Author Topic: Delicious Recepies Of Uttarakhand - उत्तराखंड के पकवान  (Read 133801 times)

Bhishma Kukreti

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उपेक्षित कंडाळी /कनाली /बिच्छू घास / वृश्चि कली   क 37   से बिंडी  व्यंजन
   
( More than  37 Recipes for very much ignored Sting Nettle in Garhwal )
s = क, का, की , कु

रुसाळ - भीष्म कुकरेती

कंडाळी  मनिखों कुण  विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों कुण  भौत लाभदायी पादप च।  किन्तु    सोच का कारण  अबि  बि  उपेक्षित च।  जबकि कंडाळी  से उत्तराखंड इ  ना मध्य हिमालय म ५० से बिंडी भोजन म प्रयोग ह्वे  सकद I
 आवा जणे जाव बल कंडाळी /कंडाली से क्या क्या भोजन बण  सक्यांद -
   कंडाळी  पत्तों  न पेय पदार्थ (beverage from   Stinging Nettle )
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 कंडाळी  चाय
कंडाळी  बियर
 कंडाळी  से सिरका
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  कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घास  से पक्वड़ /   पकोड़ा  पकाण
  १- बेसणौ   दगड़   कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घास क  पत्तियों पक्वड़ 
२- मुंगरी या चौंळो/झंगरौ   आटो  दगड़   कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घास   पत्ती  का पक्वड़   
  ४ -   भिजयां गहथ /उड़द/ सूंटो  मस्यटौ  दगड़  कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घासौ  पत्तियों  पक्वड़
 ५- साबूदाना  दगड़  कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घासौ   पत्तियों पक्वड़
 ६ - पोहा , उसायां  अल्लू दगड़  कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घासौ   पत्तियों  पक्वड़
 ७ -काचो मुंगरी पीसिक  कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घासौ   पत्तियों पक्वड़
   रुटि / पटुड़ी /pancake 
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  कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घासौ  कट्यां  पत्ता   की   रुटि
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पिजा म   मथि  कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घासौ  कट्यां  पत्ता  डळण
 मुंगरी / ग्यूं /चून /कोड़ा आटो  क दगड़  कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घासौ  कट्यां  पत्ता  मिलैक रोट
  कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घासौ  कट्यां  पत्ता   भरीं  रुटि  - कंडाळी क पत्तों  तैं  महीन काटीक लूण , मर्च मसाला  मिलैक रोटी  पुटुक  भरण
 भौं  भौं  पदार्थों दगड़   कंडाळी  मिलैक भर्यां  रुटळ /प्रथा या स्वाळ
कंडाळी  का सतपुड़ा
 -
ऑमलेट
  ऑमलेट  पकान्द  दैं  एक ओर  म मसालादार  कट्यां  कंडाली पत्ता डळण
अंडो दगड़  क  कट्यां  कंडाली पत्ता फिंटण
 पकायां  अंडो मथि  पकीं  कंडाळी  भुजी धौरीक खाण
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 हरी भुज्जि
 १ कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घास  की  हरी  सब्जी /भुज्जि . 
२ - पळिंग / पालक, हरो  प्याज, ओगळ , राई   आदि  दगड़   कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घास की हरी भुज्जि 
 फाणु /कपिलु
 ३-  कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घास क पत्तों  दगड़  अल्लू क भुज्जी जन  पळिंग -अल्लु  भुज्जी बणद
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 कंडाळी  कु फाणु / कपिलु
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 कंडाळी पत्तों से गहथ कु  मस्यट ,  झंगोरा , कौणी , बेसन , मुंगरी  आटो  आलणौ  दगड कपिलु /फाणु
कंडाळी  कंडाली /बिच्छू घास   कु सुक्सा  से फाणु /कपिलु पकाण
 कंडाळी  कंडाली /बिच्छू घास की पत्तियों तै उस्याइक  पीसिक साग पकाण /जन पालक पकाये जांद। 
 कंडाळी  कंडाली /बिच्छू घास की पत्तियों तै उस्याइक  पीसिक पनीर क दगड कंडाली पनीर को साग
 मूंग , हरड़ , दळीं  उड़द ,  उबाळ्पियुं  तोर कु  मस्यट  दगड़  , चणा दाळ , मलका  या  अन्य दाळुं  दगड़   कंडाळी  कंडाली /बिच्छू घास की पत्तियों तै  मिलैक मिळवाक साग पकाण
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 .   कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घासौ   पत्तियों  तरीदार साग ( झंगोरा क आलण ) - वास्तव म एक तरां  फाणु  या  सूप च।   

