Author Topic: Satire on various Social Issues - सामाजिक एवं विकास के मुद्दे और हास्य व्यंग्य  (Read 477652 times)

Bhishma Kukreti

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गढ़वाली हास्य व्यंग्य साहित्य


                           विलेज रिफौर्म याने ग्रामीण  आर्थिक उदारवाद 


                            चबोड्या - भीष्म कुकरेती 

    [आर्थिक  उदारवाद पर हास्य ,व्यंग्य;आर्थिक उदारवाद पर गढ़वाली हास्य ,व्यंग्य; आर्थिक उदारवाद पर उत्तराखंडी  हास्य ,व्यंग्य;आर्थिक उदारवाद पर मध्य हिमालयी भाषाई हास्य ,व्यंग्य; आर्थिक उदारवाद पर हिमालयी हास्य ,व्यंग्य;आर्थिक उदारवाद पर उत्तर भारितीय भाषाई हास्य ,व्यंग्य;आर्थिक उदारवाद पर भारतीय भाषाई हास्य ,व्यंग्य;आर्थिक उदारवाद पर दक्षिण एशियाई भाषाई हास्य ,व्यंग्य;आर्थिक उदारवाद पर एशियाई भाषाई हास्य ,व्यंग्य लेखमाला ]



  वैदिन रैजा का याने राजेन्द्र चचा जीक फोन आई," बल ये भीष्म ! तु बड़ो असुण्या  ह्व़े गे रे.मुंबई मा रैक बि तीन हम तैं विलेज रिफौर्म क बाराम  नि बताई.

मीन ब्वाल," काका मै तै शहरी सुधार  जाणदो पण ग्रामीण आर्थिक सुधार क बाराम कुछ नि जाणदु ."

काका न बोलि," हाँ अब तुम उन्ना देसी जी ह्व़े गेवां ."

मीन बोलि," नै काका तन बात नी च .."

काकान बोलि," अच्छा रौणि दे. उ त भलु ह्व़े कि हमर गाँ मा हमारो विधायक कु भणजु को एक उद्योगपति  दगड्या आई अर वैन बताई कि ग्रामीण सुधार से गौंक बड़ो भलो होलु. तब जैक हमारी समज मा आइ कि हम अन्ध्यर मा छ्या."

मीन हुंगारी  पूज," बढिया बात च ."

काकन ब्वाल," अर हमन  अपण सौब संजैत जंगळ वै उद्योगपति तै बेचीं देन ."

' मीन पूछ," क्या?"

" हाँ भै हाँ हमन सौब संजैत जंगळ बेचीं देन अर वै पैसान हमन एक बड़ो क्रिक्यट स्टेडियम बणै द्याई.बच्चों तै क्रिक्यट खिलणम  बड़ी परेशानी हुणि छे." काकान समजाई

***   ****  **

कुछ दिन  बाद फिर से रैजा काक फोन आई," अरे भीसम अब हमन ग्रामीण सुधार नीति क तहत अपुण सौब , गदन , रगड़-बगड़ अर जथगा बि पाणि क स्रोत्र छया सौब बेचीं ऐन"

मीन पूछ," क्या ?"

काकाक जबाब छौ," हाँ वु यार गाँ मा एक रिक्रियेसन  क्लब कि भारी जरूरत छे त वांक बान हमन सौब पाणि अर गाड गदन एक हैंको बड़ो उद्योगपति तै बेचीं देन . अब सरा गांवक लोक तुम शहरी लोगुं तरां एक दगड़ी बैठिक मजा से शराब कि चुस्की ल़े सकदन या ताश खेली सकदन "

*** *** **

कुछ दिन बाद काकाक फिर फोन आई," यार भीष्म ! ओ क्रिक्यट क्लब क देख रेख क बान पैसा कि जरूरत छे त हम अपण गांवक ज्वा बि संजैत जमीन छे वा जमीन एक बहुराष्ट्रीय विदेसी उद्योगपति मा बेचीं दे. अब हम तै दस साल तलक क्रिक्यट क्लब क देख रेख क बान पैसों जरुरत इ नि पोड़लि "

**** ****

कुछ दिन बाद फिर काकाक फोन आई," वु रिक्रेसियन क्लबो देख रेख क बान पैसों जरूरत छे त हमर अपण सौब संजैत बाटो एक हैंकि विदेसी कम्पनी तै बेचीं दे. "

****  **

कुछ दिन बाद काकाक फोन आई," ये भीष्म ! अरे मुंबई मा जरा हम बीस पचीस लोगुं कुणि नौकरी खुज्या भै !"

मीन ब्वाल," पण काका वो ग्रामीण आर्थिक सुधार से त तुम तै उखी रौण चएंद छौ."

काकाक न बथाई," अरे हमारि  जमीन, जंगळ , पाणी अर हवा पर यूँ उद्योगपतियुं को कब्जा ह्व़े ग्याई अर यि अब हमर  उठण, बैठण, चलण, लखड़ लाण ,  पाणी पीण  इक तलक कि साँस लीण पर बि टोल टैक्स लगाणा छन . अब हमर गाँ हमर नी च यि त योंको  इ ह्व़े ग्याई "

मीन सल्ला दे," त यूँ उद्योग  पतियुं क इख इ नौकरी कौरी ल्याओ "

" अरे हमन बि यूँ उद्योगपतियों कुण यि ब्वाल. पता च सब्यूँन क्या ब्वाल. ?"

"क्या?" मीन पूछ

" यि उद्योग पति बुलण लगिन बल जै  कौम तै अपण संसाधन कु  सही ढंग से इस्तेमाल करण नि आओ त वा कौम  नौकरी लैक बि नि होंदी. " काकान खुलासा कार 


 Copyright@ Bhishma Kukreti 5/9/2012


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गढ़वाली हास्य व्यंग्य साहित्य

चबोड़  इ चबोड़ मा, हौंस इ हौंस मा

 

            अमेरिकी पत्रकार डा. मनमोहन सिंग से किलै खिज्यां छन

 

                          भीष्म कुकरेती

  अच्काल साफ  लगणु च बल  अमेरिकी पत्रकार अर सम्पादक डा. मनमोहन सिंह से खिज्यां छन, पित्यां छन, परेशान छन, दुखी छन. इन लगणु च बल यि भारत का बड़ा दगड्या, भारत का बड़ा हितैसी अमेरिकी पत्रकार, भारत कु फायदा दिखण वळ अमेरिकी पत्रकार डा. मनमोहन सिंह की भारत मा आशा  क हिसाब से  विकास नि हूण से निरस्यां  छन . द्याखो ना यि भारत प्रेमी अमेरिकी पत्रकार कथगा गुस्सा छन बल भारत की जनता अबि बि विकास को उथगा मजा नी ले सकणि च जथगा या भारत के जनता हकदार च. तबी त यि भारत प्रेमी अमेरिकी पत्रकार भारत मा आशानुरूप  विकास नि होण पर अपण  समाचार पत्रुं  अर पत्रिकाओं मा डा. मनमोहन सिंह पर भगार लगाणा छन, मनमोहन सिंह तै गुंगो  , अकर्मण्य साबित करणा छन . अर पैल या इ कौम डा. मनमोहन सिंग का बड़ा मंगद  मंगद नि थकदि छे  . पन अब टाइम, इकोनोमिक्स अर वाशिंगटन पोस्ट जन पत्र पत्रिका डा. मन मोहन सिंह की काट करणा छन

            बात बि सै च भै अब द्याखो ना उख अमेरिका मा बिचारा वालमार्ट जन बड़ा बड़ा मौल वळा परेसान छन कि अमेरिकी अर्थ व्यवस्था सुदारणो बान भारत मा रिटेल मा फोरेन इन्वेस्टमेंट खुला ह्वाओ त भारत तै लूटे जाओ . अमेरिकी पत्रकार डा. मनमोहन सिंह से इलै नाराज छन कि अबि तलक डा. मनमोहन सिंह भारत का प्रधान मंत्री ह्वेक बि अमेरिकी खुरदरा  ब्यापारियों तै लुटणो मौका नि मिलणु च.   जब बि क्वी देस अमेरिकी आर्थिक स्वार्थ पूरक नीति नि लान्दो अमेरिकी पत्रकार हमेशा ही वे देस कि छाँछ छोल्दन,  , वै देस की नेतृत्व की मट्टी  पलीत करदन . दिख्यांद त इन च कि यी अमेरिकी पत्रकार बड़ा ही जणगरा छन पण असलियत या च कि यूँ तै ज्ञान गून, खोज, अन्वेषण  से कुछ लीण दीण नी च  यूंक त एकी खबत च कि कै बि तरां से हौरी देस अमेरिकी आर्थिक दसा मा सुधार लावन अर भड मा जाओ यूँ देसूं असली आर्थिक दसा . जब तलक अमेरिकी स्वार्थ पुरू होंद तब तलक बडै कारो अर अमेरिकी स्वार्थ पूरो नि ह्वाओ त वै देस कि ऐसी तैसी कारो.अमेरिकी पत्रकारुं म  एकी काम च कि  वै देस क नेता क छवि इथगा खराब कारो  कि वू देस अमेरिकी स्वार्थ पूर्ति क बान अमेरिका क गुलाम ह्व़े जाओ. अब यि पत्रकार मनमोहन सिंह की इथगा बेज्जती करणा छन त यूँ तै सत्यता या भारत मा भ्रष्ट तन्त्र कि इथगा रैणि नि पोड़ी बल्कण मा एकी दुःख च कि भारत तै  लुटणो मौका उथगा नि     मिलणु च बकै अफ्रीकी देसूं या एशियाई देसु मा मिल्दो.

