Author Topic: Satire on various Social Issues - सामाजिक एवं विकास के मुद्दे और हास्य व्यंग्य  (Read 149046 times)

Bhishma Kukreti

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गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य

 

                              मंदी  कि मार मा होशियार !

 

 

                          चबोड्या - भीष्म कुकरेती

 

  मार कत्ति तरां कि होंद . ब्व़े बाबू मार, मास्टरूं मार, मर्खुड्या दगड्यों मार, मर्खुड्या बल्दुं  मार, कज्याण्यु मार . अर अच्काल  सबसे बडी मार च मंदी की मार   मतबल रिसेसन की मार. बकै मार थ्वडा देरी होंदी अर फिर बिसरये जांदि  . पण मंदी की मार अर गुमचोट मा जादा फरक नि होंद. 

भौत सा बंचनेरु चिट्ठी ऐन बल रिसेसन से बच णो उपाय बथाओ.

 बंचनेरु सुविधा बान मीन मंदी क मार से बचणो कुछ ब्युंत खुजेन. यि ब्युंत इन छन

सबसे पैल त अपण  घौरम मंदी क अर्थ सब्यूँ तै बथाओ. किलै अफिक सरा बोझ उठाये जाओ! संयुक्त परिवार मा रौण ह्वाओ त सब्यूँ तै  परेसान हूण चयेंद .

दगड्यो अर रिश्तेदारों तै बर्थ डे गिफ्ट दीण सफाचट बन्द कारो अर यूँ मागन जथगा ह्व़े साको गिफ्ट की मांग कारो. गिफ्ट की मांग मा शर्माणो क्वी काम नी च .

गिफ्ट बचाणो बान दूसरों बर्थ डे मा नि जाण पण  अपण बर्थ डे या अपण बच्चों brth  डे मा  सब्यु तै भट्याण.

जु कैक बर्थ डे मा जाण बि ह्वाओ त ब्वालो mi   गिफ्ट मा विश्वास नि करदो बस आशीर्वाद मा विश्वास करदो.

अपण पैसों न पीण बन्द कारो अर दुसरो पीठ मा सत्तु छोळण सीखो . क्वी  पिलाओ त पूरो मैना क कोटा एकी बैठक मा पूरो कारो .

पौण बणो पण पौण नि भट्याओ .

उधार मांगो पण उधार नि द्याओ

जु तुम नेता छंवां त मंदी कुण  दुसर देस पर भगार लगाओ, भगार जोर से लगाओ की वु देस बि घबरै जाओ.  जन की हमारा वित्त मंत्री भारत की मंहगाई तै अफ्रीका अर यूनान क दगड जुड़दन .

मंदी मा खुश होण जरूरी च . अफु आशा करण पण हैंको तै निराशा मा डाळण जरूरी च यां से आप दुसरो दुःख मा खुश होण से संतोष प्राप्ति करी सकदवां .

 संयुक्त परिवार ह्वाओ त भायुं बच्चों कुणि खर्चा पर लगाम लगाओ अर अपण बच्चो तै मिठाई या चाकलेट रात द्याओ

औफ़िस मा अपण सबोर्डिनेटु  तनखा कम करणो याँ से बड़ो बहाना नि ह्व़े सकुद. सबोर्डिनेटु तनखा कम कारो अर यां से अपण बौस  तै पुळेक अपण तनखा बढ़ाओ। 

जु तुमम कार च त सस्तो पेट्रोल डाळो  . मंदी क बगत पर पर्यावरण कि फिकर बन्द कारो.

अपण क्रडिट कार्ड तै बैकं बोलिक ख़तम कराओ.  पण दगड्यो क्रेडिट कार्ड से मौज कारो .

जु डुबण वाळ बैंक च वै बैंक से उधार ल़े ल्याओ कुज्याण ह्व़े सकद च उधार चुकाणो मौक़ा इ नि आओ

 ब्यौ नि कारो बल्कण मा कंपैनियन शिप मा विश्वास कारो अर द्वी झण बगैर ब्यावक दगड़ी राओ

जु ब्यौ करण जरूरी ह्वाओ त टकों ब्यौ क संस्कृति दुबर शुरू कारो.

दाड़ी नि बणाओ बल्कण मा दाड़ी बढाओ अर प्रसिद्ध कारो  कि यू नयो फैसन च

पुराणा धुराणा झूलों तै letest फैसन का नाम देकि पैरो .

नयाण धुयाण कम कारो अर शरीर की गंध -दुर्गन्ध तै पेरिश से लयुं परफ्यूम की गंध सिद्ध कारो.

उधार ल्याओ अर घी प्याओ अर घौरम डंडा धारो . उधार ल़ीण वाळ आवन त ऊं  तै डंडा दिखाओ 

 

 Copyright@ Bhishma Kukreti 8/8/2012


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Bhishma Kukreti

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                                  बाढ़ दिखणो बिगरौ ! 

 

                                       चबोड्या - भीष्म कुकरेती       

 

   " सुणना छंवां ! आज मीन बाढ़  दिखणो जाण !'

" ममी ! प्लीज ! बाढ़ दिखणो तीन अर बुबा जीन जाण. अर जाजन दुफरा मा जाण . हम तै छै बजी किलै तंग करणि छे?"

" अरे ! टैम पर उठो . दिखणा नि छंवां कि कुज्याण कथगा सालुं बाद  इथगा  बढिया दिन आई कि जब मी त्यार बुबा जीक दगड बाढ़ या सुखा ग्रसित क्षेत्र  कु दौंरा   पर  जाणु छौं. पांच साल विरोधी दल मा  मा रैक त कुछ बि नि द्याख.अब जब वो मंत्री बौणि गेन अर वु बि आपदा मंत्री त ..."

" ममी अबि भौत टैम च हम तै सीण दे."

" अरे पर में बथाओ त सै कि मीन कु साड़ी पैरण ? कु कु जर जेवर पैरण?"

" ममी ! प्लीज आया तै पूछ  कि क्या करण ? हम तै सीण दे. "

 " वा बि त नि आई अबि . अरे में खुणि त उकरांत हुंईं च अर तुम अर त्यार बुबा जी सियाँ छंवां . अर तुमर डैडि क ल़े क्या च . वी खदर कु  झुल्ला. परेशानी त मेखुण च कि क्या क्या पैरण?"

"ममी प्लीज .."

" अरे नौकरानी तू अब छे बिजणि ?"

"मेम साब आज त मि आधा घंटा पैलि ऐ ग्यों !'

" अच्छा सूण ! आज जरा स्वाळ पक्वड़ बणा ..."

" हैं ! मंत्र्याणि जी  !  आज कौंटीनेंटल ब्रेकफास्ट नि पकाण  ?"

" ना! ना !  आज स्वाळ पक्वड़ बणा "

" मंत्र्याणि जी ! आज गढ़वल्यु क क्वी त्यौहार च ? जु स्वाळ पक्वड़ पकाण ?"

'नै नै आज क्वी त्यौहार नी च . आज मि अर मंत्री जी बाढ़ ग्रसित क्षेत्र कु दौंरा पर जि जाणा छंवां. त ज़रा सगुन ह्व़े जाओ त ठीक च कि ना ?"

" हाँ ! हाँ ! मेम साब,  फिर त आज  त्यौहार से बि बड़ो दिन च . त कुछ स्वीट बि पकाण पोडल ?"

" ना ना स्वीट साट उ घंटाघर कु स्वीट सौप बिटेन मंगाई लीन्दा !"

" हाँ हाँ उ ठीक च ."

' अरे या आया कख मोरी ह्वेली ?"

" पण मेम साब आया त आठ बजी आँदी अर आप अबि बिटेन .."

" अरे पर इन शुभ दिन कब कब आन्द बड़ी मुस्किल से त इथगा बड़ी बाढ़ आई कि हम तै बाढ़ ग्रसित क्षेत्र  दिखणो मौक़ा हाथ आई."

" हाँ मेम साब . इन दिन त भग्यान मंत्र्यु  अर मंत्र्याणियूँ  भाग मा इ आन्द .सी उ नि छ्या पैलाक मंत्री. बिचारी उंकी घर्वळी पांच साल तलक जग्वाळणि  राई कि कबि त आली बाढ़ पण गौ बुरी चीज च कि एक दिन बि ये प्रदेश मा बाढ़ ऐ ह्वाऊ धौं."

" हाँ अब त वा मै  देखिक जळणि होलि"

"  जळणो बात इ च . वै क्या हौर मंत्र्युं घर्वळि  बि जळणि होलि कि आपक कजे तै मंत्री बण्या छै मैना बि नि होई कि इथगा बडी बाढ़ ऐ ग्याई. "

" हाँ ! ग्विल दैण ह्व़े ग्याई"

' मेम साब !  उठाणो गाडि  याल कि ना ?"

" हाँ हाँ! उठाणो त मीन वै दिन  इ गाडि याल छौ जै दिन यि आपदा मंत्री बौणि छा कि  हे ग्विल्ल, नरसिंग जु ए साल बाढ़ आली त मी खाडु  सिरौलु ."

 " औ त अब दशहरो मा खाडु मारे जाला."
 
' हाँ किलै ना "

" ये ल्याओ. आपकि आया बि ऐ ग्याई . मी त रूस्वड़ मा जान्दो "

' अच्छा सूण ज़रा स्वाळ पक्वड़ दिवता क ठौ मा धरणो अलग से धौरी दे . कखि बिसरी नि जै हाँ ! "

 " हाँ .. हाँ जी, पैल दिवता ...मी त रूस्वड़ मा जान्दो "

' आया !  भलो ह्वाई टु आज पैलि ऐ गे."

