Author Topic: Hydro Power Scam in Uttarakhand - उत्तराखंड में बिजली घोटाले  (Read 20462 times)

pankajraj01

  • Newbie
  • *
  • Posts: 1
  • Karma: +0/-0
This is really a very serious concern issue for an underdeveloped state like Uttarakhand. Our state and people are already so backward on development issue. And on the otehr hand...our politicians are busy in making extra bucks by doing these scams.
All the truth of Hydro Power Scam should be brought in front of uttarakhand people and the guilties must be punished.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0

Very true Panakj Ji.

I think Uttarakhandi never saw happy days their life specially in romote hill areas. The objective behind formation of new state was fast development of hill areas and after a long struggle, we got it.

Now it is likely to be 10 yrs to Uttarakhand State and the development is very-2 poor. Unfortunately, scams like this are coming. People who are found guility must be penalized. Be it a CM or others.

This is really a very serious concern issue for an underdeveloped state like Uttarakhand. Our state and people are already so backward on development issue. And on the otehr hand...our politicians are busy in making extra bucks by doing these scams.
All the truth of Hydro Power Scam should be brought in front of uttarakhand people and the guilties must be punished.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0


From : Facebook

Pankaj Rawat पंकज रावत:

This is really a very serious issue for an underdeveloped state like Uttarakhand. Our state and people are already so backward on development issue. And on the other hand...our politicians are busy in making extra bucks by doing these scams.
All the truth of Hydro Power Scam should be brought in front of uttarakhand people and the guilties must be punished.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0

Comments of our Senior Member Shri Charu Tiwari Ji who is Editor in Janpaksh Magazine.
==========

राष्टकवि निशंक को मिले नोबेल

मेरे मोबाइल पर एक मैसेज आया कि उत्तराखण्ड भारत का एक ऐसा राज्य है, जहां के लोग हर दो घंटे में खुशियां मनाते हैं। कैसे.....? लाइट आई ! लाइट आई!! यह हम लोगों भले ही चुटकुला लगे लेकिन यह उतना ही सच है जितना व्यंग्य का मर्म। उर्जा प्रदेश में बिजली मिलने की खुशी ही नहीं प्रदेश को एक ऐसा मुख्यमंत्राी भी मिला है जो अंधेरे को अपनी उपलब्धियों में शुमार करना चाहते हैं। ऐसा मुख्यमंत्राी जो अपनी कविताओं और पुरस्कारों से उत्तराखण्ड का चमत्कृत कर देना चाहते हैं। उन्हें पुरस्कार चाहिये, सिर्फ पुरस्कार। असल में छदम राष्टभक्तों की एक बड़ी फेरहिस्त रही है जो आम लोगों के सवालों को अपनी लफफाजियों में उलझाते रहे हैं। इस समय उत्तराखण्ड की सत्ता में स्वयंभू राष्टभक्त और उनके भाट-चारणों की एक लंबी जमात खड़ी हो गयी है। जिस तरह कभी बिहार की राजनीति में मसखरों की टोलियां सत्ता के गलियारों में घूमा करती थी ऐसी स्थिति आज उत्तराखण्ड की है। बिहार में सपेरों से लेकर लालू चालीसा बनाने वाले मंत्रिमंडल में शामिल रहे हैं। उत्तराखण्ड में सपेरे तो नहीं  हैं लेकिन मुख्यमंत्री निशंक ने अपनी मसखरी से जो राजनीतिक धारा को ईजाद किया है उससे कभी निशंक चालीसा लिखने वाले लोग जरूर दिखाई देंगे। राज्य के किसी शहर में यदि निशंक को राष्टकवि बताने वाले होल्डिंग और पोस्टर दिखाई दें तो किसी को आश्चर्य नहीं करना चाहिये।

