Author Topic: Merapahad.Com; Introduction, Vision and Mission:मेरा पहाड़; परिचय, सोच एवं लक्ष्य  (Read 10334 times)

पंकज सिंह महर

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माननीय अतिथि/सदस्य/उत्तराखंड प्रेमी,

सर्वप्रथम मेरा पहाड़ डॉट कॉम नैटवर्क के फोरम पर आपका स्वागत है। सदियों से, भारत देश के उत्तरी भाग में बसा एक छोटा सा हिस्सा उत्तराखंड, अपने प्राकृतिक सौन्दर्य, अपनी हरी-भरी वादियों, शांत सुरम्य घाटियों, कलकल करती पावन नदियों और  अपने  ईमानदार और मेहनती निवासियों की वजह से  अनेक लोगों, सैलानियों , गुणी जनों  के आकर्षण का केन्द्र रहा है। उत्तराखंड को देवभूमि भी कहा जाता है क्योंकि यह माना जाता है कि देवता भी यहीं निवास करते हैं। इसी पावन,पवित्र,देवभूमि से आपका परिचय कराने और यहाँ की संस्क़ृति, सभ्यता को अपने असली रूप में आपके सामने रखने के लिये मेरा पहाड़ डॉट कॉम नैटवर्क की स्थापना की गयी है। हम इंटरनैट पर उपलब्ध अपनी बहुत सी साइट्स के माध्यम से इस काम में लगातार लगे हुए हैं।

आप अवगत ही हैं कि किसी भी संस्कृति या समुदाय का आईना, उसकी धरोहरें, सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्य, संस्कृति, बोली-भाषा, संगीत इत्यादि होता है। मेरा पहाड़ डाट काम नेटवर्क भी भारत के एक राज्य उत्तराखण्ड को समर्पित है, इसका नाम मेरा पहाड़ रखने का औचित्य यह है कि उत्तराखंड के लोगों द्वारा उत्तराखण्ड को पहाड़ और शेष दुनिया को देश कहा जाता है। इसलिये अपने पहाड़ को जानने, समझने और जुड़ने के लिये यह नाम रखा गया।
   
आपको विदित ही होगा  कि उत्तराखण्ड की सामाजिकता, संस्कृति और पौराणिकता बहुत ही समृद्ध रही है। युगों-युगान्तरों से अनेक ऋषि-मुनि ही नहीं बल्कि अनेक धर्मों, संस्कृतियों के प्रवर्तकों और अनुयायियों का तपस्थल यहां पर रहा है। यहीं पर उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर शेष दुनिया को उससे परिचित कराया है। आदि गुरु शंकराचार्य, महर्षि दयानन्द,  सिखपंथ के प्रमुख गुरु, गुरु नानकदेव, गुरु  राम राय, गुरु गोविन्द सिंह, आयुर्वेद के प्रवर्तक महर्षि चरक, महर्षि पंतजलि से लेकर भारत वर्ष की अनेक विभूतियों, यथा- महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानन्द, रवीन्द्र नाथ टैगोर, महादेवी वर्मा, सुमित्रानन्दन पन्त और कालिदास आदि अनेक लोगों का आध्यात्मिक प्रेरणा का केन्द्र उत्तराखण्ड ही रहा है।
.....जारी

पंकज सिंह महर

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[justify]उत्तराखण्ड की इसी समृद्ध, पौराणिक एवं प्रमाणिक विरासत को सहेजने के उद्देश्य से हमने यह प्रयास प्रारम्भ किया है। भविष्य में वेद-पुराणों की तरह इंटरनेट भी सभी चीजों को सहेजने का एक  सुगम और सहज माध्यम बन जायेगा। आधुनिक भूमंडलीकरण के दौर में सभी संस्कृतियों का सामाजिक ताना बाना, अपनी जड़ों से दिनोंदिन दूर होता चला जा रहा है और उत्तराखण्ड, जहां रोजी-रोटी के पलायन करना एक मजबूरी है। वहां के लोग बाहर आकर धीरे-धीरे अपनी संस्कृति और परम्पराओं से स्वतः ही दूर होते चले जा रहे हैं।

