Author Topic: Satire on various Social Issues - सामाजिक एवं विकास के मुद्दे और हास्य व्यंग्य  (Read 148494 times)

Bhishma Kukreti

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  Fundyanath 420: One of the Great Satirical Poems of 21st Century of Poetry world

                                       Bhishm Kukreti

              A literature critic cicely A Richard rightly states that satire is a competent writing skill for exposing faults found in society and creative use humor as mirror to show the world their true face.
                  Famous poet G.G.L. Byron used satirical poems effectively for public to look at objectively at politics and politicians. However, Harish Juyal went ahead in using satirical words harsher than words used in poem ‘Don Juan’ by George G.L. Byron.
             Fundyanath -420 poem by  Harish is as critical against leadership as the poem ‘Re-Conferences’ by famous Russian poet Vladimir Mayakovski against bureaucracy at the time of Lenin in Russia.
                Polish poet Antony Slonimski was also famous for criticizing harshly the leadership through satirical poems.   
             A Zimbabwe’s famous poet Chirikure Chirikure is famous for blending humor and anger, Harish uses humor and anger in his Fundyanath 420 poem.
               The talent of Harish Juyal about humor, irony and political satire could be compared the raptures and emotions found in the stories of famous Nigerian creative Chinua Achebe.
         Nobel Prize winner literature creative and Nigerian valiant writer Wole Soyinka states that the promise of pen belongs to take bulls by horns. Fundyanath a satirical and humorous poem  by Harish Juyal fulfils the statement by great creative Wole Soyinka.

Style of poem: The style is different and is mixture of Hindi and Garhwali. This style is not new for Garhwali in our folk poetry. Rakhwalee is performed in the same manner i.e. mixture of Hindi and Garhwali

Phrases create Perfect and desired images: the specialty of the poet is that he uses local phrases for creating images of unthinkable leaders and their leadership of political arena and social field. 

                फुंड़यानाथ 420


कवि : हरीश जुयाल 'कुटज'
ॐ नमो गुरु को आदेशा
माता पिता को जुहारा
मिस्टर फुंड़यानाथ कू नमस्कार
पीले हाथ में एक्सपाईर्ड जूता लाऊं
फिर फुंड़यानाथ का इंट्रोड्क्सन इन्त्रोद्क्सन कराऊं
तू रै बाबा दुमुख्या गुरो
मुख मौल़ी पुछ्ड़ी बिसैली
गौन्छी को कीस छे
जौ कु झीस छे
चार सौ बीस छे
समाज कु खाज छे
ऑलरेडी बदमिजाज छे
तीन समाज को आपस में लड़ायो
पुब्लिक मा कच्यूळ करायो
अपणे आप छांटो हो जायो
गौं कु गलादार छे
ड़्यार कु फौंज्दार छे
मतलब से बोल्दू
मतलब से बच्यान्दू
तेरु रे फुंड़यानाथ
क्या -क्या खाणु
क्या क्या ल्ह़ाणु
खांदी रे घपरोळ का गुरमुल़ा
ल्ह़ाणु रे क्रिटिसाईंज कु कुर्ता
आंख्युं माँ सोर्स का चश्मा चम्कान्दी
कपल मा कूटनीती को तेल ,
जिकुड़ी मा जहर का ग्व़ाळआ
नजर माँ पालिटिक्स का फ़्वाळआ
रे बाबा--
क्या -क्या बूतदी
क्या क्या काटदी
तू ---
बुतदी रे जातिवाद का बीज, क्षेत्रवाद का म्याला
कटदी रे स्वार्थ की फसल
मन्ख्यात से तुझे खाजी हो जावै
गुंडों के फेस पे बोरोलीन लगावै
गरीबों को धमकाये , टुच्चों को चमकाए
फर्जी रिस्पेक्टेड छे बाबा
गढ़वाळ घाट को डौंडिया छे
कुमाओं घाट कु चौंडिया छे
पब्लिक तोड़ा , पब्लिक मोड़ा नरसिंघ छे
बोकसड़ी जाप कु मान जै
कांवर की विद्या कु मान जै
कुटज की भगती कु मान जै
चल - चल रे मेरे औफर पे चल
लाइन हाजिर हो जा
समाज का पिण्डा प्राणी को छोड़
पब्लिक को लड़ाना छोड़
जातिवाद करना छोड़
फ़ौरन कुकर सोसैटी मा जा
मेरे हुकम पे नी चली तो
तुझे संगाट प्याट के बिच्छी तडकाये
भैस्या मकडा तेरे फेस पे मूते
तुझे जूंक की हड्डी से मारूं
गंडेळ की सींग से मारूं
किदली की बैकबोन से मारूं
मछर की सीधी टांग से मारूं
करगंड में अक्सन का जुटा मारूं
बर्मंड में लखानी का चप्पल चलाऊँ
लगाऊँ दस गिनुं एक पडम पडम पडम
ॐ नमो गुरु का आदेशो

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Bhishma Kukreti

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Humor Climbed 
Fun Melts 
Wit  fell  down 
 हौंस इ हौंस मा


                  जब तेल लमडदु छयो अर  घ्यू मा तिड्वाळ पोड़दि  छे

(Humor in Garhwali, Kumauni Humor, Humor of Uttarakhand, Himalayan  Humor)

                                    भीष्म कुकरेती

                   
            बात क्वी जादा दिन पुराणि नी च भै! बस,  होली क्वी पैंतीस चालीस साल पुराणी .वैबरी जै गाँ

मा अखबार आन्दु छौ त माने जांद छौ यू गाँ मातबर या विद्वानु गाँ च. अब जै गाँ मा अखबार आन्दन वै गां तैं

आदि निवास्युं गाँ माने जांद किलैकि ये भै ! टी.वी,मोबाइल  नेट को जमानो मा अखबार ? 

   हाँ त हमर गां मा बि अखबार आंदो छौ ठेट डिल्ली बिटेन. (वैबेरी गढवाळ मा डिल्ली डिल्ली छे अब देहली ह्व़े गे ).

