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  • कर्क संक्रान्ति (हरेला): July 16, 2012

Author Topic: Harela Festival Of Uttarakhand - हरेला(हरयाव)  (Read 110254 times)

हेम पन्त

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Re: Harela Festival Of Uttarakhand - हरेला(हरयाव)
« Reply #100 on: December 20, 2010, 07:02:52 AM »
Harela

Photo - Naveen Joshi ji, Lucknow

Devbhoomi,Uttarakhand

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Re: Harela Festival Of Uttarakhand - हरेला(हरयाव)
« Reply #101 on: July 16, 2011, 08:51:15 AM »
हरियाली का संदेश देता हरेला पर्व


Devbhoomi,Uttarakhand

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Re: Harela Festival Of Uttarakhand - हरेला(हरयाव)
« Reply #102 on: July 16, 2011, 09:33:51 PM »
हरियाली व सुख-समृद्घि का प्रतीक है हरेला




  उमराव सिंह नेगी, चौखुटिया: देवभूमि उत्तराखंड की धरती में प्राचीन काल से ही विभिन्न प्रकार के तीज-त्यौहार व पर्व मनाये जाने की परंपरा चली आ रही है। जो आज भी यहां के सामाजिक परिवेश, आपसी रिश्तों व सामाजिक ताने-बाने को बांधे हुए हैं। ये त्यौहार व पर्व निर्धारित तिथियों, कृषि फसलों व ऋतुओं के अनुसार मनाये जाते हैं।
इन्ही में एक है हरेला का त्यौहार। जिसे आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में पूरे उत्साह व श्रद्घा-भाव के साथ मनाया जाता है। प्रतिवर्ष सावन माह के निर्धारित तिथि यानी एक गते को इस त्यौहार को मनाने की परंपरा है। जो आज 17 जुलाई को मनाया जा रहा है। मान्यता है कि यह त्यौहार हरियाली व वर्षा ऋतु के आगमन का प्रतीक है। इसीलिये इसे हरेला पर्व के नाम से जाना जाता है।
हरेला विभिन्न प्रकार के बीजों से तैयार किये लाने वाले पौधे हैं। हरेला पर्व के दिन हर घर व परिवार में एक टोकरी में ऊगाये गये अनाज के पौधों को पंडित द्वारा पत्तेसा जाता है तथा मंदिर में चढ़ाने के बाद पौध को श्रद्घापूर्वक सिरों में रखा जाता है। साथ ही हरेला को मकान के चौखट व दरवाजों पर भी रोपित किये जाने की खास परंपरा है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: Harela Festival Of Uttarakhand - हरेला(हरयाव)
« Reply #103 on: July 15, 2012, 02:56:47 PM »
पर्यावरण को बढावा देने वाला त्यौहार 'हरेला' जो उत्तराखंड में विशेष रूप से मनाया जाता है! इस त्यौहार के दिन लोग विशेष रूप से वृक्षारोपण करते है! आज जरुरत कई पर्यावरण को वचाने के लिए इस प्रकार के त्यौहार को सारे देश में ही नहीं बल्कि दुनिया में व्यापक तौर से मनाया जाय! मेरापहाड़ टीम की और से आप सब को हरेला की शुभकामनाये! वृक्ष जरुर लगाये !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: Harela Festival Of Uttarakhand - हरेला(हरयाव)
« Reply #104 on: July 15, 2012, 11:45:47 PM »
लाग बग्वाई, लाग बसंत पंचमी
 लाग हर्यावा, लाग बिरुर पंचमी

 जी रए, जाग रए


 हिमाल में हयू छन तक, गंग ज्यू में पानी छन तक

 सिल ल्वाड़ भात खान तक, जात टेक बेर हगन जाण तक

 स्याव जै बुद्धि ऐ जो , सि जै तरान

 आकाश बराबर उच् है जै, धरती बराबर चकोव

 जी रए, जाग रए, बची रए

विनोद सिंह गढ़िया

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Re: Harela Festival Of Uttarakhand - हरेला(हरयाव)
« Reply #105 on: July 16, 2012, 01:48:44 AM »
आप अभी को हरियाली एवं वर्षा ऋतु के आगमन का प्रतीक पर्व  'हरेला' की हार्दिक शुभकामनाएं।