  जब इ स्वार्थी अमेरिकी पत्रकार इराकी अधिनायक सदाम की अधिनायकवादी कामुं  काट करदन त यांको अर्थ यो नि होंद की या अमेरिकी पत्रकार कौम अधिनायकवाद कु विरुद्ध च बल्कण मा असली अर्थ होंद कि सदाम अब अमेरिकी स्वार्थ पूर्ति मा एक बड़ो गौळ च  .
 
यि बुलणो  मानव हितैसी अमेरिकी पत्रकार नरेंद्र मोदी क मानव अधिकार विरोधी  कथा लगाण मा नि थकदन पन बेशर्मी कि हद त या च कि कम्बोडिया , ईराक, जन जगा मा जु मानव हत्या अमेरिका न करी वांकी बात यि बिसरी गेन. अपण पूठ पर लग्युं गू त यूँ अमेरिकी  पत्रकारूं  तै नि दिख्यांद पण दुसरो गू खूब दिखेंद.

 जब यि अमेरिकी पत्रकार इन लिखदन कि अलण अफ्रीकी देस मा अब आर्थिक स्तिथि ठीक हूण वाळ च त यांको साफ साफ अर्थ हूंद कि अब यू देस अमेरिकी स्वार्थ पूर्ति लैक ह्व़े ग्याई.

जब यि अमेरिकी पत्रकार लिखदन कि फलण अफ्रीकी देस मा आर्थिक स्तिथि ठीक नी च त यांको यू अर्थ हूंद कि यू फलण देस अमेरिकी स्वार्थ पूर्ति मा अड़न्गा लगाणु च.

जब तलक बिन लादेन अमेरिकी स्वार्थ पूर्ति क पुर्जा बण्यु राई तब तलक यूँ अमेरिकी पत्रकारूं कुणि  बिन लादेन से बढिया  धार्मिक मनिख क्वी नि छौ पण  जनि बिन लादेन न अमेरिकी स्वार्थ पूर्ति छ्वाड यूँ पत्रकारूं  कुण बिन लादेन एक भयंकर  रागस ह्व़े ग्याई .

  यि अमेरिकी पत्रकार बुरु मनणा छन, चिरड्या  छन  कि अबि तलक हमारो सम्बन्ध  इरान क दगड मधुर किलै छन  अर चाणा छन कि हम  इरान दगड कुट्टी  किलै नि करणा छंवां अर  हमारो इरान से जमानो से समंध च त क्या हम ये सम्बन्ध तै इनी सुदि अमेरिकी धौंस से डौरिक तोड़ी द्यूंवां क्या?  हम इरान क सम्बन्ध का बारा मा अमेरिकी धौंस मा नि आणा छंवां त तताकथित निष्पक्ष अमेरिकी पत्रकार हमारो प्रधान मंत्री क छीछ्लेदारी करणा छन. यूँ अमेरकी पत्रकारूं  तै मिर्च लगीं च कि हम अमेरिकी धौंसबाजी से अबि नि डरणा छंवां अर फिर यि हमारि छवि खराब करणा छन.
 
  यि अमेरिकी पत्रकार हम से इलै चिरड्या छन कि न्यूक्लियर पावर मा हम रूस की किलै मदद लिंदा अर अमेरिकी स्वार्थ पूरक न्यूक्लियर नीति तै किलै नि माणदवां बस यि तताकथित ग्यानी अर अन्वेषक अमेरिकी  पत्रकार हमारो प्रधान मंत्री पर भगार लगाणा छन.   
 
इनी कथगा इ बात छन जु हम हिन्दुस्तानी अमेरिकी जाळ म नि फसण चाँदवां अर याँ से यि अमेरिकी स्वार्थ पूर्ति  का अग्ल्यारि अमेरिकी पत्रकार  हमारि प्रधान मंत्री क नाम से भारत कि छवि खराब करणा छन अर हम पर एक दबाब लाण चाणा छन कि हम अमेरिका तै अपण सै गुसै  मानवां .
 
  यूँ अमेरिकी पत्रकारूं तै समजण  चएंद  कि  हम भारतीय भितर अपण आपस मा कथगा बि लड़ी ल्योला पण आज हम समजी गेवां कि जब हमारि इज्जत अर सार्भौमिकता पर क्वी  भैर वाळ ख़चांग लगालु त हम भारतीय एक ह्वेक वैको जबाब इनी द्योला जन ईंट कु जबाब पत्थर से दिए जांद .
 
 Copyright@ Bhishma Kukreti 6/9/2012

 

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चबोड़  इ चबोड़ मा, हौंस इ हौंस मा

 

                                    कौन बनेगा करोडपति ?

 

                                    चबोड्या- भीष्म कुकरेती

 

             अमिताभ बच्चन अर जु बि 'कौन बनेगा करोडपति' प्रोग्रैम का कारोबारी  छन सब फोकट की बात करणा छन. अब बथाओ जनता तै सिखाणा छन बल ज्ञान से इ सब कुछ होंद. अर फिर करोडपति बणाणो बान यि लोग कथगा मेनत करवांदन , एस.एम्.एस कारो फिर फोन पर इ चिपक्याँ राओ अर फिर सवालूं जबाब द्याओ तब जैक ' 'कौन बनेगा करोडपति' वळ तुम तै बुलाला फिर वी सवाल जबाब अर फिर  लाखों क्या करोड़ों मांगन एक कवी करोडपति बौणल. कैन करणाइ  इथगा मेनत. मीन त नि करणाइ इथगा मेनत .
 
                ज्ञान कि बात च त मै तै अब ज्ञान ह्व़े ग्याई कि मी तै करोडपति बणणो बान अमिताब बच्चन कि क्वी जरोरात इ नी च . अमिताब बच्चन से मिलण इ ह्वाओ त मी करोडपति बणणो बाद मीलि जौलु  !

  अर म्यार दिमाग खराब हुयुं च जु मी अमिताभ बच्चन क प्रोग्रैम मा जौं अर इथगा खटकरम कुरु अर फिर ..
 
    अब अमिताभ बच्चन ज्ञान कि बात करणा छन त म्यरो ज्ञान बुल्दो कि करोडपति बणणो बान क्वी हौरी  विशिष्ठ  व्यक्तियुं या दिवतौं पूजा जादा फैदामन्द च बनिस्पत ये बेकार कु प्रोग्रैम मा भाग लीणो कु.

             अरे मै तै करोडपति बणणो गुर इ सिखण त मि सन १९५१ कु मुदगल केस, सां १९५७-५८ कु मुंदडा डील या मालवीय -सिरजा उद्दीन  केस कि फाइल नि पढ़लु जु मै बथाला कि कनै बगैर कुछ कर्याँ कन कैक करोड़ पति बणे सक्यांद     
 
  अब जब मी तै करोडपति इ बणण ह्वाओ त मि पंजाब का मुख्यमंत्री भग्यान प्रताप सिंह कैरो कि आत्मकथा नि बंचलु . जैन भारत्वास्युं तै सिखाई कि कन कैक सौंग ब्युंत से करोडपति बणे जांद अर कैरों क ब्यूंत इथगा अस्कारी छन कि  जवाहर लाल नेहरु सरीखा नेता बि कैरों क कुछ नि करी सकदा छ्या. त मि तै बौळया कुकरन काट्यु च कि अमिताभ बच्चन कि सला मानु अर मेनत का बल पर करोडपति बौणु. जब भग्यान कैरों हम तै सौंग रस्ता ब तै गेन त मि त वै रस्ता पर चललु कि ना जु करोडपति बणणो बान भौति सौंग ह्वाऊ ?
 
