Author Topic: Currupt System in Uttarakhand - ये कैसा भ्रष्टाचार है उत्तराखण्ड में?  (Read 37485 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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भ्रष्टाचार के बादशाह है उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड Friday, 22 April 2011 15:20 NNI   

नई दिल्ली। बिमारु कहे जाने वाले बिहार और नक्सली हिंसा से ग्रस्त झारखंड को पीछे छोड़कर उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड इकोनोमिक टाइम्स के करप्शन इंडेक्स में नम्बर वन बन गये हैं। करप्शन के इस ताज़ का पूरा श्रेय दोनों सूबों के मुख्यमंत्रियों को जाता है।


यूपी में मुर्दों के कफन हो या नहीं, लेकिन बेतहाशा मूर्तियों के बनाने के लिये पैसे बहुत हैं। औरतों की इज़्ज़त की कीमत इतनी भी नहीं लगाई जाती की एफ़आईआर तक ठीक से दर्ज की जाए। बड़े-बड़े टेंडर करोड़ो की रिश्वत देकर आसानी से मिल जाते हैं। कुछ ऐसा ही हाल देवभूमि का भी है जहां जंगल कट रहा है, सुखना भूमि घोटानो के तर्ज पर ज़मीन करप्शन से बिक रही है, जहां के जवानों को रोज़गार नहीं मिलता बस देहरादून जाने पर जेल ज़रुर मिल जाती है। हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में पानी बिकना और मुख्यमंत्री कविता सुनाते है..पानी और जवानी की..।


इकोनोमिक टाइम्स के सर्व में यूपी और यूके को करेप्शन में सबसे ज्यादा 8.88 अंक मिले है उसका स्थान आता है बिहार, झारखंड और राजधानी दिल्ली का..। हांलाकि इसके पड़ोसी पंजाब और हरियाणा में कहीं कम भ्रष्टाचार है। इकोनॉमिक टाइम्स की माने तो खाद्य और राशनिंग में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है, उसके बाद नम्बर आता है बिजली और शिक्षा लेकिन खनिज और सड़को पर अच्छा खासा काला धन कमाया जा सकता हैं।

इकोनॉमिक टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में विस्तार से बताया है कि कैसे प्रभाव, लॉबिंग और डर दिखाकर नीलामी और टेंडरों में काला धन कमाया जा सकता है। ठीक वैसे ही जैसे नोएडा में बाजार की कीमतों से कहीं कम दामों पर ज़मीन मिल जाती है। सरकारी कीमत और बाजारु कीमत के बीच का काला-धन बंटना है सियासी नेताओं और उद्योगपतियों के बीच..। आजकल सस्ती कीमत पर ज़मीन मिलने के मामले मे कुछ शांति भूषण और प्रशांत भूषण की सुर्खियों में हैं।

इस गोरखधंधे में जो पिसता है, वो है आम-आमदी। पहले एक किसान के रुप में जिसके खेती की ज़मीन सरकार ने औने-पौने दामों पर ख़रीद ली और वो सड़क पर आ गया। फिर सड़को के नाम पर नए-नए टेंडरों से घोटाले हुऐ और बिल्डिंग के मुखौटे के पीछे बिल्डरों और नेताओं ने पैसा कमाया। इसके बाद भी आम-आदमी भी पिस्ता है जो अपना पसीना बेचकर पैसा जोड़कर किसानों से सस्ती खरीदी ज़मीन को उंची कीमत देकर खरीदने पर मजबूर हैं।

इकोनॉमिक टाइम्स के सर्वे में यूपीए सरकार की हालत भी पतली ही दिखाई देती है, जिसे 77 फीसदी लोग फिक्स या भ्रष्ट मानते हैं। लेकिन आज हालात को लोकपाल बिल बनाने वाली अन्ना की टीम की भी पतली है। यूपी और यूके के सिर भले ही भ्रष्टाचार का ताज़ है लेकिन इस ताज़ में तिनके हमने ही जोड़े हैं, भ्रष्टाचार को बढ़ावा देकर..।


http://www.nnilive.com/component/content/article/42-2010-10-12-10-12-47/4229-most-crapted-states-are-up-and-uk.html


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Complaint against Nishank, minister for Kumbh irregularities
« Reply #101 on: April 25, 2011, 02:06:33 AM »
Complaint against Nishank, minister for Kumbh irregularities

