Author Topic: Report Corruption Related Incidents-उत्तराखंड के भ्रष्टाचार संबंधी घटनाओं की रपट  (Read 6495 times)

Uttarakhand Admin

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If you see any corruption  taking place within Uttarakhand then you should report the incident here in this board. Your reporting here will bring fear, shame to the offenders. Members are given an option of hiding their identity to if they wish.

यदि आपको कहीं पर भ्रष्टाचार होता दिखे तो उसकी रपट यहाँ लिखायें। आप चाहें तो अपना नाम गुप्त रख सकते हैं।
Also, in case you wish to report matters to Lokayukta Uttaranchal directly, pls find its address

Contact:
Office of Lokayukta Uttaranchal
218-Kishan Nagar Sirmaur Marg
Dehradun(U.A.)-248001
Phone: 91-135-2755766
Email: lokayukta@ua.nic.in

In the near future it will be possible to lodge an e-complaint or query on this website: http://ua.nic.in/lokayukta/

Devbhoomi,Uttarakhand

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Dear sir  अगर भर्ष्टाचार को ख़त्म करने वाले ही भरष्टचारी हो तो, जिन लोगून को जनत की रक्षा करने के लिए रखा जाता है वही जनता के ऊपर अत्याचार करते हो तो फिर क्या करें, फिर जनता को ही अपनी रक्षा करनी पड़ेगी ये न्यूज़ पढिये !


ग्रामीणों ने पटवारी को जमकर धुना

कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल)। प्रखंड यमकेश्वर के अंतर्गत पटवारी चौकी तिलधार में ग्रामीणों ने एक पटवारी की जमकर धुनाई कर दी। पटवारी पर ग्रामीण महिलाओं से बदसलूकी का आरोप है। ग्रामीणों ने उक्त पटवारी को तत्काल हटाने की भी मांग की है।

जानकारी के अनुसार, प्रखंड यमकेश्वर के अंतर्गत तिलधार पटवारी चौकी में रह रहे पटवारी द्वारिका प्रसाद की ग्रामीणों ने शनिवार प्रात: जमकर धुनाई कर दी। ग्रामीणों का आरोप था कि पटवारी ने शराब के नशे में धुत्ता होकर ग्रामीण महिलाओं से बदसलूकी की। घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचे तहसीलदार विश्राम सिंह नेगी ने किसी तरह ग्रामीणों को शांत कराया व घायल पटवारी को अपने साथ ले गए।

 ग्रामीण पटवारी को चौकी से तत्काल हटाने की भी मांग कर रहे थे। तहसीलदार श्री नेगी ने बताया प्रथमदृष्ट्या जांच के दौरान पटवारी के शराब के नशे में धुत्ता होने की बात सामने आई है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार शाम क्षेत्र का ही एक व्यक्ति पटवारी द्वारिका प्रसाद को अपने साथ घर ले गया था।
रात को द्वारिका प्रसाद वहीं रुक गया। बताया जा रहा है कि सुबह उक्त व्यक्ति ने द्वारिका प्रसाद को पुन: शराब पिलाई व पटवारी चौकी को रवाना कर दिया। श्री नेगी ने बताया कि पटवारी को चौकी से हटा दिया गया है।

साथ ही मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है। उधर, एसडीएम जीसी गुणवंत ने बताया कि आरोपित पटवारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जा रही है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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There is another news..
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घपला: कहां गया बैंक से लिया करोड़ों का कर्ज

रुड़की (हरिद्वार)। बैंकों से ऋण तो आहरित किया गया, लेकिन यह धनराशि किसानों तक नहीं पहुंच सकी। ऋण की राशि चार करोड़ से अधिक की है, जिसको लेकर बैंक भी चिंतित है और सहकारिता विभाग के अफसर भी कि यह पैसा कैसे वापस आएगा। अब जिला सहायक निबंधक ने आठ सहकारी समितियों की जांच बैठाई है।

