Author Topic: House Wood carving Art /Ornamentation Uttarakhand ; उत्तराखंड में भवन काष्ठ कल  (Read 14687 times)

Bhishma Kukreti

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  बिगुल (बागेश्वर ) में एक  बाखली (सामूहिक भवन)   की काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन अंकन


Tradiitonal House wood Carving Art in Bigul   Bageshwar, Kumaun
कुमाऊँ, गढ़वाल, के भवन(बाखली, तिबारी,निमदारी,जंगलेदार,मकान, खोली,कोटि बनाल)  में कुमाऊं शैली; की काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन अंकन- 
संकलन - भीष्म कुकरेती
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प्रस्तुत बाखली बड़ी है व इसमें कई परिवारों के घर हैं।  काष्ठ कला दृष्टिकोण से खोली व ६ छाजों  का विश्लेषण आवश्यक है। बाखली दुपुर  है।    खोली तल मंजिल से पहली मंजिल तक है।  छाज पहले मंजिल पर हैं।
खोली वा छाजों  के स्तम्भ कला दृष्टि से एक सामान हैं।  खोली के शीर्ष में तोरणम है जिसमें लकड़ी का काम चित्र में नहीं दिख रहा है। किन्तु शीर्ष में देव मूर्ति दिख रही है।
स्तम्भों  में  अधोगामी  कमल दल , ड्यूल , सीधे  कमल दल का अंकन हुआ है। छाजों के तोरणमों में महीन नक्कासी हुयी है जो ठीक से नहीं दिख रही है।  छाजों के नीचे के ढक्क्न व ऊपर के ढक्क्न सपाट तख्तों के हैं।  खिड़कियों व अन्य दरवाजों  में ज्यामितीय कटान की सपाट कला है। 
निष्कर्ष निकलता है कि बिगुल (बागेश्वर ) के भवन में ज्यामितीय , प्राकृतिक अलंकरण उत्कीर्णन हुआ है व देव मूर्ति भी है। 

सूचना व फोटो आभार: सुरेंद्र मेहरा (FB )
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है नकि मिल्कियत  संबंधी Iभौगोलिक  व मालिकाना   सूचना  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021
 कांडा तहसील , बागेश्वर में परंपरागत मकानों में   काष्ठकला अंकन  ;  गरुड़, बागेश्वर में परंपरागत मकानों में काष्ठकला अंकन  ; कपकोट ,  बागेश्वर में परंपरागत मकानों में काष्ठकला अंकन )


Bhishma Kukreti

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दुग्तू में दुग्तालों के भवन में  काष्ठ कला अलंकरण, काष्ठ उत्कीर्णन अंकन

   Traditional House Wood Carving Art  of  Dugtu  , Pithoragarh
कुमाऊँ,के भवनों ( बाखली,तिबारी , निमदारी,छाजो, खोली स्तम्भ) में कुमाऊं शैली की   काष्ठ कला अलंकरण, काष्ठ उत्कीर्णन अंकन -५०६

 संकलन - भीष्म कुकरेती 
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दुग्तू पिथौरागढ़ में दारमा घाटी का सीमावर्ती गाँव है।  दुग्तू में भवन काष्ठ कला प्रसिद्ध है।  प्रस्तुत दुग्तू के एक भवन का एक भाग की सूचना मिली है।  यह भाग छाज का हिस्सा लगता है।  प्रस्तुत संरचना पहली मंजिल पर है।  यह भाग तल मजिल के ऊपर शहतीर /बौळी के ऊपर है।  शहतीर पर पत्ती आकर का उत्कीर्णन हुआ है जो तरंग नुमा दीखता है। 
शहतीर ऊपर छः जे दो स्तम्भ दृष्टिगोचर हो रहे हैं।  स्तम्भ के आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल , फिर ड्यूल  व उसके ऊपर अधोगामी पद्म पुष्प डीके उत्कीर्णन हुआ है।  यही दोहराव स्तम्भ के ऊपरी हिस्से में भी है।  स्तम्भों के ऊपरी भाग में  अधोगामी पदम पुष्प  दल के ऊपर लकड़ी पर सुंदर महीन ज्यामितीय अलंकरण हुआ है। 
छाज के ढक्कन पर  चार (दो  दो मिले हुए ) आँख नुमा  आकृति का उत्कीर्णन हुआ है व इसके ऊपर बंद पुष्प दल की आकृति अंकित हुयी है। 
भवन के इस भाग में प्राकृतिक व ज्यामितीय अलंकरण कला दृष्टिगोचर होती है व अंकन उत्कृष्ट है। 
सूचना व फोटो आभार: विनीता यश्वनी 
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . भौगोलिक मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
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 कैलाश यात्रा मार्ग   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  अंकन -उत्कीर्णन , बाखली कला   ;  धारचूला  पिथोरागढ़  के बाखली वाले  मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  अंकन उत्कीर्णन   ;  डीडीहाट   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त   अंकन -उत्कीर्णन ;   गोंगोलीहाट  पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  उत्कीर्णन   ;  बेरीनाग  पिथोरागढ़  के बाखली वाले मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त   अंकन  ;  House wood Carving  of Bakhali art in Pithoragarh  to be continued