   मुख्यमंत्री निशंक इन दिनों एक अभियान चलाये हैं कि महाकुंभ के सफल संचालन के लिये इसे नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जाना चाहिये। उन्होंने ऐसे समय में यह मांग की है जब कुंभ में हुयी दुर्घटना में कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा और कई लोग अपने परिजनों को खोज रहे हैं। असल में निशंक के लिये यह नई बात नहीं है। इससे पहले उन्होने 108 सेवा को भी ग्रीनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल करने की बात कही थी। उसमें उन्होंने तर्क दिया था कि इस आपातकालीन सेवा से एक साल में ही करीब आठ सौ से अधिक महिलाओं ने जन्म दिया। ऐसी बेहुदी मांगों और ढौंग के सहारे ही उन्होंने अपनी राजनीति का सफर तय किया है। उनके गृह जनपद पौड़ी में किसी चारण ने उन्हें राष्टकवि से नवाजा है तो एक प्राफेसर साहब उन्हें सबसे बड़ा राष्टभक्त साबित करने के लिये पुस्तिका छाप चुके हैं। रमेश पोखरियाल निशंक को कवितायें करने का शौक रहा है। स्कूल की पत्रिकाओं के स्तर की इन कविताओं के वे कई संग्रह भी निकाल चुके हैं। जब वे स्वास्थ्य मंत्राी थे तब एक महंगे कागज पर उन्होंने अपनी पुस्तकों और सम्मानों का सचित्र विवरण प्रकाशित कर बताया कि वे एक पहुंचे हुये कवि हैं। लोगों को समझने में सुविधा हो इसके लिये उन्होंने प्रत्येक राष्टपति, प्रधानमंत्राी से लेकर फिल्मी नायक-नायिकाओं के साथ अपने फोटो भी प्रकाशित किये। उसी पुस्तिका से पता चला कि उनके साहित्य पर लगभग आठ छात्र शोध कर रहे हैं। उनके कई कविता संग्रहों का विदेशी और भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। जर्मनी के विश्वविद्यालयों में उनकी रचनायें पाठ्यक्रम में लगाई गयी हैं। मॉरिशस और श्रीलंका में उन्हें साहित्य की सेवा के लिये सम्मान के साथ डीलिट की मानद उपाधि दी गयी। इसके अलावा भी बहुत सारी जानकारियां इस पुस्तिका में हैं जो किसी भी कार्यक्रम के शुरू होने से पहले सभास्थल पर बंटवाई जाती रही हैं। आप हिन्दी साहित्य के छात्र हों और हिन्दी साहित्य में कहीं निशंक का नाम न मिले तो आप इस पुस्तिका से और विदेशी विश्विद्यालयों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह पूरा प्रचार तंत्र वैसा ही जैसा एक गुप्तरोग विशेषज्ञ अपनी तारीफ में अखबार के पहले पृष्ठ पर राष्टपति से पुरस्कार लेते फोटो प्रकाशित करता है। उसकी डिग्रियां ऐसी होती हैं जिनका किसी ने नाम भी नहीं चुना होता है।

   खैर कवितायें लिखना और उन्हें अपने तरीके से प्रचारित करने का पूरा अधिकार निशंक जी को है। उनके पुरस्कारों से किसी को ईर्ष्या भी नहीं होनी चाहिये। पुरस्कार ऐसे ही मिलते हैं। इनमें किसी योगदान का कोई महत्व नहीं होता। अगर होता तो पहाड़ से हिन्दी साहित्य में एक से एक धुरंधर साहित्यकार हुये उन्हें खाने तक के लाले पड़े। शैलेश मटियानी को जीवन भर संघर्ष करना पड़ा। चंद्रकुंवर बर्थ्तवाल को अपनी बीमारी से अलकनंदा के तट पर अपना जीवन त्यागना पड़ा। मौजूदा समय में हिन्दी साहित्य में कई बड़े नाम बड़ी उम्र में भी नौकरियां कर अपने को जीवित रखे हुये हैं। उनकी रचनाओं का न दो इतनी भाषाओं में अनुवाद हुआ, न विदेशी विश्वविद्यालयों के पाठयक्रमों में लगायी गयी, न ही इतने लोगों ने उन पर शोध किया और न ही किसी ने उन्हें राष्टकवि के खिताब से नवाजा। हमें ‘राष्टकवि’ निशंक को देश के अब तक के ‘श्रेष्ठ मुख्यमंत्री’ के रूप में नोबेल पुरस्कार देने की सिफारिश करनी चाहिये। यह इसलिये भी जरूरी है कि उत्तराखण्ड के लोगों को ही दो घंटे में खुशी चाहिये। बिजली आयी! आयी!!

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0
Uttarakhand  Congress demands CM's resignation  over  corruption charges

Dehradun  (Uttarakhand),  May  6 (ANI):

Uttarakhand  leader  of Opposition and Congress leader Harak Singh Rawat has demanded the resignation  of  Chief  Minister Ramesh  Pokhriyal  Nishank  over allegations  of  corruption  in the allotment  of  a  hydro-power project.Rawat accused the ruling Bharatiya Janata Party (BJP)  Government of being corrupt in the allotment of the power project to as many as 56 [color=rgb(154, 0, 3) ! important]private companies[/color].

