Author Topic: Currupt System in Uttarakhand - ये कैसा भ्रष्टाचार है उत्तराखण्ड में?  (Read 39801 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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अधर में 56 घोटलों की जांच

देहरादून। कांग्रेस शासन के कथित 56 घोटालों की जांच का काम परवान चढ़ता नहीं दिख रहा है। इसके लिए गठित एक सदस्यीय आयोग में अध्यक्ष का पद रिक्त होने से जांच का काम अधर में है। आयोग के लिए हाईकोर्ट से सेवानिवृत्ता जज की तलाश जारी है।

2007 में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने कांग्रेस शासन में तमाम घोटालों को मुद्दा बनाया। प्रचार के दौरान भाजपा की ओर से 56 घोटालों की एक फेरहिस्त भी जारी की गई। कहा गया कि सत्ता में आने पर भाजपा इनकी जांच कराएगी और दोषियों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।

सूबे का मुखिया बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने इंक्वारी कमीशन एक्ट के तहत एक आयोग का गठन कर इन घोटालों की जांच का काम सौंपा। इस आयोग का अध्यक्ष जस्टिस वर्मा को बनाया गया। आयोग को एक साल में रिपोर्ट देने को कहा गया था। यह आयोग शुरुआती दौर में ही काम तेजी से नहीं कर सका। लगभग एक साल तक आयोग ने जांच शुरू ही नहीं की। बाद में जस्टिस वर्मा ने आयोग अध्यक्ष पद से इस्तीफा ही दे दिया। इस पर नए सिरे से हाईकोर्ट से सेवानिवृत्ता जज की तलाश शुरू की गई। लगभग तीन माह तक पद खाली रहने के बाद जस्टिस आरए शर्मा को आयोग का नया अध्यक्ष नामित किया गया। इसके बाद काम तेजी से शुरू हुई। आयोग ने तीन मामलों की जांच पूरी करके अपनी रिपोर्ट सरकार के हवाले कर दी। सरकार ने रिपोर्ट को यह कहते हुए आयोग को वापस कर दिया कि आरोपी अफसरों के नाम साफ तौर चिन्हित किए जाएं। इस बीच आयोग अध्यक्ष की असमय ही मौत हो गई। इसके बाद से ही जांच का काम ठप पड़ा है। सूत्रों का कहना है कि आयोग अध्यक्ष के लिए हाईकोर्ट से सेवानिवृत्ता जस्टिस की तलाश की जा रही है। इस बारे में प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही नए अध्यक्ष की नियुक्ति कर दी जाएगी। जाहिर है कि अलग-अलग वजहों से पिछले तीन सालों 56 घोटालों की जांच का काम नाममात्र का ही हो सका है। भाजपा की कोशिश होगी कि अगले आम चुनाव से पहले ही इसकी रिपोर्ट जनता की अदालत में पेश कर दी जाए।

