Author Topic: Aipan: Uttarakhand Art - ऐपण  (Read 78520 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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लोककला ऐपण को रोजगार से जोड़ना बेहतर पहल: शोभाJul 25, 12:14 am

अल्मोड़ा। एकीकृत औद्योगिक नीति के तहत 15 दिवसीय ऐपण कला पर आधारित उद्यमिता विकास कार्यक्रम के समापन से पूर्व ऐपण की प्रदर्शनी लगाई गयी। इस अवसर पर आमंत्रित मुख्य अतिथि नगरपालिका अध्यक्ष शोभा जोशी ने प्रतिभागियों द्वारा बनायी गयी विभिन्न प्रकार के ऐपणों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि लोककला ऐपण को रोजगार से जोड़कर बेहतर पहल की गयी है। उन्होंने कहा कि इसे और व्यापक रूप में विस्तार देने की आवश्यकता है। शोभा जोशी ने कहा कि जिन लोगों ने भी ऐपण प्रशिक्षण में हिस्सेदारी की है, उन्हे वह सहयोग देने में पीछे नहीं रहेगी। मुख्य अतिथि ने प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रतीक चिह्न व पुरस्कार प्रदान किए। प्रशिक्षण में सर्वश्रेष्ठ रही चंपा कांडपाल, प्रथम रही शैलजा आर्या, द्वितीय अर्चना गोस्वामी, गीता पाटनी, नमिता तिवारी को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: ऐपण - UTTARAKHANDI ART
« Reply #21 on: August 04, 2008, 09:36:20 AM »
डीडीहाट में ऐंपण कला व रंग रसायन कार्यशाला जारीAug 03, 11:32 pm

डीडीहाट(पिथौरागढ़): जिला उद्योग केन्द्र और संबंध संस्था के संयुक्त तत्वावधान में डीडीहाट में आयोजित ऐंपण कला एवं रंग रसायन कार्यशाला जारी है। इस कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर जीवन जोशी और बसंत खर्कवाल क्षेत्र की 25 महिलाओं को ऐंपण और रंगों की जानकारी दे रहे है।

ऐंपण कला कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागी महिलाओं को विभिन्न अवसरों पर बनाये जाने वाले ऐंपण और कपड़ों में डिजाइन बनाने की विधियां सिखाई जा रही है। उद्योग विभाग के सहायक महाप्रबंधक डीएस खोलिया ने बताया कि विभाग महिलाओं को उद्यम के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिये विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रहा है। पहाड़ की ऐंपण कला विशेष स्थान रखती है। उत्तराखण्ड में धार्मिक अवसरों पर ऐंपण का विशेष महत्व है। इस कला को संरक्षित कर महिलाएं विशेष लाभ उठा सकती है। उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला के माध्यम से परम्परागत ऐंपण कला को तकनीकी रूप देकर और अधिक आकर्षक बनाने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। ऐंपण और रंग रसायन की विधियों में दक्ष होकर अधिकांश महिलाएं स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। इससे न केवल उत्तराखण्ड की धरोहर ऐंपण को संरक्षित किया जा सकेगा बल्कि महिलाएं आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर हो सकेंगी।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: ऐपण - UTTARAKHANDI ART
« Reply #22 on: August 08, 2008, 09:58:25 AM »
ऐपण कला को स्वरोजगार के रूप में अपनायें महिलाएंAug 07, 11:37 pm

