Author Topic: Mega Corruptions cases in Uttrakhand - उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के बड़े मुद्दे  (Read 16093 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0
हाउसिंग घोटाले की जांच करेगा न्यायिक आयोग

देहरादून।। उत्तराखंड सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश पर ऋषिकेश में हुए हाउसिंग घोटाले में कुछ अफसरों की भूमिका की जांच करने के लिए एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया है।

उत्तराखंड हाई कोर्ट के पूर्व जज पीसी कंडपाल हाउसिंग घोटाले में सरकारी अफसरों की कथित भूमिका की जांच करेंगे। रिटायर्ड जज पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान उजागर हुए 56 कथित घोटालों की भी जांच कर रहे हैं।

आवास घोटाले का मुद्दा पिछले साल भी उठाया गया है। उस समय कांग्रेस के नेतृत्व में तमाम विपक्षी दलों ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि सरकार ने पर्यावरण संबंधी नियमों का उल्लंघन कर एक परियोजना को विकसित करने की अनुमति स्टर्डिया डिवेलपर्स को दी है।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने औने-पौने दामों पर मुंबई की एक कंपनी स्टर्डिया डिवेलपर्स को जमीन बेची थी। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने पिछले साल स्टर्डिया हाउसिंग प्रोजेक्ट कैंसल कर दिया था और सरकार को कंपनी से जमीन वापस लेने के निर्देश दिए थे। अदालत ने इस मामले में सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की जांच करने के भी निर्देश दिया, जिन्होंने समय-समय पर आवास परियोजना से संबंधित मुद्दे पर सरकार को गुमराह किया।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया कि हाउसिंग प्रोजेक्ट को बीआईएफआर की सिफारिशों के अनुसार अनुमति दी गई है।

 
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/7628532.cms

Devbhoomi,Uttarakhand

  • MeraPahad Team
  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 13,047
  • Karma: +59/-1
दुराचार की कोशिश करने वाले को धुना
==============================

रुद्रपुर : महिला से बलात्कार की कोशिश के आरोपी युवक को लोगों ने दबोच लिया। उन्होंने युवक की जमकर धुनाई की। बाद में आरोपी को पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है।

नारायण कालोनी ट्रांजिट कैंप निवासी एक महिला शनिवार रात घर में अकेली थी। उसके बच्चे दूसरे कमरे में खेल रहे थे। इस दौरान बरेली निवासी रजनीश मिश्रा वहां पहुंचा और किराए में कमरा देने की बात कहते हुए घर में घुस आया। इसी बीच उसने कमरे का दरवाजा बंद कर कुंडी लगा दी और महिला से बलात्कार करने की कोशिश करने लगा। महिला के शोर मचाने पर आसपास के लोग एकत्र हो गए और उन्होंने दरवाजा तोड़ दिया। अंदर का नजारा देख गुस्साये लोगों ने आरोपी युवक की जमकर पिटाई कर दी। बाद में उसे ट्रांजिट कैंप पुलिस के सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने आरोपी रजनीश के खिलाफ धारा 452, 376 व 511 के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया है।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7441505.html

Devbhoomi,Uttarakhand

  • MeraPahad Team
  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 13,047
  • Karma: +59/-1
भ्रष्टाचार के खिलाफ युवा मोर्चा चलायेगा राष्ट्रव्यापी अभियान

 
   

 लोहाघाट:   भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री विरेन्द्र बल्दिया ने लोहाघाट मंडल के कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार, मंहगाई व कालाधन वापसी को लेकर राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जायेगा। जिस के तहत मार्च अंतिम सप्ताह में राज्य के सभी मंडलों में पद यात्रा व मैराथन यात्राओं का आयोजन कर केन्द्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला जायेगा।


लोहाघाट के लोनिवि विश्राम गृह प्रांगण में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए श्री बल्दिया ने युवाओं से आह्वान किया कि वह मिशन 2012 की फतह के लिए कमर कस लें। संगठन को धारदार बनाने की नसीहत देते हुए प्रदेश महामंत्री ने कहा कि युवामोर्चा के प्रांतीय पदाधिकारी पूरे प्रदेश के मंडलों में जाकर युवाओं से संगठन की स्थिति की जानकारी देते हुए आगामी चुनावों की तैयारियों की समीक्षा करेंगे।

