Author Topic: Delicious Recepies Of Uttarakhand - उत्तराखंड के पकवान  (Read 138768 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Til ki Chutney


Til ki Chutney is made from til (sesame seeds), coriander leaves, garlic cloves, green chillies, yoghurt or lemon juice. This chutney is mainly prepared during

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Lesu

Lesu is a local dish of Kumaon region, which is served for breakfast, lunch or dinner. This Kumoani bread is prepared by stuffing Madua dough into wheat flour dough. It is eaten with a lot of butter or ghee. It can also be served with curd and mixed pickle.

हेम पन्त

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भवाली (नैनीताल)। कुमाऊं अंचल में प्रवास पर आए व नैनीताल से अल्मोड़ा रानीखेत की तरफ जाने वाले शैलानियों के लिए रविवार का दिन कुछ खास रहा। खैरना स्थित हाइवे कैफे में निगम कर्मचारी संघ द्वारा आयोजित कुमाऊंनी पकवानों का पर्यटकों ने नि:शुल्क स्वाद लिया। इस बीच शैलानियों ने जहां पहाड़ी पकवानों की खूब प्रशंसा की वहीं इनके प्रचार-प्रसार की भी जरूरत बताई।

भंडारे में तैयार किए गए स्वादिष्ट कुमाऊंनी पकवान गहत की दाल व भात, भट की चुड़कानी, मडुवे की रोटी, आलू गुटके, भांग खटाई, झिंगुरे की खीर, राजमा व सिंगल आदि का भरपूर स्वाद पर्यटकों ने लिया। पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद ले रहे पर्यटकों का कहना था कि इस प्रकार का आयोजन निगम कर्मचारियों की अच्छी पहल है। जो लोग अभी तक केवल कुमाऊं की हसीन वादियों को ही जानते थे आगे अब उन्हे पहाड़ी व्यंजनों के बारे में भी स्वाद मिलेगा। जरूरत इस बात की है कि पहाड़ी व्यंजनों को पर्यटकों के सामने परोसने के साथ ही उनका प्रचार-प्रसार भी किया जाना चाहिए। कौन से भोजन से क्या फायदे हो सकते है इसकी पूरी जानकारी देनी चाहिए। दिल्ली से रानीखेत को जा रहे पर्यटक रोहित अग्रवाल का कहना था कि बाहर से आने वाले हर पर्यटक को पहाड़ी व्यंजनों के लाभ समेत बनाने की विधियों की बुकलेट दी जानी चाहिए। ताकि बाहरी लोगों को इसकी जानकारी हो सके। सुबह 10 बजे से साम 4 बजे तक चले भंडारे के दौरान सैकड़ों लोगों ने पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद चखा। इस बीच कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए निगम कर्मियों की बांछे खिली रही। कार्यक्रम की सफलता पर निगम के विभिन्न स्थानों से पहुंचे टीआरसी प्रबंधकों का कहना था कि कुमाऊंनी व्यंजनों का प्रचार प्रसार करने के लिए आगे भी इस प्रकार के आयोजन किए जाएंगे। बहरहाल निगम कर्मियों द्वारा की गई इस पहल की हर किसी ने प्रशंसा की।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Macha Jhol

सामग्री

1 किग्रा - फिश (ताजा नदी / झील मछली)
अदरक - 1 इंच
लहसुन - 1 नहीं
हरी मिर्च -8-10 nos
तेल - 2 tsp
हल्दी पाउडर-1 / 2 tsp
टकसाल - हाथ पूर्ण
धनिया पाउडर -1 tsp
मिर्च पाउडर -1 / 2 tsp
इमली - 1 नींबू का आकार
सरसों चूर्ण -1 tsp
नमक स्वाद के लिए.


विधि:


1.Wash अच्छी तरह से मछली & स्लाइस में काट दिया.


2. गर्म पानी में भिगोना इमली & इसे से रस बाहर ले.


3.Grind लहसुन, अदरक, हरी मिर्च और टकसाल कुल मिलाकर एक पेस्ट करने के लिए.


4. एक पोत में हीट तेल, मसाला पेस्ट, हल्दी, मिर्च, और corinder पाउडर और धीरे हलचल जोड़ें.


5. जब तेल का मसाला जोड़ने सरसों के पाउडर और पानी की 2 कप जुदा होते हैं.


6. के रूप में कढ़ी, इसे आगे भी 5 मिनट तक उबालें दो स्वाद के लिए मछली के टुकड़े, tamrind का रस और नमक जोड़ने फोड़े.


