Author Topic: Currupt System in Uttarakhand - ये कैसा भ्रष्टाचार है उत्तराखण्ड में?  (Read 39724 times)

Devbhoomi,Uttarakhand

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अरे हराम जादों खुद तो मदद नहीं कर सकते हो लेकिन दूसरों से ली गयी मदद के पैसे भी खा गए ,ये रासी भी उब दैवीय आपदा पीड़ितों तक नहीं पहुंची

दैवीय आपदा में लापरवाही पड़ी महंगी
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दैवीय आपदा अब अधिकारियों लिए गले का फंदा बनती जा रही है। आपदा संबंधी प्रस्तावों में देरी पर अब तक अपर जिला शिक्षा अधिकारी पर गाज गिर चुकी और अब वन विभाग व पर्यटन विभाग शासन के निशाने पर हैं।

इस बार अगस्त और सितंबर में बादल जमकर बरसे और राज्य के पहाड़ी जिलों में तबाही मची। ग्रामीण हिस्सों में तमाम सुविधाएं तहस-नहस हो गई। इसके बाद राज्य सरकार ने कुल क्षति का प्रस्ताव व एस्टीमेंट मांगें। जिलाधिकारी गढ़वाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में तमाम विभागों को एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजने के निर्देश दिए गए। शिक्षा विभाग अब तक कोई प्रस्ताव शासन को नहीं भेज पाया है और ऐसे में अपर जिला शिक्षा अधिकारी एसपी सेमवाल को निलंबित कर दिया गया। मुख्यमंत्री पौड़ी जिले पर पैनी निगाह रखे हुए हैं। यहां लोक निर्माण विभाग ने पांच सौ बीस योजनाओं का प्रस्ताव शासन को भेजा है और 22 करोड़ 98 लाख की योजनाएं सरकार को भेजी हैं। जल निगम ने 116 योजनाओं के दो करोड़ 70 लाख, जल संस्थान ने एक करोड़ 78 लाख, लघु सिंचाई ने आठ योजनाओं के 28 करोड़ 23 लाख, सिंचाई विभाग ने 71 योजनाओं के तीन करोड़ 84 लाख, ऊर्जा निगम ने 60 योजनाओं के एक करोड़ 80 लाख व नगर विकास विभाग ने 35 योजनाओं के एक करोड़ दो लाख के प्रस्ताव शासन को भेजे हैं।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7032198.html

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दूध की रखवाली के लिए बिल्ली
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 सरकारी राशन के धंधेबाजों के हाथों बेचने की चर्चाएं तो बहुत होती हैं, लेकिन बीती 20 दिसंबर को जिला मुख्यालय में एक ट्रक में अस्सी बोरे सरकारी गेहूं बरामद होना बड़ी गड़बड़ी संकेत  दे रहा है, हालांकि जिला प्रशासन व पूर्ति विभाग ने इस मामले में अब भी गंभीरता नहीं बरती है। जिला मुख्यालय में एक कबाड़ी की दुकान से सरकारी राशन उठाकर बाहर ले जाया जा रहा था। बताया जा रहा है कि 20 दिसंबर की दोपहर को ट्रक संख्या यूए 07 सी 1555 बस स्टैंड के निकट कबाड़ की दुकान पर पहुंचा। इसमें लदे गेहूं के बोरों को खाली करके दूसरे बोरों में भरा गया। इनमें से अस्सी बोरे ट्रक में लाद दिये गये और उन्हें सब्जियों की क्रेटों से ढक दिया गया। खाली किये गये सौ बोरे पीडीएस यानी सरकारी खाद्यान्न आपूर्ति के थे। यह ट्रक शाम को नगर क्षेत्र से रवाना हो गया, लेकिन इसी बीच इसकी भनक जिला पूर्ति अधिकारी को लग गई और उन्होंने चुंगी बड़ेथी के निकट ट्रक को पकड़ कर सीज कर दिया। ट्रक में सवार अब्दुल वली निवासी बिजनौर व सईद अहमद निवासी सहारनपुर के पास किसी तरह का कागज न मिलने पर उन्हें पुलिस को सौंप दिया गया। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार करने के बाद मंगलवार को कोर्ट में पेश किया और जेल भेज दिया। पुलिस पूछताछ में दोनों ने बताया कि वो गेहूं यहां बेचने के लाये थे, लेकिन नहीं बिकने पर वापस ले जा रहे थे, लेकिन इस संबंध में पूर्ति विभाग कोई कार्यवाही करने से कतरा रहा है। ट्रक में पीडीएस के खाली बोरे पाए जाने के बावजूद ना तो विभाग और ना ही पुलिस इसका पता नहीं लगा पा रही है। जबकि जिले में लंबे समय से सरकारी खाद्यान्न आपूर्ति में गड़बड़ी की शिकायतें आ रही थी।
'हमने ट्रक को सीज कर उसमें सवार दोनों लोगों को पुलिस को सौंप दिया गया है। अब आगे की कार्यवाही पुलिस ही करेगी। अगर पुलिस की जांच में विभाग से जुड़ा कोई व्यक्ति या राशन डीलर इस मामले से जुड़ा पाया गया तो उसके विरुद्ध कार्यवाही होगी'- डी राज, जिला पूर्ति अधिकारी।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7068099.html