Source : http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6355312.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Now this shocking news.
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            हद है! शौचालय में भी घोटाला                                                             May 01, 03:08 am                                       बताएं                                               
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                                                                                                                                                                           कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल)। बाड़ खेत चर रही है और लोग तमाशा देख रहे हैं। बीपीएल परिवारों को संबल देने के लिए चलाई जा रही योजनाओं की गंगा में हर कोई हाथ धोने को बेताब है। विशेषकर दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में गरीबों के हक पर मिलजुल कर 'डाका' डाला जा रहा है। ऐसे ही एक मामले में सूचना के अधिकार के तहत ली गई एक जानकारी में पौड़ी जिले के बीरोंखाल प्रखंड में स्वजल परियोजना के तहत बीपीएल परिवारों के लिए बनाए गए शौचालयों में घोटाले का खुलासा हुआ है। इसमें लाखों के हेरफेर की आशंका जताई जा रही है। यहां न केवल बीपीएल परिवारों की बढ़ी हुई फर्जी संख्या दिखा दी गई, बल्कि 76 ऐसे शौचालयों को भी नए निर्माण में दिखा दिया गया, जो पहले से ही मौजूद थे। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में घोटाले की पुष्टि के बाद जिलाधिकारी पौड़ी ने सीडीओ को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की निर्देश दिए हैं।
 विश्व बैंक की सहायता से चलाए जा रहे ग्रामीण पेयजल एवं पर्यावरणीय स्वच्छता परियोजना के अंतर्गत वर्ष 2009 में प्रखंड बीरोंखाल के रसिया महादेव क्षेत्र में बीपीएल परिवारों के लिए शौचालय निर्माण शुरू किया गया। योजना में प्रत्येक बीपीएल परिवार को बतौर प्रोत्साहन राशि 2200 रुपए दिए जाने थे। अगस्त 09 के प्रथम सप्ताह में स्वजल परियोजना प्रबंधक, श्रीनगर ने क्षेत्र की एक समिति को शौचालय निर्माण का जिम्मा सौंप दिया। समिति ने महज 15 दिनों में सात ग्राम पंचायतों में 307 बीपीएल परिवारों के लिए शौचालय निर्माण का दावा करते हुए संबंधित सूची स्वजल परियोजना कार्यालय को सौंप दी। जिस तेजी से निर्माण हुआ, उतनी ही तेजी से स्वजल परियोजना कार्यालय ने मौका-मुआयना किए बगैर  समिति को 6,75,400 लाख का भुगतान  कर दिया। नोएडा निवासी विजय प्रकाश ने सूचना अधिकार अधिनियम के तहत इस संबंध में सूचना मांगी, तब जाकर घोटाला सामने आया। दरअसल, समिति ने जो रिपोर्ट विभाग को सौंपी थी, उसमें ग्राम पंचायत सीली मल्ली, सीली तल्ली, नांगणी, सुगरिया, नऊं, मंगारों, तकुलसारी में शौचालय निर्माण दिखाया। इसमें हकीकत यह है कि क्षेत्र में मात्र 43 शौचालय ही नए बनाए गए के, जबकि 76 ऐसे शौचालयों को भी नए निर्माण में शामिल दिखाया, जो वर्षो पूर्व बनाए गए थे। यह बात भी सामने आई कि समिति ने तीन ग्राम प्रधानों के फर्जी हस्ताक्षरों व मोहर से विभाग में दावा पेश किया था। सात ग्राम सभाओं में वास्तविक बीपीएल परिवारों की संख्या महज 222 है जबकि, समिति ने परियोजना कार्यालय में बीपीएल परिवारों की संख्या 322 दर्ज की थी।
 मामला प्रकाश में आने के बाद जिलाधिकारी दिलीप जावलकर ने जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेंद्र सिंह को मामले की जांच सौंप दी। जांच अधिकारी श्री सिंह ने भी माना कि शौचालय निर्माण के नाम पर घोटाला किया गया है। उन्होंने मामले में स्वजल अधिकारियों की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया। उन्होंने यह भी बताया कि कई स्थानों पर एपीएल परिवारों के लिए शौचालय बना दिए गए। इतना ही नहीं, बीपीएल परिवार को बतौर प्रोत्साहन राशि 2200 के स्थान पर 1800 रुपए की धनराशि ही दी गई। श्री सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित कर दी गई हैhttp://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6377578.html

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गजब: मृतकों को भी इंदिरा आवास आवंटित

 नई टिहरी गढ़वाल। उत्तराखंड में सरकारी महकमो के लिए कुछ भी असंभव नहीं। हाल ही में मसूरी में पर्यटन विभाग ने 'पूर्वजन्म में उत्तराखंड के नागरिक' रहे गाजियाबाद के एक शख्स को दस लाख रुपये का ऋण दे दिया था। अब कीर्तिनगर ब्लाक में इंदिरा आवास योजना के तहत स्वर्गवासियों को मकान आवंटित कर दरियादिली का परिचय दिया गया है। इसके अलावा बीपीएल सूची में भी खासी 'मेहरबानी' दिखाई गई है। किसी 'बेचारे' को सूची में दो-दो बार जगह दी गई तो कुछ ऐसे नाम भी शामिल हैं, जिनका अता-पता ही नहीं है।