इसी अभियान के तहत यहां पहुंचे श्री बल्दिया ने टीम के कार्यकर्ताओं को कई टिप्स देते हुए बताया कि प्रदेश के 70 विधान सभा क्षेत्रों में शीघ्र युवा सम्मेलन आयोजित कर नव मतदाताओं का अभिनंदन किया जायेगा। युवामोर्चा के जिलाध्यक्ष गोविन्द सामंत की अध्यक्षता व महामंत्री निर्मल माहरा के संचालन में आयोजित बैठक में मंडल अध्यक्ष मदन रावत, उपाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह, महामंत्री खीम सिंह, भाजपा मंडल अध्यक्ष आनंद राय, जीवन गहतोड़ी, आनन्द जोशी, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष दीपक जोशी, राजू नरियाल आदि ने अपने विचार रखे।

बाद में पत्रकारों से वार्ता करते हुए श्री बल्दिया ने कहा कि आगामी चुनाओं में भाजपा का परचम लहराना तय हैं। युवामोर्चा युवाओं की क्षमता विकास के लिए आगामी दिनों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करेगा। विधानसभा में मोर्चा किसी भी सीट पर दावेदारी नहीं करेगा। पर संगठन द्वारा दिये जाने वाले दायित्वों का निर्वहन करने में कमी नहीं करेगा।
   
Source dainik jagran

Devbhoomi,Uttarakhand

  • MeraPahad Team
  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 13,047
  • Karma: +59/-1
ये है उत्तराखंड के पुलिस नामक कुत्ते की करतूत ,दुराचारी सिपाही को आजीवन कारावास
==========================================


अल्मोड़ा: ग्राम बख निवासी चार वर्षीय बालिका से दुराचार के मामले में अदालत ने अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही दस हजार रुपये अर्थदंड भी डाला है। अर्थदंड न देने पर तीन साल की अतिरिक्त सजा मुकर्रर की गई है।घटना 6 जुलाई 2010 की है। ग्राम धूंचू पिथौरागढ़ निवासी अभियुक्त किशन सिंह पुलिस विभाग में रुद्रपुर में कार्यरत था। 6 जुलाई की सायं 6 बजे किशन सिंह ग्राम बख गया। वह गांव की एक चार वर्षीय बालिका को बहला-फुसलाकर नारी संरक्षण गृह के पास गधेरे में ले गया। वहां उसके साथ किशन ने दुराचार किया। गांव के ही देवेंद्र सिंह ने उसे रंगेहाथ दबोचा लिया। बालिका को बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसकी शिकायत तत्काल पुलिस से की।


पुलिस ने किशन को गिरफ्तार कर लिया। बाद में उसे जेल भेज दिया गया। घटना की रिपोर्ट बालिका के पिता ने थाने में दर्ज कराई, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की तफ्तीश थाना प्रभारी निरीक्षक कमल राम आर्या ने की। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता नरेंद्र सिंह परिहार व सुनीता पांडे ने पैरवी की। सत्र न्यायाधीश कांता प्रसाद ने मौजूद दस्तावेज व मौखिक साक्ष्यों का परिशीलन करते हुए अभियुक्त को 376 आईपीसी का दोषी पाया। उसे आजीवन कारावास व दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
बाक्स----सजा से मिली राहत

अल्मोड़ा : पीड़ित बालिका के पिता हिम्मत सिंह ने अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने पर इसे सच्चा फैसला बताया। हिम्मत सिंह का कहना है कि इस फैसले ने न्यायपालिका के प्रति लोगों के विश्वास को और मजबूत किया है। ऐसे दुष्कर्मी को उसकी करनी का फल मिलना चाहिए था, जो मिल गया। उनका कहना है कि इस फैसले से उनके कलेजे में ठंडक पड़ी है।
   
