Author Topic: House Wood carving Art /Ornamentation Uttarakhand ; उत्तराखंड में भवन काष्ठ कल  (Read 10005 times)

Bhishma Kukreti

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   बागोरी उत्तरकाशी )  के  भवन  संख्या ४ में काष्ठ कला

  Traditional House wood Carving Art in , Bagori , Harsil   Uttarkashi   
गढ़वाल,  कुमाऊँ ,    के   भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार मकान , बाखली  , खोली  , कोटि बनाल )  में पारम्पपरिक    गढवाली शैली  की   काठ कुर्याणौ ब्यूंत'  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन,- 478

 संकलन - भीष्म कुकरेती    
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 नेलंग डॉट कॉम से    नेलंग जडंग , बागोरी के भवनों  की सूचना नहीं मिलती अपितु  कई सांस्कृति आयामों की भी सूचना मिलती जाती है।   इसी  क्रम में बागोरी    भवन संख्या ४ में काष्ठ कला पर चर्चा होगी।  प्रस्तुत भवन (बगोरी संख्या ४ )  तिपुर है व तिखंड  है।  भवन के तल मंजिल में गौशाला व भंडार गृह होंगे।  बागोरी के  पहले तल में बरामदा /बालकोनी है।  इस बरामदे /बालकोनी को ढकने हेतु स्तम्भ व उप स्तंभ  (जंगला ) है।  दोनों तलों में खड़े  स्तम्भ व पड़ी  कड़ियाँ  सब ज्यामितीय कटान की उपज हैं।  दोनों तलों में आधार पर  रेलिंग हैं व दो रेलिंग के मध्य दोनों तलों में XX XX नुमा उप स्तम्भ हैं।   छत के आधार की काष्ठ कड़ी /पसूण  भी ज्यामितीय कटान की ही उपज हैं। 
निष्कर्ष निकलता है कि  बागोरी भवन संख्या ४ में ज्यामितीय कला अलंकरण कटान ही हुआ है। 

सूचना व फोटो आभार : नेलंग डॉट कॉम (मित्र फेसबुक )

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत हेतु . भौगोलिक ,  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020     
 Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakkhali,  Mori) of   Bhatwari, Uttarkashi Garhwal,  Uttarakhand ;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakhali,  Mori) of  Rajgarhi, Uttarkashi,  Garhwal,  Uttarakhand;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakkhali,  Mori) of  Dunda, Uttarkashi,  Garhwal,  Uttarakhand ;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakhali,  Mori) of  Chiniysaur, Uttarkashi ,  Garhwal ,  Uttarakhand ;  पारम्परिक   उत्तरकाशी मकान काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन  , भटवाडी मकान   ,  पारम्परिक , रायगढी    उत्तरकाशी मकान  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन, चिनियासौड़  पारम्परिक  उत्तरकाशी मकान  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन  श्रृंखला जारी   

Bhishma Kukreti

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आंगन (चकराता , देहरादून )  के एक भवन काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन


गढ़वाल,  कुमाऊँ , के  भवन  ( कोटि बनाल   , तिबारी , बाखली , निमदारी)  में   पारम्परिक गढ़वाली शैली के 'काठ लछ्याणौ ,  कुर्याणौ पाड़ी  ब्यूंत'  की काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन 479 -
Traditional House wood Carving art of , Jaunsar , Dehradun
 संकलन - भीष्म कुकरेती
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जौनसार भाबर प्राचीन भवन व भवनों में ज्यामितीय काष्ठ कला व अभिनव शैली हेतु प्रसिद्ध रहा है।  आंगन  ( चकराता )  का प्रस्तुत भवन ढाई पुर है व कोटि बनाल शैली (लकड़ी व पत्थर मिलाकर भवन ) पर निर्मित  हुआ  है।  आंगन के प्रस्तुत भवन  वास्तव में ज्यामितीय कला से निर्मित शैली के सदा याद किया जायेगा।  इस तरह के खड़े स्तम्भ ६ से अधिक दिख रहे हैं।
प्रस्तुत भवन में भूतल (ground  floour ) में कुम्भी युक्त (उल्टा कलम दल, ड्यूल , सीधा कमल दल से निर्मित कुम्भियाँ युक्त ) स्तम्भ दृष्टिगोचर हो रहे हैं।  प्रस्तुत भवन में इन अलंकृत खड़े स्तम्भों को छोड़ शेष लकड़ी के अंग  (स्तम्भ व पटिले /तख्ते ) सभी ज्यामितीय कटान के श्रेष्ठ व उत्कृष्ट उदाहरण हैं।   ज्यामितीय कला में भवन का  सानी नहीं।
 निष्कर्ष निकलता है कि  आंगन (चकराता )  का प्रस्तुत भवन में ज्यामितीय कटान कला का उत्कृष्ट उदाहरण मिलता है व प्राकृतिक कला, अलंकरण  (कमल फूल दल )  भी उत्कृष्ट है।

सूचना व फोटो आभार :  सुरेंद्र सिंह (चकराता : हार्ट ऑफ़ जौनसार भाबर  FB ग्रुप  से )
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत हेतु . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
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