   अर उन करोडपति बणणो कुछ कुछ  टुटब्याग मि भग्यान बीजू पटनायक क जीवनी  से बि सीखि ल्योलु. 

  मेखुण त जवाहर लाल नेहरु भगवान् छन जौन यूँ कोंग्रेसी भ्रष्टाचार का पुजार्युं तै माफ़ कार अर अब मीमा यूंक जीवनी च जां से मि बि सरल तरीकों से करोडपति बणणो गुर सीखी  सकुद.  जै हो पंडित जवाहर लाल जी की!  तुम यूँ तै माफ नि करदा छा त में सरीखा मनिख मा करोड़ पति बणणो इच्छा कन कैक पैदा होंदी. नेहरु जी आप धन्य छन.

     मि त इंदिरा गांधी जी क बड़ो भगत छौं . रोज देवी लक्ष्मी अर इंदिरा गांधी की मि पूजा दगड़ी करदु. अब नागरवाला केस को इतिहास पढ़न से  मै तै बड़ो जोश आन्द की कन टुटब्यागुं अर दैवीय प्रदत्त  कुकर्मो से  क्वी बि करोड़पति बौण सकदु. हे भष्ट तरीकों की पोषक देवी इंदिरा जी  त्वे तै सत सत प्रणाम .
 
  अर उ बोफोर्स  रण भूत  कि पूजा बि आप  अर मै तै करोड़ पति बणै सकदी त क्या जरोरत च पसीना बगाण से . 

  मि त  भग्यान नर सिम्हा  राव की बि पूजा रोज  दिन मा करूद  अर बाबा नर सिम्हा  राव क प्रतीक चिन्ह  'सूटकेस' तै मा  सरस्वती  हंस जन समजदो. सूटकेस अर नर सिम्हा राव जी  मै तै हर घड़ी  याद दिलान्दन की दुनिया मा मेनत से पैसा नि कमाण चएंद पन लम्पट गिरी इ पैसा कमाणो  सबसे उत्तम पथ च. फिर मि नर सिम्हा राव क नौन्यालुं करतबों तै रोज याद करदु की ईं दुनिया  मा जब बि बाबु बड़ो असरदार र ओहदा मा बैठो ना कि अरबों रूप्या कमाणो छंद अपणो  आप ऐ जांद..  मौनी बाबा नर सिम्हा राव अर ऊंका प्रतीक चिन्ह सूटकेस तै रोज दिन मा सुमरिण करण से आदिम मा  करोड़ पति बणणो सुगम रीति अफिक ऐ जान्दन. मौनी बाबा  नर सिम्हा क दगड दाड़ी वळ दिवता शिबू सरीन, स्टौक  मार्केट कु दिवता हर्षद मेहता अर हौरी किकबैक दिवतौं क सुमरिण जरूरी होन्दन त मि यूँ कि बि पूजा करदु.
 
   भारत मा अब तेतीस करोड़ किकबैक देवी दिवता ह्व़े गेन .यूँ दिवतौं मा जौर्ज  फर्नाडीज, लैला कबीर, जया जेटली,  बंगारू लक्ष्मण , जया ललिता. करुणा निधि क नौनि-नौन्याळ, यदुरप्पा, अशोक चौहाण, ए.राजा, कलमाड़ी, आदि आदि मुख्य दिवता माने जान्दन .   अर अब मि जगवाळ मा छौं कि कोयला खदानों अर हैड्रो इलेक्ट्रिक को बांधों से बि हजारों किकबैकी दिवता अवतरित हूण वाळ छन. मि त यूँ किकबैकी दिवतौं क फोटो कि पूजा रोज करदु. . 
 
  चूंकि इथगा करोड़ो दिवतौं पूजा करण  मै  सरीखा आम मनिखो कुण कठण च त कपिल सिब्बल अर अरुण जेटली क बुल्युं पर चलणु छौं .कपिल सिब्बल अर अरुण जेटली क आज्ञानुसार मि अच्काल करोडपति बणणो बान हर मैना औंसी (आमाव्स्य) क रात बरा बजि 'असत्य नारायण दिवता' क  पूजा करदु. कुतर्क  शाश्त्र का प्रखर आचार्य  कपिल सिब्बल अर कुतर्क शाश्त्र का महा विज्ञानी  अरुण जेटली क आख्यानो से पता चौल कि 'मैना मा एक दिन 'असत्य नारायण ' कि पूजा कारो त सभी किकबैकी दिवतों की पूजा अफिक ह्व़े जांदी. 'असत्य नारायण पूजा' का प्रसिद्ध व्याखाकर / टिपणीकार  मनीष तिवारी अर रवि शंकर प्रसाद सिंग न बि यो इ बताई कि जो बि भेंट आप 'असत्य नारायण ' क ठौ मा धारो वा त भेंट अफिक तेतीस करोड़ किकबैकी दिवतौं मा पौंछि  जांद.

  त मि अमिताभ बच्चन जी से गुजारिस करणु छौं कि मि त अब  असत्य नारायण भगवान कु भक्त बणि ग्यों त आप मेरो भरवस नि रैन कि मि आपक प्रोग्रैम मा भाग ल्यूं.

जै असत्य नारायण की ! जौं कि  भक्ति  मै तै अफिक करोड़ पति बणालि .

 

 Copyright@ Bhishma Kukreti  7/9/2012 

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गढ़वाली हास्य व्यंग्य साहित्य

चबोड़  इ चबोड़ मा, हौंस इ हौंस मा

                     चला गैरसैण मा पिकनिक मनौला !

 

                        चबोड्या- भीष्म कुकरेती


 [ गैरसैण पर  हास्य व्यंग्य; गैरसैण पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य;गैरसैण पर उत्तराखंडी  हास्य व्यंग्य;गैरसैण पर मध्य हिमालयी हास्य व्यंग्य;गैरसैण पर हिमालयी हास्य व्यंग्य;गैरसैण पर उत्तर भारतीय हास्य व्यंग्य;गैरसैण पर भारतीय हास्य व्यंग्य;गैरसैण पर भारतीय उप महाद्वीपीय  हास्य व्यंग्य;गैरसैण पर दक्षिण एशियाई हास्य व्यंग्य;गैरसैण पर एशियाई  हास्य व्यंग्य]


- ह्यां मीन ब्वाल, मंत्री जी ! सुणणा छंवां !

- अरे टौमी की ब्व़े ! अब कै  कैक जी सूणु  ! हाई कमांड कि सूणु , मुख्यमंत्री क सूणु , विपक्षियुं सूणु , जनता क सूणु या ब्यापारियुं क सूणु या तेरी ?
 
- ह्यां पर टौमी क बुबा जी ! तुमि  त बुलणा छया बल हाई कमांड जादा नि सुणाओ का बान तुमन चापलूसी अर मखनबाजी क परमानेंट लेप लगायुं च अर कबि कबि पार्टी छोड़णो  धमकी क गोळि  बि तुम खांद इ छंवां .

- टौमी क ब्व़े फिर बि कबि कबि यि चापलूसी का लेप अर धमकी क गोळि बि आउटडेटेड ह्व़े जान्दन भै !
 
- पण मंत्री जी अर आपन मुख्यमंत्री जादा नि सुणाओ  क बान छै एम्.एल.ए यूँ पैरायीं  रखड़ी बि त पैरीं च. विपक्षियुं क बान तुमन  घात प्रतिघात का  कुखुड़ मार्यां इ छन अर फिर घाट-प्रतिघात का कुखुड़ मारणा इ रौंदवां .

 -हाँ पर !

- अर जनता क रूणो - किराट, ऐड़ाट भुभ्याट नि सुण्याओ त  तुमन अपण कंदुड़ो पर लोखारो कनपट्टा ल्गायाँ इ छन फिर क्यांक मै फर इथगा जोर से रुस्याणा छंवां  ?

- अच्छा अछा ! क्या बुलणि छे, चौड़ बोल . मीम टैम नी च . ओ विधान सभा क सेसन गैरसैण मा हूणु च वांकी तैयारी मा लग्युं छौं .
 
- ह्यां भलो ह्वाई मीन बि  त गैरसैणै बात इ करण  छे.

- हैं ! मंत्री क कज्याण्यु   तैं  गैरसैण से क्या लीण दीण ?

