Author Topic: Ceremonial Songs Of Uttarakhand - फ़ाग/मंगल गीत/संस्कार गीत/शकुन आखर  (Read 40521 times)

Risky Pathak

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Hem Daa Mere pass 1 saral tarika or hai.. Agar aap koi Downloader use karte hai(Jaise Orbit Downloader, Download Acclerator Plus, etc) to usme ye Link paste karke bhi gaane download kar sakte hai...
Vivah Geet Part-1 Ke Liye:= http://www.esnips.com/nsdoc/4e5f84c3-164e-431d-b9fa-8a4f5acefe30/?id=1206458486453

Vivah Geet Part-2 ke liye:= http://www.esnips.com/nsdoc/eaac433a-f651-4956-9ef6-8709363da32a/?id=1206458486453


Agar aap Opera Browser ki help se Download karna chahte hai. to CTRL+ALT+T sath press kare... isse transfer ki 1 nayi window khulegi... usme 1 jagah Box me Quickdownload likha hoga.. aap ye link wha paste kar de.... tab bhi download ho jaayegaa..

राजेश जी आपके कारण गोस्वामी जी के कई दुर्लभ गाने सुनने को मिल जाते हैं....मैने सभी गाने डाउनलोड किये हैं.. बहुत-2 धन्यवाद...

लेकिन आफिस में गाने सुन पाना संभव नही है... हिमांशु ने esnips से गाने लोड करने का तरीका सुझाया है... कल उसको अपना कर ये गाने भी डाउनलोड करुंगा


राजेश जोशी/rajesh.joshee

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मित्रो
आप सभी का धन्यवाद, इन गीतों की quality शायद अच्छी न हो क्योंकि रेकॉर्डिंग ठीक नही हो पाई है|  समय मिलने पर मैं फ़िर कोशिश करूँगा| मेरे एक relative हैं जिनके सहयोग से में गोस्वामी जी के गीतों को collect कर पाया हूँ|  वह जब भी कुमाऊँ में जाते हैं तो हर म्यूजिक शॉप पर गोस्वामी जी के गीतों की खोज करते हैं|
मेरा प्रयास रहता है की यह गीत अधिक से अधिक सुनाने वालों तक पहुंचे, जिसके लिए नेट से अच्छा कोई जरिया नही है|

पंकज सिंह महर

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जोशी जी,
        आपके इस सराहनीय और अतुलनीय कार्य के लिये धन्यवाद शब्द बहुत बौना है...सो, मेरी भावना को आप समझें। वास्तव में गोपाल दा को किसी ने सच्ची श्रद्धांजलि दी है तो वह आपने दी है।
जय उत्तराखण्ड!

Risky Pathak

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Shakunaakhar....

http://riskypathak.googlepages.com/Sakunaakhar.mp3

One of Shakunaakhar sang by Geetari who were called on my Brothers's YagyoPaweet Sanskaar on May-June 2001...

Due to some problem with Esnips.. You have to first download it. Then only you can listen it...

अगले पृष्ठ पर आपको कई और रोचक मंगल/संस्कार गीत मिलेंगे।..........

Rajen

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Very good ho Himanshu Bhula.  Aapane yeh achcha kaam kiya hai.  Kuchh saadee ke bhee shakuna-akhar dhoond kar laana, jab gaon kisi marriage mein jaawo to.

Shakunaakhar....

http://riskypathak.googlepages.com/Sakunaakhar.mp3

One of Shakunaakhar sang by Geetari who were called on my Brothers's YagyoPaweet Sanskaar on May-June 2001...

Due to some problem with Esnips.. You have to first download it. Then only you can listen it...



पंकज सिंह महर

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शकूना दे, शकुना दे,
काज ये अती नींको सो रंगीलो,
पाटलो आंचली कमलौ को फूल।
सोही फूल मोलावंत, गणेश,
रामीचन्द्र, लछीमण, जीवा जन में,
जीवा जन में आद्या अमरु होय।
अमरु होय, सोही पांटो पैरी  रैना,
सिद्धि बुद्धि, सीता देही, बहुरानी,
आई वान्ती पुत्र वान्ती होय,
सोही फूल मोलवन्ती,
(परिवार के पुरुषों के नाम)जीवा जन में आद्या अमरु होय,
सोही पाटो पैरी रैना,
सिद्धि-बुद्धि (परिवार की स्त्रियों के नाम)

पंकज सिंह महर

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किसी भी मांगलिक कार्य की शुरुआत गणेश पूजा से ही की जाती है, गणेश पूजा के समय निम्न फाग गाया जाता है-


