Author Topic: Articles by Writer, Lyrist & Uttarakhand State Activitvist Dhanesh Kohari  (Read 11377 times)

धनेश कोठारी

  • Full Member
  • ***
  • Posts: 232
  • Karma: +5/-0
Re: Articles by Writer, Lyrist & Uttarakhand State Activitvist Dhanesh Kohari
« Reply #10 on: September 05, 2010, 08:55:31 PM »
उल्लू मुंडेर पर
            उल्लू के मुंडेर पर बैठते ही मैं आशान्वित हो चुका था। अपनी चौहदी में लक्ष्मी की पर्दार्पण की दंतकथाओं पर विश्वास भी करने लगा। शायद ‘दरबारी आरक्षी‘ की तरह उल्लू मुझे खबरदार करने को मेरी मुंडेर पर टिका था। खबरदार! होशियार!! प्रजापालक श्रीहरि विष्णु की अर्धांगनी ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मी जी पधार रही हैं! मेरी आकाक्षायें खुशी से झूमने लगी।
            अब तक पत्थरों को बेरहमी से पीटते अपने हथौड़े को मैंने तब एक कोने में पटका। जहां वक्त ने मेरे बुरे दिनों के जाले बुने थे। यही जाले मेरी दरिद्रता के प्रमाण थे। तंगहाली के कोने में सरकाये हथौड़े की विस्मित दृष्टि से बेखबर, बेफिक्र था मैं। मैं तो लक्ष्मी की दस्तक का इंतजार कर रहा था। ‘लक्ष्मी‘ की अनुभूति में मेरी उत्तेजना बढ़ गई थी। भूल चुका था कि मैं नास्तिक हूं। उल्लुक आगमन शायद मेरे लिए आस्तिकता को लौटाकर लाया था। उसे शुभ मान बैठा था मैं।
            उस दिन श्रीयुक्त लक्ष्मी निश्चित ही मेरे घर तक आयी। किंतु मेरे दरवाजे पर दस्तक देेने नहीं। बल्कि उल्लू को डपटने के लिए......। उस वक्त वैभवशाली सौंदर्य के बजाय रौद्र काली रूप धारण किया था लक्ष्मी ने। उल्लू को डांटते हुए बोली, जब देखो अपने जैसे लोगों के यहां जा बैठता है। देखी है, उसकी मैली कुचैली धोती, पहनावा। बेहद गुस्से में थीं वह। देखी है, उसकी बदबूदार झोपड़ी...... मिट्टी का बिछौना, फूस का ओढ़ना। मुझे तो क्या, तुझे भी क्या रख पायेगा यह दरिद्र। पड़ोसी ‘धनपत‘ का घर नहीं दिखता तुझे। जहां छप्पन भोग महक रहे हैं। सोने, जवाहरात से सजे आसन लगे हैं। ‘सुरक्षा‘ के लिए मजबूत तिजौरियां हैं।
            उल्लू ‘लक्ष्मी‘ के इस रौद्र रूप से सहम गया था। कहने लगा, हे ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी! अमीर धनपत का घर मुझे रात में ही दिखता है। तब उसका घर रोशनी में अलग ही चमकता है। इस दोपहरी में तो मैं अंधा होता हूं। सो जहां-तहां बैठ जाना भी स्वाभाविक ही है। उल्लू के इस बहाने को भी लक्ष्मी समझ रही थी। तो, मैं भी लगभग झूठ ही मान रहा था। क्योंकि उजाला तो उसका बैरी है। फिर भला वह धनपत के उजाले से जगमगाते घर को कैसे देख पाता होगा। मुझसे उसकी मित्रता न सही, कभी करीबी न रही हो। तब भी शायद, कुछ अपनापा जरूर था। जो मेरी मुंडेर पर आ बैठा। कहने लगा, हे देवी! हां, यदि आप मिथक को तोड़ना चाहें तो.....। देवी लक्ष्मी ने उसे बड़ी जोर से डपटा, मूर्ख!!!
            अब तक लक्ष्मी के प्रचलित रूप से अलग इस रौद्र अवतरण को देख मैं भी अन्दर तक दहल उठा। वाकई मेरी झोपड़ी में बरसों से चौका बुहारा तक न हुआ था। कल ही बनिये की ‘आखरी ताकीद‘ के साथ मैं अपने दुधमुंहे के लिए अन्नप्रासन का उधार लाया था। मन ही मन मैंने अस्थाओं के दीप जलाये थे। उजाला महसूस करने लगा था मैं अपने अन्दर। जबकि अपने ‘स्टेटस‘ के एकदम विपरीत मेरी झोपड़ी में दीवाली को नकार चुकी थी लक्ष्मी। उसे खुली आजादी से ज्यादा तिजोरियों की परतंत्रता में रहना कबूल था। शायद इसलिए भी कि समाज का नैतिक चरित्र अब आतंकित करने वाला हो चुका है, और ‘लक्ष्मी‘ कतई ‘रिस्क‘ नहीं लेना चाहती है।
इस बीच जहां धनपत का अमीर अमरत्व मुझे चिढ़ा रहा था। वहीं कोने में सरका दुबका बेरहम हथफड़ा हंस रहा था। बाहर पत्थर अपने दरकने की पीड़ा के अहसास के बाद भी मेरी रोटी के लिए हथौड़े को फिर-फिर आमंत्रित कर रहे थे। उस दिन उल्लू की ओट में लक्ष्मी की दुत्कार सुन मैं आत्मग्लानि में शायद बिखर ही जाता। लेकिन हर बार पत्थरों के टुटने की संभावनाओं ने मुझे ‘उल्लुक वृति‘ का हिस्सा बनने से रोक लिया।         

