Author Topic: Currupt System in Uttarakhand - ये कैसा भ्रष्टाचार है उत्तराखण्ड में?  (Read 40229 times)

सत्यदेव सिंह नेगी

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इस खबर ने सच में झकझोर कर रख दिया जखी साहब ईश्वर न करे किसी और के साथ कभी ऐसा हो 

साहब! मैं जिंदा हूं
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सरकारी सिस्टम, न सुनता है और न देखता है, यह तो बस फैसले देता है। जिंदे को मृत व मृत को जिंदा दिखाना यहां बाएं हाथ का खेल है। मानवीय संवेदनाओं के लिए इसमें कोई जगह नहीं। चमोली जिले के कर्णप्रयाग इलाके में वृद्धावस्था पेंशन पर गुजर बसर कर रहे एक बुजुर्ग को सरकारी दस्वावेजों में कब मृत घोषित कर दिया, खुद बुजुर्ग सज्जन को भी पता नहीं चला। उन्हें बिना प्रमाण पत्र के किस आधार पर मृत घोषित किया गया, यह अभी रहस्य है। पेंशन लेने गए बुजुर्ग अपनी मौत की खबर सुन सकते में आ गए। अफसरों के सामने वे गिड़गिड़ाए कि 'साहब मै जिंदा हूं', लेकिन सिस्टम को तो प्रमाण चाहिए। ऐसे में उनकी कौन सुनता। खैर, आठ महीने बाद स्टांप पेपर पर अपने जिंदा होने का प्रमाण देने के बाद उनके घर में चूल्हा जलने की उम्मीद बंध गई है।

कर्णप्रयाग ब्लॉक के डिम्मर गांव के 78 वर्षीय मगनलाल वृद्धावस्था पेंशन के सहारे ही जीवन काट रहे हैं। समाज कल्याण विभाग की ओर से इस बुजुर्ग को प्रतिवर्ष चार हजार रुपये बतौर पेंशन मिलते हैं। हर साल मार्च में उन्हें यह राशि प्राप्त हो जाती थी, लेकिन इस वर्ष ऐसा नहीं हुआ। सरकारी काम में अक्सर देर हो जाती है, यह सोचकर वह कुछ दिन पेंशन की राह ताकते रहे। वक्त बीतने के साथ जब घर में जलने वाले चूल्हे की लौ धीमी पड़ने लगी, तो उन्होंने ग्राम प्रधान से संपर्क साधा। प्रधान के कहने पर वह जून, 2010 में समाज कल्याण विभाग के दफ्तर पहुंचे। यहां जब उन्होंने अधिकारियों से पेंशन न मिलने के बारे में जानकारी ली, तो पता चला कि पेंशन बंद कर दी गई है। वजह सुन उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। दरअसल, विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक मगनलाल की दिसंबर, 2009 में मृत्यु हो गई थी। उन्होंने अधिकारियों को बहुत मनाने की कोशिश की कि वह अभी जिंदा हैं, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं। चार महीने हो गए इधर से उधर सरकारी कार्यालयों में एड़ियां घिसते। अब मगनलाल के स्टांप पेपर पर खुद के जीवित होने का प्रमाण देने के बाद विभाग ने उसकी पेंशन को पुन: स्वीकृति दे दी है। इसके बाद उसे पिछले वर्ष की बकाया पेंशन समेत प्रतिवर्ष पेंशन का रास्ता भी खुल गया है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6792098.html

Devbhoomi,Uttarakhand

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माजरी माफी से बांग्लादेशी डॉक्टर गिरफ्तार
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25 सालों से अवैध रूप से देहरादून में रह रहे एक बांग्लादेशी डॉक्टर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह डॉक्टर सपरिवार देहरादून में रहता था। उसने फर्जी कागजात के बल पर भारत का पासपोर्ट भी बनवा लिया था। खूफिया विभाग को इसकी भनक लगने के बाद इसे छापा मारकर गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ नेहरू कालोनी थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया गया है।