जिला सहकारी बैंक रुड़की द्वारा हर वर्ष सहकारी समितियों के माध्यम से करोड़ों रुपये का ऋण किसानों को दिया जाता है। इस बार भी 75 करोड़ रुपये समितियों के माध्यम से ही किसानों को देने की योजना बनाई, लेकिन समिति स्तर पर कुछ ऐसी गड़बड़ियां हो रही हैं, जिनकी जानकारी अफसरों को काफी समय बाद मिल पा रही है। दरअसल, सहकारी समितियां जितना ऋण जिला सहकारी बैंक से ले रही हैं, उतना किसानों को वितरित नहीं कर रही हैं, जिससे असंतुलन की स्थिति बन रही है। वैसे तो जिले की 22 सहकारी समितियों पर अंगुली उठ रही है, लेकिन आठ सहकारी समिति ऐसी हैं, जहां पर बड़े पैमाने पर बैंक से प्राप्त ऋण व किसानों को वितरित ऋण में अंतर आ रहा है। इन आठ सहकारी समितियों की जांच बैठा दी गई है। संबंधित ब्लाक के एडीसीओ, एडीओ व वहां की समिति के मौजूदा प्रबंध निदेशक जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देंगे कि इन बैलेंस की स्थिति कैसे बनी है। दरअसल, वर्ष 2002 से पूर्व दिए गए ऋण में गड़बड़ी अधिक हुई थी, जिसमें तीन करोड़ पचास लाख इकतालीस हजार रुपये समिति स्तरों पर गायब हो गया था। ताकि समितियों पर ब्याज का अधिक भार न पड़े, इसलिए जांच होने तक बैंक ने ब्याज न लेने का निर्णय उस समय लिया था। बावजूद इसके समितियों द्वारा यह पैसा जिला सहकारी बैंक को वापस नहीं किया गया, उल्टे इन बैलेंस की रकम भी रफ्ता-रफ्ता बढ़ती चली गई। इस वर्ष यह रकम बढ़कर चार करोड़ से ऊपर पहुंच गई। इस संबंध में जिला सहकारी बैंक ने सहकारी समिति स्तर से हो रही गड़बड़ी पर नाराजगी व्यक्त की तो जिला सहायक निबंधक एमपी त्रिपाठी ने जांच शुरू कराई है। आशंका यह जताई जा रही है कि लालढांग, बेलड़ा, ओरंगाबाद, पीतपुर, धनपुरा, खेड़ी शिकोहपुर, गिद्धावाली, डाडा जलालपुर में और भी घोटाले सामने आ सकते हैं। इन समितियों को लेकर पहले भी कई बार जांच हो चुकी है, लेकिन असंतुलन को लेकर पहली बार विस्तृत जांच बैठाई गई है, जिसमें यहां से तबादला हो चुके कई प्रबंध निदेशकों व फिलहाल सहकारी समितियों पर तैनात कुछ कर्मचारियों पर गाज गिरने की आशंका जताई जा रही है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6016003.html

Devbhoomi,Uttarakhand

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घूस लेता आयकर अफसर दबोचा

देहरादून। कपड़ा व्यापारी से इनकम टैक्स सेटलमेंट के नाम पर पचास हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में पिथौरागढ़ के आयकर अधिकारी को सीबीआई टीम ने रंगे-हाथ गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई ने आरोपी को आयकर कार्यालय से गिरफ्तार किया। आरोपी को देहरादून लाया जा रहा है। वह मूल रुप से उत्तार प्रदेश के बुलंदशहर का निवासी है।