         पुरिया नैथाणी या  राजा सुदर्शनौ बगत पर क्वी  आदिम  डिल्ली बिटेन खुट्या खुटि चलदो थौ त पंचों ना सै सतों दिन गढ़वाळ पौंची जांद छौ.

पण हमर गाँ मा दैनिक हिन्दुस्तान डिल्ली बिटेन चौलिक ना हल्कारूं काँद्यूं अर   पोस्ट मैनूं थैलौं मा बैठिक, पोस्ट ओफिसुं मा बासो कौरिक

 पंद्रौं दिन मा हमर गाँ जसपुर पौन्च्दो छौ.

        हाँ त जब अखबार घन्ना दिदा क इक पौन्चदो छौ त पैल पड्यां लिख्यां बूड बुड्यों तैं पता चलदो छौ बल वो अछेकिक

सिनिएर सिटिजन छन ऊँ तै अखबार बंचणो पैलो हक मिल्दो छौ.  हम स्कुल्या  पढंदेरुं पांति  दुसर दिन आंदो छौ. मतबल हम सत्रा दिन

बासी-खूसी खबर तैं ताजा  खबर समजिक बांचदा छ्या.

       हमर स्कुल्या दगड्या छयो चंदा काका . चन्दा काका जरा  फेमिनिस्ट कार्यकर्ताओं  से जादा स्त्री उत्थान मा विश्वास करदो छौ त

चन्दा काका कम से कम सात आठ जनान्युं बीच अखबार बांचदो छौ. अर अखबार हिंदी मा ना  फटाफट गढवाळी अनुवाद कौरिक बांचदो छौ.

बाकी थाकी त ठीकि चलदो छौ पण जब  चंदा काका अनाज-बजार की खबर गढवाळी मा सुणान्दो छौ त जनानी इ ना हम स्कुल्या बि अचेते जांद छ्या. 

अनाज बजारों या अनाज मंड्यूँ  भाषा आज बि बिगळी/अलग अर  बिलखणि/ विलक्षणी भाषा च .

      जब चंदा काका खबर सुणान्दो  छौ बल 'कोटद्वार मंडी मा ग्यूं मा आग लगी ' त जादातर जनानी डिल्ली , बॉम्बे

(वै बगत लोग  बॉम्बे मा रौंदा छ्या अब मुंबई मा रौंदन)  मा नौकरी करदार  नौन्याळ या कजेयुं तैं  मा बैणयूँ   की गाळी दीण बिसे जांदा छयी 

बल जौन टैम पर  मन्यौडर  नि भ्याज त कखन टैम पर ग्यूं लीण छौ!  अब जब कोटद्वार मा ग्यूं  पर आग लगी गे त

 समजी ल्याओ ए साल ग्यूं जगा कोदो से काम चलाण पोड़ल.

         जब चंदा काका सूचना दीन्दो छौ बल ऋषिकेश मा उड़द उछली या उड़द उछंड्याई या  उड़द कुतकी  त सौब जनानी अर हम गस खै जांदा छ्या  .

बात बि सै च अरे हमर गां मा कैन बि उड़द तैं उछ्ल्दो/  उछंड्यान्द /कुतकी मारदो नि देखी छौ. हाँ सब्यून टेरूं तैं त  उड़द-गौथ-तोर  मा उछंड्यान्द

देखी छौ.    अर यू अखबार बुलणो बल रिसिकेश मा  उड़द उछली  या उड़द उछंड्याई या उड़द कुतकी  त सौब बुलण बिसे जांदा छ्या  बल

रिसिकेश मा दिवतौं बास नि रै गे अब त उख भुतुं राज ह्व़े गे तबी त रिसिकेश मा उड़द टेरूं जगा उछंड्याणा छन .

    जब चंदा काका सुणान्दो छौ बल लौंग, काळी मिर्च, आदो जन गरम मसाला मा गर्माहट आई त हम बि अर जनानी बि बोल्दा छ्या बल या बि क्वी खबर च

अरे गरम चीजुं  मा गर्माहट नि आली त बरफ मा गर्माहट आली क्या ? पण जब चंदा काका खबर सुणान्दो छौ बल  बम्बै मा लौंग, काळी मिर्च, आदो जन गरम मसाला

ठञडो ह्वे गेन त सौब अपण  नौन्याळऊँ , भतीजों या प्रिय  पति जी खुण हमसे चिट्ठी लिखाण बिसे जांदा छ्या बल हे गुंदरु बुबा जी !  ड्यार आन्द दैञ  बम्बै बिटेन ठञडो गरम  मसाला

बुकणो जरुरात नी च  हम इखी रिसेकेश या कोटद्वार-दुगड्ड  बिटेन गरम मसालों पर कांड लगै ल्योंला . अर कत्ति त लौंग, काळी मिर्च, आदो जन गरम मसाला

ठञडो ह्वे गेन की खबर सुणिक इ फटाक से अपण  ड्यार भाजी जांदा छया अर ड्यारम जु बि गरम मसाला  अर आदू होंद छौ वै तैं घाम मा सुकाणो  धौरी दीन्दा छ्या बल

कुज्याण पता नी  कखी बॉम्बे  बीमारी इख गां मा बि सौरी/फैली  गे होली त ?

     गढवाळ मा सन साठ क्या सहतर  तक बि लूण अर गुड़ो  किल्लत होंदी छे. बच्चों मंगन दूध खते ग्याई त मुआफ  छौ बल बाळ छन त गलती होई जांद.

