Author Topic: Currupt System in Uttarakhand - ये कैसा भ्रष्टाचार है उत्तराखण्ड में?  (Read 40279 times)

हेम पन्त

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यह अजीबोगरीब मामला पिथौरागढ में चर्चा का विषय बना हुआ है..
कुछ और गांवों में सुहागिन महिलाओं के नाम पर विधवा पेंशन दिलवाये जाने के कई नये मामले भी सामने आये हैं..


There is corruption at Ground level also.

पूर्व प्रधान के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा


जागरण कार्यालय, पिथौरागढ़: समाज कल्याण विभाग से विवाहित महिलाओं को विधवा पेंशन देने के मामले में गुरुवार को पूर्व प्रधान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गयी। मामले की पूरी जांच के बाद अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

मालूम हो कि कुछ रोज पूर्व समाज कल्याण विभाग से जाखपुरान क्षेत्र की कुछ विवाहित महिलाओं द्वारा विधवा पेंशन लिये जाने का मामला प्रकाश में आया था। इस पर प्रशासन ने तहसीलदार नरेश दुर्गापाल से मामले की जांच करायी। उन्होंने जांच में कई लोगों को इस फर्जीवाड़े का दोषी पाया। तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश जिला समाज कल्याण अधिकारी को दिये। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने गुरुवार को राजस्व विभाग में पूर्व प्रधान दिनेश प्रसाद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करायी। नायाब तहसीलदार शिवदत्त जोशी ने बताया कि पूर्व प्रधान के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न मामलों में रिपोर्ट दर्ज कर ली गयी है। उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधान द्वारा दिये जाने वाले बयानों के आधार पर आगे अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। कई अन्य लोगों को भी इसी तरह से फर्जी पेंशन दिये जाने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने एक जांच कमेटी गठित कर दी है, जो शीघ्र जांच का कार्य शुरू कर देगी।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6835609.html

Devbhoomi,Uttarakhand

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                साहब मैं जिंदा हूं, मरा नहीं   
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उत्तरकाशी,  जागरण कार्यालय : मुर्दा को जिंदा और जिंदा को मुर्दा बनाने में सरकारी  विभागों का कोई सानी नहीं है। सरकारी तंत्र की ऐसी ही एक और बानगी सामने  आई है, जहां एक वृद्ध समाज कल्याण विभाग के दफ्तर में स्वयं के जीवित होने  का यकीन दिला रहा है, लेकिन सरकारी कर्मचारी हैं कि उसे मरा हुआ साबित  करने पर तुले हैं।
डकंडा ब्लाक के ठांडी गांव के रहने वाले 68 वर्षीय दशरथ प्रसाद सेमवाल  की आजीविका का साधन खेती ही है।

 पत्‍‌नी समेत चार बेरोजगार लड़कों व दो  लड़कियों की जिम्मेदारी भी उनके ही बूढ़े कंधों पर है। गरीबी रेखा से नीचे  जीवन यापन के कारण उन्हें समाज कल्याण विभाग के जरिये दी जाने वाली 400  रुपए की वृद्धावस्था पेंशन के लिये चुना गया। इसी वर्ष मार्च, अप्रैल व मई  माह की पेंशन उन्हें मिली। यह धनराशि प्रक्रिया के मुताबिक सहकारी मिनी  बैंक में उनके खाता संख्या 537 में डाली गई थी, लेकिन उसके बाद जून माह से  उनकी पेंशन बंद हो गई।

पांच माह तक इंतजार करने वे विकास भवन स्थित समाज  कल्याण विभाग के दफ्तर में पहुंचे। अपनी पेंशन के बारे में पता किया तो  कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि तुम तो मृत घोषित हो चुके हो। यह भी बताया  गया कि मृतक होने के कारण उनकी दो माह की पेंशन यानी आठ सौ रुपये मिनी  बैंक से विभाग को वापस भी लौटाई गई।

 बीते एक हफ्ते से वे कागजों में खुद  को जिंदा घोषित करवाने की कोशिश में जुटे हैं। कभी पटवारी तो कभी ग्राम  विकास अधिकारी की तलाश में इधर उधर चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या  का हल नहीं निकल पा रहा है। माना जा रहा है कि समाज कल्याण विभाग से  वितरित होने वाली विभिन्न पेंशन योजनाओं में इस तरह की कई गड़बड़ियां हैं।

