Author Topic: Poems and Articles by Famous Poet Hemant Bisht-हेमंत बिष्ट जी के कविताये एव लेख  (Read 8653 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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POEMS AND ARTICLES BY HEMANT BISHT JI-(LIVE FROM NAINITAL)   

Dosto,

मेरापहाड़ पोर्टल में आप लोगों से एक ऐसे व्यक्तित्व से परिचित करा रहे है, जो कि बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं,  हेमंत बिष्ट जी पेशे से एक अध्यापक है, लेकिन एक कवि के रुप में आकाशवाणी, दूरदर्शन, प्रतिष्ठित मंचो में कविता करते हैं। साथ ही श्री बिष्ट जी के कुशल मंच संचालक भी हैं। श्री बिष्ट जी जीवविज्ञान के प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं, जिसके लिये उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिल चुका है।


बिष्ट जी ने बहुत सारी कविताये लिखी हैं, जो उत्तराखंड को चरितार्थ करती हैं, सबसे पहले बिष्ट जी का मेरापहाड़ पोर्टल में स्वागत है।

बिष्ट जी उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नैनीताल में निवास करते है और उत्तराखंड के विभिन्न कवि गोष्ठियों में देश के विभिन्न भागो में सक्रिय रूप से भाग लेते है।

बिष्ट जी इस थ्रेड में अपनी बहुत सारी कविताये एव लेख लिखेंगे।
आशा है आप लोगों को बिष्ट जी की कवितायें पसंद आयेंगी।

एम् एस मेहता


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Hemant Bisht Ji getting President Award from Dr Abdul Kalam and other photos.


Hemant Bisht

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   पहाड़ -
जांक रूखांक ठंढी  हावेले जान ऐ जैछी ,
जांक जड़ी बुटि पात पतेल वरदान हैछी
जांक रुखां मे 'प' आते ही डान सरग कास छाज जैंछी
रुख वांक भुंडी गईं,डाना में है गईं खाडे खाड़
'प' रै नि गै रुखां में ,रूखांक रै गै हाडे- 'हाड'
कूँ  त कसिक  कूँ यारो , यास है ऐ गईं म्यार पहाड़

Hemant Bisht

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हुसुक :
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यो बात जग जाहिर छू,
की हुसुक में हम माहिर छू.

      घराक आघिल मीम सैपयुकी कोठी क्वे बणी
      घरवालिक हुसुक में आँख गयी तणी

मीम सैपूल कोठीम गमाल घरी
हमुल माटाक डोल रडे दी
मीम सैपूल कोठीम रेलिंग बड़ी
हमुल आघिल बौ पोल खड़े  दी

      उनार फसल  हूँ, चैनी
      कागज, कलम, होटल, दवात, कार
      हमरि फसल लूणक तक पलट दीनी

मीम सैपूल च्यालेल बाब ठुल ठुल धरी
हमर चियालेल आपु कै बिलकुल चेली कर दे
मीम सैपूल चेलिक नाम, बेला धरों
हमूल  चेली नाम भदेली घर दे
मीम सैपूल नाम भदेली घर दे
मीम सैपूल च्यालौक ना बिल्लू धरौ
हमूल च्यालौक नाम शेरू कर दे !

     लाख समझै हौलो

     हम हम छू
    ऊ ऊ छै
    उनरि हमरि क्वे बराबरी
    उनर हमर क्वे मेल
    हमरि फसल उपजे खेतो में
     उनरि उपजे मेजो में

हमरि फसल ग्यु, मडु, झुगुर, बाजार
उनरि कमीशन, घूस, शेयर
हमरि फसल हू चैनी
दातुल, कुटाव, हौव, बल्ड, भान औजार
हमरि फसल हू चैनी
कागज़, कलम, होटल, दवात, कार
हमरि फसल लउण तक पलट दीनी

    देवुदाकी बैणी, हुरुकाकी सैणि
    उनरि फसल लउण तक उनी
   ठुल, ठुल सैप, संत्री, मंत्री
   हम फसल लवे बेर धरुनू
   टूपार और भकार में
   ऊ आपनी कमाई के धरनी
    सात समुंदर पार में

तबे त कुनू
हिट दातुल पकड़
हिट कुटव पकड़
हुसुक करण छोड़
कारबार हूँ मुख मोड़
रोल यसे जै क्वे रै जाल
कभाणि हमार ले दिन आल