खूफिया विभाग के अनुसार नेहरू कालोनी थाना क्षेत्र में माजरी माफी में रहने वाला डॉ.शेखर कुमार विश्वास पुत्र मन्मत विश्वास मूल रूप से बांग्लादेश का निवासी है। बांग्लादेश में वह जिला जसौर के थाना बाथरपुरा के गांव गढ़ का निवासी है। शेखर विश्वास करीब 25 साल पहले अवैध रूप से भारत आया और देहरादून आकर सपरिवार बस गया। यहां पर उसने बंगाली क्लीनिक के नाम से क्लीनिक भी खोल दिया। इसके बाद उसने फर्जी कागजात के बल पर भारत का पासपोर्ट भी बनवा लिया। खूफिया विभाग को इसकी भनक लग गई। इस आधार पर शुक्रवार की देर रात उसे छापा मारकर गिरफ्तार कर लिया गया। उसके विरुद्ध नेहरू कालोनी थाने में मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6798130.html

Devbhoomi,Uttarakhand

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क्या कुकर्मी होती हैं मास्टर जी भी व्वहा रे देवभूमि कैसे कैसे राक्षस आ गए हैं इस देवभूमि में,ऐसे मास्टरों को को जूते मारकर शिक्षा देनी चाहिए ,इस न्यूज़ को पढिये
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अश्लील हरकत के आरोपी शिक्षक की पिटाई
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पोखरी ब्लाक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय भदूड़ा में एक शिक्षक द्वारा छात्र-छात्राओं के साथ अश्लील हरकत करने का मामला प्रकाश में आया है। मामला संज्ञान में आने पर गुस्साए अभिभावकों ने आरोपी अध्यापक की पिटाई कर उसे राजस्व पुलिस को सौंप दिया। ग्राम प्रधान व ग्रामीणों की ओर से मामले की लिखित शिकायत क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारी से की गई है। तहसीलदार का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक ग्राम प्रधान गजेन्द्र सिंह नेगी व ग्रामीणों ने लिखित शिकायत में कहा है कि पिछले कुछ दिनों से पास के ही गांव में पूजा चल रही थी। इससे राजकीय प्राथमिक विद्यालय में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति कम थी। आरोप है कि इसका फायदा उठाकर स्कूल के एक अध्यापक ने क्लास रूम में कुछ छात्र-छात्राओं के साथ अश्लील हरकत की। इस मामले का खुलासा उस समय हुआ जब एक पीड़ित छात्रा ने अपने अभिभावक को इसकी जानकारी दी। इसके बाद अन्य पीड़ित छात्राओं ने भी इसकी पुष्टि की। घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपी अध्यापक की पिटाई कर दी। घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारी राजकिशोर सिंह भंडारी और कानूनगो अमीर बट कुछ होमगार्डो के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने आरोपी अध्यापक को राजस्व पुलिस के हवाले कर दिया। इस संबंध में तहसीलदार बीएस मंडागी का कहना है कि ग्राम प्रधान व ग्रामीणों ने मामले की शिकायत की है, जिसकी जांच कानूनगो को सौंपी गई है। आरोपी राजस्व पुलिस की हिरासत में है या नहीं इस संबंध में उन्होंने कहा कि कानूनगो ही इस बारे में बता सकते हैं।

शिकायतकर्ता ही बन गए पैरोकार

अश्लील हरकत के आरोपी शिक्षक को बचाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। यही वजह है कि एक दिन पूर्व क्षेत्रीय शिक्षाधिकारी से लिखित शिकायत करने वाले ग्राम प्रधान के सुर भी बदलने लगे हैं। इस संबंध में ग्राम प्रधान गजेन्द्र सिंह नेगी का कहना है कि मामला गंभीर नहीं है, जिसे आपस में निपटा लिया जाएगा।

''यह मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं आया है। यदि विभाग से शिकायत की गई है तो मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी''

के सिंह, अपर जिलाशिक्षाधिकारी बेसिक

जनपद चमोली

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6828293.html


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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There is corruption at Ground level also.

