Author Topic: Kumaoni Khadi Holi Exclusive Collection-कुमाऊंनी खड़ी होली संग्रह, अल्मोड़ा से  (Read 43730 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी
कहाँ से आयो कुवर कन्हैया!

हरी सिर धरे मुकुट खेले होरी
कहाँ से आयो कुवर कन्हैया!
कहाँ से राधा गोरी ! हरी सिर०
मथुरा से आयो कुंवर कन्हैया !
गोकुल से राधा गोरी ! हरी सिर०
कितने बरस को कुंवर कन्हैया !
कितने बरस की राधा गोरी ! हरी सिर०
बारह बरस को कुवर कन्हैया !
सात बरस राधा गोरी ! हरी सिर०
काही बरन कुंवर कन्हैया !


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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जिसके आँगन में होली गाई जाती है, उस घर का मुखिया गुड़ की भेली तोड़ कर सबको गुड़ देता है। अन्त में सब मिल कर आशीश देते हैं-

‘जो नर जीवें खेले फाग,
 हो हो होलकी रे।
 आज को बसन्त कैका घर,
आज को बसन्त … जी का घर’ आदि

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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This is Khadli Holi about Sita ji.
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सारे शहर सीता जागो रसिया!
सारे शहर जागे रसिया !
जब रसिया अंगना पार आवे!
भूकत है दुश्मन कुतिया ! सारे शहर जागे रसिया .........
जब रसिया दलिया पार आवे!
खांसत है दुश्मन बुढ़िया - सारे शहर जागे रसिया !
जब रसिया केवडा पर आये!
सौतन है दुश्मन केवडा .. सारे शहर जागे रसिया !
जब रसिया पलंग पर आये!
छनकत है दुश्मन चूड़ियाँ .. सारे शहर जागे रसिया !
जब रसिया माथ पर आवे!
छलकत है चूडिया... सारे शहर जागे रसिया !
सारे शहर सीता जी को रसिया!
जय कृष्ण कैन्हैया लाल की जय..



(coypright merapahdforum.com

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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ब्रज मंडल देश देखो रसिया
 ब्रज मंडल देश देखो रसिया

 तेरे ब्रज में गाय बहुत,
पी पपी दूध भई पठियाँ 
ब्रज मंडल... 
तेरे ब्रज में धान बहुत,
फटक नारी कूटे रसिया !
ब्रज मंडल!
तेरे ब्रिज में गीत बहुत है,
गावे नारी सुने रसिया !
ब्रज मंडल!

CA. Saroj A. Joshi

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आयो नवल बसंत सखी ऋतुराज कहावै !
पुष्प कलि सब फूलन लागे , फूलही फूल सुहाये
कामिनी के मन मंजरी फूलै, उन बिच श्याम सुहाये .
सखी बेणी माधव आये ,
आयो नवल बसंत .....
 (पारंपरिक )

हेम पन्त

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Bahut badhiya Joshi jyu..

kuchh aur ho jaayein!!!!

CA. Saroj A. Joshi

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दधि लूटो नन्द को लाल
बेचन ना जाइयो ...  II.दधि  लूटो II
कहाँ के तुम , ग्वाल गुजरिया
कहाँ  दधि बेचन जाय   ---- बेचन ना जाइयो  I  दधि ....... I .
मथुरा के हम, ग्वाल गुजरिया,
गोकुल बेचन जाय -----------बेचन ना जाइयो  I  दधि लूटो ....I 
कौन रजा के , ग्वाल गुजरिया ,
कौन लला दधि खाय ----------बेचन ना जाइयो   I  दधि लूटो.... I
कंस रजा के , ग्वाल गुजरिया ,
कृष्ण लला दधि खाय ----------बेचन ना जाइयो   I  दधि लूटो ....I
दूध दही सब,  खाय लियो है,
मटकी देहो फोड़ ---------------बेचन ना जाइयो    I  दधि लूटो .....I
दधि मेरो खाय , मटकी मेरी फोड़ी ,
ना हक़ रार मचाय -------------बेचन ना जाइयो    I दधि लूटो .......I
जय पुकारू , कंस राजा  को ,
त्वे डारु मरवाय ----------------बेचन ना जाइयो    I दधि लूटो ........I
जाय पुकार , जहाँ तोही भावे,
मै का की परवाई ----------------बेचन ना जाइयो,   I  दधि लूटो ......I
कंस को मारू, कंसासुर  मारू ,
तब यशोदा को  लाल -------बेचन ना जाइयो           I  दधि लूटो.... I 
दधि लूटो नन्द के लाल ---बेचन जा जाइयो            I  दाढ़ी लूटो  I