PTI | 04:04 PM,Apr 24,2011

Dehra Dun, Apr 24 (PTI) A complaint has been filed against Uttarakhand Chief Minister Ramesh Pokhriyal Nishank, one of his cabinet colleagues and an official in a local court here for alleged financial irregularities in the conduct of Mahakumbh Mela at Haridwar last year, as pointed out by the CAG report. The complaint against Nishank, Kumbh Mela Minister Madan Kaushik and the then Kumbh Mela officer Anand Bardhan was filed in the court of Dehra Dun Chief Judicial Magistrate (CJM) under IPC sections 120 B (criminal conspiracy) and 409 (breach of trust by public servant) yesterday, said petitioner J D Jain, a senior advocate. Jain contended before CJM Kunwar Amanendra Singh that the recent report of Comptroller and Auditor General (CAG) has also revealed that wide-spread irregularities happened while conducting the Mahakumbh mela that took place during Jan-Apr last year. The CJM has fixed May 2 as the next date for hearing, he added. The CAG report has said that wasteful, avoidable and unauthorised expenditure of nearly Rs 43 cr was incurred during the mela. Of the total expenditure of Rs 590 cr on the mela, the Centre contributed Rs 565 cr. When contacted, Uttarakhand Advocate General S N Babulkar said as and when the court asks the state government, a suitable reply would be filed.


http://ibnlive.in.com/generalnewsfeed/news/complaint-against-nishank-minister-for-kumbh-irregularities/660455.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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CAG raps U''khand govt for financial bungling during Kumbh mela
« Reply #102 on: April 25, 2011, 07:04:45 AM »
CAG raps U''khand govt for financial bungling during Kumbh mela


PTI | 02:04 PM,Apr 25,2011
Dehradun, Apr 25 (PTI) The Comptroller and Auditor General (CAG) has pulled up the Uttarakhand government for wasteful, avoidable and unauthorised expenditure to the tune of Rs 223 crore in the Maha Kumbh Mela. Based on the CAG report, a criminal complaint has been filed in a court here against Chief Minister Ramesh Pokhriyal Nishank and two others for alleged financial irregularities during the fair organised last year in Haridwar. The report said the performance audit revealed lack of detailed and comprehensive planning such as an integrated plan, lack of coordination among various departments, substandard work and poor management of affairs in various areas. It stated that 54 works with an approved cost of Rs180.07 crore remained incomplete during the fair. Out of 311 approved works, only 82 works were completed before the beginning of the fair. Besides, 43 additional works were executed without prior sanction and five works were sanctioned in an unauthorized manner, the report said. Late release of sanctions created pressure upon executing agencies due to which irregular payment of advances were made to contractors. Moreover, works were taken up by the executing agencies in a hasty manner leading to improper assessment, substandard execution and unfruitful, excess and avoidable expenditure. The CAG said unauthorized expenditure of Rs 19.39 crore for executing 43 works was incurred by 11 departments without prior approval of the government. Improvement, extension of a geologically unsuitable hill bypass road and construction of a road on disputed land in Haridwar led to avoidable expenditure of Rs 11.64 crore, it stated. Strengthening of 29.645 km road was done without approved design and against the guidelines of Indian Road Congress which led to avoidable expenditure of Rs 3 crore, it said. It also said lackadaisical approach toward generation of revenue from parking, providing of tin and water charges by the Mela administration led to loss of Rs 3.85 crore.Accepting arbitrary conditions raised by contractors in negotiations on hiring tin and furniture led to extra expenditure of Rs 4.77 crore. An expenditure of Rs 439.47 crore was incurred till July 2010 by the state government on preparations for the fair for which the total action plan was of Rs 590 crore with Central assistance of Rs 565 crore, the report said. However, the CAG lauded the government for construction and renovation of 3,310 meters of bathing ghats before the beginning of the fair saying it proved to be a milestone which enhanced the capacity of ghats for catering to needs of a large number of pilgrims.


http://ibnlive.in.com/generalnewsfeed/news/cag-raps-ukhand-govt-for-financial-bungling-during-kumbh-mela/661148.html