पूर्व प्रधान के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा


जागरण कार्यालय, पिथौरागढ़: समाज कल्याण विभाग से विवाहित महिलाओं को विधवा पेंशन देने के मामले में गुरुवार को पूर्व प्रधान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गयी। मामले की पूरी जांच के बाद अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

मालूम हो कि कुछ रोज पूर्व समाज कल्याण विभाग से जाखपुरान क्षेत्र की कुछ विवाहित महिलाओं द्वारा विधवा पेंशन लिये जाने का मामला प्रकाश में आया था। इस पर प्रशासन ने तहसीलदार नरेश दुर्गापाल से मामले की जांच करायी। उन्होंने जांच में कई लोगों को इस फर्जीवाड़े का दोषी पाया। तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश जिला समाज कल्याण अधिकारी को दिये। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने गुरुवार को राजस्व विभाग में पूर्व प्रधान दिनेश प्रसाद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करायी। नायाब तहसीलदार शिवदत्त जोशी ने बताया कि पूर्व प्रधान के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न मामलों में रिपोर्ट दर्ज कर ली गयी है। उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधान द्वारा दिये जाने वाले बयानों के आधार पर आगे अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। कई अन्य लोगों को भी इसी तरह से फर्जी पेंशन दिये जाने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने एक जांच कमेटी गठित कर दी है, जो शीघ्र जांच का कार्य शुरू कर देगी।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6835609.html

Devbhoomi,Uttarakhand

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क्या आज के सूचना प्रोद्योगिकी और तकनीकी युग में भ्रष्टाचार पर लगाम कसना क्या वाकई बहुत मुश्किल है?
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दोस्तों आज भ्रष्टाचार एक ऐसी लाईजाज बिमारी बन गयी है जिससे  विश्व के सभी लोग पीड़ित है. भ्रष्टाचार हर क्षेत्र में देखने को मिल रहा है. कोई भी कार्यक्षेत्र ऐसा नहीं रहा जहाँ आज भ्रष्टाचार देखने को नहीं मिल रहा हो. भ्रष्टाचार पर ज्यादा प्रकाश न डालकर मैं सीधे अपने विषय  पर आता हूँ. कहते हैं कि आवश्यकता अवाशिकार की जननी है और हमारे विज्ञानं ने आज बहुत तरक्की कर ली है. असंभव से असंभव चीज को संभव बना दिया है. हम आज ये कह सकते है कि विज्ञानं के शब्दकोष में आज असंभव शब्द रहा ही नहीं. आज विज्ञानं ने हर क्षेत्र में बहुत तरक्की कर ली है चाहे वो चिकित्सा के क्षेत्र में हो, चाहे शिक्षा के क्षेत्र में हो, चाहे वाणिज्य के क्षेत्र में हो या चाहे सुरक्षा के क्षेत्र में. हर क्षेत्र में विज्ञान ने बहुत तरक्की की है. ज्यादा दूर जाने की बात नहीं है, कुछ समय पहले मोबाइल एक माध्यम और निम्न वर्ग के परिवार के लिए एक कल्पनाशील वस्तु थी, लेकिन आज सभी हाथों में एक नहीं बल्कि २-३ मोबाइल देखने को मिल सकते है. शायद ये विज्ञानं की तरक्की ही है.

 

क्या मनुष्य कभी चाँद पर पहुच सकता हैं, क्या कभी मनुष्य मंगल पर पंहुचा सकता है, क्या कभी मनुष्य आसमान में उड़ सकता है, इन सभी चीजों को विज्ञान ने मुमकिन करा दिया और जिसका उपभोग आज हम सभी लोग कर रहे है.

 

यहाँ तक तो बात सही है लेकिन विज्ञान ने आज हमारी प्रकृति को भी चुनोती दे दी है, वो काम कर दिखाया है जिसकी कल्पना एक सामान्य जन कभी नहीं कर सकता था. आज विज्ञानं की मदद से एक पुरुष गर्भ धारण करके बच्चे को जन्म दे सकता है, विज्ञान ने टेस्ट ट्यूब बेबी उत्त्पन्न किया, मानव क्लोनिंग को सफल बनाया, विभिन लईजाज बिमारियों का इलाज मुमकिन किया तो मेरा ये कहना है कि क्या विज्ञान की मदद से भ्रष्टाचार जैसी बीमारी को ख़तम नहीं किया जा सकता है? क्या विज्ञान के लिए ये संभव नहीं है.

