Uttarakhand Updates > Anti Corruption Board Of Uttarakhand - उत्तराखण्ड में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ आम आदमी की मुहिम

Currupt System in Uttarakhand - ये कैसा भ्रष्टाचार है उत्तराखण्ड में?

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Jai Dimri:
भ्रष्टाचार अधिकारी,

विजिलेंस ने दो और कर्मचारियों को घूस लेते पकड़ा है। एक रोड़वेज का एआरएम है और दूसरा बाबू। घूस लेना-देना सामान्य बात है पर उत्तराखण्ड के कर्मचारियों का लगातार घूस लेते पकड़ा जाना चैंकाने वाली बात है। यही कर्मचारी थे, जिन्होंने राज्य आन्दोलन के दौरान अपनी नौकरियां दांव पर लगा दी थीं। महीनों बिना तनख्वाह के यह सड़कों पर मोर्चा बांधे रहे। लाठियां खाई और मुकदमे भी झेले। लेकिन राज्य बनने के साथ ही वह जज्बा जाने कहां चला गया। जिनकी बात करते थे उन्हीं से घूस ले रहे हैं। कोई सड़क और पुलों के घपले निपटाने के लिए नोट एंेठ रहा है तो कोई जेब गरम किए बिना फाइल नहीं सरकाता। सोचने वाले सोचें जरूर। वरना लोगों को यह कहने से नहीं रोक पाएंगे कि, इन्होंने आन्दोलन नहीं, दिखावा किया था।

जय डिमरी

पंकज सिंह महर:
डिमरी जी,
मेरा पहाड़ परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है, कृपया निम्न लिंक पर अपना परिचय देने की कृपा करें-

http://www.merapahad.com/forum/introduction-with-mera-pahad-community/introduction-of-merapahad-community-members/

आप द्वारा उठाये गये बिन्दु बाकई सोचनीय हैं, भ्रष्टाचार किसी भी तंत्र के लिये दीमक जैसा है और उत्तराखण्ड जैसे संसाधन विहीन तथा नवागत राज्य के लिये तो और भी संवेदनशील है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:

Jai Ji,

First of all, a very warm welcome to merapahad portal.

The issue raised by you about the corruption is very shameful. Such corrupt officails should be penalised. 

Today there is economic crisis in Uttarakhand, i am sure most of the budget our ours might of engulfed  by these people.

We have also opened a section in merapahad where people can give details about such incidents.

Jai Dimri:
टैक्स ही क्यों ?
संकेत तो यही मिल रहे हैं कि सूबे का खजाना खाली है। सरकार समझ गई कि इंतजाम न किए तो मुश्किल होगी। कमाई बढ़ाने की कोशिश पर किसी को एतराज होना भी नहीं चाहिए। पर सवाल ये कि क्या टैक्स ही अंतिम विकल्प है? टैक्स बढ़ाते वक्त नौकरशाही को इस सवाल का जवाब जरूर देना चाहिए कि आखिर, आबकारी, खनन व वन से हर साल एक हजार करोड़ कमाने की योजना पर अमल क्यों नहीं हुआ? यह योजना तो सूबे के मुखिया की देख-रेख में ही बनी है। चुपके से यह सवाल तो उठेगा ही कि इसे लागू करने में किन लोगों के हित आड़े आ रहे हैं ? ये तो कोई बात नहीं हई कि सरकार हजार करोड़ की सीधी कमाई की बजाय राज्य की गरीब जनता से 10-20 रुपये टैक्स के रूप में वसूले।

Jai Dimri:

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