 



Hemant Bisht

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यादें (पहाड़  रूपी इजा (माँ ) की पीड़ा )

 

जमा हुई है भीड़  आज  पगडण्डी  मैं 
हलचल है  गंभीर  आज पगडण्डी मे
बूढी माँ की क्यों आँख टिकी पगडण्डी मे
उतरी कितनी ही याद आज पगडण्डी मे 
जमा.......................
बहुत पढाया पहला बेटा ,खून पसीना खूब बहा
महानगर मे जाकर अफसर बनकर के वह वहीं रहा
भूला माँ या किया है छल पाखंडी ने
इंतजार में नजर बिछी पगडण्डी में .
जमा .............
दिन लौटे और दूजा बेटा ,अच्छा एक इंसान   बना 
हृष्ट -पुष्ट सी देह बनी ,सीमा का वीर जवान बना
प्राण दिए सीमा पर वीर प्रचंडी ने 
उतरा ओढ़ तिरंगा अब पगडण्डी मे
जमा ..........
तीजा बेटा पढ़ ना पाया, पला सदा वो अभावों मे
पर्वत मे रिसती लाचारी ,निर्धनता के घावों में
भागा दूर शहर श्रम बेचे मण्डी में
वापस कैसे पाँव धरे पगडण्डी में
जमा ......................
चौथा ऐसे गिरा कि अपनी ,ना धरती ना गगन रहा
खेती बेचीं खुद को बेचा ,सदा सूरा में मगन रहा
व्यर्थ में प्राण गवा डाले हैं दम्भी ने
लाश मिली है आज यहाँ पगडण्डी में
जमा ............
 
 
 
     
 
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Devbhoomi,Uttarakhand

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BAHUT HI BADIYA BISHT JI HUMEN AAPKI OR KAVITAON KA INTJAAR HAI !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Hemant Bisht Ji will continue to write his poems and atricles here before that he has sent some exclusive photos to merapahad on our request.

He has been participating in various Kavi Sammelan since long and has been awarded by President.

These photos are self explantory :




2. photo


dramanainital

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hemant daa aapko yahaan paakar behad prasannata hui.dono roopon mein.

harshvardhan

dramanainital

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hemant da kuch aur kavitaon kee aashaa mein hun.

Hemant Bisht

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          घाम दीदी ,बादल भीना

पैलिक हम -                                                                             
नान छना कुछी -
घाम दीदी ,मुख  दिखा
बादल भिना पलि पलि जा .
किलैकी -
बादलों  ली घिरी रुंछी आकाश
पत झड  सत झड ..........
कतुक-कतुक दिनों  जाले
घामौक नि देखिनेर  भै मुख
जब  लै, जरासी लै,.....
देखि  गै.....झव्व...
घामेकी सूरत
उतकै मन मे मिलनेर  भै सुख
*     *       *      *      *       *        *
आज .
मेहन-महीनो  बै
घाम दीदी मेते छ
बादल भिन रिसे  गई दीदी हूँ
नि उने.
कभते आया लै त,
दूरे बै चै बेर लौट  जानी ,
रिसे गई भिन ,
किलैकी ,
रुखां मे बस छी भिनाक परान
हमूल,रुखे कटे दीं.
खेतों  मे चल छी ,भिनाक  सांस ,
हमूल खेते बज्ये दीं .
बनवे दीं ,
ठुल-ठुल मकान
जाँ-,
पंख -कूलर -ए सी  वाल
मंख्योंक ठाड़ छन,
आन - बान- और शान
,जनार लिजी  ,
क्ये घाम दीदी न्यार
क्ये बादल भिन प्यार
*      *      *      *      *      *
दूर  आकाश बै -
बादल भिन कुनी,
पेड़ ,पहाड़  और पानिकि भै
पुराणी पछ्याण.
न पेड़ न पाणि,
पै पहाड़ों  मे ,
बाद्लौंक ,ख़तम निशान
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हेम पन्त

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बिष्ट ज्यू तुमरि कविता भौत भलि लागिछ... पहाड़ कि काथा क दगाड़ आजकलकि गम्भीर समस्या जोड़ि बेर कतुक सुन्दर कविता लेखि दी तुमुले... अघिल के ले तुमरि कवितान को इन्तजार छ...

 

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