उत्तराखण्ड से बाहर देश-विदेश में रह रहे लोगों को अपने पहाड़ की जड़ों से जोड़कर रखने और उत्तराखंड के बारे में और अधिक जानने के उत्सुक उत्तराखंड प्रेमियों के लिये हमने यह प्रयास शुरु किया। प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि फिर क्यों हमने इस नैटवर्क की शुरुआत पहले ई-ग्रुप और फिर फोरम से की। हम चाहते तो केवल अपनी एक वैब साइट बनाकर अपने कर्तव्यों की इति-श्री कर सकते थे, लेकिन हमें मालूम है कि सर्वज्ञाता तो हम भी नहीं हैं और हमारा प्रयास है कि उत्तराखण्ड से संबंधित प्रमाणिक जानकारी ही सुलभ हो, आधी-अधूरी नहीं। वैसे भी हर छह कोस में बोली, पानी और रीति-रिवाजों में थोड़ा सा अन्तर आ ही जाता है। तो ई-ग्रुप और फोरम ही ऐसे माध्यम है, जिसमें हर आम उत्तराखण्ड प्रेमी, एक सदस्य बनकर अपने इलाके की बोली, रिवाज, त्योहारों आदि से हमें परिचित कराता है और ग्रुप/ फोरम के माध्यम से वह सबको सुलभ हो जाता है। हमारा प्रयास है कि हम अधिक से अधिक उत्तराखंड प्रेमियों को इससे जोड़े और अधिक से अधिक प्रमाणिक जानकारी हमारे फोरम के माध्यम से उपलब्ध हो। भविष्य में यह फोरम सम्पूर्ण उत्तराखण्ड की जानकारियों को अपने आप में समाहित कर लेगा और इस प्रकार इंटरनेट की विशाल दुनिया में संपूर्ण उत्तराखण्ड मेरा पहाड़ के रुप में सामने आ जायेगा। इन्ही जानकारियों को हम थोड़े और प्रमाणन के साथ अपनी अन्य साइट अपना उत्तराखंड डॉट कॉम पर भी उपलब्ध कराते हैं।

दूसरा कारण यह भी कि पहाड़ से आजीविका की तलाश में बाहर गया प्रवासी आज अपनी पहचान, अपनी जड़ों के जुड़ाव को जानने के लिये छटपटा रहा है। क्योंकि बाहर की दुनिया में भी कई छोटी-छोटी दुनिया अलग-अलग समुदाय के रुप में  हैं। जिनकी अपनी-अपनी रीति और संस्कृति है, उन सब को देखकर अब उत्तराखण्डी प्रवासी भी अपनी संस्कृति को जानने के लिये छटपटा रहा है। इसलिये उनको, उनकी जड़ों से, उनकी संस्कृति से, रीति-रिवाज, विकास की समस्याओं, पर्यटक और धार्मिक स्थलों, मेलों-त्यौहारों से परिचित कराने का हमारा छोटा सा प्रयास है, मेरा पहाड़।
.............जारी

पंकज सिंह महर

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[justify] दूसरा कारण यह भी कि पहाड़ से आजीविका की तलाश में बाहर गया प्रवासी आज अपनी पहचान, अपनी जड़ों के जुड़ाव को जानने के लिये छटपटा रहा है। क्योंकि बाहर की दुनिया में भी कई छोटी-छोटी दुनिया अलग-अलग समुदाय के रुप में  हैं। जिनकी अपनी-अपनी रीति और संस्कृति है, उन सब को देखकर अब उत्तराखण्डी प्रवासी भी अपनी संस्कृति को जानने के लिये छटपटा रहा है। इसलिये उनको, उनकी जड़ों से, उनकी संस्कृति से, रीति-रिवाज, विकास की समस्याओं, पर्यटक और धार्मिक स्थलों, मेलों-त्यौहारों से परिचित कराने का हमारा छोटा सा प्रयास है, मेरा पहाड़।
 

एक अन्य कारण यह है कि हर वर्ष लाखों पर्यटक हमारे उत्तराखंड की प्राकृतिक सुन्दरता को देखने के लिये यहाँ खिंचे चले आते हैं। उन लोगों को यहाँ आने से पहले बहुत सी जानकारियां नहीं होती। यदि वह इंटरनैट पर जानकारियाँ ढूंढते भी हैं तो उन्हें अधिंकाश प्रायोजित  जानकारी ही मिल पाती है जिस पर पूरी तरह से विश्वास करना कठिन सा होता है। हमारा यह प्रयास है कि अपने सदस्यों के माध्यम से अपनी साइट्स पर ऐसी प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध करायें जो यहाँ आने वाले सैलानियों के लिये मार्ग-दर्शन का काम करें और वह वास्तविक उत्तराखंड को और नजदीक से जान समझ पायें।

उत्तराखंड से जुड़े विषयों पर शोध करने वालों के लिये भी हमारी साइट्स एक संदर्भ स्रोत का काम कर सकती हैं और साथ ही साथ आप अपने प्रश्नों को पूछ कर सद्स्यों से जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।