प्रकरण की जानकारी देते हुए सीबीआई के डीएसपी देश दीपक ने बताया कि लोहाघाट के कपड़ा व्यवसायी जीवन चंद्र पुनेठा का मामला लंबे समय से पिथौरागढ़ के आयकर कार्यालय में लम्बित था। बताया गया कि आयकर टीम ने जीवन चंद्र की संपत्तिका सर्वे किया था पर उसका सेटलमेंट नहीं किया गया। आरोप है कि जब जीवन चंद्र आयकर कार्यालय पहुंचा तो पिथौरागढ़ के आयकर अधिकारी दिनेश कुमार सिंह ने मामला निपटाने के लिए 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। जीवन ने मामले की शिकायत सीबीआई के देहरादून कार्यालय में की। प्राथमिक जांच में शिकायत सही पाए जाने पर मंगलवार को सीबीआई की टीम वरिष्ठ निरीक्षक तेज प्रकाश देवरानी के नेतृत्व में पिथौरागढ़ पहुंची। व्यापारी जीवन चंद्र पुनेठा मंगलवार सुबह साढ़े दस बजे 50 हजार रुपये लेकर आयकर कार्यालय पहुंचे। जब उन्होंने रकम आयकर अधिकारी दिनेश कुमार सिंह को दी तभी सीबीआई टीम ने उसे रंगेहाथ दबोच लिया। सीबीआई टीम ने आरोपी अधिकारी से करीब चार घंटे तक पूछताछ की। डीएसपी देश दीपक ने बताया कि आरोपी दिनेश सिंह मूल रूप से उत्तार प्रदेश के चेनपुरा, टाउन शिकारपुर जिला बुलंदशहर का रहने वाला है। सात माह पूर्व ही पिथौरागढ़ में उसकी तैनाती हुई थी। सीबीआई ने आरोपी अधिकारी के आवास पर भी छापा मारा। उसका आवास कार्यालय परिसर से सटा हुआ है। वहां से भी सीबीआई को साढ़े आठ लाख की रकम मिली। सीबीआई के मुताबिक, अधिकारी के पास इस रकम का कोई जवाब नहीं है।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6062555.html

हेम पन्त

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Nainital - SDM booked under Anti-Corruption Act
« Reply #4 on: May 26, 2010, 01:02:52 PM »
Source - www.ptinews.com
 
Dehra Dun, May 25 (PTI) Uttarakhand Vigilance department today booked a Sub-Divisional Magistrate (SDM) and arrested her Peshkar (assistant) in a case of corruption in Nainital district, an official said.

Acting on a tip-off, a four-member vigilance team led by Inspector Anand Singh Gosain laid a trap and caught Narendra Kumar Dixit red-handed taking Rs 22,000 as bribe from the complainant Lalit Mohan, said DSP Vigilance (Kumaon region) R P Sharma.

Dixit is Peshkar (assistant) of Koshakotoli tehsil SDM Ravneet Cheema and was taking bribe for transferring the land in Mohan's name, he said.

After being arrested, Dixit alleged that he was taking bribe on behalf of the SDM, Sharma said, adding, when the vigilance officials did not believe him, he repeated his allegations before Cheema also.

Later, a case under Anti-Corruption Act was lodged against the SDM and her assistant, Sharma said.

mohan2174

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Sir, I have done lot work in this regards, but the all top to bottem are corrupt and you can not fight alone, because you will get the lot of call from the related persions like contractor, even form govt official also. So I am trying to fight with the help of the some NGOs. Still I am searching. If you have any pinformation, please let me know.

I have lot information received from the govt offices. Even I have also wroitten to State Information Centre Dehradoon and I got the reply after three or four Months. The reply was concern department and copy to me. Till dat I have not received any reply from that department. next time I will upload all the related correspondance in this site.


