Author Topic: Currupt System in Uttarakhand - ये कैसा भ्रष्टाचार है उत्तराखण्ड में?  (Read 37759 times)

Jai Dimri

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भ्रष्टाचार अधिकारी,

विजिलेंस ने दो और कर्मचारियों को घूस लेते पकड़ा है। एक रोड़वेज का एआरएम है और दूसरा बाबू। घूस लेना-देना सामान्य बात है पर उत्तराखण्ड के कर्मचारियों का लगातार घूस लेते पकड़ा जाना चैंकाने वाली बात है। यही कर्मचारी थे, जिन्होंने राज्य आन्दोलन के दौरान अपनी नौकरियां दांव पर लगा दी थीं। महीनों बिना तनख्वाह के यह सड़कों पर मोर्चा बांधे रहे। लाठियां खाई और मुकदमे भी झेले। लेकिन राज्य बनने के साथ ही वह जज्बा जाने कहां चला गया। जिनकी बात करते थे उन्हीं से घूस ले रहे हैं। कोई सड़क और पुलों के घपले निपटाने के लिए नोट एंेठ रहा है तो कोई जेब गरम किए बिना फाइल नहीं सरकाता। सोचने वाले सोचें जरूर। वरना लोगों को यह कहने से नहीं रोक पाएंगे कि, इन्होंने आन्दोलन नहीं, दिखावा किया था।

जय डिमरी

पंकज सिंह महर

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Re: Ye kesha uttarakhand
« Reply #1 on: December 02, 2009, 02:18:34 PM »
डिमरी जी,
मेरा पहाड़ परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है, कृपया निम्न लिंक पर अपना परिचय देने की कृपा करें-

http://www.merapahad.com/forum/introduction-with-mera-pahad-community/introduction-of-merapahad-community-members/

आप द्वारा उठाये गये बिन्दु बाकई सोचनीय हैं, भ्रष्टाचार किसी भी तंत्र के लिये दीमक जैसा है और उत्तराखण्ड जैसे संसाधन विहीन तथा नवागत राज्य के लिये तो और भी संवेदनशील है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: Ye kesha uttarakhand
« Reply #2 on: December 02, 2009, 03:01:09 PM »

Jai Ji,

First of all, a very warm welcome to merapahad portal.

The issue raised by you about the corruption is very shameful. Such corrupt officails should be penalised. 

Today there is economic crisis in Uttarakhand, i am sure most of the budget our ours might of engulfed  by these people.

We have also opened a section in merapahad where people can give details about such incidents.

Jai Dimri

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टैक्स ही क्यों ?
संकेत तो यही मिल रहे हैं कि सूबे का खजाना खाली है। सरकार समझ गई कि इंतजाम न किए तो मुश्किल होगी। कमाई बढ़ाने की कोशिश पर किसी को एतराज होना भी नहीं चाहिए। पर सवाल ये कि क्या टैक्स ही अंतिम विकल्प है? टैक्स बढ़ाते वक्त नौकरशाही को इस सवाल का जवाब जरूर देना चाहिए कि आखिर, आबकारी, खनन व वन से हर साल एक हजार करोड़ कमाने की योजना पर अमल क्यों नहीं हुआ? यह योजना तो सूबे के मुखिया की देख-रेख में ही बनी है। चुपके से यह सवाल तो उठेगा ही कि इसे लागू करने में किन लोगों के हित आड़े आ रहे हैं ? ये तो कोई बात नहीं हई कि सरकार हजार करोड़ की सीधी कमाई की बजाय राज्य की गरीब जनता से 10-20 रुपये टैक्स के रूप में वसूले।

Jai Dimri

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KAILASH PANDEY/THET PAHADI

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Mere hisab se kishi bhi system ki utpatti logo se meelakar hoti hai...aur agar ham corrupt system ki baat karte hain to kahi na kahi uska 1 karan ham bhi hain....


Devbhoomi,Uttarakhand

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जय साहब बिलकुल सही कहा अपने की ये वही कर्म चारी थे जिन्होंने उत्तराखंड राज्य के आन्दोलन के दौरान अपनी नौकरी दाव पर लगा दी थी, और महीनों भर बिना तनखा के काम किया था, क्यों जानते हो क्योंकि उस समय इनको घूस खाने को नहीं मिलती थी, मिलती होगी लेकिन उतनी मात्रा में नहीं इसलिए,इन्होने अपनी नौकरी आन्दोलन के समय दाव पर लगा दी थी वही आज घूस का मजा ले रहे हैं!

