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CAG Report on Kedarnath Corruption -केदारनाथ आपदा गड़बड़ी पर कैग का 'महा खुलासा'

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:

Dosto,

There are reporting coming corruption cases in Kedarnath Rehabilitation work. There is CAG report published by leading Hindi News Paper Amar Ujala.

केदारनाथ आपदा गड़बड़ी पर कैग का 'महा खुलासा'

करीब तीन माह पुरानी कैग की रिपोर्ट ने उत्तराखंड सरकार की अफसरशाही की गड़बड़ी का खुलासा किया है। क्या है खुलासा? यहां पढ़ें...

आरटीआई में आपदा राहत घोटाला सामने आने के बाद अब प्रदेश सरकार की किरकिरी महालेखापरीक्षक उत्तराखंड की एक रिपोर्ट भी कर रही है। मार्च 2015 में तैयार की जा चुकी इस रिपोर्ट को देर सवेर प्रदेश सरकार को सदन के पटल पर भी रखना होगा।

करीब 65 पन्नों की इस रिपोर्ट से जाहिर हो रहा है कि राहत बांटने से लेकर अन्य कई मामले में गड़बड़ियां हुईं। प्रदेश सरकार आपदा राहत घोटाले में राज्य सूचना आयोग के सीबीआई जांच के आग्रह को ठुकरा चुकी है। हालांकि इसकी जांच इस समय मुख्य सचिव एन रविशंकर कर रहे हैं।

अब कैग की एक रिपोर्ट भी पुष्टि कर रही है कि आपदा राहत के नाम पर प्रदेश में खासी गड़बड़ियां हुईं। हद तो यह हुई कि आपदा राहत में कहीं ज्यादा पैसा बांटने से गुरेज नहीं किया गया तो कहीं बेहद कम पैसा प्रभावितों को दिया गया। राहत का वितरण भी एक समान नहीं रहा।

कैग ने जोशीमठ तहसील में 603 पशुओं की मौत की ऐवज में दिए गए 12.27 लाख रुपये की राहत पर ही सववाल खड़े किए हैं। मार्च 2015 तक भी संबंधित विभाग इसका कोई जवाब नहीं दे पाए थे। तथ्यों से छेड़छाड़ का मसला मुन्स्यारी तहसील में सामने आया।

M S Mehta

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:
आवेदकों ने 703 मृत पशुओं के लिए मुवाअजा मांगा लेकिन रिकार्ड में छेड़छाड़ कर केवल 164 का ही मुआवजा दिया गया। कैग की रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि पिथौरागड़ और टिहरी में कृषि भूमि के नुकसान का मुआवजा 2.04 करेाड़ रुपये कम दिया गया।
सितंबर 2014 से लेकर फरवरी 2015 तक कैग ने आपदा प्रभावित पांच जिलों की आपदा प्रबंधन के लिहाज से लेखापरीक्षा कर इस रिपोर्ट को तैयार किया। कायदे में मई में हुए सत्र में इस रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए था।

पर यह रिपोर्ट अब आगामी सत्र में ही पटल पर आ पाएगी।अमर उजाला के पास पहुंची इस रिपोर्ट में सरकार के राहत कार्य पर सवाल उठ रहे हैं।

कौन-कौन से मामले
- रुद्रप्रयाग में दिसंबर 2013 में आठ मामलों में प्रति भवन के नुकसान पर 35 हजार रुपए दिए गए। जबकि एसडीआरएफ में प्रावधान 70 हजार रुपए प्रति पूर्ण क्षतिग्रस्त भवन का था। इस तरह प्रभावितों को 2.80 लाख रुपए कम दिए गए।

- पिथौरागढ़ में 25 कच्चे क्षतिग्रस्त भवनों के लिए मुआवजा दिया गया और बाद में इनको पक्का भवन मानकर मुआवजा दिया गया। इससे जाहिर है कि राहत बांटने से पहले सरकार ने डाटा बेस पर काम नहीं किया।

- रुद्रप्रयाग और टिहरी में आवेदनकर्ताओं को पूरा भुगतान नहीं किया गया। इस तरह इन दो जिलों में राहत वितरण में समानता नही रही। राहत वितरण में एक समान मानक नहीं अपनाए गए।

- जोशीमठ तहसील में लेखापरीक्षा में पाया गया कि पंचों, पशुचिकित्सकों ने 1213 पशुओं की क्षति का विवरण दिया था। इनमें से केवल 603 में क्षतिपूर्ति दी गई। इसमें संबंधित विभागों ने जांच का आश्वासन दिया। इससे 33.51 लाख रुपए के भुगतान पर सवाल उठ रहा है।