 

दोस्तों मेरा मानना है और केवल मानना ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि जब कभी हमारा वैज्ञानिक वर्ग इस विषय पर चिंतन मनन करेगा, जरूर इसका कुछ समादान निकलेगा. जरूरत है आज विश्व के सारे वैज्ञानिकों को भ्रष्टाचार मुद्दे पर एकत्रित होने की और इसका वैज्ञानिक हल निकालने की.

 

आप लोगों के क्या विचार है? क्या आप लोगों को नहीं लगता कि आज ऐसी वैज्ञानिक तकनीक विकसित होनी चाहिए जिससे हम भ्रष्टाचार जैसी बीमारी पर लगाम कस सकते है ?

धन्याबाद

सुभाष कांडपाल

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उत्तराखंड मैं कागजों में इतना पानी है कि पीने वाला कोई नहीं है ,

गांव में पेयजल संकट, कागजों में लबालब पानी
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चम्पावत: जिला मुख्यालय के जूप-पटवा क्षेत्र में पिछले दो वर्षो से पेयजल की भारी किल्लत लोगों को झेलनी पड़ रही है। कागजों में पूर्ण जलापूर्ति दिखाए इस गांव की स्थिति विभागीय अधिकारियों को बताने के बावजूद कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पेयजल योजना का स्थलीय निरीक्षण कर जांच की मांग की है।

चौड़ासेठी की प्रधान पुष्पा गोस्वामी ने बताया कि उनकी ग्राम पंचायत के जूप पटवा क्षेत्र में पेयजल स्थिति विकट होती जा रही है। ग्रामीण पिछले दो साल से पेयजल संकट के कारण दूषित पानी पीने को विवश हैं। इस मसले को तहसील दिवसों में कई बार उठाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर गांव का स्थलीय निरीक्षण करने की मांग करते हुए जल संस्थान, जलनिगम और स्वजल योजनाओं की जांच कराने को कहा है। प्रधान का आरोप है कि कागजों में उनके गांव को पूर्ण जलापूर्ति दिखाया गया है। पेयजल व्यवस्था ठीक न होने के कारण तीन दर्जन से अधिक लोगों ने अपने संयोजन तक कटवा लिए हैं। विभाग की उदासीनता से वितरण व्यवस्था में असमानता बरती जा रही है, नलों में जितना भी पानी आता है उसका लाभ एक दो परिवार उठा रहे हैं। अन्य के पास बिना पानी मुहैया कराए ही बिल भेज दिया जाता है। उन्होंने मांग की है कि पेयजल बिलों के भुगतान की राशि विभागीय अधिकारियों के वेतन से काटी जाएं। ज्ञापन में शीघ्र व्यवस्था न सुधरने पर सड़क पर उतरने की चेतावनी दी गई है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6875352.html

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फर्जी आईएएस अधिकारी गिरफ्तार
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जो अपने पद का झूठा रौब दिखाकर एक एनजीओ से चार लाख रूपए ठगने की फिराक में था। करन सिंह नाम के आरोपी ने कहा कि उसकी केन्द्रीय कृषि मंत्रालय में अच्छी-खासी पैठ है जिसके बल पर वो संस्था का दो करोड़ का प्रोजेक्ट पास करा सकता है।

देहरादून के कोतवाली में सलाखों के पीछे अपराधी ने सोचा था कि हर बर की तरह इस बार उसका प्लान सफल होगा और वो 4 लाख रूपए आराम से डकार लेगा। लेकिन इस बार प्लान फ्लाप ही नहीं सुपर फ्लॉप हो गया। रायबरेली का रहने वाला करन सिंह नाम का ये व्यक्ति अपने आप को आईएएस बताता था और इसी बूते इसने एक गैर सरकारी संगठन को केन्द्रीय कृषि मंत्रालय से 2 करोड़ का प्रोजेक्ट पास कराने का वादा किया और इसकी एवज में मांगे 4 लाख रूपए। लेकिन संस्था की संचालिका को दाल में कुछ काला लगा और करन सिंह की दाल नहीं गल पाई।