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7643526.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0
यहां तो बाड़ ही खा गई खेत
 

शैलेंद्र भंट्ट, छाम

जब बाड़ ही खेत को खा जाए तो रखवाली कौन करेगा। यह कहावत विकासखंड थौलधार के राजकीय उच्चतर माध्यामिक विद्यालय मंजकोट नगुण पर सटीक बैठती है। यहां के तत्कालीन प्रधानाचार्य ने विद्यालय में दो कमरे व बरामदा निर्माण के लिए करीब ढ़ाई लाख तो बैंक से निकाल लिए, पर न तो कमरे बनें और न ही बरामदा बना। एसडीएम और तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में गबन का खुलासा होने के बाद भी प्रधानाचार्य आराम से दूसरे विद्यालय में ड्यिटी बजा रहे हैं और जांच रिपोर्ट सरकारी कार्यालयों में धूल फांक रही है।

वर्ष 2007 में उक्त विद्यालय में दो कमरे व बरामदा निर्माण के लिए पांच लाख विभाग से स्वीकृत हुए थे। इनमें से तत्कालीन प्रधानाचार्य ने 2.55 लाख रुपये 2007 में निकाल लिए। इस मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि प्रधानाचार्य ने विद्यालय मदों के खाते थौलधार विकासखंड मुख्यालय छाम में बैंक होने के बावजूद वहां न खोलकर फकोट विकासखंड के खाड़ी स्थित जिला सहकारी बैंक शाखा में प्रधानाचार्य के नाम से खाता खोला। साथ ही निर्माण के लिए विभाग से मिली पहली किश्त तीन लाख सत्तर हजार रुपये इसमें जमा किए गए। इसमें से उन्होंने 2.55 लाख निकाले और मंजकोट के ही स्थानीय व्यक्ति बिजेंद्र प्रसाद को टीम लीडर बनाकर निर्माणाधीन स्थल पर समतलीकरण कार्य प्रारंभ करवा दिया। टीम लीडर ने स्थल समतलीकरण कुछ निर्माण एवं कुछ सरिया खरीद कर कार्य किया। बिजेंद्र का कहना है कि उसने करीब सत्तर हजार का कार्य किया। इसमें भी प्रधानाचार्य ने उसे सिर्फ बीस हजार रुपये दिए। पचास हजार उसके स्वयं के खर्च हो गए उनका अभी तक भुगतान नहीं हुआ।

इनसेट=

शीघ्र किया जाए कमरों का निर्माण

छाम: क्षेत्र के पूर्व जिपंस राजेंद्र प्रसाद सेमवाल, ग्राम प्रधान, श्याम चंद्र बयाड़ा, रेखा देवी आदि लोगों का कहना है कि अप्रैल 2009 में डीएम टिहरी को शिकायत भेजने पर डीएम के आदेश पर एसडीएम टिहरी ने तहसीलदार टिहरी से अक्टूबर 2009 में जांच कराई। जांच में तहसीलदार व एसडीएम टिहरी ने अपनी जांच रिपोर्ट में निर्माण न होने के लिए एवं कुल एक लाख दो हजार आठ सौ सैंतालीस रुपये के स्पष्ट गबन के लिए प्रधानाचार्य बांकेलाल भार्गव को दोषी ठहराया है। साथ ही पूरे प्रकरण के लिए शिक्षा विभाग की जिला एवं ब्लॉक स्तर पर घोर लापरवाही बताई है।

इनसेट=

होगी विभागीय कार्रवाई

छाम: इस संबंध में खंड शिक्षाधिकारी रमेश यादव का कहना है कि उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट 30 सितंबर 2008 को उच्चाधिकारियों को सौंप दी थी। दूसरी तरफ जिला शिक्षाधिकारी रामकृष्ण उनियाल का कहना है कि संबंधित प्रधानाचार्य देवप्रयाग विकासखंड में कार्यरत हैं उनका वेतन रोक दिया गया है। गबन की राशि जमा करने के लिए कहा गया है साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7647341.html