हम विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी आपकी शंकाओं का समाधान करने के लिये विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से भी आपका परिचय करवाते हैं ताकि आप उनसे सीधे प्रश्न पूछ कर अपना उत्तर पा सकें। समय समय पर हम उत्तराखंड से जुड़े महत्वपूर्ण हस्तियों से लाइव चैट का आयोजने भी करवाते हैं जिसमें एक सदस्य के रूप में उनसे अपने प्रश्न पूछ सकते हैं।

और भी है बहुत कुछ जिसको शब्दों में व्यक्त कर पाना लगभग असंभव है, उसे तो आप हमारी साइट्स से जुड़ कर ही समझ सकते हैं   तो फिर अब देर क्यों, आइये हमसे जुड़िये, जानिये पहाड़ को, समझिये पहाड़ को और जुड़िये अपनी पौराणिक और महान संस्कृति से, जिसका जरिया है। http://merapahadforum.com/
 

पंकज सिंह महर

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[justify]मेरा पहाड़ डॉट कॉम नैट वर्क की शुरुआत 5 जनवरी 2001 को एक ई-ग्रुप से हुई थी जिसका नाम है कुमाँऊनी-गढ़वाली ग्रुप यहाँ पर देश-विदेश के अनेक सद्स्यों ने समय समय पर उत्तराखंड से संबंधित विषयों पर अपने विचार रखे| फिर एक आधी-अधूरी साइट बनायी गयी, जिसके द्वारा अपनी संस्कृति को वैब पर फैलाने का प्रयास किया गया| वर्तमान मेरा पहाड़ फोरम की आधिकारिक स्थापना दिनांक 17-04-2007 को की गई।

इसे आज तक के मुकाम तक पहुंचाने में हमारे सभी सदस्यों का समान सहयोग रहा है। जिन्होंने अपने घरेलू और व्यक्तिगत कार्यों में से अमूल्य समय निकालकर फोरम में जानकारी मुहैय्या कराई।

वर्तमान में फोरम को तकनीकी रुप से व्यवस्थित करने हेतु तीन प्रशासनिक व्यक्ति हैं-
१- Uttarakhand Admin
२- Mera Pahad
३- Hisalu

इनका मुख्य कार्य फोरम की तकनीकी समस्याओं के समाधान, नये बोर्ड, माडरेटर आदि को नियुक्त करने के साथ ही नित्य बैकअप लेना और नये अपडेटस से फोरम को सुसज्जित करना है।

फोरम के प्रशासनिक (Admin) कार्यों को थोड़ा कम करने के लिये एक कोर टीम गठित की गई है, जिसका मुख्य कार्य फोरम की तकनीकी रुप से व्यवस्थित करना, फोरम के नये सदस्यों का मार्गदर्शन करना, जनसंपर्क करना, फोरम को प्रमोट करना आदि है। जिसके निम्न सदस्य हैं-

१- श्री अनुभव उपाध्याय
२- श्री एम०एस० मेहता
३- श्री कमल
४- श्री हेम पन्त
५- श्री राजेन
६- श्री हिमांशु पाठक
७- श्री दयाल पाण्डे
८- श्री विनोद सिंह गढ़िया
९- श्री पंकज सिंह महर


इनमें से श्री एम०एस० मेहता को merapahad.com के जनसंपर्क अधिकारी का अतिरिक्त दायित्व दिया गया है।

पंकज सिंह महर

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[justify]मेरा पहाड़ टीम- इस टीम के सदस्य देश में, विदेश में बसे ऐसे लोग हैं, जिन्हें अपने उत्तराखण्ड से बहुत प्यार है, वे उत्तराखण्ड के लिये कुछ करना चाह्ते हैं और उसके लिये इन्होंने हमें एक माध्यम चुना है। इनका कार्य फोरम को उचित दिशा-निर्देश तथा सुझाव देना, विशिष्ट अतिथियों से साथ फोरम में वार्ता करवाना और अपने अनुभवों से फोरम को और उत्तराखण्ड के लोगों को लाभ पहुंचाना है। इसके निम्न सदस्य हैं-

१-
श्री चारु तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखण्ड आन्दोलनकारी।
२- श्री शैलेश उप्रेती, अमेरिका में अध्यापक।
३- श्री एम०एस० जाखी, लन्दन में सेवारत।
४- श्री रजनीश अग्निहोत्री, फिल्म इंड्रस्ट्री में मीडिया कार्डिनेटर।
५- श्री कैलाश पाण्डे (आई०टी०क्षेत्र)
६- श्री मोहन सिंह बिष्ट (आई०टी० क्षेत्र)
७- श्री शैलेश, आयरलैंड में शोधार्थी।
८- सुश्री रचना भगत, वेब डिजाइनर।
९- सुश्री सुचिरा, आईटी० क्षेत्र।
 