हांलाकि गिरफ्तार व्यक्ति का कहना है कि वो निर्दोष है और उसे फंसाया जा रहा है।

इस मामले के आलावा पुलिस ये भी जानने की कोशिश कर रही है कि इससे पहले करन सिंह कितने लोगों को अपना शिकार बना चुका है।

http://www.samaylive.com/regional-news-in-hindi/uttarakhand-news-in-hindi/103733/dehradun-police-arrested-fake-ias-officer.html

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ये क्या हो रहा है,दूसरों से दी गयी मदद भी सही जगह नहीं पहुँच पा रही है ,
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अपात्रों को बांट दी आपदा राशि
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विगत सितंबर माह में हुई अतिवृष्टि से लम्बगांव बाजार के अरविंद चंद रमोला की दुकान व मकान ध्वस्त हो गई वह दूसरों के घरों में शरण लिए है। वहीं, पनियाल के रामचन्द्र पैन्यूली, वीरेन्द्रदत्त पैन्यूली, पारेश्वर प्रसाद, महिमानंद, ग्राम ल्वारखा के विजय लाल पिछले डेढ़ माह से त्रिपाल के सहारे रात काट रहे हैं। डोडगा थापला में सुरेश का आंगन भी बाढ़ की भेंट चढ़ गया, लेकिन पिछले दिनों हुए सर्वे टीम को इन लोगों का दुख-दर्द नहीं दिखा।

प्रतापनगर में आपदा प्रभावित कई लोग आज भी मुआवजे की राह ताक रहे हैं जबकि कई ऐसे लोगों को मुआवजा दिया गया जिनका नुकसान ही नहीं हुआ है।

सितम्बर में हुई अतिवृष्टि से लम्बगांव बाजार, मुखेम बाजार सहित कई गांव में लोगों के खेत, खलिहान, मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे, लेकिन राजस्व व ग्राम्य विकास विभाग की ओर से किए गए सर्वेक्षण से उन्हें न कोई जगह मिल पाई है और ना ही राहत।

विकासखंड की बात करें तो यहां पर आपदा से प्रभावितों को 1 करोड़ 62 लाख 63 हजार रुपये बांटे गए हैं। जबकि कई पात्र लोगों को कुछ भी नहीं मिल पाया है। राजस्व विभाग के क्षेत्रीय पटवारी एवं ग्राम्य विकास विभाग के जेई ने गांव में जो सर्वे किया वह चौंकाने वाला है।

वहीं, सर्वे में कई ऐसे लोगों को शामिल किया गया है जिनका नुकसान ही नहीं हुआ है। ग्राम पंचायत विजपुर के ग्रामीणों ने ग्राम विकास अधिकारी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने सर्वे में अपने रिश्तेदारों को शामिल किया है, जिनका कोई नुकसान ही नहीं हुआ है।

प्रभावित परिवारों का विवरण

लम्बगांव: दैवीय आपदा सर्वेक्षण में प्रखंड के 56 परिवारों को ए श्रेणी में दर्शाया गया है। जबकि 701 परिवार बी व 2151 परिवार को सी श्रेणी में रखा गया है। इसमें ए श्रेणी को 50 हजार, बी को 10 हजार व सी को 3 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी गई है।

क्या कहते हैं स्थानीय लोग

लम्बगांव: यूथ कांग्रेस के ब्लाक अध्यक्ष उदय रावत, सदस्य जिपं शैला रावत, ज्योति थपलियाल का कहना है कि राजस्व विभाग व ग्राम्य विकास विभाग के द्वारा किए गए सर्वे की जांच होनी चाहिए तथा दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कई पात्र लोग अभी सर्वे में छूटे हैं और उन्हें भी उनका हक मिलना चाहिए। आपदा प्रभावित दिनेश सिंह बिष्ट, प्रकाश सिंह, धनपाल सिंह बत्र्वाल, विनोद सिंह राणा का कहना है उनके मकान, गौशाला आदि क्षतिग्रस्त हुए हैं लेकिन उन्हें अभी तक कुछ नहीं मिला।