" हाँ मीन जनि सूण कि आज आप अर मंत्री जी बाढ़ दिखणो जाणा छंवां त मि समजी ग्यों कि आप तै मेरी जरूरत होली. पैल त बधाई हो कि आप तै छै इ मैना मा बाढ़ दिखणो मौक़ा मिलणो च."

" थैंक यू !  यि सौब ग्विल, नरसिंग की मेहरबानी च ."

" अच्छा मेम  साब ! कति  बजे जाण जाजन ?"

" बारा बजि "

"औ त अबि त छै घंटा छें छन "

" अच्छा सूण ! वार्ड रोब बिटेन जरा बढिया सी साड़ी छांटी क ला जरा  "

"मेम साब साड़ी त सुफेद इ पैरण पोडल ."

" क्या सुफेद साड़ी ! अर मि ?"

" हाँ मेम साब ! उ क्या च बाढ़ मा लोक मोर्याँ छन ना त आप तै बरजातक  सोग जताण पोडल ."

" ओ हाँ ! त इन कौर ज्वा सबसे मैंगी सुफेद साड़ी  च ना वीं तै ला."

"हाँ वा साड़ी चौलली ."

" अच्छा सूण जर जेवरात खूब पैरण पोडल . हैं! "

" नै नै मेम साब !  जर जेवरात उथगा जादा नि दिखे सकदा आज ."

' अरे त फिर यि जेवरात कब दिखौल मि ?"

" मेम साब ! आज त आप तै इन दिखाण कि आप भौत दुखी छन."

" त जरा इन बथादी कि दुःख मा कु कु जेवरात दिखाए सक्यान्दन ? त्वे तै त भौत सी मंत्र्युं घौर काम कु तजुर्बा च "

"मेम साब ! ए बगत पर जेवर सादा इ होन्दन . जादातर मंत्र्याणि इन बगत पर चांदी क सादा  जेवर पैरदन. चंदी क जेवर  सादा अर सरल दिख्यान्दन ना !"

" ठीक च जु बि जेवर पैरण जरा भैर गाडि  दे अर फिर मि दिखुद कि कै तरां से पैरण  .. जरा तब तलक मि अपण दगड्याण्यु तै फोन करदु कि मि बाढ़ दिखणो जाणु छौं "

" हलो !  रोड ठेकदानी जी ! मि मंत्र्याणि बुनु छौं . अछा सुणो मि बाढ़ दिखणो जाणु छौं जरा  सहेल्यूं तै लेकि एयर  पोर्ट ऐ जयां हाँ ! "

" बधाई हो ! ठीक च हम सौब तुम तै सी औफ़ करणो एयर पोर्ट ऐ जौंला !

" हलो ! सिंचाई विभाग कि ठेकादानी मि  आज बाढ़ दिखणो जाणु छौं ."

" अरे मंत्र्याणि  जी  ! बधाई हो .इथगा  बड़ो मौक़ा इथगा जल्दी मीलि   गे."

" अच्छा सुणो ! जब मि  बाढ़ देखिक एयर पोर्ट पर औंलू आप तै अपण सहेलीयूँ लेकी स्वागत कु बान ऐ जयां "

" मंत्र्याणि जी, इ बि क्वी बुलणो बात च . आपक स्वागत क बान बरात खड़ी   राली . वोमेन मैगजीन  की रिपोर्टर बि राला "

"आया जरा मि ब्यूटीपार्लर वळि  तै बुलान्दु  तु तब तलक सौब तैयारी कौर हाँ .हलो ! ब्यूटी पार्लर .. अछा जरा भली सी ब्यूटीसियन भ्याजो हाँ .. मीन आज बाढ़ दिखणो जाण त मेक अप देर तलक रौण चयेंद हाँ..""

 "ए मुना क पिता जी  ! मि जरा ब्यूटी पार्लर वळि तै भट्याणु छौं .आप क मेक अप बि करण कुछ?"

" मुना कि ब्व़े एक परेशानी च . ज़रा "

" द्याखो हाँ . बाढ़ दिखणो त जाणि च , चाहि कुछ बि ह्वाओ "

" हाँ भै हाँ. आपदा मंत्री ह्वेक मि इथगा बि नि कौर सकुद क्या ? पण जरा एक घंटा देर ह्व़े जाली "

" किलै मुना क पिताजी ?"

" जरा वो  केन्द्रीय आपदा मंत्री क परिवार बि बाढ़ दिखणो आणु च बस एक घंटा देर से.."

" जु बि आणु च आण द्याओ.अब आपदा मंत्री क परिवार च त परिवार तै बाढ़ दिखणो बिगरौ त ह्वालो  कि ना ? "

 

Copyright@ Bhishma Kukreti 10/8/2012

 

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Bhishma Kukreti

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                          युद्ध असला बजार मा तीसरी दुनिया क देस

 

 

                          चबोड्या - भीष्म कुकरेती

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एक असला ब्यौपारी- अरे सावधान ! सि तीसरी दुनिया क गरीब देस युद्ध असला बजार मा आणा छन.

दुसर ब्यौपारी- अरे हाँ सावधान. सौब एक जुट ह्व़े जाओ . हाँ ! यूँ तै डिस्काऊन्ट दीणै जरूरात नी च हाँ !

एक हैंकु युद्ध असला  ब्यौपारी - अरे यार बीच मा यि द्वी तीन मानव कल्याण कारी कौंळ का ब्यापारी किलै हमारा बजार मा दुकान लगैक बैठ्या छन. फ़ोकट मा हमारो सौदा -नफा खराब करी दीन्दन.

चौथू असला ब्यौपारी - रौण द्याओ रै यूँ तै बि. बरडाणा इ त रौंदन इ.  धंधा त यूँ से हूंद नी च बस भांची मारणो रौंदन बैठ्या

एक- अरे शरू कारो . धंधा . उनि बि अच्काल हमारो देस मा रिसेसन याने मंदी च त तिसर देसु तै युद्ध अस्त्र शास्त्र बेचिक मंदी ख़तम करे जाओ.

एक व्योपारी- ले लो नया नया मिसाइल ले ल्याओ

हैंक  ब्यापारी- ले ल्याओ ! नया नया ऐटम बम ले ल्याओ

तिसरो ब्यौपारी- आज इ बण्यु ताजा टैंक ले ल्याओ

चौथू ब्युँपारी- केमिकल औजार ले ल्याओ . पड़ोस्यू जनता तै मारणो पूरी गारेंटी

एक मानव कल्याणकारी विक्रेता- भूक मिटाणो औजार ले ल्याओ

हैंक कल्याण कारी ब्यौपारी- हमर इखन  कुल्याणो औजार ल़ी जाओ

तिसर दुनिया क एक देस  (असला ब्यौपारी क समणि ) - अच्छा सूण ब्याळि , म्यार पडोसी न त्वे मांगन आधुनिक मिसाइल ल्याई . त मी तै उनि मिसाइल वै से दुगुण संख्या मा  दे अर दगड मा एंटी मिसाइल मिसाइल बि बाँधी दे.

असला ब्यापारी- ठीक च . मि आधुनिक मिसाइल अर एंटी मिसाइल बाँधी दींदु . जरा भितर त आ कुछ नया नया  टैंक अयाँ छन अर अबि तलक त्यार पडोसी तै पता बि नी च . जु तू हजार टैंक लेली त मि शर्तिया त्यार पडोसी तै यि टैंक नि द्योलु.

तिसर दुनियाक देस - पडोसी क सेना अर जनता तै तै मारणो बढिया टैंक छन ना ?

असला ब्यापारी- अरे पड़ोस्यू सेना अर जनता  मारणो याँ से बढिया टैंक बौणि इ नि छन अबि तलक .

तिसर दुनिया क देस-  भलो भलो ! इन कारो त द्वी हजार टैंक बि बाँधी द्याओ . कुछ डिसकौंट ?

ब्यापारी- ना डिसकौंट त हम नि दीन्दा पण मि एंटी टैंक मशीन  आधा दाम पर दे द्योलु

तिसर दुनिया देस- ठीक च चालीस पचास एंटी टैंक बि बाँधी द्याओ . अच्छा सूणो ओ सेना तै लिजाणो ट्रक कख मिल्दन.

ब्युँपारी- इख बिटेन दसवीं दुकान च वा दुकान मेरो साडो भाई क इ च . मि वैकुण फोन कौरी दींदु .

[तिसर दुनिया क देस वै मिलिट्री  ट्रक क दुकान ज़िना जान्दो , बीच मा वै तै मानव कल्याण कारि दूकान्यू क  रस्ता म ह्वेक  जाण पोड़द ]

एक मानव  कल्याणकारी दुकानदार (अवाज दींद) - हमर इख सिक्षा बढ़ाणो सामान मिल्दो . च क्वी...

हैंक मानव कल्याण कारी दुकानदार -  अर किलै छै अपण मुख बिगाड़णो. यूँ तिसर दुन्या वाळु न  कुछ नि लीण ।

तिसर दुनया क देस एक मिलिट्रीट्रक  क दुकानदारो इख- जरा मिलिट्री ट्रक त दिखा ..

दुकानदार- भै म्यार ट्रक त सौब बिकी गेन . तयार चारी पडोसी ऐ छया अर जथगा बि ट्रक छया सि ली गेन. बुकिंग करण पोडल.

तिसर दुनया क देस - ठीक च जथगा उं चरी देसूं न ट्रक खरिदेन  उथगा ट्रक मी तै चयाणा छन. इ ले एडवांस .

