Author Topic: Lokoktiyon main Uttarakhand ka Atit,लोकोक्तियों में उत्तराखंड का अतीत  (Read 12821 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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अकल का टप्पु, सरमा बोझा घोड़ा मां अफु।
★सौण मरि सासू, भादो आयां आंसू।
★जु नि धोलो अफड़ो मुख, उक्या देलो हैका तैं सुख।
★ पढ़ाई लिखाई बल जाट, अर 16 दुनी आठ ।
★बिरालु मरयूं सबुन देखी, दूध खत्युँ कैन नि देखी ।
★ भिंडि बिराल्युं मा मुसा नि मरियेंदन।
★जै गौ जाण ही नी, वे गौं कु बाठु क्या पूछण ।
★मैं राणी, तू राणी, कु कुटलु, चीणा दाणी ।
★पठालु फ़ुटु पर ठकुराण नी उठु

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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★जख कुखड़ा नि होन्दा, तख रात नि खुल्दी ★बिगर अफ़ु मरयां, स्वर्ग नि जयेन्दु ।
★पैंसा नि पल्ला, दुई ब्यो कल्ला ।
★एक कुंडी माछा, नौ कुंडी झोल ।
★गोणी अपड़ु पुछ छोटु ही दिख्येन्दु ।
★सासु बोल्दी बेटी कू , सुणान्दी ब्वारी कू ।

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★फाडू मुंड, अफ़ु नि मुंड्येन्द ।
★लुखु की साटि बिसैंई, म्यारा चौंल बिसैंई ।
★हाथा की त्येरी, तवा की म्यरी ।
★कखी डालु ढली, खक गोजु मारी ।

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★जन मेरी गौड़ी रमाण च, तन दुधार भी होन्दी ।
★स्याल, कुखड़ों सी हौल लगदु त बल्द भुखा नि मरदा क्या ?
★मेंढकुं सी जु हौल लगदु त लोग बल्द किलै पाल्दा ?
★बुडीड पली ही इदगा छै, अब त वेकु नाती जु हुवेगी ।
★हैंका लाटु हसान्दु च, अर अपडु रुवान्दु च ।

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बाखुरी कु ज्यू भी नि जाऊ, बाग भी भुकु नि राऊ ।
★लौ भैंस जोड़ी, नितर कपाल देन्दु फ़ोड़ी ।
★जख मेल तख खेल, जख फ़ूट तख लूट ।
★जाणदु नि च बिछी कु मंत्र, साँपे दुली डाल्दु हाथ ।
★ तू ठगानी कु ठग, मी जाति कु ठग ।

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 ठुलो गोरू लोण बुकाओ , छोटु गोरू थोबड़ु चाटु।
★लूण त्येरी व्वेन नी धोली , आंखा मीकु तकणा।
★ भुंड न बास, अर शरील उदास ।
★भिंडि खाणु तै जोगी हुवे अर बासा रात भुक्कु ही रै । ★अपड़ा जोगी जोग्ता , पल्या गौं कु संत ।

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बिराणी पीठ मा खावा, हग्दी दाँ गीत गावा ।
★ पैली खयाली खारु, फ़िर भाडा पोछणी ।
★ ब्वारी खति ना... , सासु मिठौण लग्युं... ।
★ खाँदी दाँ गेंडका सा, कामों दाँ मेंढका सा । (कामों दाँ आंखरो-कांखरो, खाँदी दाँ मोटो बाखरो ।)
★ खायी ना प्यायी, बीच बाटा मारणु कु आयी ।
★बांटी बूंटी खाणि गुड़ मिठै, इखुलि इखुलि खाणि गारे कटै।
★भग्यानो भै काल़ो, अभाग्यू नौनू काल़ो।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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नोनियाल की लाईं आग , जनाना को देखुयुँ बाघ
★जै बौ पर जादा सारू छौ वे भैजी भैजी बुन्नी
★बाग गिजी बाखरी बिटि, चोर गिजी काखड़ी बिटि ।
★ म्यारू नौनु दूँ नि सकुदु , २० पता ख़ूब सकुदु ।
★धुये धुये की ग्वरा, अर लगै लगै की स्वरा नि होन्दा ।
★कौजाला पाणी मा छाया नि आन्दी ।
★अपड़ा लाटा की साणी अफु बिग्येन्दी ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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 बड़ी पुज्यायी का भी चार भांडा, छोटी पुज्यायी का भी चार भांडा ।
★ अपड़ा गोरुं का पैणा सींग भी भला लगदां ।
★ साग बिगाड़ी माण न, गौं बिगाड़ी रांड न ।
★ कोड़ी कु शरील प्यारु, औंता कु धन प्यारु ।
★जन त्येरु बजणु, तन मेरु नाचणु ।
★ ना गोरी भली ना स्वाली ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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★राजौं का घौर मोतियुं कु अकाल ।
★जख मिली घलकी, उखी ढलकी ।
★ भैंसा का घिच्चा फ्योली कु फूल ।
★ सब दिन चंगु, त्योहार कु दिन नंगु ।
★ त्येरु लुकणु छुटी, म्यरु
भुकण छुटी ।
★कुक्कूर मा कपास और बांदर मा नरियूल ।
★ सारी ढेबरी मुंडी माँडी , अर पुछ्ड़ी दाँ न्याउँ (म्याउँ) ।

 

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