Devbhoomi,Uttarakhand

  • MeraPahad Team
  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 13,047
  • Karma: +59/-1
Re: Articles by Writer, Lyrist & Uttarakhand State Activitvist Dhanesh Kohari
« Reply #11 on: September 05, 2010, 11:59:32 PM »
कोठारी जी आपके लेख बहुत सराहनीय है, मेरा पहाड़ परिवार में हार्दिक स्वागत है

dramanainital

  • Full Member
  • ***
  • Posts: 171
  • Karma: +2/-0
Re: Articles by Writer, Lyrist & Uttarakhand State Activitvist Dhanesh Kohari
« Reply #12 on: September 11, 2010, 09:23:09 AM »
sab lekh evam kavitaein stareeya hain.dhanesj jee aapko jaankar bahut achchaa lagaa.

धनेश कोठारी

  • Full Member
  • ***
  • Posts: 232
  • Karma: +5/-0
Re: Articles by Writer, Lyrist & Uttarakhand State Activitvist Dhanesh Kohari
« Reply #13 on: September 20, 2010, 09:56:29 PM »
 
विकास का सफर
 
विकास का सफर ढ़ोल ताशों की कर्णभेदी से शुरू होकर शहनाई की विरहजनित धुन के साथ कार्यस्थल पर पहुंचता है। बाइदवे यदि यात्रा के दौरान निर्धारित समय व्यतीत हो गया तो वह अवमुक्ति के बगैर ही उलटे बांस बरेली की बतर्ज लौट पड़ता है। यों दूर के ढोल की मादक थाप पर मंजिल पर बैठा इन्तजार करता आदमी उसके आने की उम्मीद में अभिनंदन की मुद्रा में तरतीब हो जाता है। मगर रूदन भरी दशा से मुखातिब होते ही उसे शोकसभा आहूतकर बिस्मिल्लाह कहना पड़ता है।
वह जब सत्ता की देहरी से विदा होता है तो पतंगे शिद्दत से इतराते हैं। मर्मज्ञ कथावाचक उसकी देहयष्टि का रेखांकन इस मादकता से करते हैं कि भक्तगण बरबस इठलाये बिना नहीं रह पाते। विकास मार्निंग वाक पर निकल टहलते-टहलते प्रियजनों से भरत मिलाप करते हुए, खुचकण्डि का कलेवा बांटते हुए लक्ष्यभूमि में उसकी हकीकत नुमाया हो जाती है। जैसे को नहीं जानत है जग......’की भांति कि, वह किस प्रयोजन से और किसके लिए उद्घाटित होता है। भूखा-प्यासा थका-मांदा मांगता है। किंतु-परंतु में नियति देखिए कि वहां राजा हरिश्चंद्र की भूमिका में संभावना टटोली जाती हैं। कभी-कभी उसे गुंजाइश के बिना भी झपट लिया जाता है।