टिहरी जिले के कीर्तिनगर ब्लाक का ग्राम जखंड। इसी ग्राम पंचायत में देखने को मिला जिला ग्राम्य विकास अभिकरण की उदारता का यह नमूना। गुरबत का कंबल लपेटे लोग भले ही तारे गिनते हुए रात काटने को मजबूर हों, लेकिन गरीबों के लिए इंदिरा आवास योजना के तहत बने मकान वर्ष 2009-10 में ऐसे लोगों को आवंटित किए गए जो कई साल पहले दुनिया से रुखसत हो चुके हैं। इनमें पहला नाम है भगतराम का। इनका निधन वर्ष 2005 में हो गया था, जबकि दूसरे हैं लुगथिया, जिनकी मृत्यु वर्ष 2008 में हो गई थी। इस ग्राम पंचायत में 'मेहरबानियों' की सूची यहीं तक सीमित नहीं है। बीपीएल सूची में भी यह झलक साफ दिखायी दे रही है। सूची में एक ही शख्स का नाम दो-दो बार है। राम नाम के इस व्यक्ति को क्रमांक 1273 व 1276 में रखा गया है और दो अलग-अलग आईडी क्रमश: 13239 व 13244 दी गई हैं। इतना ही नहीं, सूची में दस ऐसे नाम भी शामिल हैं, जिनका गांव में कोई अता-पता ही नहीं है। यहां यह भी उल्लेख जरूरी है कि पूर्व में किए गए बीपीएल सर्वे में गड़बड़ियां मिली थीं। इसके बाद सरकार ने वर्ष 2009-10 में दोबारा सर्वे कराया, लेकिन हालत वहीं के वहीं हैं। ग्रामीण दिगंबर डोभाल व मान सिंह ने बताया कि कुछ समय पूर्व खंड विकास अधिकारी कार्यालय कीर्तिनगर से इंदिरा आवास आवंटन व बीपीएल सूची के बाबत सूचनाएं मांगी गई थीं, लेकिन इसमें अनियमितताएं मिली हैं।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6394982.html

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Mud sludge politics has started in UK.

56 घोटाले: जांच बढ़ेगी आगे


देहरादून। कांग्रेस शासन में हुए कथित 56 घोटालों की जांच एक बार फिर आगे बढ़ने की संभावना है। सरकार ने जांच कर रहे आयोग में हाईकोर्ट से रिटायर जज की तैनाती कर दी है।

2007 के आम चुनाव में भाजपा ने तत्कालीन कांग्रेस शासन में 56 घोटालों की एक फेरहिस्त जारी की। भाजपा ने प्रचारित किया कि सत्ता में आने के बाद इनकी जांच करवाकर दोषियों को दंडित किया जाएगा। सत्ता संभालने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी ने इसकी जांच एक आयोग को सौपी और हाईकोर्ट के रिटायर जज को इसका अध्यक्ष बनाया। पहले अध्यक्ष ने एक साल तक कोई काम नहीं किया और बाद में बीमारी की बात करके आयोग से इस्तीफा दे दिया। इस पर सरकार ने जस्टिस आरए शर्मा को सौंपी। श्री शर्मा ने 56 में से चार घोटालों की जांच पूरी करके सरकार को सौंप दी। बाद में सरकार के आग्रह पर उन्होंने इन प्रकरणों में दोषियों को भी चिन्हित किया। ये रिपोर्ट अभी सरकार के पास ही विचाराधीन है। इस बीच आयोग अध्यक्ष श्री शर्मा की मृत्यु हो गई और जांच का काम फिर से लटक गया।