KAILASH PANDEY/THET PAHADI

  • MeraPahad Team
  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 938
  • Karma: +7/-1
मुख्यमंत्री निशंक पर मुकदमा

Posted: 27 Apr 2011 04:58 AM PDT

देहरादून, हरिद्वार में सन 2010 में आयोजित महाकुंभ मेले में षडयंत्र रचकर सरकारी धन की बंदरबाट व साक्ष्य मिटाने के आरोप में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक समेत तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। अधिवक्ता जेडी जैन की ओर से सीजेएम कोर्ट में याचिका दायर कर मुख्यमंत्री, मेला मंत्री और मेला अधिकारी पर दो सौ करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया गया। मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. उमाकांत पंवार ने मामले की जानकारी होने से इंकार किया है। याचिकाकर्ता जेडी जैन ने यह याचिका बीती 15 अप्रैल को दायर की थी, मगर यह चर्चा में शनिवार शाम को आई। महाकुंभ मेले के समापन के एक वर्ष बाद दायर इस याचिका में आरोप है कि मेले के आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. निशंक ने सरकारी धन के खर्चे की समस्त जिम्मेदारी मेला अधिकारी आनंद वर्धन को दी थी। आरोप है कि मुख्यमंत्री, मेला अधिकारी व मेला मंत्री मदन कौशिक ने आपराधिक षडयंत्र रचकर दो सौ करोड़ रुपये का घोटाला कर सरकारी धन की बंदरबांट की। उधर, एडवोकेट जेडी जैन ने मुकदमा दर्ज कराए जाने की पुष्टि की।

pahar1.blogspot.com

Devbhoomi,Uttarakhand

  • MeraPahad Team
  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 13,047
  • Karma: +59/-1
करोड़ों की धांधली का आरोपी सीबीआई के हत्थे चढ़ा
====================================

मामले में बीएचईएल के चार उच्चाधिकारी भी आरोपी
अधिकारियों की मिलीभगत से हासिल किया टेंडर
निम्न श्रेणी का माल सप्लाई करने का आरोप
देहरादून। बीएचईएल हरिद्वार के साथ १ करोड़ १६ लाख रुपये की धांधली के आरोपी एशियन फैरों अलॉय कंपनी के प्रबंध निदेशक श्रवण कुमार गुप्ता को सीबीआई ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि उसने बीएचईएल के अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके करोड़ों का टेंडर हासिल किया और बाद में बीएचईएल को निम्न श्रेणी का माल सप्लाई कर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार १८ मई २००९ को बीएचईएल ने एक टेंडर जारी किया था। टेंडर में बीएचईएल को धातु सप्लाई की जानी थी। यह टेंडर २ जुलाई २००९ को श्रवण कुमार गुप्ता पुत्र सुरेंद्र गुप्ता निवासी विवेक विहार ज्वालापुर की उक्त कंपनी को मिला। टेंडर मिलने के बाद श्रवण कुमार ने एक प्रतिष्ठित कंपनी से माल लेकर बीएचईएल को सप्लाई कर दिया। सप्लाई किए गए माल के साथ श्रवण कुमार ने बहत्तर ग्रेड के प्रमाण पत्र लगाए थे लेकिन सप्लाई किया गया माल निम्न श्रेणी का था और प्रमाण पत्र भी फर्जी थे। श्रवण ने ७५ से ८० प्रतिशत ग्रेड का माल सप्लाई करने का दावा किया था जबकि माल ६० से ६५ गे्रड का ही था।
सीबीआई को इस मामले की जांच सौंप दी गई। श्रवण कुमार के अलावा इस मामले में बीएचईएल के चार अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। सीबीआई ने फिलहाल इस मामले में श्रवण कुमार को गिरफ्तार किया है। जिसे दोपहर करीब तीन बजे सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया।
टेंडर खुलने से पूर्व ही सप्लाई करने योग्य माल खरीदा
देहरादून। सीबीआई की जांच में यह तथ्य सामने आए हैं कि श्रवण कुमार ने २५ जून २०१० को एक प्रतिष्ठित कंपनी से माल खरीदा। जबकि उपरोक्त टेंडर २ जुलाई २०१० को खुला था। टेंडर खुलने के बाद श्रवण कुमार ने माल बीएचईएल को सप्लाई कर दिया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि श्रवण कुमार को पूरा भरोसा था कि टेंडर उसे ही मिलेगा। इसलिए उसने टेंडर खुलने से सात दिन पूर्व ही बीएचईएल को सप्लाई करने योग्य माल खरीद लिया था। जिससे इस गोरखधंधे में बीएचईएल के अधिकारियों की संलिप्तता भी उजागर होती है।
कोर्ट ने मंजूर की एक दिन की सीबीआई रिमांड
देहरादून। बुधवार की दोपहर करीब तीन बजे सीबीआई ने श्रवण कुमार गुप्ता को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण (सीबीआई) प्रदीप पंत की कोर्ट में पेश किया। सीबीआई के सरकारी अधिवक्ता राज मोहन चंद ने कोर्ट से पांच दिन की सीबीआई रिमांड देने का अनुरोध किया। जिस पर कोर्ट ने श्रवण कुमार के संवैधानिक अधिकारों की बात करते हुए सीबीआई रिमांड को अनावश्यक बताया।
सीबीआई का तर्क था कि अभियुक्त श्रवण कुमार उनके सवालों के जवाब नहीं दे रहा है। जिससे सीबीआई को जांच में दिक्कत हो रही है। सरकारी वकील की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने श्रवण कुमार को एक दिन की सीबीआई रिमांड में भेज दिया।