- हाँ उ ठीक च कि हमर भान गैरसैण क्या कखी बि बजुर पोड़ जैन धौं !  पण वु क्या च कि

- अरे भै चौड़ बोल मी मा टैम नि च .मीन एक पहाड़ी औरतुं सम्बन्धी मीटिंग मा जाण

- हाँ त मी बुलणु छौ बल हम मंत्र्युं अर कुछ विधायकूं कज्याण्युन निर्णय ले कि हम बि गैरसैण दिखणो जौंला

- ओहो पण तुमन क्या करण उख ?

- उ क्या च कि जरा दिखदां कि गढ़वाली अर कुमाऊं का पहाड़ क्या हुन्दन .कन खड़ा रौंदन इ कुमाऊं अर गढवाल का पहाड़

- पण तु त पहाड़ का नाम से इ चिरडे जांदी छे.

- हाँ पण कबि कबि बडी बेज्जती  ह्व़े जांदी जब कवी मैदानी मंत्री क कज्याण पुछदी कि मी पहाड़ी मंत्री क वाइफ छौं त जरा पहाड़ क बारा मा कुछ बतौं .अर मै तै पहाड़ क बारा मा अ ब स बि ज्ञान नि छ.

- या त भली बात च कि तुम लोग पहाड़ का ज्ञान का खातिर गैरसैण जाण चाणा छंवां 

- धत्त ! हम गैरसैण पहाड़ का ज्ञान क बान थुका जाणा छंवां. हम त पिकनिक मनाणा  जाणा छंवां . पिकनिक क दगड्या दगड़  पहाड़ क्या हुन्दन यि बि देखी ल्योला

- क्या क्या प्लान च पिकनिक का बारा मा ?

-पैल त हम ख़ास  ख़ास जगा मा वीडियोग्रैफी करौंला  अर फिर वोमन पत्रिकाओं मा लेख छपवोंला

- फिर हमन उख द्वी किटि  पार्टी बि उरायीं छन .

-इंट्रेस्टिंग ! किटि पार्टी मा क्या प्रोग्रैम छन  ?

- पैलाक दिन त बस ताश पार्टी च . हाँ दुसर दिन हमन उख स्पेनी खाणक बणवान .

- पण गैरसैण मा स्पेनी खाणक बणाण वळ कख मीलल ?

- नै नै हमन दिल्ली क एक पिकनिक सर्विस कम्पनी तै ऑर्डर दि आल.

- अरे वाह यू त भौत इ बढिया प्रोग्रैम च

- अर अलग अलग रात्यूं कुण   हमन संगीत प्रोग्रैम धर्याँ छन

- एक रात अफ्रीकी जाज संगीत संध्या , हैंकि रात रसियन बैले  डांस अर म्यूजिक अर तिसरी  रात आयरिश फोक म्यूजिक अर डांस कु प्रोग्रैम च

 - अर यांको इंतजाम ?

- दिल्ली क एक प्रसिद्ध इवेंट मैनेजमेंट कम्पनी यि सौब इंतजाम कौरली

- पण क्वी गढ़वाली अर कुमाउनी फोक म्यूजिक ..?

- तुम बि ना अबि बि गुफा मनुष्य क  ज़माना मा छंवां . मुख्य मंत्री क कज्याणि ठीकि बुलणि छे क्या धर्युं च वै पहाड़ी म्यूजिक मा .वींक बुलण सै च कि हम तै विदेसी म्यूजिक अर डांस कु ज्ञान जरुरी च

-अर फिर तीसर दिन मा ?

- वै दिन हम एक वार्ता करला. वार्ता क विषय च ' पहाड़ी औरतों की पीड़ा'

- त तुम लोगुं न उखाकी जनन्यु दगड संपर्क कौरी याल कि ना ?

- तुमर बि दिमाग खराब हु यूँ च . हम मंत्र्याणियूँ क इख ड्याराडूण  मा इके दु दु स्त्री सम्बंधित संस्था त खुल्यां छन ऊँ मादे द्वी चार अच्छा स्पीकर ली  जौंला . यू प्रोग्राम त हमन टैम काटणो खातिर धार. हम तै बोरियत नि आओ त यांक बान यू प्रोग्राम धार.

- अर हौरी क्या क्या च ?

- बस तीनि दिन त हमन गैरसैण मा पिकनिक मनाण . चौथो दिन हम इना ऐ जौंला . ये मेरी ब्व़े मीन त ब्यूटी क्लिनिक बि जाण . मी त जांदो  छौं

- ये मेरी ब्व़े ! मीन त अबि 'पहाड़ो में औरतों के लिए कामगार शिक्षा ' क प्रोग्रैम मा जाण


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 गैरसैण पर हास्य व्यंग्य; गैरसैण पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य;गैरसैण पर उत्तराखंडी हास्य व्यंग्य;गैरसैण पर मध्य हिमालयी हास्य व्यंग्य;गैरसैण पर हिमालयी हास्य व्यंग्य;गैरसैण पर उत्तर भारतीय हास्य व्यंग्य;गैरसैण पर भारतीय हास्य व्यंग्य;गैरसैण पर भारतीय उप महाद्वीपीय हास्य व्यंग्य;गैरसैण पर दक्षिण एशियाई हास्य व्यंग्य;गैरसैण पर एशियाई हास्य व्यंग्य  जारी  ..

Bhishma Kukreti

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गढ़वाली हास्य व्यंग्य साहित्य

चबोड़  इ चबोड़ मा, हौंस इ हौंस मा

 

                              'पहाड़ों में राज्य  कृषि नीति' की  फाइल चोरि  हूण

 

                                            चबोड्या- भीष्म कुकरेती


                  आजि क्वी मुंड मुंड्याओ अर ढांड पोड़ी जावन त क्या ह्वालु. लोगुं तै बौगाणो, लोगु तै पुळयाणो बान  त मुख्यमंत्री न विधान सभा एक दिनों  सत्र  गैरसैण म धार अर बजर पोड़ी ग्याई. बजर सरकारी  पक्षौ कुण पोड़ , विपक्षौ   कुण त कवों बान घीयक घौड़ फूटि  ग्याई . गैरसैण मा सुबेर सुबेर क्या सरकारी क्या विरोधी पक्षों नेता  बगैर चिनि क या चिनि क चा घटकाणा यि छ्या कि बजर पोड़ी ग्याई . बजर कु असर यू ह्वाई कि सरकारी दल गस खैक भ्युं पोड़ी गे अर विपक्षी दल  मर्खुड्या सांडो जन डुन्करताळि मरण मिसे ग्याई  . विपक्षी सदस्यों क डुन्करताळि से गैरसैण इ  नि गज बल्क न मा ड्याराडूण अर डिल्ली क राजनैतिक डिन्ड्याळो मा बि अग्यौ  ह्व़े ग्याई. विपक्षी दल वळुन गुस्सा मा या स्वांग बस सांद जन एम्.एल.ए होस्टल को म्याळ खौण

त सरकारी दल क सदस्यों क अन्स्दार्युं से गैरसैण मा गाड गदन मा भळक ऐ गेन याने बाढ़ ऐ गे.

         एक दिनौ विधान सभा सत्रन क्या चलण छौ. विधान सभा मा अचकालौ सामयिक रिवाजौ जन इ   विपक्षी दल मुख्यमंत्री गद्दी छोड़े   क नारा लगाणा छया अर राजकीय दल किराणु छौ यां पर बहस कारो पण अचकालौ राजनैतिक रिवाजौ आदर करदा विपक्षियों न विधान सभा नि चलण द्याई. विधान सभा सत्र अनिशिचित काल  कुणि स्थगित ह्व़े ग्याई. संसद या विधान सभा नि चलण दीण अच्काल नयो फैशन या रिवाज च त कै बि राजनीतक आदिम तै क्वी शरम लाज नि आई. 

                अर ह्व़े कुछ नि छौ  बस सुबेर सुबेर एक भौ कखाकु एक अनामी साप्ताहिक क सम्पादक न अफिक अपुण अखबार गैरसैणम बाँट .  अखब़ारै   खबर छे कि 'उत्तराखंड कृषि विभाग से "पहाड़ों में राज्य कृषि नीति" की फाइल चोरी हो गयी है'.  बस सरकारी पक्षौ कुण बजर पोड़ी गे अर विपक्ष्युं कुणि घीयक घौड़ फुटि गे.

             उन मुख्यमंत्री अर कृषि मंत्री  न सुबेरी इ फोन पर पता लगै आल छौ कि सचेकि कृषि मंत्रालय से 'पहाड़ों में राज्य   कृषि नीति' क फाइल चोरि ह्व़े ग्याई. अच्काल संवाददाता बि विरोधी  दल कि भूमिका निभान्दन त मुख्यमंत्री अर कृषि मंत्री न संवाददाता सम्मलेन मा ब्वाल कि हम जानकारी हासिल करणा छंवां कि असलियत क्या च  जांको साफ़ मतबल छौ कि सचेकि  'पहाड़ों में राज्य कृषि नीति" फाइल गुम ह्व़े ग्याई अर अबि तलक कुछ बि सूद भेद नि मिलणु च .