शासन स्थित सूत्रों ने बताया कि लंबी कवायद के बाद सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिृवृत्ता जज शंभूनाथ श्रीवास्तव को इस आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। आयोग के सचिव और मुख्यमंत्री के अपर सचिव अजय कुमार प्रद्योत ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इस बारे में औपचारिक आदेश भी जल्द ही जारी हो जाएगा। यहां बता दें कि जांच आयोग के अध्यक्ष बनाए गए श्री श्रीवास्तव इस समय राज्य पुलिस शिकायत प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हैं। सूत्रों का कहना है जांच आयोग अध्यक्ष का पद संभालने से पहले उन्हें अपने मौजूदा दायित्व से इस्तीफा देना होगा।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6414247.html

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रिश्वत के साथ सहायक अभियंता गिरफ्तार
Jun 15, 01:52 am
देहरादून। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में सार्वजनिक निर्माण विभाग में तैनात एक सहायक अभियंता को आज राज्य निगरानी विभाग ने एक व्यक्ति से 11 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।

आधिकारिक सूत्रों ने आज यहां बताया कि एक ठेकेदार भूपेन्द्र सिंह भंडारी ने विभाग में शिकायत की थी इसके बाद निगरानी विभाग ने अपना जाल बिछाया और आज जब सहायक अभियंता रणवीर सिंह राठौर ठेकेदार भंडारी से अपने कार्यालय में रिश्वत ले रहा था तभी उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया।

राठौर ने एक बिल को पास करने के एवज में रिश्वत की मांग की थी।
Source : dainik jagran

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   करोड़ो का घोटाला ! आप तो ऐसे न थे निशंक जी?
 
डेटलाइन इंडिया
देहरादून, 22 जून- कवि पत्रकार और साहित्यकार रमेश पोखरियाल निशंक को शायद महाकुंभ के सफल आयोजन ने भी दीर्घायु का आशीर्वाद नहीं दिया। छोटा मोटा नहीं बल्कि पूरे चार हजार करोड़ का घोटाला सामने आने के बाद अब खुद भाजपा के नेता निशंक के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। खुद भाजपा आलाकमान भी आम तोर पर सीधे साधे स्वयं सेवक छवि वाले निशंक की हरकताें से स्तब्ध हैं। 

निशंक को घपला करना भी नहीं आता। दिल्ली के मूल वाली एक बिल्डर कंपनी को खुद अपनी सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का उल्लंघन कर के एक दिन में पचास एकड़ जमीन आवंटित हुई, ऊपर से नीचे तक या नीचे से ऊपर तक सारी अनुमतियां धड़ा धड़ मिलती गई और उसी दिन लगभग चार हजार करोड़ की इस जमीन का पूरा सौदा हो गया। निशंक को सफाई देने के लिए दिल्ली बुलाया गया है और खास तौर पर देहरादून में यह खबर आम हो चली है कि निशंक अब सिर्फ कुछ दिनों के गिने चुने मेहमान रह गए हैं।

उत्तराखंड जैसे राज्य में जहां आम तोर पर भाजपा कई बार सरकार बना चुकी है और अच्छी राजनैतिक स्थिति में हैं, भाजपा को बार बार मुख्यमंत्री बदलने पड़ रहे हैं। भगत सिंह कोश्यारी, भुवन चंद्र खंडूरी और अब निशंक। उत्तराखंड में भाजपा का राजनैतिक रिकॉर्ड धूमिल होता जा रहा हैं। सबसे विचित्र बात तो यह है कि निशंक को मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में यही बात गई थी कि उनकी छवि साफ हेै और उन पर कभी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा।

उत्ताराखंड में भूमि घोटाले के डेटलाइन इंडिया के खुलासे के बाद देवभूमि कहे जाने वाले उत्तारांचल में हड़कंप मच गया है। राज्य में विपक्ष में बैठी कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी ने निशंक सरकार से इस्तीफे की मांग कर आंदोलन शुरू कर दिया है। विपक्षी पार्टियों ने पूरे राज्य में मुख्यमंत्री निशंक के पुतले फूंके। डेटलाइन इंडिया के खुलासे और फिर विपक्षी पार्टियों के आंदोलन से राज्य की निशंक सरकार बेहद दबाव में आ गई है।