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गैस रीफिलिंग के काले खेल का भंडाफोड़
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हल्द्वानी: शहर में अरसे से चल रहे गैस रीफिलिंग के काले कारोबार का भंडाभेड़ हुआ है। पुलिस व पूर्ति विभाग की संयुक्त टीम के ताबड़तोड़ छापों में 30 छोटे-बड़े सिलेंडरों समेत चार धंधेबाज भी हत्थे चढ़ गये। अचानक हुई कार्रवाई के दौरान दो अवैध कारोबारी फरार हो गये।

दरअसल, शहर में गैस रीफिलिगं के जरिये कालाबाजारी की सूचना लंबे समय से प्रशासन को मिल रही थी। इसके तहत एएसपी डॉ. सदानंद दाते के नेतृत्व में रविवार को एसओजी टीम तथा आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने शहर भर में छापेमारी की। सबसे पहले इंदिरा नगर में काले कारोबार के तीन अड्डों पर दबिश दी गई। यहां सत्यप्रकाश की दुकान से दो घरेलू सिलेंडर बरामद हुए। वह महंगे दामों पर गैस बेचता था। पास ही दुकानदार सुमेंद्र के पास चार तथा विक्रम के पास तीन सिलेंडर मिले। ये दोनों ब्लैक में बेचने के लिए घरेलू व कॉमर्शियल सिलेंडरों से छोटे सिलेंडरों में गैस रीफिल करते थे।

इसके बाद टीम गांधीनगर पहुंचीं। यहां दो दुकानों पर छापे मार 12 सिलेंडर जब्त किए गए। मगर दोनों व्यापारी फरार हो गए। वहीं मुखानी में ए.कुमार की दुकान से नौ घरेलू सिलेंडर पकड़े गए। छापे में भारत, इंडेन व एचपी गैस के कुल 20 घरेलू बड़े तथा 10 छोटे सिलेंडरों के अलावा तीन तराजू, पांच बुक, तीन ऑटोमेटिक रिफिल मशीन सहित तमाम अन्य उपकरण जब्त किए गए। एएसपी डा. सदानंद दाते ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ 3/7 आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं सुमेंद्र व विक्रम पर आईपीसी की धारा 285 के तहत भी कार्रवाई हुई है। डा. दाते ने बताया कि अवैध गैस रिफलिंग कारोबार पर कड़ाई से शिकंजा कसा जाएगा। टीम में एसओजी प्रभारी राम सिंह मेहता व पूर्ति विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

एजेंसी की भी मिलीभगत

हल्द्वानी: गैस के अवैध रिफिलिंग कारोबार का दूसरा पहलू भी कम स्याह नहीं है। आम उपभोक्ताओं के लिए गैस एजेंसियों की भले ही होम डिलीवरी सेवा न हो, लेकिन ऊंचे दाम देने वाले इन कारोबारियों तक एजेंसी की पहुंच रहती है। वाहन चालक ही इनके पास तक सिलेंडर पहुंचाते हैं।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7090007.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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सीएम और सीजे की हवाई यात्रा से उठ रहे सवाल

