Author Topic: Hill Jatra - हिल जात्रा  (Read 34222 times)

पंकज सिंह महर

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Hill Jatra - हिल जात्रा
« on: August 25, 2008, 10:26:35 AM »

Hill Jatra is a distort?
Hal (Plough) Jatra?. Hill Jatra simply means the adoration (worshipping) of Hal (Plough) which good crop yield. In this context the Hill Jatra which is celebrated in Pithoragarh has prominent place.
In 15th Century during the regime of Chand King a four member delegation comprising of Mahar brothers from Pithoragarh reached Nepal to participate in ?Indra Jal? festival. Mahar brothers won the festival by their intelligence and bravery. After that they reached Pithoragarh with all the material used in the festival as inward. Kumour brothers founded ?Bin Jakhani?, ?Chassar?, ?Kumour? villages and started celebrating the ?Indra Jal? festival of Nepal every year in the month of Bhadrapad on "goura mahesh" departure day Hill Jatra .

Even today religious Anushathan is celebrated with all equipment worshipping material and masks obtained from "Indra Jala Fastival" in Nepal tradition with "Srave Bhavantu Sukhina Srave Santu Niramaya" theme with traditional and fervor in Pithoragrah.
The main character of Hill Jatra is "Lakhia Bhoot" which is originated from the Jata of angry Lord Shiva after the "Bhashama" of "Gauri" in the YashKund of her father Prajapati. So Lakhia Bhoot is also called "Lateshwer". Lakhia is worshiped as "Bhumiya" god is Kumour village. so to keep him elated villagers has a provision of sacrifice at the end of festival

साभार- सुश्री स्वाति लोहुमी पाठक, म्योर पहाड़।

पंकज सिंह महर

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हिल जात्रा- HILL JATRA
« Reply #1 on: August 25, 2008, 10:28:30 AM »
हिल जात्रा, ऎसा त्यौहार है, जो सिर्फ पिथौरागढ़ में ही मनाया जाता है। यह शिव जी की बारात का एक रुप माना जा सकता है। इसमें लोग बैलों का मुखौटा लगाकर नृत्य करते हैं और यह लोग जोडि़यों में होते है और इनको हांकने के लिये एक हलिया भी होता है। कई जोडि़यां बनाई जाती हैं और सब मैदान में घुंम-घूम कर नृत्य करते हैं। कुछ बैल अकेले भी होते हैं, मुख्य रुप से दो बैल अकेले होते हैं एक मरकव्वा बल्द, जो सबको मारता फिरता है और सबसे तेज दौड़ता है, दूसरा होता है गाल्या बल्द, जो कि कामचोर होता है और बार-बार सो जाता है और उसका हलिया परेशान होता है। यह दोनों बल्द संस्कृति का प्रदर्शन करते हुये ग्रामीण हास्य को भी परिलक्षित करते हैं।
हिल जात्रा में मुख्य आकर्षण होता है हिरन और लखिया भूत तथा महाकाली। हिरन के लिये एक आदमी को हिरन का मुखौटा पहना दिया जाता है और उसके पीछे तीन लोगों को बैठी मुद्रा में ढंक दिया जाता है, दूर से देखने में लगता है जैसे कोई हिरन चर रहा है। अंत मे हिरन के आंग देवता भी आता है और यह कथानक समाप्त होता है। इसे पहाड़ी ड्रेगन भी कहा जा सकता है, जिस तरह से चीन में मुखौटो के द्वारा ड्रेगन प्रदर्शित किया जाता है, उसी प्रकार से हमारे उत्तराखण्ड में हिरन को दिखाया जाता है।
लखिया भूत शिव जी का एक गण है, जिसका प्रदर्शन भी इस जात्रा में किया जाता है।

पंकज सिंह महर

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हिल जात्रा- HILL JATRA
« Reply #2 on: August 25, 2008, 10:31:53 AM »


हिल जात्रा के दौरान लखिया भूत का प्रदर्शन

पंकज सिंह महर

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हिल जात्रा- HILL JATRA
« Reply #3 on: August 25, 2008, 10:34:39 AM »
Hilljatra : A folk festival in Pithoragarh

A festival of pastoralists and agriculturist  hilljatra  came to Pithoragarh valley from West Nepal and at once found fevour  in Kumaour and Bajethi  and in its modified form as Hiranchital at Kanalichina Dewalthal and Askot.  It is associated  with ropai (paddy transplantation) and   allied agricultural
activities of  rainy season. In was introduced in Soar by the Chand king 'Kuru'  and  is,   in  fact,  an elaborate  masquerade under  the   open  sky where in various pastoral and agricultural  activities are  represented.  The  folk legends based on  the  victory  of   traditional  deities   over   the  demon  are  enacted   in    a    fantastic masquerade   replete  with  the  chiming  of    bells  and   hymns   in    the  local   dialects  supported   by loud instrumental music and the booming dhool nagara (drums). 