नई दिल्ली। एक सर्वे की मानें तो पूरी दुनिया में काले धंधों पर हो रहा है लेडी डॉन का कब्जा। ऐसी लेडी डॉन जिनके चेहरे पर मासूमियत है, आंखों में मस्ती है लेकिन इनके कारनामे ऐसे कि बड़े-बड़ों का कलेजा कांप जाए। दुनिया भर के कई शहरों में ये अपने खतरनाक इरादों को अंजाम दे रही हैं। जानकारों की मानें तो पुरुषों की सत्ताा को चुनौती देना इसकी सबसे बड़ी वजह है।

पिछले कुछ सालों में दुनिया भर में महिला गैंगस्टरों की संख्या 1 लाख 32 हजार से बढ़कर 6 लाख 60 हजार हो गई है। महज कुछ सालों में बढ़ी इस संख्या से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह महिलाओं में अपराध के अंधेरे गलियारों में आने की ललक बढ़ी है। फिर वो अमेरिका की एमी बिशप हो या गैंगस्टर लिंडा। अमेरिका की एमी बिशप अपराध की दुनिया में अपना दबदबा बनाने से पहले अलबामा यूनिवर्सिटी में पढ़ाती थी लेकिन एक दिन अचानक उसने फैकल्टी मीटिंग में अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। वजह जो भी हो लेकिन अंजाम खतरनाक था। तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और कई मुश्किल से बच पाए।

ब्रिटेन और अमेरिका में होने वाले संगठित अपराध समूहों में 25 से लेकर 50 फीसदी तक महिलाओं की हिस्सेदारी है। ऐसे ग्रुप को चलाने वाली भी कई महिलाएं ही हैं। अमेरिका के क्रिमिनल रिकॉर्ड में लेडी गैंगस्टर में सबसे ऊपर जिस महिला का नाम आता है वो है लिंडा। अपराध की दुनिया से इस महिला के संबंध पिछले 18 साल से हैं। ब्लैक विडो के नाम से मशहूर इस गैंगस्टर के साथ जिसका भी नाम जुड़ा वो या तो सलाखों के पीछे पहुंच गया या उसकी सरेआम हत्या कर दी गई।

सर्वे के मुताबिक कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। पुरुषों की तुलना में भले ही खौफनाक अपराधों को अंजाम देने में महिलाएं अभी भी पीछे हों लेकिन महिला गैंगस्टरों की संख्या में बेतहाशा इजाफा हुआ है।पहली बार सर्वे में अपराध जगत में महिला गिरोहों की संख्या और उसके बढ़ते दबदबे को दुनिया के सामने लाया गया है लेकिन न्यूयॉर्क के लैटिन क्वींस का उदाहरण देकर यह भी समझाया गया है कि कैसे पारिवारिक और यौन हिंसा की वजह से महिलाएं अपराध की दुनिया में अपने पैर पसार रही हैं।
 
Source : http://www.datelineindia.com/innerpage.aspx?Story_Id=2102

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उत्तराखंड में सामने आया 400 करोड़ का घोटाला
Source :http://khabar.ibnlive.in.com/news/34776/1
ऋषिकेश। देवभूमि ऋषिकेश में गंगा नदी से कुछ ही दूरी पर बड़े जोरशोर से निर्माण कार्य चल रहा है। यहां रिहायशी कॉलोनी बसाई जाएगी लेकिन इस रिहायशी कॉलोनी के निर्माण के पीछे छुपा है उत्तराखंड का ऐसा जमीन घोटाला जिसे चुपचाप बहुत ही चालाकी से अंजाम दिया गया। करीब 400 करोड़ रुपए के इस घोटाले में शामिल हैं सत्ता से जुड़े रसूखदार लोग। यहां प्राइवेट रिहायशी कॉलोनी बनेगी लेकिन जमीन है सरकार की। सबसे चौंकाने वाली बात ये कि इस रिहायशी कॉलोनी को बसाया जा रहा है सालों से बंद पड़ी केमिकल फैक्टरी को शुरू करने के नाम पर।