- पिथौरागढ़ में लेखा परीक्षा में पाया गया कि रिकार्ड से छेड़छाड़ कर 1.26 लाख रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया।

- टिहरी में 69 मामलों में से 14 मामलों में 50 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। पिथौरागढ़ में 60 मामलों की पड़ताल की गई। इसमें 5.25 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान पाया गया।

- मुन्स्यारी में 51.05 लाख रुपए की जगह 20.55 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति ही दी गई।
- पिथौरागढ़ और टिहरी में कुल राहत में से 2.04 करोड़ रुपए कम बांटे गए। कैग की रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि भी कर रही है कि केदारनाथ की आपदा से सरकार ने कोई सबक नहीं सीखा।

सरकार न जून 2013 में आई आपदा से निपटने के लिए तैयार थी और न ही अब मानसून की आहट के बाद कोई तैयारी है। कैग रिपोर्ट ने जून 2013 की आपदा की लेखा परीक्षा में जिन बिंदुओं को उठाया है, उन पर काम होना अब भी बाकी है। http://dehradun.amarujala.com/feature/politics-dun/cag-report-in-kedarnath-disaster-scam-hindi-news/page-3/

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:
कैग ने जून 2013 की आपदा से हुए नुकसान का एक बड़ा कारण सही नीतियों का अभाव, संबंधित विभागों की अधूरी तैयारी आदि को माना है।

कैग की इस रिपोर्ट के मुताबिक जून 2013 की आपदा के समय राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण पुरी तरह से निष्क्रिय थी। प्राधिकरण अगर सक्रिय होता तो आपदा के दौरान स्थिति संभाल सकता था। पर इससे पहले कुल मिलाकर मई 2013 और इसके बाद 25 जून 2013 और 18 दिसंबर 2013 को ही बैठक कर पाया।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित प्राधिकरण आपदा प्रबंधन की शीर्ष संस्था है। अब भी हाल यह है कि प्राधिकरण करीब एक माह पहले मुख्यमंत्री से बैठक के लिए समय मांग चुका है पर अभी तक बैठक का समय उसे नहीं मिला है।\

जून 2013 की आपदा से पहले मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य कार्यकारी समिति ने आपदा को लेकर कोई बैठक अलग से नहीं की। इस समिति की निष्क्रियता से आपदा प्रबंधन फंड का उपयोग जिलों में नहीं हो पाया।

अब भी इस समिति की कोई बैठक नहीं हुई है। राज्य आपदा सलाहकार समिति फरवरी 2008 में बन गई थी पर 2013 आपदा के समय यह निष्क्रि य थी। कैग के मुताबिक राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण बिना तकनीकि सलाह के काम नहीं कर पाया। इस समय भी इसकी यही स्थिति है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:
जून 2013 की आपदा के समय राज्य की आपदा प्रबंधन योजना तैयार ही नहीं थी। जुलाई 2014 में यह योजना तैयार भी कर ली गई पर इस योजना के हिसाब से अब भी काम नहीं हो रहा है। पांच हजार से ज्यादा गांवों के लिए आपदा प्रबंधन योजना तैयार नहीं हो पाई है। जून 2013 की आपदा केदौरान संबंधित विभाग तैयार नहीं थे।

2015 में भी यही स्थिति है। कैग के मुताबिक मार्च 2015 तक भी संबंधित विभागों ने आपदा प्रबंधन के लिए कोई बजटीय व्यवस्था नहीं की थी। विभागों को आपदा की तैयारी में सुरक्षित स्थानों का भी चयन करना होता है। जून 2013 के बाद पाया गया कि चिह्नित सुरक्षित स्थानों से इतर ही राहत शिविर संचालित किए जा रहे थे।

रिपोर्ट में खुलासा
- कैग की रिपोर्ट के मुताबिक जिला प्रशासन आपदा के बीस महीने बाद फरवरी 2015 तक भी अंतिम रूप से लेखे तैयार नहीं कर पाए थे। लिहाजा धनराशि के वास्तविक उपयोग की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

- कैग की रिपोर्ट से यह भी जाहिर है कि सड़कों और बांधों के बनाने में निकलने वाले मलबे का निस्तारण सही तरीके से नहीं किया गया। इससे नुकसान कई गुना बढ़ गया। प्रदेश सरकार की ओर से गठित ग्लेश्यिर कमेटी ने 2008 में अपनी संस्तुति दे दी थी पर अभी तक इन संस्तुतियों पर काम नहीं हुआ है। डीएमएमसी ने सड़कों और अन्य निर्माण में बारूद के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध का सुझाव दिया था। यह सुझाव अभी तक लागू नहीं हुआ। (amar ujala)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:

There are many other cases of corruption coming up in media which happened during the Kedarnath rehabilitation work.

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