  -
कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घासौ   पत्तियों  भौं भौं खिचड़ी
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  नोड्यूल्स  या सिवई दगड़  कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घासौ पत्ती  मिलैक पकवान
 सूजी दगड़  कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घासौ पत्ती  मिलैक पकवान 
  ग्यूं / जौ / मुंगरी / झंगोरा /ओगळ  आदि  दळिया दगड़  कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घासौ पत्ती  मिलैक पकवान 
 चौंळुं /ओगळ  दगड़  कंडाळी / कंडाली /बिच्छू घासौ   पत्तियों खिचड़ी
 
कंडाळी की पेस्ट्री
सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती


Bhishma Kukreti

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तिमल / बेडू का तरीदार  कोफ्ता

Traditional Garhwali fig recipe
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गढ़वाळि  रुसाळ - भीष्म कुकरेती   मार्च २०२१
Uttarakhand food recipe series
उत्तराखंड पारम्परिक भोजन/पकवान श्रृंखला
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 उबळ्यां  अल्लु
१०० ग्राम पनीर /प्यूंस
 उबले आलू

4 कच्चा हरा तिमल (  कम से कम आठ घंटा पाणिम भिज्यंा )
2  चमच सफेद मुंगरी आटु
1/4 चम्मच  काळी  मर्च धुल धूल
  जीबी अनुसार लूण  मक
150 ग्राम  टमाटर
2 हौरी मिर्च
2 टेबल स्पून  हौर  धनिया  (बरीक कट्युं )
आवश्यकतानुसार तेल तलने के लिए
1/4 छोटी चम्मच हल्दी धूळ
1/4 छुटि  चम्मच लाल मर्च धूळ
------ तरी / रस्सा बणानो  कुण  -
1 छुटि  चम्मच धनिया प
20-25 काजू
1 चम्मच  आदो   पेस्ट
1 छूट  चम्मच  जीरो /जख्या
1/4  छुट  चम्मच गरम मसाला
स्वादानुसार लूण 
 
ब्यूंत -
उबळ्यां  अल्लु  छीलो।  एक कटोरीम अल्लु , पनीर क कद्दूकश म कश ल्यावो।  इखमा  लूण , काळी मर्च , थुड़ा हरो धणिया  अर मुंगर्युं आटो डाळि  खूब रळआवो मिसाओ।  अब आटो  तरां खूब ओलदो- ओलदो  चिपुलळ  कोमल कर द्यावो।  ग्वाळा बणाओ . 
तिमल /बेडु  छूट टुकड़ों  म काटी द्यावो। 
एक ग्वाळा उठाओ अर हथम धौरी अंगूठा अर अंगुळिन बड़ा कारो।  इनि  सब कोफ्ता तैयार करे  जांदन। 
कढ़ैम  राई तेल डाळि तचाओ (गरम ) ।  जब तेल पर्याप्त मात्रा म जावो   त  चार पांच कोफ्ता (उल्युं डौळि )  सुनहरा भूरा हूण तक तळदा जावो।  सब तेन पैल ब्लौटिंग पेपर म धारो अर जब कड़कड़ा  कोफ्ता का तेल च्यूं  गे तो प्लेट म धौरी द्यावो। 
 ----कोफ्ता क रस्सा पकाणो  ब्यूंत ---

टमाटर , हौर मर्च , काजू या मूंगफली दगड  बारीक  पीस द्यावो। 
जैं  कढ़ै म पक्वड़ /कोफ्ता तळेन उखम  द्वी चमच तेल रण  द्यावो।
तच्युं  तेल म जख्या /जीरो  तब गंद्यल /कड़ी पत्ता तड़कावो अर तब हळदी , धणिया धूल , थोड़ा भुनो अर तब पेस्ट (काजू को मसल ) कर्युं मसाला , अदरक - ल्यासणो पेस्ट, लाल मर्चौ धूल  मिलाओ अर पलटा घुमाओ बल मसाला भूरा तो ह्वे जावन पर जळन ना। 
अब युं भुन्यां मसालों म पाणि  डाळो , लूण   अर  जब तरी  तयार  ह्वे  जावो तो पकायां कोफ्ता डाळ  द्यावो।  गरम मसला धूळ  डाळो।  चार मिनट  बाद बरीक कट्युं   हरो धणिया डाळो भात या रुटि  दगड़  खाओ।   