7. अब Macha Jhol सेवा करने के लिए तैयार है.
(चावल इस JHOL) के लिए सर्वश्रेष्ठ मैच है

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Naal बड़ी की Sabji

सामग्री
1 कप nal बड़ी
आलू की जोड़ी peeld और टुकड़ों में काटा.
एक प्याज सूक्ष्मता chhoped.
लहसुन और giger चिपकाएँ.
टमाटर की जोड़ी सूक्ष्मता कटा.
धनिया, जीरा पाउडर, गरम मसाला.
लाल मिर्च पाउडर
नमक.
धनिया की पत्तियां.


विधि

1. तलना naal एक बार बड़ी इसे जल में 5 मिनट के लिए उन्हें सोख भूरे रंग मिलता है.


2. तेल के साथ स्टोव पर एक पॉट रखें. जब तक यह भूरे रंग की जीरा बीज, प्याज, लहसुन और अदरक paste.fry कटा जोड़ें.


3. अब तलना ने आलू,, u भी यह greavy एक अच्छा लाल रंग देता है टमाटर का पेस्ट जोड़ सकते हैं सब masalas & chhoped टमाटर जोड़ें.


4. तुम अब पानी और स्वाद के अनुसार नमक naal बड़ी & जोड़ें सिक्त डाल कर सकते हैं. 30 min.or वैकल्पिक रूप से u दबाव कुकर में अपना समय और बचाने के लिए कर सकते हैं महाराज के लिए महाराज को बेहतर परिणाम के लिए.


5. अब यह यू धनिया की पत्तियां और बासमती rice.Yummmmm के साथ सेवा के साथ गार्निश कर सकते हैं कि समय आ गया है.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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लीमा की kachboli


सामग्री


2 या 3 limas () galgal या बड़ा नींबू
चीनी
नमक
हरी मिर्च, lasun और adrak के चिपकाएँ.


विधि


1. पील के बंद और limas में छोटे टुकड़े करने के लिए उसे काटा.


2. नींबू के टुकड़ों के साथ मिश्रण को अच्छी तरह से ऊपर चिपकाएँ.


3. नमक और स्वाद के अनुसार चीनी समायोजित करें.


4. सूर्य के प्रकाश से अब kachboli है ready.Enjoy उस में.

पंकज सिंह महर

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मंडुवे की रोटी, गहथ का फाणु, उड़द का चैंसू, कौणी, झंगोरे की खीर व छन्छ््या, तिल की चटनी, रयांस, तोर की भरी रोटी। वाह! क्या बात है। ये पौष्टिक पहाड़ी व्यंजन गांवों से निकलकर अब महानगरों में डायनिंग टेबल के साथ ही होटलों, शादी-ब्याह के समारोहों, मेलों में खूब सज रहे हैं। रोजमर्रा के खानपान से ऊब चुके लोग टेस्ट चेंज करने के साथ ही स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इन पौष्टिक व्यंजनों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। पहाड़ के परंपरागत व्यंजन लंबे समय तक गांवों में ही सिमटे रहे, मगर इनकी अहमियत अब न केवल गांव बल्कि महानगरों के लोग भी समझने लगे हैं। अच्छा यह है कि हम इन पौष्टिक व्यंजनों को घरों से बाजार तक ले आए हैं और बाजार में इन्हें अच्छा रिस्पांस भी मिल रहा है। दिल्ली, मंुबई के पांच सितारा होटल हों या देहरादून के तमाम बड़े होटल सभी में पहाड़ी व्यंजन खूब सज रहे हैं। शादी-ब्याह समारोह, मेलों में भी पहाड़ी व्यंजनों की खासी डिमांड है। विवाह समारोह के मेन्यू में पहाड़ी व्यंजन शामिल हो गए हैं और वहां बाकायदा इनके अलग से स्टाल लगने लगे हैं। मेलों में भी पहाड़ी व्यंजनों की यही स्थिति है। इनमें मंडुवे की रोटीे, गहथ का फाणु, झंगोरे की खीर, अरसा, स्वाला, तिल की चटनी लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। राजधानी देहरादून में विरासत का आयोजन रहा हो या फिर इन दिनों परेड ग्राउंड में चल रहा खादी मेला व उत्तराखंड सांस्कृतिक महोत्सव, इसका प्रमाण हैं। दरअसल, रोजमर्रा के खान-पान से ऊब चुके लोग टेस्ट चेंज करने के साथ ही स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भी पहाड़ी व्यंजनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। विदित हो कि पहाड़ में उत्पादित मंडुवा, गहथ, झंगोरा, कौणी, उड़द, रयांस, भट, छीमी, सोयाबीन सभी कुछ तो जैविक हैं, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम हैं। परेड ग्राउंड में खादी मेले व सांस्कृतिक महोत्सव में पहाड़ी व्यंजनों का स्टाल लगाने वाले संजय रावत का कहना है कि पहाड़ी पकवान हमारी परंपराओं का हिस्सा रहे हैं। इन्हें बचाए रखना सभी का दायित्व है। लोग धीरे-धीरे इसके महत्व को समझ रहे हैं। यही वजह है कि लोग इन पौष्टिक व्यंजनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
 