CA. Saroj A. Joshi

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तेरो हरियो पंख मुख लाल  सुवा , बोलिया  जन बोले बागा में,   I   तेरो हरियो पंख I
 बोलिया  जन बोले बागा में,                                            I   तेरो हरियो पंख I
कहाँ  से आये बदल रेखा , कहाँ  भयो घनघोर सुवा     -------------बोलिया......I
पूरब  से आये बदल रेखा , पश्चिम भयो घनघोर सुवा   ------------बोलिया......I
घन- घन गरजे बदल रेखा , रिमझिम बरसे मेघ सुवा  ------------बोलिया......I
इत जन बरसे , उत जन बरसे , पिया गए परदेश सुवा  ------------बोलिया......I
काहे को भीगे सिर कि चुनरिया , कहे कि मलमल पाग  सुवा -----बोलिया......I 
मेरी जो भीगे सिर कि चुनरिया, सय्याँ के मलमल पाग सुवा ------बोलिया......I 
कहा सुकाऊं सिर की चुनरिया , कहा बलम की पाग सुवा      ------बोलिया......I 
धुप सुखाऊं सिर की चुनरिया , छाया पिया की पग सुवा      ------बोलिया......I
काहे के हाथ पतिया लिख भेजूं , काहे के हाथ  सन्देश सुवा   ------बोलिया......I
कागा के हाथ पतिया लिख भेजूं , पंछी के हाथ सन्देश सुवा   ------बोलिया......I
काहे फाड़ी के कागज बनाऊ, काहे पोछि के स्याही सुवा        ------बोलिया.......I
आँचल फाड़ी के कागज बनाऊ, कजरा  पोछि के स्याही सुवा------बोलिया........I
तेरो हरियो पंख मुख लाल  सुवा , बोलिया  जन बोले बागा में I

CA. Saroj A. Joshi

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हाँ हाँ हाँ  मोहन गिरधारी             II हाँ हाँ हाँ मोहन  ... II 
ऐसो   अनाड़ी चुनर गयो फाड़ी
ओ हो हंसी हंसी दे गयो गारी ,
मोहन गिरधारी                         II हाँ हाँ हाँ मोहन  ... II  I
चीर चुराय कदम चढ़ी बैठ्यो ,
पातन जाय छिपोई ,
मोहन गिरधारी                         II हाँ हाँ हाँ मोहन  ... II
बांह पकड़ मोरी अंगुली मरोड़ी,
नाहक रार मचाय,
मोहन गिरधारी                        II हाँ हाँ हाँ मोहन  ... II
दधि मेरो खाय मटकी मेरी तोड़ी
हसी हसी दे गयो गारी
मोहन गिरधारी                         II हाँ हाँ हाँ मोहन  ... II
जमुना के तट पर बंसी के बट पर ,
अंगियां भिगागयो सारी
मोहन गिरधारी                        II हाँ हाँ हाँ मोहन  ... II
आवन कह गए अजहु न आवै
झूठी प्रीत लगायी  ,
मोहन गिरधारी                        II हाँ हाँ हाँ मोहन  ... II
सांवल रूप अहीर को छोरो
नैनन की छवि न्यारी
मोहन गिरधारी                        II हाँ हाँ हाँ मोहन  ... II

CA. Saroj A. Joshi

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तुम सिद्धि करो महाराज , होलिन के दिन में
तुम बिघ्न हरो महाराज , होलिन के दिन में
गणपति गौरी महेश मनाऊं,
इन सबको पूजूं आज , होलिन के दिन में ---II  तुम सिद्धि करो ...II
ब्रह्मा, विष्णु महेश मनाऊं
इन सबको पूजूं आज , होलिन के दिन में ----II  तुम सिद्धि करो ...II
राम, लक्ष्मण ,भरत, शत्रुघ्न ,
दशरथ के सरताज , होलिन के दिन में --------II  तुम सिद्धि करो ...II
जगदम्बा नव दुर्गा  देवी
अशुरण करे संहार , होलिन के दिन में ----------II  तुम सिद्धि करो ...II

 

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