दुकानदार (मन इ  मन मा ) - कैन ब्वाल बल आर्थिक मंदी च युद्ध असला बजार मा त खूब चहल पहल च.

दुकानदार- अब कना जाणु छे ? कुछ पैसा बच्यां छन क्या ?

तिसर दुनया क देस- ना अब पैसा त बच्यां नि छन . म्यार  साल भरो बजट त रक्षा खरीदी मा चलि गे.

युद्ध असला दुकानदार (मन इ मन मा ) तुमारो रक्षा बजेट  से त हमार देस कु बजट चल्दो

दुकानदार- जब पैसा नी छन त कना जाणो छे?

तिसर  दुनया क देस- जरा कल्याणकारी बजार बि त जाण . दिखुद छौं कुछ उधार पगाळ मा कुछ मील जाओ .

असला दुकानदार - अच्छा सूण . कुछ नई तकनीक का मिलिट्री ट्रक चार पांच मैना मा बि आण वाळ छन हाँ !

तिसर दुनया क देस- ठीक च बुक कौरी ल्याओ . अच्छा अब मि जरा जन कल्याणकारी बजार जाणु छौं

असला दुकानदार - ठीक च

जन कल्याणकारि  दुकानदार - हाँ भै ह्व़े ग्याई सौब खरीदी

तिसर दुनिया क देस - अरे कख ह्वाई . अबि बि रक्षा बजट मा कमी च . पता नि क्या ह्वाल जु पडोसी देस में से जादा युद्ध असला जमा कौरी द्याला त ?

जन कल्याणकारि दुकानदार - अच्छा ब्वालो !  क्या चयाणु  च ?

तिसर दुनिया क देस - चयाणु त क्या  नी च? अच्छा भुकमरी  रुकणो तकनीक बचीं च ? उन त चयाणो सिंचाई, शिक्षाबिरधि. कूड़ बणाणो सामान, रोड बणाणो ब्यूंत  विधि सौब चयाणु च

जन कल्याणकारी दुकानदार - कुछ कैश बि च कि ना ?

 तिसर दुनिया क देस - कख बच्युं च .उधार मीलल  क्या?

जन कल्याणकारी दुकानदार - ना. हम उधार त नी दीन्दा पण जु ऐ.एम् ऍफ़ या वर्ल्ड बैंक वाळ गारेंटी दयावान त ..!

तिसर दुनिया क देस - अरे यूँ सौब बैंकु  मांगन उधार पगाळ ले छ्यायो . पण पवा से कम कु  काम ह्वाई. बकै आधा पौणा से जादा त उ  करप्सन फंड मा चलि ग्याई . अब त ब्याज भरणो बान बि मी दुबर कर्ज मांगणु छौं.

जन कल्याणकारी दुकानदार -  त ठीक च तुम इन कारो अपण जमीन गिरबी धौरो त  जन कल्याण कु वास्ता तकनीक मीलि  जाली

तिसर दुनिया क देस - अब क्या बुलण . इकोनौमिक रिफौर्म का नाम पर हमारी सौब जमीन बिकि  ग्याई . अब  जल , जमीन , जंगळ,कुछ बि हमारो नी च, सौब मल्टी नेशनल कम्पन्यू को नाम पर ह्व़े ग्यायी. 

जन कल्याणकारी दुकानदार - त मि बि कुछ नि कौर सकुद. अब त यू .एन ओ मा जाओ त सैत  च उ कुछ मदद कौरी द्याओ.

तिसर दुनिया क देस- ठीक च अब जन कल्याण कु बान भीक इ मांगण पोडल .

 

 

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                         बच्चों नजर मा भारतै  खेती

 

                             चबोड्या - भीष्म कुकरेती

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   " चलो चलो, सावधान ह्व़े जाओ. मी स्कूल इन्स्पेक्टर छौं . बच्चो आज  मि   भारत मा कृषि पर सवाल पुछलु . अब तक जु बि  मास्टरूं न तुम तै रटाई वां से सम्बंधित सवाल पुछुलु. ब्वालो बच्चो तैयार"

" जी हम तैयार छंवां "
 
" भौत बढिया. भारत एक कृषि प्रधान देस च. अर हमारा किसान भाई इख भौत सा अनाज, खाणो चीज पैदा करदन. बोल जनार्दन उर्फ़ जौनी तु बता. नक्वळ/नास्ता क  क्वी चीज बता जु हमारा किसाण पैदा करदन"

" जी केलोंग कु राईस फ्लेंक  "
 
' बिलकुल गलत "

"पण इसंपेक्टर  जी ! हम त सुबेर सुबेर केलोंग राईस फ्लैंक्स कु ब्रेकफास्ट  खांदा."

" वो ठीक च कि तुम सुबेर सुबेर नक्वळ/ब्रेकफास्ट मा  राईस फ्लैंक्स खांदा पण किसाण फ्लैंक्स पैदा नि करदन "
 
'मास्टर जी ! जु किसान    फ्लैंक्स पैदा नि करदन त फिर कखन फ्लेंक आंदो?"

" अबे ! किसान सट्टी पैदा करदन अर फिर याँ से अमेरिकी कंपनी फैक्टर्युं मा फ्लैंक्स बणान्दी "

"सौरी इन्स्पेक्टर  जी म्यार घौरम केल्लोंग की बडै होंदी . म्यार मौम- डैडी  सौब रोज बुल्दन बल हम किलौंग का आभारी छंवां जैन इथगा स्वास्थ्य वर्धक फ्लेंक बणाइ "
 
" चलो छोडो अब निर्मला उर्फ़ निम्मु तु बता कि नक्वळ मा कु  मान्शाहरी चीज च जु किसान पैदा करदन ."

" हम त सुबेर सुबेर नास्ता मा नॉन वेज मा सिर्फ ऑमलेट खांदा बस."

" बेटा निम्मु ! किसान ऑमलेट पैदा नि करदन बल्कण मा अंडा पैदा करवांदन"
 
"पण इन्स्पेक्टर  जी ! अंडा त घोंसला मा होन्दन फिर किसान ..?"

  "बच्चो ! किसान पोल्ट्री फ़ार्म मा मुर्गी पालन करद अर फिर मुर्गी  पोल्ट्री फ़ार्म मा अंडा दीन्दन . "

" इन्स्पेक्टर  जी ! दैट्स  वेरी इंट्रेस्टिंग "
 
" गबरू ! तु बता वु को अनाज च जु किसान पैदा करद अर हम वै तै बुकान्दा छंवां "

' यू त सरल सवाल च . बटर पौप कोर्न "

" ओह! तुम मी तै लगणु च कि कृषि विषय  पर ध्यान नि दीन्दा . बटर पौप कौर्न क्वी फसल नी च . पौप कौर्न मुंगरी से बणदु अर किसान मुंगरी पुंगड़ो मा पैदा करदन . "

" पण म्यार ब्व़े बाबु न कबि नि बताई कि मुंगरी बि क्वी फसल होंद. हम त इ समजदा छया कि पौप कौर्न पुंगड़ो मा पैदा होंद."

" ठीक च अब त समजी गेवां कि पौप कौर्न पुंगड़ो मा पैदा नि होंद"

"जी"

" अच्छा बंटू तुम बताओ कि क्वा फसल च जो मिट्ठू बणाण मा काम आन्द "

" कोको चौकलेट"

" भै, कोको चौकलेट भारतीय नी च. तु बता संटू"

" जी सुगर क्यूब्स"

" ओहो बच्चो ! सूगर क्यूब्स क्वी फसल नी च "

"त सूगर !'

' नहीं . सूगर गन्ना से बणदो अर भारतीय किसान गन्ना कि खेती करदन."

" पण सूगर त अग्रो प्रोडक्ट इ च ?"

" ओ ठीक च कि सूगर कृषी पदार्थ च पण सूगर पुंगड़ो मा पैदा नि होंद . पुंगड़ो मा गन्ना पैदा होंद."

" सरप्राइज ! "

" अच्छा बथाओ कि तुम नॉन वेज का बारा मा क्या जाणदवां जु किसान पालित  होंद "

"कंटकी चिकन, मैक  डौल .."

" अरे म्यार बुबौं ! यि त ब्रैंड छन."

" पण हम त इ जाणदा कि कंटकी चिकन ..."

" नही यि क्वी किसान नि पैदा करदन. किसान मुर्गी पालन करदन अर फिर यि विदेसी ब्रैंड अपण नाम से यूँ तै बिचदन."

" दैट्स व्ह्याई सो टेस्टी . सवादी ..."

" अछा कुछ अनाज क बारा बथाओ जो तुम खांदा छंवां "

"ब्रेड, बन्स, पाँव , बिस्कुट आदि "

' अरे सालो ! यि सौब फैक्टर्युं मा बणदन . असली फसल होंद ग्युं की "

" सर ! अब्युजिव भाषा असंवैधानिक  च ."

' ओ. सौरी ! अच्छा बताओ कि साग, दाळ क्या होंद जु किसान पैदा करद ."

" जी बडी, पापड, चाऊ माऊ,  बिरयानी, पुलाव, फिंगर चिप्स, फिंगर फ्राई पुलाव   आदि "

'म्यार बुबाओ ! यि किसान नि पैदा करदन बल्कण मा किसान उड़द ,ग्युं, सट्टी, अल्लू   पैदा करदन ."

'सौरी सर !"

' अच्छा इन बताओ कि दूध कख बिटेन आन्द ."

" हम त नि जाणदा  कि दूध क्या होंद अर कु पैदा करद."