 इस संबंध में जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि यह चूक हुई है और  जांच कराई जा रही है। कुछ औपचारिकताओं के बाद दशरथ प्रसाद सेमवाल को जीवित  घोषित कर दिया जाएगा।

       
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6903960.html

Devbhoomi,Uttarakhand

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अब ये देखो ------सो चूहे खाकर बिल्ली चली हज को -



भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरे कांग्रसी
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योग गुरू बाबा रामदेव के भाजपा सरकार के एक मंत्री पर लगाये गये घूस लेने के आरोप के बाद कांग्रेसियों ने पुरोला बाजार में प्रदेश सरकार के खिलाफ जुलूस निकाल नारेबाजी कर सरकार का पुतला फूंका और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की।

पुरोला विधायक राजेश जुवांठा के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने प्रदेश की भाजपा सरकार की भ्रष्टनीतियों के खिलाफ बाजार में जुलूस निकाल मुख्य चौराहे पर मुख्य मंत्री का पुतला फूंका। इस मौके पर विधायक राजेश जुवांठा ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार यदि विश्व प्रसिद्ध योग गुरू बाबा रामदेव को नहीं बख्स रही है, तो प्रदेश के आम आदमी का क्या होगा। उन्होंने प्रदेश सरकार पर लग रहे इस तरह के घूसखोरी और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर कहा कि सरकार को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। जुलूस प्रदर्शन व पुतला फूंकने वालों में कांग्रेस के प्रदेश सचिव प्यारे लाल हिमानी, ब्लॉक अध्यक्ष गोविन्द राम नौटियाल, शोभाराम नौडियाल, देवेन्द्र राणा, जयवीर हिमानी, धिरेन्द्र सिंह नेगी, मोहन सिंह नेगी, जयराम चौहान, जनक सिंह, एसएसयूआई के दीपक बिजल्वाण, मदनलाल अग्रवाल, ओमप्रकाश, प्रताप सिंह सहित दर्जनों कांग्रेसी शामिल थे।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6921023.html

Devbhoomi,Uttarakhand

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                गैस पर भारी कालाबाजारी
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रुद्रप्रयाग,  जागरण कार्यालय: जिले में रसोई गैस का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। पूरा  कोटा न मिलने से अब गैस एजेंसियों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। वहीं,  कालाबाजारी पर नियंत्रण न लगने से इसका भारी खामियाजा आम लोगों को भुगतना  पड़ रहा है।

 विगत जुलाई माह से लगातार जनपद में रसोई गैस किल्लत जारी है। मांग के  अनुरूप आपूर्ति न होने से सिलेंडरों के लिए उपभोक्ताओं में मारी-मारी मच  रखी है। जिला मुख्यालय के साथ ही अगस्त्यमुनि व ऊखीमठ ब्लाक मुख्यालय में  एजेंसियां संचालित हो रही हैं। जहां से पूरे जिले के उपभोक्ताओं को गैस  सप्लाई हो रही हैं, लेकिन सभी जगह हालात बदतर बने हुए हैं। आपूर्ति कम  होने से कुछ लोगों को तो गैस मिल रही है, लेकिन कईयों को दो माह तक भी  सिलेंडर नसीब नहीं हो पा रहे हैं।

 मुख्यालय में संचालित जीएमवीएन की मंदाकिनी गैस एजेंसी में 17848  उपभोक्ता जुड़े हुए हैं। प्रति माह लगभग 7500 सिलेंडरों की खपत है, लेकिन  जुलाई से अब तक यहां हर महीने करीब 4000 सिलेंडर ही पहुंच पा रहे हैं।  वहीं, अगस्त्यमुनि गैस एजेंसी में 12284 उपभोक्ता हैं। यहां भी 6200 के  सापेक्ष 3000 के लगभग ही सप्लाई हो पा रही है। ऊखीमठ गैस एजेंसी में 13470  उपभोक्ता हैं, तथा प्रति माह खपत 7500 है। सप्लाई मात्र 3000 की हो पा रही  है।

वहीं, दूसरी ओ कालाबाजारी भी जमकर हो रही है। घरेलू सिलेंडर व्यवसायी  उपयोग में ला रहे हैं। होटल, लॉजों व रेस्तरां के साथ ही अन्य दुकानों में  भी घरेलू गैस उपयोग में लाई जा रही है। पूर्ति विभाग कालाबाजारी पर रोक  नहीं लगा पा रहा है। जिले में 3000 से भी अधिक घरेलू सिलेंडर दुकानों में  प्रयोग किए जा रहे हैं।
वितरण व्यवस्था ठीक करे विभाग