http://www.amarujala.com/state/Uttrakhand/17346-2.html

Anil Arya / अनिल आर्य

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 1,547
  • Karma: +26/-0
केविएट का प्रोजेक्ट मैनेजर अग्रवाल दिल्ली में गिरफ्तार May 03, 06:38 pmबताएं
देहरादून, जागरण संवाददाता: सूबे के हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में करोड़ों के घोटाले के आरोपी केविएट इंटरनेशनल कंसलटेंट के प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप अग्रवाल को नई दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी को विजिलेंस देहरादून ले आई। उसे कल (बुधवार) अदालत में पेश किया जाएगा। दूसरी तरफ, इसी मामले में गिरफ्तार जल विद्युत निगम के पूर्व चैयरमैन योगेंद्र प्रसाद की जमानत अर्जी जिला अदालत ने खारिज कर दी। उन्हें 16 मई तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन/पूर्व विशेष ऊर्जा सलाहकार (मुख्यमंत्री) योगेंद्र प्रसाद को विजिलेंस ने सोमवार शाम गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2005-09 तक अपने पद का दुरुपयोग कर करोड़ों का घोटाला किया। उनके विरुद्ध चार मामले विजिलेंस ने दर्ज किए थे। इनमें एक केविएट कंपनी से भी जुड़ा था। आरोप है कि उन्होंने नियमों को ताक पर रख केविएट कंपनी को मनेरी भाली-दो के विद्युत व यांत्रिकी समीक्षा अधिकार, व्यासी पावर प्रोजेक्ट, पथरी, मोहम्मदपुर, असीगंगा, गंगोरी एवं लखवाड़-व्यासी प्रोजेक्ट का समीक्षा कार्य सौंपकर 204.67 लाख का अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है। केविएट के वाइस प्रेसीडेंट आरपी लाल, प्रोजेक्ट कंसलटेंट श्रीधरदत्त त्रिपाठी व प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप अग्रवाल पर भी घोटालों में संलिप्त होने का आरोप है। हालांकि, आरपी लाल की पिछले दिनों मृत्यु हो चुकी है।

