Author Topic: Articles By Parashar Gaur On Uttarakhand - पराशर गौर जी के उत्तराखंड पर लेख  (Read 40736 times)

hem

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आपकी दोनों कविताओं की पंक्तियों से एक छोटा सा कोलाज इस प्रकार बन सकता है -

क्या,    तुमने . कभी
नियति को देखा है ?
हाय .. क्या दिन थे  वे  ?
बूढा तो हो ही रहा हूँ
और हो भी जाउंगा
परन्तु ,
तुमारे बाप का क्या जाता
अगर तुम मुझ को ----
जवानी के भ्र्हम में
कुछ और दिन  जीने देते 

Parashar Gaur

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hemjee .    wow ... kya baat hai... 

attee sunder

parashar

DP GAYATRI

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अतिरोचक.............वह!

Parashar Gaur

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घोषणा

जैसे ही ,
 इल्कशन  की हुई  घोषणा
उमिद्वारो का तांता लगने लगा था
जिसे हमने , कभी नहीं देखा था
वो ,
सबसे आगे खडा था  !

पार्टिया ......
अपने अपने उमीद्वारो को
जनता में भुनाने लग गई थी
उनके काले कारनामो पे
सफेदिया पोतने लगी थी  !

सभाओ का .........
आयोजनों  पर आयोजन  होने लगे थे
छुट भया नेता ......
दिगज नेताओं के चप्पल उठाने लगे थे  !

उमीद्वारो का परिचय
मंच से दिया जाने लगा
नेता उनके बारे में कहने लगा
ये .................
इस इलाके के माने ( वो गुंडा था)  हुए   है
इनकी तस्बीरे तो ,
अखबारों में की बार छापी है  !

ये उमीद्वार ....
 जो  आप देख रहे है
ये आप के लिए ना सही पर
पार्टी के लिए की बार
अंदर बाहर आते जाते रहे है
समया साक्षी  और  जनता गवा है
पुलिस चोकी  इनका मायका 
और जेल इनकी ससुराल है  !

बिपक्षी ......
इनकी इस छबी को
पचा नहीं पा रही है
इनपे आरोप पे आरोप
लगाए जा रही है  की... ये ...
गौ-चारा , रेप , मर्डरो में लिप्त  है
एसा प्रचार कर रही है  !

अरे  भाई .....
किसिना किसी को तो वो
चारा खाना ही था
उसको ...  कहिना  कही तो
ठिकाना लगाना ही था  !

रही......................
 " रेप और मर्डरो  " की बात
तो, हम साफ़ साफ़ कहते है
ये तो  हमारी पार्टी का सिम्बल भी है
हमारी मैनोफैसटो में भी है
जो जितना करेगा, करवाएगा
उतना ही उंचा पद पायेगा
हम आप को चेतावनी देते है
और  चिला चिल्लाकर  कहते है !

बिपक्षी सुन ले ..........
और , आप देख ले ....
आप वोट दे या ना दे
आप वोट डाले या न डाले
आप का  पडेगा  - पडेगा
हम दावे से कहते है
हमारा ये उमीद्वार .........
जीतेगा और जीतेगा    1

पराशर गौड़

Parashar Gaur

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 "समय "

जब भी कोइ चीज़
इज्जाद होती है , तो
उसका अंत भी ,
उसके साथ जन्म ले लेता है !

शायद
हमारा खेल भी समाप्त होने वाला है
क्योकि .......
हम सब बारूद के ढेर पर बैठे है !

इस सभ्यता के युग में सब
हथियारों के पीछे दौडे जा रहे है
ये दौड़ .......
कब , कहा ?  समाप्त होगी
ये तो आने वाला कल ही बताएगा !

वो कल...
कल ,  अवशय आयेगा
जब ,
सब कुछ समाप्त हो जायेगा 
पीछे छूट जायेगा
एक इतिहास  !

जिसमे दफ़न होगी
मानव द्वारा निर्मित अन्वेषणों के
संघार की सिलसिलेवार दास्ताँ !

मुझे ...,
अपने मरने का कोइ गम नहीं
गम है तो इस बात का
कि, इश्वर द्वारा निर्मित मानव
इतना बीभत्स , इतना क्रूर  भी हो सकता है
जो, मानव , मानव के
खून का प्यासा हो !

शायद
फिर से एक नये माहाभारत के
होने कि आशंका है
इस माहा भारत में  ना तो
क्रिशन  होगा,  ना हज़रात
और ना ही इशा मसी
होगा तो केवल एक  "एटम"
जो मानव को 
हमेशा हमेशा के लिए मिटा देगा  !