 


Bhishma Kukreti

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   अरबी - कद्दू की मिश्रित सब्जी

    पिंडालु  /पिनालू अर  खीरा रळौ मिसौ  भुज्जी /साग   
 उत्तराखंड पारम्परिक भोजन श्रृंखला
 Traditional Uttarakhand Cousins (Recipes) Series
  (Pumpkin and Taro curry /dry vegetable  recipe  )
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रुसाळ - भीष्म कुकरेती
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खीरा /कद्दू - १/४ किलो
पिंडाळु /अरबी -  १/४ किलो
सुखी लाल मर्च सरा - स्वादौ अनुसार या  ४ एक
जीरो - या जख्या - एक चमच
हळ्दि - ३/४ चमच
धणिया - १ चमच ि जवाण  - १/२ चमच
लूण - अपण  स्वाद अनुसार
लाल मर्च धूळ  - एक चमच या अपण  आदत  अनुसार
राय तेल - ३. १/२ चमच
गंद्यल - चार पांच पत्ता
पिस्युं आदो - ल्यासण- अपण  स्वाद अर  प्रवृति अनुसार।
-अरबी - कद्दू की मिश्रित सब्जी  पकाणो  विधि -
दुयुं  तै छीलो अर वर्गाकार काट  द्यावो।
फिर चुलम कढ़ै  गरम  कारो अर  तेल चाओ।
तब जख्या /जीरो , गंद्यलो पत्ता , लालमृच डाळि  खुड़को।
पैल  कट्यां  खीरा / पिंडाळु /अरबी डाळि ,   खुड़को / भूनो  अर   एक  मिनट  परांत  खीरा  खुड़को।
तब कुछ समय परांत मसाला डाळि खुड़को /भूनो
तब सूखी भुज्जी  पकाण  हो तो कम पाणिम पकावो . तब जब पकण इ वळ  हो तो मलाई या दूध डाळो अर पकावो।
अंत म  महीन  धणिया पत्ता डाळो अर उतारो। 
जु  तरीदार साग खाण  त पाणी  मात्रा देखि डाळो  अर  आत्म दूध  या मलाई। अंत म धनिया पत्ता।
रुटि  दगड़  या भातौ  दगड़  खाओ।   

उत्तराखंड पारम्परिक भोजन श्रृंखला  चलती रहेगी
 Traditional Uttarakhand Cousins Series  to be continued , गढ़वाल का पारम्परिक भोजन , कुमाऊं का पारम्परिक भजन


Bhishma Kukreti

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मर्सू / चौलाई Amaranthus  के पारम्परिक   व आधुनिक ऊतराखंडी भोजन

  पारम्परिक व आधुनिक मर्सू / चौलाई क बनि बनि   उत्तराखंडी खाणक
 Traditional and Modern Food  of Uttarakhand of Amaranthus
रुसाळ : भीष्म कुकरेती
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 उत्तराखंड्यूं  भैर  जाण  व पर्यटन  वृद्धि का कारण अब  भौत  सा भैराक भोजन उत्तराखंडौ  परम्परागत भोजन बण   गेन जन कि मर्सू का बनि बनि  भोजन -
  मर्सू क बीज , मर्सू क पत्ता अर  डंठल भोजनौ  काम  आंद।
-
 -मर्सू / चौलाई / राजगीरा Amaranthus बीजों  भोजन व अन्य प्रयोग -
 -
  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus  बीजुं  खील - बुखण /चबेना
  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus  खीलों से फ्रूट फलोदा   
  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus  बीजुं  खीर
  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus  बीजुं  भूजी  /खील  हलवा
    मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus  बीजुं  टिक्की
  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus  बीजुं  मिठाई - मिठाई पर चिपकाण
  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus  दाणो  से क्वासेडेलिया  फलार   
सूखा माछ पकाणो    (fish fry  ) का वास्ता मर्सू लेप
बनि बनि  अनाज व अन्य माध्यमों दगड़  लड्डू
भुज्युं  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus  बीजुं  चिक्की
चौलाई दाणो  बनि   बनि  कैंडी
  भुज्युं  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus  बीजुं  दही बड़ा   
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  भुज्युं  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus  बीजुं   चॉकलेट केक
  -
   मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus ऑटो बनि  बनि  भोजन
 -
   मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus आटो   बनि  बनि  रुटि
  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus आटो    पळ्यो
  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus आटो  रळो  मीसो रुटि /परोठा  आदि
  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus आटो    हलवा
मर्सू बिस्किट
मर्सू  आटो  पूरी (दुसर  अनाजौ  दगड़ )
  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus आटो चाट / आटे  से सेव पकाकर   
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  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus   सत्तू   
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चौलाई सत्तू बनि  बनि  उपयोग  जनकि  खीरा दगड़  खाण  आदि