आधा खपा-आधा बचा की भाव भंगिमा में कहीं स्वर्णमयी आभा के तो कहीं कृष्णमुखी छटा के दर्शन होते हांे, किंतु उसकी त्रिशंकु मुद्रा से भी आशायें मरती नहीं और वह भी सहजता से अपने दया भाव को भी नहीं खोता है। अमूर्त अवस्था के बावजूद सपनों का यह सौदागर मांग आधारित अवयव है। गैर आमंत्रण की पनाह में जाना उसका मजहब नहीं। इसलिए स्वस्थ सहारे पर उसी का होना उसकी काबलियत मा नमूना है। इस बात से भी ऐतराज नहीं कि वह अक्सर मंजिल से पूर्ववर्ती तिराहों-चौराहों पर भटक भैरुबन जाता है। सौभाग्यशाली विकास का गौरव हालांकि अवमुक्ति में ही निहित है। लेकिन कदाचित परिस्थितियों से भी उसे परहेज नहीं रहता है।
उसे कभी भी डोमोसाइल या लालकार्ड की जरूरत नहीं पड़ी। गरीबी रेखा पर पहुंचने के बाद भी रचने-बसने में उसे दिक्कत नहीं आती। विकास हुआ तो वाहवाही और न हुआ तो लांछन का हकदार भी नहीं। परजीवी अवश्य उसके नियंता बना बैठते हैं। जहां वह आश्वासन की भूमिका में मंचासीन कर दिया जाता है। तेज फ्लड लाइटों में रैप म्यूजिक के साथ रैंप पर कैटवाक करता खुलेपन की हवा में उसकी चाल चहक उठती है। और कहानी की डिमांड पर तनबदन नमूदार होता है। वह डग उसी स्टाइल में भरता है जिस शैली को अंगूठा छाप तय करता है।
काबलियत के तो क्या कहने चुनावों में वह प्रत्याशी तो नहीं होता, मगर प्रत्याशी के प्रति प्रत्याशा का संचार अवश्य करता है। जाति, धर्म, क्षेत्र व दल निरपेक्षता का धुर समर्थक विकास यदि खुद कैंडीडेट बन जाये तो कौन माई का लाल है जो जीत का जामा स्वयं पहन ले। बस उसकी असहायता ही कहूंगा कि कंधे पर बंदूक रखने वाले उसे कभी प्रत्याशी के किरदार में नहीं आने देते। नतीजा, मांग आधारित होने के कारण सदैव निराशा की कारा में कैद रहा। फिलहाल मैं निराश नहीं, क्योंकि सरकारी तख्त की आशाओं को बांधने की अपेक्षा मैं बौद्धिक विकास की जुगाली में व्यस्त हूं।

http://bolpahadi.blogspot.com/2010/09/blog-post_18.html

धनेश कोठारी

  • Full Member
  • ***
  • Posts: 232
  • Karma: +5/-0
Re: Articles by Writer, Lyrist & Uttarakhand State Activitvist Dhanesh Kohari
« Reply #14 on: September 22, 2010, 08:16:34 PM »
  पहाड़
 