           उख ड्याराडूण मा पलटन बजार अर रिस्पेना पुलिस चौकी मा 'पहाड़ों में राज्य कृषि नीति' फाइल चोरि क रपट लिखाए गे अर द्वी कोतवालुं न अजाण लोगुं पर  जेबकतरा, उठाईगिरी, चोरि-जारि, डकैती, लूटमार, छीनाझपटी, जबरन कैकि सम्पति तै लुटण,  कैकि जायजाद पर जबरन हक जताण, सरकारी सम्पति क नुकसान जन आदि  आदि  अभियोग  लगाये गेन. द्वी कोतवाल घंघतोळ मा  छ्या कि  कखि   'पहाड़ों में राज्य कृषि नीति' की फाइल कै राजनैतिग्य मा मी लि    त अखब़ारूं  हेडिंग होलि ' राज्नेतिग्य  अब जेबकतरा, लुटेरा, उठाईगीर, चोर, डकैत, जबरन दुसरो जैजाद पर हक जमाण वळ,  सरकारी सम्पति पर मालिकाना  हक जमाण वळ  ही ह्व़े गेन. अर द्वी कोतवालुं न स्वाच बल जु 'पहाड़ों में राज्य कृषि नीति' कि  फाइल कै अधिकारी या सरकारी कारिन्दा मा मील त अख्बारुन लिख न बल अब सरकारी कर्मचारी जेबकतरा, लुटेरा, उठाईगीर, चोर, डकैत, जबरन दुसरो जैजाद पर हक जमाण वळ, सरकारी सम्पति पर मालिकाना हक जमाण वळ ही ह्व़े गेन.

       इना सरकारी अर अधिकारी स्तर पर 'पहाड़ों में राज्य कृषि नीति' की फाइल कि खुज्या खोज ह्वाई पण कुनगस जु 'पहाड़ों में राज्य कृषि नीति' की फाइल क जूं बरोबर भी सूद भेद मीलि ह्वाऊ धौं. अर इना उत्तराखंड मा भ्युंचळ अयुं  छौ कि  'पहाड़ों में राज्य कृषि नीति' की फाइल क गुम हूणो सबूत च कि उत्तराखंड सरकार पहाड़ों क प्रति हद से जादा उदासीन च. विपक्षी दल कि  हुकां - हुकां , डुन्करताळि  पहाड़ो क घ्वीड़ काखड़ो चान्ठो अर रिक बागु उड़्यार तक पौंची गे अर रिक बाग़, घ्वीड़ काखड़ बि मुख्यमंत्री पर पहाड़ों की अनदेखी को अभियोग लगाण बिसे गेन  अर क्या  गू णि बांदर ! क्या चखुल सब्युंक एकी राय छे कि मुख्यमंत्री तै इस्तीफा दीणि चयेंद. बस मुख्यमंत्री न जगता सगती मा एक एक मनिखि आयोग गठन करी दे जु 'पहाड़ों में राज्य कृषि नीति' की फाइल खुज्यालु. मुख्यमंत्री क ददा क एक बड़ो सौकार  जजमान छौ अर वै सौकारो  नाती डा. बलबीर सिंह रावत अबि  कुछ दिन पैल कृषि विभाग से रिटायर ह्व़े छौ. बामण कथगा बि बड़ो राजा ह्व़े जाओ उ अपण ख़ास ख़ास जजमानु तै नि बिसरदो अर जजमान कथगा बि जातीय  व्यवस्था तै गाळि  द्याओ वु अपण कुल गुरु या बामणो बात नि टाळदो . बस डा. बलबीर सिंग रावत 'पहाड़ों में राज्य कृषि नीति' की फाइल खुज्याओ आयोग  का सर्वे सर्वा बौणि गेन अर चालीस  दिन की रात दिन की मेनत से

 डा. रावत न 'पहाड़ों में राज्य कृषि नीति' की फाइल चोरी क राज पता लगाई दे.

  डा. रावत मुख्यमंत्री मा गेन अर 'पहाड़ों में राज्य कृषि नीति' की फाइल चोरी क राज ख्वाल . राज जाणिक मुख्यमंत्री बेहोस ह्व़े गेन .

होश मा आण पर मुख्यमंत्री न पूछ , "डा. रावत आपक बुलण च कि 'पहाड़ों में राज्य कृषि नीति' की फाइल आज तक बौणि इ नी च "

डा. रावत न उत्साहित ह्वेक ब्वाल," जी हाँ ! मुख्यमंत्री  जी ! 'पहाड़ों में राज्य कृषि नीति' की फाइल  तबि बौणलि जब पहाड़ो मा  कृषि पर क्वी नीति बौणलि ."

मुख्यमंत्री न अचकचै  क पूछ, "  मतलब आज तक उत्तराखंड राज्य बणण पर 'पहाड़ों में राज्य कृषि नीति' बौणि नी च "

डा. रावत न ब्वाल, " जी हाँ कबि बि पहाड़ों मा कृषि बारा मा  पर सुच्याई नी च त कृषि नीति  क बात  क्या बात करण "

"मतबल कै बि मुख्यमंत्री क काल मा पहाड़ों मा  कृषि बारा मा सुच्याई नी च ?" मुख्यमंत्री न खौंळे क पूछ.

" जी सोळ अन सच च कि उत्तराखंड राज्य बणणो बाद कबि बि .पहाड़ों मा कृषि बाबत अधिकारी स्तर की बात त  छ्वाड़ो चपड़ासी स्तर पर  बि चर्चा नि ह्वेई " डा. रावत न अपण खोज कु खुलासा कार .

मुख्यमंत्री  न  पूछ ," पण  इख  त उत्तर  प्रदेश  सरकार से उत्तराखंड बाबत  फाइल  ट्रांसफर ह्वेक ऐन ऊं मा त कवी फाइल पहाड़ो मा कृषि बाबत रैइ ह्वेली ?"

डा रावत न भेद ख्वाल," मी लखनऊ बि ग्यों अर मीन सन बावन से सौब फाइल खुजेन  कखि  बि यू नि दिख्याई कि पहाड़ो मा कृषि पर क्वी अलग से बात ह्व़े होली. इख तलक कि मीन ब्रिटिश काल मा सन छतीस का करीब सिविल सरकार का काम काजु जांच बि कार  त कखि बि पहाड़ो मा विशेष कृषि नीति क बात ह्वाई नी च ."

"चलो यू भलो ह्वाई कि 'पहाड़ों में राज्य कृषि नीति' क फाइल  चोरी नि ह्वाई ." मुख्यमंत्री न पुळेक ब्वाल

डा. रावत न ब्वाल," त अब आप मीडिया तै बतैल्या कि ज्वा फाइल इ नी छे वींन चोरी कनकैक हूण छौ? ."

मुख्यमंत्री न बोली," दिमाग खराब हुयुं च म्यार जु मि ये गुवाक  ठुपर उठौलु . जब मीडिया अर जनता तै पता चौलल कि फाइल नि छे त मै पर दबाब पोड़ल कि उत्तराखंड  मा पहाड़ो मा कृषि बाबत काम अब त शुरू कारो. जब आज तक कैन  'पहाड़ों मा  कृषि  पर नि स्वाच त मि जि  किलै  अफुखुण आफत बुलौं  कि ये कठण काम शुरू कौरु .जन चलणु च चलण द्याओ ."

 डा. रावत न घंघतोळ मा पूछ," त ?"

मुख्यमंत्री क जबाब छौ,' 'पहाड़ों में राज्य कृषि नीति' पर जख्या भंगुल  जमण द्याओ अर आप 'पहाड़ों में राज्य कृषि नीति' फाइल खुज्याणो काम तब तलक जारी राखो  जब तलक मि मुख्यमंत्री छौं ."


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गढ़वाली हास्य व्यंग्य साहित्य

चबोड़  इ चबोड़ मा, हौंस इ हौंस मा

                               आवा प्रवास्युं तै चट्टेलिक गाळि द्योंला

 

                               चबोड्या- भीष्म कुकरेती

 

 गढ़वाळौ  साहित्यकार -  अहा भैजी ! आप त मुंबई मा सुबेर सुबेर ब्रेड बटर, फ्रूट जूस पीणै ह्वेला हैं ?