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      मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus पत्तों  का बनि  बनि  साग
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   मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus पत्तों  से सुखी भुज्जी
  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus पत्तों  कपिलु
   मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus पत्तों  से फाणू
  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus पत्तों  से  मूंग , गहथ आदि दाळम मिक्स साग
    मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus पत्तों  अन्य पत्त्तों दगड़  हरी भुज्जी
  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus पत्तों  उबाळी  बनि  बनि  साग पकाण
   मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus पत्तों  बनि  बनी बड़ियों  दगड़  साग या भुज्जी
आलू / कद्दू दगड़  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus पत्तों   भुज्जी
  मर्सू / चौलाई / राजगीर Amaranthus पत्तों  पकोड़ी   

   
 


Bhishma Kukreti

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कटहल बीजों के   लाभ
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  उत्तराखंडी भोजन श्रृंखला
रुसाळ - भीष्म कुकरेती
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कटहल उत्तराखंड भाभर क्षेत्र म पैदा हूण वळ  एक प्रमुख बृक्ष च।  पहाड़ों म  बि कटहल हूंद किंतु न्यून मात्रा म।
 कटहल बीजुं  लाभ -
१- कटलै  बीजुंम डाइट्री  फाइबर भरपूर हूंदन।  न्यून  कैलोरी युक्त हूंदन तो व्यक्ति  भार न्यून करणो  लाभदायी।
२  -कटलौ  बीजुंम मैग्नीशियम अर मैगनीज भौत हूंद।  रक्त थक्का जमण  से रुकदन अर रक्त संहार म सहायक।
३ -पर्याप्त स्टार्च हूंद तो ऊर्जादायी।
४ -कटलौ  बीजुं  म एंटीऑक्सीडेंट्स भौत हूंद तो बढ़दी उमर गति न्यून  करणम म लाभदायी।  तनाव दूर करणम सहायक
५ - कटहलौ   बीजुंम लिग्नेंस , आइसोफलेवोन्स , सैपनिन्स अर हौर  बि फायटोन्यूट्रियन्स  हूंदन जु  श्रील व मानसिक शक्ति वर्धक छन। 
copyright @ Bhishma  Kukreti
उत्तराखंड के पारम्परिक भोजन शृंखला , कटहल बीजों के लाभ शृंखला चलती रहेगी