दरअसल 1964 में कई एकड़ में फैली इस जमीन को उत्तर प्रदेश सरकार ने जाने-माने उद्योगपति नोरजी वाडिया को कैल्शियम कार्बोनेट बनाने वाली फैक्टरी के लिए दिया था। 2007 तक कंपनी पर नौरजी वाडिया और उनके परिवार का अधिकार था। 2002 में कंपनी को बीमार घोषित किए जाने के बाद से ही नौरजी वाडिया इसे दोबारा जिंदा करने के लिए इस जमीन के 15 एकड़ हिस्से को बेचने की सरकार से अनुमति मांग रहे थे लेकिन उनकी दाल नहीं गली।

  
जमीन सरकारी थी और इसे कंपनी को सिर्फ कैल्शियम कार्बोनेट के उत्पादन के लिए दिया गया था इसलिए सरकार ने 1964 में हुए एग्रीमेंट का हवाला देकर इनकार कर दिया। इसपर कंपनी 2005 में बीआईएफआर यानि बोर्ड आफ इंडस्ट्रियल फाइनेंस रिकन्सट्रक्शन की शरण में गई। जनवरी 2007 में बीआईएफआर ने कंपनी के प्रस्ताव को मान लिया। बीआईएफआर के आदेश के मुताबिक कंपनी को 14 महीने के भीतर जमीन बेचकर फैक्टरी को दोबारा शुरू करना था। मगर इसी बीच अचानक कंपनी का मैनेजमेंट बदला और मई 2008 में बीआईएफआर ने अपने पुराने फैसले पर रोक लगा दी। बीआईएफआर का कहना था कि ये फैसला पुराने मैनेजमेंट के लिए था। नए मैनेजमेंट पर ये फैसला लागू नहीं होता।

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U’khand govt behind fraud in construction project
« Reply #37 on: June 24, 2010, 08:11:47 AM »

U’khand govt behind fraud in construction project
                                image                                                                                                                 
Dehradun: Uttarakhand Chief Minister Ramesh Pokhariyal   Nishank’s government fraud came in highlight on behind the construction   of Ganga Regency Project on Biochemical plant.
The map of a building, which was constructing on the land of   ‘Stadria Chemical’, was passed by the Haridwar Development Authority.   This information was given by some authority when asked under the RTI   act.

According to the given information, around fifteen hectares   of land’s map was passed for the construction of ‘Cluster Bhawan’ in the   name of Biochemical plant limited.

The Stardia Chemical’s   director is Mr. Ashod Kumar who is the son of V P Sharma. And this is   the land on which the minister of council assemble of Uttarakhand Mr.   Prakash Panth is denying that he has passed the map for the   construction.

According to the facts the ‘Stardia’ chemicals has   sell only fifteen hectares of land and according to the reports of the   RTI construction of the ‘Bhawan’ has been passed for fourteen hectares   within the premises of the factory.

It is clear that the map of   land on which the construction of ‘Ganga Regency project’ has been   passed has been some how the authorities try to dupe the people. And   this proves that thousand flats in this Ganga Regency Project have made   to make the people dupe.

http://english.samaylive.com/regional/uttarakhand/676466679.html

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कांग्रेश पार्टी का भ्रष्टाचार की खाबे भी पडिये

                                                     भ्रष्टाचार की पोषक है प्रदेश सरकार: कांग्रेस
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सोमेश्वर (अल्मोड़ा): ब्लाक कांग्रेस कमेटी की बैठक धौलरा में हुई। बैठक में प्रदेश सरकार को भ्रष्टाचार का पोषक बताते हुए विभिन्न घोटालों में लिप्त भाजपा सरकार की कड़ी निंदा की गई। कहा गया कि केन्द्र सरकार द्वारा उत्तराखण्ड को पर्याप्त बजट दिए जाने के बावजूद प्रदेश की सरकार झूठे आरोप लगाकर अपनी विफलता से लोगों का ध्यान हटाने का हथकंडा अपना रही है और स्वयं भ्रष्टाचार व घोटालों के आकंठ में डूबी हुई है।