Bhishma Kukreti

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बरसुड़ी (लंगूर , पौड़ी ) के दो  भवनों  के जंगले  में  काष्ठ कला , अलंकरण

 Traditional  House Wood Art in Barsuri  Langur , Pauri Garhwal   

लंगूर ,  गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली  , खोली  , मोरी ,  कोटि बनाल   ) काष्ठ कला अलंकरण अंकन, नक्कासी  -  ५०७

 
 संकलन - भीष्म कुकरेती
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बरसुड़ी से कई  काष्ठ कला युक्त भवनों की सूचना मिली थीं।  प्रस्तुत दो भवन जंगलेदार भवन हैं।  दोनों भवनों में जंगले प्रथम मजिल में स्थापित हैं।  दोनों भवनों के जंगलों के स्तम्भ सपाट ज्यामितीय कटान से निर्मित हैं व आधार में दो तख्ते लगाकर स्तम्भ आधार में मोटे  दीखते हैं।  बरामदे के आधार व शीर्ष में भी कड़ियाँ व तख्ते  सपाट  ही हैं।

निष्कर्ष निकलता है कि बरसुड़ी के इन दो भवनों के जंगलों (बरामदे या बालकोनी ) में ज्यामितीय कटान की कला है। 

सूचना व फोटो आभार : नरेंद्र चौहान

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत हेतु . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,बाखली ,  बाखई, कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन नक्कासी   - 

Bhishma Kukreti

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मलारी के भवन संख्या १३ में  काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन  अंकन

Traditional House Wood Carving Art from  Malari    , Chamoli   
 गढ़वाल,कुमाऊंकी भवन (तिबारी, निमदारी,जंगलादार मकान, बाखली,खोली) में पारम्परिक गढ़वाली शैली की  काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन  अंकन, - ५०८   
(अलंकरण व कला पर केंद्रित) 
 
 संकलन - भीष्म कुकरेती     
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मलारी का प्रस्तुत भवन संख्या १३ लगता है चौपुर भाग है। या मकान के ऊपर यह एक मंजिला संरचना  है।  भवन  भाग लकड़ी का निर्मित है व छत छोड़ कहीं भी   मिट्टी गारे से निर्मित नहीं है। 
सभी दीवारें लकड़ी की हैं।  मध्य के रेलिंग के मध्य लघु स्तम्भों को छोड़ सर्वत्र ज्यामितीय कटान की कड़ियाँ या तख्ते हैं।  लघु स्तम्भ चारपाई के पायों की कला वाले लघु स्तम्भ है।  या हुक्के के नाई (ऊपरी नली ) वाली कलाकृति समान कलायुक्त हैं। 
निष्कर्ष निकलता है कि मलारी के भवन संख्या १३ में ज्यामितीय कटान की कष्ट कला दृष्टिगोचर हो रही है। 
सूचना व फोटो आभार: हेमंत डिमरी संग्रह   
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत:  वस्तु स्थिति में  अंतर   हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021
गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली , मोरी , खोली,  कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन ,   श्रंखला जारी   
    कर्णप्रयाग में  भवन काष्ठ कला,   ;  गपेश्वर में  भवन काष्ठ कला,  ;  नीति,   घाटी में भवन काष्ठ  कला,    ; जोशीमठ में भवन काष्ठ कला,   , पोखरी -गैरसैण  में भवन काष्ठ कला,   श्रृंखला जारी  रहेगी


Bhishma Kukreti

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जसोली (रुद्रप्रयाग ) के एक भवन के तिबारी  में काष्ठ कला



Traditional House wood Carving Art of  Jasoli , Rudraprayag         : 

गढ़वाल, कुमाऊँ के भवन (तिबारी, निमदारी, बाखली,जंगलेदार  मकान, खोलियों ) में पारम्परिक गढवाली शैली की काष्ठ कला अलंकरण उत्कीर्णन  अंकन-509 

 

 