क्या कहते हैं अधिकारी

लम्बगांव: तहसीलदार के अनुसार उनके सर्वे में प्रभावित कोई व्यक्ति नहीं छूटा है। प्रभावित सभी पात्रों को मुआवजा दिया गया है। अपात्रों को राहत राशि देने की कोई शिकायत नहीं मिली है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6894972.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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  'God will punish the accused'
 
By: Bipin Kumar Singh[/t][/t][/t]
Date:  2010-11-12
Place: Mumbai
 
 
   
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  Mother of martyr Major Rajesh Singh Adhikari is disappointed with netas using the names of martyrs for selfish motives

As Adarsh Cooperative Housing Society comes to stand for greed, malpractice and favouritism committed at various public offices, the voices of the people the society was originally meant for Kargil war veterans and widows have somehow remained excluded.

MiD DAY, in a 10-part  series, gives you the story of the ultimate sacrifice the Kargil martyrs made, little imagining that it would be so abused by babus and politicos for a plot of land in their name.


Karan Nath played the role of Major Rajesh Singh Adhikari in the film, LOC Kargil

Speaking with their  families, MiD DAY finds out what they have to say about Adarsh Society, a cruel misnomer that has mocked the purpose and the people it was supposed to serve.

Born in a lower middle class family of Tallital in Nainital, Major Rajesh Singh Adhikari got commissioned in the Indian Army in 1993 and joined the 18 Grenadiers.

Major Rajesh was awarded the second highest gallantry award Maha Vir Chakra for his supreme valour and service to the nation.

"He was very jolly and most of the time he would play with his friends. He used to participate in all cultural events in school, singing Pahari songs, but used to surprise us with his annual exam results.
 
He was always the topper," recalls Malti Adhikari, mother of Major Rajesh. "I am proud of my son attaining martyrdom and giving the supreme sacrifice for his nation."

Malti said that she once told him not to join the defence services to which he had promptly replied, "It is you who are asking me not to join the force." She just smiled at him and asked him to carry on.

"He always tried to make others happy and it was his personality that made him popular in Nainital, whether it was school or his boarding," said Malti.
 
"It was his decision to join the army and he made it possible with his hard work. There was something in his heart for the motherland that inspired him to join the forces."

Malti said that though she never got time from tending to the cattle, Major Rajesh always found time to do something for others.

On Adarsh

I felt very embarrassed when I came to know about the scam. Who am I to decide? God will decide the punishment for them.
 
The people involved in the scam have not only spoilt the name of the nation but also made it bankrupt. How could they use the name of martyrs for their selfish motives?

On Martyrdom

On May 30, 1999, as a part of battalion operations to capture Tololing Peak, Major Rajesh Singh Adhikari was tasked to secure the initial foothold. The post was located in a treacherous, mountainous terrain at about 15,000 feet and covered with snow.

He was fired at from two mutually supporting bunkers while he was leading the team. The officer immediately directed the rocket launcher detachment to engage the bunker and without waiting, rushed into the bunker and killed two intruders in close-quarter combat.

Despite suffering grievous bullet injuries, Major Rajesh continued to direct his sub-unit. Refusing to be evacuated, the officer charged at the second bunker and killed one more occupant, leading to the capture of the second bunker at Tololing, before succumbing to his injuries.     
 
http://www.mid-day.com/news/2010/nov/121110-Rajesh-Singh-Adarsh-Society-Kargil-war-martyrs.htm[/td][/tr][/table][/td][/tr][/table]

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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भ्रष्टाचार के जड़े इतनी गहरी हो चुकी है यहाँ तक अमर शहीदों के नाम भी इस प्रकार के घटनाये हो रही है!

आदर्श घोटाला इस भी इसी प्रकार.का!

हम इसकी घोर निंदनीय है !

 


 

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