Rawat  demanded  a  probe into the matter  and  sought  Nishank's resignation.

"The  State government has resorted to corruption in  the  hydro-power  project. We have been demanding a CBI (Central  Bureau  of Investigation)  probe  into the matter. The  Chief  Minister  was justifying  himself  on a national television. We  have  demanded that he should resign on moral grounds," said Rawat.

He  added that the Congress would not allow the State  Government to sell the power project to private companies. The power station in question is capable of generating up to 800 Megawatts.

Meanwhile, Nishank said that the process of allotment would  only take place after all clearances have been received and Memorandum of understanding (MoU) signed with the companies.

"The 56 companies got power projects on the basis of tender. Only those companies got the tender that were technically sound. After the  clearance  of  objections,  MoUs will  be  signed  with  the companies," said Nishank.

"I  want  to  repeat that till now, nobody has got  even  half  a megawatt of power," he added.

The  Chief  Minister  further  said  that  that  a  committee  of secretary-level  officials  has  been formed  to  look  into  the objections raised over the allotment process.

He  added that a committee of Secretary-level officials has  been formed  to  look into the objections raised  over  the  allotment process. (AN

http://news.oneindia.in/2010/05/06/uttarakhandcongress-demands-cms-resignation-overcorrup.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0

Cong wants CBI probe into power project allocation

Rishikesh, May 6 (PTI) Congress today alleged irregularities in the allotment of mini-hydropower projects and demanded a CBI enquiry into award of contracts to private players.

The opposition party also staged a protest at Trivenighat area here demanding a probe by the premier investigative agency.

During protests, Leader of the Opposition, Harak Singh Rawat, accused government of having indulged in irregularities in the allotment of projects.

Fifty six mini-hydropower projects aimed at generating a cumulative of 960 MW of power are set to come up in Uttarakhand. All the contracts were awarded to private player.

http://www.ptinews.com/news/642048_Cong-wants-CBI-probe-into-power-project-allocation

धनेश कोठारी

  • Full Member
  • ***
  • Posts: 232
  • Karma: +5/-0
नौछमी नारेण को गाकर नेगी जी ने निश्चित ही कांग्रेस सरकार पर घात लगाई। जिसका फलित भाजपा के पक्ष में रहा। भले ही इस गीत की व्युतपत्ति निजी आग्रहों के परिणामस्वरुप हुई हो। लेकिन तब भी कांग्रेस सरकार को क्लीन चिट नहीं दी जा सकती है। हां कांग्रेस भाजपा में जहां कई समानतायें रही हैं। वहीं कौन कम और कौन ज्यादा भ्रष्ट है यह जनता को तय करना होगा। एक कलाकार की अपनी सीमाएं हैं। यह भी मान सकते हैं कि अभी इस सरकार से नेगी जी को कोई कथित दिक्कत शायद नहीं है। ऐसे में ‘नौछमी नारेण...’ शैली का गीत भी उनके जरिये अभी बाजार में नहीं आया है।
रही बात इस सरकार की समर्थक यूकेडी की तो वह अभी बिल्ली की तरह से अपनी मूंछों पर भी मलाई लपोड़ने में व्यस्त है। हर बार ऐसे मौके जो नहीं आते हैं। यह तय मानिये कि यूकेडी के पास कोई सैद्धान्तिक नजरिया नहीं है। सो उससे उम्मीद भी बेमानी ही होगी।
ले देकर वर्तमान में उत्तराखण्ड की स्थिति लुटेरों के बीच फंसी द्रुपदा की तरह है। जहां कृष्ण कोई नहीं।
ऐसे में इन्तजार ही करना होगा कि,
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:..............................॥

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0

From :प्रतिबिम्ब बडथ्वाल (Dubai)
 
जी मैने आपाका मेल ग्रुप मे भी देखा था, और आजतकपर भी देखा था ये प्रोग्राम। यही तो एक समस्या है जिसको जितना समाप्त करना चाहो उतना ही बढती जाती है...
 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0


It was a case of hydro project. .. Now see this report below from Dainik Jagran, we are pretty sure there is something fussy in every field.
----------------------------------------------------------------------

डेढ़ करोड़ निचोड़ डेढ़ बूंद भी नहीं :रुद्रप्रयाग। जखोली

रुद्रप्रयाग। जखोली ब्लाक के अंतर्गत डेढ़ करोड़ की लागत से निर्माणाधीन हिलाऊं-जखोली पेयजल योजना धनाभाव से चार वर्ष बाद भी पूरी नहीं हो सकी। योजना पूरी न होने से एक दर्जन गांव के लोग बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।