" अरे रोज इख स्कुलम तुम तै सरकार को तरफ से एक गिलास दूध मिल्दो फिर कनै बुलणा छंवां कि दूध क्या होंद ?"

' पण हेड मास्टर जी अर ज्वा खाणक  बणान्दी वो रोज बुल्दन बल कनो काण्ड लगी कि  स्कूलक बिराळो सौब दुध चट कौरी ग्याई."

' एस सर !  जरा आप   ये बिरळ तै भगवै द्याओ .जु हम तै  दूध मीलल त हम दूध का बारा मा बतै द्योला"

' अछा बताओ कि बिराळु क्या होंद ?"

"जी बिरळो काम स्कुलम स्कुलो बच्चों दूध पीणो हुंद ."

' ओह हे भगवान्! . अछा मी हेड मास्टर जी तै  पूछिक बतान्दो कि ये बिरळो क क्या करे जाओ."


Copyright@ Bhishma Kukreti 12/8/2012

हास्य व्यंग्य साहित्य  ; गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य ; उत्तराखंडी हास्य व्यंग्य साहित्य ;  मध्य हिमालयी हास्य व्यंग्य साहित्य ;हिमालयी हास्य व्यंग्य साहित्य ; उत्तर भारतीय हास्य व्यंग्य साहित्य  ; भारतीय  हास्य व्यंग्य साहित्य  , एशियाई हास्य व्यंग्य साहित्य  लेखमाला   जारी ..

Bhishma Kukreti

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गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य

 

 

                        भ्रष्टाचार  खतम करणौ  आन्दोलन

 

                         चबोड्या - भीष्म कुकरेती

 

 
 
   [भ्रष्टाचार पर व्यंग्य साहित्य;  भ्रष्टाचार पर गढ़वाली व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर उत्तराखंडी व्यंग्य साहित्य;  भ्रष्टाचार पर मध्य हिमालयी क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर हिमालयी क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य;   भ्रष्टाचार पर उत्तर भारतीय क्षेत्रीय भाषाई  व्यंग्य साहित्य;  भ्रष्टाचार पर भारतीय क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य;  भ्रष्टाचार पर एशियाई  क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य लेखमाला ] 
 
 

     

" पी.ए.जी ! सब तैयारी ह्व़े ग्याई कि ना ?"

"हाँ नेता जी ! सबि तरां  मीडिया तै खबर कौरि आल.  सबि टी.वी चैनेलुं मा धूम मचीं च कि नेता जी याने आप  दस दिन उपरान्त भ्रष्टाचार उन्मूलन क्रान्ति लाणो बान रामलीला मैदान मा  उपवास करणा छंवां"

" पी.ई जी! द्याखो हाँ ! मेरी खबर अडवाणी जी, अन्ना जी अर  बाबा रामदेव से बड़ी होण चएंद हाँ ! "

"आप फिकर कतै  नि कारो मीन अपण ख़ास जर्नालिस्ट एजेंटू कुण बोलि आल कि सफल  आन्दोलन का बाद सौब तै राज्य मा पत्रकार कौलोनी क फ़्लैट  मिल  जाल "

" अच्छा त खबर पूरी जोर शोर से चलणि छन. "

" जी सब जगा घ्याळ हुयूँ च बल आपक भ्रष्टाचार उन्मूलन आन्दोलन अडवाणी, अन्ना हजारे अर बाबा रामदेव से बड़ो च , आपक विरोधी डर्याँ  छन कि कुज्याण क्या होंद धौं "

" अर वु भीड़ क इंतजाम ह्व़े ग्याई कि ना ?"

 " बस आबि से वै इ काम पर लगणु छौं."

" चलो मी बि तुमर दगड हाथ बंटान्दु  "

'अजी फिर त लाख द्वी लाख लोग रोज रामलीला मैदान मा आला इ ."

" हलो! मी नेता जी बुलणु छौं. बधाई ह्वाओ ब्याळि आप चीनी घोटाला म जेल से भैर ऐ गेवां। "

"नेता जी यू सौब आपक मेहरबानी च. कि मि जेल से भैर  ऐ ग्यों.ब्वालो काम ब्वालो !"

" अरे भै भ्रष्टाचार उन्मूलन सम्मलेन कि तैयारी चलणि च "

हाँ. मीन टी.वी चैनलुं मा खबर देखी आल. ठीक च सौ  ट्रक लोग म्यार समजो.सुबेर स्याम इ लोग पंडाल मा इ राला . अर यूंक खाणो पीणो इंतजाम मि इ करुल."

' .पण मी तै पांच सौ बस या ट्रक  मा लोग चयाणा छन "

" पांच सौ ट्रक मा लोग आई जाला जी . बस  भीड़ का बनिस्पत आप  से जाओ . मि अपण सौब भाई बन्धो तै बोलिक भीड़ जुटाई  देलु"

"धन्यवाद. भीड़ खूब होण चएंद हाँ 

" हलो ! अरे बिल्डर जी. मि नेता जी बुलणु छौं. अच्छा सुणो जमीन घोटाला कि अपराधिक  सुणवै बन्द ह्व़े ग्याई कि ना ?"

" नेता जी. जै मुंड मा  आपक हाथ ह्वाओ वै पर क्यांकि अपराधिक  सुणवै ."

" अछा बिल्डर जी . वो यार भ्रष्टाचार उन्मूलन सम्मेलन  को  पंडाल पर भौत खर्च हूणु च . जरा.."

" वांक चिंता नि कारो. आपकी मदद से इ त मीन करोड़ो अरबों कमाई.त ठीक च पंडाल आदि क इंतजाम ह्व़े जालो."

" चलो धन्यवाद ."

" हलो ! मि नेता जी बुलणु छौं  . कॉल गर्लूं   धंदा कन चलणु च ."

" नेता जी आपकी मेहरबानी से काल गर्लूं धंदा बढिया चलणु च . टी.वी मा द्याख कि आप भ्रष्टाचार उन्मूलन आन्दोलन चलाण वाळ छंवां "

"हाँ अच्काल भ्रष्टाचार पर बुलणो फैसन चलण मिसे ग्याई त मीन स्वाच कुछ नाम कमाए जाओ."

" भौत बढिया कार आपन. हाँ ! अच्काल सौब भ्रष्टाचार ख़तम करणो पैथर पड्या छन "

" एक काम छौ."

"आप हुकुम त कारो सैकड़ो  कनीज आपक बिस्तरा मा पड़ालि द्यूं ."

" अरे वु काम नी च आज"

" त फिर ?"

" मैं तै भ्रष्टाचार उन्मूलन सम्मेलन  का वास्ता सौएक जनानी वोईलेंटर चयाणा छन."

" अजी सौ क्या पांच सौ जनानी वोईलेंटर  चयाणा छन तोभी भेजी द्योलू  ."

' नै नै सिरफ़ सौ स्वयं सेविका इ चयाणा छन

" ठीक च आपक भ्रष्टाचार उन्मूलन सम्मेलन  मा सौ जनानी वोईलेंटर पौंची जाला"

" अच्छा सूण ! यि सौब जनानी सोसल वर्कर लगण चयान्दन हाँ. इन नि ह्वाओ कि कॉल  गर्ल लगन .."
 
"नेता जी ! आप बि ना ! सौब सती का रूप मा राला अर इन लगल जन कि  इं दुनिया मा यूँ से जादा क्वी धार्मिक जनानी नी ह्वेली  .आज से इ मि सौ काल गर्लू तै सोसल वर्करो हभ्यास करांदु  "

" थैंक  यू डार्लिंग ! "

" सर !"

' हाँ ! पी.ए  जी ! "

"सर कुछ भजन आदि "

"हाँ !  इन कौर ओ जो कलाकारों तै बेईमानी से विदेश लिजाण मा फंसी छया ना ?"

 " समजी ग्यों वूं कुण मि बोली दींदु कि भजन कीर्तन का वास्ता कलाकारु  इंतजाम कौरी देन "

" हलो ! मि नेता जी बुलणु छौं .क्या हाल छन ?"

"आपकी मेहरबानी से परसि इ  जेल से भैर औं। नेता जी हुकुम कारो."

" अरे भाई यू त म्यार धरम च. अच्छा सुणो ,  भ्रष्टाचार सम्मेलन का वास्ता कुछ  सौएक स्वयं सेवक चयाणा छन "

'नेता जी ठीक च म्यार सौ गुंडा स्वयं सेवक का भेस मा आपक सम्मेलन मा पौंची जाला .आजी मी ऊंकुण बुल्दु कि तमीज का हभ्यास करणा रावन.""

"पी.ए. जी! मै लगद सौब इंतजाम ह्व़े ग्याई. अब जरा भासण लिखणो कै  फ़िल्मी राइटर तै बुलाई द्याओ."

' जी! एस नेता जी! आपक भाषण इन ह्वाला क भ्रष्टाचार डरण बिसे जाल कि इख भारत मा रौं कि कखि हौर चलि जौं "

 

Copyright@ Bhishma Kukreti 12/8/2012 

 भ्रष्टाचार पर व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर गढ़वाली व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर उत्तराखंडी व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर मध्य हिमालयी क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर हिमालयी क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर उत्तर भारतीय क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर भारतीय क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर एशियाई क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य लेखमाला जारी ...

