Author Topic: House Wood carving Art /Ornamentation Uttarakhand ; उत्तराखंड में भवन काष्ठ कल  (Read 10357 times)

Bhishma Kukreti

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   बागोरी उत्तरकाशी )  के  भवन  संख्या ४ में काष्ठ कला

  Traditional House wood Carving Art in , Bagori , Harsil   Uttarkashi   
गढ़वाल,  कुमाऊँ ,    के   भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार मकान , बाखली  , खोली  , कोटि बनाल )  में पारम्पपरिक    गढवाली शैली  की   काठ कुर्याणौ ब्यूंत'  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन,- 478

 संकलन - भीष्म कुकरेती    
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 नेलंग डॉट कॉम से    नेलंग जडंग , बागोरी के भवनों  की सूचना नहीं मिलती अपितु  कई सांस्कृति आयामों की भी सूचना मिलती जाती है।   इसी  क्रम में बागोरी    भवन संख्या ४ में काष्ठ कला पर चर्चा होगी।  प्रस्तुत भवन (बगोरी संख्या ४ )  तिपुर है व तिखंड  है।  भवन के तल मंजिल में गौशाला व भंडार गृह होंगे।  बागोरी के  पहले तल में बरामदा /बालकोनी है।  इस बरामदे /बालकोनी को ढकने हेतु स्तम्भ व उप स्तंभ  (जंगला ) है।  दोनों तलों में खड़े  स्तम्भ व पड़ी  कड़ियाँ  सब ज्यामितीय कटान की उपज हैं।  दोनों तलों में आधार पर  रेलिंग हैं व दो रेलिंग के मध्य दोनों तलों में XX XX नुमा उप स्तम्भ हैं।   छत के आधार की काष्ठ कड़ी /पसूण  भी ज्यामितीय कटान की ही उपज हैं। 
निष्कर्ष निकलता है कि  बागोरी भवन संख्या ४ में ज्यामितीय कला अलंकरण कटान ही हुआ है। 

सूचना व फोटो आभार : नेलंग डॉट कॉम (मित्र फेसबुक )

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत हेतु . भौगोलिक ,  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020     
 Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakkhali,  Mori) of   Bhatwari, Uttarkashi Garhwal,  Uttarakhand ;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakhali,  Mori) of  Rajgarhi, Uttarkashi,  Garhwal,  Uttarakhand;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakkhali,  Mori) of  Dunda, Uttarkashi,  Garhwal,  Uttarakhand ;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakhali,  Mori) of  Chiniysaur, Uttarkashi ,  Garhwal ,  Uttarakhand ;  पारम्परिक   उत्तरकाशी मकान काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन  , भटवाडी मकान   ,  पारम्परिक , रायगढी    उत्तरकाशी मकान  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन, चिनियासौड़  पारम्परिक  उत्तरकाशी मकान  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन  श्रृंखला जारी   

Bhishma Kukreti

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आंगन (चकराता , देहरादून )  के एक भवन काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन


गढ़वाल,  कुमाऊँ , के  भवन  ( कोटि बनाल   , तिबारी , बाखली , निमदारी)  में   पारम्परिक गढ़वाली शैली के 'काठ लछ्याणौ ,  कुर्याणौ पाड़ी  ब्यूंत'  की काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन 479 -
Traditional House wood Carving art of , Jaunsar , Dehradun
 संकलन - भीष्म कुकरेती
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जौनसार भाबर प्राचीन भवन व भवनों में ज्यामितीय काष्ठ कला व अभिनव शैली हेतु प्रसिद्ध रहा है।  आंगन  ( चकराता )  का प्रस्तुत भवन ढाई पुर है व कोटि बनाल शैली (लकड़ी व पत्थर मिलाकर भवन ) पर निर्मित  हुआ  है।  आंगन के प्रस्तुत भवन  वास्तव में ज्यामितीय कला से निर्मित शैली के सदा याद किया जायेगा।  इस तरह के खड़े स्तम्भ ६ से अधिक दिख रहे हैं।
प्रस्तुत भवन में भूतल (ground  floour ) में कुम्भी युक्त (उल्टा कलम दल, ड्यूल , सीधा कमल दल से निर्मित कुम्भियाँ युक्त ) स्तम्भ दृष्टिगोचर हो रहे हैं।  प्रस्तुत भवन में इन अलंकृत खड़े स्तम्भों को छोड़ शेष लकड़ी के अंग  (स्तम्भ व पटिले /तख्ते ) सभी ज्यामितीय कटान के श्रेष्ठ व उत्कृष्ट उदाहरण हैं।   ज्यामितीय कला में भवन का  सानी नहीं।
 निष्कर्ष निकलता है कि  आंगन (चकराता )  का प्रस्तुत भवन में ज्यामितीय कटान कला का उत्कृष्ट उदाहरण मिलता है व प्राकृतिक कला, अलंकरण  (कमल फूल दल )  भी उत्कृष्ट है।

सूचना व फोटो आभार :  सुरेंद्र सिंह (चकराता : हार्ट ऑफ़ जौनसार भाबर  FB ग्रुप  से )
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत हेतु . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020


Bhishma Kukreti

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लालपुर कोटद्वार , पौड़ी गढ़वाल में  चंद्रमोहन खंतवाल की तिबारी में  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन


    Tibari House Wood Art in House of  Lalpur,  Kotdwara   , Pauri Garhwal       
गढ़वाल, के भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,बाखली,खोली ,मोरी,कोटि बनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन -480
 
 संकलन - भीष्म कुकरेती   
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 अभी  कुछ समय पहले  चंद्रमोहन खंतवाल ने  लालपुर कोटद्वार में गढ़वाल के शिल्पकारों की सहायता से तिबारी स्थापित की।  तिबारी वास्तव में जंगले शैली में निर्मित हुयी है।  भवन दुपुर  है  और ९ या दस स्तम्भों की   तिबारी  पहली मंजिल में स्थापित हुयी है।  स्तम्भ आम तिबारी जैसे नहीं स्थापित हुए हैं अपितु जंगले  शैली के स्तम्भ जैसे स्थापित हैं।  आम जंगल के स्तम्भ सपाट होते हैं किन्तु खंतवाल ने  सपाट  स्तम्भों के स्थान पर  कलयुक्त स्तम्भ स्थापित किये हैं।  स्तम्भ के आधार में उलटे कमल से घुंडी /कुम्भी बनी है जिसके ऊपर ड्यूल है व ड्यूल के ऊपर सीधे कमल दल की कुम्भी बनी है।  यहां से स्तम्भ लौकी आकर ले ऊपर चलता है।  जहां सबसे कम मोटाई है वहां उलटे कमल दल की कुम्भी है फिर ड्यूल है जिसके ऊपर सीधा कमल दल है।  यहां से स्तम्भ ऊपर छढ़ते थांत आकर लेयर शीर्षसे मिल जाता है।  यहीं तोरणम/मेहराब  का आंध्रा चाप  भी निकलता है।  तोरणम के स्कन्धों में सूरजमुखी या बहुदलीय पुष्प चित्रित हुआ है।  ूलों की फर्न नुमा पत्तियों ने घेरा हुआ है।
  लालपुर कोटद्वार में चंद्रमोहन  खंतवाल की तिबारी भव्य व कलयुक्त है जिसमे ज्यामितीय व प्राकृतिक अलंकरण अंकन हुआ है।  कला  अंकन उत्कृष्ट  है। 

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021
गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,बाखली ,  बाखई, कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन नक्काशी श्रृंखला  जारी रहेगी   -  T


 

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