Wednesday, 29 December 2010 08:06 दीपक आजाद भड़ास4मीडिया - कहिन   

देहरादून। हाईड्रो पॉवर, स्टर्डिया और मेडिकल कॉलेज जैसे जमीन घोटाले हाईकोर्ट की टेबल पर पहुंचने के साथ ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के भविष्य का सफर मानों दांव पर लग गया था। अदालत की चौखट से इनके पहुंचने से उपजे शोर-शराबे के बीच पिछले दिनों सरकारी हेलीकॉप्टर से पहाड़ों की सैर पर निकले हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बारेन घोष पर केंद्रित मुंहजबानी कानाफूसियों ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।

अदालत और उसके महानुभाव जजों के खिलाफ ‘कोर्ट आफ कंटेम्ट’ जैसे ब्रहामास्त्र के भय से मीडिया और सियासी गलियारों में दबी जुबान हो रही चर्चाएं कई गंभीर सवाल उठाती हैं। दिल्ली से प्रकाशित मेल टुडे ने इस अप्रत्याशित हवाई दौरों को खबर का रूप देकर इस बहस को कुछ आगे बढ़ाया है। इस बीच स्टर्डिया भूमि घोटाले पर हाईकोर्ट अपना फैसला भी सुना चुका है। फैसले से निशंक सरकार को राहत मिलती दिख रही है। हाईकोर्ट के 28 दिसम्बर को आए इस फैसले में गड़बड़ी करने वाली राज्य सरकार को ही मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

घोटालों में घिरे मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के खिलाफ पिछले कुछ माह में ही एक के बाद एक तीन जनहित याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल की गई। पहला मामला अरबों रुपयों के 56 हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट का नियम विरुद्ध आवंटन कर घपलाबाजी करने का था। इस संबंध में जब जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई तो मुख्यमंत्री ने एकाएक पलटी खाते हुए पॉवर प्रोजेक्ट का आवंटन निरस्त कर अपनी जान बचा ली।

हालांकि इसके साथ ही उनकी मुश्किलें कम नहीं हुई। यह मामला अभी चल ही रहा था, तभी 2000 करोड़ का स्टर्डिया भूमि घोटाले को लेकर एक और याचिका दाखिल कर दी गई। इस मामले में याचिकाकर्ता ने सीबीआई जांच की मांग की। मुख्य न्यायधीश बारेन घोष की अदालत में जब इस मामले की सुनवाई शुरू हुई तो फिर पुराना वाला दांव खेलते हुए मुख्यमंत्री, जिस जमीन का सरकारी न होने का राग अलाप रहे थे, रातोंरात गले की फांस बनता देख इस मामले में भी अपना फैसला पलट दिया। यह मामला हाईकोर्ट में चल ही रहा था कि इस बीच हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बारेन घोष, सपत्नीक राज्य के कई टूरिस्ट हिल स्टेशनों की हवाई सैर पर निकल पड़े। किसी न्यायाधीश के सैर पर निकलना कोई असामान्य घटनाक्रम नहीं होता, लेकिन इस मामले में राज्य सरकार के हेलीकॉप्टर से मुख्य न्यायाधीश का यह हवाई सफर चर्चा के केंद्र में जरूर आ गया।

इस दौरे की चर्चा इसलिए भी हो रही कि राज्य सरकार के मुखिया से ताल्लुक रखने वाली एक के बाद एक याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। आश्चर्य यह है कि राज्य सरकार के पास एक मात्र उडन खटोला है जो उसके मुखिया के हवाई दौरों के काम आता है। तीन दिन इस सरकारी उडन खटोले से हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने राज्य के औली समेत कई हिल स्टेशन का दौरा किया। अब संयोग देखिये कि 19 दिसम्बर के रोज मुख्य न्यायाधीश बारेन घोष, औली के लिए उडान भरते हैं और इसी दिन पीछे-पीछे राज्य के मुख्यमंत्री भी सैफ विंटर गेम्स का जायजा लेने के लिए औली पहुंच गए।