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गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य

 

                                    उन्ना देसी (विदेशी) हाथ   

 

                                   चबोड्या - भीष्म कुकरेती   


[ विदेसी हाथ और  व्यंग्य; विदेसी हाथ और गढ़वाली व्यंग्य;विदेसी हाथ और उत्तराखंडी व्यंग्य; विदेसी हाथ और मध्य हिमालयीभाषाई  व्यंग्य;विदेसी हाथ और हिमालयी भाषाई व्यंग्य;विदेसी हाथ और उत्तर भारतीय भाषाई व्यंग्य;विदेसी हाथ और भारतीय भाषाई व्यंग्य;विदेसी हाथ और एशियाई भाषाई व्यंग्य]


    मि तै लगुद सरा देस  ये उन्ना देसी हाथ से बड़ो परेसान च . सि अपण महाराष्ट्र का मुख्य मंत्री पृथ्वी राज चौहाण का बयान त बाँचो. ग्यारा तारीख सन बारा क दिन आजाद मैदान मुंबई मा प्रदर्शनकार्युं न पाकिस्तानी झंडा फैराई  अर तोड़ फोड़ कार त महाराष्ट्र का मुख्य मंत्री चौहाण जीन फट से बयान दे द्याई बल दंगा फिसाद मा   क्वी उन्ना देसी (विदेशी) हाथ च .

  सन  सैंतालीस से पैल त हम तै पता छौ कि भारत कि गरीबी बदहाली मा उन्ना देसी हाथ च अर वु हाथ छौ ब्रिटिश हाथ.

पण गुरा लगिन  कि देस स्वतंत्र ह्वाई अर हम तै हमर बर्बादी मा  विदेशी हाथ इ दिख्यांद पण गौ बुरी चीज जु यु उन्ना देसी हाथ टैम पर दिख्याऊ धौं !  हमर देस का खैरख्वाह अर मंत्र्युं तै विदेशी हाथ का बारा मा तब पता चलद कि जब गुनाह ह्व़े जांद.

  चीन न हम पर आक्रमण कार त पता चौल कि हम तै चीन कि मंशा क बारा मा पैल पता इलै नि  चौल कि क्वी विदेशी हाथ नि चांदो छौ कि हम तै पता चौल कि चीन कि मंशा क्या च. विचारा कृष्ण मेनन अर नेहरु वै अज्ञात, अनाम, अविग्य , धुर्या  विदेशी हाथ तै खुज्यान्दा खुज्यान्दा सोराग चलि गेन पण अब तक वै विदेशी हाथ कु पता नि चौल जैन हम तै पेशगी  मा पता नि लगाण दे कि आखिर चीन हम पर आक्रमण की तैयारी कथगा सालो से करणु च . काण्ड लागल ये विदेशी हाथ पर जु अदिखळ इ रौंद.

  पाकिस्तान कि लड़ाई उपरांत अपण  लाल बहादुर शास्त्री रूस मा भग्यान  ह्वेन . कथगा इ लोग आज बि खोज करणा छन कि लाल बहदुर शास्त्री कि मिरतु मा कवी उन्ना देसी हथ छौ अर कुछ बुल्दन बल देसी हथ छौ.

  फिर जब जब कम्युनिस्ट पार्टी केन्द्रीय सरकार तै सहयोग दीन्दी छे त वु हाथ कमाक हूंद था पण जनि कम्युनिस्ट पार्टी केन्द्रीय सरकार तै फटकार लगाण मिस्याओ या केन्द्रीय सरकार का विरुद्ध ह्वाओ त कुज्याण फटाक से कवी उन्ना देसी हथ जनम ल़े लीन्दु छौ. उ त भलो ह्वाई कि रूस अर चीन मा बामपंथी क्रांति रुक ग्याई निथर कुज्याण रोज  इ हमारा नेता हम तै क्वी ना कवी उन्ना देसी हाथ कि याद दिलान्दा धौं !

  जय प्रकाश नारायण जब मैडम इंदिरा गांधी क विरोधी ह्वेन त इंदिरा गांधी तै इखम विदेशी हाथ इ दिख्याई उ बिगळि बात च वैबरी भारत अ जनता अपण भूरिण हाथ दिखदी छे अर वीं जनता क समज मा नि आंदो छौ कि अपण इ हाथ उन्ना देसी हाथ कनकैक ह्व़े ग्याई.

  फिर रोज जब बोफोर का तोपुं मा घूस कि बात चल त फिर बुले ग्याई कि घूस कि बात उड़ाण  मा क्वी उन्ना देसी हाथ च. जनता आज बि घंघतोळ मा च बल घूस मा उन्ना देसी हाथ छ्याओ  कि घूसक  बात करण वाळुक हाथ उन्ना देसी  छयाई .

  अब जब  आतंकवाद्यू न  अपण डेरा, डिसाण भारत मा लगाई त   तब त जब बि आतकवादी अपघात ह्वाओ त बात उन्ना देसी हाथ पर ख़तम ह्व़े जांदी . अपघात मा भारतीय मोरी जान्दन अर हमारा नेता उन्ना देसी हाथ कि बात कौरिक अपण  उत्तरदायित्व की इति श्री कौरी दीन्दन. उ नेता उन्ना देसी  हाथ कि बात कौरिक से जान्दन, जनता बिचारी बि उन्ना देसी हाथ से  डौरिक से जांदी अर अबि बि बिजां उन्ना देसी आतंकवादी हाथ भारत मा जगा जगा नाचणा छन. पण कुज्या ण हम तै इ हाथ नि दिख्यान्दन?.

नक्सलवाद अर माओ वाद का अपघातों मा  बि नेताओं तै उन्ना देसी हाथ दिख्यांद .

 कुछ दीन पैल तामिल नाडु मा न्यूक्लियर प्लांट  का विरुद्ध मा लोग खडा दिकेहं त हमारि सरकार न बोल बल इखमा क्वी उन्ना देसी हाथ च . ह्वाल

ठीक च उन्ना देसी हाथ च पण जनता क बिंगण मा आज तक इ णि आई कि यू उन्न देसी हाथ ग्वारो च कि काळो या भूरिण च?

जनता इ बि पता नि लगै सकणि च कि यू उना देसी हाथ कथगा लम्बो च अर कथगा छ्वटु च . यू विदेसी हाथ म्वाटो च कि बरीक च ?

जनता पुछदी बि च कि यू उन्न देसी हाथ कथगा मजबूत च ? पण कुनगस  च कि जनता तै कुछ पता इ नि चलुद  कि यू उन्ना देसी हाथ कु गात क्वा च?

फिर जनता अफु तै पुछणि रौंद कि हम तै तबि किलै पता चलद कि उन्ना देसी हाथ भारत मा ऐ ग्याई जब क्वी अपघात ह्व़े जान्दो.

 फिर जनता अपण आपस मा बचळयांदी बि च बल जब यू उन्ना देसी हाथ छें च त ये हाथ तै तोड़ी द्याओ, ये हाथ तै काटी द्याओ , ये हाथक बुगचा किलै नि बणान्दा हम?

फिर जनता बेहोश ह्व़े जांदी कि हमर इख जब  RAW , सी बी. आई , आई.बी बि छन त इ लोग हम तै पैल किलै नि बथान्दन कि भैरों उन्ना  देसी हाथ आण वाळ च  .

फिर जनता अपण  आपस मा इ बात करदि  बल अच्छा जब अपघात ह्व़े जांद त फिर वै उन्ना देसी हाथक हमारि सरकार क्या करदि ?

अखबार बि उन्न देसी हाथ कि छ्वीं वैबरी लगान्दी जब अपघात हूँ अर फिर अखबार बि उन्ना देसी हाथ छोड़िक उन्ना देसी इन्वेस्टमेंट/निवेश का पैथर पोड़ी जान्दन.

पण अब  समौ ऐ ग्याई कि हम अपघात से  पैलि इ ये उन्ना देसी हाथ तै छिंडार  देवां अर जड़ समेत काटी देवां.


Copyright@ Bhishma Kukreti 14/8/2012

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गढ़वाली हास्य व्यंग्य साहित्य


                                 आजादी क फैदा 


                       चबोड्या - भीष्म कुकरेती

 ( स्वतन्त्रता  दिवस पर हास्य- व्यंग्य; स्वतन्त्रता दिवस पर गढ़वाली हास्य- व्यंग्य;  स्वतन्त्रता दिवस पर उत्तराखंडी हास्य- व्यंग्य;स्वतन्त्रता दिवस पर मध्य हिमालयी  हास्य- व्यंग्य;स्वतन्त्रता दिवस पर हिमालयी  हास्य- व्यंग्य;स्वतन्त्रता दिवस पर उत्तर भारतीय हास्य- व्यंग्य;स्वतन्त्रता दिवस पर भारतीय हास्य- व्यंग्य;स्वतन्त्रता दिवस पर दक्षिण एशियाई  हास्य- व्यंग्य;स्वतन्त्रता दिवस पर एशियाई हास्य- व्यंग्य लेखमाला ]


          भारत वासिन्दा फ़ोकट मा रुणा रौंदन बल आजादी हूणो  परांत बि आजादी फैदा नी च   .

मी बुल्दु बल हम अजादी क खूब फैदा उठाणा छंवां       

अब द्याखो ना जु हमारा उद्योगपति  शराब  ब्रैंड कु  खुले आम विज्ञापन नि दे सकदन    त क्या व्हाई ? अरे पाणी, ताश, सोडा क नाम से त शराब कु विज्ञापन दे इ सकदन कि ना ? याँ से बडी आजादी क्या चयाणि च हम तैं कि हम सरकार अर सरकारों नियमों खुले आम धज्जी उडै सकदवां , भई !  ये त आजादी च कि हम प्रजातंत्र कु हम मखौल उडै  सकदवां सकद्वां .

