Author Topic: Maroj Festival celebrated in Jaunsar Uttarakhand-मरोज त्योहार जौनसार-बावर  (Read 3604 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Dosto,

Jaunsar Valley (Uttarkashi) uttarakhand is famous for its unique cultural heritage. Maroj is a festival which is celebrated by
Jaunsar-Rawain-Jaunpur community. Maroj festival falls in the month of Magh.

The traditional sacrificial ceremony is followed by traditional songs and dance by the members of the community around a bonfire. They also savoure the locally prepared traditional drink called “ghani sur”, which reminded them of the tradition followed at their homes in the villages situated around Mussoorie and far beyond. 

CULTURAL IMPORTANCE :-

During the Mahabharata, after Dushasana pulled the saree of Draupadi, she vowed not to tie her hair till she washed it with the blood of Dushasana. The sacrifice of the goat was symbolic of the slaying of Dushasana. The women of the community on this day observe a fast and keep their hair untied until the goat is sacrificed.


M S Mehta

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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News about Maroj Festival.
माघ पर्व के जश्न में डूबा जौनसार-बावर


जागरण प्रतिनिधि, त्यूणी: समूचा जौनसार-बावर शुक्रवार को मरोज व माघ पर्व के जश्न में डूब गया। परंपरानुसार मरोज त्योहार पर बकरे काटने के बाद घर-घर में दावतों का दौर शुरू हो गया है। लोगों ने पर्व के शुरू होते ही एक दूसरे की खूब मेहमाननवाजी की। वहीं लोगों ने पंचायती आंगन में हारुल व लोक गीतों पर जमकर तांदी नृत्य किया।
अनूठी संस्कृति के लिए देशभर में विख्यात जनजाति क्षेत्र जौनसार-बावर में हर साल मनाए जाने वाला माघ पर्व व मरोज त्योहार शुक्रवार को बकरे काटने की परंपरागत रस्म के साथ शुरू हो गया। महीनेभर चलने वाले इस त्योहार पर हर गांव में घर-घर पर एक दूसरे को दावत देने दौर शुरू हो गया है। मेहमाननवाजी को मशहूर समूचा जौनसार-बावर इन दिनों माघ पर्व व मरोज त्योहार का जश्न मना रहा है।
क्षेत्र में हजारों की संख्या में मरोज के बकरे काटने के बाद लोगों ने गांवों के पंचायती आंगन में ढोल-दमाऊ की थाप पर हारुल व लोक गीतों पर पारंपरिक तांदी-नृत्य किया। माघ पर्व के जश्न में बूढ़े क्या जवान, महिलाएं व पुरुषों ने पंचायती आंगन में सामूहिक नृत्य कर समा बांधा। माघ पर्व पर दावतों का दौर शुरू होने से ग्रामीणों ने एक दूसरे को अपने-अपने घर पर दावत का न्योता देकर बुलाया और जमकर खातिरदारी की। बता दें कि जौनसार-बावर में मरोज के बकरे कटने के बाद पूरे महीने माघ पर्व जश्न मनाने की परंपरा है। सदियों से चली आ रही ये परंपरा क्षेत्र में आज तक कायम है। (http://www.jagran.com)



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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The tradition was also believed to have started in the period when no cultivation was possible in winters due to heavy snowfall in the region. The farmers on the advent of the chilly month of January would slaughter goats before the deity and feast on it. Kharkai said the goats were slaughtered one day before the advent of the Magh month, and given winter the flesh remained good for the entire month.

The goats are sacrificed in front of the Bhairon Devta temple amidst sounds of drumbeats. Once slaughtered, the goats are taken home and the meat is cut into pieces, which is locally called ‘banta’. Then it is wrapped in papers to be sent to the married daughters.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Women in traditional attire at the inauguration of the Maroj Festival in Mussoorie







Artistes present
a traditional Jaunsari  dance
(source tribune.com)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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लागो तौसों दो तरो.जागरण प्रतिनिधि, चकराता: इन दिनों जौनसार बावर एक माह तक मनाए जाने वाले माघ मरोज पर्व के रंग में रंगा हुआ है। हर गांव के पंचायती आंगन में सामूहिक लोकनृत्य की धूम चल रही है, तो घरों में भी जश्न व दावतों का दौर चल रहा है। लोक संस्कृति की अनूठी छटाएं हर तरफ दिखाई दे रही हैं। कालसी ब्लॉक के कोटा डिमऊ गांव में पर्व के हर रंग दिखाई दे रहे हैं।




जौनसार बावर के प्रमुख त्योहार माघ मरोज की धूम इन दिनों क्षेत्र के 359 राजस्व गांव व 200 मजरों में बसे करीब 16 हजार परिवारों में देखी जा रही है। हर गांव में माघ पर्व पर जश्न है। बाहर नौकरी व व्यवसाय करने वाले लोग भी पैतृक गांव आकर पर्व का आनंद उठा रहे हैं। सगे संबंधी दावतों में शामिल होकर खुश हैं। इससे हर गांव में रौनक है। 11 जनवरी से शुरू माघ मरोज पर्व के तीसरे दिन कोटा डिमऊ गांव में जहां दिन भर सामूहिक लोक गीतों व नृत्यों की धूम रही। वहीं रात को गायण में लोग जमकर थिरके।
पंचायती आंगन में पुरुषों ने लागो तौसों दो तरो.., मईपूरिया ले कुणब.., मिनके बामोटे लाले..गीतों पर खूब झूमे, महिलाओं ने झैंता, रासौ व बिजूरी लोकनृत्यों से समा बांधा। हर परिवार में एक दूसरे को बुलाकर दावतों का दौर चला। कई घरों में गांव के लोगों ने गायण लगाकर नाटियां ठुडू बैणी, दूनिया, सुपनी जैसे पुराने गीत गाए।
वहीं कालसी ब्लॉक के कोटा-डिमऊ गांव में मरोज की रात को स्याणा के घर रात भर गायण लगाकर लोग नाचते रहे। पूरे गांव के पुरुष, महिलाएं जमा होकर पौराणिक गीत हारूल, नतराम, हुमके व ठुडू से खूब समा बांधा।
साजे की धूम
मरोज में गांवों में साजे पर्व की धूम रही। कोटा डिमऊ गांव में लोग हर घर जाकर भोज करने के साथ ही नाचते गाते रहे। पौराणिक गीत छौडे, भारत व सिलौग भी सुनाई दिए।
संक्राति पर्व भी मनाया
मरोज पर्व के तीसरे दिन लोगों ने संक्राति पर्व को धूमधाम से मनाया। पंचायती आंगन में हारूल, झेता, रासौ की धूम रही। मेहमानों को मांसाहारी भेज परोसा गया। एक दूसरे को गले मिल कर बधाई दी। हास्य गीतों व नृत्यों का दौर भी चला।

http://www.jagran.com/uttarakhand/dehradun-city-10035740.html

 

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