Bhishma Kukreti

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  कटहलौ  बीजुं  सूखी अर  पंद्यरि  भुज्जी  पकाणो रीति /ब्यूंत
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  उत्तराखंडी भोजन श्रृंखला
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रुसाळ - भीष्म कुकरेती
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  कटहल उत्तराखंड भाभर क्षेत्र म पैदा हूण वळ  एक प्रमुख बृक्ष च।  पहाड़ों म  बि कटहल हूंद किंतु न्यून मात्रा म।
  पक्यूं कटलै  भुज्जी सवादी नि  हूंद पर गूदा मिट्ठो हूंद अर  महारष्ट्र गुजरात जन राज्यों म मिट्ठो फल हेतु खाये जांद।
अर  मिठो गुदा से खीर , मालपुआ आदि बि  बणाए जांद।
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 कटलौ  बीजुं  सूखी  सब्जी
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 उत्तरी भारत विशेषतर उत्तरी भारत म केवल कटलौ  बीजुं  उपयोग न्यूनतम ही हूंद।  किन्तु स्वास्थ्य अर  स्वासद दृष्टि से कटलौ  बीज महत्वपूर्ण छन। 
 कटल  बीजुं  सूखी  भुजी बि बणदि  अर पंद्यर तरीदार करी बि।
 सूखी भुज्जी पकाणो ब्यूंत -
कटहल सूखी सब्जी पकणो अवयव (सामग्री )
कटलौ  बीज - २५० ग्राम
लाल मर्च चूरा - आधा छूट  चमच से न्यून
हल्दी चूरा - आधा  छूट चमच
धणिया  चूरा - एक चमच
अमचूर  -  पाँव चमच
हींग - द्वी चुटकी
गरम मसाला - आधा चमच से बि न्यून
हौर धनिया - स्वाद अनुसार
लूण - स्वादानुसार
हौर मर्च सिलवटम पिसिन - एक  चमच
अदरक कद्दूकस कर्युं - चुटकी
तेल -  रायी  तीन चमच
जीरो /जख्या -  अदा चमच
कड़ी पत्ता /गंदेलु  पत्ता - चार पांच
सूखी मर्च - तीन
टमाटर -  एक कट्युं  टमाटर
-
 ब्यूंत
कटहल बीजों  तैं  पांच दस मिनट तक पकाण।  तब सलाणो  उपरान्त  कटहल बीजों  छुक्यल उतार दीण। अर तब यूं पक्यां - निछुकल्यां  कटहल बीजों तै द्वी भागों म काटि  दीण।
चुलम  कड़ै  गरम करण।  गर्म कड़ैम कड़ो तेल गर्म करण।  तेल गरम  हूणो उपरांत राई या जख्या  तड़का द्यावो। गंदेला पत्ता डाळो अर  हींगौ छौंका लगाओ,  लाल मर्च भूनो  ।  अब मसाला , लूण , मर्च चूरा , हल्दी चुरा , प्याज , टमाटर पेस्ट से  आदि  छौंको या कटल बीज डाळो अर मैण  मसाला , टमाटर , लूण  मिलैक  कड़छी चलांद  जावो।  लूण  पाणि से पैल डाळो
पाँव कप पानी डाळो।  ५ सात मिनट तक पकावो। अमचूर अर चाट मसाला डाळो। 
अंत म कट्युं  धणया से गार्निश कारो। 
कटलौ  बीजुं  सूखी भुजी प्रस्तुत  च। 
कटहल की सूखी सब्जी खाणो प्रस्तुत च अर  रुटि , परांठा  दगड़ खाणो  त्यार।
मीन महाराष्ट्र म एक  ढाबा होटलम  दारु दगड़  चखना रूपम  बि   कटलै  सूखी भुज्जी खायी। 
-
 पंद्यर  साग पकाणो कुण
 -
या तो मुंगरी आटो  या काजू आदि  पेस्ट  या कटलौ  बीजुं  परस्त मिलैक कटलौ  बीजुं  पंद्यर  साग बि पकाये  जांद।  या टमाटर , प्याज कु  बिंडी पेस्ट दगड़   पकैक कटहल बीजों  बि पंद्यर भुज्जी बणदी।   


Bhishma Kukreti

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आम पन्ना बणाणो  ब्यूंत
-
उत्तराखंड पारम्परिक भोजन श्रृंखला
. -
भीष्म कुकरेती
समान -
५०० ग्राम छुक्याल उतर्यां   कच्चा आम
चिन्नी - जथग  चयेणु  च
पाणी  - एक कप
लूण  स्वाद अनुसार
ामक गुदा तै काटि  प्रेसर कूकर म पकाई दीण .
सळाणो  उपरांत पेस्ट बणाओ .
एक गिलासुन्द  भून्युं जीरो चूरा , काळो  लूण , चिन्नी  काळी मिर्च अर  पन्ना पेस्ट डाळो , एक द्वी पत्ता पोदीना बि  अर  बरफ  डाळी  चमचन  हलावो अर  प्यावो पिलाओ । 
लूण , काळी मर्च  नी  चयेणु  तो नि  डाळो

Bhishma Kukreti

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  ब्रिटिश काल बिटेन  जौं  भोजन /मसाला /पेय  की उपेक्षा ह्वे