सच्चे और इमानदार लोगोने ने तो उत्तराखंड के लिए अपनी प्राणों का बलिदान देकर उत्तराखंड को अलग राज्य का दर्जा दिला दिया है! लेकिन इन रिस्पत्खोरों  ने अपनी नौकरी दाव पर लगाकर आज वही बिना तनख्वा के काम करने का नतीजा है ये घूसखौरी !!!



भ्रष्टाचार अधिकारी,

विजिलेंस ने दो और कर्मचारियों को घूस लेते पकड़ा है। एक रोड़वेज का एआरएम है और दूसरा बाबू। घूस लेना-देना सामान्य बात है पर उत्तराखण्ड के कर्मचारियों का लगातार घूस लेते पकड़ा जाना चैंकाने वाली बात है। यही कर्मचारी थे, जिन्होंने राज्य आन्दोलन के दौरान अपनी नौकरियां दांव पर लगा दी थीं। महीनों बिना तनख्वाह के यह सड़कों पर मोर्चा बांधे रहे। लाठियां खाई और मुकदमे भी झेले। लेकिन राज्य बनने के साथ ही वह जज्बा जाने कहां चला गया। जिनकी बात करते थे उन्हीं से घूस ले रहे हैं। कोई सड़क और पुलों के घपले निपटाने के लिए नोट एंेठ रहा है तो कोई जेब गरम किए बिना फाइल नहीं सरकाता। सोचने वाले सोचें जरूर। वरना लोगों को यह कहने से नहीं रोक पाएंगे कि, इन्होंने आन्दोलन नहीं, दिखावा किया था।

जय डिमरी


Sunder Singh Negi/कुमाऊंनी

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कबीरा तेरी झोपडी, गले काटन के पास। जो करेगा सो भरेगा, तु क्यो भये उदास।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Actually, corruption is one of the obstacle in Uttarkahand Development. Bottom to Top and top to bottom.

Devbhoomi,Uttarakhand

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दोस्तों इस खबर को पड़कर मजा आ गया कास हर जगह हर शर मैं ऐसे ही लोग हो तो मजा आजायेगा,  हर हराम खौर कर्मचारियों,नताओं  को ऐसे ही सजा मिलनी चाहिए !!


ग्रामीणों ने पटवारी को जमकर धुना

कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल)। प्रखंड यमकेश्वर के अंतर्गत पटवारी चौकी तिलधार में ग्रामीणों ने एक पटवारी की जमकर धुनाई कर दी। पटवारी पर ग्रामीण महिलाओं से बदसलूकी का आरोप है। ग्रामीणों ने उक्त पटवारी को तत्काल हटाने की भी मांग की है।

जानकारी के अनुसार, प्रखंड यमकेश्वर के अंतर्गत तिलधार पटवारी चौकी में रह रहे पटवारी द्वारिका प्रसाद की ग्रामीणों ने शनिवार प्रात: जमकर धुनाई कर दी। ग्रामीणों का आरोप था कि पटवारी ने शराब के नशे में धुत्ता होकर ग्रामीण महिलाओं से बदसलूकी की। घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचे तहसीलदार विश्राम सिंह नेगी ने किसी तरह ग्रामीणों को शांत कराया व घायल पटवारी को अपने साथ ले गए।

ग्रामीण पटवारी को चौकी से तत्काल हटाने की भी मांग कर रहे थे। तहसीलदार श्री नेगी ने बताया प्रथमदृष्ट्या जांच के दौरान पटवारी के शराब के नशे में धुत्ता होने की बात सामने आई है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार शाम क्षेत्र का ही एक व्यक्ति पटवारी द्वारिका प्रसाद को अपने साथ घर ले गया था। रात को द्वारिका प्रसाद वहीं रुक गया। बताया जा रहा है कि सुबह उक्त व्यक्ति ने द्वारिका प्रसाद को पुन: शराब पिलाई व पटवारी चौकी को रवाना कर दिया।

 श्री नेगी ने बताया कि पटवारी को चौकी से हटा दिया गया है। साथ ही मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है। उधर, एसडीएम जीसी गुणवंत ने बताया कि आरोपित पटवारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जा रही है।


Source dainik jagran

 

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