हेम पन्त

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Source : http://www.livemint.com/2009/01/09220910/Kumaon-comfort.html?h=B

Chop off the head of the goat and with the animal’s feet tied, hang it over an open coal fire till you can easily skin it.” That is the first step in preparing the Kumaoni classic, kachpak.
I spent last weekend at Bhimtal’s Fishermen’s Lodge, being educated in the intricacies of local cooking. Many of the delightful cottages and lodges across Kumaon are run by retired couples from outside the state, so Kumaoni food is something of a closed book in one half of Uttarakhand. I struck lucky at Fishermen’s Lodge, because they have a local cook-cum-caterer on call. Mahesh Upadhyay was unleashing his cuisine on me as he cooked a far simpler meal—one that didn’t involve rubbing off half-burnt hair off roasting goats.

Local favourites: Madua ki roti, pahadi nimbu and Kumaoni spices. Photo: Marryam H. ReshiKachpak, which by the way is short for kaccha-pukka, is simplicity itself. All you do is mix the skin and offal of the goat with salt, raw mustard oil, chilli powder and coriander leaves. The chewy texture is, reportedly, part of the fun.

The feast that Upadhyay cooked for me was at the opposite end of the exotica scale from roasted goat’s skin. Gauth ki dukkey were al dente pakoras in spinach gravy, dry preparations of cabbage and potatoes were much the same as their counterparts elsewhere in north India, lai was a spinach-like vegetable cooked without gravy and jholi was kadhi by another name. Only the Kumaoni signature ras-bhath had no parallel. It was made of a blend of five types of dals that were simmered overnight till the lentils themselves had disintegrated. It was the water that was used for this dish that had all the trappings of comfort food. The liquid—except that that is not a particularly descriptive term—was spiced minimally and eaten as a breakfast gruel with rice.

Ras-bhath intrigued me because it was one of the few vegetarian offerings across the country that has an overtly meaty taste, though how even a Kumaoni could get dal to taste meaty is beyond me.

Like all homely meals, this one too sparkled with accompaniments. Bhang ki chutney horrified me at first, but it was a raita with a mildly fragrant chopped leaf (that’s what bhang tastes like) that won’t make you feel drowsy. Upadhyay assured me that it is perfectly in order for a young girl to ask the vegetable vendor for bhang leaves.

The second chutney consisted of pounded coriander leaves mixed with chopped garlic, green chillies and raw mustard oil. You decide which element you want to play up and blend the ingredients accordingly. The third chutney was simplicity itself: beaten curd and wedges of lemon from which the membrane had been removed, seasoned with salt. Nimbu, as it is called, has to be made with large Mediterranean lemons, the only kind that grows in Kumaon.
Practically the only exotic aspect of the meal came from using raw mustard oil in a couple of dishes. It’s the one ingredient that you’ll also encounter in kachpak.

हेम पन्त

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Recipe of Ras-Bhat
« Reply #78 on: January 10, 2009, 03:08:47 PM »
Source : http://www.livemint.com/2009/01/09220910/Kumaon-comfort.html?h=B

Ras-bhath
Serves 4
The key to making this is to have a source of very low heat that can be left on all night. This extracts every last vestige of taste from the lentils.
Ingredients:
25g chickpeas or kala chana
25g ghaut (kulthi dal or horse gram, available at grain or health food stores)
25g rajma
25g lobia (black-eyed beans)
25g whole urad (black lentil)
1 tsp chopped garlic
2 green chillies, chopped
1 small onion, chopped
1tsp cumin seeds, coarsely pounded
Method:
Wash the lentils till the water runs clear. Set it to cook with plenty of water in a large vessel—for most urbanites, a pressure cooker would have to do, but in Kumaon a saucepan would be used. Bring to the boil on a high fire and then simmer for several hours, making sure the water level remains generous. If you are making it in a pressure cooker, after the first whistle, turn the gas burner down to the minimum and cook for at least 2 hours.
You should end up with a slightly thick liquid. Strain the liquid from the dal (the mashed-to-death dal is fed to cows in Kumaon). Fry onion, garlic, chillies and cumin seeds, add to the liquid and simmer for 5 minutes for the flavours to unravel. Serve in a bowl with steaming rice. The combination should have a porridge-like consistency.
Write to Marryam at travellingtiffin@livemint.com

सुधीर चतुर्वेदी

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Mandua ki Roti – Chappaties made from Mandua cereal.

 

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