जिला मुख्यालय के साथ ही अन्य क्षेत्रों में रसोई गैस वितरण की अभी तक  ठोस व्यवस्था नहीं है। स्थानीय उपभोक्ता संदीप कप्रवाण, दिनेश कैंतुरा,  गोविंद सिंह राणा का कहना है कि वितरण की ठोस व्यवस्था बनी तो समस्या काफी  हद तक समाप्त हो जाएगी।
पूरा कोटा न मिलने से बढ़ रही दिक्कतें

जिला पूर्ति अधिकारी का कार्यभार देख रहे प्रभारी कलक्ट्रेट अधिकारी  दीपेन्द्र नेगी का कहना है कि रसोई गैस का पूरा कोटा न मिलने से सप्लाई  में दिक्कतें आ रही हैं। यदि आवश्यकतानुसार पूरा कोटा मिलता है तो समस्या  काफी हद तक दूर हो जाएगी। कालाबाजारी को रोकने के पूरे प्रयास किए जा रहे  हैं।
एजेंसियों में गैस आपूर्ति का विवरण

माह      रुद्रप्रयाग      ऊखीमठ      अगस्त्यमुनि
जुलाई   5750      5150      5400   
अगस्त   4190      3546      3692
सितंबर    4284      2538      2790
अक्टूबर    5054      3312       2682
   

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6917135.html

       

Anil Arya / अनिल आर्य

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भ्रष्टाचार का बाजार बहुत बढ़ गया है .
We will have to trust on Judiciary System, CVC, CBI, RTI act, Recently our state governer Ms. Alva has said that 80 % judges are honest. So corruption is everywhere like potato.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Now, Uttarakhand CM stuck in land scam
« Reply #75 on: December 01, 2010, 11:13:52 PM »
Now, Uttarakhand CM stuck in land scam


The Bhartiya Janata Party (BJP) leadership may decide next week the fate of Uttarakhand Chief Minister Ramesh Pokhriyal Nishank who is embroiled in over a dozen scams since he came to power 18 months ago.
Former Chief Minister, Major General (Retd) BC Khanduri, called on senior party leader M Venkaiah Naidu here on Tuesday to discuss about party’s situation in the state.
According to sources in Khanduri's camp Naidu has assured the former CM to handle the Uttarakhand tangle at top priority. The issue is expected to come for discussion with party president Nitin Gadkari after his son's wedding in Nagpur.
Khanduri was scheduled to meet BJP veteran Lal Krishna Advani but got tied up in the all-party meeting convened by Lok Sabha Speaker Meira Kumar for breaking the logjam in Parliament. Thus he was advised to meet Venkaiah Naidu.
The leadership has been trying to put the revolt brewing in Uttarakhand since September on the backburber. However, any further delay in a decision may harm the party's prospects in the next elections. This is because political observers have reported falling credibility of the party under the present leadership of Nishank.
On the heels of Karnataka Chief Minister BS Yeddyurappa's land scams, the party is embarrassed over yet another land scandal by its Uttarakhand chief minister.
The industrial land in Rishikesh worth Rs 400 crores was sold for Rs 13 crores to a Delhi-based realtor, Studia Developers Private Limited.
Nishank, however, passed orders on Sunday to cancel the deal in an attempt to pre-empt a public interest litigation (PIL) before the Uttarakhand High Court just a day before the judgment was reserved after hearing.
The high court, however, passed strictures on the government for reversing its decisions whenever challenged through PILs. It cited earlier incidents when the state government had scraped controversial power projects after a PIL alleging irregularities was filed.
Nishank rushed to New Delhi to explain how he was misled to convert use of the land and sell it to a realtor. However, he failed to impress former chief ministers BC Khanduri and BS Koshiyari. The veterans complained of many corruption charges against the present chief minister. They feared it will affect party's prospects in the next assembly election.
The detractors of Nishank claimed the Adarsh Society scam of Mumbai is too small compared with Rishikesh land deal.
The scam relates to changes in the land-use pattern of a 50.47 acre industrial plot in Dehradun. It was allotted for industrial development back in 1961, with a caveat that it would be reverted to the government if not used for authorised purposes.
Citurdia Bio Chemicals Limited, to which the land was transferred subsequently, applied in 2002 for permission to sell 10 acres of the land. The BJP governments of Koshiyari and Khanduri refused to consider the application as both anticipated a problem.
The chemicals company went bankrupt and that was taken as an alibi by Studia Developers to move the Bureau of Indutrial and Financial Reconstruction (BIFR) to revive the industrial unit and sell a portion of land to settle the company's old liabilities.
Nishank used this alibi and allowed sale of land and change in land use. He claimed he only followed the instructions of BIFR to help revive a unit and he has done no wrong. But all this was until Sunday. He had a change of heart after he realized that the high court hearing on the PIL will strike down the deal.
A week ago a notice was sent to the real estate developer explaining why the permission to sell the land is being cancelled. No attempt to revive the sick unit, the condition on which the sale of plot was permitted, was cited as the reason.
Following this, the developer as well as BIFR was told that the permission for land sale as well as the waiver granted for land conversion charges were being withdrawn.
 