जय जय गणपति, जय जय ए ब्रह्म सिद्धि विनायक।
एक दंत शुभकरण, गंवरा के नंदन, मूसा के वाहन॥
सिंदुरी सोहे, अगनि बिना होम नहीं,
ब्रह्म बिना वेद नहीं,
पुत्र धन्य काजु करें, राजु रचें।
मोत्यूं मणिका हिर-चौका पुरीयलै,
तसु चौखा बैइठाला रामीचन्द्र लछीमन विप्र ऎ।
जौ लाड़ी सीतादेही, बहुराणी, काजुकरे, राजु रचै॥
फुलनी है, फालनी है जाइ सिवान्ति ऎ।
फूल ब्यूणी ल्यालो बालो आपूं रुपी बान ऎ॥

पंकज सिंह महर

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मातृका पूजन के समय गाये जाने वाला मंगल गीत

कै रे लोक उबजनी नाराइन पूत ए?
कै रे लोक उबजनी माई मत्र देव ए?
                     नाराइनी कोख अबजनी माई मात्र देव ए।
               माथी लोके उबजनी माई मात्र देव ए॥
कौसल्या रांणि कोखि, सुमित्रा रांणि कोखि,
उबजनी रामीचन्द्र, लछीमणे पूत ए।
                माथी लोके उबजनी माई मात्र देव ए,
                      सीतादेहि कोखी, बहूरांणि कोखी उबजनीं।
                लव-कुश पूत ए। बालकै सहोदरै पूत ए।
माथी लोकै उबजनीं माई मात्र देव ए।
दूलाहिण कोखी, बहूरांणि कोखी उबजनी,
बालकै सहोदरे पूत ए॥


मातृका देवियों के पूजन का गीत है। यह प्रश्न करने पर कि "किस लोक में मातृका उत्पन्न हुई हैं" उत्तर में बताया जाता है कि इनकी उत्पत्ति स्वर्ग लोक में हुई है।

पंकज सिंह महर

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ज्यूंति पूजा के समय गाये जाने वाला संस्कार गीत

मेरा ममा का कंस राजा का, ज्य़ोंति की पूजा
वै रे चैइनीं मोष्टिका फूल।
उति को उठो बालो मेरी बारुड़ी का घर।
बणै दे बारुड़ी बांस पिटारी,
उतिको उठो बालो मेरी भएड़ि का घर,
बणैं दे इजू छही ज्यूंनार।
हमु ले जांणों छ चौ गंग पार॥

आहो भांणिजा, ल्याहो भांणिजा,
मोष्टिका फुल ल्या।
मेरा ममा का कंस.......

क्वे त्वे बाबा रे बाटो बतालौ?
को त्वे बाबा रे जमुना लैखलो,
आंखा जोड़ी बाटा बताओ,
जंघा जोड़ी जमुना तैराला।
उति को उठो बालो मेरो नागिणीं का घर।
व्युंजा नागिणीं नाग आपणो।
मेरा ममा का......

की तू बाबा रे मोस्यांणी लेछपाणीं कि,
तू बाबा रे जुवो को हारीया,
कि तू बाबा रे बाटो को भुलिया,
ना मैं नागिणी मौस्याणी ढोछयाणीं,
नामैं नागिणो बाटो को भुलिया,
मेरा ममा का.....

ली जा बाबा रे झडि़या पाडि़या लीजा,
बाबा रे धरति चडिया,
नीली जूनागिणी झंडीया,
पडि़या नी लीजू नागिणी धरति,
चडि़या नीका भला नीका,
भला कोरंगी भरुला।


ज्यूंत (जोत) पूजा का गीत है, पूजा के लिये "मोष्टिका" नाम के एक विशेष फूल की आवश्यकता है, एक बालक उसकी खोज में है।

पंकज सिंह महर

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निमंत्रण गीत


जा रे भंवरिया पितरों का देश-पितरों का द्वार ए,
को रे होलो पितरों का देश, पितरों का द्वार ए?
आधा सरग चन्द्र सुरीज, आधा सरग पितरों का द्वार ए।
सरग तैं पुछना छन दशरथ ज्य़ू ए।
की रे पूत ले, पूत नांति लै, की रे बहुवे ले दिवायो छ न्यूंतो, बढ़ायों उछव?
जो रे तुमें लै नाना छीना दूददोया,
नेत्र पोछा घृतमाला अमृत सींचा,
उं रे तुमें ले भला घरे की, भला वसै की सीतादेहिं आंणी, बहुराणीं आणी,
जीरो पूतो-पूतो, नातियां लाख बरीख,
तुमरी सोहागिनी जनम आइवांती जनम पुत्रावान्ती ए॥


विवाह के अवसर पर भंवरे को पितृलोक में पितरों को निमंत्रण देने के लिये इस गीत में कहा जा रहा है।


आगे की गीत देखने के लिये पेज नम्बर पर क्लिक करें।

 

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