Devbhoomi,Uttarakhand

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सौरा इंटर कालेज में ठेके पर शिक्षा व्यवस्था
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उत्तरकाशी। राजकीय इंटर कालेज सौरा में तैनात विज्ञान के एक सहायक अध्यापक अपने बदले पढ़ाई के लिए दैनिक मेहनताने पर एक लड़की रखकर स्वयं उपस्थिति लगाकर घर चले जाते हैं। प्रभारी प्रधानाचार्य पर भी कई वित्तीय अनियमितता बरतने का आरोप लगाते हुए अध्यापक अभिभावक संघ ने जिला शिक्षाधिकारी से मिलकर दोनों अध्यापकों के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई है। जिला शिक्षाधिकारी ने खंड शिक्षाधिकारी भटवाड़ी को निरीक्षण कर तीन दिन में जांच रिपोर्ट तलब की है।

पीटीए के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह, जिला कांग्रेस कमेटी के कलम सिंह राणा आदि कई अभिभावकों ने शिकायत की है कि सौरा इंटर कालेज में 10 वर्षों से कार्यरत सहायक अध्यापक एलटी विज्ञान न तो समय पर विद्यालय आते हैं और न ही बच्चों को पढ़ाते हैं। उन्होंने स्थानीय लड़की को अपने बदले पढ़ाई के लिए रखा हुआ है। प्रधानाचार्य भी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं।

 एसोसिएशन ने पूर्व में प्रधानाचार्य का कार्यभार संभालने वाले तथा अब सहायक अध्यापक हिंदी पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने विद्यालय के लिए जो भी खरीददारी की उसका फर्जी वाउचर अपने भाई की दुकान के लगाए।

http://epaper.amarujala.com//svww_index.php

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वृद्धावस्था पेंशन लेने वाले बीडीसी मेंबर को भेजा जेल      , read it please
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पौड़ी गढ़वाल: ब्लॉक कल्जीखाल के क्षेत्र पंचायत सदस्य जयकृत सिंह थपलियाल को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। न्यायालय ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में खांड्यूसैण जेल भेज दिया है।

गौरतलब है कि ब्लॉक कल्जीखाल के तुंदेड गांव क्षेत्र पंचायत सदस्य जयकृत सिंह थपलियाल के खिलाफ समाज कल्याण विभाग ने 30 जून को फर्जी कागजों के आधार पर उम्र 36 की जगह 60 दिखाकर वृद्धावस्था पेंशन लेने का मामला दर्ज किया था। तहरीर में उल्लेख किया गया है कि जयकृत फरवरी 2008 से फरवीर 2010 तक पेंशन आहरित करता रहा। मामला राजस्व पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया। तब से जयकृत पुलिस को चकमा देता रहा। मुकदमा दर्ज होने के 19 दिन बाद जयकृत सिंह ने मंगलवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आत्मसमर्पण किया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में खांड्यूसैंण जेल भेज दिया है।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_8036775.html





