Author Topic: Delicious Recepies Of Uttarakhand - उत्तराखंड के पकवान  (Read 146844 times)

Bhishma Kukreti

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समोसा ऐ बात क सबूत च कि ग्लोबलाइजेशन क्वी नै चीज नी च
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सरोज शर्मा ( भोजन इतिहास शोधार्थी )
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समोसा खाण क बाद ई समझ मा आंद कि कै भि चीज कि पैछाण देश सीमा से तै नि हूंदि,
ज्यादातर लोग मनदिन कि समोसा एक भारतीय नमकीन पकवान च लेकिन ऐ से जुड़यू इतिहास कुछ और ही ब्वलद, दरअसल समोसा ईरान क प्राचीन साम्राज्य से आई, समोसा फारसी शब्द संबुशक शब्द से निकल,
समोसा कु जिक्र सबसे पैल 11 वीं सदी म अबुल फजल बेहाकी कि लेखणि मा मिलद, ऊन गजनवी साम्राज्य क शाही दरबार मा पेश किए जांण वलि नमकीन चीज कु जै म कीमा और सूखयां मेवा भवरयां हूंदा छाई,
ऐ थैं खस्ता हूण तक पकये जांद छाई,लेकिन लगातार भारत मा आंण वल प्रवासियो न ऐक रंगरूप बदल दयाई
समोसा भारत मा मध्य एशिया कि पहाड़ियो गुजरिक आई जैकु अब अफगानिस्तान बोलदिन ,
यूं प्रवासियुल भारत मा भौत कुछ बदल साथ हि समोसा क स्वरूप मा भि बदलाव आई,
भारतीय खाण का विशेषज्ञ पुष्पेश पंत का हिसाब से यू किसान लोगो क पकवान बण ग्या, पैल भि ई तलकी ही बणये जांद छाई ,लेकिन ऐ क भितर सूखा मेवा कि स्थान मा भेड़ बकरा क मीट न ले ल्या,समोसा ल हिनदुकुश पर्वत से ह्वै क भारतीय उपमहाद्वीप क सफर तै कार,
भारत म अपणि जरूरत क हिसाब से समोसा पूरी तरह बदलिक अपण हिसाब से बणै दयाई, भारत मा अल्लु मर्च भोरिक स्वादिष्ट समोसा बणयें जंदिन, समोसा मा लगातार बदलाव हूंणू च,कखी भि जाव समोसा अलग ही रूप मा मिललू, एक ही बजार मा अलग अलग दुकानु मा ऐ क स्वाद अलग मिललू।


Bhishma Kukreti

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झंगोरा कि खीर, बिना दूध बिना चिन्नी कि,

सरोज शर्मा सहारनपुर बटिक।

झंगरू ध्वै कि 1/2 घंटा भिगै दयाव- 1/2 कटोरि
अब गरम पाणि म गैस पर चढाव
गलण दयाव, जब गैल जा तब गैस बन्द कैर दयाव अब ये मा 1/2 कटवरि खजूर बीज निकालिक डाल दयाव नारियल कु दूध 1/2 लीटर और केशर भि अच्छा से मिलाव। ह्वै गै तैयार।

Bhishma Kukreti

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कद्दू, मूली क पत्तो कि भुज्जी
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सरोज शर्मा
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झंगोरू मा लौकि डालिक पुलाव, और मूंग दाल कि रवटि,
झंगोरू एक कटवर ध्वै क भिगै क, एक छवटि लौकि घीसिक, जीरू एक छवट चम्मच, हींग चुटकी भर लाल मर्च एक छवट चम्मच, हैर मर्च बरीक काटिक कम ज्यादा अपण हिसाब से लूण स्वादानुसार घी एक बड़ चम्मच, तेल गरम कैरिक हींग जीरा कू तड़काव वै मा लौकि डालिक भून ल्याव अब झंगोरू भि डाल दयाव भून ल्याव लूण मर्च स्वादानुसार डालिक चलाव द्वी कटवर पाणि डालिक कुकर क ढक्कन लगै क 2-3 सीटि दयाव, भाप खत्म हुण दयाव अब ढक्कन खोलिक गर्मा गर्म परोसा, जौं क बरत नी उ लोग लासण अदरक प्याज टमाटर हलदी डालिक भि बणै सकदन।