पण कै तीन सालौ छ्वटो /छ्वटि से लूण-गुड़ खत्याई ना कि पैल त ह्यळि  गाडिक  गाडिक छ्वटो /छ्वटि क गाळियूँन पड़चतन  करे जांद छौ अर फिर

चमकताळ, फड़कताळ  से कार्यकर्म को समापन होंद छौ . जब चंदा काका ' उत्तरी भारत के सभी मंडियों में  नमक व  गुड़ गिरा ' क अनुवाद कौरिक खबर सुणान्दो छौ 

बल ' सौब जगा लूण-गूड़ भेळ उन्द पोड़ ' त गाँ मा भिलंकार क्या बड़जात पोड़ी जांदी छे कि साल भर तक क्वी बि लूण-गूड़ क्या द्याखल  !, सौब च्याँ च्याँ अपण

घौर अटकी जांदा छया अर  अपण ड्यारम बच्युं  लूण-गूड़  तैं  ढाईपर कूणयों मा लुकै/छिपै   दीन्दा छ्या .

        कपास या रुवां को  बि अपणो  महत्व होंद छौ.  एक दिन हिंदी मा समाचार  छौ, " कपास ऐंठने या  कपास टाईट होने से  सब जगह कपास पर आग लगी " त चंदा काका अपण हिसाब से बोली "

कपास/रुवां मा ज्यूड़ जन  ऐंठन या कपास कडक ह्व़े  गे छे अर यां से सौब जगा कपास पर आग लगाये  गे ." अर जनि बिबरट्या ददिन या खबर सुणि कि उखमी

बैठयूँ अपण सिमसिमु कजै  तैं फणट्योन  पीटी दे अर ब्वाल  '  मी छै मैना बिटेन बुलणो छयाई बल गद्दा -खंतुड़ बणाणो दुगड जाओ,  दुगड जाओ

 अब बेटी क ब्यौ कुणि  जु गद्दा खंतुड़  बणाण छौ, अब   रूंवां जगा तुमारि  हडकी भरण ?" 

          जब चन्दा काका खबर सुणान्दो छौ बल 'तेल लमडि ' त सौब फैसला करदा छ्या बल  लयाक  खेती बन्द नि होण चयेंद अर कुलड़ो  मरम्मत चौड़ होण चयेंद.

सब्यूँ क  मनण छौ हम तैं मैदानों (माल)  लमड्यूँ तेल  नि खाण चयेंद. लमड्यूँ तेल माने भूतूं भिड़यूँ  तेल इलै हरेक तैं  लया क खेती पर जादा ध्यान दीण चयेंद  .

    एक खबर से क्वी बि चिंतित नि होंदा छा अर वा न्यूज छे ' घ्यू मा तिडवाळ  पोड़ ' , सब्यूँ तैं पता छौ बल घ्यू मा तिड़वाळ तबी पोड़दि जब घी जमाण वळी

तैं घी जमाण नि आन्द . सबी एकमत ह्व़े जांदा छ्या बल घ्यू जमाणो मामला मा गाँ की जननी शहरी जनान्यूँ से होशियार छन . उख घी मा तिड़वाळ पोड़नि

इ रौंदी अर हमर गाँ मा कुसवर्या से कुसवर्या जनानी बि जाणदि च बल घ्यू पर तिड़वाळ पड़ण से कनो बचण.
 
 इनि ' तेल कडक , गुड़ पिगळ, चीनी तीखी,  धणिया बैठ अर जीरो उठ, इथगा ह्यूं पोड़ पण कम विकवाली से  से ऊन ठंडी ; लोखर नरम अर सोना गरम,

चाँदी खसखसो अर पीतळ  भसभसो, ' जन खबरूं  से पैल सब्युं पुटकुन्द च्याळ पोडि जांदा छ्या .पण अब बाजार की भाषा सब्युं समज मा ऐ गे

अब गढ़वाळ मा जनान्युंक कोटद्वार आण-जाण वळा बस ड्राईबरूं तैं हिदैत होंद बल  जै दिन न्यूज ह्वाओ कि  ग्युं लमडिन त ग्यूं लै जयां भैरों .

जै दिन खबर ह्वाओ बल तेल मा चमक कम त द्वी कंटर  तेल लै जयां अर जै दिन खबर ह्वाओ कि चीनी तीखी त पगाळ मा बि चिनि नि खरेदण.     

   , 
 
 Humor in Garhwali, Kumauni Humor, Humor of Uttarakhand, Himalayan Humor to be continued......

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Bhishma Kukreti

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Satire only
            Why has Sehwag been Getting Out in the Same Manner?

                        Bhishm Kukreti

        These days, the rift among Indian cricket players is talk of the streets and public place. Those who support Indian cricket are worried about the way top order batsmen getting out as India is getting out of leading cricketing country. The supporters of Dhoni are worried the way Veerendra Sehwag has been getting out to out Dhoni out and out as successful captain India has ever produced. The journalists of each media are outraging the Indian cricket control board with out-dated ideas and without any outlines. Every Indian cricket lover is out of order and out of sense. The selection committee is not out to speak the outright reality.
Though, as outsider for cricketing journalism, I had to come out for knowing the outright outlook of present outlandish situation of Indian cricketers.  Out and out I contacted Sehwag’s agent who looks after Sehwag’s interest other than cricket.
I asked,” These days, Sehwag has been getting out in the same manner. Instead of leaving balls of far outside stump, Sehwag runs outrageously for chasing balls of out of stump.”
The agent answered,” It is his outgrowth after he got operated. All sport journalists should praise the way Sehwag has been outmaneuvering to touch the outlying balls for getting out outstandingly. “
I said, “Outspokenly, every cricket lover even outside of cricketing country is outpouring for outflanking the outside balls by Sehwag.”
He said,” I don’t see anything out of line because it is the way Sehwag plays his cricket for getting out. He does not want any outsource to change his own style for getting out.”
I said,” Yes! I agree that it is out of questioning that Sehwag changes his outclass style. However, Sehwag should use his outré style for getting runs rather than outplaying for giving outright catch to offside third man for getting out.”
He said,” Sehwag is not outmoded cricketer. When everybody tries to leave ball, Sehwag prefers to strike the ball so that opposite team gets him out without much output. Sehwag has been improving upon his getting out than the past inning.  ”
I said,” That is the outcry for Indians, .Sehwag shout improve upon getting runs than getting out outclass.”
He said,” Sehwag is not Tendulkar who outspends his energy on improving getting runs. Our Sehwag is out of this world and is outsmarting for getting out with constant and same outlet.  Sehwag developed a new type of outwit  that he should outburst the off break ball with same input applied for non off break ball that he gets same outcome and gets out.”
I said,’ Sehwag is also not using his outpacing for better fielding.”
He said,” It is outfox on your part. Sehwag is from outer world. He always outpaces where it is not required that opposite player gets run or does not get out. From the outset, I have been perusing you that Sehwag is out of sphere from this earth and therefore, Sehwag becomes sluggish instead of outpacing when there is outpace necessity that opposite does outdo.”
I said,” But this is in a way outlaw in sports.”
He said,” No, Sehwag is always outing person towards outsiders. That is why as a fielder, Sehwag offers ample chances to opposite team not getting out.”
I said,” But he did refuse outing with his team mates.”
He said,” Oh! Sehwag is outing with outsiders means he is friendly with outsiders as opposite teams. However, Sehwag does not like outing.”
  I was out of questions and also out of mind too.
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Bhishma Kukreti