मेरे दरकने पर
तुम्हारा चिन्तित होना वाजिब है
अब तुम्हें नजर आ रहा है
मेरे साथ अपना दरकता भविष्य
लेकिन मेरे दोस्त! देर हो चुकी है
अतीत से भविष्य तक पहुंचने में
भविष्य पर हक दोनों का था
आने वाले कल तक हमें
कल जैसे ही जुड़े रहना था
लाभ का विनिमय करने में चुक गये तुम,
दोस्त!
तुम्हारा व्यवहार उस दबंग जैसा हो गया
जो सिर्फ लुटने में विश्वास रखता है
जिसके कोश में ’अपराध’ जैसा कोई शब्द नहीं
बल्कि अपराध उसकी नीति में शामिल है
लिहाजा अपने दरकते वजूद के साथ-
तुम्हारे घावों का हल मेरे पास नहीं
यह भी तुम्हें ही तलाशना होगा
मैं अब भी
तुम्हारे अगले कदम की इन्तजार में हूं।
 
  http://pawaan.blogspot.com/2010/09/blog-post_22.html

धनेश कोठारी

  • Full Member
  • ***
  • Posts: 232
  • Karma: +5/-0
Re: Articles by Writer, Lyrist & Uttarakhand State Activitvist Dhanesh Kohari
« Reply #15 on: October 01, 2010, 09:48:15 PM »
स्वतंत्रता का इस्तेमाल सब कर रहे हैं
 
अयोध्या पर फैसला आ चुका है। हर कोई पचाने में लगा है। कुछ खुश होकर तो कुछ नाखुशी के साथ। कोर्ट के आगे पचाने को विवश हैं सब। कैमरे के आगे नाटक जारी है। लेकिन पचाने की इस प्रक्रिया के दौरान ही अपनी जीत से ज्यादा दूसरे की हार को सेलेब्रेट करने को बहुत से आतुर हैं। तरीका तलाशा जा रहा है। आने वाले दिनों में इसका प्रमाण भी सामने आयेगा। क्योंकि समाज भले ही सह अस्तित्व की बुनियाद के लिए लगातार प्रार्थना करें। लेकिन इसी समाज से सत्ता का रास्ता भी बनाया जाना है। इसी से पाखंडों और आडम्बरों की दुकानें भी चलायी जानी हैं। और बगैर हवा दिये यह संभव नहीं। भले ही एड लाइन में कहें कि डर के आगे जीत है। लेकिन यहां मैं कहूंगा कि डर को दुत्कारने के बाद ही जीत का जामा पहना जा सकता है। तो फिर अब तक के ‘कब्ज’ के बावजूद यह निर्णय हजम हो पायेगा? खासकर उन्हें जिनके लिए यह विवाद एक ऐसा ऐरावत था जिसमें सबको पछाड़ने की कुव्वत मानी जाती रही है।

चौबीस घंटे में ही पक्ष-विपक्ष के मुंह से संयम का बंध खुलने के साथ ही नाखून भी तेज होने की कवायदें होने लगी हैं। सुन्नी वक्फ बोर्ड के साथ ही हिन्दू महासभा दोनों सुप्रीमकोर्ट जाने की तैयारी में लग चुके हैं। हो न हो इसके साथ ही निर्णयों को प्रभावित करने के लिए ताकत दिखाने के प्रयास भी किये जायें।
  इस निर्णय के बाद कैमरे में कोई कह रहा है कि अब मौत भी कबूल है। कोई कह रहा है कि हमें मिला ठीक, लेकिन उन्हें हिस्से में क्यों शामिल किया गया। कुछ कह रहे हैं कि जब विवादित स्थल को मंदिर या मस्जिद मान लिया गया तो फैसला भी एक के पक्ष में होना चाहिए था। निश्चित ही कुछ खुले दिमाग के लोग इस निर्णय को ही अंतिम मानकर आगे देश में सद्भाव कायम रखकर प्रगति के पथ पर अग्रसर होने की राह भी दिखा रहे हैं। यानि स्वतंत्रता का इस्तेमाल सब कर रहे हैं। हम तो यही कहेंगे कि इससे आगे बढ़ते हुए दोनों को एक दूसरे के लिए वहां इबादत का न्यौता मिलना चाहिए। यह देश को दुनिया के शीर्ष पर पहुंचाने का एक रास्ता है।