. हम मथिनो मंज्यूळ  मा रौंदवां त हम तै तौळ खौड़- कत्यार, गमलों क पाणी तौळ चुलाणै  पूरी आजादि च ।

रस्ता मा जखम चाओ हम थूक सकदवां  इन इना उना थुकणो आजादि प्रजातन्त्र आर भारत जन देस मा  इ ह्वे सकदि !

स्कूल आर कौलेज क ठीक समणि हम बीडी सिगरेट अर शराब बेचीं सकदवां . अब बथाओ शिक्षा संस्थान क समणि जब आप खुले आम बीडी सिगरेट अर शराब बेचीं सकदवां त याँ से आजादी से जादा क्या फैदा चयांद भै ?

हम अपण  ड्यारो या दुकानों  कचरा बीच  सडक मा फेंकी सकदवां अर फिर म्युनिस्पाईलिटी तै गाळि बि दे सकदवां कि म्युनिस्पाईलिटी बेकार च कुछ नि करदी. बीच सडक मा अपण कचरा चुलाण से बडी आजादी क्या ह्व़े सकदी भै ?

हम नियम विरुद्ध अपण ड़्यार चार चार गैस सिलिंडर धौरी सकदवां . भै याँ से बडी आजादी क्या चयाणि च कि हम नियम विरुद्ध काम कौरी सकदवां .

हम नियमु खिल्ली , मसखरी उड़ैक बस स्टौप या रेलवे प्लेटफारम पर  बीडी सिगरेट पे सकदवां .य़ी  त आजादी क असली फैदा छन कि हम नियमों खुले आम मसखरी उड़ाई  सकदवां .

नियम छन कि आप प्लास्टिक थैली प्रयोग नि  कारो पन हम आजादी क घमंड मा पर्यावरण विरुद्ध अपणो इ नुकसान करदां . त ये माराज याँ से बडी आजादी क्या ह्व़े सकदी कि हम अपण नुकसान अफिक कौरी  सकदवां .

हम बड़ी इज्जत से बस,  रेल की टिकेट  लाइन तोड़ी सकदवां अर फिर सरकार पर भगार बि लगै सकदवां कि सरकार अनुशाशन रखण मा भौत  इ  ढीलि च . अफु गुनाह कारो अर इल्जाम सरकार पर लगाओ से बड़ी आजादी क्या ह्व़े सकद ?

हम अपण फैदा बान सरकारी जमीन पर कूड़ चीणि सकदवां . यांखुणि त आजादी बुल्दन.

हम बिजलि- पाणि क मीटर खराब कौरिक या हैंको ढंग  से बिजलि- पाणि चोरी कौरी सकदवां अर फिर खुले आम सरकार पर भगार बि लगै सकदवां कि लुंज च, सरकार बेकार च ज्वा बिजलि- पाणि बढ़ाणो बान असमर्थ च. या इ हमारि आजादी च.

हम तै आजादी च कि हम अपण नौन्याळो तै परीक्षा मा पास हूणो बान नकल कि पर्ची बणौवां अर दगड़ मा अखबारों मा शिकायत बि करदवां कि शिक्षा क स्तर दिन ब दिन कम होणु च . अपण गुनाहों गू हम कै हौरू पूठ फर लगै सकदवां . याँ से बडी आजादी क्या चयाणि च ?

हम अफु से कमजोर तै थपडे सकदवां . अफु से कमजोर तै पित्याणै  आजादी  मिलिं त  च हम तै.

सरकारी मुलाजिम नकली मेडिकल बिल से अपण नौनु तै विदेश मा पढाई लिखै सकुद त फिर हम किलै रून्दा बल  हम तै आजादी क कवी फैदा नी च ?

हम सरकारों कूल से रात या दिन पाणि तोड़ीक या चोरिक  अपण पुंगड़ कुले  सकदवां त फिर क्यांकि चिंता कि हम तै आजदी क फैदा नी होणु च ?

हम संबिधान को उल्लंघन खुले आम करी सकदवां अर फिर सरकार पर लांछन बि लगी सकदवां कि सरकार अनुशाशन का मामला मा किदलु जन मरियल  च . अजादी क  यो इ त मतबल  च कि हम संबिधान का मखौल  उड़ावां  फिर आजादी  से बोलि दीन्दा कि सरकार कड़क क़ानून  नि लाणि च .

हम चुनावूं  बगत पर नेताओं क शराब पींन्दां अर फिर ऐड़ाट भुभ्याट करदवां कि विधान सभा या लोकसभा मा भ्रष्ट राजनेता पौंची गेन . पैल गुनाह अफु कारो अर फिर राजनेताओं पर गू लपेड़ो .इनी आजादी  क त फैदा हम उठाण गीजी गेवां .

हमर बान  आजादी क मतलब च कि हमारो अधिकार सुरक्षित रावन अर जब हम तै हमारो कर्तब्य कि याद दिलाये जाव त हम समजदवां कि आजादी मा व्यवधान ऐ ग्याई


Copyright @ Bhishma Kukreti 15/8/2012 


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गढ़वाली  हास्य व्यंग्य साहित्य

 

                                               मुन्ना भाई शिक्षा मंत्री कनकैक बौणिन ?

 

                                                 चबोड्या - भीष्म कुकरेती   

[शिक्षा मंत्रालय और व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और गढ़वाली व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और उत्तराखंडी भाषा में व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और मध्य हिमालयी भाषा में व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और हिमालयी भाषा में व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और उत्तर भारतीय भाषा में व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और भारतीय भाषा में व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और एशियाई भाषा में व्यंग्य लेखमाला]



                 मुन्ना भाई  राजनीति मा पैल दें   ऐन पण चुनाव जीति गेन. क्वी नि  जाणदो कि वो जीत किलै छन अर जनता तै बि  नि  पता कि ऊन कैं  बौळ मा मुन्ना भाई तै जिताई.

खैर जीति गेन त सरकारी दल का हूण ना जातीय गुणो क कारण ऊं तै मंत्री बणाण जरूरी ह्व़े ग्याई. ऊंक जातिक द्वी बड़ा बड़ा नामी गिरामी नेता राजनीति औ दंगल  का खिलाड़ी छया पण बिजोग इन पोड़ कि एक नेता तै मंत्री बाणाये जांद त हैंक सरकार नि बणण दीन्दो अर हैंको तै मंत्री बणांण  छौ त हैंको सरकार तै ज़िंदा नि छोड़दु.  त हाई कमांड कि दृष्टी मा यांको एकी उपाय छौ कि मुन्ना भाई तै मंत्री बणाये जाओ .

मुख्यमंत्री और कुछ ख़ास लोग ण मंत्री परिषद निर्माण म  इन  मेहनत  कार   .

- चूंकि फलण नेता जी मुख्यमंत्री क पद का दावेदार छया त गृह मंत्री कि  कुर्सी वूंकी पक्की ह्वेई .

- पण मुख्यमंत्री मी छौं अर फलण नेता न म्यार दगड बात इ नि करण त  मी क्यांको  मुख्यमंत्री . ऊं तै आधारिक अर उच्च शिक्षा मंत्रालय दे द्याओ .

--  फलण नेता शिक्षा मंत्रालय कु नाम सूणिक इ दुसर  पार्टी नि बणै    देला?

- ठीक च उद्योग  मंत्रालय द्याओ . अब मि  तै मुख्यमंत्री बणिक रौण त दुस्मानो तै घ्यू खलाण इ पोडल. "

" अब अलण नेता क क्या ह्वालू ?"
 
'  अरे यू बि कम रागस नी च में खुणि . यें बि मि तै मुख्यमंत्री चैन से थ्वड़ा  रौण दीण, पढ़यूँ  लिख्युं भौत च तै तै शिक्षा मंत्रालय पकडै  द्याओ  "

" एक त वैन नि मानण . शिक्षा मंत्रालय  द्योला त वैन बोली दीण  पर्यटन विभाग क चेयरमैनि दे द्याओ . अर पार्टी फंड का वास्ता य़ी अलण जी बहुत इ कामगार च "
 
" अब मुख्यमंत्री रौण त मन मारण इ पोडल. अब क्या करे जाओ त  तै मुंज मुन्जू तै पी .डबल्यु डी विभाग दे द्याओ "

"हाँ यू ठीक च पार्टी फंड कु जुगाड़ बि ह्व़े जालो अर इ खुस बि राला."

" अब इथगा घ्युयाळ विभाग दिए जाल त क्वी बि खुस ह्वालू."
 
' अच्छा उद्योग विभाग कु क्या ह्वाल?"

" 'सी' नेता जी छन ना ऊं तै उद्योग को बड़ो अनुभव च "

"नै नै ऊं तै उद्योग नि दिए जै सक्यांद . 'सी' नेता जी तै भौत इ जादा अनुभव  च . इन मा 'सी' पर पार्टी क क्वी नकेळ नि रै जालो. इन कारो यूँ तै जल निगम विभाग दे द्याओ ."
 
' हाँ ठीक च. त उद्योग मंत्रालय मुन्ना भाई तै सौंपे जाओ?"

" नै भै नै ! अरे उद्योग मंत्रालय क वास्ता कुछ त अनुभव हूण चएंद कि ना ."

" त पवित्रा जी तै उद्योग मंत्रालय दिए  जाओ ?"
 
"नै नै पवित्रा जी तै इथगा महत्व पूर्ण मंत्रालय नि दिए जै सक्यांद वा हाई कमांड कि कट्टर विरोधी क पाळी क च ."