विनोद सिंह गढ़िया

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हरेला : हरियाली एवं वर्षा ऋतु के आगमन का पर्व

कुमाऊं की धरती में प्राचीन काल से ही विविध तीज-त्यौहार व पर्व मनाये जाने की परंपरा चली आ रही है। जो आज भी यहां के सामाजिक परिवेश, रीति-रिवाज, संस्कृति, आपसी रिश्ते व सामाजिक तानेबाने को जीवंत बनाये हुए हैं। ये त्यौहार व पर्व कृषि फसल व ऋतुओं के अनुसार मनाये जाते हैं।

इन्हीं में एक है हरेला का त्यौहार। जिसे आज भी गांवों में पूरे उत्साह, उमंग व श्रद्घा-भाव के साथ मनाया जाता है। प्रतिवर्ष सावन माह के निर्धारित तिथि यानी एक गते को इस त्यौहार को बनाने की परंपरा है। जो इस वर्ष आज 16 जुलाई को मनाया जा रहा है। मान्यता है कि यह त्यौहार हरियाली एवं वर्षा ऋतु के आगमन का प्रतीक है। इसीलिये इसे हरेला पर्व के नाम से जाना जाता है। हरेला विभिन्न प्रकार के बीजों से ऊगाये गये पौधे हैं। जिन्हें घरों में टोकरी में ऊगाया जाता है। हरेला त्यौहार के दिन इन पौधों को कुल पंडित द्वारा वैदिक मंत्रों के साथ पत्तेसा जाता है तथा मंदिर में चढ़ाने के बाद पौधों को सिर में रखा जाता है। साथ ही हरेला-पौध को मकान के चौखट व दरवाजों पर भी रोपित किये जाने की खास परंपरा है।

हरेला को बोने का भी एक खास तरीका है। इसे त्यौहार से 10 दिन पहले बंद कमरे में एक टोकरी में बोया जाता है। इसमें सात प्रकार के अनाज यथा गेहूं, जौ, चना, मक्का, धान, उरद व तिल के बीज प्रयोग में लाये जाते हैं। कुछ दिन बाद पौधे उग आते हैं तथा इन्हें समय-समय पर पानी भी दिया जाता है। फिर त्यौहार के दिन सुबह कुल पुरोहित द्वारा घर में पूजा-प्रतिष्ठा के बाद पौधों को काट लिया जाता है। इस त्यौहार को सुख-समृद्घि का प्रतीक माना जाता है। हरेला को सिर पर रखने की परंपरा है। साथ ही यह पर्व बहन-बेटी के पावन रिश्ते का अटूट बंधन भी है। इस दिन बहन-बेटी मायके से ससुराल आकर हरेला संक्रांति को मनाते हैं। या मायके के लोग ससुराल में रह रही बेटी को हरेला भेंट करते हैं तथा कुछ इस तरह आशीर्वाद देते हैं: जी रयै, जागी रयै, यो दिन यो मास, नित-नित भेंटन रये। डाक से भी अपने अपने नाते-रिश्तेदारों को हरेला भेजने की पूर्व से ही प्रथा रही है, हालांकि आज बदलते जीवन शैली के साथ ही बहुत कुछ बदल रहा है, लेकिन हरेला जैसी कई ऐसी परंपराएं हैं, जो आज भी अपने स्वरूप को जीवंत बनाये है।


पंकज सिंह महर

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Re: Harela Festival Of Uttarakhand - हरेला(हरयाव)
« Reply #107 on: July 16, 2012, 02:08:47 AM »
सभी सदस्यों को हरेले की शुभकामनायें।

Raje Singh Karakoti

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Harela Festival Of Uttarakhand - हरेला(हरयाव)
« Reply #108 on: July 16, 2012, 02:09:03 AM »
आप अभी को हरियाली एवं वर्षा ऋतु के आगमन का प्रतीक पर्व  'हरेला' की हार्दिक शुभकामनाएं।

राजे सिंह

Meena Rawat

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Re: Harela Festival Of Uttarakhand - हरेला(हरयाव)
« Reply #109 on: July 16, 2012, 04:43:43 AM »
Happy Harela to all :)

 

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