धनेश कोठारी

  • Full Member
  • ***
  • Posts: 232
  • Karma: +5/-0
Re: Articles by Writer, Lyrist & Uttarakhand State Activitvist Dhanesh Kohari
« Reply #16 on: October 02, 2010, 01:35:41 PM »
 
गांधीवाद
 
सि बिंगौंणा छन
गांधीवाद अपनावा
बोट देण का बाद
गांधी का तीन
बांदरूं कि तरां
आंखा-कंदुड़/ अर
मुक बुजिद्‌यावा.
Source : Jyundal (A Collection of Garhwali Poems)
Copyright@ Dhanesh Kothari

धनेश कोठारी

  • Full Member
  • ***
  • Posts: 232
  • Karma: +5/-0
Re: Articles by Writer, Lyrist & Uttarakhand State Activitvist Dhanesh Kohari
« Reply #17 on: October 11, 2010, 10:46:35 PM »
।। श्री बदरीनाथ सुप्रभातम्।।
( श्री मुरलीधर शास्त्रिणा विरचितम् )


1.लक्ष्मीविलास नरसिंह गुणाकरेश
   बैकुण्ठ केशव जनार्दन चक्रपाणे।
   भक्तार्तिनाशन हरे मधुकैटभारे
   भूयात् बदर्यधिपते तब सुप्रभातम्।।


2.लक्ष्मीः प्रसन्नवदना जगदाद्यशक्तिः
   कृत्वाङ्गरागललितं सुमनोज्ञवेषा।
   संस्तौति शब्दमधुरैर्मुरमर्दनं त्वां
   भूयात् बदर्यधिपते तव सुप्रभातम्।।


3.ब्रह्मामहेशगुरुकाव्यसरस्वती च
   संप्राप्य तुङ्गहिमशृङ्गमये प्रदेशे।
   संसेवयन्ति हि पदाम्बुजयुग्मकं ते
   भूयात् बदर्यधिपते तव सुप्रभातम्।।


4.इन्द्रादयस्सुरगणाश्च विमानदिव्यैः
   प्राप्ताः कराञ्जलिपुटा भवदन्तिके हि।
   उद्धोषयन्ति सततं जगदेकनाथं
   भूयात् बदर्यधिपते तव सुप्रभातम्।।


5.सूर्यादयो ग्रहगणा नभसस्थले च
   दस्त्रादितारकगणैस्सहितास्सुनम्राः।
   मन्दारचम्पककरा बहुपुष्पयुक्ताः
   द्रष्टुं बदर्यधिपते तव सुप्रभातम्।।


6.देवर्षिनारद सनन्दन योगिवर्याः
   सप्तर्षयो भृगुमरीचिवसिष्ठमुख्याः।
   द्वारे पठन्ति शुभवेदसुरभ्यगाथां
   भूयात् बदर्यधिपते तव सुप्रभातम्।।


7.रम्भादयोऽप्सरगणाः सहनृत्तगीतैः
   गन्धर्वतुम्बुरुमुखाः सहवाद्यघोषैः।
   गायन्ति गीतसरसैरिह कीर्तिपुंञ्जं
   भूयात् बदर्यधिपते तव सुप्रभातम्।।


8.श्रीशक्ङरार्यमुनि मध्वमहायतीन्द्राः
   रामानुजार्य प्रभुवल्लभ देशिकेन्द्राः।
   गाथा विरच्य निगमागम तत्त्वसाराः
   नित्यं जगुस्तव यशो विमलं प्रभातम्।।


9.भास्वानुदेति विगता हिमशीतबाधा
   स्नात्वा च वह्निसलिले खलु यात्रिणो हि।
   नीत्वोपचारनिचयाः प्रभुदर्शनार्थं
   तिष्ठन्ति चत्वरमुखे तव सुप्रभातम्।।


10.हैमेषु राजतमयेषु घटेषु नीत्वा
   शीतोष्णतोयदधिदुग्धघृतादिकं च।
   स्नानोन्मुखा द्विजवरास्सहवेदपाठैः
   भूयात् बदर्यधिपते तव सुप्रभातम्।।


