन्ना भाईक क्वी औकात इ नी च .. तन्या क तन्नी..

जु घन्ना भाई  ड्याराडूण बिटेन पौड़ी ऐक बस स्टौप पर मीटिंग -सीटिंग कारल त पौड़ी वाळुन बुलण बल द ल्या ! ब्याळक जयुं-बित्युं घन्ना भाई  हम तैं दिखाणु च बल  स्यू बड़ो नेता ह्व़े ग्याई. 

 जु घन्ना भाई ड्याराडूण बिटेन पौड़ी ऐक बस स्टौप पर मीटिंग -सीटिंग नि कारल त पौड़ी वाळुन बुलण बल द ल्या ! तै घन्ना भाई तैं जनता क कुछ पोड़ी इ  नी च. चोरुं तरां आन्द  अर  चोरुं तरां चलि जांद

 जु घन्ना भाई ड्याराडूण बिटेन पौड़ी ऐक बस स्टौप पर मीटिंग -सीटिंग मा लम्बो भाषण दीन्दन त पौड़ी वाळुन बुलण बल द ल्या ! घन्ना भाई हम तै दिखाणु च बल अब उ नेता ह्व़े ग्याई.

 जु घन्ना भाई ड्याराडूण बिटेन पौड़ी ऐक बस स्टौप पर मीटिंग -सीटिंग मा छ्वटु भाषण दीन्दन त पौड़ी वाळुन बुलण बल द ल्या ! घन्ना भाई तैं पौड़ी वाळुक फिकर इ नी च. बगैर तैयारी  क भाषण  देक चली जान्द जन बुल्यां संगरांद बजाणो पौड़ी अयूँ  ह्वाऊ!

  जु घन्ना भाई लोगूँ दगड हंसी मजक्या  भौण  (स्टाइल ) मा बात कारल त लोगुन बुलण बल   द ल्या ! घन्ना भाई प्रधानमंत्री बि ह्व़े जालो तबी बि  रौण वैन जोकर का जोकर इ च

जु घन्ना भाई लोगूँ दगड गम्भीर स्टाइल मा बात कारल त लोगुन बुलण बल द ल्या ! घन्ना भाईक टिपोड़ त द्याखो! हम तैं दिखाणु च.. अरे हम नि जाणदा कि लोगुं तैं हंसै हंसैक  त घन्ना भाई  नेता बौण अर अब गम्भीर भौण मा एक्टिंग  ... 

जु घन्ना भाई हर मैना अपण चुनौ  क्षेत्र मा जालो त लोगुं बुलण बल इ राम दां!  घन्ना भाईम  ड्याराडूण मा कुछ काम त छ ना, जब द्याखो नकड़म-नकड़म- नप्प उठिक  ऐ जान्दो इना ..नेतागिरी झाड़नो . अरे ड्याराडूण मा राओ त हमकुण कुछ स्कीम उस्कीम पास कराओ . क्या धर्युं  च  वै  घन्ना भाईक इख . 

जु घन्ना भाई अपण चुनौ क्षेत्र मा टैम टैम पर नि जालो  त लोगुन  बुलण बल द ल्याओ ! घन्ना भाई ड्याराडूण मा मलाई खाणो ह्वाल, मालपुवा  खाणो ह्वाल जु  !  वै तैं ल़े जनता की क्यांक फिकर! क्याकि पोड़ी च वै तैं अपणी जनता कि परेशानी कि ...

जु घन्ना भाई ड्याराडूण मा चुनौ  क्षेत्र से अयाँ लोगुं दगड बगैर बात घुमै क बात कारल त लोगुन बुलण बल  जु घन्ना भाई एम्.एल.ए बणन  से पैलि मयळि भाषा मा बचळयांद  छौ उ अब विधयाक की धौंस मा बड़ो इ रुखो  भौण मा  बचल्यांद. घमंडी ह्व़े गे.

 जु घन्ना भाई ड्याराडूण मा चुनौ क्षेत्र से अयाँ लोगुं दगड  मयळि भाषा मा बचळयाळ लोगुन बुलण बल  घन्ना भाई एम्.एल.ए बणणो उपरान्त बक्की बातुं ऐक्टर ह्व़े गे . काम त हमारो कुछ करदो नी च फोकट मा चिपळि चिपळि बात. बथों से थुका  पुटुक भर्यांद  . 

जु घन्ना भाई विधान सभा मा अपण तर्फां लोगुं परेशानी क बात उठाला त लोगुन बुलण बल उंह! सुद्दी बरा नामौ भाषण छौ . हम तैं दिखाणु च बल  घन्ना भाई  विधायक च अर ..