"त शिक्षा मंत्रालय दे द्याओ "

" नै नै इथगा गैर जरूरी मंत्रलाय बि ठीक नी च . हाई कमांड चांदो कि वीं तै जादा महत्व पूर्ण ना पर जरा कम  महत्व पूर्ण  मंत्रालय दिए जाओ . हाई कमांड चांदो कि वा  एक दिन हाई कमांड कि पाळी मा ऐ जाओ."
 
" त नगर निर्माण विभाग पवित्रा जी तै दिए  जाओ."

' अछा हुन्यार  नेता जी तै शिक्षा मंत्रालय दे द्याओ ."

नै नै हुन्यार नेता म्यार पाळि क छन . मीन अर हाई कमांड न यूँ तै कौंळ बचन दे छायो कि  अपण पार्टी क इ करूड़  नेता जी तै हरै  देल्या त बड़ो मंत्रालय दिए जालो. हुन्यार जीन  हाई कमांड को कांडो करूड़ जी तै हरवाणो बान क्या नि कौर.ठीक च एक एम्.एल.ए कम ह्वाई पण हाई कमांड को एक कांडो त कम ह्वाई कि ना .हुन्यार जी तै  शिक्षा मंत्रालय सरीखा कम महत्वपूर्ण मंत्रालय देक हम हुन्यार जीक बेजती  नि कौर सकदा."

' त ठीक च हुन्यार जी तै हाई कमांड की फजीत दूर करणो उपलक्ष मा वन मंत्रालय दे दिए  जाओ."

" हाँ इनाम मा  वन विभाग ठीक रालो "

' अच्छा बकै मंत्रालय का वास्ता या लिस्ट हाई कमांड से अयीं   च "
 
"त ठीक च त या लिस्ट फाइनल च न?"

" अरे अबि शक्षा मंत्रालय कै तै दिए जाओ यांक फैसला बि त करण . जै तै बि शिक्षा मंत्रालय द्योला त वैन अपण बेजती समजण ."

' अरे अर वु मुन्ना भाई तै बि त क्वी मंत्रालय दीण जरूरी च कि ना ?"
 
' अरे भौत बढिया ! मुन्ना भाई तै शिक्षा मंत्री बणै द्याओ "

हाँ यू ठीक च मुन्ना भाई अबि नै नै च त वै तै शिक्षा मंत्रालय पं मा कवी बेजती बि नि लगलि '

अर इन मा मुन्ना भाई शिक्षा मंत्री बौणिन .
 
 

Copyright@ Bhishma Kukreti 15/8/1989

 शिक्षा मंत्रालय और व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और गढ़वाली व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और उत्तराखंडी भाषा में व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और मध्य हिमालयी भाषा में व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और हिमालयी भाषा में व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और उत्तर भारतीय भाषा में व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और भारतीय भाषा में व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और एशियाई भाषा में व्यंग्य लेखमाला  जारी ...

Bhishma Kukreti

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 गढ़वाली हास्य व्यंग्य साहित्य

                            शिक्षा मंत्रालयs  सग्वड़

 

                          चबोड्या - भीष्म कुकरेती


 ( शिक्षा पर व्यंग्य; शिक्षा पर गढ़वाली व्यंग्य; शिक्षा पर उत्तराखंडी  भाषाई व्यंग्य;शिक्षा पर मध्य हिमालयी  भाषाई व्यंग्य;शिक्षा पर हिमालयी भाषाई व्यंग्य;शिक्षा पर उत्तर भारतीय भाषाई व्यंग्य;शिक्षा पर भारतीय भाषाई व्यंग्य;शिक्षा पर दक्षिण एशियाई भाषाई व्यंग्य;शिक्षा पर एशियाई भाषाई व्यंग्य]


                   अब जब मुन्ना भाई शिक्षा मंत्री बौणि गेन त वूंन प्रण ले कि ये शिक्षा मंत्रालय कु कुछ ना कुछ करण  च . पैलाक  शिक्षा मंत्र्युं तरां मुन्ना भाई उर्फ़ आजौ शिक्षा मंत्री तै बि नि पता कि शिक्षा मंत्रालय मा करण क्या च?. पैलाक शिक्षा मंत्री बि राजनीति क गोटि फिट करणो बान शिक्षा मंत्री बणये गे  छया अर मुन्ना भाई तै बि शिक्षा मंत्री बणये गे कि बड़ा बड़ा नेता शिक्षा मंत्रालय तै achhu tun  कूड़ -पंद्यर समजदन अर मुन्ना भाई तै शिक्षा मंत्रालय बि मीलि ग्याई त चलो भागदो भूतौ लंगोट इ सै. .ना त पैलाक शिक्षा मंत्र्युं न शिक्षा  मा विकासौ सुपिन देखी छौ ना इ मुन्ना भाई न गैर राजनैतिक जिन्दगी मा  शिक्षा क बारा मा एक झपांग बि सोचि छौ कि जिन्दगी मा शिक्षा क बि क्वी महत्व हूंद.हमर देस अर प्रदेश मा शिक्षा विभाग से जादा महत्व हौर चीजुं हूंद . ब्व़े बाब  बि शिक्षा क महत्व उथगा इ समजदन  जथगा मा उनक नौन्याळो क नौकरी इंतज़ाम ह्वे जाओ। 

   अब जब अब जब मुन्ना भाई शिक्षा मंत्री छन त वूं तै शिक्षा क्या हूंद अर शिक्षा विभाग क्या हूँद   कि फिकर हूण जरूरी छयो. त पैल पैल वो शिक्षा विभाग कु सग्वड़ दिखणो गेन .

' यि सिक्षा सग्वड़ मा सी यीं तर्फौ साग कनफणि सि छन , यूँ पौधों पर क्वी चलकैस नी च, यि सौब खरसण्या अर पौधा पीला सुक्याँ छन.   अर हैंकि तर्फांका  पौधों क चलचला पात छन. खूब हौर  छन

' मंत्री जी ! जु खर्सण्या पौधा छन अर जौंक पात पीला छन ऊं पौधौंक क माटू गांवक च अर जु पौधा हरा अर चलचला छन ऊं पौधों कुण  माटू  शहर बिटेन आंदो. "

" त इकसनी माटो क इंतजाम कारो ."

 ' जी वान्खुणि बजट का वास्ता आप तै पैल योजना आयोग अर फिर वित्त विभाग म जाण पोडल ."
 
' अरे सि इं  क्यारी क  फूल  भौत ई आकर्षक  छन अर हैंकि क्यारिक फूल सड्या या सूखा सि छन.  इन किले ?"

" जी शिक्षा मंत्री ! जु फूल  आकर्षक छन ऊं फूलूं माली प्राइवेट लोग छन अर जु फूल सड्या या सूखा छन ऊं फूलूं माली सरकारी छन. "

"अच्छा . प्राइवेट माली अर सरकारी माल्यूं काम मा इथगा फरक ?"

' जी मंत्री जी."

" अरे एक इ क्यारी मा कुछ  पौधा डम डम अर कुछ पौधा पतमर्याँ छन , इन किलै ?"

" जी मंत्री जी ! जौं पौधों तै कोचिंग की कैंची से छिंडारे जांद  सि पौधा डम डम छन अर जौं तै कोचिंग क कैंची से नि छिंडारे  जांद त सि पौधा पतमोंर्याँ ह्व़े जान्दन. "
 
" अचर्ज !"

" जी मंत्री जी ."

' अरे जगा जगा लगलुं जाळ बिछ्युं  च .एक लुग्ल   एक हैंको लगुल से मिल्यां छन अर यूँ लगलुं अजीब सि जाळ बण्यु च, जन बुल्यां एक लगुल हैंक लगुल  से गुथम  गुथा  करणु  च  .यि क्या च?. इन कबि नि द्याख मीन."
 
' जी यि  शिक्षा विभागक  अलग अलग नियम  धियंमु से कुलयाँ लगुल छन .   जन एक नियम  हैंक नियम कु विरोधी च या समान्तर छन त  उनि येकी जाति क लगुल एक हैंक लगुल से गुथम गुथा करणा रौंदन."

"बड़ो अजीब च"

"जी मंत्री जी . यि शिक्षा मंत्रालय कु सग्वड़ जि च."

" अछा यि क्या होणु च यि पौधा एक हैंकाक जड़ खुदणा छन, एक साथ कुछ पौधा  हौरी पौधों  पर  जड नाशी दवाई छिड़कणा छन, क्वी कैकी जगा पर अपण जड़ घुसाणा छन ?"

" जी यि पौधा अर पेड़ राजनीति करणा छन. क्वी जातीय राजनीति करणु च, क्वी अपर पदोन्नति क वास्ता लड़ाई करणा छन , क्वी यूनियन चुनाव क पैन्त्राबाजी करणा छन, क्वी अपणी  चोरी लुकाणो बान एक हैंको कतल करणु च आदि  आदि . यि राजनीति क माहिर पेड़ ,पौधा, लगुल  छन  ."

" अच्छा शिक्षा क सग्वड़  मा बि राजनीति?"

" जी मंत्री जि !  जब  हम अपण परिवार मा राजनीति कैरी सकदवां त शिक्षा मा किलै ना."

' अरे ! यि क्या ? मी तै इन लगणु जन यि  ड्रेनेज कैनाल ह्वावन ."

"जी मंत्री जी. अप सै बुलणा छंवां . सी बड़ो पाइप सप्लाई कैनाल च .सरकारी तलाब से पाणि , खाद, मोंळ आदि आंदो.  अर यि जि अलग अलग ड्रेनेज कैनाल दिखणा छंवां ना ?