Anil Arya / अनिल आर्य

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गौरा देवी कन्या धन योजना के शुरुआती वर्ष में 360 की जगह एक ही बालिका का हो पाया उद्धार  इन कन्याओं का पैसा कहां गया सरकार और इस बार 36 करोड़ का बजट ऐसा नहीं है कि इस योजना पर सरकार पैसा खर्च नहीं कर रही है। वर्ष 2009-10 में 5970 लाभार्थियों के लिए करीब 14 करोड़ रुपये व्यय किए गए। वर्ष 2011-12 के लिए 36 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इससे करीब 14400 लाभार्थियों को फायदा दिया जाना है। इसके उलट लोक सूचना अधिकारी कह रहे हैं कि लंबित आवेदनों के लिए बजट ही नहीं है।  आरटीआई लगाने वाले पर ही की महकमे ने मेहरबानी  सूचना आयोग ने समाज कल्याण सचिव को किया तलब गौरा देवी कन्या धन योजना की शुरुआत वर्ष 2006-07 में बीपीएल या फिर एक खास आय वर्ग में इंटर पास करने वाली कन्याओं के लिए शुरू की गई थी। इसके तहत आगे की पढ़ाई के लिए 25,000 रुपये की एफडी की जाती है। • अमर उजाला ब्यूरो देहरादून। सरकारी योजनाओं के क्या हाल है इसका अंदाजा गौरा देवी कन्या धन योजना को देखकर लगाया जा सकता है। वर्ष 2006-07 के 360 लाभार्थियों में से सिर्फ एक के नाम ही 25,000 रुपये की एफडी कराई गई। वह भी इसलिए कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जवाब देना पड़ रहा था। गौरा देवी कन्या धन योजना के शुरुआती वर्ष में 360 की जगह एक ही बालिका का हो पाया उद्धार  इन कन्याओं का पैसा कहां गया सरकारऔर इस बार 36 करोड़ का बजट ऐसा नहीं है कि इस योजना पर सरकार पैसा खर्च नहीं कर रही है। वर्ष 2009-10 में 5970 लाभार्थियों के लिए करीब 14 करोड़ रुपये व्यय किए गए। वर्ष 2011-12 के लिए 36 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इससे करीब 14400 लाभार्थियों को फायदा दिया जाना है। इसके उलट लोक सूचना अधिकारी कह रहे हैं कि लंबित आवेदनों के लिए बजट ही नहीं है।  आरटीआई लगाने वाले पर ही की महकमे ने मेहरबानी  सूचना आयोग ने समाज कल्याण सचिव को किया तलब गौरा देवी कन्या धन योजना की शुरुआत वर्ष 2006-07 में बीपीएल या फिर एक खास आय वर्ग में इंटर पास करने वाली कन्याओं के लिए शुरू की गई थी। इसके तहत आगे की पढ़ाई के लिए 25,000 रुपये की एफडी की जाती है। • अमर उजाला ब्यूरो देहरादून। सरकारी योजनाओं के क्या हाल है इसका अंदाजा गौरा देवी कन्या धन योजना को देखकर लगाया जा सकता है। वर्ष 2006-07 के 360 लाभार्थियों में से सिर्फ एक के नाम ही 25,000 रुपये की एफडी कराई गई। वह भी इसलिए कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जवाब देना पड़ रहा था। गौरा देवी कन्या धन योजना की शुरुआत वर्ष 2006-07 में की गई थी। हाल यह है कि योजना के लागू होने के शुरुआती दौर में ही सितंबर 2007 के 360 लाभार्थियों में से केवल एक को ही इस योजना का लाभ दिया गया। पौड़ी के नरेश खंतवाल ने आरटीआई के तहत सितंबर 2007 में किए गए आवेदनों की जानकारी मांगी थी।  समाज कल्याण विभाग ने पहले बताया कि यह आवेदन निरस्त किया गया है। बाद में कहा कि आवेदन सही था लेकिन बजट न होने के कारण पैसा नहीं दिया जा सका। अपीलीय अधिकारी के निर्देश पर सिर्फ एक लाभार्थी कुमारी किरन के नाम एफडी कर दी गई। कुमारी किरन आरटीआई के तहत जानकारी मांगने वाले नरेश खंतवाल की पुत्री है। राज्य सूचना आयुक्त प्रभात डबराल ने लोक सूचना अधिकारी के अलग-अलग बयानों को गंभीरता से लेते हुए सचिव समाज कल्याण को तलब किया है। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2008-09 के 462 तथा वर्ष 2007-08 के 412 लाभार्थियों को भुगतान किया गया है। 