संकलन - भीष्म कुकरेती

१ ओगळ  -  स्वादिष्ट त छैं ी च ओगळ पौष्टिक भोजन बि  च .
२- मर्सू/चौली  - उन  त  मर्सू भारत कु  भोजन नि  छौ  पर पौष्टिकता म महत्वपूर्ण च।
३- सहजन - अमृत का  बाद पौष्टिक पादप किंतु  उत्तराखंड इ ना पुअर भारत म ये पौस्टिक भोजन की अति उपेक्षा हूणी च।
४ -पिंडाळु - पौष्टिक तत्व म महत्वपर्ण किन्तु उपेक्षित (आलू प्रवेश का बाद )
५ - कठहल - अति उपेक्षित पादप
६ - शक़्कर कंद
६ a गहथ , भट्ट
७- टिमुर  - मसाला अर  दंत स्वछता माध्यम
८ - जख्या - पौष्टिक अर  सवादि  छौंका किन्तु उपेक्षित
९- जल जीरा
१०- ठंडाई
११ - छांछ
१२- सत्तू व सत्तू पेय
१३ भौत सा स्थानीय चटनी (कारण चीनी सॉसेज  व  यूरोपीय कैच अप )
१३-  बहुत सा फलों रस जन बुरांस , डंफु , आम रस , तिमल -बेडू रस , सेव रस , मेळु  रस
Traditional food, Drinks, Chutney of Uttarakhand 

Bhishma Kukreti

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उत्तराखंड में   इलेक्ट्रिक फ्रूट ज्यूस एक्सट्रैक्टर / फल रस निष्कासक  का इतिहास

 उत्तराखंडम  केनस्टारन  इ  इलेक्ट्रिक  फ्रूट ज्यूस एक्सट्रैक्टर से  सबसे पैल परिचय कराई 
   उत्तराखंड परिपेक्ष म रसोई यंत्र/उपकरण  इतिहास - भाग - २
   आलेख : भीष्म कुकरेती 
-
  फलों से रस निष्कासन का सामन्य विधि छे कि  सिलवट म बट्टा  से या कै वस्तु क दबाब फल पर बढ़ाये जाय अर रस तै बजाए जाय।  भारत म १९९६ तक  लोक व्यक्तिगत आयातित  इलेक्ट्रिक ज्यूसर या  स्मगलर्ड ज्यूसर  से काम चलांद  या अजंता ब्रैंड जन नॉन इलेक्ट्रिक ज्यूसर से काम चलांद  छा।   
अक्टोबर सन १९९६  म केनस्टार न भारत म किचन अपलियेंसेज उद्यम माँ क्रान्ति लायी दे जब केनस्टारन लीला पेंटा होटलम केनस्टार लॉन्च कार ।  केंटर की सबसे बड़ी विशेषता छे बल ये ब्रैंड का विपणन बड़ी विशेष छे।  केनस्टार ब्रैंड  वास्तव म  विशुद्ध भारतीय ब्रैंड छौ किन्तु विपणन पद्धति इन  अपनाये गे  कि जु  ये ब्रैंड का जन्मदाता छा वूं तैं  बि लगद  छौ  कि केनस्टार विदेशी ब्रैंड च जन कि मि।  मि  तै गर्व च बल मि ये ब्रैंड को जन्मदाताओं मध्य एक प्रबंधक छौं।  विपणन का प्रत्येक अंग का  (प्रोडक्ट , पब्लिसिटी ) इन प्रयोग ह्वे कि  भारतीय अबि  बि सुचदन  कि कैंसर विदेश ब्रैंड च।  यदि   केनस्टार ब्रैंड स्वामी उद्योगपति धूत बंधु लोगों तै नि  बतांद  तो कै पता इ  नि  चलद  कि केनस्टार विदेशी ब्रैंड च। 
केनस्टार की  कई भौत सी विशेषता छन अर  वां मध्ये एक च  इलेक्ट्रिक ज्यूस  एक्सट्रैक्टर को भारत म परिचय कराण।  नवंबर तक केनस्टार ज्यूस  एक्सट्रैक्टर  एक हिट प्रोदटकट ह्वे  गे  छौ।  यु प्रोडक्ट आयातित प्रोडक्ट छौ अर  छै -१० मैना म केनस्टारन मोल्ड आदि निर्मित करी ये प्रोडक्ट कु  भारतीय कर्ण बि  कर दे छौ। 
विपणन दृष्टि से केनस्टारन भारत म सबसे पािल केवल आठ शहरों म ही पदार्पण कार।  तो सन १९९७ से पैल  ज्यूस एक्सट्रैक्टर उत्तराखंड म इंट्रोड्यूस नि ह्वे।  संभवतया उत्तराखंड म केनस्टार ज्यूस एक्सट्रैक्टर नवंबर १९९७ म इंट्रोड्यूस ह्वे  होलु। 
केनस्टार ज्यूस  एक्सट्रैक्टर  बजार म हिट हूण  से भौत सा ब्रैंड बजार म ऐना।  आज रूण  या च सब बिसर गेन  कि  उत्तराखंड इ  ना  भारत म  बि  इलेक्ट्रिक ज्यूस एक्सट्रैक्टर केनस्टार इ लायी। 
मि तै गर्व च कि  मि  केनस्टार ब्रैंड का जन्मदाता प्रबंधक राऊं। 
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भोळ  दुसर उपकरणौ विषय म, History Kitchen Utensils in Uttrakhand; History of  Juice  Extractor :   A utensil in uttarakhand, उत्तराखंड में  रस निष्कासक / ज्यूस एक्सट्रैक्टर  रसोई उपकरण  का इतिहास