" हाँ "

' त मंत्री जी जु बढिया फल या भुज्जी होंद वो ब्रेन ड्रेनेज कैनाल क रस्ता से विदेस चलि जान्दन. फिर कुछ बढिया प्रशासन विभाग  मा चलि जान्दन, कुछ कम बढ़िया फल फूल , साक भाजी भारतीय  बिजिनेस संस्थानों मा बौगि जान्दन, फिर कुछ ठीक ठाक सरकारी विभागुं गोडाऊनो मा पौंची जान्दन."

" अर सबसे बेकार भुज्जी या फल फूल कख चलि जान्दन?"

" जु बेकार , सड्या फल , फूल, साक भुज्जी  होन्दन उ ए टुट्यु  फुट्यु  पाइप से शिक्षा गोडाऊन मा पौंची  जान्दन "

" अरे !"

"जि मंत्री जी"

" अछा यू एक पुराणो सि पौ दिखयाणु च. यू क्या च? "

" जि मंत्री जि ! यू पौ शिक्षा विभाग कि पौ च. लोर्ड कर्जन न शिक्षा विभागक  सग्वड़ो पौ धौरि  छौ अर आप तै खौंळयाणै जरूरत  त नी च कि अब तलक यू पौ सही सलामत अर मजबूत च."

" अरे! इथगा मजबूत पौ?"

"जी मंत्री जी"

Copyright@ Bhishma Kukreti 17/8/2012


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गढ़वाली हास्य व्यंग्य साहित्य

                     सौ  साल  अग्वाड़ी कु  गढवाळ  कुमाऊं 

                            चबोड्या - भीष्म कुकरेती


 [ भविष्य के  गढवाल - कुमाऊं पर  व्यंग्य; भविष्य के  गढवाल - कुमाऊं पर गढ़वाली भाषाई व्यंग्य; भविष्य के  गढवाल - कुमाऊं पर उत्तराखंडी भाषा में  व्यंग्य;भविष्य के गढवाल - कुमाऊं पर मध्य हिमालयी भाषा में व्यंग्य;भविष्य के गढवाल - कुमाऊं पर हिमालयी भाषा में व्यंग्य;भविष्य के गढवाल - कुमाऊं पर उत्तर भारतीय भाषा में व्यंग्य;भविष्य के गढवाल - कुमाऊं पर भारतीय भाषा में व्यंग्य;भविष्य के गढवाल - कुमाऊं पर दक्षिण एशियाई भाषा में व्यंग्य;भविष्य के गढवाल - कुमाऊं पर एशियाई भाषा में व्यंग्य]

                        मि घड्याणु छौ बल सौ साल अग्वाड़ी गढ़वाळ -कुमाऊं कनो ह्वालो. म्यार गाँ म्यार नि रै जालो. मि समझणु रौलू बल यू म्यार गाँ च पण जौंक नाम पर यू गाँ ह्वालो उ बुलणा राला बल कि यि प्रवासी गढवळी पागल/ बौळया छन जु हमर ठेका मा कमयुं गां तै अपण गाँ समजणु च. सरा गढ़वाळ रिलायंस या क्वी विदेसी कम्पनि नाम पर रालू जु सरकारी ठेका से गढ़वाळ मा खेती कारल .गढ़वळी कुमाउनी यू खेतुं  मा बडी मेनत से नौकरी करणा राला . अर इन बुली जालू कि जब कुमाउनी अर गढ़वळि इथगा मेनत कौरी सकदा छया त यूँन  पैल किलै इथगा मेनत णि कार. कुमाउनी अर गढ़वळि समाज एक सवाल कु जबाब नि खुजे साकल कि क्या कारण  छ  कि कुमाउनी अर गढ़वळि  अपण काम मा सुस्त्रामु बुबा होन्दन  पण जब नौकरी करदन  त यूँ से बड़ा मेनती  क्वी हौर नि होंदु.
सेटेलाईट क जरिया प्रवासी अपण गाँ द्याखाल मतबल गूगल से अपण गांवक कूड़ द्याखाल कि कन उख लुखंदर भितर भैर आणा -जाणा छन अर कन लुखंदरूं राज च . जु गाँ मा राला त ऊं मा दु दु गाड़ी होली. प्रधान जी मा पैल एकी गाड़ी होली पण प्रधान जी बणणो बाद एकदम से दस गाड़ी अर एक हैलीकैप्टर ऐ जालो. लोग बाग़ जादातर रोप वे से इना उना जाला . कार त इलै धर्याँ राला जन हम अच्काल लोगूँ तै अपण पुरखों पथरो पयळु, जन्दुर अर गंज्यळ-उर्ख्यळ दिखान्दा.

रिसिकेस से बद्रीनाथ चार धाम कि यात्रा बडी सरल होली . लोग अपण अपण हवाई जाज से जात्रा कारल पण गरीब लोग अपण कार से यात्रा कारल. हाँ डिजास्टर मैनेजमेंट का हाल बुरा इ राला . रेल सेवा बद्रीनाथ, गंगोत्री जमनोत्री तक ह्व़े जाली पण रेल जातरा सबसे मैंगी ह्वेली किलैकि ऐडवेंचरस टूरिज्म या सांसदार जात्रा की बडी पूच रालि. जन आज कवी रिसिकेस बिटेन केदारनाथ तलक घ्वाडा मा जात्रा कारो त वीं जात्रा तै सांसदार जातरा माने जांद उनि वै बगत रेल जातरा सांसदार जात्रा होलि. जात्रा ब्यौपार पर भैर देसूं क कब्जा ह्वालू. जौं गढ़वाल्युं आज जात्रा ब्यौपार चलणु च पण तब गढवळी ब्यौपार करण मा पूरा इ लुंज ह्व़े जाला त आज का गढ़वळि ब्यौपार्युं क पड्नाती/नई साखी होटलुं मा भांड कूंड ध्वाला, कुछ खाणक बि बणाला. टूरिज्म या जात्रा ब्यौपार मा एक बि गढ़वळि कुमाउनी मैनेजर नि दिख्यालु। कारण   खुज्याणो हर द्वि साल मा सरकारी कमिसन बैठल कि जातरा ब्यौपार संस्थानु मा गढ़वळि अर कुमाउनी मैनेजर किलै नि छन पण कै बि कमीसन तै कारणु अंत त पन्त नि मीललु . फिर याँ पर बि हर चार साल मा एक कमीसन बैठल कि कमिसनु तै कारण किलै नि मिलणा छन.

सरा गढवाळ कुमाऊं मा सोलर इनर्जी या ऊर्जा से काम चौलल पण सोलर इनर्जी घोर पिछड़ापन कि निसाणी माने जाली. ड्याराडूण मा अल्ट्रा इनर्जी से काम होलू अर यू कारण बि पलायन कु एक कारण होलु. भाभर क्षेत्र सफाचट गैर गढ़वळी अर गैर कुमाउनी क्षेत्र माने जालो अर कुमाउनी अर गढ़वळि अपण बच्चों तै लोक कथा सुणाला बल कबि भाभर कुमाउनी अर गढ़वळि जातिक छयो. याँ से कुमाउनी अर गढ़वळि हीन भावना से ग्रसित हूणा राला. ड्यारा डूण, नैनीताल अर मसूरी मा एक बि मकान पर कुमाउनी अर गढ़वळि कु कब्जा नि रालो अर कुमाउनी अर गढ़वळि अपण नौन्याळो तै लोक कथा सुणाला कि  कबि  ड्याराडूण, नैनीताल अर मसूरी कुमाउनी अर गढ़वळि यूँ आन अर शान कि निसाणि हुन्दा था.

              जगा जगा हर पन्द्यर , गदन  पर बाँध बौणि जाला अर यूँ बांधु क मालिक या त उत्तर प्रदेश सरकार, डिल्ली सरकार या ब्यौपारी होला अर उत्तराखंड सरकार यूँ मांगन पाणि क भीक मंगणि रालि.

    लोग बाग़ घड्यळ तबी बि धारल पण तब गाँ आणो जरुरत नि रालि वीडिओ कोन्फेरेंस से जगा जगा क लोग घड्यळ मा शामिल ह्वाला इलेक्ट्रोनिक ब्युंत से पूजा क चढावा चढ़ये जालो .  भारत का हौर गौं मा अल्ट्रा कम्युनिकेसन कु जाळ रालू त गढवाळ कुमाऊं मा मोडर्न कम्युनिकेसन सिस्टम रालू. मोडर्न कम्युनिकेसन सिस्टम सबसे घोर पिछड्यू इलाका क निसानी माने जालो. 

 रन्त रैबार, खबर सार या शैलवाणी अखबार राला पण दुसर रूप मा राला अर ओ पन्दरा अगस्तौ खुण इन ल्याखाल --

पिछ्ला सौ सालू मा जख गढ़वाळ कुमाऊं  मा दस गुणी प्रगति ह्वाई उख भारत मा बीस गुणी प्रगति ह्वाई. अर भैर देसूं मा पिछ्ला सौ सालुं मा हजार गुणी प्रगति ह्वाई. 

   गढवाली अर कुमाउनी भाषा  तै राज्य सरकारी भाषा क दर्जा मीलु जालो पण बुलण वाळ क्वी नि रालो किलैकि अंतरजातीय  ब्यौ तब आम ह्वालो अर खुदाना खास्ता एक गढवळी जब गढवळी से ब्यौ कारल त टाइम्स इंडिया मा बि समाचार आलो कि आज भारत मा एक अनहोनी ह्व़े कि एक गढवळी न हैंक गढवळी से ब्यौ कार.

Copyright@ Bhishma Kukreti 18/8/2012

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