प्रवासी गढ़वळि  साहित्यकार- ओ गाँ बिटेन त्यार फोन इथगा सुबेर ! सुबेर हाँ भुला ! आज कुछ इनि सज ह्व़े कि नक्वळ मा रुटि भुजी नि  बौणि . म्यार त  यि ब्रेड बटर गौळम बि नि जान्दन पण क्या कौरूं ..बोल नै खबर क्या च ?

ग.साहि- बस आज मीन प्रवास्युं क इन मौणि तोड़ कि क्या बुन . ल्या सूणो हाँ कनो मीन कविता माध्यम से प्रवास्युं क खाण पीण पर  भयंकर कटाक्ष कार . अफु सि प्रवासी  खान्दन ब्रेड-बटर  अर मी खांदो चूनो रुटि.. अफु सि खान्दन चाओ माओ अर इख मि  खांदो च्यूंउ  ..

पर. साहि .- अरे भुला ! प्रवास्युं क बड़ी काट करी भै तीन ईं कविता मा  . तीन कविता मा प्रवास्युं तै खूब धधोड़ द्याई  भै

ग.साहि- हेमवती नंदन  भट्ट बि क्या याद कारल कि वै से बि जादा मि प्रवास्युं तै धधोड़ सकुदु .  बेशर्मी  से प्रवासी गढ़वाळि संस्कृति अर खान पान छुड़णा छन त मै सरीखा संवेदनशील अर  भावुक कवि तै गुस्सा आलो कि ना ?

प्र. साहि- अच्छा !

ग.साहि - अब म्यार एक नाटक का कुछ अंश सूणो हाँ . प्रवासी अपण खन्द्वार हुयूँ कूड दिखदु अर फिर ... प्रवासी ... प्रवासी गढ़वाळि बुल्दु- अब कथगा गाळि खौंलु मि -- प्रवासी ...

प्र.साहि -  इ क्या भै ! तीन त नाटक मा प्रवासी क छांच छोळि दे भै ! 

ग. साहि - हां यु गिरिश सुंदरियाळ  बि क्या याद कारल कि वै से बड़ो नाटककार पैदा ह्व़े गे जु नाटक को माध्यम से प्रवास्युं पर बडी बडी से भगार  लगै सकुदु

प्र. साहि- यू नाटक  तीन गिरीश सुंदरियाळ क देखा देखि ल्याख.

ग.साहि -  हाँ भैजी, अरे कवि सम्मेलन मा सौब गिरीशौ लिख्युं 'असगार' नाटकौ  बडे करणा छया त मीन बि सोचि कि चलो पर्वास्यूं क छांच छोळण मा  ले सै गिरीश तै पछाडे जाओ .

प्र. साहि- चलो बढिया च नाटक विधा मा गढ़वाळि साहित्यकारों बीच  प्रतियोगिता चलण बिसे ग्याई.अब प्रवास्युं की आलोचना मा ही सै !

ग.साहि- अरे भैजी यू त कुछ बि नी च  . मीन एक कहानी बि ल्याख .

प्र.साहि- अच्छा ! अब तू  कथा साहित्य मा बि ऐ गे ?   

ग.साहि - हाँ. अर या मेरी पैलि कहानी च . कुछ वाक्य सूणो हाँ ! प्रवासी अब अपणि धरती बिसरी गेन... प्रवासी अपणि मै बैण्यु आदर नि करदन... प्रवासी अपण गढ़वाळ मा बस्यां भै बंधों बात नि माणदन.... प्रावासी अब  अब अपण काका बोडो खुणि मन्योडर नि भेजदन ... प्रवासी बिलंच .. प्रवासी घमंडी ह्व़े गेन... प्रवासी गाँ बिटेन अयाँ लोगूँ कि  सहायता नि करदन .. प्रवासी शराब पीन्दन.. प्रवासी शिकार खान्दन.. प्रवासी सिनेमा जान्दन.. प्रवासी छुट्यु  मा घुमणो खूब जान्दन अर गाँ वळु खुण गाँवक भलै क बान कम चंदा भिजदन. प्रवासी अपण नौन्याळू पडै लिखै पर त खूब खर्चा करदन पण अपण गांक मंदिर  तै शानदार,  भव्य बणाणो बान  उथगा रूप्या नि दीन्दन जथगा गाँ वळ उम्मीद करदन. प्रवासी इन छन.. प्रवासी तन छन .. प्रवासी उख ब्यौऊँ मा अच्काल अंग्रेजी म्यूजिक बजांदन, छ्कैक  शराब पीन्दन 
 
प्र.साहि- अरे भै ईं कथा मा त  तीन एक बि गढ़वाळि गाळि नि छोडि !

ग.साहि- हाँ भैजी मीन प्रवास्यूं तै इन इन गाळि देन कि अलंकार व्यवस्था मा अब मै तै गढ़वाळि साहित्य मा क्वी नि पछाड़ी सकुद

प्र.साहि - तुमारि कथा मा प्रवास्युं तै दियीं बिजां गाळियूँ  से साफ़ लगद कि गढ़वाळि भाषा मा गाळियूँ क बड़ो भंडार च भै .

ग.साहि- भैजी एक संवेदनशील कथाकार जब भावनाऊँ बल पर कथा ल्याखाल त प्रवास्यूं कुणि  गाळि अफिक ऐ जान्दन   

प्र.साहि - अच्छा भुला भोळ बात करला !

ग.साहि- अरे भैजी ज्यांखुणि मीन फोन कौरी छौ उ त बिसरी गे छौ मी .

प्र.साहि - बोल

ग.साहि  - भैजी उ तुम  त म्यार भैजिक नौनो ब्यौ मा गाँ आणा इ छंवां ना ?

प्र. साहि- हाँ भै हाँ

ग.साहि - त भैजी तुमन  चार पांच काम जरूर करण हाँ !

प्र.साहि- बोल

ग..साहि- एक त आठ दस बोतळ बढिया ब्रैंड कि व्हिस्की लै ऐन. उ क्या च इख अच्काल ख़ास मेमानु कुण विदेसी व्हिस्की जरूरी च 

प्र साहि- हाँ उ त म्यार धर्याँ इ छन

ग.साहि- अच्छा उ जु आपन बैंड बाजा क इंतजाम कर्युं च त डी.जी अंग्रेजी संगीत विशेषग्य इ हूण चएंद हाँ 

प्र. साहि- हाँ हाँ जु डी.जे  मीन इख ड्याराडूण मा बुक कर्युं च ना वु अंग्रेजी म्यूजिक कु एक्सपर्ट च

ग. साहि- अर भैजी !  अच्काल जरा लोग मौडर्न ह्व़े गेन त पैक्ड हैम मतलब पैक्ड पोर्क क सिकारौ  पैकेट बि लै जयां . अर बीस पचीस चाइनीज नोड्युलुं  पैकेट  बि लै जयां

प्र.साहि- और कुछ ?

ग.साहि- अर हाँ ब्यौ बाद मि तुमर दगड ड्याडूण औलु. अर ज्वा जमीन मेखुण तुमन दिखीं च वांक रजिस्ट्री वगैरा बि करण  ... अच्छा अब मि भोळ बात करलु   


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चबोड़  इ चबोड़ मा, हौंस इ हौंस मा

                   वांक  बान देवप्रयाग   इ ठीक  रालो

                            चबोड्या- भीष्म कुकरेती

  अबि युगवा णि क जुलाई अंक मा एक खबर आई वल एक उत्तराखंडौ   भूत पूर्व पर्यटन मंत्री अपण कार्यकाल मा ग्यारा दै  उन्ना देस/विदेश जातरा पर गेन अर यूँ जात्राक खर्च आई एक करोड़ अडतीस लाख अठाईस  हजार रूप्या . अर युगवाणी न सवाल कार बल उत्तराखंड पर्यटन तै याँ से क्या फैदा ह्वाई? म्यार दिखण से या म्यार हिसाब से इखमा भूतपूर्व मंत्री क क्वी  गलती नि रै होली.  मीन स्वाच जब बि पर्यटन मंत्री उन्ना देस (विदेस) से बौडिक ऐ होला ऊँन इन वार्तालाप कौरी होलु.

जूनियर सेक्रेटरी - वेलकम सर !

पर्यटन मंत्री- अहा ! थैंक  यू

जूनियर सेक्रेटरी - सर उन्ना देसै  जातरा कन राई ?