पता नहीं
तब , कोई शांति का मशीहा
पैदा भी होगा या नहीं
हां , इतना जरूर है कि तब तक
बहुत देर हो चुकी होगी  !

मानव मानव के लिए तरसेगा
सनद रह जायेगी .केवल
बारूद  धुवा  धुवा .. धुवा
बस धुवा  !

पराशर गौर

Parashar Gaur

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"लक्ष्य "
 
ये  पथिक रख
पथ  पर पाऊँ
न  डर, खेल
खेल जिन्दगी का दाऊँ   !
 
बाधाऊ को झंझोड़
आपतियों का मुख मोड़
तो  द्रिष्टीगोचर है
तो, बलशाली है
बदल दे सहरो को तू गाउँ !
 
भटकायेगे  चौराहे
पथभ्रस्ट करे दो रहे
निगाहो को मत डिगा
पकड राह चलता चल
मिले ना जब तक
तुझको ठाऊँ  !
 
विवश कर प्रस्थीथियो को
सीमाओं को लाँघ
काटताचल बंधन
उन बन्धनों को
जो रोके है तेरे पाऊँ !
 
देख तेरी द्रिड़ता को   
राह को भी राह देनी होगी
तेरे अटूट विश्वास के आगे
समय को भी मात सनी होगी
त,  कर ललाट उंचा
सयम से धर पाऊँ 
मिलजायेगे तब तुझको
तेरे सपनो के टाऊँ !
 
parashar

Parashar Gaur

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जूता संस्कृति ... " बहस "
 
 
जूते चप्पलो में
हो गई बहस
छिड गई लड़ाई
लगे करने दोनों
अपनी अपनी बडाई  !
 
चप्पले बोली ........
यदपि, देखने में हम
कोमल , नाजुक , कमजोर  है
ध्यान रहे ...
हमारे किस्से जगत मशहूर है !
 
आम आदमी से लेकर
मंत्री संत्री , नेता हमें
अपने साथ रखने पर
मजबूर है !
नेता जी ... नेताजी तो, .. हमें
बड़े प्यार से दुलारते है पुचकारते है
और बड़े सामान के साथ
हमें पार्लियामेंट तक ले जाते है
येसा नहीं ........
हम भी आडे वक़्त उनके काम आते है !
 
टेलीबिजन , अखबारों में
आये दिन हमारी तस्बीरे छपती है
जब जब हम
पार्लियामेन्ट में एक दुसरे पर बरसती है !
 
वे जूते से बोली ..
है तुम्हरा, येसा कोई किस्सा ?
जो , संसद में लिया हो तुमने
कभी हिस्सा  ??????
जूत्ता बोला ...
बस ... तुम में यही तो कमी है
बात को पेट में पचा नहीं पाती हो
युही खामखा ,,,
चपड चपड़ करती रहती हो  !
 
सुनो
चाहिए हम रबड़ के हो
या हो,  चाँद के
सारे मुरीद है हमारे
यंहा से वंहा तक के !
 
जब जब मै चलता हूँ
या  चलूँगा .....
अच्हे आछो के मुँह
बंद हो जायेग
इसीलिए तो सब कहते है
यार, चांदी का मारो तो
सब काम हो जायेगे !
 
पटवारी से लेकर
ब्यापारी तक ,
सिपाही से लेकर
मंत्री तक
सब हमारे कर्ज़दार है
तभी तो,  लोग कहते है
जूत्ता ...  बड़ा दुमदार है
रही हिस्से किस्से की बात
तमाशा देखना और देखोगे
आज के बाद  संसद में
तुम नहीं , हम ही हम चलेगे !
 
ये किस्सा
तो अपने देश में द्खोगे ही
संसार में भी नाम कमाउगा
देख लेना
दुनिया के अखबारों के
फ्रंट पेज पर अपनी तस्स्बीर छपाउगा ! 
 
देखा नहीं , इराक में क्या हुआ
बुश पर कौन चला ? ....  मै
चिदम्बर, अडवानी और अब
मनमोहन पर भी कौन चला  मै  ?
 
 पराशर गौर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Ati Uttam . sir..

A new practice has started in democracy.

जूता संस्कृति ... " बहस "
 
 
जूते चप्पलो में
हो गई बहस
छिड गई लड़ाई
लगे करने दोनों
अपनी अपनी बडाई  !
 
चप्पले बोली ........
यदपि, देखने में हम
कोमल , नाजुक , कमजोर  है
ध्यान रहे ...
हमारे किस्से जगत मशहूर है !
 
आम आदमी से लेकर
मंत्री संत्री , नेता हमें
अपने साथ रखने पर
मजबूर है !
नेता जी ... नेताजी तो, .. हमें
बड़े प्यार से दुलारते है पुचकारते है
और बड़े सामान के साथ
हमें पार्लियामेंट तक ले जाते है
येसा नहीं ........
हम भी आडे वक़्त उनके काम आते है !
 