Bhishma Kukreti

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झंग्वरा /समा चावल का बनि बनि  व्यंजन

(उत्तराखंड के पारम्परिक व्यंजन श्रृंखला )
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रुसाळ: भीष्म कुकरेती
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 झंग्वर/ समा / संवत चावल/ सवया   मध्य हिमालय  क एक हत्वपुर्ण  अर  पौष्टिक अनाज छौ किंतु  ब्रिटिश कालम व स्वंतन्त्रता पैथर  झंग्वरौ  उपेक्षा ह्वे अर  ये पौष्टिक अनाज तै गरीबों भोजन नाम दिए गे। 
जबकि  अब पहाड़ियों  बिंगण म आयी गे  बल चौंळ से अधिक लाभकारी अनाज च।  तो दिखे जाय झंग्वरा क्या क्या पकवान पकाये सक्यांद अर  झंगोरा क भोजन प्रतिदिनौ  भोजन म सम्मलित करे जाव  -
झंगोरा क सादा चौंळ जन भात   
झंग्वरै खिचड़ी
झंगोरा / संवत चावल , श्यामा का  पुलाव
झंगोरा व अन्य अनाजै  दगड़  खिचड़ी व पुलाव
जीरा झंगोरा   जन जीरा राइस जन
  मिठु  झंगोरा जन मिठ  भात पकाये जांद।   
  झंग्वरा / संवत  चावल, वरी का चावल /श्यामा  चावल  की बनि  बनि  खीर -
केवल गुड़ या चिनी  अर  दूध खीर या ने मिठु  झंगोरा
 गुड़ या चीनी दूध अर  कट्यां  मेवा  दगड़  झंगोरा खीर
  गुड़ या चीनी दूध अर  कट्यां  मेवा  , केसर की  झंगोरा खीर   
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झंगोरा /समा कटलेट /पट्यूड़ 
झंगोरा /संव  चौंळ  का स्वाळ ( आटो बणैक )
  झंगोरा / संव  चौंळ   /समा चौंळ का पराठा
   झंगोरा / संव  चौंळ   /समा चौंळ  उपमा
  झंग्वरा इडली जन भोजन
झंग्वरौ अप्पे
झंग्वरौ  आटो  (भिजयां या  सूखा)  अर  दाळ  काप  ट्यूड़
  झंग्वरौ /समा  आटो  (भिजयां या  सूखा)  अर   साबूदाना पट्यूड़ /चीला  या केवल झंगोआ पट्यूड़ /चीला
 झंगोरा /समा/ संव /संवत /वरी का चावल /श्यामा का  कटलेट
भिग्यां  झंग्वर  तै पीसिक ऑटो तरा गोन्दिक  भर्यां  स्वाळ /कचोरी पकाण
  भिज्यां  झंगोरा/समै चावल   आटो का ढोकला
झंगोरा वा साबूदाना ढोकला
झंगोरा समा चावल का पक्वड़  /भूड़ा
 झंगोरा /समा चावल  व अन्य भोज्य पदार्थों दगड़  बनि बनि  भोजन
झंगोरा /संव  चौंळ का डोसा
झंगोरा /समां चावल की कड़ी /पळ्यो
बिभिन्न भोजन का वास्ता  झंगोरा /समा  का आलण  जन कंडाळी , कफली , कपिलु  आदि आदि
  झंगोरा /समां चावल से मठरी , कतली आदि   
 झंगोरा क दही बड़े
भौत सा अन्य व्यंजन बी छन 
Copyright@ Bhishma Kukreti, 2021
 उत्तराखंड के पारम्परिक व्यंजन , उत्तराखंड , हिमाचल का पारम्परिक विवजन झंगोरा /समा , उत्तरी भारत का पारम्परिक भोजन श्रृंखला  चलती रहेगी। 

 

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