 संकलन - भीष्म कुकरेती

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 जखोली के ा प्रस्तुत भवन दुपुर व दुखंड है , तल मंजिल में वर्तमान में  भंडार कक्ष हैं व पहले गौशाला कक्ष  रहे होंगे ।  भवन की तिबारी पहले तल ंव स्थापित है।  तिबारी चार सिंगाड़ों  (  स्तम्भों ) की तिबारी है।  स्तम्भ सपाट  व ज्यामितीय कटान से निर्मित चौखट  सिंगाड़  हैं।  आधार में भी ज्यामितीय कटान   आकृति चौखट की ही है।   व लगता है शीर्ष /मुरिन्ड /मथिण्ड की कड़ी भी सपाट चौखट की कड़ी ही है।

निष्कर्ष निकलता है कि  प्रस्तुत जसोली के प्रस्तुत भवन में काष्ठ कला ज्यामितीय कटान की है। 

 

सूचना व फोटो आभार:  अरविन्द भट्ट

  * यह आलेख भवन कला संबंधी है न कि मिल्कियत संबंधी, भौगोलिक स्तिथि संबंधी।  भौगोलिक व मिलकियत की सूचना श्रुति से मिली है अत: अंतर  के लिए सूचना दाता व  संकलन  कर्ता उत्तरदायी नही हैं . 

  Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021   

  रुद्रप्रयाग , गढवाल   तिबारियों , निमदारियों , डंड्यळियों, बाखलीयों   ,खोली, कोटि बनाल )   में काष्ठ उत्कीर्णन कला /अलंकरण ,

 

Traditional House Wood Carving Art (Tibari) of Garhwal , Uttarakhand , Himalaya ; Traditional House wood Carving Art of  Rudraprayag  Tehsil, Rudraprayag    Garhwal   Traditional House wood Carving Art of  Ukhimath Rudraprayag.   Garhwal;  Traditional House wood Carving Art of  Jakholi, Rudraprayag  , Garhwal, नक्काशी, जखोली , रुद्रप्रयाग में भवन काष्ठ कला,   ; उखीमठ , रुद्रप्रयाग  में भवन काष्ठ कला अंकन,  उत्कीर्णन  , खिड़कियों में नक्काशी , रुद्रप्रयाग में दरवाज़ों में उत्कीर्णन  , रुद्रप्रयाग में द्वारों में  उत्कीर्णन  श्रृंखला आगे निरंतर चलती रहेंगी

Bhishma Kukreti

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गंगी ( घनसाली , टिहरी ) के एक   भवन में पारम्परिक गढवाली शैली की काष्ठ  कला, अलकंरण, उत्कीर्णन, अंकन
 

Traditional House Wood Carving Art of, Gangi ,  Tehri   

गढ़वाल, कुमाऊँ,  भवनों (तिबारी, जंगलेदार निमदारी, बाखली, खोली, मोरी, कोटिबनाल ) में पारम्परिक गढवाली शैली की काष्ठ  कला, अलकंरण, उत्कीर्णन, अंकन- 510   



संकलन - भीष्म कुकरेती 

 टिहरी के सीमान्त गाँव  गंगी गाँव  से   काष्ठ युक्त कुछ भवनों की सूचना मिली है।  आज शिव सिंह रौथाण  द्वारा भेजी सूचना पर चर्चा होगी।

गंगी गाँव का प्रस्तुत भवन  दुपुर व दुखंड है।  पहले तल में  तिबारी नुमा संरचना स्थापित है।  इस तिबारी में तीन सिंगाड़ ( स्तम्भ ) दृष्टिगोचर हो रहे हैं।  प्रत्येल सिंगाड़   की कला कृति आम गढ़वाली तिबारी सिंगाड़ /स्तम्भ में कलाकृति  जैसे है -  अधोगामी कमल दल , ड्यूल व फिर उर्घ्वगामी पद्म दल व ऊपर पुनः दोहराव।  ऊपरी उर्घ्वगामी पद्म दल के ऊपर स्तम्भ थांत  आकृति लिए है।  शीर्ष में तोरणम (मेहराब ) स्थापित हैं।  तोरणम के स्कन्धों में बेलबूटों का अंकन हुआ है। ऊपर चौखट  शीर्ष की कड़ी में भी अंकन हुआ है। शीर्ष में दीवारगीर भी हैं। 

  काष्ठ कला व अंकन उत्कृष्ट प्रकार का है।  प्राकृतिक व ज्यामितीय  अलंकरण का उदाहरण इस भवन में मिलता है। 

 

  सूचना व फोटो आभार: शिव सिंह रौथाण     

यह आलेख कला संबंधित है , मिलकियत संबंधी नही है I   भौगोलिक स्तिथि और व भागीदारों  के नामों में त्रुटि   संभव है I 