11.पञ्चामृतेन सलिलेन सुगन्धद्रव्यैः
   अभ्यङ्गनादि सुनोहर सम्भृतैश्च।
   सिञ्चन्ति चार्चकवराः स्तुतिभिर्मनोज्ञैः
   भूयात् बदर्यधिपते तव सुप्रभातम्।।


12.श्रीखण्डचन्दन सुगन्धयुजा विलिप्य
   कौशेवरत्नस्वचितैश्च सुकान्तिमद्भिः।
   वस्त्रेर्वराभरणपुष्पचयैर्भवन्तं
   आभूषयन्ति सततं तव सुप्रभातम्।।


13.भोजयानि षड्रसमयानि विधाय सूदाः
   दध्योदनादि घृतपायसमिश्रितानि।
   नित्यं प्रफुल्लमनसा विनिवेदयन्ति
   तुभ्यं बदर्यधिपते तव सुप्रभातम्।।


14.जाम्बूनदीय बहुमल्यमयं सुपात्रं
   आपूर्य मिश्रितघृतेन च वर्तिकाभिः।
   नीराजनेन सहवाद्यमृदङ्गघोषैः
   संतर्पयन्ति विबुधास्तव सुप्रभातम्।।


15.दैत्यं सहस्त्रकवचं वरदानमत्तं
   उन्मूलितुं सुरगणा बहुधाऽर्थयन्तः।
   नारायणो नरसखोऽवततार भूमौ
   संहत्य दानवपतिं विदधे प्रभातम्।।


16.संसारसागरसमुत्तरणैकहेतोः
   अष्टाक्षरं सकलसिद्दिकरं सुमन्त्रम्।
   आविश्चकार जगदभ्युदयस्य सिहौ
   क्षेमाय मानवगुणस्य हि सुप्रभातम्।।


17.यो वै हरिः कृतयुगे बदरीवनेऽस्मिन्
   तेपे तपो बहुजनस्य हिताय कृच्छ्रम्।
   श्रीश्रीनिवास जगदेक दयैकसिन्धुः
   कुर्याज्जनस्य सकलस्य स सुप्रभातम्।।


18.इत्थं प्रभुम नरहरिं करुणाब्धिसेतुं
   लक्ष्मीपतिं सुरगुरूं प्रणिपत्य मूर्ध्ना।
   याचे मुदा द्विजवरो मुरलीधराख्यो
   भद्रं करोतु सततं बदरीविशालः।। इति।।


(1960 के दशक में कोरोनेशन प्रेस मैसोर से पत्रक प्रारूप में प्रकाशित ‘‘श्री बदरीनाथ सुप्रभातम्’’ स्तुति को बदरिकाश्रम के प्रकाण्ड विद्वान तीर्थपुरोहित स्व. श्री मुरलीधर शास्त्रि ‘पण्डित’ जी के द्वारा विरचित किया गया था। जिसका आज भी भगवान बदरीनाथ की प्रतिदिन प्रातः प्रथम आराधना के रूप में सुपाठ होता है। )
सौजन्य से - श्री विनोद पण्डित, पुत्र श्री स्व. मुरलीधर शास्त्री जी। बदरीनाथ धाम।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,904
  • Karma: +76/-0
Re: Articles by Writer, Lyrist & Uttarakhand State Activitvist Dhanesh Kohari
« Reply #18 on: October 11, 2010, 11:27:25 PM »

धनेश जी कोटि-२ धन्यवाद इस अमूल्य जानकारी के लिए और भगवान् बद्रीनाथ के पवित्र शलोको के लिए!

