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  • देवीधूरा की बग्वाल: August 02, 2012

Author Topic: Stone Pelting: Devidhura Fair - देवीधूरा की बग्वाल: आधुनिक युग में पाषाण युद्ध  (Read 52004 times)

Anil Arya / अनिल आर्य

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भगदड़ से घायलों के इलाज में दिक्कत
देवीधुरा। मां बाराही धाम में शनिवार को हुए पत्थर युद्ध में सबसे अधिक लमगड़िया एवं वालिक खामों के लोग चोटिल हुए। मंदिर परिसर में बनी दर्शक दीर्घा में बैठे लोग भी जख्मी हुए। एक दर्जन से अधिक महिलाएं भी चोटिल हुईं हैं। यहां लोगों के नजदीक से बग्वाल का नजारा देखने की उत्सुकता उन्हें लगातार भारी पड़ती जा रही है। कुछ वर्षों से यहां दर्शक दीर्घा में चोटिल होने का सिलसिला शुरू हो गया है।
बग्वाल समाप्त होने के बाद अपने परिजनों की स्थिति जानने के लिए लोग प्राथमिक उपचार स्थल में दौड़ने लगे जिससे भगदड़ की स्थिति पैदा होने के साथ चिकित्सकों को उपचार करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वालिक खाम से बग्वाल खेल रहे उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष राम सिंह कैड़ा एवं वालिक खाम के प्रमुख बद्री सिंह बिष्ट घायलों में शामिल हैं।
घायलों के परिजनों द्वारा जल्द इलाज कराने के आग्रह के चलते सांस्कृतिक मंच में बने अस्थायी चिकित्सा शिविर में अफरा-तफरी मची। मेला कमेटी के संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया एवं सामाजिक कार्यकर्ता राजू बिष्ट, मेला संयोजक विनोद गड़कोटी, भाजयुमो के कार्यकर्ता एलडी जोशी, दिनेश चम्याल, त्रिभुवन चम्याल, गौरव सिंग्वाल आदि ने स्थिति को नियंत्रित करने के साथ व्यवस्था बनाने में सहयोग किया।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा.एचएस पांगती के नेतृत्व में डिप्टी सीएमओ डा.आरके जोशी, डा.प्रदीप बिष्ट, डा.आरडी भट्ट, डा.निशिकांत, डा.केआर सौन, बहादुर फिरमाल, योगेश कनौज्जिया, अनिल वर्मा, एमसी जोशी आदि ने घायलों का उपचार किया।
सीएमओ के अनुसार घायलों का सांस्कृतिक मंच एवं चिकित्सालय में इलाज किया।
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Anil Arya / अनिल आर्य

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•देवीधुरा में इस बार गिद्ध नहीं दिखाई दिए। अलबत्ता देवी को दी गई अठवार में दी गई भैंसे की बलि के बाद यहां वातावरण में सड़ांध थी।
•मेले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्वयं पुलिस अधीक्षक व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए पुलिस कर्मियों को दिशा निर्देश दे रहे थे। इस कार्य में जीआईसी के स्काउट-गाइड एवं संस्कृत महाविद्यालय के एनएसएस स्वयंसेवक भी मददगार बने।
•चारों खामों के रणक्षेत्र में पहुंचने से पूर्व ही कुछ युवकों ने बग्वाल शुरू कर दी। जिससे कुछ दर्शक चोटिल हुए। बग्वाल में घायल ऐसे तमाम लोग भी शामिल थे, जिन्होंने शराब पीकर बग्वाल खेली थी।
•मंदिर की दूसरी मंजिल में विशिष्ट अतिथियों के लिए व्यवस्था की गई थी। मगर भारी भीड़ ने सारी व्यवस्थाओं को ठेंगा दिखा दिया। यहां तक कि पत्रकारों के लिए की गई सारी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गईं।
•विदेशी पर्यटकों ने इस बार भी बग्वाल का लुत्फ उठाया। बग्वाल में सबसे अधिक चोटिल लमगड़िया एवं चमियाल खाम के लोग हुए। बग्वाल देखने के लिए भीड़ इतनी अधिक थी कि लोग मंदिर के गुंबद में भी चढे़ थे।
*दर्शक दीर्घा में कई बार पत्थर आने से अफरा तफरी मच गई। कई स्थानों में लोगों ने छाते को ढाल बनाया। बग्वाल में कुछ लोग पत्थर के साथ लट्ठ भी चला रहे थे।
*देवीधुरा मेले में बसों और टैक्सियों ने यात्रियों से मनमाना किराया वसूल किया गया। दिन भर मौसम सुहावना होने के कारण हल्द्वानी नैनीताल क्षेत्र से भारी संख्या में श्रृद्धालु आए हुए थे। हल्द्वानी मार्ग में छह किमी तक वाहनों की लंबी कतार लगी हुई थी।
*वारी गांव के लोग आधे वालिक एवं आधे लमगड़िया खाम से बग्वाल खेल रहे थे। तिमला गांव के बाजगिरि परंपरागत रूप से अपने वाद्य यंत्रों से बग्वाली बीरों में जोश भर रहे थे।
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सुधीर चतुर्वेदी

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देवीधुरा में दो को होगा पाषाण युद्ध
जागरण कार्यालय, लोहाघाट : देश विदेश में पाषाण युद्ध के लिए प्रसिद्ध देवीधुरा मेले को लेकर चार खाम व सात थोकों के मुखियाओं ने एलान किया है कि इस वर्ष बग्वाल 2 अगस्त को रक्षा बंधन के दिन अपराह्न 2 बजे से खेली जाएगी। बग्वाल को लेकर चारों खामों के मुखियाओं की उपस्थिति में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि पैराणिक मान्यताओं के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उत्तर भारत के ऐतिहासिक बग्वाल मेले को लेकर फैलाई जा रही भ्रातियों को लेकर मंदिर कमेटी व चार खाम सात थोकों के लोगों ने नाराजगी जताई है। पत्थर युद्ध में शामिल होने वाले चार खामों के मुखियाओं ने कहा इस बार बग्वाल में अनुशासन का विशेष ध्यान दिया जाएगा। बैठक में चम्याल खाम के मुखिया गंगा सिंह चम्याल, वालिक खाम के बद्री सिंह बिष्ट, लमगड़िया खाम के धन सिंह लमगड़िया व गहडवाल खाम के त्रिलोक सिंह बिष्ट, मंदिर कमेटी के संरक्षक पूर्व ब्लाक प्रमुख लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, अध्यक्ष लाल सिंह चम्याल, महासचिव दलीप सिंह चम्याल, सचिव मदन बोहरा, उपाध्यक्ष आंनद सिंह लमगड़िया, कोषाध्यक्ष कीर्ति जोशी, भुवन जोशी सहित कई लोगों ने विचार रखे।

इधर बग्वाल में शामिल होने वाले गांव के लोगों ने युद्ध के दौरान उपयोग में लाए जाने वाले छत्रों को सजाना संवारना शुरू कर दिया है। वहीं बग्वालियों द्वारा सात्विक भोजन शुरू कर दिया है। मेला कमेटी के लोगों ने बताया इस बार बग्वाल देखने के लिए नैनीताल हाईकोर्ट के न्यायाधीशों सहित कई गणमान्य लोगों के पहुंचने के कार्यक्रम आने लगे हैं। कमेटी के अनुसार देश विदेश से एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के बग्वाल के साक्षी बनने की संभावना है।



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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