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Satire only
                                  Is Dhoni Loosing Leadership Luminosity ?

(Satire by Garhwalis, Satire by Kumaunis, Satire by Uttarakhandis, Satire by Himalayan)   

                                                     Bhishm Kukreti

                 My ex-employer a television manufacturer used to bring home leaders because there were good sales. Now the same manufacturer is leadless about speedy slowing down of television sales. The vernacular television channel owners have been lashing out on sports editors for lowest ever TRP of ‘Run-Bun’, ‘Balle-Balle-‘, Chhakke-Chhakke’, ‘Jhuka de or Chuck de India’ a program in their channels about cricket sport. The sales vice presidents of all brands who took cricketing players as ad-model are complaining that the day you show ad of cricketing model, the sales return is highest on that particular day. Everybody knows that since Indian team has been losing game by game, series by series, Indian consumers are shifting their interest towards reality shows of parliament and state assemblies where political leaders are defeating democracy and Indian democracy is defending their killing spirits.
              I was worried more because of blames on Dhoni’s leadership. I contacted Dhoni’s special business manager looking after the business of advertising of alcoholic products. We met at a seven start hotel bar. I neither business manger had any worry about expenses because the meeting expenses was sponsored by rival whisky brand luring Dhoni’s endorsement for next year.
            I asked the business manger,” These days, every Indian is worried about diminishing leadership quality of Dhoni.”
              Dhoni’s business manager answered,” That is rubbish report. From the inception of civilization, Indians don’t appreciate  their heroes. You should be happy that every foreign whisky and beer producing country has been approaching me for signing Dhoni as brand ambassador for their country’s liquor producing brilliancy. Report by a world fame consumer research company state that as a liquor seller, Dhoni has been improving at high speed his leadership quality.” 
         I said,” That’s good for keeping high of high spirit of sprit producing countries. Indians are worried that as a leader, Dhoni is losing trust of his team mates.”
He said,” It is wrong on parts of Indians blaming Dhoni for not gaining trust. All tobacco producing countries are approaching Dhoni to sign lifelong contract as their brand ambassador. This is the best sign that Dhoni is skilled in gaining trust of others.”
I said,” Indians are worried that Dhoni has been losing confidence a specific quality of good leader.”
He said,” Absolutely wrong on parts of Indians. Dhoni is a practical leader. Dhoni has full confidence that Indian cricket team would lose in foreign countries especially against good cricketing teams.”
I said,” Indians are worried that as a team leader, Dhoni is not keeping high standard and openly criticizing senior players as Sachin, Sehwag.”
He said,” Again Indians are not rational. This is the rumor run by business agents of Sachin and Sehwag. Dhoni has issued strict order even to his family members that they will keep very high standard.  Now, the servant goes for buying vegetables on imported motor bike only and not by Indian motor bike. His dogs are provided costliest imported food. Dhoni believes in keeping strict high standard and the expenditure on his cat is equal to my expenditure.”
I said,” That’s good for family standard. Indians are worried about clear vision of Dhoni as a leader.”
He said,” Again it is myopic thinking. Doctors are there to check Dhoni’s eye site and till date no doctor reported that there is anything wrong with   Dhoni’s vision.”
I said,” We all Indians pray daily that Dhoni must be healthy bodily and mentally. Indians are agonized that Dhoni is not leading from front for which he was admired.”
He said,” Once again, wrong on part of Indians. You should watch television very carefully. Dhoni always leads from front while Indian team comes for fielding and always leaves field before all team mates.”
I said,” Indians have apprehension that Dhoni is not using new creativity and not finding new ways of doing things for which he was appreciated by all.”
He said,” This is ridiculous. All television channels showed the world how Dhoni found new gesture when India was losing game against Sri Lanka under the captaincy of Sehwag. Dhoni is always creative and this time too Dhoni found new way of showing gesture at the time of his team losing game. Till date n o cricketing captain in this earth showed such a gesture on his country loosing game. This is the specialty of Dhoni for finding new ways and being creative.”
I said,” Yes! Even monkeys all over world are applying for getting copyright from Dhoni to copy that specific gesture for irritating their own monkey mates. Indians are bothered that Dhoni is going away from the line of doing first thing first which is required. Instead of paying attention a particular game of the day Dhoni talks about games to be held in coming world cup. “
He said,” It is again erroneous on parts of every Indian. They should not believe on Dhoni’s interview. Indians should know that Dhoni is perfect in doing first thing first. Early in the morning before other activities, Dhoni calls his chief business manager for knowing today’s income target and the list of prospects queuing for brand advertisements. Then he calls his CA for knowing the rules about paying least income tax and then he calls his chief scheduling manager for checking the dates for advertisement shootings in Indian and in foreign countries. Dhoni is true leader and knows what is first and what is second.”
 I wanted to ask next question. However, the sprit business manager of Dhoni showed his problem that he had to attend ten prospective sponsors in next five hours and my interview lasted here.     