Regards
Mohan 2174

हलिया

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लाखों के गोलमाल पर एई के घर भेजी चार्जशीट  Jun 22,

 गोपेश्वर, जागरण कार्यालय: पेजयल निगम कार्यालय में हो रहे भ्रष्टाचार की परत खुलने लगी है। स्वैप मोड में निर्मित ग्राम पंचायत ईड़ा की पेयजल लाइन में दो लाख 45 हजार के पाइपों का गोलमाल करने के आरोपी एक सहायक अभियंता चार्जशीट की भनक मिलते ही छुट्टी पर चले गये है। अब अधीक्षण अभियंता ने चार्जशीट एई के घर के पते पर भेज दी है।

विकास खंड थराली के ईड़ा गांव में स्वैप मोड में वर्ष 2009 में स्वीकृत 64 लाख 29 हजार की पेयजल योजना पाइपों को लेकर विवादों में रही। ग्रामीणों के विरोध के बाद अधीक्षण अभियंता जांच में पाइपों की खरीद में ही बड़ा घोटाला पकड़ा। जांच में 10 अप्रैल 2010 को 23 लाख 85 हजार के पाइपों की खरीद में लाखों की गड़बड़ी मिली। इसमें दो लाख 45 हजार के पाइपों की खरीद कम होने के चलते अधीक्षण अभियंता ने तत्कालीन सहायक अभियंता को दोषी पाया, हालांकि मामले में अधिशासी अभियंता व अवर अभियंता को साफ बचा लिया गया।

जांच के दौरान प्रशासनिक आधार पर विवादास्पद सहायक अभियंता अनूप पांडेय का हस्तांतरण भी चंपावत कर दिया गया। अधीक्षण अभियंता ने दोषी सहायक अभियंता के खिलाफ चार्जशीट चंपावत भेजी, लेकिन चार्जशीट की भनक लगते ही अभियंता लंबी छुट्टी चले गये। अब एसई ने कठोर रूख अख्तियार करते चार्जशीट को एई के घर मऊ यूपी के पते पर भेजी गई है।


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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For your education if you do not already know this  ---- See how Lokpal Bill can curb the politicians, Circulate it to create awareness
     
   
  Existing System [/t]  System Proposed by civil society    No politician or senior officer ever goes to jail despite huge evidence because Anti Corruption Branch (ACB) and CBI directly come under the government. Before starting investigation or initiating prosecution in any case, they have to take permission from the same bosses, against whom the case has to be investigated.   Lokpal at centre and Lokayukta at state level will be independent bodies. ACB and CBI will be merged into these bodies. They will have power to initiate investigations and prosecution against any officer or politician without needing anyone’s permission. Investigation should be completed within 1 year and trial to get over in next 1 year. Within two years, the corrupt should go to jail.    No corrupt officer is dismissed from the job because Central Vigilance Commission, which is supposed to dismiss corrupt officers, is only an advisory body. Whenever it advises government to dismiss any senior corrupt officer, its advice is never implemented.   Lokpal and Lokayukta will have complete powers to order dismissal of a corrupt officer. CVC and all departmental vigilance will be merged into Lokpal and state vigilance will be merged into Lokayukta.    No action is taken against corrupt judges because permission is required from the Chief Justice of India to even register an FIR against corrupt judges.   Lokpal & Lokayukta shall have powers to investigate and prosecute any judge without needing anyone’s permission.    Nowhere to go - People expose corruption but no action is taken on their complaints.   Lokpal & Lokayukta will have to enquire into and hear every complaint.    There is so much corruption within CBI and vigilance departments. Their functioning is so secret that it encourages corruption within these agencies.    All investigations in Lokpal & Lokayukta shall be transparent. After completion of investigation, all case records shall be open to public.  Complaint against any staff of Lokpal & Lokayukta shall be enquired and punishment announced within two months.    Weak and corrupt people are appointed as heads of anti-corruption agencies.   Politicians will have absolutely no say in selections of Chairperson and members of Lokpal & Lokayukta. Selections will take place through a transparent and public participatory process.    Citizens face harassment in government offices. Sometimes they are forced to pay bribes. One can only complaint to senior officers. No action is taken on complaints because senior officers also get their cut.   Lokpal & Lokayukta will get public grievances resolved in time bound manner, impose a penalty of Rs 250 per day of delay to be deducted from the salary of guilty officer and award that amount as compensation to the aggrieved citizen.
  Nothing in law to recover ill gotten wealth. A corrupt person can come out of jail and enjoy that money. [/t]  Loss caused to the government due to corruption will be recovered from all accused.    Small punishment for corruption- Punishment for corruption is minimum 6 months and maximum 7 years.   Enhanced punishment - The punishment would be minimum 5 years and maximum of life imprisonment.