प.मं. - अहा !  पैला दै से  बिंडी मजा ऐ भै ! मानण पोड़ल कि विदेसी लोग  यात्रियुंक याने पर्यटकों संख्या बढ़ाणो बान नया अर काम का  ब्यूंत  खुज्याणा रौंदन

जू. सेक्रे. अच्छा सर ! त इख बि कुछ कारो कि उत्तराखंड धार्मिक  पर्यटन मा महाराजा ह्व़े जाओ

प.मं.- अहा उख बर्लिन मा मजा ऐ ग्याई . अरे नौन वेजिटेरियन खाणक  क्या बुलण . खाणक बढिया अर बनि बनिक हूण से पर्यटक आकर्षित हूणा छया. बीफ , माछों , पार्क, चिकन अर पता नि क्यां क्यांक  शिकार खाई मीन धौं, सौब मजेदार लज्जतदार . आज बि मीट- मछी क सवाद समळिक /याद कौरिक अन्दड़ भैर ऐ जान्दन अर जीब मा पण्यो लगि जांद . रस रस रस्याण.

जु.सेक. त आपक क्या राय च ?

प.मं. म्यार त बुलण च बल बद्रीनाथ जन जगा मा  बीफ, सुंगर  आदि क होटल खोले जावन जु विदेसी तर्ज पर नॉन वेजिटेरियन डिशेज सर्व कारन अर पर्यटकों तै आकर्षित कारन.

जु.सेक्र. - पण सर यू ह्वेई नि सकुद .

प.मं. - किलै  नि ह्व़े सकुद. मी पर्यटन मंत्री छौं त मेरी बि चल्दी च कि ना ?

जु.सेक्र .- सर आपक जरुर चल्दी च तबि  त आप सात दै विदेस  जातरा कौरिक ऐ गेवां

प.मं. - त फिर बद्रीनाथ जन जगाओं मा पच्छमी  देसूं तर्ज पर नौन वेजिटेरियन होटल किलै नि खुले सक्यान्दन ?

जु.सेक्र.- सर यि धार्मिक स्थल छन अर यूँ जगा मा नियमों हिसाब से नौन वेजिटेरियन खाणक  नि बौण सकुद

प.मं.- त अब्याक अबि नियम बदली द्याओ कि सौब धार्मिक जगों मा केवल नौन वेजिटेरियन खाणक  बणेये जाउ. 

जु.सेक्र.- सर लीगल बात त छ्वाड़ो . आपन साधुंक चिमटा दिख्यां  छन ?
 
प.मं.- उत्तराखंड मा साधुं क्या काम ? अर यि हूंद कु छन मै सरीखा मंत्री क बात टळण वाळ ?

जु.सेक्रे.  - सर जब साधुंउं  क चिमटा पूठ मा लगदन त इ पता चल्द कि यि क्या हुन्दन. धार्मिक स्थल मा सार्वजनिक तौर से नौन वेजिटेरियन फ़ूड सर्व नि करे सक्यांद

प.मं. - अरे यी बि क्वी बात ह्व़े भै कि धार्मिक स्थल मा नौन वेजिटेरियन फूड सर्व नि करे सक्यांद . अरे पर्यटक बढ़ाणन त धार्मिक स्थलों मा नौन वेजिटेरियन फ़ूड सर्व करण जरूरी च.

जु.सेक्रे.-  सर  रणि द्याओ यिं बात तै अपण माइंड से निकाळि द्याओ . ब्रिटिश राज मा यू नि ह्व़े साको  त अब बि नि होलू. हौर कवी नयी योजना क बारा मा बथाओ.

प.मं.- मीन उख विदेस मा द्याख कि बाइबल की बडी मांग च अर जगा जगा चर्च छन खुल्यां. चर्चुं मा  क्या भीड़ रौंदी उख. त सौब धार्मिक स्थलों मा दु दु चर चर बड़ा बड़ा चर्च बणये जावन अर पर्यटक बढ़ये जावन. 

जु.सेक्रे.- सर आप कबि बद्रीनाथ केदारनाथ जयां छन ?

प.मं. - नै भै मी बड़ो प्रक्टिकल  आदिम छौं .यूँ भगवानुं  चकर मा नि पड़दु . अर विदेस यात्रा से फुर्सत मीलल त मि कखि जौंलु ना ?

.जु.सेक्रे. - ओ त मी बताई द्यूं कि यूँ धार्मिक स्थलों मा चर्च नि चिणे स्क्यान्दन .

प.मं. - अरे इन कने ह्व़े सकुद कि सेक्युलर कंट्री मा चर्च नि चिणे सक्यान्दन . मि मुख्यमंत्री से बात करुल

जु.सेक्रे.- सर क्वी हौर  राय च ?

प.मं. अहा क्या म्यूजिक च भै उख यूरोप अर ऑस्ट्रेलया मा . इन कारो हरेक धार्मिक स्थल मा वेस्टर्न म्यूजिकल एंड परफौरमिंग  आर्ट गैलरी खुले जावन.

जु.सेक्रे. सर हमारो काम च कि अप नि संस्कृति तै बढ़ावा द्यूंवां ना कि वेस्टर्न कल्चर तै विकसित कौरवां

प.मं.- अच्छा ! हमारि बि क्वी संस्कृति च . मीन त नि सूणि कि क्वी ...

जु.सेक्रे. -सर क्वी हौर जतन बथाओ

प.मं.-  अरे भै  ! उख  कै बि शहर मा जाओ त जुआ घरूं मा जुवार्युं पिपड़कारो मच्यूं रौंद. कसीनो मा   भौत भीड़ होंदी . अर दुनिया का हरेक जगों बिटेन बड़ा बड़ा धनी पर्यटक जुआ खिलणो आन्दन . त इन करदवां कि हरेक धार्मिक स्थल मा इके  दु दु सरकारी जुआ घर खुल्दवां  . सरकार तै अरबों रूप्या क मुनाफा बि ह्वालु  अर धनी पर्यटक बि उत्तराखंड मा आला .

जु.सेक्रे.- सर आपकी जानकारी क वास्ता मि बथै दीन्दो कि सम्बिधान मा  जुआघर खुल अपराध च

प.मं.- त पर्यटन बढ़ाण बान संबिधान इ बदले जाओ

जु.सेक्रे.- सर यू काम भारतीय संसद कु च ना कि विधान सभा कु

प.मं.- त फिर कनकैक जुआ घर खुले जावन ?

जु.सेक्रे.- सर जुआ घर त खुलि नि सकदन. सर  क्वी हौरि  नया आइडिया बथाओ कि कन कैक धार्मिक स्थलों मा पर्यटन बढ़ाये जाऊ

प.मं .- अरे हाँ अरे यार उख जु चकला घर दिखेन मीन ना. वो , हो वो हो . हरेक जगा चकला घरों क शो विंडो मा नौनी बिठाळि रौंदन आर वींक  गातो मेजरमेंट सौब लिख्युं रौंद अर प्रति घंटा रेट बि लिख्युं रौंद जां से पैथर वैश्या अर ग्राहक मा क्वी झगड़ा नि ह्वाओ . चकला घरूं मा पर्यटकूं  क्या भीड़ रौंद 
 
जु.सेक्र.- सर आपक क्या राय च ?

प.मं . - मेरी राय च कि हरेक धार्मिक स्थल मा सरकारी वैस्यालय खोले जावन . अर ट्रायल बेसिस पर देव प्रयाग मा एक वैस्यालय खोले जाउ . म्यार दिखण  से ट्रायल बेसिस पर देव प्रयाग वैस्यालय क बान ठीक रालु. 

जु.सेक्रे.- सर ! आप फिर  भैर देसु टूर पर कब जाणा छंवां ?

प.मं. - बस अबि सि परस्यूं क टिकेट छन...

जु.सेक्रे.- सर कबि इखाक पर्यटक स्थल बि त द्याखो .

प.मं.- हाँ जब टैम मीलल  त एकाद जगा दिखलु

(यू लेख कल्पाना पर आधारित च अर जु सत्य ह्व़े होलू त मेरी क्वी गलती नी  च  )

Copyright@ Bhishma Kukreti 11/9/2012   

Bhishma Kukreti

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गरीबी कैकि बेटी च ?