इसके अतिरिक्त फोरम के विभिन्न बोर्डों को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी मॉडरेटर पर होती है, यह हमारा सौभाग्य है कि हमें इस हेतु भी उत्तराखण्ड की कई नामचीन और अनुभवी विभूतियों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है। गढ़वाली फिल्मों के जनक
श्री पाराशर गौड़ एवं उत्तराखण्ड में फिल्म इंडस्ट्री से लिये सतत संघर्षरत और फिल्म क्षेत्र से जुड़े श्री आर०के०वर्मा जी हमारे Films of Uttarakhand बोर्ड के के लिये हमें अपना संरक्षण प्रदान करते हैं।

उत्तराखण्ड की समृद्ध संस्कृति के लिये हमारा मार्गदर्शन उत्तराखण्डी संस्कृति, रीति-रिवाजों और मंत्रों के प्रकाण्ड विद्वान
श्री हेम जी और श्री खीम सिंह रावत जी करते हैं। वरिष्ठ पत्रकार श्री राजेन्द्र जोशी, श्री दिनेश बिज्लवाण जैसे लोगों का भी हमें विभिन्न बोर्डस पर संरक्षण प्राप्त होता रहा है। साहित्य के क्षेत्र में सर्व श्री डी.एन.बरोला,दिनेश ध्यानी,पूरन चन्द्र कांडपाल एवं पहाड़ के दर्शन फोटो के माध्यम से कराने के लिये सर्व श्री किरन रावत, प्रशांत जोशी एवं केशर सिंह बिष्ट का विशेष योगदान है। फोरम के माध्यम से युवाओं को आई टी क्षेत्र में आनलाइन कंसल्टेंसी के लिये श्री कमल, विग्यान एवं प्रोद्यौगिकी के क्षेत्र में डा० शैलेश उप्रेती एवं नौकरी/रोजगार के क्षेत्र में श्री दिनेश गड़िया जी पर्यटक स्थलों के बारे में जानकारी देने के लिये श्री किरन रावत एवं श्री प्रशान्त जोशी जी अपने अमूल्य समय में से कुछ क्षण निकालकर उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री तथा वित्त संबंधी सलाहकार (Finance consultant) श्री पंकज मठपाल जी भी अपनी निःशुल्क सेवायें प्रदान कर रहे हैं।

इसके अतिरिक्त उत्तराखण्ड की विभिन्न विभूतियों और संस्कृति कर्मियों ने हमारे फोरम की सदस्यता लेकर हमें गौरवान्वित किया है, उनमें प्रमुख रुप से उत्तराखण्ड सरकार के मंत्री श्री प्रकाश पन्त, युवा विधायक श्री पुष्पेश त्रिपाठी, प्रख्यात गीतकार एवं गायक श्री नरेन्द्र सिंह नेगी, प्रख्यात हास्य अभिनेता श्री हेमन्त पाण्डे, प्रख्यात गायिका सपना अवस्थी, फौजी ललित मोहन जोशी, प्रीतम भत्वाण, मीना राणा, अनुराधा निराला, गजेन्द्र राणा, अनिल बिष्ट, प्रख्यात हाकी खिलाड़ी और कोच श्री मीर रंजन नेगी, एवं  सत्यम दरमोला इत्यादि हैं। इस सभी विभूतियों से की गई आनलाइन चैट को आप
Celebrity Online पर देख सकते हैं।
 
सम्पूर्ण उत्तराखण्ड को इंटरनेट पर समाहित करने के प्रयास को देखे
मेरा पहाड़ sitemap

अपने सुझाव और प्रतिक्रिया दें-  Suggest us

यदि आप भी इसमें सदस्य बन भागीदार होना चाहते हैं- Register

आप चाहें तो हमें अपना उत्तराखंड के लिये प्रमाणिक व मौलिक लेख भी भेज सकते हैं हम उसे अपना उत्तराखण्ड पर आपके नाम व परिचय के साथ छापेंगे।