जु घन्ना भाई विधान सभा मा अपण तर्फां लोगुं परेशानी क बात नि उठाला  त लोगुन बुलण बल नेता लोग सौब इनी होन्दन जनि राजधानी जोग ह्वावन ना कि जनता तैं बिसरी जान्दन अर उंक बान  जनता जाओ भाड़ मा ..

अर हर घड़ी घन्ना भाई सुचणा रौंदन कि एम्.एल.ए बणनों उपरान्त क्या करे जाओ. बस घन्ना भाई बि कै पोलिटिकल मनोचिकित्सक की खोज मा ड्याराडूण ऐ गेन.

 

( धाई/सूचना---मीन अपण तरफ बिटेन झूट लिखणो पूरो पुठ्या-जोर (कोशिश) लगै  पण  फिर बि कखी कखी सच लिखे गे होलू त वै सच तैं झूट इ मानिक चलीन भैरों!.)



Satire in Garhwali Langauge, Satire in Kumauni Language, Satire in Uttakakhandi Language, Satire in Himalayan Language to be continued ......


@ Copyright@ Bhishm Kukreti

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
Satire only

                              Valentine Day is a New Craze in My Village

(Satire on Social subjects from Garhwal, Satire on Community Topics from Kumaun, Satire on Political issues from Uttarakhand, Satire on Administration issues from Himalayas)
                                            Bhishm Kukreti

            Those who comment that there is no progress in rural Uttarakhand are far away from reality. There might not be progress from water availability point of view but the people of Uttarakhand are as progressive as Uttarakhandis in Canada as Parashar Gaud, Balkrishna Bhatt in Singapore ,  or as progressive as Geetesh Negi in Singapore or Vinod Jethuri in UAE.
  Today is Valentine day, Gaud, Geetesh, Balkrishna and Jethuri did not post me any well wishes for Valentine day.
            However, I have been receiving calls from Pahad from Rose day about ‘Happy Valentine Day’. 
       Fifteen years old Sharmila a niece in relation from my village asked me through pay call store from her school area situated in my village, “Uncle! Are you aware that last year, Bhondu, Rutadu, Hagadu, Mutadu, Simsimu, Simpdyaa from other villages residing in different cities came to our village for Nagraja Pooja celebration?”
  I answered, “Yes! Beta! I am fully aware that they have relation in our village and came to our village at that auspicious occasion.”
 She told,” Uncle! I want their E-Mail IDs which you noted down at that time.”
I asked her, “Sharmila! Why do you require E-Mail Ids?”
She answered,” Uncle! Every girl in my high school has been posting ‘Happy Valentine day’ compliments   to their friends residing in cities. Since, foolishly I couldn’t collect their E-Mail Ids I am still to post such complements. Everybody including my headmistress Mrs. Bhibhratya Devi is teasing me for my not posting Valentine Day complements to my friends residing in cities.”
 I advised her, “Beta! You can offer ‘Valentine Day’ compliments to your friends in villages itself.”
She explained,” No! No! Everybody including my vice-headmistress Mrs. Dhamdyati Devi says that greatness lays if we could post Valentine Day complements to friends residing in Indian cities or foreign countries.”
I still insisted,’ But Beta! Nothing is wrong in complementing village friends for that matter.”
She shouted,” Uncle! Everybody in my school including my class teacher Miss Chhakchhyati Chhori says that it is the lowest standard for a village girl offering VD complements to rural guys. “
Confusingly, I asked,” Beta! I am unable to understand this argument.”
She explained,” Our social behavior teacher Miss Chakchundari made us very clear that since every village girl has to marry a city boy, it is essential that a village girl learns all bad etiquettes of cities in her teen age.”
I did say,” In a way, Miss Chakchundari is absolutely right”
She ordered me,” Uncle! Please SMS the Email-Ids of all the boys.” She put off the phone.
There was another miss call from my old class mate Acharya Prasad. Since, since his childhood, his inclination was towards plucking Hisra , Kingoda etc, he could not study beyond fifth standard. Very extrovert Acharya Prasad is now famous social worker of my area.
I asked, “Tell me Acharya?”
He replied,” Bhishm! You know that these days, people including college and school principals  of our area call me for delivering lecturer for every occasion.”
I complemented him, “It’s because you are better orator than Atal Bihari Vajpai and late Prakash Veer Shashtri. What is so urgent from me?”
He informed, “Tomorrow I have to deliver lecture in three junior schools, one inter college and in one degree college.”
I said,” that’s great.”
He said,’ Yes! I have to deliver lecture on Valentine Day in each schools and colleges.”
I shouted,” What?”
Acharya answered,” Yes, as of now, Valentine Day has become a social craze, in our villages. You please brief me about Valentine day, the reason behind its celebration and what is the significant of Valentine day. Just brief and I shall elaborate and will make it interesting the subject by adding the stories of Krishna’s Ras leela etc.”
 I explained Acharya about Valentine Day whatever I learned from the Internet Blogs as ‘Hamar Uttarakhand’ ,’Kauthig’,’Myor Uttarakhand’, We R Kukreti’,’ Kumauni-Garhwali Youth’,  ‘Bedupako’ etc.