मंगलवार को योगेंद्र को जिला न्यायाधीश आरसी गुप्ता की कोर्ट में पेश किया गया। योगेंद्र की तरफ से जमानत याचिका दायर की गई। जिसे अदालत ने खारिज कर उन्हें 16 मई तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। उधर, एसपी विजिलेंस बीके जुयाल ने देर शाम पत्रकार वार्ता में जानकारी दी कि केविएट कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप अग्रवाल को दिल्ली में विजिलेंस ने दबोच लिया। देर शाम उन्हें देहरादून लाया गया। विजिलेंस आरोपी श्रीधर दत्त त्रिपाठी की तलाश में दिल्ली में दबिश दे रही है।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7671184.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0
Yet another Scam in Uttarakhand. ----------------------
   उत्‍तराखंड के नागरिक उड्डयन विभाग में भी करोड़ों का घोटाला       उत्तराखण्ड सरकार के पास एक हेलीकाप्टर एवं एक वायुयान उपलब्ध है। इस वायुयान एवं हेलीकाप्टर की उड़ाने जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट, देहरादून से सम्पादित हो रही हैं। वर्तमान में राज्य सरकार के पास दो हेलीकाप्टर पायलट एवं तीन वायुयान पायलट उपलब्ध हैं। इन वायुयान एवं हेलीकाप्टर के अनुरक्षण आदि कार्यो के संपादन हेतु एक वरिष्ठ अभियंता एवं एक मुख्य अभियंता उपलब्ध हैं।
पायलटों का मुख्य कार्य वायुयान व हेलीकाप्टर को उड़ाने तथा इंजीनियर का कार्य वायुयान व हेलीकाप्टर पर ग्राउन्ड में तकनीकी अनुरक्षण एवं मेन्टीनेंस कार्यो को सम्पादित करने का है। पायलटों एवं अभियंताओं के कार्य एवं लाइनें अलग-अलग हैं तथा इनकी योग्यता एवं अर्हता भी अलग-अलग के साथ-साथ भारत सरकार द्वारा जारी लाइसेंस भी अलग-अलग हैं।
विशिष्ट एवं अति विशिष्ट महानुभावों की उड़ानें नागर विमानन विभाग, भारत सरकार के संलग्न सर्कुलर में योग्यता एवं अर्हता निर्धारित हैं और उसी के अनुसार पायलट उड़ान हेतु सक्षम है। पायलट की अर्हता एवं योग्यता निर्धारित होने के बावजूद निदेशालय के मुख्य अभियंता द्वारा नियम विरुद्ध को-पायलट के रूप में उड़ानें की जा रही हैं। विभाग की हिटलरशाही ने राज्य के महानुभावों के साथ जानबूझ कर उनकी लाइफ के साथ खिलवाड़ एवं राजकीय सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी प्रक्रिया अपनायी जा रही है।
उदाहरण के रूप में दिनांक 19 जून 2007  को राज्य का हेलीकाप्टर पाबौ जनपद पौड़ी गढ़वाल में बिजली के तार से टकराने के पश्चात दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस उड़ान को को-पायलेट के रूप में मुख्य अभियंता से हेलीकाप्टर उड़वाया जा रहा था। को-पायलेट के रूप में मुख्य अभियंता द्वारा हैलीकाप्टर उड़ाने के दौरान बिजली के तार न दिखायी देना अपनी फ्लांइग डयूटी में सक्षम न होना प्रतीत होता है। यहां यह कहना भी गलत न होगा कि यदि मुख्य अभियंता के स्थान पर सक्षम को-पायलट हेलीकाप्टर की उड़ान पर होता तो संभवतः इस प्रकार की दुर्घटना को रोका जा सकता था। राज्य में इस प्रकार की दुर्घटना से राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ तथा लगभग 2  माह तक हेलीकाप्टर ग्राउण्ड होने की दशा में किराये पर लिये गये हेलीकाप्टर पर निजी संस्थाओं को करोड़ों का भुगतान करना पड़ा।