http://www.tehelka.com/story_main48.asp?filename=Ws301110Land_scam.asp

Re: Now, Uttarakhand CM stuck in land scam
« Reply #76 on: December 01, 2010, 11:52:39 PM »

Oh. God.. there is scam after scam. In each, name of CM is on top. What is all going to happen in UK.
 
Now, Uttarakhand CM stuck in land scam


The Bhartiya Janata Party (BJP) leadership may decide next week the fate of Uttarakhand Chief Minister Ramesh Pokhriyal Nishank who is embroiled in over a dozen scams since he came to power 18 months ago.
Former Chief Minister, Major General (Retd) BC Khanduri, called on senior party leader M Venkaiah Naidu here on Tuesday to discuss about party’s situation in the state.
According to sources in Khanduri's camp Naidu has assured the former CM to handle the Uttarakhand tangle at top priority. The issue is expected to come for discussion with party president Nitin Gadkari after his son's wedding in Nagpur.
Khanduri was scheduled to meet BJP veteran Lal Krishna Advani but got tied up in the all-party meeting convened by Lok Sabha Speaker Meira Kumar for breaking the logjam in Parliament. Thus he was advised to meet Venkaiah Naidu.
The leadership has been trying to put the revolt brewing in Uttarakhand since September on the backburber. However, any further delay in a decision may harm the party's prospects in the next elections. This is because political observers have reported falling credibility of the party under the present leadership of Nishank.
On the heels of Karnataka Chief Minister BS Yeddyurappa's land scams, the party is embarrassed over yet another land scandal by its Uttarakhand chief minister.
The industrial land in Rishikesh worth Rs 400 crores was sold for Rs 13 crores to a Delhi-based realtor, Studia Developers Private Limited.
Nishank, however, passed orders on Sunday to cancel the deal in an attempt to pre-empt a public interest litigation (PIL) before the Uttarakhand High Court just a day before the judgment was reserved after hearing.
The high court, however, passed strictures on the government for reversing its decisions whenever challenged through PILs. It cited earlier incidents when the state government had scraped controversial power projects after a PIL alleging irregularities was filed.
Nishank rushed to New Delhi to explain how he was misled to convert use of the land and sell it to a realtor. However, he failed to impress former chief ministers BC Khanduri and BS Koshiyari. The veterans complained of many corruption charges against the present chief minister. They feared it will affect party's prospects in the next assembly election.
The detractors of Nishank claimed the Adarsh Society scam of Mumbai is too small compared with Rishikesh land deal.
The scam relates to changes in the land-use pattern of a 50.47 acre industrial plot in Dehradun. It was allotted for industrial development back in 1961, with a caveat that it would be reverted to the government if not used for authorised purposes.
Citurdia Bio Chemicals Limited, to which the land was transferred subsequently, applied in 2002 for permission to sell 10 acres of the land. The BJP governments of Koshiyari and Khanduri refused to consider the application as both anticipated a problem.
The chemicals company went bankrupt and that was taken as an alibi by Studia Developers to move the Bureau of Indutrial and Financial Reconstruction (BIFR) to revive the industrial unit and sell a portion of land to settle the company's old liabilities.
Nishank used this alibi and allowed sale of land and change in land use. He claimed he only followed the instructions of BIFR to help revive a unit and he has done no wrong. But all this was until Sunday. He had a change of heart after he realized that the high court hearing on the PIL will strike down the deal.
A week ago a notice was sent to the real estate developer explaining why the permission to sell the land is being cancelled. No attempt to revive the sick unit, the condition on which the sale of plot was permitted, was cited as the reason.
Following this, the developer as well as BIFR was told that the permission for land sale as well as the waiver granted for land conversion charges were being withdrawn.
 