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020

गढ़वाल, कुमाऊं , देहरादून , हरिद्वार ,  उत्तराखंड  , हिमालय की पारम्परिक भवन  (तिबारी, जंगलेदार निमदारी  , बाखली , खोली , मोरी कोटि बनाल ) काष्ठ  कला  , अलकंरण , अंकन लोक कला  घनसाली तहसील  टिहरी गढवाल  में   पारम्परिक भवन काष्ठ कला  ;  टिहरी तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला , ;   धनौल्टी,   टिहरी गढवाल  में  पारम्परिक  भवन काष्ठ कला, लकड़ी नक्काशी ;   जाखणी  तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला;   प्रताप  नगर तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला, नक्काशी ;   देव प्रयाग    तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला, ; Traditional House Wood carving Art from  Tehri;

Bhishma Kukreti

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 नेलंग (हरसिल , उत्तरकाशी ) के भवन ११ में काष्ठ कला

  Traditional House wood Carving Art in  Nelong , Harsil ,   Uttarkashi   
गढ़वाल,  कुमाऊँ ,  के भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार मकान , बाखली  , खोली  , कोटि बनाल )  में पारम्पपरिक    गढवाली शैली  की    काष्ठ  कला,  अलकंरण, अंकन उत्कीर्णन - 511

 

 संकलन - भीष्म कुकरेती     
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 नेलंग (हरसिल , उत्तरकाशी ) से कई भवनों की सूचनाएं मिली हैं।  आज   नेलांग के भवन संख्या ११ की काष्ठ कला पर चर्चा होगी।   नेलंग का प्रस्तुत भवन दुपुर या ढाई पुर है व दुखंड है।  प्रस्तुत भवनपर बालकोनी पहले मंजिल पर है व बालकोनी को तख्तों से ढका गया है।  सभी तख्ते सपाट , आकर्षक व ज्यामितीय कटान से निर्मित हैं।

बालकोनी में काष्ठ कला आदि कालीन कला का उदाहरण है जबकि भवन वर्तमान का है। 

सूचना व फोटो आभार : नेलंग डॉट कौम (राणा जी )

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत हेतु . भौगोलिक ,  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

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 Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakkhali,  Mori) of   Bhatwari, Uttarkashi Garhwal,  Uttarakhand ;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakhali,  Mori) of  Rajgarhi, Uttarkashi,  Garhwal,  Uttarakhand;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakkhali,  Mori) of  Dunda, Uttarkashi,  Garhwal,  Uttarakhand ;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakhali,  Mori) of  Chiniysaur, Uttarkashi ,  Garhwal ,  Uttarakhand ;  पारम्परिक   उत्तरकाशी मकान काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन  , भटवाडी मकान   ,  पारम्परिक , रायगढी    उत्तरकाशी मकान  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन, चिनियासौड़  पारम्परिक  उत्तरकाशी मकान  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन  श्रृंखला जारी   

Bhishma Kukreti

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हरिद्वार की    प्राचीन हवेली में भवन   काष्ठ  कला


Traditional House Wood Carving Art  of  a House in  , Haridwar

 उत्तराखंड, के भवनों ( बाखली,तिबारी , निमदारी,जंगलेदार  मकान,खोली,कोटि बना  )  में  'काठ  कुर्याणौ  ब्यूंत' की  काष्ठ कला अलंकरण अंकन - 513 

 

 संकलन - भीष्म कुकरेती 

 हरिद्वार में देहरादून व उधम सिंह नगर जैसे ही भवन निर्माण में तब्दीलियां आयीं व प्राचीन भवनों की कोई सूचना अब नहीं मिलती हैं।  कभी कभार सोशल मीडिया के सदस्य फोटो साझा कर देते हैं।  ऐसे ही  ब्रिटिश काल में  निर्मित हवेली  का   छायाचित्र  की सूचना मिली।  हवेली कई तरह  की भित्ति चित्र व चित्रांकनों हेतु प्रसिद्ध है। 

  हवेली की कला पर चर्चा आवश्यक है।  चूँकि यह लेखक भवन काष्ठ कला में ही सीमित है तो इस प्राचीन भवन की काष्ठ कला पर ही चर्चा होगी।

भवन में खड़कियों के बाहर के स्तम्भ लकड़ी या पेरिस प्लास्टिक के हैं की सूचना नहीं है।  कला दृष्टि में  ये स्तम्भ आम गढ़वाली तिबारियों के स्तम्भों जैसे ही हैं।  अर्थात आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल , मध्य में ड्यूल व ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल व ऊपर पुनः इनका दोहराव है। 