Anil Arya / अनिल आर्य

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गौरा देवी कन्या धन योजना के शुरुआती वर्ष में 360 की जगह एक ही बालिका का हो पाया उद्धार
इन कन्याओं का पैसा कहां गया सरकार
और इस बार 36 करोड़ का बजट
ऐसा नहीं है कि इस योजना पर सरकार पैसा खर्च नहीं कर रही है। वर्ष 2009-10 में 5970 लाभार्थियों के लिए करीब 14 करोड़ रुपये व्यय किए गए। वर्ष 2011-12 के लिए 36 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इससे करीब 14400 लाभार्थियों को फायदा दिया जाना है। इसके उलट लोक सूचना अधिकारी कह रहे हैं कि लंबित आवेदनों के लिए बजट ही नहीं है।
आरटीआई लगाने वाले पर ही की महकमे ने मेहरबानी
सूचना आयोग ने समाज कल्याण सचिव को किया तलब
गौरा देवी कन्या धन योजना की शुरुआत वर्ष 2006-07 में बीपीएल या फिर एक खास आय वर्ग में इंटर पास करने वाली कन्याओं के लिए शुरू की गई थी। इसके तहत आगे की पढ़ाई के लिए 25,000 रुपये की एफडी की जाती है।
• अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। सरकारी योजनाओं के क्या हाल है इसका अंदाजा गौरा देवी कन्या धन योजना को देखकर लगाया जा सकता है। वर्ष 2006-07 के 360 लाभार्थियों में से सिर्फ एक के नाम ही 25,000 रुपये की एफडी कराई गई। वह भी इसलिए कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जवाब देना पड़ रहा था।
गौरा देवी कन्या धन योजना के शुरुआती वर्ष में 360 की जगह एक ही बालिका का हो पाया उद्धार  इन कन्याओं का पैसा कहां गया सरकार और इस बार 36 करोड़ का बजट ऐसा नहीं है कि इस योजना पर सरकार पैसा खर्च नहीं कर रही है। वर्ष 2009-10 में 5970 लाभार्थियों के लिए करीब 14 करोड़ रुपये व्यय किए गए। वर्ष 2011-12 के लिए 36 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इससे करीब 14400 लाभार्थियों को फायदा दिया जाना है। इसके उलट लोक सूचना अधिकारी कह रहे हैं कि लंबित आवेदनों के लिए बजट ही नहीं है।  आरटीआई लगाने वाले पर ही की महकमे ने मेहरबानी  सूचना आयोग ने समाज कल्याण सचिव को किया तलब गौरा देवी कन्या धन योजना की शुरुआत वर्ष 2006-07 में बीपीएल या फिर एक खास आय वर्ग में इंटर पास करने वाली कन्याओं के लिए शुरू की गई थी। इसके तहत आगे की पढ़ाई के लिए 25,000 रुपये की एफडी की जाती है। • अमर उजाला ब्यूरो देहरादून। सरकारी योजनाओं के क्या हाल है इसका अंदाजा गौरा देवी कन्या धन योजना को देखकर लगाया जा सकता है। वर्ष 2006-07 के 360 लाभार्थियों में से सिर्फ एक के नाम ही 25,000 रुपये की एफडी कराई गई। वह भी इसलिए कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जवाब देना पड़ रहा था। गौरा देवी कन्या धन योजना के शुरुआती वर्ष में 360 की जगह एक ही बालिका का हो पाया उद्धार  इन कन्याओं का पैसा कहां गया सरकारऔर इस बार 36 करोड़ का बजट ऐसा नहीं है कि इस योजना पर सरकार पैसा खर्च नहीं कर रही है। वर्ष 2009-10 में 5970 लाभार्थियों के लिए करीब 14 करोड़ रुपये व्यय किए गए। वर्ष 2011-12 के लिए 36 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इससे करीब 14400 लाभार्थियों को फायदा दिया जाना है। इसके उलट लोक सूचना अधिकारी कह रहे हैं कि लंबित आवेदनों के लिए बजट ही नहीं है।  आरटीआई लगाने वाले पर ही की महकमे ने मेहरबानी  सूचना आयोग ने समाज कल्याण सचिव को किया तलब गौरा देवी कन्या धन योजना की शुरुआत वर्ष 2006-07 में बीपीएल या फिर एक खास आय वर्ग में इंटर पास करने वाली कन्याओं के लिए शुरू की गई थी। इसके तहत आगे की पढ़ाई के लिए 25,000 रुपये की एफडी की जाती है। • अमर उजाला ब्यूरो देहरादून। सरकारी योजनाओं के क्या हाल है इसका अंदाजा गौरा देवी कन्या धन योजना को देखकर लगाया जा सकता है। वर्ष 2006-07 के 360 लाभार्थियों में से सिर्फ एक के नाम ही 25,000 रुपये की एफडी कराई गई। वह भी इसलिए कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जवाब देना पड़ रहा था। गौरा देवी कन्या धन योजना की शुरुआत वर्ष 2006-07 में की गई थी। हाल यह है कि योजना के लागू होने के शुरुआती दौर में ही सितंबर 2007 के 360 लाभार्थियों में से केवल एक को ही इस योजना का लाभ दिया गया। पौड़ी के नरेश खंतवाल ने आरटीआई के तहत सितंबर 2007 में किए गए आवेदनों की जानकारी मांगी थी।  समाज कल्याण विभाग ने पहले बताया कि यह आवेदन निरस्त किया गया है। बाद में कहा कि आवेदन सही था लेकिन बजट न होने के कारण पैसा नहीं दिया जा सका। अपीलीय अधिकारी के निर्देश पर सिर्फ एक लाभार्थी कुमारी किरन के नाम एफडी कर दी गई। कुमारी किरन आरटीआई के तहत जानकारी मांगने वाले नरेश खंतवाल की पुत्री है। राज्य सूचना आयुक्त प्रभात डबराल ने लोक सूचना अधिकारी के अलग-अलग बयानों को गंभीरता से लेते हुए सचिव समाज कल्याण को तलब किया है। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2008-09 के 462 तथा वर्ष 2007-08 के 412 लाभार्थियों को भुगतान किया गया है। 