Bhishma Kukreti

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शिमला मर्च कु इतिहास
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सरोज शर्मा ( भोजन शोधार्थी)
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शिमला मर्च क नाम से लोगों कि राय च कि शिमला मर्च कि खेति शिमला म हूंद ह्ववैलि इलै एकु नां शिमला मर्च पवाड़।
शिमला मर्च ( कैपसिकम) मूल रूप से दक्षिण अमेरिका कि सब्जी च, वख 3000 साल से ऐकि खेति हूंद।
इन्डियन कुकिंग पुस्तक क अनुसार शिमला मर्च सन 1510 मा अन्नानास और पपिता दगड़ गोवा ल्या छा।
हिमाचल प्रदेश क नौणि विश्वविद्यालय का बागवानि विशेषज्ञ डाक्टर विशाल डोगरा न बताई कि अंग्रेज ऐ क बीज भारत म लैं, शिमला कि पहाड़ी मिट्टी और मौसम ऐ सब्जी क अनुकूल छा उन यखी ऐकु बीज रोप दयाई,
यीं सब्जी क उगण वास्ते यख कु मौसम अनुकूल राय बंपर फसल हूण लगी, लोगो न स्वाच कि शिमला मर्च शिमला मा हि हूंद, बस ऐ क नाम शिमला मर्च पोड़ ग्या पैल या हैर रंग की हि हूंद छै पर आज लाल पीला रंग मा भि मिल जांद।


Bhishma Kukreti

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अचार इतिहास क झरोखों( खिड़की)मा
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सरोज शर्मा (भोजन मूल शोधार्थी)
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अचार देशभर मा विभिन्न नामो से जणैं जांद, कन्नड मा उपपिनकायी, तेलगू मा पचादी, तमिल मा उरकाई, मलयालम मा उप्पिलुथू, मराठी मा लोंचा, गुजराती मा अथानू और हिन्दी मा अचार-एक पारंपरिक रूप मा हजारों-हजार वर्ष पिछनै हट जांद, न्यूयॉर्क फूड संग्रहालयो क अचार इतिहास क मुताबिक भारत का मूल निवासी पैल बार टिग्रीस घाटी मा 230बीसि मा उठये ग्या।
भारतीय खाद्य ए हिस्टोरिकल डिक्शनरी ऑफ इंडियन फूड मा इतिहासकार केटी आचाया न नोट कार कि अचार बिना खाण पकाण की श्रेणी मा आंद, हालांकि आजकल भौत सा अचार मा आग कु प्रयोग हूंद, भारत मा अचार कु एक समृद्ध विरासत च, इतिहासकार क बोलण च कि गुरूलिंग देसिका क लिंगापुराना मा पचास प्रकार का अचार कु उल्लेख मिलद, भारत का अचार मूल तीन प्रकार छन सिरका मा, नमक मा, और तेल मा संरक्षित, भारत मा तेल अचार म इस्तेमाल किये जाण वल लोकप्रिय माध्यम च, यू मसलादार भोजन कि आवश्यकता पूरी करद,यात्रा मा भि आदर्श मने जांद।


Bhishma Kukreti

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पेड़ा इतिहास
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सरोज शर्मा (भोजन मूल शोधार्थी)