खड़िकियों के स्तम्भों के मध्य तोरणम /मेहराब /Arch  निर्मित हैं।  निम्न तोरणम जो लकड़ी का लगता है में  स्कन्धों में बिलकुल गढ़वाली तिबारियों के तोरणम स्कंध जैसे ही सूरज मुखी पुष्प उत्कीर्ण हुए हैं।  खिड़की के छाजों /झरोखों के नीचे ज्यामितीय कटान के तख्तों से ढके हैं।  खड़कियन के मध्य प्लेट भी सपाट लकड़ी के ही हैं।

 आश्चर्य कि  इस ओर कोई मूर्ति , देव मूर्ति नहीं दिखाई दे रही है। 

 

सूचना व फोटो आभार: अरविन्द शर्मा 

यह आलेख कला संबंधित है , मिलकियत संबंधी नही है I   भौगोलिक स्तिथि और व भागीदारों  के नामों में त्रुटि   संभव है I 

 

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नैनीताल के एक भवन में  कुमाऊं शैली की  काष्ठ कलाअंकन,अलंकरण, उत्कीर्णन

   Traditional House Wood Carving Art in Nainital; 
   कुमाऊँ, गढ़वाल, केभवन ( बाखली,तिबारी,निमदारी, जंगलादार मकान,  खोली, )  में कुमाऊं शैली की  काष्ठ कलाअंकन,अलंकरण, उत्कीर्णन  - 514

संकलन - भीष्म कुकरेती

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 नैनीताल जनपद से कई  काष्ठ कला युक्त भवनों  की अच्छी संख्या में सूचना मिली हैं।  आज इसी क्रम में नैनीताल के एक भवन में काष्ठ कला की चर्चा होगी।

प्रस्तुत भवन बाखली शैली का दुपुर व दुखंड  भवन है जो  बाखली से बहुत छोटा है।  काष्ठ कला विश्लेषण हेतु निम्न भागों पर ध्यान देना है।

 भवन के  तल मंजिल में  दो कक्षों के द्वारों में काष्ठ कला है।  द्वारों के स्तम्भ के आधार में उलटे कमल दल , ऊपर ड्यूल व ऊपर सीधे कमल दल का अंकन हुआ है व पुनः ऊपर इसका दोहराव हुआ है।  कक्ष के ऊपर कोई तोरणम नहीं है अपितु मथिण्ड /मुरिन्ड /शीर्ष सपाट कड़ी से निर्मित हुआ है।

   खोली प्रथम तल से पहली मंजिल तक है व खोली के सभी स्तम्भों में विवरण किये  कक्षों के स्तम्भों जैसे ही कलयुक्त हैं।  इसी तरह भवन के छाजों के स्तम्भों में काष्ठ कला प्रदर्शित हो रही हैं। 

 खोली व  पहले मंजिल में दो छाजों के शीर्ष में एक ही प्रकार की कला वाले तोरणम  /मेहराब निर्मित हैं।  तोरणमों में प्राकृतिक अलंकृत उत्कीर्णन हुआ है किन्तु छायाचित्र में ठीक से दृष्टिगोचर नहीं हो रहा है। 

निष्कर्ष निकलता है नैनीताल के प्रस्तुत भवन में ज्यामितीय कटान व प्राकृतिक अंकरण की काष्ठ कला विद्यमान है।  काष्ठ उत्कीर्णन उत्कृष्ट व महीन है।   

सूचना व फोटो आभार: सुमन जोशी

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अल्मोड़ा के भवन संख्या  १५ के द्वार में  काष्ठ कला

Traditional House Wood Carving art  in , Almora, Kumaon   
 

कुमाऊँ ,गढ़वाल, के भवन  में ( बाखली ,तिबारी, निमदारी ,जंगलादार  मकान  खोली,  कोटि बनाल )   कुमाऊं की    ' काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन -515   

 

 संकलन - भीष्म कुकरेती
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प्रस्तुत अल्मोड़ा के भवन संख्या का द्वार ब्रिटिश काल में उत्तराखंड का आम द्वारों का स्मरण दिलाता है।  प्रस्तुत द्वार भवन के तल मंजिल के कक्ष का द्वार है।  दोनों द्वारों में ज्यामितीय कटान के सपाट कड़ियों व (पटिलों )  तख्तों  का प्रयोग हुआ है। 

इस तरह पाते हैं कि अल्मोड़ा बजार में  प्राप्त भवन संख्या १४ के द्वार में ज्यामितीय कटान की कला विद्यमान है। 

सूचना व फोटो आभार :  गजेंद्र बिष्ट संग्रह

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

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