खैर, जब निशंक के खिलाफ जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है तब इन दो प्रमुख महानुभावों का औली दौरा चर्चा के केंद्र में आना अप्रत्याशित भी नहीं है। पर दबी जुबान में मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक सवाल उछाला जा रहा है कि भले ही हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के सरकारी हेलीकॉप्टर से यात्रा करने में कुछ भी अवैधानिक न हो, पर इस यात्रा की टाइमिंग से न्यायपालिका के सामने नैतिक सवाल जरूर खड़े होते हैं। इस पूरी बहस का कुल जमा लब्बोलुआब सरकार के मुखिया पर केंद्रित याचिकाओं पर आने वाले फैसलों की निष्पक्षता पर जाकर टिकता है। इस तरह की शंकाएं और सवाल इसलिए भी मायने रखते हैं कि पिछले दिनों देश की सर्वोच्च अदालत हाईकोर्टों के कतिपय जजों के आचार-व्यवहार पर तल्ख टिप्पणी कर चुकी है।



लेखक दीपक आजाद हाल-फिलहाल तक दैनिक जागरण, देहरादून में कार्यरत

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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High Court cancels Rishikesh housing project
« Reply #84 on: December 29, 2010, 06:40:25 AM »
Nainital: In a setback to the  Uttarakhand government, the High Court has cancelled the controversial Rishikesh housing project and said that an inquiry may be ordered in this regard.

An NDTV report had earlier exposed how rules were flouted to facilitate the housing project and its promoters.

The court said that bureaucrats had misled the government to get land transferred to a private developer. The court also rejected the demand for a Central Bureau of Investigation (CBI) inquiry which Chief Minister Ramesh Pokhriyal Nishank had been keen on.

Last year, the state government gave permission to Mumbai-based Citurgia Biochemical Limited, which was producing chemical carbonate at its Rishikesh plant, to sell a big chunk of its land to a private developer for constructing a housing project. A lockout was declared in the Citurgia factory in 2003 after it became sick and the matter was referred to the Board for Industrial and Financial Reconstruction (BIFR).
 
Though the government claimed that permission for the housing project was accorded under a BIFR revival scheme, opposition parties and NGOs had cast aspersions saying there is no permission for constructing a housing project along the river on environmental grounds.

Read more at: http://www.ndtv.com/article/india/high-court-cancels-rishikesh-housing-project-75574?cp

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सौ करोड़ से ज्यादा का है घोटाला!
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जल विद्युत निगम के पूर्व चेयरमैन योगेंद्र प्रसाद के विरुद्ध विजिलेंस का शिकंजा कसता जा रहा है। विजिलेंस सूत्रों की मानें तो मनेरी भाली-2 परियोजना का घोटाला महज 25 करोड़ नहीं बल्कि सौ करोड़ से ऊपर का है। विजिलेंस इसकी अलग से पड़ताल कर रही है। श्रींग कंस्ट्रक्शन मामले के अलावा योगेंद्र प्रसाद पर दर्ज तीन अन्य घोटालों में भी विजिलेंस जल्द से जल्द चार्जशीट की तैयारी कर रही है। उनकी गिरफ्तारी के भी प्रयास तेज हो गए हैं।

जुलाई 2010 में शासन द्वारा जांच सौंपे जाने के बाद विजिलेंस ने सितंबर में योगेंद्र प्रसाद के विरुद्ध करोड़ों के घोटाले में चार अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए। अक्टूबर में विजिलेंस ने योगेंद्र की आलीशान कोठी पर छापा मारा था। मनेरी भाली-2 घोटाले में शुक्रवार को विजिलेंस ने चार्जशीट दाखिल कर योगेंद्र प्रसाद की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। विजिलेंस सूत्रों की मानें तो यह घोटाला सौ करोड़ रुपये से ऊपर का है। हालांकि, अभी यह जिक्र चार्जशीट में नहीं है, बल्कि इसकी अलग से जांच की जा रही है।