बागेश्वर। नाबार्ड के डीजीएम विनोद विष्ट ने कहा है कि ऐपण व अल्पना हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। इस कला के जरिये महिलाएं स्वरोजगार कर सकती है। वह ग्रास संस्था द्वारा आयोजित ऐपण प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि शादी विवाह के दौरान बनने वाले ऐपण का सांस्कृतिक व धार्मिक महत्व है। महिलाओं की इस कला का फायदा उठाते हुए आज कई कंपनियां ऐपण के स्टीकर बनाकर बाजार में बेच रही है। उन्होंने कहा कि नाबार्ड ग्रास संस्था को एस्कोर्ट सर्विस देता रहेगा। संस्था के निदेशक गोपाल सिंह चौहान ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्र भराड़ी में प्रशिक्षण कार्यशाला लगाना विशेष प्रयास है। भविष्य में भी रोजगार परक प्रशिक्षण आयोजित किये जाएंगे। संस्था का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। ताकि उनमें आत्मविश्वास पैदा हो सके। जिला उद्योग केंद्र के सुपरवाइजर पीसी तिवारी ने प्रशिक्षण ले रही महिलाओं के कार्ड तैयार किये।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: ऐपण - UTTARAKHANDI ART
« Reply #23 on: August 20, 2008, 12:03:24 PM »
Pata Paintings


Pata is one of the most significant ceremonial paintings of Uttaranchal. It is an art of creating ritualistic images on large-sized papers called 'Patas'.
These paintings contain images derived from legends, Hindu mythology and the Puranas. Images of the deities, who are worshipped during the particular ritual, are also drawn. The usual color employed is red, although multicolored images are popular.

In almost every ceremonies conducted in the state, a symbol named Jev-Matrika and Lord Ganesh are worshipped. The Patas most often features these deities, along with Lord Krishna, Goddess Lakshmi and Goddess Durga.

The usual practice is painting three images of Jev-Matrika along with a single image of Lord Ganesh. The empty spaces on the two sides of the Jev-Matrika are filled with geometrical patterns. These patterns, symmetric in nature, are created by placing dots at equal intervals and joining them with lines. In the local slang, this style of geometric patterns is referred by the name ‘Barood.’

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: ऐपण - UTTARAKHANDI ART
« Reply #24 on: August 20, 2008, 12:04:19 PM »
Uttaranchal Wall Paintings

 


Uttaranchal has a rich culture of wall paintings. These wall paintings are basically categorized into kitchen paintings and ritualistic ones.
In the rural areas the walls of the house are re-plastered twice in a year with a mixture of cow dung and mud. The renewed surface of the walls is painted with ochre red color and various images are drawn on it using rice paste. The kitchen walls are embellished with traditional motifs called Nata, Chatu and Lakshmi Narayan.

The Nata patterns portray cereal saplings planted in rows, which are bordered by dotted rectangular frames. The saplings indicate the prosperity of the family and the strong bonds that tie the members together. The overall pattern is drawn on a raised platform. Six months later, images with the Lakshmi Narayan motif is created. This motif portrays two human figures enclosed inside a dotted square frame.

On special occasions like marriage, the outer walls are decorated with alternating images of bells and conch shells. This particular motif represents the celestial sound that was produced during the creation of the universe. This image gives the message that all sounds and forms are related to each other.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: ऐपण - UTTARAKHANDI ART
« Reply #25 on: September 21, 2008, 07:32:58 PM »

The artpiece depicts some Goddess... such paintings can be seen at the times of festival as 'Rangoli', reflecting strong culture value and immortal divinity



Artpiece from Kumaon (shot from the wall hanging)

हेम पन्त

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Re: ऐपण - UTTARAKHANDI ART
« Reply #26 on: November 07, 2008, 05:05:19 PM »
थोङा सा इन्तजार करें... पिथोरागढ से आपके लिये ताजा-तरीन ऐपण की फोटो अपलोड कर रहा हूं...

हेम पन्त

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Re: ऐपण - UTTARAKHANDI ART
« Reply #27 on: November 07, 2008, 05:24:05 PM »
It needs a great amount of exprtise/practice to make Aipan

हेम पन्त

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Re: ऐपण - UTTARAKHANDI ART
« Reply #28 on: November 07, 2008, 08:49:45 PM »
घर के प्रवेश-द्वार पर बनी ऐपण

हेम पन्त

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Re: ऐपण - UTTARAKHANDI ART
« Reply #29 on: November 07, 2008, 08:52:04 PM »
घर के अन्दर, कमरे के दरवाजे पर बनी ऐपण

 

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