(Its fiction only)
Satire by Garhwalis, Satire by Kumaunis, Satire by Uttarakhandis, Satire by Himalayan to be continued …… wait for more Satire,

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Satire only
                                   Is Everything Fine in the Team 

(Satire from Garhwal, Satire from Kumaun, Satire from Uttarakhand, satire from Himalaya)

                                             Bhishm Kukreti

   The wife of a RSS leader in charge for Uttarakhand informed,” The media manager said confidently that now, everything is fine in the team. “
The RSS leader answered,” How could he say so boldly and confidently?”
She said,” But the media manager says that there is no rift among team members.”
He said, “But Khanduri does not see eye to eye with Nishank and  ...”
She asked,” But Khanduri is not in the cricket team neither Nishank is”
He said,” Which team are you talking about?”
She said,” I am talking about Indian cricket team in Australia.”
He said,” Oh! I was misunderstanding that you are talking about BJP team in Uttarakhand.”
She said,” At least at breakfast, don’t talk about BJP team of Uttarakhand. Now, I am confident that Sehwag and Dhoni will be in their usual talking terms.”
He said,” I am also certain that Khanduri and Koshiyari will be in their usual non-talking terms.”
She said,” Now, as a perfect team, Sehwag, Sachin, Dhoni and Gambhir will make an amicable plan for winning the games.”
He said,” now, Khanduri, Nishank, Bishan singh Chaufal, Madan Kaushik, Koshiyari will make their own individualistic plans to defeat each other.”
She said,” Now for making a strong team, the senior players and younger players will enhance communication in positive manners.”
He said,” Now, the senior and junior party members will communicate with others to reduce the party in Uttarakhand.”
She said,” Now, every team member will participate in team meetings for facilitating winning spirit or other productive works.”
He said,” Now, leaders will participate in party meeting for facilitating their own interest.”
She said,” Now onwards, as a strong team, there will be clear role for each team members for winning the game.”
He said, “Now onwards, every leader will try role for her/him but will see that the rival groups don’t get any role in the party or in government.”
She said, “Now, team members will operate in productive manner.”
He said,” Now, every party member will act for making rival leader non-productive.”
She said,” Now, Indian cricket team will exhibit effective team leadership.”
He said,” Now, senior party leaders will exhibit own party leader’s ineffectiveness openly.”
She said,” Now, each team member will provide development opportunities for other members.”
He said, “Now, each senior party leader will block opportunities for other senior leaders.”
She said,” I am happy that as a cohesive Indian cricket team will play winning games against any opposite team.”
He said,” I am sad that now, senior Uttarakhand BJP leaders will play game with their won fellows.”
(It is fiction only)
Satire from Garhwal, Satire from Kumaun, Satire from Uttarakhand, satire from Himalaya to be continued……

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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सरकार

छचराट भी करद
फफराट भी करद
उन् त रैंद बणीक कुम्भकरण
ब्वण प्वड़ी सदनी
जब पोडद खैड़ा की चोट विपक्षी
त बगत बगत धक्ध्याट भी करद
इमनदरी कु रैन्द सुखो सदनी
बैइमानौं फर बसंती बयार भी करद
कत्गोवं का बुज्झा दिन्द चुल्लाह
त कत्गोवं फर मुच्छीयलौंल वार भी करद
लुटिक सरया मुल्क बगत बगत
 अपड़ा खाली भकार भी भोरद
कत्गोवं थेय रखद धैरिक हत्गुली मा
त कुरची कुरची क कत्गोवं का कुहाल भी करद
सरकार याँ खुणी ही त बोल्दीन छुचा
जू काम चाहे कार नी कार
पर झपोडिक सरया मुल्क मा प्रचार भी करद
पर झपोडिक सरया मुल्क मा प्रचार भी करद
पर झपोडिक सरया मुल्क मा प्रचार भी करद

रचनाकार :गीतेश सिंह नेगी , सर्वाधिकार सुरक्षित
स्रोत : म्यार  ब्लॉग  हिमालय  की  गोद  से (http://geeteshnegi.blogspot.in/2012/02/blog-post.html

Bhishma Kukreti

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मेरा यह लेख   'पराज ' मुबई के  मार्च  १९९१ अंक में छपा था . इस लेख

से मेरे कई मित्र  जैसे स्व.अजुन सिंह गुसाईं जी , कापरी जी  व अन्य उत्तराखंड क्रांति दल के

सहयोगी मुझसे नाराज भी हुए कि मैं  आन्दोलनकारी होते हुए भी मुंबई के आन्दोलन में 

अनावश्यक रोड़ा अटका रहा हूं  या  यह  लेख हतोत्साहित करने  वाला  है


मै समझता हूं की यह लेख आज भी  तर्कसंगत है और क्षेत्रीय राजनैतिक दलों के लिए औचित्यपूर्ण है

घपरोळ

             जन्यान्युं  बाथरूम अर उत्तराखंड आन्दोलन

                                 भीष्म कुकरेती


         जी हाँ !  मि घपरोळया लिख्वार भीष्म कुकरेती डौञरु बजैक , थाळि छणकैक, , ढोल घुरैक, रौंटल 

बजैक, कन्टर पीटिक बुलणु छौं बल  जब तलक उत्तराखंड आन्दोलनकारी गढ़-कुमौ   , उत्तराँचल, उत्तराखंड, मध्य हिमालय

का गाऊँ मा जन्यान्युं बाथरूम , स्नानघर, नयाणो-उबरी  बारा मा नि घड़याला/ स्वाचला तैबारी तलक  यूँ तैं

उत्तराखंड आन्दोलन मा   जनसहयोग मीली इ नि सकुद . जी हाँ मि घुण्ड ठोकिक, भोम्पु बजैक बीच चौबट मा धाई

 लगैक बुलणु छौं  बल उत्तराखंड आन्दोलन का वास्ता जनान्युं बाथरूम क बारा मा सुचण जरुरी च.