http://www.tehelka.com/story_main48.asp?filename=Ws301110Land_scam.asp

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आपदा राशि चोरी में कई लोगों पर शक की सुई
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दैवीय आपदा राहत की चोरी पुलिस व प्रशासन के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। वहीं इस मामले में शक के दायरे में कई लोग आ रहे हैं। दूसरी ओर तहसीलदार व थानाध्यक्ष ने जिला प्रशासन से विभागीय जांच की मांग की है।

मामला दर्ज होने के पांच दिन बाद भी पुलिस व जिला प्रशासन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाया है। थानाध्यक्ष चन्द्रमोहनसिंह नेगी ने बताया कि मामले में जांच जारी है। वहीं, जिलाधिकारी डॉ. पीएस गुसांई ने बताया कि विभागीय जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी।

दूसरी ओर चोरी के आरोप में नामजद राजेन्द्रसिंह नेगी ने कहा कि पटवारी जिस चौकी पर रहते थे, इस घटना के बाद वे उसे छोड़कर नवनिर्मित राजस्व चौकी पर क्यों चले गये। वहीं, पुरानी चौकी पर कई कागजात जलाये गये हैं। उन्होंने शंका जताई कि कहीं बार संघ ने दैवीय आपदा राशि की जांच की मांग करने पर फर्जी कागजात तो नहीं जलाये। वहीं, दूसरे आरोपी देवेन्द्रसिंह ने कहा कि जब वे एक विभागीय कर्मचारी के साथ चौकी पर गये तो पहले से ही कई लोग वहां बैठकर पटवारी के साथ शराब पी रहे थे। शराब पीते देख वह वहां से चला गया था। पूर्व ब्लाक प्रमुख नरेन्द्रसिंह रावत,प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष एडवोकेट श्रवण सती, मंदोधरी पंत, जिला पंचायत सदस्य संगीता असवाल ने कहा कि जब राहत राशि का भुगतान चैक से होना था तो पोखरी तहसील में नगद राशि क्यों बांटी जा रही है। पटवारी को तहसील प्रशासन ने राहत की इतनी बड़ी रकम नगद क्यों दी? इस प्रकरण में तहसील प्रशासन भी दोषी है। इनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

jagran news

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नशेड़ी पुलिस कर्मियों का सतपुली बाजार में हंगामा
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शराब के नशे में धुत चार पुलिस कर्मियों ने रविवार देर रात सतपुली स्थित एक होटल में जमकर उत्पात काटा। पुलिस कर्मी इस कदर बेसुध थे कि वे अपनी राइफल तक रास्ते में ही फेंक गए। व्यापारियों से मिली सूचना के बाद सतपुली थाना पुलिस ने एसपी के निर्देश पर चारों पुलिस कर्मियों का मेडिकल करवाया। चारों को निलंबित करने के साथ ही मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, शराब के नशे में धुत चार पुलिस कर्मी सतपुली बाजार स्थित एक होटल में पहुंचे व हुड़दंग काटने लगे। होटल कर्मियों के आपत्ति जताने पर पुलिसकर्मियों ने उनसे मारपीट भी की। अन्य व्यापारियों से मिली सूचना के बाद मौके पर पहुंचे थाना प्रभारी एसवीएस नेगी ने घटना के संबंध में पुलिस अधीक्षक को सूचित किया। बाद में एसपी के निर्देश पर चारों पुलिस कर्मियों का पीएचसी पाटीसैंण में मेडिकल कराया गया। सिपाही किस कदर नशे में चूर थे इस बात का अंदाजा महज इससे ही लगाया जा सकता था कि उन्हें अपनी रायफलों तक की सुध न थी। थाना पुलिस ने बाजार में ही लावारिस पड़ी इस पुलिस कर्मियों की रायफलों को खोजा।