टेलीबिजन , अखबारों में
आये दिन हमारी तस्बीरे छपती है
जब जब हम
पार्लियामेन्ट में एक दुसरे पर बरसती है !
 
वे जूते से बोली ..
है तुम्हरा, येसा कोई किस्सा ?
जो , संसद में लिया हो तुमने
कभी हिस्सा  ??????
जूत्ता बोला ...
बस ... तुम में यही तो कमी है
बात को पेट में पचा नहीं पाती हो
युही खामखा ,,,
चपड चपड़ करती रहती हो  !
 
सुनो
चाहिए हम रबड़ के हो
या हो,  चाँद के
सारे मुरीद है हमारे
यंहा से वंहा तक के !
 
जब जब मै चलता हूँ
या  चलूँगा .....
अच्हे आछो के मुँह
बंद हो जायेग
इसीलिए तो सब कहते है
यार, चांदी का मारो तो
सब काम हो जायेगे !
 
पटवारी से लेकर
ब्यापारी तक ,
सिपाही से लेकर
मंत्री तक
सब हमारे कर्ज़दार है
तभी तो,  लोग कहते है
जूत्ता ...  बड़ा दुमदार है
रही हिस्से किस्से की बात
तमाशा देखना और देखोगे
आज के बाद  संसद में
तुम नहीं , हम ही हम चलेगे !
 
ये किस्सा
तो अपने देश में द्खोगे ही
संसार में भी नाम कमाउगा
देख लेना
दुनिया के अखबारों के
फ्रंट पेज पर अपनी तस्स्बीर छपाउगा ! 
 
देखा नहीं , इराक में क्या हुआ
बुश पर कौन चला ? ....  मै
चिदम्बर, अडवानी और अब
मनमोहन पर भी कौन चला  मै  ?
 
 पराशर गौर

Parashar Gaur

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 Shaayad

शैद..मिन  अफू थै  इतका .
खाली/खाली अर हरचुयु ,खोयु
आज से पैली कभी महशूश नि कै छो 

ओ मेरी प्यारी .....
अर जब हम मिल्या भी त
न जणि क्या क्या खोइ की  !

याद च त्वे..
जब हम मिला छा ये अन्त्तरजाल माँ   
अपणा अपणा मया का जाल बुणी
तब, मनो को यु प्राणी
माया का झुला माँ उददु रा पंछी बणि !   

एक दिन  जब तू ..
ये अन्त्तरजाल  का सागर से भैर ऐकी
रु-बारू  ह्वैकी तिन भारी  छै 
मै पर अंग्वाल
सच ...यु मिलन कतका सुंदर छो   !

निरदई बिधाताल ..
फिर फेकी अपणो जाल   
तू  लौटिगे वापस , वी जाल माँ
अर मी,  रैगिऊ  यख  याखुल्या याखुली
खैरया थोलमा कु  सी मनिख  !
 
बिछुडा की पीड अर
जग्वाल की रटन की दुख्मा
मी,  झुल्सुणु  छाऊ  अफी अफ्फु  !

मी थै ये भी पत्ता च की मिन
तुम थै ये बिछोड माँ दुःख का सेवा कुछ नि दे
पर वो दिन दूर नि जब
हम एक दिन फिर मिल्ला
फिर खिल जाला हमरा रोम रोम  !

मी ..
फिर लौटी की आणु छौ वे  अंतरजाल  माँ
जैम बुणी छा  हमुन कभी सवीणा
जैमा  कै छो हमुन प्यार  , पैलि / पैलि  बार 
अपणा वे प्यार थै दिखाणु  सरिया दुनिया माँ !
 
 पराशर गौड़

Parashar Gaur

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या जिन्दगी

या जिन्दगी भी क्या ,कभी खिल्पत त  कभी रूवांसी सी
कभी खुसिम या हमारा दगड त , कभी आंदी जांदी सांस सी
दगडियों... , या जिन्दगी अजीब सी
कभी मुसीबतों माँ भी दीखोद बाटा,  त  कभी बाटों कु पत्ता ही नी
कभी करीब  मुखे  की समणी त,   कभी ता जिन्दगी जग्वाल सी
या जिन्दगी बड़ी अजीब सी ,त कभी हर बात माँ सवाल सी
कभी बिन मंग्या मान सी ,  त कभी मंग्या  दान सी
कभी त ये बे बजाह रुलांदी सी , त कभी बिना बात माँ हैसांदी सी
दगडियों... , या जिन्दगी अजीब सी !

परासर गौड़

 

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