चार वर्ष पूर्व जखोली ब्लाक के अंतर्गत करीब एक दर्जन गांव को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हिलाऊं- जखोली पेयजल योजना शुरू की गई थी। करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस योजना के पूरा होने से जखोली ब्लाक मुख्यालय सहित ग्राम पंचायत ललूड़ी, बमणगांव, बजीरा, कपणियां, मयाली, देवल, खरियाल समेत कई गांवों को लाभ मिलना था। इस योजना पर अभी तक करीब 99 लाख 34 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। पर पूरा बजट उपलब्ध न होने से इस योजना पर जल निगम पूर्ण निर्माण नहीं कर पाया। इसलिए यह योजना आज तक पूरी बन कर तैयार नहीं हो सकी है। वहीं योजना को मानकों के अनुरुप नहीं बनाया गया है, कई स्थानों पर योजना के पाइप हवा में लहरा रहे हैं, जबकि इन्हें जमीन के अंदर दो फीट से अधिक गहरा खोद कर दबाना चाहिए था। वर्तमान में स्थिति यह है कि करोड़ों की लागत से बन रही इस योजना के पूरा न होने से ग्रामीणों को एक बूंद पानी भी नसीब नहीं हो रहा है। योजना बनने से पहले ही जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई है। कई जगहों पर पाइप लाइनें खुली छोड़ी गई है, जबकि कई जगह पुराने पाइप लाइनों से काम चलाया जा रहा है। प्रधान ललूड़ी सुलील भट्ट, सामाजिक कार्यकर्ता सुखदेव सिंह, क्षेत्र पंचायत सदस्य दीपक भट्ट ने का कहना है कि जल निगम ने लाखों रुपये खर्च तो किए, लेकिन इसका कोई लाभ स्थानीय जनता को नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मानकों को ताक पर रखकर योजना का निर्माण किया गया है, इसके चलते आज एक बूंद भी पानी सप्लाई नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व में निर्माण कार्य के जांच की मांग की थी, लेकिन विभागीय स्तर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया। इस बारे में सहायक अभियंता जल निगम केएल असवाल ने बताया कि चार वर्ष पूर्व योजना जल संस्थान को हस्तांतरित की गई थी और योजना के रख-रखाव का जिम्मा भी संबंधित विभाग का ही है। वहीं जल संस्थान जेई एसपी सेमवाल ने बताया कि अभी तक योजना पर अधूरा ही कार्य हुआ है। करीब एक दर्जन गांव ही लाभांवित हो पाए हैं, जबकि अभी तक कई गांव को जुड़ना बाकी है, इसका कार्य जल निगम से किया जाना है
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6392316.html

tejpal2020

  • Newbie
  • *
  • Posts: 4
  • Karma: +0/-0
TV channel Aaj Tak scandalise things by half truths .1.The biggest scandal in the Power Sector took place during Congress rulein Uttrakhand . It remained unnoticed and unreported by the media .The scandal was the formation of UIPC a Joint Venture between GoU & IL & FS.The GoU  had mortagaged its rights to identify and call bids for HydroPower Projects.Hydro Power potential of entire Uttrakhand was placed at the disposal of this organisation. Real players were private partners.It is good luck of Uttrakhand that this outfit failed to do any substantial progress though they remained the sole authority in this matter for a number of years.IL & FS was to share the monetary benefits with the GoU includingpremium and royalty. Please study the MoU of theJoint Venture and expose your detractors .2.A Company is a Juristic Person irrespective of the fact who itsdirectors and promoters are. One company is to be considered one person as per law laid down by the Supreme Court of India.3.Whether a company has given the right address or not it is for the Registrar of companies to see. GoU is to verify financial and technical strength of the concerned company. In past projects were allotted to those companies who had no experience of executing Hydro Power Projects.The result is before us .They have done nothing to build the projectsand our people are still living in era of utter darkness. We need to allotprojects to those who are performers and not to those who have nil track record.We have allotted projects to such companies which have adequate experience and are enthusiastic to go in for construction at the earliest so that power needs of the people are met.4. It is strange that media remained silent when HEP Project as big as 440 MW Vishnu Prayag Pipalkoti was allotted to a private operator without calling any bid and charging Upfront Premium.

 

Sitemap 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22