Spread it like fire  ;
our Nation needs us..please Contribute..
This is not just a forward, it’s the future of our Nation  

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Mahi Mehta
21 hrs

From - Ved Badola

टिहरी बांध की 42 वर्ग किलोमीटर की झील बनने के बाद उत्तराखंड के टिहरी और उत्तरकाशी जनपद दूरी जो महज कुछ किलोमीटर थी, अब लगभग 150 किलोमीटर हो गयी है। दोनों जनपदों को जोड़ने वाला प्रस्तावित डोबरा-चांठी पुल सन 2006 से बन रहा है। जरा भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा तो देखिये कि आठ साल बाद दोनों ओर दो पिलर ही खड़े हैं। लगभग दो लाख की आबादी की लाइफलाइन बन सकता था ये पुल लेकिन, आज भ्रष्ट लोगों की वजह से काला पानी की सजा भुगत रही है प्रतापनगर,जाखणीधार और थौलधार ब्लॉक की जनता। कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न जो आज भी अनुत्तरित हैं :

आखिर कहां गए 132 करोड़ ?
किसकी जेब में गए 132 करोड़ ?
किसकी सांठ-गांठ से हो रहा है घोटाला ?
कौन है इतनी बड़ी लूट की स्क्रिप्ट लिखने वाला ?
आखिर किसकी लापरवाही से अधर में लटका झूला पुल ?

इन्हीं सब सवालों का उत्तर तलाशने की दिशा में दिनांक 12 अक्टूबर 2014 (रविवार) को दोपहर 2 बजे गढ़वाल भवन, पंचकुइयां रोड, नई दिल्ली में एक बैठक का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में आपकी भागीदारी प्रार्थनीय है। अधिक जानकारी के लिए श्री पंकज पैन्यूली-09810020717 से संपर्क कर सकते हैं।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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कांग्रेस की सरकार में उत्तराखंड में यही दिन देखने के लिए बनाई थी ? वोट मांगने आये थे बेरोजगारी दूर करेंगे। अब ये क्या है ?
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उत्तराखंड में नौकरी मांगने पर होता है यह हाल

उत्तराखंड में बेरोजगार जब नौकरी मांगने के सरकार के पास जाते हैं तो सरकार उनका ये हाल करती है।ये हैं उत्तराखंड के बीपीएड, एमपीएड बेरोजगार जो कई द‌िनों से धरने पर हैं। सभी तस्वीरें: अन‌िल डोगरा। b.ed m.p.ed protest in dehradun. मंगलवार को श‌िक्षा सच‌िव ने इन्हें बातचीत के ल‌िए इन्हें सच‌िवालय बुलाया था। जब बातचीत के बाद बाहर न‌िकले तो पुल‌िस पहले ने उनको जबरन ह‌िरासत में लेने लगी। सरकार के ल‌िए बेरोजगारों का धरना परेशानी का सबब बना हुआ है और सरकार चाहती है क‌ि ये धरना बंद कर दे। प्रदर्शनकार‌ियों को ह‌िरासत में लेने के दौरान जमकर धक्का मुक्की हुई ज‌िसमें पुल‌िस अध‌िकारी ग‌िर पड़ा। बेरोजगारों का नौकरी मांगना सरकार को इतना अखर रहा है क‌ि कभी बातचीत के ल‌िए बुलाकर उन्हें लाठ‌ियों से प‌िटवाया जाता है तो कभी बातचीत पर बुलाकर ह‌िरासत में ले ल‌िया जाता है। प्रश‌िक्ष‌ित बीपीएड एमपीएड धारकों को कुछ इस तरह से गाड़‌ियों में भरकर ले जाया गया। (amar ujala)

 

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