ब्लाक अध्यक्ष लाल सिंह बजेठा ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश की निशंक सरकार झूठे आंकड़े पेश कर प्रदेश की जनता के बीच अपनी पीठ थपथपाने का कुप्रयास कर सस्ती लोकप्रियता हासिल करना चाह रही है। जिसके जवाब में कांग्रेसी जनजागरण कर प्रदेश सरकार की विफलताओं को आम जनता के सम्मुख रखेंगे।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6535777.html

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                               मौत बांट रहे झोलाछाप डाक्टर
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देहरादून। गले में स्टेथोस्कोप, पहनावा भी वही और तेवर भी। 'क्लीनिक' के बाहर लगे बोर्ड पर लिखी डिग्रियों को देखकर अच्छे-अच्छों का सिर चकरा जाए। ऐसे में मजाल क्या कि कोई 'डाक्टर साब' की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, लेकिन जब हर गली मोहल्ले और गांव में ऐसे एक नहीं अनेक डाक्टर नजर आने लगें तो संदेह होना लाजिमी है। जनपद देहरादून में भी न सिर्फ शहरी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आलम इससे जुदा नहीं है। सरकारी कागजों में मुट्ठीभर डाक्टर ही तैनात हैं, ऐसे में बड़ा सवाल यह कि 'सेहत' सुधारने को इतने डॉक्टर आए कहां से। स्पष्ट है यहां भी झोलाछाप की लंबी-चौड़ी फौज खड़ी हो गई है, जो सेहत सुधारने की बजाए और बिगाड़ रही है।

इसे सरकारी तंत्र की नाकामी कहें या फिर आम जनता की मजबूरी, लेकिन यह सच है कि गली-मोहल्लों से लेकर गांवों तक में झोलाछाप डाक्टरों ने अच्छी खासी पैठ बना ली है। आंकड़ों पर गौर करें तो जनपद की करीब पंद्रह लाख की आबादी के लिए सरकारी स्तर पर 147 रेग्यूलर और 35 कान्ट्रेक्चुअल डॉक्टर ही तैनात हैं। स्पष्ट है कि लगभग ग्यारह हजार लोगों पर सरकार महज एक ही डॉक्टर की व्यवस्था कर पाई है। ऐसे में लोगों के पास चारा यही बचता है कि या तो वह शहर में आकर निजी डाक्टरों के सामने पैसा फेंककर इलाज कराएं या फिर गांव में बैठे उन 'डाक्टर साब' की शरण में जाएं, जिनके बारे में यह भी ठीक से स्पष्ट नहीं कि 'डाक्टर साब' असली हैं या नकली। एक अनुमान के अनुसार जनपद में ऐसे डाक्टरों की संख्या पांच से छह सौ के बीच है लेकिन यह भी उतना ही सच है कि जनपद की आधी से ज्यादा आबादी की सेहत इन्हीं झोलाछापों के भरोसे है। जानकारों की मानें तो झोलाछाप डॉक्टरों में बंगाली डॉक्टरों का बोलबाला है। खासियत है कि ये डॉक्टर ग्रामीण इलाकों में दुकानें खोलकर बैठे हैं, जहां लोग जल्दी से डॉक्टरों पर सवाल नहीं उठाते और इनके पास अमूमन हर मर्ज की दवा है। पेट दर्द हो या चीड़-फाड़ का मामला, झोलाछाप डॉक्टर हर प्रकार का मर्ज ठीक करने से पीछे नहीं उठते। आलम यह कि कुछ डॉक्टर जिनकी दुकानें कार्रवाई के बाद सील हुई वह फिर दोबारा दुकानें खोल कर बैठ गए। जनपद देहरादून के ग्रामीण इलाकों सहसपुर, विकासनगर, हर्रटबटपुर, विकासनगर, रायपुर, मेहूंवाला, डोईवाला आदि इलाकों में इनकी अच्छी खासी संख्या है।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6538437.html

 

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