Author Topic: Justice for State Activist- ये कैसा कानून, दर-२ ठोकर खा रहे है राज्य आन्दोलनकारी  (Read 11323 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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दोस्तों,

आज हम आपके सामने उत्तराखंड राज्य आन्दोलनकारियों एक ऐसी दस्ता पेश कर रहे है जहाँ पर राज्य के निर्माण में आपने स्वर्स्त्र निछावर कर देने वाले आन्दोलनकारी आज अपने हक़ के लिए दर-२ की ठोकरे खा रहे है! उत्तराखंड सरकार द्वारा आन्दोलनकारियों की चिन्दीकरण की प्रकिया एक बार शुरू की गयी थी लेकिन बाद में कानून आया की जो लोग ३ दिन से कम समय तक जेल में रहे उन्हें राज्य आन्दोलनकारी का कोई फायदा नहीं मिलेगा! क्या यह उचित है?

आज हम मेरापहाड़ में एक इसे  ही आन्दोलन कारी श्री देवेन्द्र सिह जी का विवरण दे रहे है जिन्होंने ने उत्तराखंड राज्य निर्माण में बहुत योगदान दिया जगह-२ पर पुलिस के लाठिया खाई और एक दिन जेल में भी रहे! उन्हाने राज्य सरकार की और से पहचान पत्र तो मिला एक राज्य आन्दोलन कारी होने का लेकिन एक दिन जेल में बिताने पर उन्हें किसी भी प्रकार की सुविधा पेंसन नहीं मिल रही है!

श्री देवेन्द्र सिह उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले से संभंध रखते है! हम यहाँ पर देवेन्द्र सिह जी से दस्तावेज प्रतुत कर रहे है जो सरकार के आँख खोलने के लिए काफी है! सरकार को हर आन्दोलन कारी को बराबर हक़ देना चाहिए चाहे किसी ने एक गोली खाई हो या दस! देवेन्द्र जी ने हमें अन्य बहुत से लोगो का विवरण भी यहाँ पर दिया है जो इस थ्रेड में हम पोस्ट करंगे !

देवेन्द्र जी मेरापहाड़ में उत्तराखंड राज्य निमार्ण के दौरान की अपनी सारे बाते यहाँ पर बतायंगे! आशा है सरकार आपने नियमो में बदलाव लायेगी और इन राज्य आन्दोलन कारियों को भी उचित सम्मान और एनी सुविधाए दे!

आप लोगो की राय भी इस विषय में आमंत्रित है !

एम् एस मेहता

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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We have many evidences given by Mr Devendra which we will post there slowly.

Mr Devendra will post his whole story here.


Barthwal

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यह बहुत ही शर्मशार करने वाली बात है... श्री देवेन्द्र सिंह  जी ने इस पुण्य कार्य मे अपना सह्योग दिया है और उन्हे अपना हक मिलना ही चाहिये! मेरा पहाड की टीम को धन्यवाद ...येसे प्रकरण सब्के ध्यान मे लाने चाहिये और सरकार को इसमे जल्द ही सकारात्मक फैसला देना चाहिये। शुभकामनाये

धनेश कोठारी

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mera pahad ko thanx ki unhon ne uttarakhand aandolan kariyon ki pida ko aawaj di.

main swayam 5 days Tehari main 1994 mein jal raha hun. suchana hai ki chinhit hua hun, lekin eska kya phayada,
khir, pahale es rajay ko neta aur naukarshah kha-pacha len tab shayad aam aadami ko labh milega.


dayal pandey/ दयाल पाण्डे

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" बांटने वाले हो अंधे जहाँ , किसको कितना मिला पूछता कौन है'
नोट गिनता है पर लाशें गिनता नहीं, पूछते हैं सरफिरा कौन है"
ये बल्ली जी वो पंक्तियाँ हैं जो सबकुछ बयां कर रही हैं, देवेंदर जी जैसे अनगिनत आन्दोलन कारी हैं जिनको कुछ नहीं मिलन वाला सरकार का जो पैरामीटर है वो उसके अपने लोगों के हित को ध्यान मैं रख कर बनाया है माफिया और चोरे आन्दोलन कारी हो गए उन्हें इसका फायदा हो गया है जबकि ये सब जानते हैं की राज्य आन्दोलन एक अहिंसात्मक आन्दोलन था जिसमें लोगों से आपने करियर यां तक की पुरे ३ पुश्तों का करियर ख़राब कर लिया है इस पहल पर अगर हम किसी नतीजे तक पहुच सकें तो बहुत ख़ुशी होगी,

हेम पन्त

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उत्तराखण्ड राज्य के लिये संघर्ष करने वाले असली आन्दोलनकारी आज भी दर-दर की ठोकरे खा रहे हैं यह पढकर/जानकर बहुत दुख होता है. देवेन्द्र जी का उदाहरण सामने रखकर शायद हम अन्य लोगों के हकों को भी एक बुलन्द आवाज दे पायेंगे.

यह बहुत शर्मनाक बात है कि देवेन्द्र जी जैसे सैकड़ों सच्चे आन्दोलनकारी अपने हक के लिये पुन: संघर्ष करने को विवश हो रहे हैं और भाजपा और कांग्रेस के पिछलग्गू कुछ लोग फर्जी आन्दोलनकारी घोषित होकर सरकारी नौकरी करने लगे हैं या अन्य सुविधाएं भोग रहे हैं. देवेन्द्र जी के इस संघर्ष में हम उनके साथ हैं.....   

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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This is totally an injustice Govt must give equal facilities to all state struggle activists. No matter if person had spent one day in jail or one month. Apart from going to jail, people had fought fight for a separate on road and from Uttarakhand to Lal Kila.

We will be providing the details of many more such people here and there are many members of merapahad community who have been “Aandolankari” (Uttarakhand State Struggle Activists).

There are thousands of people like Devendra had been very active during the state struggle but have not yet anything after formation of state.

Time to time, there has also been reporting coming that many people who were never been in Uttarakhand Struggle are in the list of Activist whereas actual people are running pillar to post for claiming as a State Struggle Activist.






 

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