पंकज सिंह महर

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[justify]हमारा अब तक का परिचय इंटरनेट पर एक छोटा सा उत्तराखण्ड बसाने को लेकर था। लेकिन हम सिर्फ इंटरनेट तक ही सीमित नहीं रहना चाहते हैं, हम इंटरनेट के जरिये समान सोच के लोगों को जोड़कर, उनका एक समूह बनाकर उत्तराखण्ड के लिये धरातल पर भी काम करना चाहते हैं। इसी को ध्यान में रखकर एक उप-समूह बनाया गया क्रियेटिव उत्तराखण्ड-म्यर पहाड़, यह उत्तराखण्ड के युवाओं का सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और साहित्यिक मंच है। यह पुरानी पीढ़ी की विरासत को अगली पीढी तक पहुंचाने और इसे सहेजने का प्रयास करता है। पहाड़ से बाहर रह रहे युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और विभिन्न गतिविधियों से पहाड़ को जानने और समझने का प्रयास कर रहा है। विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और संस्थानों में शिक्षा प्राप्त कर रहे युवा इसमें भागीदारी कर रहे हैं और इस आयोजन को आगे बढ़ाने के लिये हमें विभिन्न क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञों का आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है।

हम अपनी इस छोटी सी कोशिश से उत्तराखण्ड की समृद्ध धरोहर, सांस्कृतिक एकता, सामाजिक मूल्यों को अक्षुण्ण रखने, भूमंडलीकरण के दबाव में प्रभावित होते सामाजिक समरसता की अपनी परंपरा को बचाने और आर्थिक रुप से संपन्न पहाड़ की कल्पना को साकार रुप देने में सहभागी बनना चाहते हैं।

हमारे द्वारा किये गये अब तक के रचनात्मक कार्यों का विवरण आप म्यर पहाड़ तथा हमारा परिचय पर देख सकते हैं।

पंकज सिंह महर

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[justify]उत्तराखण्ड के प्रवासीजनों को उनकी संस्कृति से जोड़े रखने के लिये यह जरुरी है कि लोक संस्कृति के आधार पर मनाये जाने वाले त्यौहारों या महत्वपूर्ण तिथियों की जानकारी उनको हो, लेकिन परदेश में पंचांग आदि की सुविधा नहीं होती, अगर आप पंचांग ले भी आये तो बांचने की समस्या आती है। लेकिन इस समस्या को दूर करने का प्रयास हमने किया है। उत्तराखण्ड में प्रचलित वाणी भूषण, महिधर एवं रामद्त्त पंचांगों के आधार पर माह भर के व्रत, त्यौहार, ग्रहण, महत्वपूर्ण तिथियों आदि की जानकारी आप पंचांग तथा त्यार-बार से ले सकते हैं।

साथ ही फोरम के कैंलेडर पर भी यह जानकारी अपडेट की जा रही है।

पंकज सिंह महर

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[justify]मेरा पहाड़ डाट काम नेटवर्क ने दिनांक २४ अप्रैल, २०१० को एक नई वेबसाईट हिसालू-उत्तराखण्ड सन्देश का लोकार्पण किया। जिसका शुभारम्भ उत्तराखण्ड सरकार के माननीय संसदीय कार्य मंत्री श्री प्रकाश पन्त जी ने किया। जिसकी जानकारी आप फोरम के इस तथा वेबसाईट के इस लिंक से प्राप्त कर सकते हैं।
www.hisalu.com उत्तराखण्ड से सम्बन्धित सभी वेबसाईटस और ब्लागों का संकलक (Aggregator) है। अर्थात उत्तराखण्ड से सम्बन्धित कोई भी नई जानकारी इण्टरनेट पर उपलब्ध होते ही आप इसे एक ही साईट www.hisalu.com पर देख पायेंगे। इसलिये अब इन्टरनेट द्वारा उत्तराखण्ड से जुड़ी अद्यतन (updated) जानकारी आप इस साईट के माध्यम से आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।
यदि आप भी उत्तराखण्ड से संबंधित ब्लाग या वैबसाईट का संचालन करते हैं और उसे हमारे संकलक पर प्रदर्शित करना चाहते हैं, तो अपने ब्लाग या वैबसाईट का पता
hisalu@merapahad.com पर मेल करें।

इसके अतिरिक्त मेरा पहाड़ डाट काम नेटवर्क ने उत्तराखण्ड की एक ब्लाग नेटवर्क शाखा को भी प्रारम्भ किया है।
http://merapahad.in पर उत्तराखण्ड से संबंधित ब्लागरों को ब्लाग सेवा का लाभ दिया जायेगा। वर्तमान में प्रसिद्ध विज्ञान लेखक श्री देवेन्द्र मेवाड़ी जी और श्री डी०एन० बडोला जी यहां पर अपने ब्लाग अपडेट कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त 24-29 अप्रैल, 2010 तक देहरादून में आयोजित उत्तराखण्ड अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव तथा उत्तरांचल फिल्म चेम्बर आफ कामर्स को भी इस सेवा का लाभ दिया गया।

मंजिलें और भी हैं.........।

विनोद सिंह गढ़िया

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« Reply #8 on: February 02, 2013, 05:33:55 PM »
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