पेड़ा भारतीय उपमहाद्वीप कु मिट्ठू व्यंजन च ये कि उत्पत्ति मथुरा,उत्तर प्रदेश भारत से ह्वाई,
ऐ कि मुख्य सामग्री खोवा, चिन्नी, इलायची, पिस्ता, केसर च।
ऐक रंग मलैदार सफेद से भिन्न हूंद, पेड़ा शब्द आमतौर मा आटु और खोवा जन पदार्थ क गोलों खुण किए जांद, मिठै खुण विभिन्न नामु से पेड़ा, पेंडा ब्वले जांद
उत्तर प्रदेश भटिक पेड़ा भारतीय उपमहाद्वीप क कै हिस्सो मा फैल ग्या, लखनऊ का ठाकुर राम रतन सिंह जु 1850 क दशक मा धारवाड़ चल गैं ऊन वख पेड़ो कि शुरुआत कै, यू विशिष्ट पेड़ा धारवाड़ पेड़ा क नाम से प्रसिद्ध च, कंडी पेड़ा सतारा मा महाराष्ट्र पेड़ा कि एक और किस्म च, कर्नाटक मा नन्दिनी मिल्क को-ऑपरेटिव द्वारा प्रसिद्ध डूड पेड़ा एक और प्रसिद्ध किस्म च, दगड़ मा लड्डू पेड़ा भि धार्मिक प्रसाद सेवा क रूप मा भि उपयोग किए जांद।

Bhishma Kukreti

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रतलाम कि सेव पुरी इतिहास का पन्नो से ,
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सरोज शर्मा (भोजन मूल शोधार्थी)
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वजन मा हल्की, तलीं और कुछ कुरकुरी सेवपुरी खुण रतलाम शहर जणै जांद,
ये मा पडयां मसला और बनि बनि का आटू क इस्तेमाल ये थैं खास बणै दींद, ये क पिछनै कु इतिहास भि भौत दिलचस्प च, बोले जांद कि मुगल शासक मालवा बटिक गुजरणा छा ये दौरान ऊं थैं सेवियां बणाण कु ग्यूं नी मिला,
ऊन भील आदिवासी से पूछ फिर भील समुदाय क लोगों न चाणा क आटु से सेवयां बणै,
रतलाम सेव से पैल भील सेव छाई जु कि चाणो क आटु से बणी सेवयां छै, ऐक बाद सेवपुरी मशहूर ह्वै, कमर्शियल रूप मा 1900 मा येकु उत्पादन शुरू ह्वै और साल 2015 मा ऐ थैं GL टैग दियै ग्या।


Bhishma Kukreti

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वेजिटेबल इडली
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सरोज शर्मा सहारनपुर बटिक
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एक कप सूजी ल्याव, तीन चम्मच दै, चुटकी भर लूण, इच्छा ह्वा त थोड़ा-बहुत लाल मर्च, इनो एक पाउच, इनो छोड़िक सब्या सामग्री मिलाव गाढ़ु घोल बणाव थोड़ा-बहुत पाणि डालिक, 15 मिनट क धैर दयाव, सूजी फूल जाली अब इडली पैन मा हिसाब से पाणि धैरिक गरम कारा, इडली बैटर मा इनो डालिक मिलाव और इडली कि तश्तरीयो मा एक एक चम्मच घोल डालिक स्टैंड मा धैरिक इडली पैन मा 10-15 मिनट पकाव, उतार ल्याव इडली अलग धैर दयाव, एक कढ़ै मा तेल गरम कैरिक राई हींग कढी पत्ता डालिक तड़काव अब ये मा कटीं सब्जियां डालिक सोते कैरिक लूण स्वादानुसार डालिक हैर मर्च टमाटर डालिक पकाव ज्यादा नि पकाण, इडली द्वी टुकड कैरिक डाल दयाव चलांद राव स्वाद बणाण कु थोड़ा-बहुत टमैटो सास डालिक मिलाव ह्वै गे तैयार।