           ठीक च जरा  घड्यावदी, स्वाचदी, थिंकावदि बल गाँ मा जनान्युं  खुणि  सीमेंटो  बाथरूम च ,

बाथरूम मा द्वी तौली  पाणी गम्म  भर्युं च अर क्वी जनानी नयाणि च . स्वाचो ! जोर से स्वाचो 

बल  वा जनानी कनो चैन  से , मजा से  नयाणि च, मठु मठु कौरिक अपण  फिफनाक  मैल

गाडणि च, मुंड पर चैन से बेडौर, बेझिझक सिर्प्वळ  लगाणि च, सरा गात पर सळसळ साबण   लगाणि च ,

सिर्प्वळो  ब्वालो या साबणो क फ्यूंण निस्फिर्या होइक ,  बेफिकर ह्वेक बगाणि च.. अर वा जनानी

निस्फिकर किलै च ? बल वीं तैं बाथरूम मा क्वी निर्लज्ज दिखण  वाळ बि नी च.. हाँ , जना बि सुचणाइ 

तुम सोची ल्याओ. सुचण मा क्वी हर्ज नी च.

            अर हे  म्यार ठाकुरों ! जनानी  चैन से मैल  गाड नी च की बात त जरूर सोचिन हाँ! 

               हे म्यार  भुभरड़ो !  अब त आवो बाथरूम से भैर , ज़रा कल्पना लोक से ए जामा मा

आई जाओ  अर द्याखो बल असलियत क्या च. जी क्या च असलियत? बल गढ़वाळ अर कुमाऊं का

गौं मा जनानी कन नयान्दन ? जी अब सुचणै बात नी च अब त दिखणै की इ बात च .ज़रा द्याखो बल तुमारि

या मेरी ददि , काकी, बोडि ,  ब्व़े,, , बैणि,  बौ, बेटी , ब्वारी   नातण उख पहाड़ों मा कन नयान्दन. क्वी

 गारू- माटक उबर भितर तसला या परत मा बैठिक न्यान्दन, या क्वी लखडों कटघळ  ओत मा कनी कौरिक बि नयंदन.

आण-जाण वळु डौरन  जन्यान्युन तै नयाण दें   सटापटि पोड़ी रैंद. जरा टक लगैक, ध्यान डेक, मगन ह्वेक स्वाचदी,

द्याखोदि बल इन मा जनानी नयाण मा कथगा समौ  ल्याला? एक द्वी, तीन .... त तुम पैल्या बल उख 

जनान्युं तैं पांच से सात मिंटु   मा नयाण पोडद . इनमा, इन स्थिति मा , इथगा कम समौ मा क्वी मर्द,

क्वी कजै , क्वी पुरुष नयावु त वु मर्द, कजै, पुरुष अपण गातौ कथगा मैल गाडी सौकड़ भै?

अर य़ी आन्दोलनकारी स्वाचन बल जब मर्दमानिक पांच दस मिंटूं  मा नि नये सकुद 

त ये भै जनान्युं कनकैक नयाण भै ! फिर जनान्युं क गातौ सजबिज (शारीरिक विन्यास )

इन च बल जनान्युं तैं नयाण मा  जादा समौ चएंद . अर हम गढवाळयूँ गलत कहावत बणयीं च

बल 'मर्दुं खाण अर जनान्युं नयाण मा कम समौ ..'

          अब समौ आइगे बल उत्तराखंड आन्दोलनकार्युं तैं यीं  कहावत तै वाया बौम्बे (बम्बई )

अरब सागर मा बौगे दीण चएंद.

         अब कत्ति उत्तराखंड आन्दोलनकार्यु का नेतौं न   पुछण भै यू त ठीक च पण

 जनान्युं बाथरूम अर उत्तराखंड आन्दोलन का एक हैंका दगड़ क्या सम्बन्ध , क्या रिश्ता,

क्या रिलेसन भै? खासकर इख बौम्बाई का उत्तराखंड क्रान्ति दल का चार पांच संरक्षक ,

चाहर पांच पढान अर कुज्याण कथगा इ नेतौं न पुछण च बल "हे ! भीषम ! तू इन फोकट की बात

किलै करणु छे भै?"

          चाए ऊ काशी सिंग ऐरी ह्वाऊ या ऊंका राजनैतिक बैरी हरीश रावत ह्वावन

या ह्वावन चन्द्र मोहन सिंग नेगी या ब्रह्म दत्त या बौम्बई मा सुभाष घीसिंग बणणो 

सुपिन दिखण वाळ  या उ ह्वावन जु द्वी दिन पिकनिक तरां मनाणो  पहाड़ जान्दन अर इख

एम.पी की खुर्सी खुज्यान्दन . यूँ मादे कै तैं बि पहाडु  मा जन्यान्युं बाथरूमै कीमत , बाथरूम की

जरुरत इ नि पता !

  खासकर मी उत्तराखंड क्रांति दल का आन्दोलनकार्यु बारा मा त बोली इ सकुद बल यूँ तैं

जनान्युं बाथरूम की कीमत का बारा मा पता होंद त आज यूँका  पैथर उत्तराखंड का

पचास लाख लोक होंदा. जरा उत्तराखंड क्रांति दल का आन्दोलनकार्यु का हाल ड्याराडूण अर कोटद्वार

वाळु तैं पूछो त सै ? ड्याराडूण मा उत्तराखंड क्रान्ति  दल वाळू  मीटिंग घंटा घर मा होंद त

नेतौं जमघट  त दिख्यांद च पन सुणण वाळू  अकाळ रौंद पोड़यूँ. अर याँ से जादा भीड़ त 

बांदर नचाण  वाळक समिण  होंद . कोटद्वार मा झंडाचौक मा जब उत्तराखंड क्रान्ति दल वाळू मीटिंग

होंद त सुणण वाळू  मा मनिखूं बात  त जाणि द्याओ कुकुर बिरळ बि उना नि दिखेंदन.