पीओपी का भुगतान श्रींग ने किया

एसपी विजिलेंस बीके जुयाल ने बताया कि योगेंद्र प्रसाद की आलीशान कोठी में पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) का काम भी श्रींग कंपनी द्वारा कराया गया। काम के बाद ऋषिकेश के ठेकेदार को श्रींग कंपनी की तरफ से एक लाख 40 हजार रुपये का भुगतान किया गया। इस बात का जिक्र भी चार्जशीट में किया गया है।

45 गवाहों में 30 अति महत्वपूर्ण

श्रींग मामले में दाखिल चार्जशीट में विजिलेंस ने 45 लोगों को सरकारी गवाह बनाया है। इनमें 30 लोग यूजेवीएनएल व इरीगेशन के अफसर व कर्मचारी हैं। यह सभी 30 गवाह अति महत्वपूर्ण कैटेगरी में हैं। उन्हें कोई नुकसान न पहुंचा सके, ऐसे में विजिलेंस पहले ही सभी के मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज करवा चुकी है।

पूरा फाइनेंसियल सिस्टम तोड़ डाला

विजिलेंस सूत्रों के मुताबिक, घोटालों को अंजाम देने के लिए योगेंद्र प्रसाद द्वारा जल विद्युत निगम का पूरा फाइनेंसियल सिस्टम तोड़ डाला गया। पहले सिंचाई विभाग ही निर्माण कार्यो को देखकर भुगतान के लिए अनुमोदित करता था, लेकिन योगेंद्र प्रसाद ने इसे बदल डाला। वर्ष 2007 में शासन स्तर पर हुई एक बैठक में योगेंद्र ने उन्हें भुगतान की जिम्मेदारी सौंपे जाने की पैरवी की। उन्होंने मनेरी भाली-2 के लिए लिया गया 1100 करोड़ का ऋण का प्रतिदिन का ब्याज 30 लाख बचाने की स्कीम भी बताई और मनेरी भाली-2 प्रोजेक्ट मई-07 तक पूरा करने का दावा किया। जबकि सिंचाई विभाग इसे फरवरी-08 तक पूरा करने की संस्तुति कर चुका था। ऐसे में योगेंद्र अपने प्लान में कामयाब रहे और उन्हें जिम्मेदारी मिल गई। इसके बाद यूजेवीएनएल में कब और किस काम के लिए भुगतान किए जाते रहे, इसका पता निचले अफसरों को नहीं लगा। वे सिर्फ योगेंद्र के कहने पर भुगतान करते रहे। यूजेवीएनएल अफसरों को तो यह तक पता नहीं था कि बिल किस काम के लिए भुगतान हो रहे हैं।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7182526.html