उपरोक्त घटना घटित होने के बावजूद भी उत्तराखण्ड सरकार के हेलीकाप्टर पर मुख्य अभियन्ता द्वारा दूसरे पायलट के अनुपस्थिति के दौरान उड़ान कार्यक्रम संपादित किये जा रहे हैं, जबकि मुख्य अभियंता का मूल कार्य राजकीय विमान एवं हेलीकाप्टर के अनुरक्षण एवं शिड्यूट कार्यो को सम्पादित करने का है। शासन के पत्र संख्या- 2002/कैम्प/पग/2008  दिनांक 31 अक्टूबर 2008  संख्या 106/पग/2008 दिनांक 12 मार्च, 2009  एवं कार्यालय ज्ञाप संख्या-105/पग/2008 दिनांक 12 मार्च, 2009 द्वारा मुख्य अभियंता को राजकीय विमान एवं हेलीकाप्टर के अनुरक्षण एवं शिड्यूल आदि कार्यो हेतु वर्तमान में अन्य सुविधाओं, मोबइल बिल, वाहन, सरकारी आवास निःशुल्क इत्यादि सहित रुपये 2.50  लाख यानी दो लाख पचास हजार रुपये प्रतिमाह पर संविदा में नियुक्त किया गया है।
यहां विशेष रूप से उल्लेख करना है कि मुख्य अभियन्ता की नियुक्ति वायुयान एवं हेलीकाप्टर दोनों के अनुरक्षण एवं शिड्यूल आदि कार्यो को सम्पादित करना अनिवार्य है। उत्तराखण्ड सरकार मुख्य अभियन्ता को इतनी बड़ी धनराशि मुहैया कराने के बावजूद वायुयान के मेन्टीनेंस का कार्य निजी संस्था श्रीमंत इन्डामर कम्पनी प्राइवेट लिमिटेड, मुम्बई द्वारा कराया जा रहा है, जिस पर प्रतिमाह 1,60,000  यानी एक लाख साठ हजार रूपये प्रतिमाह अलग से व्यय हो रहा है। इससे यह स्पष्ट है कि मुख्य अभियंता द्वारा मात्र एक हेलीकाप्टर के मैन्टीनेंस कार्य ही संपादित किये जा रहे हैं, जबकि इन्हें राजकीय वायुयान का अनुरक्षण भी करना था। इस प्रकार लगभग तीन वर्षो से मुख्य अभियंता दो कार्यो का पैसा ले रहे हैं और उसमें से एक ही कार्य कर रहे हैं। यहां एक बात और है कि वायुयान का रखरखाव जौलीग्रान्ट में ही निदेशालय के कर्मचारियों द्वारा अभियंताओं की देखरेख में किया जा रहा है। कभी भी इडमार कम्पनी का स्टाफ इस जहाज को मैन्टेन करने हेतु कभी भी देहरादून नहीं आता है। इस प्रकार से यह बड़ा खेल हो रहा है। इन तीन वर्षो में अब तक करोड़ों का घोटाला किया गया है और यह कार्य राज्य सरकार की नाक के नीचे किया जा रहा है, जिसका नुकसान राज्य सरकार को झेलना पड़ सकता है।
इस हेलीकाप्टर को पूर्ण रूप से मेन्टेन करने के लिए उत्तराखण्ड सरकार के पास एक लाइसेंसधारक एवं अनुभवी वरिष्ठ अभियंता कार्यरत हैं। इस प्रकार से उत्तराखण्ड सरकार ने यदि हवाई जहाज का मेन्टीनेंस का एक लाख साठ हजार रूपया प्रतिमाह में निजी संस्था से कराया जा सकता है तो सितैईया इंजीनियर को ढाई लाख व अन्य सुविधाओं को देने का क्या औचित्य है। जबकि विभाग में एक क्वालीफाइड इंजीनियर पूर्व से मौजूद है। इस प्रकार उत्तराखण्ड नागरिक उड्डयन विभाग में करोड़ों का घोटाला राज्य सरकार के नाक के नीचे बडे़ ही सफलता से किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त उत्तराखण्ड नागरिक उड्डयन विभाग में कई अनियमितताएं ऐसी है जिसकी निष्पक्ष जांच कराने पर कई हैरतअंगेज घोटाले सामने आएंगे।
लेखक चंद्रशेखर जोशी वेब जर्नलिस्‍ट एवं उत्‍तराखंड के निवासी हैं.
 
http://bhadas4media.com/vividh/10969----------.html

 

Sitemap 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22