उन हरेक चांदो बल उत्तराखंड बौण जाओ पण उत्तराखंड क्रांति दल वाळुञ  तैं जनसमर्थन नि

मिलणु च  .

                त जनसमर्थन किलै नि मिलणो  च भै  ? वांको कारण च, वजै च, रीजन च बल उत्तराखंड क्रांति दल

वाळ हरेक गाँ मा जनान्युं बान बाथरूम चिणणो बात नी करणा छन ,हरेक गाँ मा जनान्युं बान बाथरूम चिणणो

छ्वीं नि लगाणा छन . जनान्युं क सुविधा सम्बन्धी आन्दोलन क नाम च जनान्युं कु ण बाथरूम.

जनान्युं बान बाथरूम  एक प्रतेक च , एक सिम्बल च .
 
                उत्तराखंड आन्दोलन तैं उथगा समर्थन नी मिलणु च  त यांको अर्थ च बल य़ी आन्दोलनकारी

मातृशक्ति , बैणि शक्ति, देवी शक्ति तैं अपण  दगड़  नि लै  सकिन . जनानी शक्ति तैं अपण दगड नि लै सकिन

त कारण साफ़ च बल यि  आन्दोलनकारि  जनान्युं वास्ता बाथरूम बणाणो बान णा त समाज से लड़दन ना इ

सरकार से लड़दन . . य़ी आन्दोलनकारी डिल्ली , मुंबई, चंडीगढ़ लखनौ मा रैक पलायन का

रुणी-धाणी, ऐड़ाट भुब्याट त  कौरी सकदन पन इन नि पछ्याण  सकदन बल अरे !  पैल जनान्युं क मूल भूत

समस्याओं समाधान की छ्वीं लगण जरोरी च. जु पहड़ों से पलायन क्वी रोकी सकदु त वा च मात्री शक्ति.

सिरफ़ पहाड़ की जनानी इ पलायन रोक सकदन ना कि लखनौ की सरकार अर ना ही भावी उत्तराखंड राज्य का

 फुन्द्यानाथ. उत्तराखंड का आन्दोलनकारि डिल्ली मा लोगूँ रैली त कौरी सकदन पण

जनान्युं असली , मूलभूत समस्या, परेशानी लेकी ग्राम प्रधानुं , सरपंचूं , ब्लौक  प्रमुखूं ,

ब्लौक अधिकार्युं मा नि जै सकदन.   

             यि आन्दोलनकारी कोटद्वार मा चक्का जाम त कौरी सकदन पण अपणी मा, बैणि , बेटी

ब्वार्युं , काकी- बोडियूँ   परेशानी बारा मा कुछ बि नि सोची सकदन.

           हरेक गां मा जनान्युं बाथरूम होण एक प्रतीकात्मक सामाजिक आन्दोलन कु नाम  च जखमा

हम पहाड़ कि रीढ़ कि हड्डी क बात कौरी सकद्वां .

         पण जौं आन्दोलन मा सिरफ़ राजनीति कि गंध-बास ह्वाऊ , एम, एल, ए , एम. पी,

कि खुर्सी  पाणे बात ह्वाऊ वै आन्दोलन का आन्दोलान्कार्युं मा  इन सै, अर्थ वळ, कामै ,

अनोखी, व्यवहारिक  बात सुचणो बगत कख च?

                 जब पहाड़ कि जनानी द्याखाल बल उत्तराखंड आन्दोलन मा जनान्युं समस्या मूलक बात होणि

च त यि जनानी कूटी-दाथी लेकी आन्दोलन मा कूदी जाली .

        जनान्युं बाथरूम एक प्रतीतात्मक सामाजिक उद्बोधन च अर ये प्रतीतात्मक आन्दोलन से इ भलो बि च

        जरा एक घड़ी  स्वाचो त सै ! जब आन्दोलनकार्युं आँदोलनौ  बदौलत गाँव मा सीड़यूँ तौळ  जनान्युं कुणि

बाथरूम बणयाँ ह्वावन त क्या सबी जनानी उत्तराखंड क्रान्ति दलौ चेहती नि ह्व़े जाली? जरोर ह्वेली.

              ज़रा कल्पना कौरो बल उत्तराखंड आन्दोलनकार्युं बदौलत ब्लौकुं मा नौन्युं कुणि 

आई टी.आई स्कुल खुली जावन ? त  क्या पहाड़ऐ  नौन्युं, बेटियूँ  क हुनर तैं नया हुनर नि मीललो ?

अर इन मा उत्तराखंड आन्दोलन तैं नयो जन समर्थन नि मीलल ? इनी भौत सी बात छन जु

उत्तराखंड आन्दोलनकार्युं  तैं  दिखण पोड़ल जां से आन्दोलन तैं नया जन समर्थन मील सौक !

(स्रोत्र : पराज, पत्रिका, मुंबई मार्च 1991, )


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सन १९९१ में गढ़वाली के कवि वीरेंद्र पंवार की निम्न कविताएँ पराज मासिक में प्रकाशित हुईं थीं

किन्तु कविताएँ आज भी सजीव व औचित्यपूर्ण हैं

इकीस साल पालि वीरेंद्र पंवारै कविता पराज मा छपी छे जु अबि बि औचित्यपूर्ण छन

Poems by Virendr Panwar

               सफै



              वीरेंद्र पंवार (पौड़ी  )


पवित्र गंगा का पाणी

कि सफै  पर पैसा

पाणी तरां बगयेणु च

फेर बि 'सफै' पूरी तरां नि ह्वाई 

इन सुणेणू च


          रिस्ता

 चुलाकि आग अर

पोटगी आग मा

एक रिस्ता सि होंद

पैलि जगी जांद

त दुसरी बुझी जांद

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कबलाट

                           गरीब हूणो फैदा



                                   भीष्म कुकरेती


परसि मि नेता जीक ड़्यार ग्यों अर मीन पूछ," नेता जी! भै तुम लोकुम तागत ह्वेक बि तुम गरीबी किलै ख़तम नि करदा जी?"
 