 Copyright@ Bhishm Kukreti

Satire on Social subjects from Garhwal, Satire on Community Topics from Kumaun, Satire on politics from Uttarakhand, Satire on Administration issues from Himalayas to be continued …..

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
Satire only
                                                 My Workplace Romance

(Satire on Social Issues, Satire on Political Issues, Satire on Red Tapes, Satire on Economical Issues)

                                                      Bhishm Kukreti


   The wife asked, “Tell me name of your office colleague with whom you’ve been romancing for so many years.”
I asked,” Why is there sudden interest on my romance in workplace?”
She replied,” Chhaunu and Chinkhu ke papa! I am serious to know about your workplace romances.”
I answered,” Having you as beautiful wife, I am not so lucky to have time for workplace romance.”
Annoyingly, she said,” I am not in mood to have jolly talks. It is very much essential for me to know about your extra marital romances.
I pleaded,” I don’t have any  ...”
She shouted,” it is just impossible that you will not have workplace romance and will not have a couple of female lovers.  As usual, you are fooling me. There is report in Economic Times that fifty percent (50%) of people had office romance and fifty one percent (51%) people have affairs with colleague only. You must be among those fifty percent (50%) or among fifty one percent.”
I said, “I don’t have any female romancing partner in my workplace.”
She said,” Don’t you have affairs with your juniors?”
I answered,” No! God did not provide me such character that I had affair with my juniors.”
Gallingly, she said,” However, ET’s survey reveals that 34.3 percent people have affair with their juniors.”
I answered,’ I am sorry I am not so lucky.”
She said, “Since, you are a senior executive you will be among those 14.6 percent people.”
I asked,” What is there among 14.6 percent?”
She answered,” ET’s report says that 14.6 percent have affair with their seniors. You must be romancing with your seniors.”
I said,” Madam! I am the senior most executive in my workplace in Mumbai region.”
Joyfully, she said,’ Oh! Then you will be among 12.5 percent who took transfer due to workplace romance. You shifted first to Aurangabad and later on returned back to Mumbai. Definitely, you had strong affairs either with your juniors or with seniors.”
I answered,’ It was not because of my insistence that I got transfer but because my boss wanted me at Aurangabad.”
Pitifully, she said,” You don’t have any extra marital affair in work place. How could I face my Kitty Party members?”
I asked,” What do you mean by facing Kitty Party members?”
She replied more miserably, “Today, we have kitty party and all of us will reveal the workplace love affairs of our husbands.”
I asked,” I did not get you.”
She explained,” In kitty party, we all will reveal the workplace love affairs of our husbands. Mrs. Barasyun ki Bagni got all information about her husband’s affair; Mrs. Chaundkot ki Band dig up the details of her husband’s involvement with his female colleagues; Mrs. Bagargadhya Bigraili has   video clips about her husband’s love affairs with his junior colleague; Mrs.  Chipli-Chakori of Bhilangana Ghati knows about her husband being taken on dating by his senior woman friend; I am ashamed that I could not get any clue about workplace affair of my husband.”
I said,” Darling! You are lucky that your husband is Patnivrta.”
She said sadly,” No, these days the society norms are changed. You were very much ‘Dilfenku’ in your student life in Dehradun. You used to take all my female friends to Nepoli for coffee party. How come! You don’t have any extra marital affairs with your juniors and seniors?”
I answered,” Because, in Videocon group, there is seldom any female staff in marketing.”
She left the bed-room and went to kitchen which is other side of our bedroom.
After she left, I called, “Yes! Mrs.Chhkchhatya! My Bulbul! My sweet heart! As planned we shall meet at lunch at revolving restaurant. Don’t worry I have booked a cabin there and we shall not have any disturbance in our romance.”

Copyright@ Bhishm Kukreti

Satire on Social Issues, Satire on Political Issues, Satire on Red Tapes, Satire on Economical Issues to be continued …..

 

Sitemap 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22