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कुर्सियां खाली, कर्मचारी धूप में
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नई टिहरी, पिछले चार-पांच दिनों के बाद निकली चटक धूप के बाद कर्मचारी समय पर कार्यालय तो पहुंचे, लेकिन वह कार्यालय के भीतर कुर्सियां खाली रही और कर्मचारी बाहर धूप ही सेकते रहे। हालांकि कुछ कर्मचारी जरूर कार्यालय में मौजूद थे। आलम यह है कि मुख्यालय स्थित कई कार्यालय दस बजे के बाद खुल रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से मौसम में परिवर्तन आने के कारण मुख्यालय में ठंड का प्रकोप बढ़ गया था। इसका असर कार्यालयों में भी दिखाई दिया। सर्दी से आम दिनों की तरह कार्यालयों में भी रौनक नहीं दिखी, लेकिन शुक्रवार को सुबह से ही चटक धूप निकली और लोग भी अपनी समस्याओं को लेकर कार्यालय पहुंचे। मौसम साफ होने के कारण हालांकि कर्मचारी भी समय पर अपने कार्यालय पहुंच गए थे लेकिन वह भी कार्यालयों के बाहर धूप सेकते दिखाई दिए।
शुक्रवार सुबह जिला मुख्यालय पर ठीक 10.00 बजे विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय खुल गया था, लेकिन इस दौरान कार्यालय में न के बराबर ही कर्मचारी दिखाई दिए और कार्यालय की अधिकांश कुर्सियां खाली पड़ी हुई थी। जबकि सिंचाई खंड कार्यालय प्रथम सुबह 10.05 पर तो खुल गया था, लेकिन वहां की सभी कुर्सियां खाली नजर आई। हालांकि कर्मचारी कार्यालय तो पहुंच गए थे, लेकिन वह भी ठंड से बचने के लिए गुनगुनी धूप का आनंद लेते रहे।
 लोनिवि पीएमजीवाई प्रथम डिवीजन कार्यालय भी सुबह 10.10 के बाद ही खुला। कई जगहों पर दूर से आए लोग कर्मचारियों को ढूंढते देखे गए। जबकि लोनिवि के अधीक्षण अभियंता कार्यालय में भी सन्नाटा पसरा हुआ था इस कार्यालय के कर्मचारी आफिस पहुंचे तो थे लेकिन कार्यालय परिसर के बाहर धूप सेकने में मशगूल थे। पिछले कुछ समय से जिला मुख्यालय पर स्थित कई कार्यालय सुबह जहां निर्धारित समय पर नहीं खुल रहे हैं। ऐसे में जो लोग इन कार्यालयों में अपने कार्यो को लेकर पहुंच रहे हैं उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इस संबंध में जिलाधिकारी राधिका झा ने बताया कि सभी सरकारी कर्मचारियों को समय पर कार्यालय पहुंचने के पूर्व में आदेश दिए गए हैं। इस मामले में कोई लापरवाही बरती जा रही है तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन की टीम स्वयं ऐसे कार्यालयों का अब निरीक्षण करेंगी।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7213594.html

   

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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हर जगह घोटाले, घोटाले, तभी तो यह राज्य का विकास नहीं हो पा रहा है !

सबसे बड़ा रोड़ा विकास में, भ्रष्टाचार है !

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गैस की कालाबाजारी पर छापा
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    - पांच सिलेंडरों समेत दंपति दबोचे
 हल्द्वानी: रसोई गैस की कालाबाजारी की सूचना पर प्रशासन ने शनिवार को मंडी के पास छापेमारी की। इस दौरान चार घरेलू व एक छोटे सिलेंडर के साथ दंपति को पकड़ा गया। दोनों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 6 ए के तहत मामला जिलाधिकारी को संदर्भित किया गया है।


शनिवार को तहसीलदार प्रत्यूष सिंह को सूचना मिली कि मंडी के पास रहने वाले शंभू नाथ केसरवानी व उनकी पत्नी गीता घरेलू सिलेंडरों की कालाबाजारी में संलिप्त हैं। वे यहां सिलेंडर का अवैध भंडारण कर रीफिलिंग करते हैं। इस पर उन्होंने एक टीम का गठन किया। इसमें क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी हरवंश रावत व एलपी टम्टा को शामिल किया। टीम को साथ लेकर श्री सिंह ने मौके पर छापेमारी की तो वहां इंडेन व भारत कपंनी के दो- दो सिलेंडर के अलावा एक अवैध छोटा सिलेंडर मिला।


 पूछताछ में केसरवानी दंपति ने डीबीसी कनेक्शन होना बताया, लेकिन इसके अलावा तीन अन्य छोटे-बड़े सिलेंडरों के बाबत कुछ नहीं बता सके। इससे शिकायतों की प्रथम दृष्टया पुष्टि होने पर सिलेंडर जब्त कर लिए गये। तहसीलदार श्री सिंह ने बताया कि जब्त सिलेंडरों को भारत एजेंसी के सुपुर्द करते हुए केसरवानी दंपति के खिलाफ धारा 6 ए के तहत अभियोग की सूचना जिलाधिकारी को भेज दी गई है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7220184.html

   

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उन गरीबों के चूल्हे कई दिनों से नहीं जले हैं इन कालाबाजारियों को देखो,गैस की काला बाजारी कर रहे हैं "

 

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