नेता जी न रुसेक ब्वाल,' तुम लोक बेवकूफ छवां . गरीबी मा भौत फैदा छन."

 मीन बोली," अजी तुम त मातबर छवां त तुम तैं क्या पता ...."

नेता जीन खुलासा कार,' भै मि पैलि गरीब इ छयो त मि जाणदो छौं कि गरीबी मा क्या मजा हून्दन "
 
'क्या बुलणा छवां ?" मीन पूछ

" जी द्याखो ना! जब मि गरीब छौ त मीम क्वी काम इ नी छौ. क्वी काम ना त ना इ क्वी जुमेबारी ! ना क्वी परेशानी !" नेता जीन ब्वाल
 
मीन ब्वाल," यि त दिल बहलाने को ग़ालिब ..वाळ हिसाब च ."

नेता जीन मेरी बात बगैर सुण्या ब्वाल," जब मीम एक बि धेला नि छौ त मि तैं अपण धन चोरी, धन गबन , लौस /प्रौफिट

कि क्वी बि फिकर नि छे. अर अब ! ए मेरी ब्व़े ! इनकम टैक्श वाळू डौर अलग ! जौंक नाम पर मीन बेनामी जैजाद ज्वाड़ ऊं से रोज क्या घडी घडी डौर

रौंद कि कखी धोका नि द्यावन. राजनैतिक थौळ /गलियारा मा रोज इन खबर आणि इ रौंदन कि कन कैक जीजा न जैजाद हजम कौरी दे, कन कै नेताक

स्याळ न नेता क जायजाद डकार याल. मी तैं या ज्वा ' नि-सीणै' बीमारी ह्व़े या यांको डौरन ह्व़े कि म्यार अपण इ रिश्तेदार मेरी बेनामी जैजाद

इ नि हड़प द्यावन "
 
मीन ब्वाल,' नेता जी ! इ सौब बुलणा बात छन. खाणक नि मीलल त तब ..'

नेता जीन बिचि मा ब्वाल," अजी! जब मी गरीब छौ त क्या मजा छया ! जो चीज मिली गे वांको इ खाणक बणै ल्याओ । अर अब ?"
 
मीन पूछ," अब क्या ?"

नेता जीन खुलासा कार,' अब ? अरे ड्याराम दु दु- तिन तिन घंटा बहस होणि रौंद बल सुबेर नक्वळ/नास्ता मा क्या खाण? दुफरा मा क्या खाण अर

 श्यामौ रस्वे मा क्या क्या बणाण. पैलि एकी परेशानी छे क्या खाण / अब परेशानी च क्या क्या जि खाण ?"

मीन ब्वाल, " अजी ! मैगी जमानो मा , रिसेसन की मार?"

नेता जीन तड़ाक से ब्वाल," अरे! जब मी गरीब छौ त मजदूरी कारो , श्याम दें रूप्या ल्याओ अर श्याम दें अर भोळ दुफरा जोग

राशन पाणी , लूण तेल को इंतजाम बस या जुमीबारी छे."

मीन ब्वाल," मी बि त यो इ बुलणो छौं कि .."

नेता जीन मेरी बात काटिक ब्वाल,' अर अब ! ए मेरी ब्व़े ! जर्मनी मा रेसेसन आन्द त म्यार ब्लड प्रेशर ऐंच चलि जांद; मौरिसिस

मा सरकार बदलदी त ब्लड प्रेशर तौळ ऐ जांद; विकीलीक सविश अकाउंट क बारा मा खुजनेरि लेख आन्दन त हार्ट अटऐक आन्द आन्द रै जांद;

दुन्याक कै बि स्टौक मार्केट मा शेयर मार्केट तौळ आन्द त मेफर साँस कि बीमारी ह्व़े जांद . सबी जगा बेनामी पैसा जि लगयाँ छन.

अरे जब मि गरीब छौ त कखि बि कुछ ह्व़े जाओ धौं अफु तैं क्वी चिंता नि होंदी छै . अब चिंता से इ मि दुख्यर छौं."

 मीन ब्वाल," आप बि जाणदा छन गरीबुं तैं कथगा मेनत करण पोड़द ?"
 
नेता जीन ब्वाल," तुम तैं क्या पता गरीबी मा क्या फैदा छौ. हम सरा परिवार मेनत करदा छया त काचो पालो, म्वाटो बरीक जु बि

 खांदा छया स्यू पची जांद छयो. अर अब? नक्वळ /नाश्ता पचाणो बान अलग ड्रिल; दुफरा खाणक पचाणो बान भौ भौं किस्मौ व्यायाम अर

श्याम दै डिन्नर पचाणो बान कुज्याण कथगा दें दंड बैठक पेलण पोड़दन धौं! हमर ड्यार ड्यार थुका च केवल एक जिमखाना बौणि गे.

परिवारौ हरेक सदस्य खाणा पचाणो बान दिन भर कुछ ना कुछ एक्सरसाइज करण मा इ ब्यस्त रौंद. "
 
मीन फिर बि ब्वाल," द्याखो जि ! गरीबी बढ़ण से भारत मा क्राइम रेट बि बढ़णो च . गरीबी तैं रुकण इ चएंद ."

नेता जीन बथाई,' त्वे तैं गलत फहमी च . मि जब गरीब छौ त भगवान् से डरदों छौ अर भुलमार मा या भूक मिटाणो

बान कबि क्ब्यार अपराध कौरी लीन्दो छौ. पापक डौरन अपराध करण मा डौर लगद छे .अर अब क्वी इन घडी नी च जब मि

क्वी अपराध नी करदो हों धौं ! अपराध गरीबी मा नि होन्दन अपराध त मातबरी मा इ ह्व़े सकदन."
 
अब कुछ बच्युं इ नि छौ त मि अपण सी मुख लेकी नेता जीक ड्यारन अपण ड्यार ऐ गेऊं

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