धनेश कोठारी

  • Full Member
  • ***
  • Posts: 232
  • Karma: +5/-0
Re: Articles by Writer, Lyrist & Uttarakhand State Activitvist Dhanesh Kohari
« Reply #19 on: November 23, 2010, 12:13:16 PM »
कौनडरताहैखंडूरीराजसे ?
क्याभविष्यमेंभीभारतीयजनतापार्टीपूर्वमुख्यमंत्रीरिटायर्डलेफ्टिनेंटजनरलभुवनचंद्रखंडूरीकेनेतृत्वमेंदुबाराचुनावकेमैदानमेंकुदसकेगी? बाबारामदेवकेदोकरोड़कीरिश्वतकेखुलासेके बादशायदयहसवालउत्तराखण्डकेबहुतसेलोगोंकोमथरहाहोगा।हालांकिअभीकिसीकेनामकाखुलासानहींहुआहै।होसकताहैकिसमयरहतेकंट्रोलरोंकेद्वारासबकुछनेपथ्यमेंधकेलदियाजायऔरखुलासेकाबुलबुलाफूटनेसेपहलेहीसिकुड़जाये।यहांसवालयहभीउभरकरसामनेआताहैकिआखिरखंडूरीराजसेकिसेडरलगताहै।उत्तराखण्डराज्यकेवर्तमानविपक्षको, पार्टीकेही कुछसहयोगियोंको, नौकरशाहोंको, माफियातंत्रकोयाफिरबाबारामदेवकोजोअबअपनीराजनीतिकपारीकोशुरूकरनेकीजमीनबनानेलगेहैं।अतीतमेंइसकाकुछअहसासमिलजायेगा।जब फ्लैशबैकमेंजाकरउसदिनकोदेखाजाय, जबखंडूरीराजकीविदाईकेबादतत्कालीनडरेहुएलोगोंकीभीड़नयेराजाकेदेहरादूनपहुंचनेऔरताजपोशीहोनेतकउन्मादितथी।दूसरागुजराहुआलोकसभाचुनावजिसमेंकांग्रेसकोराज्यकीपांचोंसीटआसानीसेजितनेदीगईथी। इसीफ्लैशबैकमेंदेखेंतोनिश्चितहीखंडूरीकेशासनकालमेंभूमाफियाओंकोअपनेधंधेकीवाटलगतीदिखाईदी।नौकरशाहोंकेसाथहीट्रांसफर-पोस्टिंगसेगुजाराकरनेवालोंमेंभीअसहजतारही।अपनेनेताओंपरचुनावमेंपैसालगाचुकेलोगोंकीबेहतररिर्टनकीउम्मीदधूमिलहोनेलगीथी।ऐसाहीकाफीकुछहैजिसेसिलसिलेवारगिनाजासकताहै। आजकेपरिदृश्यमेंदेखेंतोतिवारीराजकीताजगीसभीकोदिखाईदेरहीहै।लालनीलीबत्तियोंकेसाथहीगाहेबगाहेठसककेदर्शनहोरहेहैं।मलाईकेलिएबीतेकुंभकेबादप्रकृतिनेभीमेहरबानीकरआपदाकामुंहखोलदिया।साहित्यसेलालित्यतकहरतरफखुशगवारमौसमदिखरहाहै।ऐसेमेंयदिआंकलनकरेंऔरमानेकीअगलेचुनावमेंक्याहोगा? तोसाफलगताहैकिडरनेवालोंकीफेहरिस्तलंबीहोसकतीहै। लिहाजायदिआनेवालेदिनोंमेंएकहीनहींकईबाबादुर्वासाकास्वांगभरलेंतोअचरजमेंनहींआनाचाहिए।बाबारामदेवकाअधूरासच (क्योंकिनामोंकाखुलासाअबतकनहींहुआहै) तोयहीकुछसंकेतदेताहै।सोजबजनरलजंगकेमैदानमेंपैदलहोजायेंगेतोचित्त-पट्टकेखेलकोमनमाफिकखेलाजासकताहै।लेकिनइसकेआगेभीएकताकतहैजोआजभीकुछउसीअंदाजमें (उत्तराखण्डसेतोउप्रहीअच्छाथा ) कहतीहैकि, खंडूरीराजइसनवेलेराज्यकेलिएबेहतरथा।   http://bolpahadi.blogspot.com/2010/11/blog-post.html

 

Sitemap 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22