Bhishma Kukreti

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गाजर, मूली, गोभी, हैर मर्च ,अदरक कु अचार।
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सरोज शर्मा, सहारनपुर बटिक
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सबया सब्जी साफ कैरिक काट ल्याव, मर्च मा चीरा लगा दयाव, लूण हल्दी मिलै कि पांच, छै ,घंटा धूप मा धैर दयाव,
सामग्री
पीली सरसों तीन चम्मच
काली सरसों तीन चम्मच
जीरा तीन चम्मच
सरसों क तेल छै बड़ चम्मच
चुटकी भर हींग
लाल मर्च पौडर इच्छानुसार
हल्दी एक चम्मच
लूण स्वादानुसार
सिरका चार बड़ चम्मच

सरसों जीरू भून ल्याव दरदरू पीस ल्याव
अब लूण मिलीं सब्जी कु पाणि निथारिक फेंक दयाव अर सब्जी मा सरया मसला डालिक मिलाव लूण स्वादानुसार डालिक सरसों क तेल
छै बड़ चम्मच गर्म कैरिक फिर ठंडू कैरिक मिलाव
मर्तबान मा धैर दयाव सिरका भि डालिक हिलाव कुछ दिन धूप दिखाव ह्वै गै तैयार, साल छै मैना तक खराब नि हूंद।


Bhishma Kukreti

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कुमाउँनी अनुवाद ( किचेन टिप्स -1)

Sumita Pravin
ख्णेक नाम सुनण जाणे सब्नेके मुख बिटिक पाण ऐ जां। जादा कभेर ख्णे बण्यूँनेक शौक स्याणियांन में हुन्छ हौर उनुकें ख्णे बण्यूँन में मज ले ऊनि। जो सवाद ईजाक हाथेल बणी ख्णे में हुन्छ, उस सवाद कईं ले नि हुन। आजकलेक तवै भरी जिंदगी में हमलोग ख्णे बण्यूँनेक बेसिक टिप्स कें भुल जानु। यां हम कुछ टिप्स दिन्यु जो आपुक ख्णे बण्यूँनेक टैम में तेजी लाल हौर तो हौर ख्णे ले सवाद बणोल।
1- अगर प्याज जल्दी भुनन भाय तो लूँण खितभेर भुन्या, इसिक प्याज जल्दी कौली जाल।
2-बेसणक चिला बण्यूँन बखत वीमे द्वि चमच सूजीक हाल्या।इसिक चिला कुरकुरा बणाल।
3-लड़ग कुड़कुड़ान बण्यूँनेक लिजि पिस्यु कें गरम पाण या दूध दगड़ ओल्या।
4- आचार कें हमेशा कांचक शिशिम धर्या, कब्भे खराब नि हौ।
5- आपुक चुलाण में तेज धार वाल चक्कू राख्या, जैल आपु सरासर हौर आसानिल साग काट सकछा। इसिक आपुक भौत समय ले बचोल।
6- हमेशा ख्णे बण्यूँन है पैलि ज़रूरी सौमान तैयार कर राख्या, येल आपुकें ख्णे बण्यूँन में कोई परेशानी ने हो।
7-अगर लासण जल्दी छिलण भाय तो पांच मिनट पैलि उनुकें पाण में भिजा लिया।
8-दूध कें उमावण बखत वीमे द्वि चमच पाण हाल दिया, जैल ढेकक ताव में दूध नि लागोल।
9-लुआक भदै में ख्णे बण्यूँलेल आयरनेक कमी दूर है जां।
10-अगर आपु शिकार बण्यूँन हुनाल, तो ख्णे बण्यूँनेक कुछ घण्ट पैलि विकें मैरीनेट कर दिया ( मश्यालनक मिश्रण) तो शिकार भौते सवाद बणोल।
11-लूँण तेज है जाई में, साग में ग्यूँक पिश्युंक गोय (गोली) बने भेर डाल्या। य गोय साग बिटिक जादा हई लूँण कें चूस ल्याल हौर साग कें सामान्य कर दिनि।
12-ख्णे बण्यूँनेक तुरन्त बाद चुलाण व सिंक कें साफ कर दिया ताकि आपुक चुलाण में क्वे ले गंदगी नि रवो।
सुमीता प्रवीण
मुंबई


 

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