 
हिल-जात्रा का प्रदर्शन दिल्ली कामनवेल्थ खेलों के दौरान भी किया जायेगा... "सहारा" की खबर
 

हलिया

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हिल जात्रा- HILL JATRA
« Reply #4 on: August 25, 2008, 10:37:36 AM »
मेहर ज्यूँ बहुत बढ़िया बात लिखी ठैरी आपने.  ये जो बल्द के मुखौटे होते हैं इन सब के और हिल्जत्रा में जितने भी पात्र होते हैं ना (ठुल बौड़, नॉन बौड़, कुमौडिया हौल, बुढिया आदि), उन सब की फोटू में कुछ दिनौं में आपको भेज दूंगा. ये सब सच्ची मुच्ची के मेरे घर में रखे हैं.

   गमारा आ गयी है और आज महेश्वर भी आ जायेंगे, आठूं के खेल शुरू हो चुके हैं.  आठ दिन बाद गमारा सिलाने वाले दिन हिल्जत्रा होगी.  लेकिन बात ये ठैरी की में ये सब देख नही सकूँगा क्यौकी आजकल गाँव से बाहर (परदेश) जो ठहरा |  परदेश में अच्छा नही लग रहा, ये टैम तो गाँव में रहने का हुआ हो महाराज लेकिन क्या करें ऐसा नशीब नही ठैरा|

पंकज सिंह महर

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हिल जात्रा- HILL JATRA
« Reply #5 on: August 25, 2008, 10:39:36 AM »


पंकज सिंह महर

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हिल जात्रा- HILL JATRA
« Reply #6 on: August 25, 2008, 10:41:44 AM »
मेहर ज्यूँ बहुत बढ़िया बात लिखी ठैरी आपने.  ये जो बल्द के मुखौटे होते हैं इन सब के और हिल्जत्रा में जितने भी पात्र होते हैं ना (ठुल बौड़, नॉन बौड़, कुमौडिया हौल, बुढिया आदि), उन सब की फोटू में कुछ दिनौं में आपको भेज दूंगा. ये सब सच्ची मुच्ची के मेरे घर में रखे हैं.

धन्यवाद ठैरा फिर आपको...........वैसे हिल जात्रा में आप बनते क्या थे?  ;D   ;D  ;D

हलिया

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हिल जात्रा- HILL JATRA
« Reply #7 on: August 25, 2008, 10:47:30 AM »
मैं बनने वाला नही ठैरा हो महाराज, बनाने वाला ठैरा.  अपने टैम में हेड ठैरा हो हिल्जत्रा का. ;D ;D

मेहर ज्यूँ बहुत बढ़िया बात लिखी ठैरी आपने.  ये जो बल्द के मुखौटे होते हैं इन सब के और हिल्जत्रा में जितने भी पात्र होते हैं ना (ठुल बौड़, नॉन बौड़, कुमौडिया हौल, बुढिया आदि), उन सब की फोटू में कुछ दिनौं में आपको भेज दूंगा. ये सब सच्ची मुच्ची के मेरे घर में रखे हैं.

धन्यवाद ठैरा फिर आपको...........वैसे हिल जात्रा में आप बनते क्या थे?  ;D   ;D  ;D

पंकज सिंह महर

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हिल जात्रा- HILL JATRA
« Reply #8 on: September 03, 2008, 11:57:08 AM »
http://www.youtube.com/watch?v=u35WqSVuCtM


हिल जात्रा Etv समाचारों में

हेम पन्त

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हिल जात्रा- HILL JATRA
« Reply #9 on: September 03, 2008, 12:47:20 PM »
जानकारी के अभाव के कारण मैं इस बार हिल-जात्रा "मिस" कर गया. हिल्जात्रा खतम होने के बाद पिथोरागढ पहुंचा. समाचार पत्रों में छपी हुई कुछ फोटो आप लोगों के लिये


 

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