व्यंग्य- पूरण पन्त पथिक

एक दिन /एक बुडड़ी  मिल्ये चौबाटा  मां/  वींल बोले -नमस्ते . मिन बोले -तुम  को छयां? वीन बोले - बेटा ,मि  गरीबी  छौं.मिन  बोले -यख क्या कन्ना छां तुम?वीन बोले -बेटा, नयों राज्य छ ,द्यख्दौं कब तैं यख रै सकदो. मिन बोले -नयाँ राज्यौ मतलब इ ई छ कि  ज्वी-क्व़ी यखौ नौं बदनाम करीं? वीन बोले- मी यख की ही छौं .मिन बोले -उत्तराखंड मां इन  गरीबी कबि  बि  नी राये,जनि तू ब्वनी-बताणी छयी .वीन बोले- मी चुनाव की असुण्या राजनीति कि धर्म बेटी छौं  , कुटिल, स्वार्थी   राजनीति क पळि पुसिं बेटी छौं.
 सर्वाधिकार @ पूरण पन्त पथिक, देहरादून , २०१२ 

Bhishma Kukreti

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गढ़वाली हास्य व्यंग्य साहित्य

चबोड़  इ चबोड़ मा, हौंस इ हौंस मा

                     ओ निर्भागी ! मुर्दार न्यूज ना , ब्रेकिंग न्यूज दे

                       चबोड्या- भीष्म कुकरेती


- हलो संवाददाता !   मी भोळ तकौ चैनेल क मालिक बुलणु छौं   

- गुड इवनिंग सर.

- ये भै तीन अबि तलक ब्रेकिंग न्यूज नि भेजि  ?

- सर ! कनि भेजि . परदेस मा ए साल बम्फर खरीफ फसल की  उम्मेद

- ये उत्कू घस्सा कैन धार त्वे तै म्यार चैनेल मा? मी क्वी तुमारो परदेस कु मुख्यमंत्री छौं  जु   यीं निरसी खबर प्रसारित करलु 

-पण सर, इख परदेस मा  त लोग बाग खुश छन भौत सालू मा खरीफ कि बम्फर फसल हूणि च.

-अबै कम दिमग्या पढ़यूँ  लिख्युं गधा!  मि टी.वी चैनेल चलाणु छौं ना कि सरकारों  जनसम्पर्क कार्यालय 

- अच्छा इन बथादी  कि परदेस मा खरीफ कि सबसे कम फसल क्यांकि हूणि च ?

- सर ओगळ की फसल

-किलै ? 

- सर सरकारण तीन साल बिटेन ओगळ की फसल पर सब्सिडी बन्द करी दे त ......

- त ये खाडुन्दक  पत्रकार ! या च ब्रेकिंग न्यूज

- जी

-ठीक च हम इख चैनेल मा ब्रेकिंग न्यूज से घ्याळ करदां कि परदेस मा सरकारी अवहेलना क वजै से ओगळ कि फसल चौपट .

- पण सर ! ओगळ कि फसल से लया क फसल पर प्रभाव पड़द . जब बिटेन सरकारन  ओगळ पर सब्सिडी बन्द कार लया क फसल दुगणि ह्व़े ग्याई.

- अबे मीन ब्वाल नी च कि मि न्यूज चैनेल चलांदु ना कि क्वी समाज कल्याण  संस्थान. हम इख घ्याळ करणा छंवां टु तब तलक क्वी इंटरव्यू अर पुराणि क्लिप कु इंतजाम कौर .आज भारत मा घ्याळ हूण चएंद कि ओगळ कि फसल नि हूण से गरीबी बढ़णि च.

-हेलो! एडिटर साब ! ओ ब्रेकिंग न्यूज द्याओ कि ओगळ की फसल चौपट हूण से परदेस मा गरीबी बढ़ी

- जी ल्या टी.वी मा सि द्याखो ऐ ग्याई ब्रेकिंग न्यूज . गरीबी का तांडव , सरकारी अवहेलना से ओगळ फसल नि हूण से दलित समाज और भी गरीब ..

- हाँ यू बढिया सेन्सेनल न्यूज च इखमा दलित समाज की गरीबी क बात बि च

- हेलो ! मि मालिक बुलणु छौं . अबे जयुं बित्युं संवाददाता   तीन अबि तलक आज क्वी ब्रेकिंग न्यूज नि भ्याज ?

-सर भ्याज छे पण चैनेल मा  नि आई

- अच्छा ! क्या छे वा ब्रेकिंग न्यूज ?

- परदेस मा पहाड़ो कुणि  कृषि नीति घोषित अर बजट मा तीन गुणा बढो तरी  ह्व़े ग्याई

- अबे सुन्गर ! मि क्या सरकार मा पहाड़   मंत्री छौं कि कै कॉमर्सियल टी.वी चैनेल कु मालिक?

-पण सर या त भौत बडी न्यूज च 

- यो काणो अर  बैरो क्वी हैंको चैनेल बि दिखाणु च यीं न्यूज तै

- ना क्वी बि न्यूज चैनेल मा पहाड़ों मा  कृषि नीति की क्वी ब्रेकिंग न्यूज नी च

- त मि तै बौळया कुकरन काटी कि मि यांकी न्यूज देऊं ?ओ निर्भागी ! मुर्दार न्यूज ना , ब्रेकिंग न्यूज दे

-जी

- अच्छा इन बथादी कि प्रदेश सरकारन मैदानी कृषि मा क्वी बजट बढ़ाई कि ना ?

-ना . वी बजट च जु पिलाक साल छौ.

- त अबे मूढ़ , मूर्ख ! या च ब्रेकिंग न्यूज . हम चैनेल मा ब्रेकिंग न्यूज दीणा छंवां कि प्रदेश सरकार द्वारा मैदानी कृषि की सर्वथा अवहेलना. तु इन कौर एकाध घंटा मा याँ पर स्पोर्टिंग न्यूज ला कि मैदानी कृषि पर आघात लगी गे

-हेलो एडिटर साब  ! यूँ संवादाताओं तै कुछ ट्रेनिंग द्याओ कि सेंसेसनल न्यूज लावन जो कि ब्रेकिंग न्यूज लैक ह्वावन . ऊन तै सकारात्मक न्यूज कि जगा नकारात्मक न्योज खुज्याण  मा टैम लगाण चयेंद 

- जी आप सै बुलणा छंवां.

- अच्छा थ्वडा देर मा क्या क्या ब्रेकिंग न्यूज आणि छन ?.

- जी एक हैंको सेंसेसनल टी.वी चैनेल खुलि ग्याई अर मि अर मेरी सरा टीम अब्याक अबि वै चैनेल मा जाणा छंवां .जांद जांद मि ब्रेकिंग न्यूज दीणु छौं कि टी.वी चैनलों मा भंयकर प्रतियोगिता से सकारत्मक पत्रकारिता खतरा मा च.



Copyright@ Bhishma Kukreti 14/9/2012

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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प्रयाग पाण्डे
लीजिये आज पेश है-   उत्तराखंड में पलायन के चलते वीरान होती बाखलियों की तस्वीरों के साथ उत्तराखंड और यहाँ के निवासियों की नियति को व्यक्त करता बहुत पुराना कुमांऊनी बाल - गीत -----------
 
 छक - छक छुपरी मोत्यूं का दाणा |
 पार बटी अइन  कुमइया राणा |
 कुमइये ल मैं कै धान दिं |
 धान मैं लै ऊखव दिं |
 ऊखलै ल मैं कै चावल दिं |
 तौलिल मैं कै भात दिं |
 भात मैं लै ल्वारी दी |
 ल्वारी लै  मैं कै दात्ती दी |
 दात्ती मैं कै घस्यारी दी |
 घस्यारिल मैं कै घास दी |
 घास मैं लै गोरु दी |
 गोरुल मैं कै दूद दी |
 दूद मैं लै राजा दी |
 राजा लै मैं कै घोड़ी दी |
 मैं ग्यूँ माव |
 घोड़ी लागि डाव |
 मैं बैठयूँ स्योव |
 घोड़ी पड़ी भ्योव ||
 
 भावार्थ -
 टोकरी भरी है मोतियों से |
 सामने से आया दुष्ट कुमइया |
 कुमइया ने मुझे धान दिए |
 धान मैंने ओखली में डाले |
 ओखली ने मुझे चावल दिए |
 चावल मैंने पतीली में डाले |
 पतीली ने मुझे भात दिया |
 भात मैंने लोहारिन को दिया |
 लोहारिन ने मुझे दराती ला दी |
 दराती दी मैंने घसियारी को |
  घसियारी ने मुझे घास दी |
 घास दी मैंने गाय को |
 गाय ने मुझे दूध दिया |
 दूध मैं राजा को दे आई |
 राजा ने मुझे घोड़ी दी |
 घोड़ी लेकर मैं चली मैदानों को |
 घोड़ी मुड़ी पहाड़ों  को |
 मैं बैठी थी छाया में|
 घोड़ी गिरी पहाड़ से ||
 (कुमाऊं का लोक साहित्य से )

 

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