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इन भ्रष्टाचारियों के कारनामें शायद कभी कम नहीं होंगें,लेकिन इन सब हरामखोरों को हिसाब- किताब यही देना पडेगा,कोई साले लूले होंगें कोई लंगड़े और किसी को तो कीड़े पड़ेंगें,इन भ्रष्टाचारियों के सामने रोटी पड़ी होगी लेकिन ये खा नहीं सकेंगें,ये उस गरीब जनता के हाय है जिन्होंने अपना कीमती समय बर्बाद करके इन हरामियों को वोट दे कर आज यहाँ तक पहुंचाया,जहां से ये  भ्रष्टाचार शुरू करते हैं

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khoob khawao... .. choro...

tumari ab khair nahi...



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पटवारी की पिटाई से ग्रामीण की मौत
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पौड़ी गढ़वाल,  : बाजार में खरीददारी कर रहे ग्रामीण की पटवारी की पिटाई से मौत हो गई। आरोप है कि इसके बाद पटवारी ने परिजनों को इसे तूल न देने के लिए धमकाया। रिपोर्ट दर्ज कराने गए परिजनों को पटवारी चौकी से खदेड़ दिया गया। दो दिन बाद किसी तरह साहस करके परिजनों ने प्रभारी डीएम को पूरा किस्सा बताया। उन्होंने बताया कि नायब तहसीलदार को जांच सौंप दी गई है। पटवारी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

घटना 17 अगस्त की है। बताया गया कि पट्टी बनगड़स्यूं गांव के टुंगर निवासी महावीर खोलाचौरी बाजार से खरीददारी कर रहे थे, तभी पट्टी पटवारी हरीश चन्द्र पाण्डेय दुकान में धमके और महावीर की पिटाई शुरू कर दी।

 वह महावीर को पीटते हुए पटवारी चौकी ले गए। आरोप है कि चौकी में भी उनकी जमकर पिटाई की गई। घटना के प्रत्यक्षदर्शी खोलाचौरी बाजार के व्यापारी भजन सिंह, मितेन्द्र सिंह व दयाल सिंह का कहना है कि पटवारी महावीर को पीटते हुए चौकी ले गए। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो पटवारी ने उन्हें भी धमकी दी।

बताया गया कि महावीर अगले दिन 18 अगस्त को सुबह चौकी के पास बेहोश मिला। महावीर की पत्‍‌नी प्रभा उन्हें जिला चिकित्सालय पौड़ी लाई, जहां से उन्हें श्रीनगर बेस अस्पताल रैफर कर दिया गया। बेस अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

प्रभा देवी ने यह घटना अपने जेठ व देवर को बताई, इस पर परिवार वाले रिपोर्ट दर्ज कराने पटवारी चौकी खोलाचौरी पहुंचे, लेकिन उन्हें धमकाकर भगा दिया गया। आरोप है कि पटवारी चौकी में उन्हें न सिर्फ बंद करने की धमकी दी गई बल्कि पटवारी ने उनसे कहा कि यदि मामले को तूल दिया तो सब जेल में डाल दिया जाएगा। रविवार को परिजनों ने प्रभारी जिलाधिकारी संजय कुमार को पूरा किस्सा बताया।

'संबंधित पटवारी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा। नायब तहसीलदार जर्नादन गौड़ को इसकी जांच सौंपी गई है।

संजय कुमार, अपर जिलाधिकारी पौड़ी।

महावीर को शराब के नशे में था इसलिए उसे पटवारी चौकी लाया गया किन्तु उसकी मौत कैसे हुई मुझे इसकी जानकारी नहीं है।

हरीश चन्द्र पांडे, पटवारी खोलाचौरी।

 ये पटवारी भी बड़ा रिस्पतखोर होगा हरामी


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6318762.html

 

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