थाना प्रभारी श्री नेगी ने बताया कि घटना के संबंध में एसपी को सूचित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि चारों पुलिसकर्मी पौड़ी में तैनात थे व मेडिकल के बाद चारों को पौड़ी रवाना कर दिया गया। उधर, अपर पुलिस अधीक्षक जसवंत सिंह ने बताया कि आरोपी पुलिस कर्मी आशीष नैनवाल, अनूप सिंह, अमित रावत व कृष्ण चंद्र रमोला को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

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इंटरनेट पर सड़क से जुड़ा है गांव
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गांव से अभी तक कई किमी दूर है सड़क। पिछले कई दशक से ग्रामीण गांव को यातायात सुविधा से जोड़े जाने की मांग करते आ रहे हैं। ग्रामीणों की मांग पर अब अमल हुआ भी तो पता चला कि इंटरनेट पर यह गांव मोटर मार्ग से जुड़ा दर्शाया गया है। दिल्ली से यह बात पता चलने के बाद तो ग्रामीण जैसे ठगे से रह गए। विभाग भले ही इसे छोटी सी गलती मान रहा है, लेकिन इसके कारण इस गांव का सड़क का सपना पूरा नहीं हो पाया है।

हम बात कर रहे हैं कीर्तिनगर विकासखंड के प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत प्रस्तावित खजरा-कोठार-गोदी मोटर मार्ग की। वर्ष 2002 में यह मार्ग थाती डागर तक ही बन पाया था इसके बाद वर्ष 2003 में इस मार्ग के आगे का निर्माण कार्य प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए चयन कर लिया गया। यहां बता दें कि वर्तमान में इस मोटर मार्ग पर थाती डागर से पिपलीधार, रिंगोलगांव होते हुए कोठार व गोदी गांव तक 4.70 करोड़ की लागत से कुल 11.65 किमी का निर्माण कार्य होना है। पीएमजीएसवाई के तहत चयन होने के बाद पूर्व में लोक निर्माण विभाग व वर्तमान में सिंचाई खंड लोक निर्माण विभाग द्वारा इस मार्ग का सात बार सर्वे करा एस्टीमेट आदि तैयार कराकर स्वीकृति के लिए ग्रामीण अभिकरण विभाग दिल्ली को भेजा गया। जब अधिकारियों ने इस मार्ग से जुड़ने वाले गांवों पर नजर दौड़ाई तो पता चला कि नेट पर विभाग ने कोठार गांव को कोठार लिंक मार्ग से जुड़ा हुआ दर्शाया है। इसके बाद यह पूरा प्रस्ताव मूल रूप में वापस भेज दिया गया। इसके बाद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने इस संबंध में पड़ताल की। इसके बाद ग्रामीणों ने विभाग के अधिकारियों से पत्र व्यवहार किया। तब जाकर नये सिरे से क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत व सांसद से इस गांव को मोटर मार्ग से जोड़ने के संबंध में प्रस्ताव मांगा गया है। इसके बाद इसकी डीपीआर तैयार करा कर इसे दोबारा स्वीकृति को भेजा जाएगा।

क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि

कनिष्ठ उप प्रमुख कीर्तिनगर संजय लाल शाह ने बताया कि कोठार के ग्रामीण पिछले कई सालों से इस मार्ग निर्माण को लेकर संघर्षरत हैं, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण इस मार्ग पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्व में इस मार्ग की डीपीआर कोठार गांव को इंटरनेट पर सड़क सुविधा से जोड़े जाने के कारण वापस लौटा दी गई थी। अब दोबारा से प्रस्ताव मांगे गए हैं जिन्हें शीघ्र ही विभाग में जमा कराए जाएंगे।

विभाग का कहना

पीएमजीएसवाई के सिंचाई खंड लोक निर्माण विभाग नई टिहरी के अधिशासी अभियंता एलएम डुडेजा ने बताया कि पूर्व में भारत सरकार द्वारा कराई गई सर्वे के दौरान यह गांव गलती से इंटरनेट पर दर्शा दिए गए इसमें संशोधन के लिए विभाग ने केंद्र को लिखा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पीएमजीएसवाई को पैसा विश्व बैंक दे रहा है इसलिए वर्ड बैंक के द्वारा जारी दिशा निर्देशों के क्रम में अब फिर से कुछ नये प्रपत्र इस मार्ग निर्माण की डीपीआर में शामिल कर स्वीकृति के लिए भेजे जाएंगे।

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